samacharsecretary.com

सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

 सिद्धार्थनगर  बुद्ध की धरती की पहचान बन चुका कालानमक चावल अब वैश्विक बाजार में नई ऊंचाई छूने जा रहा है। अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए प्रसिद्ध कालानमक चावल की जिले से पहली बार एक हजार टन की रिकॉर्ड खेप सिंगापुर भेजी जाएगी। अब तक सिंगापुर समेत अन्य देशों को अधिकतम 50 टन तक ही कालानमक का निर्यात हो सका था। ऐसे में यह न केवल जिले बल्कि पूरे पूर्वांचल के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे कालानमक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और हजारों किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। मधुवापार स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर के संचालक अभिषेक सिंह और सिंगापुर की संस्था जेन बुद्धा के बीच इसके लिए सहमति बन चुकी है। समझौते के तहत 20 दिसंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक चरणबद्ध तरीके से एक हजार टन कालानमक चावल सिंगापुर भेजा जाएगा। इसके लिए सिद्धार्थनगर के चार और महराजगंज के एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के साथ भी समझौता हो चुका है। कालानमक को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किए जाने के बाद इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को नई गति मिली है। बुद्ध की धरती की पहचान बने इस धान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बढ़ावा मिल रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इटली दौरे के दौरान खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक को सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल भेंट कर इसकी वैश्विक पहचान को और मजबूती दी थी। जिले में बीते दो वर्षों के दौरान आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, कालानमक महोत्सव और विभिन्न प्रचार कार्यक्रमों ने भी इसकी मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कामन फैसिलिटी सेंटर संचालक अभिषेक सिंह ने बताया कि किसानों से 50 से 75 रुपये प्रति किलो तक की दर से धान खरीदा जाएगा। जो किसान चार टन या उससे अधिक कालानमक धान उपलब्ध करा सकेंगे, उनके घर से सीधे खरीद की व्यवस्था होगी। इससे किसानों को परिवहन और कुटाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कालानमक की मांग उत्पादन की तुलना में कहीं अधिक है। बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने एजेंटों के माध्यम से जिले में खरीदारी कर रही हैं। कुशीनगर की प्रविधान कंपनी, टू ब्रदर्स और इंडिया गेट बासमती जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां भी यहां सक्रिय हैं। वर्तमान में 20 से अधिक कंपनियां जिले में कालानमक की खरीद के लिए काम कर रही हैं। ब्लॉकों में भेजे गए 200 क्विंटल बीज उधर कृषि विभाग भी उत्पादन बढ़ाने की दिशा में विशेष प्रयास कर रहा है। जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय ने बताया कि इस बार जिले के 14 ब्लाकों के बीज गोदामों पर 200 क्विंटल कालानमक बीज उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 14 एफपीओ अपने सदस्य किसानों को भी बीज उपलब्ध करा रहे हैं। निजी विक्रेताओं ने भी कालानमक बीज की मांग को देखते हुए पर्याप्त भंडारण किया है। जिले में 500 से अधिक किसान अपने संरक्षित बीज का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में इस वर्ष कालानमक का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

तबादला नीति के अंतिम दिन स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई, अलीगढ़-वाराणसी समेत कई जिलों में बदले गए CMO

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार की तबादला नीति के तहत 31 मई यानी आज तक ही विभागीय तबादले होंगे। तबादलों की सूची जारी करने के कारण ही रविवार को भी सरकारी कार्यालय खोले गए हैं और सूची को अंतिम रूप दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने भी रविवार को लगभग दो दर्जन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का ट्रांसफर किया। कानपुर के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामनाथ सिंह को अलीगढ़ का नया मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया गया है। अलीगढ़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहे डॉ. नीरज त्यागी को आगरा मंडल का संयुक्त निदेशक बनाया है। इनके साथ ही डॉ. प्रमोद कुमार सीएमओ अंबेडकर नगर, डॉ. मुकेश कुमार को सीएमओ वाराणसी, डॉ. सचिन चंद्र वैश्य को सीएमओ गाजियाबाद, डॉ. हरिनंदन प्रसाद को सीएमओ जालौन, डॉ. रमेश कुमार मिश्रा को सीएमओ सोनभद्र, डॉ. रंजन गौतम का सीएमओ बाराबंकी, डॉ. अजय कुमार शर्मा को सीएमओ उन्नाव, डॉ. अभय नारायण राय को सीएमओ बलिया, डॉ. अलका शुक्ला को सीएमओ हमीरपुर, डॉ. उदयभान सिंह को सीएमओ फतेहपुर, डॉ. किशोर कुमार आहूजा को सीएमओ हापुड़, डॉ. गंगाराम गौतम को सीएमओ जौनपुर, डॉ. पंकज कुमार को सीएमओ मऊ, डॉ. भुवन चन्द्र पंत को सीएमओ पीलीभीत, डॉ. रमाकांत सागर को सीएमओ अमरोहा, डॉ. रामनाथ सिंह को सीएमओ अलीगढ़, डॉ. विकास चन्द्रा को सीएमओ कन्नौज, डॉ. विनय कुमार को सीएमओ महोबा, डॉ. वेद प्रकाश को सीएमओ हाथरस और डॉ. सुखरंजन समदर को सीएमओ सीतापुर के पद पर तैनात किया गया है  

बिजनौर में होगा भव्य कार्यक्रम, 50 पूर्व सैनिकों/ लीजधारकों को भी मिलेगा लाभ

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शोषित-वंचित समुदाय तथा विस्थापितों को निरंतर भूमिधरी अधिकार पत्र मिल रहा है। ऐसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में सुरक्षा, सुविधा व सम्मान मिल रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री सोमवार को बड़े पैमाने पर पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों को भी उनका अधिकार दिलाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को बिजनौर के आलमपुर गांवड़ी, अफजलगढ़, धामपुर में विकास की बड़ी योजनाओं से स्थानीय लोगों को जोड़ेंगे। वह पाकिस्तान से विस्थापित 1645 परिवारों तथा 50 पूर्व सैनिकों/लीजधारकों को भूमिधरी अधिकार पत्र देंगे। मुख्यमंत्री यहां प्रधानमंत्री आवास योजना तथा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को आवंटन पत्र व चेक वितरित करेंगे। साथ ही कॉमन सर्विस सेंटर और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित विदुर प्रेरणा कैफे का उद्घाटन भी करेंगे।  गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री ने अप्रैल में लखीमपुर खीरी में भी बांग्लादेश से विस्थापित 331 परिवारों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित किया था। साथ ही चंदन चौकी (पलिया) में आयोजित कार्यक्रम में नदियों द्वारा भूमि क्षरण से प्रभावित पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2350 परिवारों व थारू जनजाति के 4356 परिवारों को भौमिक अधिकार पट्टों का आवंटन किया था। सीएम योगी ने मार्च में भी बहराइच के ग्राम पंचायत सेमरहना में आयोजित कार्यक्रम में भरथापुर गांव के 118 लाभार्थियों को 15 लाख रुपये प्रति हितग्राही की दर से पुनर्वास धनराशि एवं कृषि भूमि आदि परिसंपत्तियों के समतुल्य 21.55 करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण किया था। इसके साथ ही उन्होंने 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास, शौचालय और आवास के लिए भूमि के पट्टों का वितरण भी किया था।

जून के पहले सप्ताह में लखनऊ में होगा सम्मान समारोह

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार वर्ष 2026 की मदरसा बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित करेगी। मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। इनमें से दोनों वर्गों के टॉप- 3 छात्र-छात्राओं को टैबलेट दिया जाएगा। इसके लिए जून के पहले सप्ताह में राजधानी लखनऊ में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।  प्रदेश सरकार का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी बनाना है, ताकि अल्पसंख्यक समाज के छात्र-छात्राएं मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें। 80 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं थे पंजीकृत वर्ष 2026 की उप्र. मदरसा बोर्ड परीक्षा में कुल 80,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 63,211 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था, इसमें से 55,788 छात्रों ने परीक्षा पास की थी। मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) की मेरिट सूची में टॉप-10 में पांच छात्र और पांच छात्राएं शामिल हैं। सभी टॉप-10 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी के टॉपर्स मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) वर्ग में चंदौली के मोहम्मद वसीम ने पहला, मीरजापुर के मोहम्मद कासिम अली ने दूसरा और गोरखपुर की शाइमा परवीन ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं आलिम (सीनियर सेकेंडरी) वर्ग में शीर्ष तीनों स्थानों पर छात्राओं ने कब्जा जमाया। वाराणसी की जुमी फरीन और शाइस्ता परवीन के साथ अमरोहा की उम्मुल खैर ने टॉप-3 में स्थान बनाया है। इन छात्र-छात्राओं को टैबलेट से सम्मानित किया जाएगा।  आधुनिक शिक्षा से मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर प्रदेश सरकार लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है कि अल्पसंख्यक समाज के छात्र आधुनिक शिक्षा से जुड़ें और समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए 'एक हाथ में कुरान और एक हाथ में कंप्यूटर' के विजन को राज्य सरकार जमीनी स्तर पर लागू करने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार की प्राथमिकता अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि योगी सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में गरीब मुस्लिम परिवारों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना उनका अधिकार है। जून के पहले सप्ताह में होगा सम्मान समारोह राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी वर्ग के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। दोनों वर्गों के टॉप-3 को टैबलेट फोन दिए जाएंगे, जिससे वह अपनी आगे की पढ़ाई और बेहतर ढंग से कर सकें। सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हुई थीं परीक्षाएं मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं बीती 9 फरवरी से 14 फरवरी के बीच दो पालियों में आयोजित की गईं थी। पहली पाली में मुंशी और मौलवी, जबकि दूसरी पाली में आलिम, अरबी एवं परशियन (फारसी) विषयों की परीक्षाएं संपन्न हुई थी। प्रदेशभर में कुल 277 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और नकलविहीन बनाने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी निगरानी सीधे मदरसा बोर्ड मुख्यालय से की गई थी। परिणामस्वरूप परीक्षाएं शांतिपूर्ण और निष्पक्ष वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुईं थी।

राजस्व प्रशासन के तीन अहम पदों पर महिला आईएएस अधिकारियों की तैनाती

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में महिला सशक्तीकरण का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है। प्रदेश के राजस्व प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में अब महिला अधिकारियों की मजबूत उपस्थिति देखने को मिल रही है। सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अर्चना अग्रवाल को राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि प्रमुख सचिव राजस्व की जिम्मेदारी पहले से आईएएस अपर्णा यू संभाल रही हैं। राजस्व परिषद में सचिव एवं आयुक्त स्तर की जिम्मेदारी आईएएस कंचन वर्मा के पास है। 1990 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अर्चना अग्रवाल वर्तमान में अपर मुख्य सचिव परिवहन विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। अब उन्हें राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव और विभिन्न विभागों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के कारण उन्हें प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक राजस्व परिषद की कमान दी गई है। राजस्व विभाग की प्रशासनिक और नीतिगत जिम्मेदारी पहले से 2001 बैच की आईएएस अधिकारी अपर्णा यू के पास है। उन्हें इसी वर्ष प्रमुख सचिव राजस्व बनाया गया था। राजस्व विभाग प्रदेश में भूमि, राजस्व प्रशासन, भू-अभिलेख, अधिग्रहण और संबंधित नीतिगत मामलों का प्रमुख विभाग है। इसके अलावा 2005 बैच की आईएएस अधिकारी कंचन वर्मा राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश में आयुक्त एवं सचिव के पद पर कार्यरत हैं। राजस्व परिषद के प्रशासनिक संचालन और विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों के निस्तारण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह महत्वपूर्ण निर्णय योगी सरकार द्वारा महिलाओं को महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपने की नीति का प्रमाण है। प्रदेश सरकार पहले भी विभिन्न विभागों, आयोगों, निगमों और विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों में महिला अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां देती रही है। अब राजस्व प्रशासन की शीर्ष संरचना में महिला अधिकारियों की मजबूत उपस्थिति से सुशासन, प्रशासनिक दक्षता और महिला सशक्तीकरण को नई ताकत मिलेगी। राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश राज्य की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में शामिल है, जहां भूमि, राजस्व विवाद, प्रशासनिक अपीलों और विभिन्न राजस्व मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में परिषद के अध्यक्ष, राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव और परिषद के सचिव स्तर पर महिला अधिकारियों की तैनाती प्रशासनिक दृष्टि से भी उल्लेखनीय उपलब्धि है।

कार्यवाहक डीजीपी के रूप में पहले से संभाल रहे थे जिम्मेदारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को प्रदेश का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया है। वह फिलहाल कार्यवाहक डीजीपी के रूप में प्रदेश पुलिस की कमान संभाल रहे थे। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। राजीव कृष्ण ने तत्कालीन डीजीपी प्रशांत कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद कार्यवाहक डीजीपी का पदभार संभाला था। इससे पहले वह डीजी विजिलेंस और उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पुलिस विभाग में उनकी पहचान एक अनुभवी, अनुशासित और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में रही है। गौतमबुद्ध नगर निवासी राजीव कृष्ण ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। अपने तीन दशक से अधिक पुलिस सेवाकाल में उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण इकाइयों में कार्य किया है। आगरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चित रहा, जहां उन्होंने संगठित अपराध और अपहरण गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर अलग पहचान बनाई थी। पुलिस मुख्यालय, विजिलेंस और भर्ती बोर्ड में काम करने का व्यापक अनुभव रखने वाले राजीव कृष्ण प्रशासनिक दक्षता और संस्थागत सुधारों के लिए भी जाने जाते हैं।

योगी सरकार का बड़ा अभियान, प्रदेशभर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का हो रहा निरीक्षण

लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार व्यापक प्रयास कर रही है। इसी क्रम में योगी सरकार द्वारा संचालित "स्टेट रिव्यू मिशन" के तहत प्रदेश भर में स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण और समीक्षा अभियान चलाया जा रहा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, कमियों की पहचान करना और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। 29 अक्टूबर 2025 से "स्टेट रिव्यू मिशन" की शुरुआत  अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर नागरिक को उसके घर के पास गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लगातार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहे हैं। इसी के तहत अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष द्वारा 29 अक्टूबर 2025 से "स्टेट रिव्यू मिशन" की शुरुआत की गई। मिशन के तहत प्रदेश के सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता की गहन समीक्षा की जा रही है। मंडल स्तर पर संचालित अभियान में स्वास्थ्य इकाइयों का स्थल निरीक्षण, व्यवस्थाओं का मूल्यांकन तथा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। पिछले छह माह के दौरान 18 मंडलों के सभी 75 जिलों और 826 विकास खंडों में संचालित स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण किया गया।  राज्य स्तर पर विशेष "फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट" विकसित की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक एवं स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि अभियान के दौरान प्रदेश की कुल 33,044 चिकित्सा इकाइयों में से 16,249 चिकित्सा इकाइयों का निरीक्षण किया गया, जो कुल इकाइयों का लगभग 49 प्रतिशत है। निरीक्षण कार्य 901 मंडलीय एवं जनपदीय अधिकारियों तथा 43 राज्य स्तरीय अधिकारियों की दो सदस्यीय टीमों द्वारा किया गया। इन टीमों ने प्रदेश के 93 जिला अस्पतालों, 861 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 2,825 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 12,405 स्वास्थ्य उपकेंद्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 50 विशेष चिकित्सालयों तथा 15 मेडिकल कॉलेजों का स्थलीय मूल्यांकन किया। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित 2,661 मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलों का भी निरीक्षण किया गया। इन स्वास्थ्य मेलों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कुछ मंडलों में निरीक्षण के दूसरे चरण का कार्य भी जारी है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके।  उन्होंने बताया कि स्टेट रिव्यू मिशन के तहत निरीक्षण के लिए राज्य स्तर पर विशेष "फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट" विकसित की गई। इसके माध्यम से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी ढांचे, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता, मानव संसाधनों की स्थिति, एंबुलेंस सेवाओं, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध सुविधाओं तथा रिकॉर्ड प्रबंधन का मूल्यांकन किया गया। साथ ही रोगियों से फीडबैक लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक गुणवत्ता का भी आकलन किया गया।   निगरानी और समीक्षा से स्वास्थ्य संस्थानों की बढ़ी कार्यक्षमता  स्टेट रिव्यू मिशन के दौरान किए गए गहन निरीक्षण, आकस्मिक जांच और लगातार समीक्षा का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार दर्ज किया गया है और चिकित्सा संस्थानों में सेवा गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही के नए मानक स्थापित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सतत निगरानी और समीक्षा से न केवल स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ रही है, बल्कि आम नागरिकों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी मजबूत हुआ है। प्रदेश सरकार का यह अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को जनकेंद्रित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

भारत सरकार के उपक्रम राइट्स लिमिटेड को सौंपा गया गुणवत्ता परीक्षण का जिम्मा, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और समयबद्ध परियोजनाओं पर जोर

लखनऊ औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने औद्योगिक क्षेत्रों में कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी जांच व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने गाजियाबाद के सात प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान भारत सरकार के उपक्रम राइट्स लिमिटेड से विकास कार्यों का विस्तृत गुणवत्ता परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्माण कार्यों के सैंपल और गुणवत्ता परीक्षण उद्यमी संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में कराए जाने का फैसला लिया गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कविनगर, स्वदेशी औद्योगिक क्षेत्र, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, साउथ साइड जीटी रोड, लोहामंडी, मेरठ रोड साइट-3 और साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण कर विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए थर्ड पार्टी ऑडिट व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, लंबित विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने तथा आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। उद्यमियों से अनुचित मांग या उत्पीड़न पर होगी कार्रवाई निरीक्षण और उद्यमियों के साथ हुई बैठक के दौरान ट्रक पार्किंग, पार्कों के विकास, टेस्ट लैब, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और एक्सपो सेंटर जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति दोहराते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा उद्यमियों से अनुचित मांग या उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उद्यमियों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में निवेश और उद्योगों के लिए पारदर्शी, जवाबदेह और उद्योग-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना यूपीसीडा और योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अथॉरिटी को अधिक जवाबदेह बनाने पर जोर प्रदेश में रिकॉर्ड निवेश प्रस्तावों और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक बुनियादी ढांचे के बीच योगी सरकार गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही पर भी विशेष जोर दे रही है। सरकार का मानना है कि निवेश आकर्षित करने के लिए केवल नई परियोजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके क्रियान्वयन की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित की जा रही सड़कों, नालियों, पार्किंग, कॉमन सुविधाओं और अन्य आधारभूत ढांचों की स्वतंत्र जांच की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। यही नहीं, यूपी को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत सरकार औद्योगिक अवसंरचना को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निवेशक अनुकूल माहौल और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए यूपीसीडा को भी अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है।

मद्यनिषेध विभाग के माध्यम से गांव-गांव और स्कूलों तक पहुंचा जागरूकता संदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे प्रयासों को लगातार गति मिल रही है। योगी सरकार ने नशे के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए जागरूकता को सबसे प्रभावी हथियार बनाते हुए व्यापक अभियान संचालित किया है। मद्यनिषेध विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश भर में युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों के बीच नशा विरोधी कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया, जिससे लाखों लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुंचा। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल नशे की रोकथाम तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराकर उन्हें स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में भी लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में निबंध, भाषण, पोस्टर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। 1352 प्रतियोगिताओं में शामिल हुए हजारों छात्र-छात्राएं मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में कुल 1352 प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 5404 छात्र-छात्राओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। क्योंकि युवाओं को सही दिशा में प्रेरित कर नशे के खिलाफ मजबूत सामाजिक वातावरण तैयार किया जा सकता है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाए गए, जहां खेलकूद प्रतियोगिताओं और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया। इन कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर पर भी सराहना मिली। प्रदेशभर में 1767 संगोष्ठियां, 356 प्रदर्शनियों का आयोजन योगी सरकार के निर्देश पर मद्यनिषेध विभाग ने राज्य स्तर से लेकर जनपद स्तर तक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। वर्ष भर में 40 राज्य स्तरीय और 1727 जनपद स्तरीय संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। इनमें शिक्षकों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धर्माचार्यों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लेकर नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया। इसके साथ ही प्रदेशभर में 356 प्रदर्शनियों की स्थापना कर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों और उसके सामाजिक नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। मेलों, त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और राष्ट्रीय पर्वों पर विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों तक संदेश पहुंचाया गया। योगी सरकार में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जागरूकता को मिली नई ताकत यूपी के जनसामान्य तक सरल और प्रभावी तरीके से संदेश पहुंचाने के लिए विभाग ने 829 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराए। नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो, जादू, गीत, कव्वाली और अन्य सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया।

नए सिलेबस के बीच किताबों का संकट, यूपी के हजारों स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित

लखनऊ  नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत अप्रैल से हो चुकी है और प्रदेश के हजारों सीबीएसई स्कूलों में कक्षा 9वीं के छात्रों को अब तक सभी जरूरी किताबें नहीं मिल सकी हैं। सीबीएसई की ओर से इस बार सिलेबस में बदलाव किया गया, लेकिन एनसीईआरटी समय से नई पुस्तकें उपलब्ध नहीं करा पाया। इसका असर सीधे छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रदेश में करीब 4500 सीबीएसई स्कूल हैं। अनुमान के अनुसार कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या चार से छह लाख के बीच है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है, जिन्हें अभी तक पूरी किताबें नहीं मिल पाई हैं। कई स्कूलों में सिर्फ कुछ विषयों की किताबें पहुंची हैं, जबकि गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसी मुख्य विषयों की पुस्तकें अब भी कम हैं। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में छात्रों को अवकाश के दौरान पढ़ाई और होमवर्क पूरा करने में परेशानी हो रही है। अभिभावक खोज रहे किताबें कई अभिभावक बाजार और आनलाइन माध्यमों से किताबें खोज रहे हैं, लेकिन वहां भी पर्याप्त स्टाक नहीं मिल रहा। कुछ स्कूल फिलहाल पीडीएफ नोट्स और फोटोकापी के सहारे पढ़ाई करा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सिलेबस बदलने के कारण पुरानी किताबों से पढ़ाना भी आसान नहीं है। इससे पढ़ाई की गति प्रभावित हो रही है और बच्चों की बुनियादी तैयारी कमजोर पड़ सकती है। खासकर बोर्ड पैटर्न की तैयारी शुरू करने वाले छात्रों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। अभिभावकों ने मांग की है कि एनसीईआरटी और संबंधित एजेंसियां जल्द पुस्तकें उपलब्ध कराएं, ताकि नए सत्र की पढ़ाई व्यवस्थित तरीके से शुरू हो सके।