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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, 11 अभ्यर्थियों को मंच पर मिला पत्र

लखनऊ  सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र हाथ में आया तो किसी को परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद जगी, किसी को अपने बच्चे के भविष्य की चिंता से राहत मिली। वर्षों की मेहनत के बाद नौकरी मिलने की खुशी साझा करते हुए कुछ अभ्यर्थी भावुक हुए तो बोलते-बोलते गला भी रुंध गया। मौका था सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।   मुख्यमंत्री ने 11 नवचयनित अभ्यर्थियों को मंच पर प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपे। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने अपनी संघर्ष यात्रा और परिवार की परिस्थितियां साझा कीं। उन्होंने चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बताते हुए मुख्यमंत्री योगी का आभार जताया।   ससुराल की पहली महिला जिसे मिली सरकारी नौकरी लखनऊ की श्रुति श्रीवास्तव ने बताया कि वह अपने ससुराल की पहली महिला हैं, जो सरकारी सेवा में जा रही हैं। गर्भावस्था के दौरान उन्हें भविष्य को लेकर चिंता रहती थी। नियुक्ति मिलने से उन्हें नई उम्मीद और आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।   कुशीनगर के आदित्य सिंह किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में चयन से उन्हें प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला है। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रही।   गोरखपुर की ब्यूटी शाही ने कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। सरकारी नौकरी मिलने से वह जनसेवा के साथ परिवार की परिस्थितियों को भी बेहतर कर सकेंगी। अपनी बात रखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।   इन 11 अभ्यर्थियों को मंच पर मिला नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाने वालों में प्रयागराज के आशुतोष त्रिपाठी, आगरा के ओम बघेल, गाजीपुर के प्रवीण कुमार, प्रतापगढ़ की सुधा, कुशीनगर के आदित्य सिंह, हमीरपुर की नेहा देवी, फतेहपुर की रूपाली गुप्ता, लखनऊ की श्रुति श्रीवास्तव, गोरखपुर की ब्यूटी शाही, गाजीपुर के शुभम कुमार और प्रतापगढ़ के अमित कुमार सिंह शामिल रहे।   10 दिन में 6,672 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिशन रोजगार के तहत पिछले 10 दिनों में यह चौथा बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। 19 सितंबर को लोकभवन में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 818 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। इनमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा, आयुष, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।   20 सितंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड से चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पदों पर चयनित अभ्यर्थी शामिल थे।   शिक्षा विभाग में 3,567 को मिली नियुक्ति 22 सितंबर को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। इनमें 1,090 महिलाएं और 2,477 पुरुष शामिल थे। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता और सहायक अध्यापक के पदों पर इनका चयन हुआ।   सोमवार को 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिलने के साथ 19 से 28 सितंबर के बीच हुए चार बड़े कार्यक्रमों में कुल 6,672 युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।

राजभर ने अखिलेश से पूछा- कांग्रेस के खिलाफ बोलने की परमिशन आपने दी या चच्चू आत्मनिर्भर हो गए?

लखनऊ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बढ़ती तकरार को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सपा-कांग्रेस के रिश्तों पर सवाल उठाते हुए संभावित गठबंधन को ‘ठगबंधन’ करार दिया। 'ए महाराज, इसको गठबंधन कहते हैं?' राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अखिलेश यादव रायबरेली गए तो कांग्रेस के लोग उन्हें इटावा जाने को कह रहे हैं। उन्होंने शिवपाल यादव को लेकर भी तंज कसा और कहा कि ‘चच्चू’ कांग्रेस वालों को जसवंतनगर बुलाकर औकात दिखाना चाह रहे हैं। राजभर ने आगे लिखा कि इमरान मसूद अखिलेश को आंखें दिखा रहे हैं और इकरा हसन कांग्रेस वालों को उनकी जगह दिखा रही हैं। वहीं, अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम ने सपा को छोटा भाई बना दिया है और सपा के प्रवक्ता कांग्रेसियों को लिमिट में रहने की सीख दे रहे हैं। इसी को लेकर राजभर ने सवाल किया, 'ए महाराज, इसको गठबंधन कहते हैं?' 'असल में इसको ठगबंधन कहा जाता है' ओमप्रकाश राजभर ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर तंज कसते हुए इसे ‘ठगबंधन’ बताया। उन्होंने लिखा कि ठगी के लिए प्लानिंग भी हो रही है और ‘लूट के माल’ की बंदरबांट को लेकर भी लड़ाई हो रही है। राजभर ने आगे तंज करते हुए लिखा कि लड़ाई इस बात की है कि ‘कौन बड़ा ठग?’ अखिलेश से पूछा- नेताओं को परमिशन आपने दी है? राजभर ने अखिलेश यादव से सवाल करते हुए लिखा कि क्या अपने नेताओं को कांग्रेस के खिलाफ बोलने की परमिशन उन्होंने ही दी है या फिर शिवपाल यादव और बाकी नेता इस मामले में ‘आत्मनिर्भर’ हो गए हैं। अमेठी जाने की दी नसीहत राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव को अमेठी जाने की नसीहत भी दी। उन्होंने लिखा कि अगर अखिलेश रथ निकाल रहे हैं तो लखनऊ के बगल में अमेठी है और उन्हें वहां एक चक्कर लगा लेना चाहिए। राजभर ने अमेठी का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर भी तंज कसा। उन्होंने लिखा कि यही अमेठी है, जिसने ‘आपके मित्र राहुल बाबा को सिर्फ हराया ही नहीं, बल्कि भगा दिया।’ पोस्ट के अंत में राजभर ने लिखा 'उसी अमेठी घूम आइये महाराज, कांग्रेसियों को जलने दीजिए।'

रायबरेली से आए बुजुर्ग की पीड़ा सुन मुख्यमंत्री ने तत्काल दोषियों पर कार्रवाई का दिया निर्देश

जनता दर्शन  शांति, खुशहाली व सुदृढ़ कानून व्यवस्था नए यूपी की पहचान, इसमें बाधा डालने वालों को सिखाएं सबकः मुख्यमंत्री रायबरेली से आए बुजुर्ग की पीड़ा सुन मुख्यमंत्री ने तत्काल दोषियों पर कार्रवाई का दिया निर्देश  राजस्व से जुड़े प्रकरणों का समय से निस्तारण करने पर रहा सीएम का जोर  आमजन से बोले सीएम- घबराइए मत, सबकी समस्या का होगा समाधान लखनऊ  जनसेवा को सदैव सर्वोपरि रखने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और पीड़ितों को समाधान का भरोसा दिया। रायबरेली से आए एक बुजुर्ग अपनी पीड़ा कहते भावुक हो गए, इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कहा कि शांति, खुशहाली व सुदृढ़ कानून व्यवस्था ही नए उत्तर प्रदेश की पहचान है, इसमें बाधा डालने वालों को कानूनी ढंग से सबक सिखाएं। कब्जे की शिकायतों पर भी उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ दोषियों पर कार्रवाई की जाए।  हर पीड़ित से मिले मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर उनकी पीड़ा जानी। उन्होंने हर पीड़ित को आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध-पारदर्शी निस्तारण कराएं।  मुख्यमंत्री ने बुजुर्ग का सुना प्रकरण, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश  रायबरेली से एक बुजुर्ग भी जनता दर्शन में पहुंचे। शरीर पर लगी चोट मुख्यमंत्री को दिखाते हुए उनका गला रुंध गया। इस पर मुख्यमंत्री ने उनसे पूरे प्रकरण की जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उन पर अकारण हमला कर दिया है। आरोपियों को लगता है कि वह कहीं बाहर रहते हैं। ऐसे में घात लगाए बदमाशों ने उन्हें पीटा और रुपये छीन लिए। इस पर मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि सख्त से सख्त कार्रवाई कर इस प्रकरण में तत्काल कार्रवाई करें।  राजस्व से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर  कुछ पीड़ितों ने जमीन जबरन कब्जा किए जाने की भी शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने राजस्व से जुड़े प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया।

मिशन रोजगार के तहत 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री योगी ने विकसित गांव का दिया मंत्र

नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रही सपा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   मिशन रोजगार के तहत 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र, मुख्यमंत्री योगी ने विकसित गांव का दिया मंत्र   बोले- नौजवानों के हक पर डकैती डालने वाले नए रूप में आ रहे सामने, भ्रम फैलाकर यूपी को फिर अराजकता में धकेलने की करेंगे कोशिश   मुख्यमंत्री योगी का हमला- सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था, बाकी गांवों और जिलों की नहीं थी चिंता   बोले- 2017 से पहले हर जिले में चलती थी माफिया की समानांतर सरकार, आज यूपी दंगा, उपद्रव और माफिया से मुक्त   छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरी का लक्ष्य, बोले- सपा-कांग्रेस के नेता गिनते रहें, हम नियुक्ति पत्र बांटते रहेंगे   राजभर बोले- सपा सरकार में नौकरी के हिसाब से तय होता था रेट, शाही ने कहा- अब बिना घूसखोरी मिल रही सरकारी नौकरी   ग्राम पंचायत जितनी बढ़ाएगी अपनी आय, सरकार उतनी ही देगी अतिरिक्त धनराशि, आत्मनिर्भर गांव बनाने पर जोर   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को सरकारी नौकरियों और गांवों के विकास को लेकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने नौजवानों के हक पर डकैती डाली, दलितों को योजनाओं से वंचित रखा और पिछड़ों का हक मारा, वही आज नए स्लोगन के साथ गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। मुख्यमंत्री योगी ने सपा-कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। वे गिनते रहें, हम नियुक्ति पत्र वितरित करते रहेंगे।   मुख्यमंत्री योगी मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों और उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि आयोग ने निष्पक्ष और शुचितापूर्ण चयन प्रक्रिया समय सीमा में पूरी की है।   योग्यता थी, फिर भी नौकरी रहती थी दूर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी नौकरी का विज्ञापन निकलते ही आशंकाएं खड़ी हो जाती थीं। गरीब और बिना पहुंच वाले परिवार का बच्चा योग्य होने के बावजूद नौकरी से दूर रहता था। इस जकड़न और बेईमानी को समाप्त करने के लिए सरकार ने व्यवस्था बदली। आज साढ़े नौ लाख नौजवान सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुके हैं।   उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश की गिनती देश के पांच पिछड़े राज्यों में होती थी, जबकि आज प्रदेश शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट का दायरा तीन गुना हुआ है।   सपा के लिए विकास का मतलब केवल सैफई मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। प्रदेश के बाकी गांवों और जिलों से उसे कोई मतलब नहीं था। केंद्र सरकार गरीबों को आवास और शौचालय देना चाहती थी, लेकिन तत्कालीन सरकार योजनाओं को लागू नहीं होने देती थी। गरीबों के आवास की बात आती थी तो सपा अपने कैडर को लाभ देना चाहती थी।   हर जिले में चलती थी माफिया की समानांतर सरकार मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले हर जिले में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। असलहे लहराते हुए गाड़ियों के काफिले निकलते थे और पर्व-त्योहारों से पहले उपद्रव शुरू हो जाता था। उन्होंने कहा कि सरकार ने माफिया तंत्र और अराजकता पर प्रभावी कार्रवाई की। आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा, उपद्रव और माफिया से मुक्त होकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।   अक्टूबर से फिर बंटेंगे नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा अध्यक्ष नियुक्ति पत्र नहीं बांटे जाने की बात कर रहे थे। सितंबर में यह चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। अक्टूबर के पहले सप्ताह से फिर नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। अगले छह महीने में एक लाख नौजवानों को सरकारी नियुक्ति पत्र देने का लक्ष्य है।   उन्होंने सरदार भगत सिंह की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश के लिए बलिदान दिया। नियुक्ति पत्र पाने वाले बहुत से युवाओं की उम्र भी 20 से 27 वर्ष के बीच है। उन्हें अपनी ऊर्जा और प्रतिभा प्रदेश की समृद्धि में लगानी है।   पंचायत भवन नहीं, अब ग्राम सचिवालय मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब गांवों में ग्राम सचिवालय बनाए गए हैं। इनमें ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के कार्यालय के साथ लेखपाल, बीसी सखी और पंचायत सहायक के बैठने की व्यवस्था है। डिजिटल लाइब्रेरी और कॉन्फ्रेंस रूम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।   उन्होंने कहा कि जन्म, आय और निवास प्रमाणपत्र जैसी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को ब्लॉक और तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। बीसी सखी, पंचायत सहायक, अन्नपूर्णा भवन और उत्सव भवन से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।   अपनी आय बढ़ाने वाली पंचायत को अतिरिक्त धन मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ग्राम पंचायतें अपनी भूमि, दुकानों और तालाबों के बेहतर उपयोग से आय बढ़ा सकती हैं। धार्मिक महत्व न रखने वाले तालाबों में मत्स्य पालन कराया जा सकता है। ग्राम पंचायत जितनी अपनी आय अर्जित करेगी, सरकार उतनी ही अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से मॉडल और स्मार्ट ग्राम पंचायत की सोच के साथ काम करने को कहा।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित उत्तर प्रदेश का सपना आत्मनिर्भर व विकसित ग्राम पंचायत से पूरा होगा। नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारी इसमें महत्वपूर्ण सारथी हैं।   नौकरी के हिसाब से तय होता था रेट: राजभर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में नौकरी का विज्ञापन निकलते ही गुर्गे सक्रिय हो जाते थे और पद के हिसाब से रकम तय होती थी। आज बिना पैसे सरकारी नौकरी मिल रही है।   अब बिना घूसखोरी मिल रही नौकरी: शाही कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के प्रयासों से साढ़े नौ लाख युवाओं को बिना घूसखोरी और भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरी मिली है।   कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित कार्यक्रम में महापौर सुषमा खड़कवाल, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा, प्रमुख सचिव पंचायती … Read more

यूपी में बजट खर्च पर योगी की सख्ती, विभागों को 60% व्यय सुनिश्चित करने का टारगेट

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बजट प्राविधानों के सापेक्ष वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और व्यय की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने सुस्त विभागों पर सख्ती दिखाई उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की पहली छमाही समाप्त हो रही है, ऐसे में जिन विभागों में बजट खर्च की गति अपेक्षित नहीं है, वहां तत्काल सुधार किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले दो माह में हर हाल में 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी हों और कुल आवंटित बजट के सापेक्ष कम से कम 60 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री रविवार शाम को एक महत्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की उपस्थिति में चालू वित्तीय वर्ष के बजट प्राविधानों, वित्तीय स्वीकृतियों और वास्तविक व्यय की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में प्रदेश के सर्वाधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों के कार्यों और वित्तीय प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट का उद्देश्य केवल धनराशि आवंटित करना नहीं, उसका समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करते हुए उसका लाभ जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने वित्त मंत्री को निर्देश दिए कि विभागीय मंत्रियों के साथ बैठक कर बजट खर्च की नियमित और बिंदुवार समीक्षा करें। जिन विभागों में नीतिगत, प्रक्रियात्मक या तकनीकी कारणों से स्वीकृतियों अथवा व्यय में अड़चन आ रही है, उसका तत्काल समाधान कराया जाए। वित्त विभाग भी इसकी नियमित निगरानी करे और प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराए। हर किसान को मिले क्रेडिट कार्ड का लाभ मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए गांवों में और किसानवार मैपिंग कराई जाए, ताकि पात्र किसानों को चिन्हित कर उन्हें बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने के भी निर्देश दिए। जिम्मेदार अधिकारियों की तय करें जवाबदेही मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं और विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा समयबद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कार्यों में अनावश्यक देरी या गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। केंद्र सहायतित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन योजनाओं में भारत सरकार से धनराशि प्राप्त होनी है, उनमें विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से सीधे संवाद कर लंबित धनराशि और स्वीकृतियों से जुड़े विषयों का समाधान कराएं, ताकि केंद्रीय सहायता से संचालित योजनाओं की गति प्रभावित न हो। 9,99,056.48 करोड़ है यूपी का कुल बजट समीक्षा में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश का कुल बजट 9,99,056.48 करोड़ है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 1,58,474.15 करोड़ अधिक है। इसमें विकास योजनाओं के लिए 5,01,957.09 करोड़ का प्राविधान किया गया है। अब तक शासन स्तर से 5,15,918.44 करोड़, यानी 51.6 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें योजनाओं से संबंधित 2.13 लाख करोड़ से अधिक की स्वीकृतियां शामिल हैं। इसके सापेक्ष प्रदेश में अब तक 2,83,870.11 करोड़ का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बजट का आकलन वास्तविक आवश्यकता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर किया जाए, ताकि धनराशि अनावश्यक रूप से प्राविधानित न रहे और उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। अधिकारी फील्ड में जाकर करें समीक्षा मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करें और जहां कार्यों की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार कराएं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करें। विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन उपलब्ध बजट का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

IAS छोड़ने के बाद क्या करेंगी दिव्या मित्तल? 29 सितंबर सुबह 8:30 बजे करेंगी बड़ा खुलासा

लखनऊ उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की पूर्व जिलाधिकारी (DM) और चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था। इसके 14 दिन बाद 14 सितंबर को उनका इस्तीफा स्वीाकर कर लिया गया। उन्होंने इसकी जानकारी एक्स हैंडल पर दी थी। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके भविष्य को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं, इन दावों पर विराम लगाते हुए दिव्या मित्तल ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि वह 29 सितंबर को सुबह अपने भविष्य के प्लान का एलान करने वाली हैं। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे कयासों का किया जिक्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में उन तमाम अटकलों और कयासों का जिक्र किया, जिसको लेकर उनके इस्तीफे के बाद से कयास लगाए जा रहे थे। उन्होंने लिखा, "आगे क्या करना है? मैंने पढ़ा: बच्चे छोटे हैं। अब घर। अच्छा पैकेज मिलेगा। वापस विदेश। IAS पर किताब लिखी है। कोचिंग। टिकट पक्का हो गया होगा। राजनीति। 29 सितंबर, सुबह 8:30 बजे बताऊंगी।" दिव्या मित्तल के इस पोस्ट के बाद उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है और लोग उन्हें आगे भविष्य के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों ने लिखा है कि हमें इंतजार है। ऐसे में अब सभी 29 सितंबर को सुबह 8:30 बजे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब दिव्या मित्तल स्वयं अपने अगले कदम का खुलासा करेंगी। कौन हैं पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल? गौरतलब है कि पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले में हुआ है। दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई की है। शादी के बाद वह अपने पति गगनदीप के साथ लाखों के पैकेज पर लंदन चली गईं। कुछ समय बाद वह लंदन की नौकरी छोड़ वापस अपने देश भारत लौट आईं। यहां आकर वह यूपीएससी की तैयारी में जुट गई। इसके बाद साल 012 में दिव्या मित्तल यूपीएससी ने क्रैक किया। उनका सेलेक्शन आईपीएस के लिए हुआ, लेकिन वह आईएएस बनना चाहती थी। दूसरे प्रयास में 2013 में आईएएस बन गईं। दिव्या मित्तल अपने कार्यकाल के दौरान मिर्जापुर, बस्ती, देवरिया जिले में डीएम रहीं। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी संभाली।  

बेल्जियम से यूपी पहुंचा 200 टन का विशाल वेसल, 308 पहियों वाले ट्रक ने मचाई हलचल

लखनऊ  Balrampur News बेल्जियम देश से समुद्र के रास्ते भारत पहुंचे विशालकाय वेसल की देश भर में चर्चा है। हर किसी को इसके बारे में जानने की इच्छा है। लगभग 200 टन वजनी इस वेसल को 308 पहियों वाला ट्रक लेकर यूपी के बलरामपुर की तरफ बढ़ रहा है।  ये ट्रक जिस भी शहर से गुजर रहा है वहां इसे देखने वालों का हुजूम उमड़ रहा है। कोई सेल्फी ले रहा तो कोई वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहा है। आइए यहां जानते हैं कि इस ट्रक और इसपर लदे इस विशालकाय वेसल के बारे में पूरी डिटेल। कैसे भारत पहुंचा वेसल जानकारी के अनुसार, ये वेसल ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर उतरा और फिर इसे 308 पहियों वाले विशालकाय ट्रेलर पर क्रेन की मदद से रखा गया। इसके बाद ये ट्रक झारखंड और बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचा। अब तक किन शहरों से होकर गुजरा वायरल ट्रक ओडिशा से शुरू हुई इस ट्रक की यात्रा झारखंड और बिहार से होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंची है। सफर के दौरान ये ट्रक झारखंड की राजधानी रांची के पास नगड़ी टोल प्लाजा और पिस्का रेलवे क्रॉसिंग से होते हुए गुजरा। इसके बाद इस ट्रक ने बिहार में प्रवेश किया जहां ये औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर के रास्ते आगे बढ़ा। आखिर में ये ट्रक अब यूपी में प्रवेश कर चुका है। जहां ये चंदौली और वाराणसी के रास्ते अपने गंतव्य बलरामपुर चीनी मिल की और बढ़ रहा है। रोजाना केवल 10 से 12 किलोमीटर की दूरी हो रही तय इस वेसल के भारी वजन को सड़क पर संतुलित करने के लिए ट्रक में 308 पहिये लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि अत्यधिक वजन के कारण यह महाट्रक रोजाना केवल 10 से 12 किलोमीटर की ही दूरी तय कर पा रहा है। इस ट्रक ने अभी तक के सफर में लगभग 2 करोड़ रुपए का डीजल इस्तेमाल किया है। किस काम आएगा ये 200 टन का वेसल बेल्जियम से आया ये 200 टन का बाहूबली वेसल बलरामपुर चीनी मिल से जुड़े एथनॉल प्लांट के लिए ले जाया जा रहा है। इस वेसल में वैक्यूम बॉयलर जैसे इंटस्ट्रियल बॉयलर उपकरण हैं। 308 पहियों वाले ट्रक के लिए बनाना पड़ा स्पेशल रूट इसका बड़ा आकार होने के कारण आम सड़कों से निकालने के लिए स्पेशल रूट बनाने की जरूरत पड़ी। कई शहरों में कई मार्गों को बंद करना पड़ा तो कहीं बिजली के खंभे और तारों को हटाना भी पड़ा। कैमूर में इसे निकालने के लिए पुल तोड़ने की भी जरूर पड़ी। इस ट्रक के साथ पुलिस प्रशासन की टीम भी लगातार चल रही है। बता दें कि ये ट्रक अब वाराणसी से होते हुए गाजीपुर की तरफ बढ़ रहा है और जल्दी ही बलरामपुर पहुंचाया जाएगा।  

अयोध्या-बस्ती में आपदा प्रभावित परिवारों तक पहुंची सरकारी मदद, प्रभारी मंत्री ने सौंपे चेक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने की संवेदनशीलता और तत्परता दिखाई है। अयोध्या और बस्ती में तेज आंधी-पानी से प्रभावित परिवारों के बीच जनपद के प्रभारी मंत्री एवं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही पहुंचे और पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने सीएम योगी के निर्देश पर प्रभावित परिवारों को दैवीय आपदा राहत कोष से घटना के 24 घंटे के अंदर चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक सौंपे। अयोध्या में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण चार लोगों की असामयिक मृत्यु हुई। इनमें सोहावल तहसील के शिवदासपुर, शुक्ला का पुरवा निवासी 18 वर्षीय आकाश वर्मा, मिल्कीपुर तहसील निवासी 12 वर्षीय आर्यन, रुदौली तहसील निवासी 76 वर्षीय रामस्वरूप और 40 वर्षीय धर्मराज शामिल हैं। इन सभी की मृत्यु पेड़ गिरने के कारण हुई। प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अयोध्या सर्किट हाउस में आकाश वर्मा, रामस्वरूप और धर्मराज के परिजनों को चार-चार लाख रुपये के चेक सौंपे। वहीं बस्ती में भी आपदा प्रभावित दो परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता दी गई। बस्ती में भी पीड़ित परिवारों को मिली राहत बस्ती सदर तहसील के चौबाह गांव निवासी मोतीराम की आंधी में छप्पर गिरने से मृत्यु हुई थी, उनकी पत्नी कैलाशा देवी को चार लाख रुपये की सहायता दी गई। वहीं महुली पश्चिम के ग्राम बलुआ निवासी प्रशांत की सर्पदंश से मृत्यु के बाद उनकी माता मीरा देवी को भी चार लाख रुपये का चेक सौंपा गया। हर नागरिक के सुख-दुःख में अभिभावक की तरह खड़ी है सरकार कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, सेवा और सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री योगी के स्पष्ट निर्देश हैं कि दैवीय या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को अविलंब राहत, चिकित्सीय सुविधा और आर्थिक संबल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने जिला प्रशासन को सभी प्रभावितों को हरसंभव सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम कर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश

लखनऊ प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से प्रभावित विद्युत आपूर्ति को जल्द सामान्य करने के लिए योगी सरकार ने निगरानी और राहत कार्य तेज कर दिए हैं।  प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपी पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम कर जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का फीडरवार निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और 1912 पर आने वाली प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लिया जाए। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिया कि उपभोक्ताओं को यह भी बताया जाए कि उनकी विद्युत आपूर्ति कब तक बहाल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अस्पताल, पेयजल सहित आवश्यक सेवाओं की बिजली आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर बहाल की जाए। बारिश और पेड़ों के गिरने से 33 और 11 केवी फीडरों में बड़े पैमाने पर ब्रेकडाउन हुआ है। कई स्थानों पर बिजली के पोल भी टूटे हैं। इन्हें बदलने के साथ ही क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का काम दिन-रात जारी है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीमें लगातार कार्य कर रही हैं। शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति लगभग सामान्य डिस्कॉम अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ सहित प्रदेश के अधिकांश शहरी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति लगभग सामान्य कर दी गई है। मध्यांचल में बरेली मंडल को छोड़कर शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य है। 33 केवी के छह सबस्टेशन बंद हैं, जिन्हें शाम तक चालू करने का लक्ष्य है। पूर्वांचल में बस्ती और संतकबीरनगर को छोड़कर अधिकांश शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य है। पश्चिमांचल में अमरोहा, बिजनौर, संभल और मुरादाबाद के ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़कर आपूर्ति सामान्य है। दक्षिणांचल में इटावा, कन्नौज, औरैया और फर्रुखाबाद को छोड़कर अन्य शहरों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। केस्को क्षेत्र में 33 केवी का कोई ब्रेकडाउन नहीं है। सब जगह आपूर्ति नॉर्मल कर दी गई है।  24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम, मैनपावर की कमी ना हो अधिक प्रभावित जिलों में अंबेडकरनगर, भदोही, आजमगढ़, बलिया, बहराइच, बस्ती, बरेली, गोंडा, देवरिया, लखीमपुर, मऊ, सिद्धार्थनगर, कानपुर देहात, हमीरपुर, शाहजहांपुर, आगरा, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, बुलंदशहर, गोरखपुर और वाराणसी ग्रामीण शामिल हैं। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यालयों से अधिकारियों को जिलों में भेजा गया है। आरडीएसएस और बिजनेस प्लान के कार्यों में लगी कार्यदायी संस्थाओं को भी अनुरक्षण कार्य में लगाया गया है।  शक्तिभवन और डिस्कॉम के कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत आपूर्ति बहाली के कार्य में मैनपावर की कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। जिला और फीडरवार लगातार मॉनिटरिंग करते हुए कार्य कराया जाए और एक भी फीडर छूटने न पाए। अस्पताल, पेयजल सहित अन्य आवश्यक सेवाओं की विद्युत आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर बहाल की जाए। उन्होंने कहा कि सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता है। शक्ति भवन और सभी डिस्कॉम के कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय हैं। डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों में आई समस्याओं और चल रहे अनुरक्षण कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक नितेश कुमार ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

ट्रेड शो में बागपत के घेवर का स्वाद चख बोले लोग, सावन के बाद भी खूब भा रहा*

ग्रेटर नोएडा इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में बागपत का घेवर लोगों को रुकने और स्वाद चखने के लिए मजबूर कर रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के पवेलियन में बागपत के स्टाल पर पहुंच रहे लोग पहले घेवर को बनते देख रहे हैं और फिर उसका स्वाद ले रहे हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद से आए लोगों ने घेवर की कुरकुराहट और खोये की परत को पसंद किया। कई लोगों के लिए यह भी आकर्षण का विषय रहा कि आमतौर पर सावन की मिठाई माने जाने वाला घेवर यहां सितंबर में भी ताजा तैयार होकर बिक रहा है। बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार में तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार है। इसी परिवार से जुड़े दीपक गोयल ट्रेड शो में स्टाल का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां आने वाले कई लोग घेवर देखकर सवाल करते हैं कि यह तो सावन में मिलने वाली मिठाई है, फिर इस समय कैसे तैयार हो रही है। उन्हें बताया जाता है कि बागपत में घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को अलग-अलग मौसम में बागपत के घेवर की उपलब्धता की जानकारी मिल रही है। सामने बन रहा ताजा घेवर ट्रेड शो में बागपत से पांच कारीगर आए हैं। ये कारीगर स्टाल पर ही लोगों के सामने ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। इससे भी लोगों की उत्सुकता बढ़ रही है। दीपक गोयल के अनुसार रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है और यहां घेवर 600 रुपये किलो की दर से बेचा जा रहा है। घेवर की खासियत बताते हुए उन्होंने कहा कि शुद्ध दूध से तैयार खोये का इस्तेमाल स्वाद को अलग पहचान देता है। नीचे का कुरकुरा हिस्सा और ऊपर जमी खोये की परत इसकी विशेषता है। बागपत के अलावा दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसकी मांग रहती है। दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज समेत ट्रेड शो में पहुंचे लोगों ने घेवर का स्वाद लिया। लोगों ने स्टाल पर रुककर घेवर बनाने की प्रक्रिया भी देखी। लोग विशेष तरीके से घेवर बनता देख उत्साहित दिखाई दिए। पहली बार एक जिला एक व्यंजन के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को ट्रेड शो में जगह दी गई है। बागपत से घेवर को इसमें शामिल किया गया है। इससे जिले की पारंपरिक मिठाई को दूसरे जिलों से आए लोगों तक पहुंचने का अवसर मिला है।