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CM योगी से चेक पाकर भावुक हुए अनुदेशक, बोले- सरकार ने हमें सम्मान दिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों चेक पाकर भावुक हुए अनुदेशक, कहा- सरकार ने दिया सम्मान लोकभवन में आयोजित समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 14 अनुदेशकों को दिया गया बढ़े हुए मानदेय का चेक अब मानदेय 17 हजार रुपये प्रतिमाह और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने से अनुदेशकों में खुशी की लहर  लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत हजारों अंशकालिक अनुदेशकों को बड़ी सौगात देते हुए उनके मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। इसके बाद प्रदेशभर के अनुदेशकों में खुशी की लहर है। रविवार को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों चेक पाकर अनुदेशकों के चेहरे भी खुशी से खिल उठे। सभी अनुदेशकों ने एक स्वर में मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी कर उन्हें सम्मान देने का काम किया है। अनुदेशकों का 9 हजार से बढ़कर 17,000 रुपये हुआ मानदेय दरअसल 24717 अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से 9 हजार रुपये बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। इस उपलक्ष्य में लोकभवन में अनुदेशक सम्मान समारोह एवं चेक वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित 14 अनुदेशकों को चेक वितरित कर उन्हें सम्मानित किया। मुख्यमंत्री के हाथों चेक पाकर अनुदेशकों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने इसे योगी सरकार की संवेदनशीलता और शिक्षा कर्मियों के प्रति सम्मान की भावना बताया। रायबरेली की अनुदेशक शिखा सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों चेक पाकर उन्हें बेहद खुशी हुई है।  मानदेय 17 हजार रुपये होने से बड़ी राहत मिलेगी- अनुदेशक शिखा सिंह ने बताया कि पहले 9 हजार रुपये में परिवार चलाना मुश्किल होता था, लेकिन अब सीधे 17 हजार रुपये मानदेय मिलने से बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने अनुदेशकों की समस्याओं को गंभीरता से समझा है। ऐसे ही लखनऊ के कौशलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री ने न केवल मानदेय बढ़ाया है बल्कि अनुदेशकों के लिए 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी लागू किया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार पहले भी अनुदेशकों का मानदेय बढ़ा चुकी है और इस बार एक साथ 8 हजार रुपये की वृद्धि कर सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय अनुदेशकों के आत्मसम्मान और आर्थिक मजबूती दोनों को बढ़ाएगा। पहली बार हमारे लिए इतना भव्य सम्मान समारोह- अनुदेशक अयोध्या के उपेंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि सेवा में आने के बाद पहली बार अनुदेशकों के लिए इतना भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कम मानदेय में कार्य करने के बावजूद अनुदेशक पूरी निष्ठा से बच्चों को शिक्षित कर रहे थे, लेकिन अब सरकार ने उनकी मेहनत को सम्मान दिया है। वहीं गोरखपुर के देवेंद्र लाल ने कहा कि पहले 7 हजार रुपये में जीवन यापन बेहद कठिन था, लेकिन योगी सरकार ने पहले इसे 9 हजार और अब 17 हजार रुपये तक पहुंचाकर बड़ी राहत दी है।  मुख्यमंत्री ने होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड का किया विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। उन्होंने 'होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड’ का विमोचन किया। जिसे बाल वाटिका से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट कार्ड में केवल शैक्षणिक प्रदर्शन ही नहीं बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक, संज्ञानात्मक और व्यक्तित्व विकास का भी समग्र मूल्यांकन किया जाएगा। इसे नई शिक्षा नीति के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इन 14 अनुदेशकों को सौंपे चेक मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अनुदेशकों को चेक सौंपे। इनमें गोरखपुर के देवेंद्र लाल, वाराणसी के सुभाष सिंह, अयोध्या के उपेंद्र कुमार शुक्ला, लखीमपुर खीरी के प्रवीण राणा, रायबरेली की शिखा सिंह, बाराबंकी की हिना खातून और दीप्ति वर्मा, सीतापुर की प्राची मिश्रा, हमीरपुर के कामता प्रसाद राजपूत, लखनऊ के कौशलेन्द्र सिंह और सुमित पाल, अलीगढ़ की सलोनी कसेरे, उन्नाव की रश्मि यादव तथा हरदोई की रश्मि सिंह शामिल रहे। योगी सरकार ने 2022 में भी 2 हजार रुपये बढ़ाया था मानदेयः संदीप सिंह इस अवसर पर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में हुए व्यापक सुधारों को लेकर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा के लिए 9,645 तथा कार्यानुभव शिक्षा के लिए 6,192 अनुदेशक कार्यरत हैं, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 2022 में सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय 7 हजार रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये किया था और अब इसे बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसे शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों के हित में सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है। मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में भी तेजी से काम किया जा रहा है। वर्तमान में 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हैं, जहां विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश में 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित हैं और शेष सभी ब्लॉकों में भी बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय स्थापित करने की कार्ययोजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,64,882 बच्चों को निःशुल्क सहायक उपकरण भी वितरित किए गए हैं।

आधुनिक तकनीक और नई नीतियों के दम पर योगी सरकार का बड़ा कृषि विजन

योगी सरकार स्मार्ट कृषि, आधुनिक तकनीक और बाजार उन्मुख नीतियों से प्रदेश को बनाएगी कृषि विकास का राष्ट्रीय मॉडल   – वर्ष 2047 तक वैश्विक कृषि केंद्र बनेगा उत्तर प्रदेश, विश्वस्तरीय कृषि हब बनेगा उत्तर प्रदेश – विश्व बैंक समर्थित यूपी एग्रीज परियोजना से पिछड़े क्षेत्रों में कृषि और मत्स्य पालन को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ  योगी सरकार कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। योगी सरकार स्मार्ट कृषि, आधुनिक तकनीक, बाजार-उन्मुख नीतियों और किसानों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं के माध्यम से प्रदेश को देश का अग्रणी कृषि मॉडल बनाने की दिशा में काम कर रही है। योगी सरकार का वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को सतत, उच्च-मूल्य एवं निर्यात-उन्मुख कृषि का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य है।   राष्ट्रीय कृषि निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत से अधिक तक ले जाने का लक्ष्य  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2047 के लिए कृषि क्षेत्र के व्यापक लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं। योगी सरकार का लक्ष्य अनाज, दलहन और तिलहन की उत्पादकता में कई गुना वृद्धि करना है। फसल तीव्रता को 250 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाने, फसलोपरांत नुकसान को 4 प्रतिशत से कम करने और राष्ट्रीय कृषि निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत से अधिक तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही जैविक खेती के दायरे को भी तेजी से बढ़ाने की योजना है। वहीं कृषि उत्पादकता बढ़ाने, कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने और आधुनिक तकनीकों को खेती से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख कृषि क्षेत्र में मॉडल बनकर उभरा है। उत्तर प्रदेश खाद्यान्न, गेहूं, आलू, गन्ना, सब्जियों और शहद के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कृषि क्षेत्र में प्रदेश का योगदान लगातार बढ़ रहा है और कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। वर्तमान में प्रदेश का कृषि सकल मूल्य वर्धन लगभग 4.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो प्रदेश की जीएसवीए का लगभग 15.7 प्रतिशत है। कृषि निर्यात में 2.13 गुना वृद्धि दर्ज की गई  वर्ष 2017 से 2025 के बीच कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। इस दौरान गेहूं की पैदावार में 16 प्रतिशत, अनाज उत्पादन में 17 प्रतिशत, तिलहन उत्पादन में 34 प्रतिशत और दलहन उत्पादन में 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। योगी सरकार ने कृषि क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे बाजार और निर्यात से जोड़ने की दिशा में भी बड़े कदम उठाए हैं। प्रदेश से कृषि निर्यात में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कृषि निर्यात में 2.13 गुना वृद्धि दर्ज की गई है और वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 7,139 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। योगी सरकार किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। कुल सिंचित क्षेत्र में 33 प्रतिशत की वृद्धि  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई और फसल विविधीकरण को भी प्राथमिकता दी है। सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था के विस्तार से किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में कुल सिंचित क्षेत्र में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। तिलहन क्षेत्रफल में 141 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि दलहन उत्पादन में 17 प्रतिशत और अनाज उत्पादन में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे किसानों की आय में सुधार के साथ खेती अधिक लाभकारी बन रही है। इसके अलावा स्मार्ट कृषि, ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि सेवाएं, जैविक खेती और कृषि आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देकर खेती को आधुनिक बनाया जा रहा है। साथ ही विश्व बैंक समर्थित यूपी एग्रीज परियोजना भी प्रदेश के कृषि विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। लगभग 325 मिलियन डॉलर की इस परियोजना के माध्यम से पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 28 जिलों में कृषि और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक तकनीकों का विस्तार और कृषि उत्पादन में 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है। इससे पिछड़े क्षेत्रों के किसानों को विशेष लाभ मिल रहा है।

रिवरफ्रंट से स्पोर्ट्स हब तक: गोमती तट पर 2035 तक बदल जाएगी राजधानी की तस्वीर

लखनऊ दिल्ली से जुड़े जिलों को लेकर बने एनसीआर की तर्ज पर उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन (यूपी एससीआर) की प्रस्तावित योजना में लखनऊ में गोमती नदी के किनारे पर बड़े स्तर पर विकास का खाका तैयार किया गया है। इस योजना के तहत गोमती तट को केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे पर्यटन, संस्कृति, वेलनेस और सार्वजनिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। योजना को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है, जिसमें राष्ट्र प्रेरणा स्थल से लेकर इकाना स्टेडियम तक गोमती किनारे आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पहले चरण में बनेगा सांस्कृतिक और हेरिटेज कॉरिडोर: योजना के पहले चरण को वर्ष 2027 से 2032 तक लागू करने का प्रस्ताव है। इसमें एनएच-230 से आचार्य नरेंद्रदेव मार्ग तक करीब 11.5 किलोमीटर लंबे हिस्से का विकास किया जाएगा। इस हिस्से में प्रेरणा स्थल और आसपास के क्षेत्रों को सिटी फॉरेस्ट व सांस्कृतिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। प्रस्ताव के अनुसार यहां हेरिटेज प्रोमेनेड, कल्चरल प्लाजा, ओपन एयर एग्जीबिशन स्पेस, स्कल्पचर गार्डन और मेमोरी वॉल बनाई जाएंगी। इसके अलावा सांस्कृतिक घाट, इंटरप्रेटिव पाथवे, रिवर डेक, फ्लोटिंग फाउंटेन और वाटर गार्डन जैसी सुविधाएं भी विकसित होंगी। रात के समय आकर्षण बढ़ाने के लिए सॉफ्ट और नॉन-इंट्रूसिव लाइट एंड साउंड जोन भी बनाए जाएंगे। योजना में यह भी प्रस्तावित है कि गोमती नदी के किनारे ऐसे सार्वजनिक स्थल विकसित किए जाएं जहां लोग सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और मनोरंजन गतिविधियां कर सकें। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। वेलनेस और स्पोर्ट्स हब बनेगा गोमती तट योजना का दूसरा चरण वर्ष 2030 से 2035 तक लागू किया जाएगा। इसमें एनएच-24 से आउटर रिंग रोड तक करीब 7.75 किमी क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। इस हिस्से में वेलनेस एंड सस्टेनेबिलिटी पार्क और ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है। यहां इंडोर स्पोर्ट्स एरिया, ओपन प्लेइंग कोर्ट, स्टार गेजिंग एरिया, ईको ट्रेल्स व प्रोमेनेड बनाए जाएंगे। गोमती बैराज, लोहिया पथ व इकाना स्टेडियम के आसपास के क्षेत्रों को आधुनिक रिवरफ्रंट सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। आधुनिक वॉकिंग जोन व हरित क्षेत्र विकसित करने पर विशेष जोर है। अशोक मार्ग से हनुमान सेतु तक विशेष कनेक्टिविटी योजना में अशोक मार्ग, हनुमान सेतु, गोमती बैराज और लोहिया पथ को जोड़ते हुए एकीकृत रिवर कॉरिडोर विकसित करने का भी प्रस्ताव शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इससे शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी और गोमती तट राजधानी के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में शामिल हो जाएगा। अनूपगंज आरओबी के सभी पिलर बने, डेक का काम शुरू दूसरी ओर, गोसाईगंज-मोहनलालगंज के बीच लखनऊ-सुल्ताननपुर रेल खंड पर स्थित अनूपगंज रेलवे क्रासिंग पर बनाए जा रहे ओवर ब्रिज के सभी पिलर तैयार कर लिए गए हैं। डेक निर्माण के लिए इनके ऊपर बेस भी बना दिए गए हैं। अब बलियाखेड़ा की तरफ से डेक(ब्रिज के ऊपर का सड़क वाला हिस्सा) बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। रेलवे क्रासिंग के पास का ब्रिज का ढांचा नहीं खड़ा किया गया है। इसे गर्डर रखने की प्रक्रिया शुरू करने के कुछ महीनों पहले ही तैयार किया जाएगा। अनूपगंज आरओबी गोसाईगंज की तरफ से बलिया खेड़ा के पास से शुरू शुरू होगा और मोहनलालगंज की तरफ शिवलर के पास उतरेगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ब्रिज के नीचे दोनों तरफ सर्विस लेन भी बनेगा। कुछ स्थानों पर सर्विस लेन के लिए भूमि अधिग्रहण चल रहा है। ब्रिज निर्माण कार्य में अभी तक 58% की प्रगति है। रोजाना 100 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं: लखनऊ-सुल्तानपुर रेल खंड पर स्थित अनूपगंज क्रासिंग से रोजाना 100 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। क्रासिंग से रोजाना 30 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही होती है। गेट बंद होने पर यहाँ 30 से 45 मिनट का लंबा जाम लगता है। इसी समस्या के समाधान के लिए शासन ने यहां रेलवे ओवर ब्रिज को मंजूरी दी है। तीन लाख लोगों को लाभ आरओबी के बनने से गोसाईगंज, मोहनलालगंज समेत आसपास के दो दर्जन से अधिक इलाकों और कॉलोनियों में रहने वाली तीन लाख से ज्यादा की आबादी को सीधे तौर पर आने-जाने में बड़ी राहत मिलेगी।

योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: पंचायत चुनाव, मेट्रो विस्तार और मेडिकल कॉलेज को हरी झंडी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे करोड़ों ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के लिए सोमवार का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में कुल 12 प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई है। इस बैठक का सबसे बड़ा फैसला पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर रहा। इसने चुनाव के रास्ते की सबसे बड़ी कानूनी अड़चन को दूर कर दिया है। 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन को हरी झंडी उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन को लेकर पिछले काफी समय से बनी उहापोह की स्थिति आखिरकार समाप्त हो गई है। योगी कैबिनेट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी (OBC) आरक्षण का सटीक स्वरूप और आनुपातिक आबादी तय करने के लिए 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' (Dedicated OBC Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है। अब इस आयोग की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों के आरक्षण का रोटेशन तय किया जाएगा, जिससे सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फॉर्मूले की वैधानिक बाध्यता पूरी हो जाएगी। योगी कैबिनेट के फैसले के अनुसार पांच सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश होंगे। अन्य सदस्य पिछड़ा वर्ग की जानकारी रखने वाले लोग ही होंगे। इनका कार्यकाल छह महीने होगा। लोकतंत्र सेनानियों को मिला 'कैशलेस इलाज' का ऐतिहासिक तोहफा आपातकाल (इमरजेंसी) के खिलाफ लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन करने वाले उत्तर प्रदेश के लोकतंत्र सेनानियों को सरकार ने बड़ा सम्मान दिया है। कैबिनेट ने इन्हें 'मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना' के दायरे में लाते हुए शत-प्रतिशत कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को पास कर दिया है। अब इन्हें और इनके आश्रितों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। लखनऊ-आगरा मेट्रो के विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर मुहर राजधानी लखनऊ और ताजनगरी आगरा के मेट्रो नेटवर्क को रफ्तार देने के लिए दो बड़े फैसलों को मंजूरी मिली है। लखनऊ में चारबाग से वसंतकुंज तक बनने वाले मेट्रो के पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (East-West Corridor) के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) के मसौदे को कैबिनेट ने स्वीकृत कर लिया है। आगरा में कॉरिडोर-2 (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) के तहत मेट्रो स्टेशनों और वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण (Land Transfer) के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई है। स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के अन्य अहम फैसले तीन नए मेडिकल कॉलेज: प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करते हुए हाथरस, बागपत और कासगंज जिलों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर नए मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट की सहमति मिल गई है। समुदाय परियोजना का विस्तार: ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल (HCL) फाउंडेशन के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए चल रही 'समुदाय परियोजना' को अगले 5 साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। कौशल विकास: वस्त्रोद्योग (टेक्सटाइल सेक्टर) में रोजगार और युवाओं के हुनर को बढ़ावा देने के लिए नई कौशल विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। नियम प्रणालियों और वित्तीय ढांचों में बड़े सुधार कैबिनेट ने प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता के लिए कई संशोधनों को भी पास किया है।यूपीपीएससी परिसीमन के तहत उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के कृत्यों के परिसीमन में बदलाव करने के लिए संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। परिवहन विभाग को राहत: यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों पर लगने वाले अतिरिक्त टैक्स को रेशनलाइज (तर्कसंगत) करने पर मुहर लगी, जिससे रोडवेज की माली हालत सुधरेगी। जन्म-मृत्यु पंजीकरण: पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़ी नई नियमावली को स्वीकृत किया गया है। वित्तीय प्रस्ताव: ऊर्जा विभाग द्वारा केनरा बैंक से निकाली गई 1500 करोड़ रुपये की राशि के कार्येत्तर इस्तेमाल के प्रस्ताव को कार्योत्तर मंजूरी दी गई। इसके अलावा भारतीय स्टांप अधिनियम और वर्ष 2007 में जारी राज्य प्रतिभूतियों के जनरल नोटिफिकेशन में संशोधन के प्रस्तावों को भी पास किया गया।

श्रद्धालुओं को बड़ा झटका, खराब स्वास्थ्य के चलते प्रेमानंद महाराज ने रोकी पदयात्रा

वृंदावन वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत बिगड़ने के चलते उनकी पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। साथ ही उनके एकांतिक दर्शन भी फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। जिसके बाद देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं में मायूसी छा गई। रविवार देर रात बड़ी संख्या में भक्त महाराजजी के दर्शन के लिए वृंदावन पहुंचे थे, लेकिन रोजाना की तरह तड़के 3 बजे प्रेमानंद महाराज पदयात्रा पर नहीं निकले। उनकी जगह आश्रम के शिष्य पहुंचे और लाउडस्पीकर के जरिए श्रद्धालुओं को जानकारी दी। किडनी की बीमारी से जूझ रहे प्रेमानंद जी महाराज शिष्यों ने बताया कि महाराज जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए आज से पदयात्रा स्थगित की जा रही है। साथ ही भक्तों से सड़क किनारे भीड़ न लगाने और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई। घोषणा के बाद श्रद्धालुओं को बिना दर्शन किए लौटना पड़ा। केली कुंज आश्रम के अनुसार संत प्रेमानंद महाराज पिछले 21 वर्षों से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य में अचानक आई परेशानी के कारण डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें आराम दिया जा रहा है। पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हालांकि आश्रम की ओर से यह नहीं बताया गया है कि पदयात्रा और दर्शन दोबारा कब शुरू होंगे। महाराजजी के दर्शन न होने से भक्त भावुक नजर आए। श्रद्धालु उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। बता दें कि संत प्रेमानंद महाराज रोजाना तड़के केली कुंज आश्रम से करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर सौभरी वन जाते हैं। उनकी पदयात्रा में शामिल होने और दर्शन पाने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार भक्त आते हैं। प्रेमानंद महाराज का जन्म यूपी के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। पिता शंभू नारायण पांडे और मां रामा देवी हैं। तीन भाई हैं जिसमें प्रेमानंद मंझले हैं। बचपन में प्रेमानंद जी का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। वह बचपन से ही आध्यात्मिक रहे। और कक्षा 8 तक पढ़ाई की है। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। फिर वह मथुरा आ गए। प्रेमानंद के शिष्य हैं कई कई सेलिब्रिटी आपको बता दें प्रेमानंद जी महाराज के बचपन का नाम अनिरुद्ध पांडेय हैं। 13 साल की उम्र में उन्होने संन्यास ले लिया था। यूट्यूब पर प्रेमानंद के 76 लाख, इंस्टाग्राम पर 2.4 करोड़ और फेसबुक पर 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर हैं। बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटी प्रेमानंद के शिष्य हैं। जिनमें क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा, आशुतोष राणा, हेमा मालिनी, रतन राजपूत, मीका सिंह समेत कई लोग शामिल हैं।

‘जनता दर्शन’ में आए आमजनों से मिले सीएम योगी, हर आगंतुक की सुनीं समस्या

जनता दर्शन जनसेवा, सुरक्षा व सुशासन सरकार का संकल्पः मुख्यमंत्री  ‘जनता दर्शन’ में आए आमजनों से मिले सीएम योगी, हर आगंतुक की सुनीं समस्या  अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर समस्या निस्तारण का दिया निर्देश  मुख्यमंत्री से मिलने बिहार से पहुंचीं एक महिला, सीएम योगी ने किया अभिवादन भीषण गर्मी में अकारण घर से न निकलें, परिवार का रखें विशेष ध्यान: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यस्ततम दिनचर्या के बीच भी सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों से मिले और हर किसी की समस्या सुनी। मुख्यमंत्री ने सभी से कहा कि जनसेवा, सुरक्षा व सुशासन सरकार का संकल्प है। आपकी हर उचित समस्या का समाधान होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर समस्याओं के निस्तारण का भी निर्देश दिया। 'जनता दर्शन' में बिहार से भी एक महिला मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचीं, मुख्यमंत्री ने उनका अभिवादन कर कुशलक्षेम पूछा।  डीएम-एसपी स्वयं कराएं समस्या का समाधान  मुख्यमंत्री ने सभी के प्रार्थना पत्र लेने के उपरांत सम्बंधित जनपदों के अधिकारियों को प्रकरण की जांच कराकर पीड़ितों को न्याय दिलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक स्वयं मामलों पर नजर रखें और पीड़ितों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।  हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान सरकार की प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देशित किया कि पूरी तत्परता व संवेदनशीलता से सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सभी को न्याय मिले। हर पात्र को योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो, जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। मुख्यमंत्री ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। महाराज जी प्रणाम! कवनो दिक्कत नाही बा, बस आपके दर्शन करेके रहल  ‘जनता दर्शन’ में सीएम योगी की प्रशंसक एक महिला बिहार से आई थीं। मुख्यमंत्री सभी की समस्या सुनते हुए उनके पास भी पहुंचे। पूछा कि कहां से आई हैं, आपको क्या परेशानी है। इस पर महिला ने कहा- महाराज जी, प्रणाम। हम बिहार से आइल बानी। हमके कवनो दिक्कत नाही बा। बस आपके दर्शन करेके रहल, त आ गइलीं। इस पर सीएम योगी ने उनका अभिवादन किया, फिर कहा कि गर्मी बहुत पड़ रही है। इस भीषण गर्मी में अकारण घर से न निकलें और परिवार के सभी लोगों का भी विशेष ध्यान रखें।

भीषण गर्मी पर CM योगी सख्त, अधिकारियों को राहत-बचाव के लिए अलर्ट रहने के निर्देश

भीषण गर्मी पर सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश- राहत-बचाव को लेकर रहें सतर्क अस्पतालों, पेयजल और बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर विशेष नजर, लू से बचाव के लिए जनता से सतर्क रहने की अपील 19 से 21 मई तक ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत: मौसम विभाग लखनऊ उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और लू को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियों को अलर्ट मोड में रहने को कहा है।  अस्पतालों में हीट स्ट्रोक वार्ड तैयार रखने के निर्देश सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संवेदनशील जिलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। वहीं सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। अस्पतालों में दवाओं, बेड और डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने के साथ एंबुलेंस सेवाओं को भी सक्रिय रखने को कहा गया है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था और बिजली आपूर्ति बाधित न होने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। दोपहर में घर से बाहर निकलने से बचें: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि अत्यधिक गर्मी और लू के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। सीएम ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से पर्याप्त पानी पीने, हल्के सूती कपड़े पहनने और धूप में निकलते समय सिर ढककर रखने की अपील की है। 19 से 21 मई तक सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत मौसम विभाग ने बताया कि 19, 20 और 21 मई को प्रदेश के कई जिलों में अति उष्ण लहर चल सकती है। तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होने की संभावना है। इसे देखते हुए योगी सरकार ने सभी जिलों को राहत और बचाव की तैयारियां समय रहते पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई या प्रशासन की मनमानी? लखनऊ में बड़ा विवाद

लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को वकीलों के अवैध चैंबरों पर चला बुलडोजर बड़ा विवाद बन गया है. प्रशासन की कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और विरोध कर रहे वकीलों पर लाठीचार्ज भी किया गया. इस घटना के बाद बार एसोसिएशन और अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली है. वकीलों ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन” बताते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है. ऐसे में आइए जानते हैं इस पूरे विवाद की कहानी… दरअसल हाईकोर्ट ने कुछ अवैध चैंबरों को हटाने का निर्देश दिया था. जिसके बाद नगर निगम की टीम के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और चैंबर तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुई. हालांकि इस दौरान वकीलों ने विरोध भी किया. जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया. वकीलों का आरोप है कि हाईकोर्ट ने केवल 72 चैंबर हटाने का आदेश दिया था, लेकिन प्रशासन ने आदेश की आड़ में करीब 240 चैंबरों पर कार्रवाई कर दी. उनका कहना है कि जिन चैंबरों को चिन्हित किया गया था, उनमें कई वकीलों के चैंबर शामिल ही नहीं थे, बावजूद इसके उन्हें भी तोड़ दिया गया. जहां 30 सालों से बैठ कर रहे थे काम, उसे ही तोड़ दिया गया बुलडोजर कार्रवाई के दौरान कई वकीलों की तबीयत भी बिगड़ गई. कुछ अधिवक्ता जमीन पर बैठकर विरोध जताते रहे तो कुछ ने कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से बहस की. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया. वकीलों का कहना है कि वे पिछले करीब 30 वर्षों से वहीं बैठकर वकालत कर रहे हैं और अचानक इस तरह की कार्रवाई उनके रोजगार पर सीधा हमला है. अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर उन्हें वहां से हटाया जा रहा है तो पहले उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी. वहीं प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं रोकी और उचित समाधान नहीं निकाला तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा. वहीं प्रशासन का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है. विवाद पर डीसीपी का आया बयान मामले में डीसीपी वेस्ट कमलेश दीक्षित का भी बयान आया है. उनका कहना है कि सभी को नोटिस दिया जा चुका है. कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हो रही है. विरोध ऐसे कामों में होता है. हम तैयार है ऐसे कार्रवाई के लिए. कानून सब के लिए बराबर है.

चारबाग-वसंतकुंज मेट्रो से लेकर पंचायत चुनाव तक, योगी कैबिनेट में कई बड़े फैसले आज

लखनऊ उत्तर प्रदेश में  गांव-गांव एक ही बात की चर्चा है कि पंचायत चुनाव कब होंगे? ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में हो रही देरी की सबसे बड़ी वजह यूपी में समर्पित ओबीसी आयोग का न होना है. हाईकोर्ट के सख्त तेवर अपनाए जाने के बाद यूपी की योगी सरकार इस दिशा में अपने कदम बढ़ा सकती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है? यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ, लेकिन अब तस्वीर साफ होती दिख रही है. पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग के गठन पर कैबिनेट में मोहर लग सकती है. इसके साथ ही एक दर्जन से ज्यादा प्रस्ताव को मंजूरी देने का प्रस्ताव है.   यूपी में मौजूदा ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो गया था, जिसे सरकार ने अक्टूबर 2026 तक के लिए बढ़ा तो दिया है, लेकिन कानूनी रूप से उसके पास समर्पित आयोग के अधिकार नहीं हैं. ओबीसी आयोग अपने तीन साल के मूल कार्यकाल के रहते हुए ही आरक्षण का सर्वे कर सकता है. इसीलिए योगी सरकार सोमवार को कैबिनेट बैठक में ओबीसी आयोग गठन को अमलीजामा पहना सकती है. ओबीसी आयोग गठन को मिलेगी मंजूरी? वैश्विक संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मितव्ययता की अपील के बाद सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक होगी. इस लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सूबे में पंचायत चुनाव पर छाए सियासी बादल कैबिनेट की बैठक में छंटती हुई दिख सकती हैय कैबिनेट बैठक में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे सकती है. ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का स्वरूप तय होगा. सूबे में समर्पित ओबीसी आयोग नहीं होने के चलते पंचायत चुनाव के आरक्षण की प्रक्रिया लटकी हुई है. हाईकोर्ट ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा था कि ओबीसी आयोग में क्यों देरी हो रही है, जिसके बाद ही समर्पित ओबीसी आयोग गठन को कैबिनेट में मंजबूरी देने ही. यूपी में नए ओबीसी आयोग के बाद ही ओबीसी की आबादी का सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का आकलन का सर्वे करेगी. ओबीसी आयोग के सर्वे के आधार पर यह तय होगा कि पंचायतों में ओबीसी आरक्षण कितने प्रतिशत और किन सीटों पर लागू होगा.ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण पहले से ही निर्धारित है. इसके अलावा कौन सीट आरक्षित करनी है और कौन नहीं? चारबाग से वसंतकुंज तक मेट्रो को मंजूरी? योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में लखनऊ मेट्रो से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है.मेट्रो परियोजना में पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) के लिए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी जा सकती है. इसके अलावा आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) में मेट्रो स्टेशन एवं वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट विचार कर सकती है. कैबिनेट बैठक में क्या-क्या होंगे फैसले लोक सेवा आयोग के कृत्यों के परिसीमन में बदलाव करने के लिए संशोधन प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने विचार के लिए रखा जाएगा. ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल फाउंडेशन के साथ चल रही समुदाय परियोजना को पांच साल के लिए और बढ़ाया जाएगा. परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है. वस्त्रोद्योग को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास परियोजनाओं को मंजूरी कैबिनेट दे सकती है. आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोकतंत्र सेनानियों को कैबिनेट कैशलेस इलाज की सुविधा देने जा रही है. सोमवार को कैबिनेट बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाएगा. इन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी. कैबिनेट में जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़ी नई नियमावली को भी मंजूरी मिल सकती है. हाथरस, बागपत और कासगंज में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट सहमति देगी. वहीं, कैबिनेट के सामने ऊर्जा विभाग केनरा बैंक से निकाली गई 1500 करोड़ रुपये की राशि की कार्येत्तर इस्तेमाल के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा. कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है. राज्य सरकार की प्रतिभूतियों के संबंध में वर्ष 2007 में जारी किए गए जनरल नोटिफिकेशन में संशोधन का प्रस्ताव पर कैबिनेट विचार करेगी. इसके अलावा भारतीय स्टांप अधिनियम में भी संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है. वहीं, यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर लगने वाले अतिरिक्त कर को रेशनलाइज करने को भी कैबिनेट अपनी मुहर लगा सकती है.

पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा कदम, सबसे बड़ी अड़चन दूर होने के संकेत

 लखनऊ, उत्तर प्रदेश में  गांव-गांव एक ही बात की चर्चा है कि पंचायत चुनाव कब होंगे? ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में हो रही देरी की सबसे बड़ी वजह यूपी में समर्पित ओबीसी आयोग का न होना है. हाईकोर्ट के सख्त तेवर अपनाए जाने के बाद यूपी की योगी सरकार इस दिशा में अपने कदम बढ़ा सकती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है?  यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ, लेकिन अब तस्वीर साफ होती दिख रही है. पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग के गठन पर कैबिनेट में मोहर लग सकती है. इसके साथ ही एक दर्जन से ज्यादा प्रस्ताव को मंजूरी देने का प्रस्ताव है।  यूपी में मौजूदा ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो गया था, जिसे सरकार ने अक्टूबर 2026 तक के लिए बढ़ा तो दिया है, लेकिन कानूनी रूप से उसके पास समर्पित आयोग के अधिकार नहीं हैं. ओबीसी आयोग अपने तीन साल के मूल कार्यकाल के रहते हुए ही आरक्षण का सर्वे कर सकता है. इसीलिए योगी सरकार सोमवार को कैबिनेट बैठक में ओबीसी आयोग गठन को अमलीजामा पहना सकती है।  ओबीसी आयोग गठन को मिलेगी मंजूरी?  वैश्विक संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मितव्ययता की अपील के बाद सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक होगी. इस लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सूबे में पंचायत चुनाव पर छाए सियासी बादल कैबिनेट की बैठक में छंटती हुई दिख सकती हैय कैबिनेट बैठक में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे सकती है।  ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का स्वरूप तय होगा. सूबे में समर्पित ओबीसी आयोग नहीं होने के चलते पंचायत चुनाव के आरक्षण की प्रक्रिया लटकी हुई है. हाईकोर्ट ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा था कि ओबीसी आयोग में क्यों देरी हो रही है, जिसके बाद ही समर्पित ओबीसी आयोग गठन को कैबिनेट में मंजबूरी देने ही।  यूपी में नए ओबीसी आयोग के बाद ही ओबीसी की आबादी का सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का आकलन का सर्वे करेगी. ओबीसी आयोग के सर्वे के आधार पर यह तय होगा कि पंचायतों में ओबीसी आरक्षण कितने प्रतिशत और किन सीटों पर लागू होगा.ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण पहले से ही निर्धारित है. इसके अलावा कौन सीट आरक्षित करनी है और कौन नहीं?  चारबाग से वसंतकुंज तक मेट्रो को मंजूरी? योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में लखनऊ मेट्रो से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है.मेट्रो परियोजना में पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) के लिए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी जा सकती है. इसके अलावा आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) में मेट्रो स्टेशन एवं वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट विचार कर सकती है।  कैबिनेट बैठक में क्या-क्या होंगे फैसले लोक सेवा आयोग के कृत्यों के परिसीमन में बदलाव करने के लिए संशोधन प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने विचार के लिए रखा जाएगा. ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल फाउंडेशन के साथ चल रही समुदाय परियोजना को पांच साल के लिए और बढ़ाया जाएगा. परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है. वस्त्रोद्योग को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास परियोजनाओं को मंजूरी कैबिनेट दे सकती है।  आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोकतंत्र सेनानियों को कैबिनेट कैशलेस इलाज की सुविधा देने जा रही है. सोमवार को कैबिनेट बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाएगा. इन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी. कैबिनेट में जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़ी नई नियमावली को भी मंजूरी मिल सकती है।  हाथरस, बागपत और कासगंज में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट सहमति देगी. वहीं, कैबिनेट के सामने ऊर्जा विभाग केनरा बैंक से निकाली गई 1500 करोड़ रुपये की राशि की कार्येत्तर इस्तेमाल के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा. कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।  राज्य सरकार की प्रतिभूतियों के संबंध में वर्ष 2007 में जारी किए गए जनरल नोटिफिकेशन में संशोधन का प्रस्ताव पर कैबिनेट विचार करेगी. इसके अलावा भारतीय स्टांप अधिनियम में भी संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है. वहीं, यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर लगने वाले अतिरिक्त कर को रेशनलाइज करने को भी कैबिनेट अपनी मुहर लगा सकती है।