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अयोध्या की दिवाली होगी इस बार अनोखी, गाय के गोबर से बने दीप करेंगे रोशनी

अयोध्या इस बार की अयोध्या की दीवाली एक अनोखे और ऐतिहासिक नजारे की साक्षी बनेगी. दरअसल, श्रीराम जन्मभूमि नगरी इस वर्ष 26 लाख दीपों की अद्वितीय रोशनी से जगमगाने वाली है. इन दीपों में सबसे खास रहेंगे जयपुर से आए पांच लाख गोमय दीपक. ये दीपक अपनी अनोखी संरचना और महक से पूरी रामनगरी को आध्यात्मिक और पर्यावरणीय ऊर्जा से आलोकित करेंगे. ये साधारण मिट्टी के दीपक नहीं, बल्कि गाय के गोबर और दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार किए गए खास दीपक हैं. इनमें गोबर के साथ जटामासी, अश्वगंधा, रीठा, देसी घी, काली हल्दी, मोरिंगा पाउडर, नीम, तुलसी और अन्य कई प्राकृतिक तत्वों का समावेश है. इन विशेष तत्वों की वजह से जब ये दीपक जलेंगे तो केवल रोशनी ही नहीं देंगे, बल्कि हवन सामग्री जैसी दिव्य सुगंध भी फैलाएंगे. महिलाओं की आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं ये दीपक जयपुर की पांच स्वैच्छिक सेवा संस्थाओं से जुड़ी लगभग 50 महिलाएं दिन-रात इन दीपकों के निर्माण में जुटी हुई हैं. टोंक रोड स्थित पिंजरापोल गौशाला के वैदिक पादप अनुसंधान केंद्र में रोजाना हजारों दीपक तैयार किए जाते हैं. माता रानी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं प्रतिदिन लगभग 5 हजार दीपक बनाती हैं. और इन्हें एक दीपक तैयार करने में सिर्फ डेढ़ मिनट का समय लगता है. यह काम महिलाओं को आजीविका और आत्मनिर्भरता दोनों दे रहा है. साथ ही ग्रामीण कारीगरों और गौशालाओं को भी जोड़ रहा है. गोमय दीपकों की खासियत इन दीपकों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बेहद हल्के हैं और गिरने पर टूटते नहीं हैं. यह एक बार इस्तेमाल होने वाले दीपक नहीं हैं, बल्कि इन्हें कई बार जलाया जा सकता है. जलने के बाद इन्हें मिट्टी या पौधों के पास डाल दिया जाए तो ये उर्वरक (फर्टिलाइजर) की तरह काम करते हैं. इस प्रकार ये दीपक न केवल रोशनी और सुगंध देंगे बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, बल्कि उसे पोषण देंगे. यह प्रयोग भारतीय परंपराओं में वर्णित “पंचगव्य” की भावना को दर्शाता है, जो यह संदेश देता है कि आधुनिक युग में भी स्वदेशी और पर्यावरण-संरक्षण आधारित नवाचारों को अपनाया जा सकता है. जब 3 अक्टूबर को जब पांच लाख गोमय दीपक अयोध्या में जलेंगे, तो वह दृश्य न सिर्फ दिव्य और भव्य होगा, बल्कि यह दर्शाएगा कि भारतीय संस्कृति किस तरह विज्ञान, प्रकृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है. महिलाओं की मेहनत, स्वदेशी सामग्रियों का उपयोग और पर्यावरण के प्रति यह सजगता मिलकर इस बार की “अयोध्या दीपावली” को एक नई पहचान और ऊंचाई देने जा रही है. यह पहल साबित करती है कि यदि हम चाहें तो पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सोच को जोड़कर त्योहारों को और भी अर्थपूर्ण और प्रेरक बना सकते हैं.

ऊर्जा क्षेत्र में ओबरा की वापसी, 2320 मेगावाट उत्पादन के साथ फिर बना ‘पावर किंग’

ओबरा यूपी में ऊर्जा के क्षेत्र में ओबरा तापीय परियोजना का स्वर्णिम इतिहास रहा है। परियोजना के स्थापना के बाद यहां स्थापित तापीय बिजली इकाईयों से होने वाले उत्पादन से सूबे के कई हिस्से रोशन हुए।धीरे-धीरे इसकी क्षमता में वृद्धि होने के बाद इसका नाम देश के पटल पर भी जाना पहचाना जाने लगा। यह यूपी की पुरानी बिजली परियोजनाओं में शामिल है। जिससे निर्माण के इतने वर्षों बाद आज भी यहां की पुरानी इकाईयों से बदस्तूर उत्पादन जारी है। हालांकि ओबरा डैम के संकुल में स्थापित इस परियोजना के आसपास नई परियोजनाओं को लगाने के लिए आज भी अनुकूल व पर्याप्त जगह होने के साथ ही उससे जुड़े सभी संसाधन भी उपलब्ध होने के कारण इसके विस्तारीकरण पर भी काफी काम किया गया। जिसके फलस्वरूप इस परियोजना के विस्तार के रूप में ओबरा ''''सी'''' तापीय परियोजना ने अपना मुकाम हासिल कर उत्पादन के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 60 के दशक में वजूद में आया था ओबरा तापीय परियोजना 60 के दशक में वजूद में आये ओबरा तापीय परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता की पांच इकाइयों का निर्माण कार्य शुरू हुआ। परियोजना की पहली इकाई से 15 अगस्त 1968 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। इसके अलावा दूसरी इकाई से 11 मार्च 1968 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। इसके बाद तीसरी इकाई से 13 अक्टूबर 1968, चौथी इकाई से 16 जुलाई 1969 और पांचवी इकाई से लगभग दो साल बाद 30 जुलाई 1971 को कामर्शियल उत्पादन शुरू हुआ। जिसके बाद ओबरा तापीय परियोजना का नाम देश के पटल पर जाने जाना लगा। इसके बाद तापीय परियोजना का विस्तार करते हुए 70 के दशक में ओबरा तापीय परियोजना में 100 मेगावाट क्षमता वाली तीन इकाइयों का निर्माण हुआ। जिनमें 100 मेगावाट वाली छठवीं इकाई से चार अक्टूबर 1973 को कामर्शियल उत्पादन शुरू कर उसे ग्रिड से जोड़ा गया। सातवीं से 14 दिसम्बर 1974 और आठवीं से एक जनवरी 1976 को कामर्शियल उत्पादन शुरू कर एक स्वर्णिम इतिहास लिखा गया। 1979 से 82 तक 200 मेगावाट की पांच इकाई का निर्माण प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ती गयी ओबरा तापीय परियोजना का विस्तार होता रहा है। पानी और कोयला उपलब्ध होने पर 1979 से लेकर 1982 के बीच 200 मेगावाट वाली पांच इकाइयों का निर्माण हुआ। जिसके बाद ओबरा तापीय परियोजना देश की सबसे बड़ी परियोजना में शुमार हो गया। लेकिन समय के साथ 50 मेगावाट की पांच इकाइयों और 100 मेगावाट की तीन इकाइयों का समय सीमा पूरी होने के बाद इन इकाइयों को उत्पादन से बाहर कर दिया गया। सरकार ने 1320 मेगावाट वाली ओबरा सी परियोजना की घोषणा की। जिसके बाद दिसंबर 2016 में ओबरा सी परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ। जिसका नौ फरवरी 2024 को सीओडी प्रक्रिया पूरी कर कामर्शियल उत्पादन पर ले लिया गया। पहली इकाई से उत्पादन शुरू होने के उपरान्त प्रबंधन ने दूसरी इकाई से भी जल्द से जल्द उत्पादन शुरू करने के लिए निर्माण कार्य में तेजी लाना शुरू कर दिया। जिसके परिणाम स्वरुप अगले 16 महीनों बाद 16 जून 2025 को दूसरी इकाई की सीओडी प्रक्रिया पूरी कर उक्त इकाई से कार्शियल उत्पादन शुरू कर दिया गया। परियोजना के एटीपीएस में आठ इकाइयां हो चुकीं हैं डिस्मेंटल 60 से लेकर 70 के दशक के बीच लगी परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता वाली पांच इकाईयां और 100 मेगावाट क्षमता वाली तीन इकाईयां अपनी परिचालन की समय से सीमा से अधिक समय तक उत्पादन करतीं रहीं। एक समय ऐसा आया कि यह इकाईयां काफी पुरानी होने की वजह से इनसे होने वाला उत्पादन अपेक्षा से अधिक महंगा होने की वजह से इन इकाईयों को पूरी तरह से बंद करने के निर्णय लिया गया। जिसके बाद इन इकाईयों को बंद करने के साथ ही प्रबंधन ने उसे पूरी तरह से डिस्मेंटल करने का निर्णय लिया। जिसके लिए निविदा प्रक्रिया को पूरा कर प्रबंधन ने सभी आठों इकाईयों को पूरी तरह से डिस्मेंटल करा दिया। लेकिन इन सबके बावजूद 70 से लेकर 80 के दशक के बीच लगाई गयीं 200 मेगावाट क्षमता वाली पांच इकाईयों से आज भी निरंतर उत्पादन जारी है। साथ ही ओबरा सी परियोजना की दोनों इकाईयों से कामर्शियल उत्पादन शुरू होने के पश्चात परियोजना की क्षमता बढ़कर 2320 मेगावाट हो गयी है।  

निर्वाचक नामावली को त्रुटिरहित बनाये रखने के साथ समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक: मुख्य निर्वाचन अधिकारी

लखनऊ  आज उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम), लखनऊ में उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में प्रत्येक जनपद से एक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं एक बूथ लेवल अधिकारी को निर्वाचक नामावली से संबंधित विधिक प्राविधानों, ईआरओ नेट, बीएलओ ऐप, विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।     मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर पात्र नागरिक का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज हो, यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निर्वाचक नामावली को त्रुटिरहित बनाये रखने के साथ समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षण में सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों एवं बूथ लेवल अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम-1960, मैनुअल ऑन इलेक्टोरल रोल-2023 में उल्लिखित विधिक दायित्वों, बीएलओ और सुपरवाइजरों के साथ समन्वय, निर्वाचक नामावली में दावे-आपत्तियों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, ईआरओ नेट और बीएलओ ऐप के तकनीकी पक्षों तथा फील्ड अनुश्रवण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण प्राप्त एईआरओ तथा बीएलओ मास्टर टेªनर के रूप में अपने-अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में अपने समकक्ष एवं अधीनस्थ एईआरओ, बीएलओ और सुपरवाइजरों को भी छोटे-छोटे समूहों में प्रशिक्षित करें, ताकि प्रत्येक स्तर पर प्रक्रिया की गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने मतदाताओं की सुविधा हेतु मतदेय स्थलों में नए अनुभागों के गठन के संबंध में परीक्षण कराते हुए नियमानुसार कार्यवाही किये जाने के भी निर्देश दिए।     आगामी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के संबंध में अवगत कराते हुए विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के दृष्टिगत वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली को वर्ष 2025 की निर्वाचक नामावली के साथ मैपिंग किए जाने से संबंधित प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना-प्रपत्र वितरित करने, भरने में सहयोग करने/एकत्रित करने/मतदाता का सत्यापन तथा उसे बीएलओ ऐप पर अपलोड करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।      पूर्व में प्रदेश के 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं समस्त 403 विधानसभाओं के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को विभिन्न चरणांे में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। आज के प्रशिक्षण सत्र के प्रत्येक जनपद में से एक एईआरओ तथा एक बीएलओ को मास्टर टेªनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो अपने जनपद में अन्य समस्त एईआरओ तथा बीएलओ को प्रशिक्षण प्रदान करेगें।

मुख्यमंत्री ने की गड्ढामुक्ति, सड़क मरम्मत अभियान की विभागवार समीक्षा

मुख्यमंत्री की चेतावनी, नगरीय अवस्थापना के कार्य समय पर और पारदर्शिता के साथ हों, अन्यथा महापौर के अधिकारों पर होगा पुनर्विचार उत्तर-दक्षिण कॉरीडोर की रूपरेखा पर भी हुआ विमर्श, बोले मुख्यमंत्री, बेहतर होगी कनेक्टिविटी और आर्थिकी को भी मिलेगा बल सड़क नवीनीकरण में पीडब्ल्यूडी ने 84.82% प्रगति दर्ज की, अन्य विभागों को भी गति बढ़ाने के निर्देश रेस्टोरेशन व विशेष मरम्मत में 2,750 किमी सड़कें चिन्हित, काम में तेजी के निर्देश त्योहारों के दृष्टिगत 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाए गए, मुख्यमंत्री ने तुरंत सुधार कर सुचारु यातायात सुनिश्चित करने को कहा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मॉनसून वर्षा के कारण खराब हुईं सड़कों की मरम्मत और आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण के लिए जारी कार्यवाही को तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि हाई-वे हों या एक्सप्रेस-वे, ग्रामीण सड़कें हों या नगरीय क्षेत्र की सड़कें, दुर्गा पूजा, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे आगामी प्रमुख पर्वों से पहले सभी महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह अच्छी स्थिति में होनी चाहिए, ताकि आमजन को असुविधा न झेलनी पड़े। मुख्यमंत्री, मंगलवार को विभिन्न विभागों के साथ महत्वपूर्ण बैठक में सड़कों की मररमत, गड्ढामुक्ति अभियान आदि की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में अधिकारियों ने गड्ढा मुक्ति अभियान की कार्ययोजना के संबंध में अवगत कराया कि प्रदेश की कुल 6,78,301 सड़कों (लंबाई 4,32,989 किमी) में से 44,196 किमी को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में औसतन 21.67 प्रतिशत प्रगति दर्ज हुई है। मुख्यमंत्री ने एनएचएआई, मंडी परिषद, पीडब्ल्यूडी, ग्राम विकास, पंचायती राज, नगर विकास, सिंचाई, गन्ना एवं चीनी विकास सहित विभिन्न विभागों से अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए निर्देश दिया कि सभी विभाग लक्ष्य की प्राप्ति में समान गति बनाएं और कमजोर प्रगति वाले विभाग और बेहतर कार्य करें। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कों की मरम्मत में तेजी की अपेक्षा जताई।  नगर विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों में अवस्थापना संबंधी कार्यों की धनराशि का समय से और सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए। कार्य का आवंटन पारदर्शिता के साथ हो और कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। अन्यथा की स्थिति में महापौरों के अधिकारों पर पुनर्विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिस भी नगर निगम में ईईएसएल का बकाया है, उसका तत्काल भुगतान करा दिया जाए।    सड़क नवीनीकरण कार्यों की समीक्षा में बताया गया कि 31,514 किमी लंबाई की सड़कों को इसमें शामिल किया गया है। लोक निर्माण विभाग ने इसमें 84.82 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने कहा किया कि नवीनीकरण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है, इसमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। बैठक में अवगत कराया गया कि रेस्टोरेशन एवं विशेष मरम्मत के अंतर्गत 2,750 किमी सड़कें चिन्हित की गई हैं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि ग्रामीण विकास विभाग ने इसमें 62.99 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है, नगर विकास विभाग ने 35.50 प्रतिशत और अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने 48.77 प्रतिशत प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 30 सितम्बर तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सर्वे पूरा कर कार्ययोजना शासन को प्रस्तुत की जाए। त्योहारों को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि 649 मार्ग संतोषजनक स्थिति में हैं, जबकि 114 मार्ग असंतोषजनक स्थिति में पाए गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इन मार्गों को तत्काल सुधार कर सुचारु यातायात सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय सड़कों की स्थिति प्रदेश की छवि से जुड़ी होती है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान प्रदेशवासियों की सुविधा और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा है। इसलिए सभी विभागीय अधिकारी पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कार्यों की प्रगति की दैनिक निगरानी हो तथा शासन स्तर पर नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर के विकास की रूपरेखा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में अधिकांश राजमार्ग और एक्सप्रेसवे पूर्व-पश्चिम दिशा में केंद्रित हैं, ऐसे में अब आवश्यकता है कि नेपाल सीमा से लेकर प्रदेश के दक्षिणी छोर तक फैले जिलों को जोड़ने वाला एक सुदृढ़ उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर तैयार किया जाए। इस उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में एनएचएआई का सहयोग लिया जाए और शेष मार्गों का निर्माण, सुदृढ़ीकरण तथा चौड़ीकरण राज्य स्तर पर कराया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां ग्रीनफील्ड रोड परियोजनाएं प्रस्तावित की जाएं।

कचहरी में हंगामा, पुलिस-वकील भिड़ंत में दरोगा समेत चार सिपाही घायल

वाराणसी वाराणसी जिले में अधिवक्ताओं द्वारा पुलिस की पिटाई का मामला सामने आया है। यहां मंगलवार को कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं ने बड़ागांव थाने पर तैनात दरोगा मिथिलेश समेत चार पुलिसकर्मियों को दौड़ा- दौड़ाकर बेरहमी से पीटा। मामले को लेकर मौके पर हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में दरोगा को बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया है। चिकित्सकों ने हालत नाजुक बताई है।    जानकारी के मुताबिक, शनिवार को बड़ागांव थाने में जमीन के प्रकरण में विवाद हुआ था। इसी बात को लेकर मंगलवार को भी दरोगा और अधिवक्ताओं के बीच विवाद हुआ। इस दौरान अधिवक्ताओं ने दरोगा समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर भी हमला कर दिया। घटनास्थल पर डीएम सत्येंद्र कुमार और अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था शिवहरि मीणा बार के पदाधिकारियों के साथ वार्ता कर रहे हैं। पूरी कचहरी को छावनी में तब्दील किया गया है। कमिश्नरेट की पांच थानों की फोर्स मौके पर तैनात है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, कृषि, एआई आदि पर जनता दे रही सुझाव

ग्रामीण क्षेत्रों से 1.35 लाख और नगरीय क्षेत्रों से करीब 65 हजार सुझाव प्राप्त शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक राय हुई दर्ज, देवरिया, कानपुर देहात, हरदोई, जौनपुर, लखीमपुर खीरी, महराजगंज, प्रतापगढ़, गोरखपुर आदि जनपदों से सर्वाधिक फीडबैक जनता का कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर विशेष जोर लखनऊ योगी सरकार द्वारा संचालित 'समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान निरंतर जनभागीदारी और सुझावों के साथ आगे बढ़ रहा है। मंगलवार तक प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर छात्रों, शिक्षकों, व्यावसायियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया और आम जनमानस से संवाद किया। इस संवाद में न केवल विगत आठ वर्षों की विकास यात्रा साझा की गई, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने हेतु रोडमैप पर चर्चा और फीडबैक भी प्राप्त किया गया। करीब दो लाख से अधिक फीडबैक दर्ज सरकार द्वारा विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक करीब दो लाख फीडबैक दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1.35 लाख और नगरीय क्षेत्रों में करीब 65 हजार फीडबैक प्राप्त हुए। आयु वर्ग के अनुसार करीब 75 हजार सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग से, करीब 1 लाख से अधिक सुझाव 31-60 वर्ग से और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से करीब 25 हजार से अधिक सुझाव आए हैं। शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक राय जनता के बीच शिक्षा अब भी सबसे बड़ा मुद्दा है। करीब 70 हजार से अधिक सुझाव शिक्षा से जुड़े मिले। इसके अलावा नगरीय एवं ग्रामीण विकास से जुड़े करीब 40हजार, स्वास्थ्य पर 15 हजार से अधिक, समाज कल्याण पर करीब 16 हजार और कृषि क्षेत्र से संबंधित 27 हजार से अधिक सुझाव दर्ज किए गए। इन जिलों से मिल रही भागीदारी देवरिया, कानपुर देहात, हरदोई,  जौनपुर, लखीमपुर खीरी, महराजगंज, प्रतापगढ़ और गोरखपुर जैसे जनपदों से सबसे अधिक भागीदारी रही। इन जिलों से कुल69,670 से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए, जो दर्शाता है कि जनता इस अभियान को गंभीरता से ले रही है। समाज कल्य़ाण क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता आगरा की चित्रा पारिख, सचिन भारद्वाज ने समाज कल्याण क्षेत्र में सुधार का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि विधायकों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कम से कम स्नातक अनिवार्य की जाए। गौशाला समितियों में 50% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। छात्रावासों में स्वच्छता, पौष्टिक भोजन, चिकित्सकीय सुविधा तथा खेल-कूद के लिए उपयुक्त प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जाएं। लखनऊ में फिनटेक एंड एनालिटिक्स सिटी विकसित की जानी चाहिए लखनऊ के कुंवर उर्जस्वित सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक वितरित डेटा सेंटर ग्रिड तथा लखनऊ में एक फिनटेक-एंड-एनालिटिक्स सिटी विकसित की जानी चाहिए, जिससे राज्य की वैश्विक सेवा-क्षमता और डेटा सुरक्षा सशक्त हो सके। स्थानीय शासन में एआई-को पायलट और एकीकृत नागरिक पोर्टल लागू कर वास्तविक समय में निर्णय प्रक्रिया और सेवाओं की दक्षता बढ़ाई जा सकती है। दूरगामी परिकल्पना के अंतर्गत स्पेस-टेक नीति तैयार की जाए तथा रक्षा-सम्बद्ध अंतरिक्ष तकनीक में स्वायत्ता प्राप्त करने हेतु उच्चस्तरीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव शामिल किया गया है। पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा, रोक लगाने के लिए स्कैनर ऐप विकसित किया जाए कृषि कार्य से जुड़े अधिकांश किसान पशुपालन भी करते हैं, किंतु बीते कुछ वर्षों में पशु आहार बनाने वाले फैक्ट्री संचालक महंगाई से बचने अथवा अधिक लाभ कमाने की दृष्टि से पशु आहार में मिलावट करने लगे हैं। इसके कारण पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए एक ऐसा स्कैनर ऐप विकसित किया जाए, जो न केवल पशु आहार की शुद्धता की पहचान कर सके, बल्कि पशु को स्कैन करते ही उसकी नस्ल, दूध उत्पादन क्षमता तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी उपलब्ध करा सके। साथ ही, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों को बीमा के दायरे में लाया जाए, क्योंकि मधुमक्खी पालकों को बॉक्स चोरी होने तथा मछली पालकों को तालाब में अराजक तत्वों द्वारा विष डालकर मछलियों को मार देने या चोरी होने का खतरा बना रहता है।

कैसरबाग मछली मंडी में घटनास्थल पर पहुंचे डिप्टी सीएम, अस्पताल में घायलों व परिजनों से मिले

लखनऊ  कैसरबाग मछली मंडी में पुराने पेड़ के गिरने से हुए हादसे में सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। घायलों का समुचित उपचार कराया जा रहा है। सभी की हालत खतरे से बाहर है। जिला प्रशासन व संबंधित विभागों को जिले भर में पुराने पेड़ों को चिन्हित करने एवं नियमानुसार उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कहना है प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का।  मंगलवार को कैसरबाग मछली मंडी में हुए हादसे के तुरंत बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक घटनास्थल पर पहुंचे और राहत व बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों व कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत की और घटना के बारे में पूरी जानकारी हासिल की। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि इस हादसे में रामू नामक व्यक्ति हताहत और रिजवान, शोएब, अभिषेक व मोहम्मद अरमान रसूल घायल हुए हैं। सभी घायलों का इलाज चल रहा है।  डिप्टी सीएम घायल को देखने के लिए बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायलों व उनके परिजनों से मुलाकात करते हुए, हर संभव मदद हेतु आश्वस्त किया। उन्होंने बताया कि चारों घायलों की हालत खतरे से बाहर है। उप मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि जिला प्रशासन, नगर निगम एवं वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि पूरे जिले में पुराने पेड़ों को चिन्हित करें एवं उन्हें नियमानुसार हटवाने की प्रक्रिया शुरू करें ताकि इस तरह से हादसों को पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि घायलों का निःशुल्क इलाज कराया जा रहा है।

योगी सरकार का फैसला: संत कबीर वस्त्र पार्क से बढ़ेगा उत्तर प्रदेश का टेक्सटाइल सेक्टर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र में निजी निवेशकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए विभिन्न जिलों में वस्त्र एवं परिधान पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया है. मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पारंपरिक हथकरघा और वस्त्र उत्पादों की समृद्ध धरोहर वाला राज्य है, जिसकी क्षमता का सही उपयोग होने पर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिलाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में वस्त्र एवं परिधान का वैश्विक बाजार वर्ष 2030 तक 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और भारत इसमें 8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ सबसे तेज़ी से बढ़ते देशों में है. ऐसे परिदृश्य में उत्तर प्रदेश की भागीदारी इस क्षेत्र में निर्णायक सिद्ध हो सकती है. प्रस्तावित योजना संत कबीर के नाम पर समर्पित मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित योजना को महान संत कबीर के नाम पर समर्पित किया जाएगा. संत कबीर ने अपने जीवन दर्शन में श्रम, सादगी और आत्मनिर्भरता को सर्वोपरि माना और यही भाव इस योजना का आधार बनेगा. मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस योजना के माध्यम से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा. बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष वस्त्र एवं परिधान निर्यातक राज्यों में शामिल है. वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल वस्त्र एवं परिधान निर्यात का लगभग 9.6 प्रतिशत है. इस क्षेत्र का प्रदेश की जीडीपी में 1.5 प्रतिशत योगदान है, जबकि राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार पाने वाले लगभग 22 लाख लोग इससे जुड़े हैं. वाराणसी, मऊ, भदोही, मिर्जापुर, सीतापुर, बाराबंकी, गोरखपुर और मेरठ जैसे पारंपरिक क्लस्टरों ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय परिधान मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है. अधिकारियों ने बताया कि निवेश सारथी पोर्टल पर अब तक वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र से जुड़े 659 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इन प्रस्तावों के लिए लगभग 1,642 एकड़ भूमि की आवश्यकता है. लगभग 1,01,768 रोजगार के अवसर की संभावना कुल निवेश मूल्य 15,431 करोड़ रुपये आंका गया है और इसके फलस्वरूप लगभग 1,01,768 रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है. प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा और इनमें प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना अनिवार्य होगी. साथ ही बटन, ज़िपर, लेबल, पैकेजिंग और वेयरहाउस जैसी सहायक इकाइयों के विकास की भी व्यवस्था की जाएगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवेश प्रस्तावों को शीघ्र गति से क्रियान्वित करने हेतु भूमि की पहचान और विकास कार्य को तेज़ किया जाए. उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अथवा नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा, ताकि निवेशकों को समयबद्ध और सुगम सुविधाएं प्राप्त हों. सरकार की ओर से पार्कों तक सड़क, विद्युत और जलापूर्ति जैसी आधारभूत सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाएंगी. मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन को इस योजना का मुख्य लक्ष्य बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर वस्त्र एवं परिधान पार्क योजना न केवल निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलेगी बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र एवं परिधान मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान भी दिलाएगी. बुनकरों के साथ संवाद स्थापित करने के निर्देश बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम बुनकरों की उत्पादन लागत कम करने, आय बढ़ाने और परंपरागत वस्त्र उद्योग को नई मजबूती देने के उद्देश्य से बुनकरों के साथ संवाद करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बुनकर, परिश्रम और परंपरा के प्रतीक हैं. उनके हाथों से बना कपड़ा पूरे विश्व में पहचान रखता है. सरकार बुनकरों की मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है. बुनकरों से संवाद बनाकर उनकी अपेक्षाओं को जानने और समझने की आवश्यकता है. इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विभाग द्वारा प्रक्रिया प्रारंभ की जाए. मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्यवाही के भी निर्देश दिए.  

मूसलाधार बारिश के बाद लखनऊ में बड़ा हादसा, पेड़ गिरने से एक की मौत, कई दबे

लखनऊ लखनऊ में सोमवार की रात से मंगलवार की सुबह तक हुई बारिश के बाद बड़ा हादसा हुआ है। कैसरबाग में एक भारी भरकम पीपल पेड़ का पेड़ गिर गया। पेड़ मछली मंडी के साथ ही आसपास के कई मकानों पर गिरा है। इससे दस से ज्यादा लोग दब गए। सूचना पर नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। घटना की जानकारी मिलते ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी मौके पर पहुंचे। बड़ी संख्या में पुलिस बल और फायर ब्रिगेड के जवान राहत में लगे हैं। जहां पेड़ गिरा है, वहां मछली मंडी लगती थी। घायलों को पेड़ की डालें काट-काटकर निकालने की कोशिश हो रही है। आला अधिकारी भी खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। कमिश्नर रौशन जैकब भी मौके पर हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि पेड़ करीब 150 साल पुराना था। सोमवार की पूरी रात बारिश होने के बाद यह घटना हुई है। पेड़ की टहनियों ने आसपास के घरों को भी क्षतिग्रस्त किया है। पेड़ के नीचे कई गुमटियां भी दबी हुई हैं। दबे लोगों को निकाल-निकाल कर अस्पताल भेजा जा रहा है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि सभी का बेहतर इलाज कराया जाएगा। अधिकारियों को इस बारे में निर्देश भी दे दिया गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। अन्य सभी घायलों को बलरामपुर अस्पताल और सिविल अस्पताल भेजा गया है। वहां सभी का इलाज चल रहा है। केजीएमयू को डॉक्टरों को भी अलर्ट कर दिया गया है। अगर जरूरत पड़ेगी तो वहां भी भेजकर तत्काल इलाज कराया जाएगा। मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी विशाख जी ने बताया कि एक की मौत हुई है और 4 लोग घायल भी हुए हैं। घायलों के पैर फ्रेक्चर होने के साथ सिर और हाथ में चोटें लगी हैं। कहा कि जिला प्रशासन नगर निगम के साथ मिलकर रिहायशी इलाकों में गिरने की आशंका वाले पेड़ों की छंटाई कराएगा और जर्जर मकानों को गिराया जाएगा।  

यूपी के वाहन मालिकों को बड़ी राहत… 5 साल के सभी ई-चालान होंगे माफ

लखनऊ  उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य में 2017 से 2021 तक बने लाखों ई-चालान अब कानून के तहत स्वतः समाप्त माने जाएंगे. यानी जिन चालानों पर अदालतों में कार्रवाई लंबित थी या जो समय-सीमा से बाहर हो चुके हैं, वे अब मान्य नहीं रहेंगे. इस कदम से प्रदेशभर के वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी. इस फैसले के साथ ही फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) जैसी सेवाओं पर लगे अवरोध हट जाएंगे. यानी अब पुराने ई-चालानों की वजह से वाहन मालिकों को इन सेवाओं में अड़चन नहीं होगी. कितने चालान थे लंबित? परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2021 के बीच कुल 30,52,090 ई-चालान काटे गए थे. इनमें से 17,59,077 पहले ही निस्तारित हो चुके हैं, जबकि 12,93,013 चालान अब तक लंबित हैं. इनमें से 10,84,732 चालान कोर्ट में पेंडिंग हैं जबकि 1,29,163 चालान ऑफिस स्तर पर पेंडिंग हैं. अब ये सभी चालान खुद खत्म हो जाएंगे. एक महीने के भीतर सभी चालानों की स्थिति पोर्टल पर अपडेट कर दी जाएगी और जनता आसानी से ई-चालान पोर्टल पर जाकर अपने वाहन/चालान का स्टेटस देख सकेगी. क्यों लिया गया ये फैसला? परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह द्वारा आदेश में बताया गया कि यह फैसला जनहित, पारदर्शिता और कानून के पालन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. लंबे समय से कोर्ट में पड़े छोटे-मोटे चालानों से न्यायपालिका और प्रवर्तन तंत्र पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा था. इनकी वसूली लगभग असंभव हो चुकी थी. हाई कोर्ट ने भी कई आदेशों में साफ कहा कि ऐसे ई-चालान “by operation of law” अब समाप्त माने जाएंगे. राज्य सरकार ने नए कानून और अदालत के निर्देशों के बाद इसे पोर्टल स्तर पर लागू करने का आदेश जारी किया है. किन पर लागू नहीं होगा यह आदेश? यह राहत टैक्स रिकवरी से जुड़े चालानों पर लागू नहीं होगी. यानी मोटर व्हीकल्स टैक्सेशन एक्ट के तहत बकाया टैक्स वाले मामलों पर कार्रवाई अलग से जारी रहेगी. इसी तरह, गंभीर दुर्घटनाओं, IPC से जुड़े मामलों या शराब पीकर वाहन चलाने जैसे प्रकरण इस दायरे से बाहर रखे गए हैं. इन धाराओं में शामिल चालानों को खत्म नहीं किया जाएगा. जनता को कैसे फायदा होगा? इसका सीधा लाभ वाहन मालिकों को मिल सकेगा क्योंकि इससे वाहन सेवाएं आसान हो जाएंगी. अब फिटनेस, परमिट, ट्रांसफर या HSRP के लिए आवेदन करते समय पुराने ई-चालानों की वजह से रुकावट नहीं आएगी. इसके अलावा लाखों वाहन मालिकों पर से पुराने केस हट जाएंगे और उन्हें कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. खासकर ऑटो, ट्रांसपोर्ट और टैक्सी ऑपरेटरों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है. आगे क्या होगा? 30 दिन के भीतर सभी जिलों के RTO/ARTO दफ्तर लंबित चालानों की स्थिति बदलकर पोर्टल पर “Disposed-Abated” या “Closed-Time Bar” कर देंगे. एक महीने बाद वाहन मालिक पोर्टल पर लॉगिन करके देख सकेंगे कि उनका चालान खत्म हुआ या नहीं. हाई कोर्ट के जिन मामलों में खास तौर पर आदेश दिए गए हैं, वहां सात दिन के भीतर चालान पोर्टल से हटा दिए जाएंगे.