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विशेष आर्टिकल- कृषि क्षेत्र में स्वर्णिम विकास: उत्तर प्रदेश के किसानों और योगी सरकार की उपलब्धियां

लखनऊ एक समय था जब उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' राज्य कहा जाता था, जहां कृषि क्षेत्र भ्रष्टाचार, बाढ़, सूखा और निम्न उत्पादकता से जूझता था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने 2017 से अब तक कृषि को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बना दिया। आज UP देश का 21% खाद्यान्न उत्पादन करता है, जबकि केवल 11% कृषि भूमि होने पर भी फल-सब्जी का 15% और 11% उत्पादन यहां से आता है। कृषि वृद्धि दर 13.7% (राष्ट्रीय औसत 9.5% से अधिक), GSDP में 28% योगदान और UP-AGREES प्रोजेक्ट जैसे प्रयासों से राज्य वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में अग्रसर है। PM किसान सम्मान निधि, सॉइल हेल्थ कार्ड, MSP और सोलर पैनल इंस्टॉलेशन से 1 करोड़+ किसान लाभान्वित हुए हैं। बजट 2025-26 में ₹2.25 लाख करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित, यह उत्थान PM मोदी के विकसित भारत-2047 विजन का जीवंत प्रमाण है। योगी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां: आंकड़ों में कृषि क्रांति योगी सरकार ने तकनीकी नवाचार, सिंचाई, बीमा और बाजार लिंकेज पर फोकस कर कृषि को मजबूत किया। यहां कुछ प्रमुख आंकड़े: पैरामीटर    2017 से पहले    2025 तक    वृद्धि खाद्यान्न उत्पादन (% राष्ट्रीय)    15%    21%    40%+ फल-सब्जी उत्पादन (करोड़ टन/वर्ष)    ~3.5    4+    14%+ कृषि वृद्धि दर (%)    8.6    13.7    59%+ सिंचाई परियोजनाएं (परियोजनाएं)    सीमित (बांसागर आदि अधर में)    11 एक्सप्रेसवे + 6 कार्यरत, बांसागर पूर्ण    3 गुना+ किसान सम्मान निधि लाभार्थी (करोड़)    न्यून    10 (वार्षिक)    नया आयाम फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स    सीमित    65,000+ (15 एग्रो पार्क)    10 गुना+ कृषि विश्वविद्यालय    4    5 (नया जोड़)    25%+ मुख्य पहलें: •    UP-AGREES प्रोजेक्ट (जनवरी 2025): किसानों को तकनीकी सहायता, ग्रामीण उद्यमिता – 23% खाद्यान्न योगदान। •    फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी-2023: 19 नए प्रोजेक्ट, सब्सिडी, ब्याज छूट – 1,000 यूनिट्स/जिला लक्ष्य। •    DSR Conclave 2025: सीधी बुआई से जल संरक्षण, वैश्विक खाद्य हब लक्ष्य। •    सॉइल हेल्थ कार्ड और बीमा: MSP से किसानों को न्यूनतम मूल्य। •    सिंचाई: बांसागर, सरयू नहर, मध्य गंगा नहर पूर्ण – 64,000 हेक्टेयर भूमि मुक्त। ये प्रयास कृषि GSDP को 28% बढ़ा चुके हैं, जहां UP $1 ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर अग्रसर है। लाभार्थियों की प्रेरक कहानियां: साधारण किसानों से आत्मनिर्भर उद्यमी तक योगी सरकार की योजनाओं ने लाखों किसानों को सशक्त किया। यहां कुछ वास्तविक उदाहरण: 1.    झांसी के रामू सिंह (UP-AGREES लाभार्थी):  o    पहले: सूखे से जूझते, मासिक आय ₹5,000। o    सहायता: सॉइल हेल्थ कार्ड + सोलर पैनल से ड्रिप इरिगेशन। o    अब: गेहूं उत्पादन 20% बढ़ा, ₹50,000 मासिक, परिवार की शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश। "योगी जी की तकनीक ने मेरी जिंदगी बदली।" 2.    वाराणसी की महिला SHG (DSR Conclave से प्रेरित):  o    पहले: बिचौलियों से शोषण। o    सहायता: PM किसान + MSP से न्यूनतम मूल्य, फूड प्रोसेसिंग यूनिट। o    अब: 41 महिलाएं, ₹1 करोड़ टर्नओवर, निर्यात शुरू। "सरकार ने हमें बाजार दिया।" 3.    बुलंदशहर के छोटे किसान (फूड प्रोसेसिंग लाभार्थी):  o    पहले: फसल बर्बाद। o    सहायता: एग्रो पार्क + सब्सिडी से प्रोसेसिंग यूनिट। o    अब: 100+ रोजगार, फल-सब्जी निर्यात, आय दोगुनी। "पॉलिसी-2023 ने हमें उद्यमी बनाया।" ये कहानियां साबित करती हैं कि नीतियां जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं, खासकर महिलाओं और छोटे किसानों के लिए। योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषण: कृषि पर दृष्टि CM योगी ने कृषि को 'आत्मनिर्भर UP की कुंजी' बताया: •    DSR Conclave 2025 (6 अक्टूबर): "UP 21% खाद्यान्न उत्पादन करता है। 11 वर्षों में कृषि में क्रांतिकारी बदलाव – सॉइल कार्ड, MSP, किसान सम्मान से किसान सशक्त। 2030 तक वैश्विक खाद्य हब!" •    UP-AGREES उद्घाटन (28 जनवरी 2025): *"UP 23% खाद्यान्न, 15% सब्जी उत्पादक। AGREES से किसान आत्मनिर्भर, तकनीक से तीन गुना उत्पादन।" •    8 वर्ष पूर्णता (24 मार्च 2025): *"कृषि वृद्धि 13.7% – BIMARU से ग्रोथ इंजन। 6 करोड़ गरीब ऊपर उठे।" •    कृषि भारत-2024 (15 नवंबर 2024): *"20% कृषि योगदान – जल जीवन मिशन से महिलाओं की कहानियां। लोकल से ग्लोबल!" निष्कर्ष: कृषि – UP का समृद्धि आधार योगी सरकार ने UP-AGREES, DSR Conclave और फूड प्रोसेसिंग से कृषि को उपेक्षा से उत्कृष्टता तक पहुंचाया। 21% राष्ट्रीय योगदान से UP वैश्विक खाद्य हब बनेगा। किसान, आत्मनिर्भर बनें – नया UP आपके हाथ में! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

आजम खां को राहत: अदालत ने भड़काऊ भाषण मामले में किया बरी

रामपुर  समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव आजम खां को मंगलवार को बड़ी राहत मिल गई। भड़काऊ भाषण के मामले में उन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया है। पुलिस की तरफ से उनके खिलाफ साक्ष्य नहीं दिया जा सका। इसके साथ ही कोर्ट ने विवेचक के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के लिए सपा नेता आजम खां दोपहर में कोर्ट पहुंचे, जहां सुनवाई के बाद एमपी एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सपा नेता को बरी कर दिया। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी की ओर से सपा नेता आजम खां के खिलाफ भड़काऊ भाषण का मामला दर्ज कराया गया था। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन था। इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अंतिम बहस पूरी हो चुकी थी। कोर्ट से बाहर आकर आजम खान अपने अंदाज में नजर आए। उन्होंने कहा कि बहुत कम ऐसा हुआ है कि बेगुनाह ही बेगुनाह साबित हुआ है। पुलिस ने जिस तरह से मुकदमा किया, उन्होंने सच को छुपाने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने कहा कि अगर हम इसमें बरी हुए हैं, तो इसका मतलब यह है कि हमने सभी हदें पार कीं और उस साजिश व मंसूबे बाजी के खिलाफ इंसाफ पाने में कामयाब हुए, जिसमें पूरे परिवार को मुजरिम बनाने की कोशिश की गई थी। तमाम सबूत-इलेक्ट्रॉनिक वीडियो और ऑडियो देने के बावजूद उन्हें नहीं माना गया। ज्ञात हो कि चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का है। आजम खां लोकसभा चुनाव लड़े थे और जीते भी थे। इस दौरान उनके खिलाफ चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मुकदमे दर्ज हुए थे। चुनाव के दौरान रामपुर के मिलक थाना क्षेत्र के खटानागरिया गांव में आज़म खान ने एक चुनावी सभा को संबोधित किया था। सभा में उन्होंने तत्कालीन रामपुर डीएम अन्जनेय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री योगी, प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस उम्मीदवार संजय कपूर पर कथित रूप से टिप्पणियां की थी। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि आज़म ने चुनाव आयोग को ‘भ्रष्ट’ बताते हुए मतदाताओं को ध्रुवीकरण के लिए उकसाया। 

समधन से हुआ पिता को प्यार, बहू देखने गई मुलाकात बनी ड्रामा का कारण

कौशांबी       यूपी के कौशांबी से एक चौंकाने वाला प्रेम प्रसंग का मामला सामने आया है. एक व्यक्ति अपने बेटे के लिए बहू देखने गया था, लेकिन उसे होने वाली समधन से ही प्यार हो गया. जब इस प्रेम कहानी की जानकारी परिजनों को हुई तो हंगामा मच गया और मामला सुलझाने के लिए महिला थाने पहुंचा. घंटों चली बातचीत के बाद आखिरकार दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया.  बहू की जगह समधन से लड़ी आंखें यह अजीबो-गरीब प्रेम कहानी तब शुरू हुई जब फतेहपुर जिले के खागा कोतवाली क्षेत्र का एक व्यक्ति अपने बेटे की शादी तय करने के लिए कौशांबी के महेवाघाट कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में बहू देखने गया था. लगभग तीन महीने पहले बहू देखते समय व्यक्ति की आंखें होने वाली समधन से लड़ गईं. दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और वे एक-दूसरे को प्यार करने लगे. यह मामला आगे बढ़ा तो इस प्रेम प्रसंग की भनक व्यक्ति की पत्नी को लगी.  पत्नी ने थाने में की लिखित शिकायत पति के इस व्यवहार से नाराज पत्नी का पारा चढ़ गया. जब मामला हद से ज्यादा बढ़ गया तो पत्नी ने मंझनपुर महिला थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज करा दी. शिकायत मिलने के बाद महिला थाना प्रभारी नीलम राघव और महिला आरक्षी विद्या यादव ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया. दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने का दौर कई घंटों तक चला, जिसके बाद आख़िरकार दोनों पक्ष समझौते के लिए राजी हो गए.  टूटा रिश्ता और खत्म हुआ प्रेम संबंध महिला थाने में हुए समझौते के तहत यह तय किया गया कि अब उस घर में बेटे की शादी नहीं होगी. इसके साथ ही, यह भी फैसला लिया गया कि दोनों लोग (व्यक्ति और समधन) आपस में किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं रखेंगे.  इस तरह, जहां बेटे की शादी का रिश्ता टूट गया, वहीं परवान चढ़ता यह अनोखा प्रेम प्रसंग भी पुलिस थाने में जाकर खत्म हो गया. 

योगी आदित्यनाथ बोले: जो भ्रष्टाचार करते हैं, वे राष्ट्रगान से भी कतराते हैं

बाराबंकी  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय एकता यात्रा के शुभारंभ के दौरान कहा कि कोई भी मत, मजहब या जाति राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि राष्ट्र प्रथम होना चाहिए और वंदे मातरम के विरोध को राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी बाधा बताया। योगी ने लोगों से ऐसे चेहरों को पहचानने की अपील की जो सरकारी योजनाओं का लाभ तो लेते हैं, लेकिन वंदे मातरम गाने से इनकार करते हैं। मुख्यमंत्री ने जातिवाद, परिवारवाद और क्षेत्रवाद को समाज के लिए हानिकारक बताया और कहा कि मत-मज़हब के नाम पर विभाजन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती समारोह के अवसर पर 1734 करोड़ रुपये की 254 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक और प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम भारत माता की वंदना है और इसका विरोध करने वाले वास्तव में भारत माता का विरोध करते हैं। उन्होंने बताया कि यह गीत गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्वरबद्ध किया गया और स्वतंत्रता संग्राम के समय क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। उन्होंने कहा कि इस गीत का विरोध नए भारत की राष्ट्रीयता की भावना के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष महत्वपूर्ण है क्योंकि सरदार पटेल की 150वीं जयंती, वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष, भगवान बिरसा मुंडा की जयंती तथा भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने महाकुंभ और अयोध्या में राम मंदिर के भव्य निर्माण का भी उल्लेख किया, जहां 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन का कार्यक्रम है। योगी आदित्यनाथ ने ब्रिटिश शासन की नीतियों पर कहा कि अंग्रेज भारत की एकता नहीं चाहते थे। उन्होंने बताया कि कैसे सरदार पटेल ने 563 रियासतों को भारत में सम्मिलित कर देश की अखंडता सुनिश्चित की। जूनागढ़ के नवाब और हैदराबाद के निजाम के भारत में विलय से इनकार करने पर सरदार पटेल ने सख्त रुख दिखाया, जिससे दोनों को झुकना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कुछ सेक्युलरवादियों पर निशाना साधते हुए कहा कि नवाब मोहम्मदाबाद, जो मुस्लिम लीग का कोषाध्यक्ष था, पाकिस्तान के लिए धन एकत्र करता था और बाद में भागकर पाकिस्तान चला गया। उन्होंने कहा कि ऐसी संपत्तियां ‘शत्रु संपत्ति’ हैं और इन पर केवल भारत सरकार और नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता देश की आन, बान और शान है। वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने स्वाधीनता आंदोलन के लिए अमृत मंत्र के रूप में रचा था और क्रांतिकारी इसे गाते हुए फांसी पर चढ़ जाते थे। योगी ने राष्ट्र सुरक्षा और एकता के मार्ग में व्यक्तिगत दुश्मनी या मित्रता को बाधा न बनने देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने चेताया कि देश विदेशी हमलावरों द्वारा इसलिए गुलाम हुआ क्योंकि उन्होंने भारतीयों को आपस में लड़ाया। उन्होंने कहा कि इतिहास आत्मावलोकन का अवसर देता है और उससे प्रेरणा लेकर भविष्य को सशक्त बनाना चाहिए।

CM योगी ने बाराबंकी में कसा तंज, कहा – हिंदुस्तान में रहेंगे, वंदे मातरम क्यों नहीं बोलते?

 बाराबंकी    यूपी के बाराबंकी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने वंदे मातरम का विरोध करने वालों पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा- 'कुछ लोग आज भी रहेंगे यहां, खाएंगे यहां, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करेंगे.' सीएम ने आगे कहा- 'इन चेहरों को पहचानो, जो शासकीय योजना में हड़पने की होड़ में पहली लाइन में खड़े होते हैं, लेकिन जब 'वंदे मातरम' गान की बात होती है तो कहते हैं कि हम नहीं गाएंगे.' सीएम योगी ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों के साथ अपने भाषण की शुरुआत की. इसके साथ ही उन्होंने सरदार पटेल और डॉ. आंबेडकर के योगदान को भी याद किया. सीएम ने कहा कि अंग्रेजों और मुगलों ने देश को बांटने का काम किया.   सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीतापुर की महमूदाबाद स्टेट को शत्रु संपत्ति बताते हुए कहा कि ये महमूदाबाद का नवाब (राजा) मुस्लिम लीग का कोषाध्यक्ष था. इसने पाकिस्तान बनवाने में बड़ा सहयोग दिया था. आज इसकी सारी संपत्ति शत्रु संपत्ति है.  सीएम यहीं नहीं रुके, उन्होंने सरदार पटेल की प्रशंसा करते हुए कहा कि हैदराबाद का निजाम और जूनागढ़ का नवाब अपनी स्टेट को पाकिस्तान में मिलाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने इनको समझाया तो ये लोग पाकिस्तान चले गए.  कांग्रेस पर किया वार  सीएम योगी ने आगे कहा कांग्रेस ने कभी सरदार पटेल का सम्मान नहीं किया. देश के 14 राज्यों ने कहा था सरदार पटेल को देश का प्रधानमंत्री बना दो. लेकिन इन लोगों ने नहीं बनने दिया. ये परिवार की राजनीति करने वाले लोग हैं. जातीय राजनीति, परिवार की राजनीति, मजहब की राजनीति और विभाजनकारी नीतियों जैसी बातों को कतई स्वीकार नहीं करना चाहिए.   सीएम बोले- बाराबंकी में विकास की बहाई गंगा सीएम योगी ने बाराबंकी जिले के विकास को लेकर कहा कि यहां किसान खूब तरक्की कर रहा है. हमने मेंथा की फसल में 18% जीएसटी घटाकर 5% कर दिया है. उन्होंने बाराबंकी की दरियाबाद विधानसभा के विधायक सतीश शर्मा के कहने पर रामसनेही घाट में 232 एकड़ का इंडस्ट्रियल एरिया का निर्माण कराए जाने की घोषणा की. इसके अलावा हैदरगढ़ विधानसभा के पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर विधायक दिनेश रावत के प्रस्ताव पर 100 एकड़ में इंडस्ट्रियल और स्किल डेवलपमेंट के विकास के निर्माण करवाया जाएगा. सीएम योगी का पोस्ट  अपने पोस्ट में सीएम योगी ने लिखा- 'राष्ट्रीय एकता, केवल एक शब्द नहीं, हम सभी की आन, बान और शान है, हमारा अस्तित्व है, हमारा और आने वाली पीढ़ी का भविष्य है. लौह पुरुष, 'भारत रत्न' सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की 150वीं जयंती समारोह अभियान के अंतर्गत आज जनपद बाराबंकी की विकास यात्रा को गति देते हुए ₹1,734 करोड़ लागत की 254 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. इस अवसर पर विभिन्न लोक-कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक एवं प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए. बाबा लोधेश्वर महादेव जी की पावन धरा को कोटि-कोटि नमन एवं सभी लाभार्थियों को हार्दिक बधाई.'

सुप्रीम कोर्ट की राहत: निठारी हत्याकांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को किया गया रिहा

 नई दिल्ली      निठारी कांड के सबसे चर्चित आरोपी सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी कर्वेटिव पिटीशन को स्वीकार करते हुए उनकी अंतिम सजा रद्द कर दी और उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया. यह मामला 2005-2007 के बीच नोएडा के निठारी क्षेत्र में हुई बालिकाओं की सामूहिक हत्याओं से जुड़ा है, जिसने पूरे देश को हिला दिया था. कोली पर कुल 13 मामलों में मुकदमे चले थे. इनमें से 12 मामलों में वह पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट से बरी हो चुके थे लेकिन एक मामला ऐसा बचा था, जिसमें उनकी सजा बनी हुई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि एक ही सबूत और तथ्य के आधार पर 12 मामलों में बरी हो चुके आरोपी को एक मामले में सजा देना न्याय के खिलाफ है. सुरेंद्र कोली को तुरंत रिहा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने कोली के 15 वर्षीय लड़की के बलात्कार और हत्या के मामले में पाए गए सबूतों को कमजोर मानते हुए कहा कि उनका दोष सिद्ध नहीं हो पाया. अदालत ने उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया, यदि वे किसी अन्य मामले में जेल में बंद न हों. 19 साल से जेल में बंद थे सुरेंद्र कोली कोली लगभग 19 साल तक जेल में रहे. उनकी कर्वेटिव पिटीशन को खुले कोर्ट में सुनवाई के लिए पेश किया गया था, जो कई मामलों में दुर्लभ होता है. इस फैसले के साथ निठारी कांड में उनके खिलाफ अंतिम केस भी समाप्त हो गया. कोर्ट ने कहा कि कर्वेटिव पिटीशन सिस्टम में हुई गलती सुधारने और न्याय सुनिश्चित करने का अंतिम मौका है.

गोरखपुर AIIMS में अद्भुत सफलता, बिना एनेस्थेसिया मरीज की हड्डी हुई ठीक

 गोरखपुर      क्या आप यकीन करेंगे कि किसी टूटी हड्डी की सर्जरी बिना बेहोश किए हो सकती है? एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने यही करिश्मा कर दिखाया है.  जूनियर रेजिडेंट डॉ. नीरज ने नर्व ब्लॉक तकनीक का इस्तेमाल कर एक मोटे मरीज की सर्जरी की, जबकि मरीज पूरी प्रक्रिया अपनी आंखों से देखता रहा. यह सफलता चिकित्सा जगत में नई उम्मीद लाई है.  सर्जरी के दौरान मरीज सब कुछ देखता रहा आमतौर पर टूटी हड्डी की सर्जरी के लिए मरीज को पूरी तरह बेहोश (General Anesthesia) किया जाता है. लेकिन डॉ. नीरज के शोध का विषय था कि सिर्फ नर्व ब्लॉक तकनीक का उपयोग करके हंसली के फ्रैक्चर की सर्जरी कैसे की जा सकती है. इस नई तकनीक में, डॉक्टरों ने केवल उस हिस्से की नसों को अस्थायी रूप से सुन्न किया जहां सर्जरी होनी थी. मरीज पूरी सर्जरी के दौरान जागा रहा, लेकिन उसे किसी प्रकार का दर्द महसूस नहीं हुआ.  सुरक्षित, सस्ता और तेज रिकवरी एम्स गोरखपुर की यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य एनेस्थीसिया देने पर अक्सर मोटे या गंभीर रूप से बीमार मरीजों में सांस या हृदय संबंधी जटिलताएं आ जाती हैं. यह नई नर्व ब्लॉक तकनीक इन समस्याओं से बचाती है. एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि यह तरीका सुरक्षित, सस्ता और तेज रिकवरी देने वाला है, और गंभीर मरीजों के लिए भी लक्षित एनेस्थीसिया संभव है.  राष्ट्रीय मंच पर मिला पुरस्कार डॉ. नीरज को उनकी इस उपलब्धि के लिए बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन एसटीएसीसी में पोस्टर प्रस्तुति श्रेणी में तीसरा पुरस्कार मिला है.  एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता (सेवानिवृत्त) ने इसे संस्थान के लिए गौरव बताया. यह सफलता न सिर्फ चिकित्सा जगत के लिए, बल्कि आम मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण है क्योंकि अब सर्जरी में "सुरक्षित जागरूक उपचार" संभव है.

मौलाना मदनी का विवादित बयान – वंदे मातरम इस्लाम में जायज नहीं, देवी पूजा मान्य नहीं

सहारनपुर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना को डेढ़ सौ वर्ष पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वंदे मातरम गीत को पूरा का पूरा प्रस्तुत किया जाए और उसके जिन अंशों को पूर्व में हटाया गया था, उन्हें भी उसमें शामिल किया जाए लेकिन प्रधानमंत्री की ये बातें देश के मुस्लिम जनप्रतिनिधियों और उलेमाओं को बहुत अखर रही हैं। वह इस पर खुली आपत्ति भी जता रहे हैं। पूर्व में कई जनप्रतिनिधि मोहम्मद आजम खां, शफीकुर रहमान वर्क और पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद संसद में भी इसके गायन को लेकर अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। अब फिर से यह मामला सुर्खियों में आ गया है। दूसरे की देवी देवताओं की इबादत नहीं इस बीच, पूर्व सांसद दारूल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य एवं जमीयत उलमाए हिंद के एक गुट के हाल ही में फिर से चुने गए अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने यूनीवार्ता से बातचीत में मुसलमानों की आपत्ति के बारे में दो टूक कहा कि वंदे मातरम गीत में कुछ पंक्तियां ऐसी है। जिसमें मातृभूमि को देवी दुर्गा के रूप में पेश कर उसकी पूजा वंदना के शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ईश्वर एक है, इस विश्वास को मानने वाले हैं और उसी की इबादत करते हैं। इसलिए दूसरे की देवी देवताओं की इबादत करना उनके मजहबी विश्वास के खिलाफ है। अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है मदनी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है और अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की आजादी देता है। ऐसी हालत में मुस्लिमों को पूरे वंदे मातरम गीत को गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय भी इस संबंध में अपना फैसला दे चुका है। PM मोदी ने क्या कहा? मौलाना महमूद मदनी ने बताया कि 26 अक्टूबर 1937 को गुरूदेव रविंद्र टैगोर ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को लिखे पत्र में उनसे अनुरोध किया था कि वंदे मातरम गीत की पहली दो पंक्तियों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया जाए। उसके तीन दिन बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने टैगोर की सलाह को अपनी मान्यता दे दी थी तभी से यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पूरे गीत का ही गायन किया जाए। उसे हिस्सों में तोड़कर ना गाया जाए।

सीएम योगी की अगुवाई में बही देशभक्ति की बयार, गूंजा एकता का उद्घोष

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री ने किया एकता यात्रा का शुभारंभ रास्ते भर पुष्पवर्षा के बीच हुआ मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत अगणित हाथों में लहराता रहा तिरंगा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी हुई प्रस्तुति रानी लक्ष्मीबाई, ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा और भारत माता व बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के चित्रों पर सीएम ने अर्पित की पुष्पांजलि गोरखपुर, “राष्ट्र प्रथम” की भावना में उत्साह, उमंग और उल्लास से सराबोर जनसमूह, अगणित हाथों में लहराता तिरंगा, “वंदे मातरम्” और “भारत माता की जय” के गूंजते स्वर, तथा पुष्पवर्षा की निर्बाध श्रृंखला—इन सभी ने सोमवार को गोरखपुर को देशभक्ति के एक अद्भुत दृश्य का साक्षी बना दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यह दृश्य लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में निकाली गई एकता यात्रा के दौरान देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने अपने गृह विधानसभा क्षेत्र गोरखपुर शहर से इस ऐतिहासिक यात्रा का शुभारंभ किया। नगर निगम परिसर से गीता वाटिका के पास स्थित विश्वंभर पाठक पार्क तक निकली इस यात्रा में एकता और राष्ट्रीय गर्व की भावना पूरी तरह उमड़ पड़ी। मुख्यमंत्री योगी गोलघर काली मंदिर के पास सरदार पटेल चौराहे तक स्वयं पदयात्रा में भी सम्मिलित हुए। यात्रा का शुभारंभ करने से पहले मुख्यमंत्री ने नगर निगम परिसर में अपने गुरुदेव राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन अवेद्यनाथ जी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके पश्चात नगर निगम पार्क में रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर प्रथम स्वातंत्र्य समर की वीरांगना को नमन किया। मंच पर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने भारत माता और “वंदे मातरम्” के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के चित्रों पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।      मंच से अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल और “वंदे मातरम्” से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से जनसमूह का मार्गदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने नगर निगम के बाहर टाउनहाल स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एकता यात्रा का औपचारिक शुभारंभ किया।     यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के साथ जलशक्ति मंत्री सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। अपार जनसमूह इस यात्रा में शामिल हुआ। लोग तिरंगा झंडा हाथों में लिए “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के उद्घोष कर रहे थे। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ती गई, पूरा मार्ग राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में रंग गया। टाउनहाल से लेकर पटेल चौराहा (गोलघर काली मंदिर) तक सड़कों के किनारे खड़े हर उम्र वर्ग के लोगों तथा विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए सभी का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान गांधी आश्रम के पास एक बालक सरदार पटेल का चित्र लिए खड़ा था। जिसे मुख्यमंत्री ने बुलाकर उसके हटीं से सरदार पटेल की तस्वीर ली और आशीर्वाद दिया।       यात्रा मार्ग पर जलकल बिल्डिंग, गांधी आश्रम, बलदेव प्लाजा और काली मंदिर के समीप कलाकारों के दलों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। यात्रा के काली मंदिर पहुंचने पर सीएम योगी ने मां काली और अन्य देव विग्रहों का दर्शन-पूजन किया तथा मंदिर के सामने स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा को गंतव्य की ओर रवाना किया।

सरदार पटेल की 150वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में सीएम योगी ने किया एकता यात्रा का शुभारंभ

  गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत रत्न से विभूषित एवं लौह पुरुष के नाम से विख्यात सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में सोमवार को प्रदेशभर के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के लिए एकता यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जहां सरदार पटेल के राष्ट्र के प्रति योगदान को श्रद्धा भाव से याद किया तो वहीं वंदे मातरम में संशोधन और विरोध को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर सीधा प्रहार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस राष्ट्र गीत, वंदे मातरम ने आजादी के आंदोलन में भारत की सोयी हुई चेतना को जागृत किया, उसमें पहले कांग्रेस ने तुष्टिकरण के लिए संशोधन किया और आज फिर कुछ लोग वंदे मातरम का विरोध कर रहे हैं।           मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, मत या मजहब राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता। व्यक्तिगत आस्था यदि राष्ट्र के आड़े आए तो उसे एक छोर पर रख देना चाहिए। पर, कुछ लोगों के लिए आज भी उनका व्यक्तिगत मत और मजहब बड़ा है। सपा के एक सासंद द्वारा वंदे मातरम गाने से इनकार करने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग जिन्ना को सम्मान देने के लिए होने वाले कार्यक्रम में तो शामिल होते हैं लेकिन लौह सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं होते। वंदे मातरम भारत की सोयी चेतना को जगाने वाला गीत नगर निगम परिसर के रानी लक्ष्मीबाई पार्क से निकली एकता यात्रा के पूर्व उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद अवसर है कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के कार्यक्रम तो प्रारंभ हुए ही हैं, साथ ही राष्ट्रगीत वंदे मातरम के भी 150वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। सीएम ने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान वंदे मातरम भारत की सोयी चेतना को जगाने वाला गीत था। 1876 के बाद हर क्रांतिकारी, बच्चे, विद्यार्थी, युवा, अधेड़, बुजुर्ग, महिला, पुरुष ने इसका उद्घोष किया और आजादी आंदोलन में कूद पड़ा था। तब हर उम्र के व्यक्ति के लिए वंदे मातरम उसके जीवन का मंत्र बन गया था। देखते ही देखते वंदे मातरम का यही उद्घोष विदेशी दासता से भारत को मुक्त करने का मंत्र बन गया। कांग्रेस ने किया संशोधन का प्रयास मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम का जो मंत्र भारत की आजादी का कारण बना हो, उस मंत्र को भी सांप्रदायिक बताकर कांग्रेस ने उसमें संशोधन करने का प्रयास किया। कांग्रेस ने कहा यह पांच और छह छंद का क्यों पढ़ना है, दो छंद में ही हो इसे पूरा किया जाए। जिस वंदे मातरम को कांग्रेस के 1896-97 के अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने स्वर में गाया था, उसका 1923 के अधिवेशन में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद अली जौहर ने विरोध किया। वंदे मातरम का गान शुरू होते ही जौहर अध्यक्ष के पद से उठकर के चले गए। उन्होंने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया। वंदे मातरम का इस प्रकार का विरोध भारत के विभाजन का दुर्भाग्यपूर्ण कारण बना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अगर उस समय मोहम्मद अली जौहर को अध्यक्ष पद से बेदखल करके वंदे मातरम के माध्यम से भारत की राष्ट्रीयता का सम्मान किया होता तो भारत का विभाजन नहीं हुआ होता। धरती माता की उपासना का गीत है वंदे मातरम मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में कांग्रेस ने वंदे मातरम में संशोधन के लिए एक कमेटी बनाई। 1937 में उसकी रिपोर्ट आईम कांग्रेस ने कहा कि इसमें कुछ ऐसे शब्द हैं जो भारत माता को मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में प्रस्तुत करते हैं। इनका संशोधन कर दिया जाए। सीएम योगी ने कहा कि यह गीत धरती माता की उपासना का गीत है। भारत का ऋषि तो हमेशा सबका आह्वान करता रहा है कि धरती हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं। पुत्र होने के नाते अगर मां के सम्मान में कहीं कोई चुनौती आती है हमारा दायित्व बनता है कि हम उसके खिलाफ खड़े हों। राष्ट्रीय एकता में बाधक आस्था को रख दें एक ओर सीएम योगी ने कहा कि मेरा यह मानना है कोई व्यक्ति हो, कोई जाति, मत या मजहब हो, वह किसी राष्ट्र से बढ़कर नहीं हो सकता है। हम सब भारतवासियों को इस बारे में ध्यान रखना होगा कि हमारी आस्था अपनी जगह है। अगर हमारी आस्था, हमारी राष्ट्रीय एकता और एक अखंडता में बाधक बन रही है तो हमें उस आस्था को एक ओर करना होगा। सबसे पहले अपनी राष्ट्रीय अखंडता के लिए प्राणपण से जूझने के लिए तैयार होना होगा। भारत के एक नागरिक के रूप में यह हमारा दायित्व है। कुछ लोगों के लिए मत और मजहब भारत की एकता व अखंडता से बढ़कर सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोगों के लिए आज भी भारत की एकता और अखंडता से बढ़कर उनका मत और मजहब बड़ा हो जाता है। उनकी व्यक्तिगत निष्ठा महत्वपूर्ण हो जाती है। वास्तव में ऐसे ही इस तरह के लोग संदेह के दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के विरोध का कोई औचित्य नहीं है। जिन्ना के सम्मान के कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं वंदे मातरम का विरोध करने वाले मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से 1947 में देश के विभाजन का कारण बनी। और, आज भी हम सब यह मानते थे कि जो लोग भारत के अंदर हैं, सभी भारत के प्रति निष्ठावान होकर के भारत की एकता और अखंडता के लिए कार्य करेंगे। पर, जब अखिल भारतीय स्तर पर वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजन प्रारंभ हुए तो फिर वही विरोध के स्वर फूटना प्रारंभ हो गए। समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने फिर से विरोध करना प्रारंभ कर दिया। सीएम ने कहा कि यह वही लोग हैं जो भारत की अखंडता के शिल्पी लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती के कार्यक्रम में शामिल में नहीं होते लेकिन जिन्ना को सम्मान देने के किसी कार्यक्रम में शर्मनाक तरीके से शामिल होते हैं। हम सबको याद रखना होगा अगर राष्ट्र के महापुरुषों को सम्मान न मिला तो हमारा … Read more