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अयोध्या राम मंदिर फंड गड़बड़ी की जांच में 9 पेनड्राइव में सबूत सुरक्षित, कई नए नाम आए सामने

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच जारी है। शुक्रवार को जांच का पांच दिन था। एसआईटी के अधिकारियों ने प्रारम्भिक रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि शनिवार की शाम तक एसआईटी प्रारंभित रिपोर्ट सीएम योगी को सौंप सकती है। इसके लिए शुक्रवार को भी देर रात तक अफसर लिखा-पढ़ी में व्यस्त रहे। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने 9 पेनड्राइव में जरूरी दस्तावेजों और साक्ष्यों को संकलित कर सुरक्षित किया है। फिलहाल पांचवें दिन से अधिकारियों ने जांच में पूरी सख्ती बरती है और लगातार लोगों से पूछताछ की है। इस पूछताछ में कई नये नाम भी शामिल हुए हैं जिसमें श्रद्धालुओं के द्वारा भगवान को अर्पित किए गए आभूषणों के इधर-उधर गायब हो जाने के आरोपों से सम्बन्धित लोग प्रमुख रुप से सम्मिलित किए गए हैं। नौ संदिग्धों में दो की खास भूमिका राम मंदिर में चढ़ावे की धांधली के प्रकरण की छानबीन के लिए यहां पहुंची एसआईटी पांच दिन तक आठ से दस घंटे तक के कठिन परिश्रम के बाद भी इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाई कि राम मंदिर में होने वाली घटनाओं को लेकर ट्रस्टियों की चुप्पी क्यों नहीं टूटी। एसआईटी के अधिकारियों ने इस प्रश्न का जवाब जानने के लिए मौखिक पूछताछ के साथ लिखित रूप से भी सवाल जवाब किए फिर भी इसका संतोषजनक जवाब ट्रस्टियों ने नहीं दिया। फिलहाल एसआईटी के सदस्यों की ओर से पड़ताल जारी है। पड़ताल की कड़ी में सभी से अलग-अलग व सामूहिक पूछताछ के साथ ग्रीन हाउस के अलग-अलग कक्ष में अलग-अलग अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जा रही है। गणना कार्य में लगे नौ संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ में दो व्यक्तियों जिनमें एक गणना प्रभारी भी है, का नाम बार-बार समान रूप से आया है। बैंक कर्मियों को जांच से मुक्त रखने वालों की सामने आई भूमिका सूत्र बताते हैं कि इन्हीं लोगों की सीसीटीवी कैमरे की निगरानी को पुलिस कंट्रोल रूम से अलग करने में भी भूमिका रही है। इसके अलावा गणना स्थल में आवागमन के दौरान बैंक कर्मियों को जांच से मुक्त रखने में इन्हीं लोगों की भूमिका सामने आई है। इसके कारण एस आईटी का शिकंजा गणना प्रभारी पर कसता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि गणना स्थल में नियुक्त गणना कर्मियों की भर्ती में भी गणना प्रभारी की ओर से संस्तुति की जाती रही। बताया जाता है कि संगठन के कार्यकर्ता के रूप में इन गणना कर्मियों को नियुक्त कराया गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय के करीबी व राम मंदिर के सेवादार रामशंकर यादव टिन्नू से लेकर गणना कर्मियों द्वारा इस बात की पुष्टि के बाद जांच अधिकारी बहुत सतर्कता के साथ छानबीन कर रहे कि संगठित अपराध की कोई सुनियोजित योजना तो नहीं थी अथवा अवसर पाकर षड्यंत्र को अंजाम दिया गया। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच जारी है। शुक्रवार को जांच का पांच दिन था। एसआईटी के अधिकारियों ने प्रारम्भिक रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि शनिवार की शाम तक एसआईटी प्रारंभित रिपोर्ट सीएम योगी को सौंप सकती है। इसके लिए शुक्रवार को भी देर रात तक अफसर लिखा-पढ़ी में व्यस्त रहे। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने 9 पेनड्राइव में जरूरी दस्तावेजों और साक्ष्यों को संकलित कर सुरक्षित किया है। फिलहाल पांचवें दिन से अधिकारियों ने जांच में पूरी सख्ती बरती है और लगातार लोगों से पूछताछ की है। इस पूछताछ में कई नये नाम भी शामिल हुए हैं जिसमें श्रद्धालुओं के द्वारा भगवान को अर्पित किए गए आभूषणों के इधर-उधर गायब हो जाने के आरोपों से सम्बन्धित लोग प्रमुख रुप से सम्मिलित किए गए हैं। नौ संदिग्धों में दो की खास भूमिका राम मंदिर में चढ़ावे की धांधली के प्रकरण की छानबीन के लिए यहां पहुंची एसआईटी पांच दिन तक आठ से दस घंटे तक के कठिन परिश्रम के बाद भी इस सवाल का जवाब नहीं खोज पाई कि राम मंदिर में होने वाली घटनाओं को लेकर ट्रस्टियों की चुप्पी क्यों नहीं टूटी। एसआईटी के अधिकारियों ने इस प्रश्न का जवाब जानने के लिए मौखिक पूछताछ के साथ लिखित रूप से भी सवाल जवाब किए फिर भी इसका संतोषजनक जवाब ट्रस्टियों ने नहीं दिया। फिलहाल एसआईटी के सदस्यों की ओर से पड़ताल जारी है। पड़ताल की कड़ी में सभी से अलग-अलग व सामूहिक पूछताछ के साथ ग्रीन हाउस के अलग-अलग कक्ष में अलग-अलग अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जा रही है। गणना कार्य में लगे नौ संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ में दो व्यक्तियों जिनमें एक गणना प्रभारी भी है, का नाम बार-बार समान रूप से आया है। बैंक कर्मियों को जांच से मुक्त रखने वालों की सामने आई भूमिका सूत्र बताते हैं कि इन्हीं लोगों की सीसीटीवी कैमरे की निगरानी को पुलिस कंट्रोल रूम से अलग करने में भी भूमिका रही है। इसके अलावा गणना स्थल में आवागमन के दौरान बैंक कर्मियों को जांच से मुक्त रखने में इन्हीं लोगों की भूमिका सामने आई है। इसके कारण एस आईटी का शिकंजा गणना प्रभारी पर कसता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि गणना स्थल में नियुक्त गणना कर्मियों की भर्ती में भी गणना प्रभारी की ओर से संस्तुति की जाती रही। बताया जाता है कि संगठन के कार्यकर्ता के रूप में इन गणना कर्मियों को नियुक्त कराया गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय के करीबी व राम मंदिर के सेवादार रामशंकर यादव टिन्नू से लेकर गणना कर्मियों द्वारा इस बात की पुष्टि के बाद जांच अधिकारी बहुत सतर्कता के साथ छानबीन कर रहे कि संगठित अपराध की कोई सुनियोजित योजना तो नहीं थी अथवा अवसर पाकर षड्यंत्र को अंजाम दिया गया।

बेसिक स्कूल रसोइयों के लिए बड़ा फैसला, सेवा शर्तों और छुट्टियों का मिलेगा लाभ

लखनऊ बेसिक स्‍कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) बनाने वाले रसोइयों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल हो सकती है। हाल ही में कई स्तर पर हुई बैठकों के बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकारण इनकी सेवा नियमावली बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। नियमावली बनने के बाद अन्य संविदाकर्मियों की तरह छुट्टियों और नियुक्ति प्रक्रिया सहित कई सेवा शर्तें इन पर भी भी लागू होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में बच्चों को पका हुआ भोजन दिए जाने की योजना लागू की गई थी। उसके बाद 2007 में पिछड़े ब्लॉक के अपर प्राइमरी स्कूलों में और 2008 में सभी अपर प्राइमरी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की योजना लागू कर दी गई। वर्तमान में 1.41 लाख स्कूलों के 1.52 करोड़ बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए 3.63 लाख रसोइये स्कूलों में कार्यरत हैं। ऐसे बनी सहमति रसोइयों को 2000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता है, लेकिन इनकी अब तक सेवा शर्तें नहीं बनीं। ग्राम समिति इनका चयन करती हैं। कुछ रसोइये 70-75 साल की उम्र में भी कार्यरत हैं। वहीं, ग्राम समिति चाहती है तो किसी को कभी भी हटा देती है। इनकी सेवानिवृत्ति की कोई आयु सरकार ने तय नहीं की है। वहीं, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 11 महीने का मानदेय मिलता है, लेकिन रसोइयों को 10 माह का ही मानदेय मिलता है। अब इनकी सेवा शर्ते बनाने की तैयारी की जा रही है। रसोइयों के प्रदर्शन के बाद अफसरों संग हुई बैठक हाल ही में रसाइयों के प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के साथ उनकी बैठकें हुईं। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और शासन स्तर के अधिकारियों ने भी मंथन किया। उसके बाद प्राधिकरण को इस बाबत प्रस्ताव करने के लिए कहा गया है। इनकी रिटायरमेंट उम्र 62 साल की जा सकती है। सेवा शर्तों से क्या अंतर आएगा? सेवा शर्तें बन जाने से इनकी रिटायरमेंट उम्र तय हो जाएगी। इससे ग्राम समितियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। अभी इनको किसी तरह की कोई छुट्टी का प्रावधान नहीं है। यहां तक कि मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव का भी प्रावधान नहीं है। सेवा शर्तें बन जाने से रसोइयों को ये लाभ भी मिल सकेंगे। अन्य संविदा कर्मियों की तरह इनके 11 माह के मानदेय पर भी विचार किया जा रहा है।  

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बनेगा नया रिकॉर्ड! 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं के साथ योग करेगा उत्तर प्रदेश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है। प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के लगभग 1.42 करोड़ छात्र-छात्राओं तथा 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत 78 हजार से अधिक छात्राओं को योग से जोड़ने की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को प्रदेशभर के विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास होगा, जिसमें विद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और अभिभावक सहभागिता करेंगे। कार्यक्रमों के प्रभावी अनुश्रवण और समन्वय के लिए शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। योग को जन आंदोलन और स्वस्थ जीवनशैली का आधार बनाने की दिशा में योगी सरकार की सतत पहल का प्रभाव इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भी दिखाई देगा, जहां गांव से लेकर शहर तक विद्यालय परिसर योगमय वातावरण के साक्षी बनेंगे।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा विभाग ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयुष मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों तथा खंड शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग का प्रयास है कि योग दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन न रहकर विद्यार्थियों के जीवन में स्वस्थ आदतों और सकारात्मक जीवनशैली का स्थायी संदेश बन सके। विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास, प्राणायाम और योग का होगा आयोजन बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 21 जून को विद्यालयों में सामूहिक योगाभ्यास, प्राणायाम और योग के महत्व पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यार्थियों को योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों से परिचित कराया जाएगा। साथ ही अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि योग का संदेश समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंच सके। नई पीढ़ी को स्वस्थ, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने के संकल्प को नई ऊर्जा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में योग को विद्यालयी जीवन और जनस्वास्थ्य से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। विद्यालयों में नियमित योग गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में स्वास्थ्य, अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। 21 जून को होने वाला यह व्यापक आयोजन न केवल योग की वैश्विक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को स्वस्थ, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाने के संकल्प को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

सीएम योगी ने किया मां बगुलामुखी का दर्शन-पूजन, मुख्यमंत्री ने तुवन मंदिर में भी माथा टेका

दतिया/ललितपुर बुंदेलखंड को विकास परियोजनाओं की सौगात देने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मध्य प्रदेश के दतिया में मां बगुलामुखी का दर्शन-पूजन भी किया। दतिया हवाई पट्टी पर मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सीएम योगी का स्वागत किया। मुख्यमंत्री यहां से पीतांबरा पीठ पहुंचे।  पीतांबरा पीठ में मुख्यमंत्री ने मां बगुलामुखी के दर्शन किए और विधिवत पूजा अर्चना की। उन्होंने परिसर में स्थित वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक भी किया। इसके बाद मुख्यमंत्री लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए ललितपुर रवाना हो गए। ललितपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने तुवन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान मंदिर के पुजारी व महंत आदि उपस्थित रहे।

96 लाख इकाइयों और 1.65 करोड़ रोजगार के साथ उत्तर प्रदेश अग्रणी

आगरा विश्व पटल पर भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और एमएसएमई क्षेत्र की अपार संभावनाओं को नई दिशा देने के लिए ताजनगरी आगरा में 'ब्रिक्स-इंडिया 2026' के अंतर्गत पहले दिन ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरे ब्रिक्स एमएसएमई वर्किंग ग्रुप की दो दिवसीय बैठक का भव्य आयोजन हुआ। ताजगंज स्थित ताज एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने एमएसएमई सेक्टर की शानदार उपलब्धियों और वैश्विक व्यापार की रणनीतियों को विश्व समुदाय के समक्ष प्रमुखता से रखा। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के साथ यूपी बना 'एमएसएमई राजधानी' ब्रिक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा जनपद प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज भारत की एमएसएमई राजधानी बनकर उभर रहा है। राज्य में वर्तमान में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो लगभग 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही हैं। योगी सरकार एमएसएमई को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सबसे सशक्त इंजन मानती है। ब्रिक्स देशों के साथ 5.36 बिलियन डॉलर का व्यापारिक संबंध प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार, तकनीक और निवेश के नए आयाम स्थापित कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025- 26 के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के साथ उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 5.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 3,938 मिलियन डॉलर सदस्य देशों को और 1,429 मिलियन डॉलर साझेदार देशों को) से अधिक रहा है। प्रदेश से मशीनरी, परिधान, चमड़ा, कालीन और बहुमूल्य पत्थर दुनिया के कई देशों में निर्यात हो रहे हैं। ओडीओपी और पारंपरिक शिल्प को मिल रही वैश्विक उड़ान उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 'एक जनपद एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय प्रतिभा और पारंपरिक शिल्प को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का अभूतपूर्व कार्य किया है। एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि ओडीओपी के तहत अब तक 20 हजार से अधिक लोगों को करीब 897 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी देकर 3.16 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। इसके साथ ही 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना' से 4.41 लाख पारंपरिक शिल्पकारों को आधुनिक टूलकिट और प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है। युवाओं और उद्यमियों के लिए योगी सरकार की अभिनव पहल योगी सरकार ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' (सीएम युवा) जैसी अभिनव पहल शुरू की है। इसके तहत बिना गारंटी के ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 10 वर्षों में 10 लाख नई सूक्ष्म इकाइयां स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त, एमएसएमई पार्क विकसित करने के लिए प्लेज (PLEDGE) योजना के तहत प्रदेश के 12 जिलों में पार्क स्वीकृत किए जा चुके हैं, जो उद्योगों को बेहतर इकोसिस्टम प्रदान करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का विधिवत शुभारंभ सुबह 10:15 बजे भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। उन्होंने देश में एमएसएमई सेक्टर की ग्रोथ और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दूसरे दिन ब्रिक्स देशों से आए विभिन्न प्रतिनिधिमंडल आगरा की ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण करेंगे और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू होंगे।

लखनऊ समेत यूपी में आसमान से बरस रही आग, अगले 5 दिन तक राहत नहीं

 लखनऊ  पिछले एक सप्ताह से पूरब से पश्चिम तक भीषण गर्मी का दौर जारी है। शुक्रवार और शनिवार को 24 जिलों में लू चलने से लोगों को परेशानी बढ़ी है। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ सहित 35 जिलों में अगले पांच दिन आसमान से आग बरसेगी। गर्म हवा से हीट वेव का अलर्ट है। इस दौरान अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि के आसार हैं। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह का कहना है कि रविवार को राजधानी, प्रयागराज, वाराणसी समेत 35 जिलों में लू चलने का यलो अलर्ट जारी किया गया है। फिलहाल, अभी अगले कुछ दिनों तक भीषण गर्मी से राहत के आसार नहीं हैं। 25 जून के बाद आएगा मानसून मौसम विभाग का कहना है कि इस बार उत्तर प्रदेश में मानसून आने में एक सप्ताह से अधिक समय की देरी लग सकती है। दरअसल, केरल में मानसून ने चार दिन की देरी यानि पांच जून को दस्तक दी। जिसके बाद इसकी गति धीमी हो गई है, क्‍योंकि अरब सागर से नमी का प्रवाह कमजोर पड़ गया है। उत्तर पश्चिम भारत में गर्म और शुष्‍क हवा का प्रभाव बना है। आने वाला पश्चिमी विक्षोभ शुष्‍क हवा के असर को कम करेगा। इससे पूरे उत्तरी क्षेत्र में नमी में सुधार होगा, जिससे बदलाव की पूरी संभावना है। अच्छी बारिश के लिए अभी दो सप्ताह तक इंतजार पूर्वी यूपी में 25 जून के बाद से प्री मानसून प्रवेश करेगा। लखनऊ और आसपास जिलों समेत प्रदेशभर में इसके पहुंचने में एक सप्ताह और लगेगा यानी सूबे के लोगों को अच्छी बारिश के लिए अभी दो सप्ताह तक इंतजार करना पड़ सकता है। लखनऊ में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 40.3 और न्यूनतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। उधर, बांदा समेत आसपास के जिलों में भीषण गर्मी और लू का सिलसिला जारी है। दोपहर 12 से शाम चैट बजे तक घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है।  

राम मंदिर में दान हेरफेर की जांच में बड़ा खुलासा, पुराने कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी जानकारी सामने आई है. SIT के सूत्रों के मुताबिक गिनती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले कई लोग अपनी जिम्मेदारियों में विफल रहे. टिन्नू यादव समेत नकदी गिनने, रकम के प्रबंधन और कथित हेरफेर से जुड़े कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी है. कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कार्रवाई एसआईटी जांच के दौरान होगी या जांच पूरी होने के बाद. जांच टीम ने प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में हुई नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है. राम मंदिर में विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए लगभग 800 कर्मी तैनात हैं, जिनमें करीब 200 कर्मी ट्रस्ट द्वारा नियुक्त किए गए हैं. पुराने कर्मचारियों का डाटा जुटाने में जुटी टीम एसआईटी ने लंबे समय से मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षा अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और अन्य जिम्मेदार कर्मियों की सूची भी मांगी है. सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई ऐसे कर्मी का नाम सामने आया है जो पिछले कई वर्षों से मंदिर परिसर से जुड़े हुए हैं. जांच टीम पुराने कर्मचारियों की तैनाती अवधि, जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र की विस्तृत जानकारी जुटा रही है. जांच का फोकस अब केवल चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि निगरानी, जवाबदेही और प्रशासनिक लापरवाही की भूमिका पर भी है. आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच और तेज होने के साथ कई नए नामों के सामने आने की संभावना है. फिलहाल एसआईटी मामले की जांच कर रही है.   अखिलेश बोले भाजपाई राजनीति यहीं से शुरू और यहीं पर अंत चढ़ावा चोरी मामले में अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि अयोध्या महापापियों के लिए कुरुक्षेत्र साबित होगी. यहीं भाजपाई राजनीति का आरंभ हुआ था, यहीं अंत भी होगा. अयोध्या में ‘चढ़ावे-चंदे-दान-शिला चोरी’ की घटना के बाद से यहां आनेवाले दर्शनार्थियों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ा है. लोगों की आस्थाएं खंडित हुई हैं. इसका सीधा असर अयोध्या के स्थानीय काम-कारोबार और आम आदमी की आमदनी पर पड़ा है. सरकार की गलती का ख़ामियाज़ा जनता क्यों भुगते. अयोध्या और आस-पास के सभी क्षेत्रों में भयंकर आक्रोश पनप रहा है. इस पावन सनातनी तीर्थ की शुचिता जिन भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की वजह से कलुषित हुई है, वो अपना कारनामा करके सदैव की तरह भूमिगत हो गये हैं.अस्पष्टता के कारण वातावरण और भी शंकापूर्ण व तनावपूर्ण हो गया है. स्थानीय लोग मंदिर जाने से भी घबरा रहे हैं कि कहीं उनको ही जांच के नाम पर फंसा न दिया जाए. श्रद्धालुओं में एक अज्ञात भय व्याप्त हो गया है. जांच कहां तक पहुंची इसकी डेली ब्रीफिंग होनी चाहिए क्योंकि भाजपा सरकार में हो रहे ‘चतुर्दिक महा-भ्रष्टाचार’ के कारण जनता का SIT तक पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं है. मथुरा से भी आई धांधली की ख़बर बेहद गंभीर है, उसकी भी उच्च स्तरीय विश्वसनीय जांच हो.

किसानों के खातों में पहुंचेंगे 4352 करोड़ रुपये, पीएम मोदी करेंगे 23वीं किस्त जारी

लखनऊ यूपी के किसानों के लिए खुशखबरी है। शनिवार यानी आज प्रदेश के सवा दो करोड़ से अधिक किसानों के अकाउंट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त के रूप में 4352.40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किया जाएगा। पश्चिम बंगाल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस किस्त को जारी करेंगे। बता दें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। ये पैसे सीधे लाभार्थियों के बैंक अकाउंट में भेजी जाती है। अधिकारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के 2.17 करोड़ से अधिक किसानों को 23वीं किस्त का लाभ मिलेगा। इसके तहत उनके खातों में 4352.40 करोड़ रुपये भेजे जाएंगे। इससे पहले मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने असम से योजना की पिछली किस्त जारी की थी। वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को गोरखपुर से की गई थी। यूपी सरकार के अनुसार 22वीं किस्त तक उकिसानों को योजना के तहत कुल 99032.58 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। वहीं, शनिवार को 4352.40 करोड़ रुपये जारी होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 103391.24 करोड़ रुपये हो जाएगा। देशभर के 9.44 करोड़ किसानों को मिलेगा लाभ अगर कुल लाभार्थियों की बात करें तो 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के अकाउंट में 18880 करोड़ से अधिक की धनराशइ हस्तांतरण की जाएगी। पीएम मोदी का ये कार्यक्रम करीब दोपहर के 3 बजकर 45 मिनट पर पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर में है झांसी में रहेंगे सीएम योगी शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ झांसी के रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में किसानों के बीच मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर वह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त वितरण कार्यक्रम से जुड़ेंगे तथा यूपी एग्रीज परियोजना के खरीफ संस्करण का शुभारंभ भी करेंगे। 2238.92 करोड़ से बढ़कर 13727.85 करोड़ हुई वर्षवार आंकड़ों की बात करें तो जानकारी के मुताबिक वर्ष 2018-19 में किसानों को 2238.92 करोड़ रुपये, 2019-20 में 11006.87 करोड़ रुपये, 2020-21 में 14432.14 करोड़ रुपये, 2021-22 में 15775.52 करोड़ रुपये, 2022-23 में 12454.32 करोड़ रुपये, 2023-24 में 13808.48 करोड़ रुपये, 2024-25 में 15594.74 करोड़ रुपये तथा 2025-26 में 13727.85 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। लिस्ट में ऐसे चेक करें अपना नाम पीएम किसान सम्मान निधि योजना में अपना चेक करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं। यहां Farmers Corner का ऑप्शन मिलेगा। इसमें Beneficiary Status पर क्लिक करें। यहां मांगी गई जानकारी जैसे आधार नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल नंबर डालकर Get Report पर क्लिक कर दें। ऐसे में आपका स्टेट्स चेक हो जाएगा। वहीं, रजिस्ट्रेशन नंबर खो या भूल जाने पर आप अपना नंबर दोबारा पता कर सकते हैं। इसके लिए know your Registration number के ऑप्शन में जाकर मांगी गई जानकारी भरने के बाद आखिर में कैप्चा कोड और ओटीपी डालकर सबमिट कर दें।

UP Politics: चुनावी गर्मी के बीच NDA की OBC रणनीति ने बढ़ाया सियासी तापमान, अखिलेश पर दबाव

 नई दिल्ली उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भले ही औपचारिक ऐलान न हुआ हो, लेकिन सियासी बिसात अभी से ही बिछाई जाने लगी है. लोकसभा चुनाव में सपा ने पीडीए समीकरण के जरिए बीजेपी को मात देने में सफल रहे थे. अब चुनावी तपिश बढ़ने के साथ ही डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य, संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर की तिकड़ी इन दिनों अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और सपा के 'पीडीए फार्मूले' को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं?  अखिलेश यादव 2024 के फार्मूले से ही 2027 का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. सपा की कोशिश पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ ब्राह्मण वोटों को जोड़ने की है. इसके अलावा अखिलेश यादव इन दिनों 'विजन इंडिया' के जरिए बीजेपी के कोर वोटबैंक माने जाने वाले व्यापारियों को अपने पाले में करने की रणनीति है।  सपा एक मजबूत सोशल इंजीनियरिंग के साथ विधानसभा चुनाव में उतरना चाहती है, जिसके समझते हुए बीजेपी ने अपने ओबीसी नेताओं की एक पूरी फौज सियासी रण में उतार दिया है. इसी के तहत केशव प्रसाद से लेकर संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर हर रोज अखिलेश की सियासी केमिस्ट्री पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।  अखिलेश के सिरदर्द बने राजभर योगी सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने 2022 में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन सरकार बनने के बाद बीजेपी के साथ हो गए थे. वो पूर्वांचल से आते हैं और राजभर समाज के बड़े चेहरे माने जाते हैं. ओबीसी के मुद्दे पर राजभर आक्रमक रहते हैं. 2024 में एनडीए को बिगड़े हुए समीकरण को दुरुस्त करने के मद्देनजर से ओमप्रकाश राजभर  एक तरफ सपा में बगावत की चिंगारी भड़का रहे हैं तो दूसरी ओर अखिलेश के पीडीए पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।  राजभर यह कह रहे हैं कि सपा में बहुत जल्द बगावत होने वाली है, तमाम लोकसभा सांसद अखिलेश यादव का साथ छोड़ देंगे. इसके लिए कभी बलिया के किसी नेता की तरफ इशारा करते हैं तो कभी मुरादाबाद की सांसद रूची वीरा की तरफ इशारा करते हैं. साथ ही सपा के पीडीए फार्मूले को कठघरे में  खड़ा कर रहे हैं. राजभर ने कहा कि पीडीए का मतलब 'पीट देगा अहीर' और 'पीट देगा अल्पसंख्यक' है।  ओम प्रकाश राजभर कहते हैं कि सपा नेताओं को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वो दलितों पर होने वाले अत्याचारों के मामलों को सार्वजनिक नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस के आंकड़े बताता हैं कि प्रदेश में दलितों और शोषितों पर अत्याचार करने के मामले में सबसे ज्यादा यादव और मुस्लिम लोग हैं. ओपी राजभर ने दलित उत्पीड़न के आंकड़े भी गिना रहे हैं. इस तरह राजभर बताना चाहते हैं कि दलितों पर होने वाले अत्याचार यादव और मुस्लिम कर रहे हैं, जो सपा का वोटबैंक है।  संजय निषाद भी सपा पर हमलावर योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद भी फ्रंटफुट पर उतर गए हैं और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने कहा कि सपा के कई बड़े नेता उनके संपर्क में हैं. राजभर से दो हाथ आगे निकलते हुए निषाद कहते हैं कि सपा के 25 सांसद हमारे संपर्क में है, जिसके जरिए बता रहे हैं कि सपा में बड़ी फूट होने वाली है।  

रामलला को चढ़ाया गया रत्नजड़ित हार बना रहस्य, पुजारियों के बयान से बढ़ी पेचीदगी

अयोध्या  राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय जौनपुर के विश्वकर्मा परिवार की ओर से उपहार में दिया गया बेशकीमती हार व चरण पादुका विशेष जांच दल (एसआइटी) के लिए अबूझ पहेली बन गया है। चौथे दिन एसआइटी ने हार व चरण पादुका को खोजने या उसकी जानकारी लेने का प्रयास किया, परंतु पता नहीं चला। रामशंकर यादव टिन्नू व कृष्णदेव तिवारी के साथ रामलला के चार पुजारियों को भी बुलाया गया। पुजारी मोहित पांडेय ने बताया कि मैंने हार पहनाने के बाद टिन्नू को वापस कर दिया था। टिन्नू यही रट लगाए है कि उसे ईंट के रूप में गलाने को बेंगलुरु भेजा गया था। अब एसआइटी हार का असली पता खोज रही है। सूत्रों ने बताया कि एसआइटी के सदस्य लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आइजी किरण एस. व विशेष सचिव वित्त विभाग नीलरतन कुमार ने गुरुवार दोपहर तीन बजे हार व चरण पादुका की खोज शुरू की। राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव के माध्यम से तीन वरिष्ठ पुजारियों अशोक उपाध्याय, संतोष तिवारी व प्रेमचंद्र त्रिपाठी और साल भर पहले नियुक्त पुजारी मोहित पांडेय को ग्रीन हाउस बुलाया गया। जब यह पता चला कि उस समय वरिष्ठ पुजारी नहीं, युवा पुजारी मोहित पांडेय थे, तो उनसे तस्दीक हुई। सूत्रों ने बताया कि मोहित ने रामलला को पहनाने के बाद टिन्नू यादव को लाैटाने की बात कही, तो एसआइटी ने टिन्नू से पूछा। उसने यही बताया कि उसे उसी समय बेंगलुरु भेज दिया गया था। आभूषण रखने वाले कृष्णदेव तिवारी ने भी इससे अज्ञानता जताई। सूत्रों ने बताया कि अब उसकी न तो ईंट मिल रही, न रसीद। अयोध्या के रोकड़िया हनुमान मंदिर के आचार्य विनोद मिश्रा ने दो दिन पहले मीडिया के सामने आकर बताया था कि जौनपुर के जंगही निवासी उनके भक्त अजय विश्वकर्मा ने पिता केदारनाथ व अन्य परिजनों के साथ 200 किमी पैदल अयोध्या आकर टिन्नू यादव के माध्यम से रामलला को रत्न जड़ित हार व चरण पादुका भेंट की थी। हार पर द्वाद्वश ज्योतिर्लिंग उकेरा गया था, तो पादुका पर 64 चरणों के चिह्न अंकित थे। दोनों बहुमूल्य रहे। उस समय उसकी पहने हुए रामलला की फोटो देने की भी बात हुई थी, लेकिन आज तक नहीं दी गई। अजय मुंबई में कारोबार करते हैं और उन्होंने वहीं पर उसे बनवाया था।