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UP News: विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन पर रामनाथ कोविन्द ने की योगी सरकार की सराहना

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन को दी नई ऊर्जा: रामनाथ कोविन्द पूर्व राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के प्रयासों की सराहना की, वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को बताया महत्वपूर्ण ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा, मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के विमोचन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति ने साझा कीं जीवन संघर्ष की स्मृतियां गरीबों, पीड़ितों और वंचितों की आवाज रामनाथ कोविन्द के व्यक्तित्व और कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा रही: ब्रजेश पाठक देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी सहज-सरल बने रहे रामनाथ कोविन्द: केशव प्रसाद मौर्य सादगी, विनम्रता, दृढ़ संकल्प और जनसामान्य से आत्मीय जुड़ाव की मिसाल हैं रामनाथ कोविन्द: सतीश महाना लखनऊ,   पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन के क्षेत्र में हुए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश को नई ऊर्जा मिली है। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों के अनुरूप उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के प्रयासों को अभूतपूर्व गति दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं से रोजगार, शिक्षा और आर्थिक प्रगति के अवसर समाज के सभी वर्गों तक पहुंचेंगे। पूर्व राष्ट्रपति अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा, मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मेट्रो जैसी बड़ी बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आवागमन को सुगम बनाया है। सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अंत्योदय की भावना के अनुरूप विकास का लाभ ग्रामीण परिवारों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयास हो रहे हैं। गरीबों को आवास से मिला सम्मान और सुरक्षा रामनाथ कोविन्द ने अपने बचपन की स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि कानपुर देहात के गांव परौंख में उनका घर बेहद साधारण था और बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद उन्हें उन परिवारों की याद आई, जो आज भी बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के प्रयासों से गरीब परिवारों को पक्के मकान मिलने के साथ सम्मान और सुरक्षा का एहसास भी हुआ है। टपकती छत के नीचे जीवन बिताने वाले लोग ही पक्के घर का वास्तविक महत्व समझ सकते हैं। शिक्षा और परिश्रम से साकार होते हैं सपने पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उनके पिता ने शिक्षा के महत्व को समझते हुए परिवार की कृषि भूमि अपने पास रखने के बजाय बेटों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। ईमानदारी, करुणा, उदारता और न्यायप्रियता जैसे जीवन मूल्य उन्हें पिता से मिले। परौंख से राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय गणतंत्र, संविधान के आदर्शों और करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं की विजय है। भारतीय लोकतंत्र में सामान्य परिवार से आने वाला व्यक्ति भी अपनी योग्यता और परिश्रम के बल पर सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। इसी व्यवस्था में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और उन्हें राष्ट्रपति पद तक पहुंचने का अवसर मिला। महाकुंभ ने विश्व को दिखाई भारत की आध्यात्मिक शक्ति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध, महावीर, संत कबीर और संत रविदास की धरती है। वर्ष 2025 के प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना, आस्था और सामाजिक समरसता की विराट शक्ति से परिचित कराया। भारत की प्राचीन परंपराएं आज भी करोड़ों लोगों को एक सूत्र में जोड़ने की क्षमता रखती हैं। युवाओं से राजनीति में आने की अपील पूर्व राष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश के युवाओं से राजनीति, शासन-प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में भागीदारी केवल मतदान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सुशासन के लिए ईमानदार, योग्य और संवेदनशील लोगों का राजनीति में आगे आना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्रसेवा की भावना के साथ काम करने और कभी हार न मानने का संदेश दिया। गरीबों, पीड़ितों व वंचितों की आवाज बने कोविन्द: ब्रजेश पाठक उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द का अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी अपने सहज एवं सरल स्वभाव को बनाए रखा। गरीबों, पीड़ितों और वंचितों की आवाज उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा रही। समाज में ऐसे बिरले ही व्यक्ति होते हैं, जो वंचित वर्गों की समस्याओं को समझने के साथ उन्हें धरातल पर समाधान तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। रामनाथ कोविन्द ने संसद में रहते हुए लगातार पीड़ितों और वंचितों की आवाज को बुलंद किया। बिहार के राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने अपनी सहजता और कार्यशैली से अमिट छाप छोड़ी। राष्ट्रपति के रूप में देश के लिए किए गए उनके कार्य भारतीय गणतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखेंगे। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विषय पर गठित समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका भी उल्लेखनीय है। सर्वोच्च पद पर भी सहज रहे कोविन्द: केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सार्वजनिक जीवन सबसे कठिन, जिम्मेदारी भरा और व्यापक पहचान दिलाने वाला क्षेत्र है। इसमें व्यक्ति का पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे अपनी शुचिता बनाए रखनी चाहिए और अहंकार से दूर रहना चाहिए। रामनाथ कोविन्द का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी व्यक्ति अपने मूल विचारों, संस्कारों और सहजता को बनाए रख सकता है। रामनाथ कोविन्द को वह उस समय से जानते हैं, जब वह राज्यसभा के सदस्य थे और उत्तर प्रदेश भाजपा के महामंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे। बिहार के राज्यपाल और देश के राष्ट्रपति के रूप में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वह अपने गृह नगर कानपुर आए, तब अपने गुरु के चरण स्पर्श कर उन्होंने संस्कारों के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित की। देश के प्रथम नागरिक के पद पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने अपने पुराने … Read more

अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का आधार बनाएं युवा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

रील के लाइक्स नहीं, रियल लाइफ में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती हैं किताबें : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी ने किया विमोचन   अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का आधार बनाएं युवा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   कानपुर के परौंख गांव से राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा में सादगी, परिश्रम और पुरुषार्थ की मिसाल बने रामनाथ कोविन्द   राष्ट्रपति बनने के बाद भी जन्मभूमि से नहीं टूटा नाता, पुराने साथियों को भी नहीं भूले कोविन्द   सोशल मीडिया पर पांच से सात घंटे बिताने वाले युवा एक-दो घंटे पुस्तकों को दें : मुख्यमंत्री योगी   यूपी के 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय की व्यवस्था, डिजिटल लाइब्रेरी का भी विस्तार   लखनऊ और गोरखपुर के पुस्तक मेलों में उमड़ी पाठकों की भीड़, मुख्यमंत्री योगी बोले- अवसर मिले तो किताबें खरीदते हैं लोग   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से निकलकर पुस्तकों से जुड़ने की सीख दी। उन्होंने कहा कि आज लोग स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर पांच से सात घंटे बिता रहे हैं। इसमें से एक-दो घंटे भी अच्छी पुस्तकें पढ़ने में लगाएं तो जीवन को नई दिशा मिल सकती है। सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स जुटाने के बजाय अपनी रियल लाइफ में आगे बढ़ना अधिक उपयोगी है। अच्छी पुस्तकें जीवन की सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होती हैं। युवाओं को महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथाएं पढ़नी चाहिए, जिनसे संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।   मुख्यमंत्री योगी बुधवार को लोकभवन सभागार में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे भारतीय की जीवनगाथा है, जिसने अभावों को अपनी ढाल नहीं बनाया, बल्कि संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया। यह आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।   गांवों तक पहुंच रही पुस्तकें, डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं। इनमें एक कक्ष पुस्तकालय के लिए निर्धारित है, जहां गांव के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। डिजिटल लाइब्रेरी भी विकसित की जा रही हैं। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालयों का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा भी व्यापक स्तर पर पुस्तकालयों तक पहुंचनी चाहिए। सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी।   गोरखपुर में लखनऊ से ज्यादा बिकी थीं पुस्तकें मुख्यमंत्री योगी ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पुस्तक मेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को आशंका थी कि आज के दौर में पुस्तकें कौन खरीदेगा। लखनऊ में पुस्तक मेला लगा तो बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद गोरखपुर में उससे भी अधिक पुस्तकें बिकीं। हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में भी युवाओं और विद्यार्थियों की अच्छी भागीदारी रही। उन्होंने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि है, जरूरत उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने की है।   अभावों को बनाया संघर्ष की ताकत मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कानपुर के परौंख गांव में गरीब परिवार में जन्मे रामनाथ कोविन्द ने बचपन में ही मां को खो दिया। गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू की और उच्च शिक्षा प्राप्त कर अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। भाजपा संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बड़ा वही होता है, जिसमें संघर्ष का जज्बा हो। विपरीत परिस्थितियों से पलायन के बजाय उनका मुकाबला करना महानता की पहचान है।   राष्ट्रपति बनने के बाद भी नहीं भूले गांव और पुराने साथी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी रामनाथ कोविन्द का अपनी जन्मभूमि परौंख से लगाव बना रहा। वह अवसर मिलते ही गांव जाते हैं। पुराने साथियों और चाय-चाट वालों से भी उनके संबंध कायम हैं। उन्होंने गांव में शिक्षा सुविधाओं के विकास के लिए प्रयास किए। वहां के विद्यालय भवन को विकसित कर राज्य सरकार को समर्पित किया गया, जिसे आवासीय विद्यालय के रूप में आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री योगी ने भगवान श्रीराम के जन्मभूमि प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।   पद बड़ा हो, संस्कार नहीं बदलने चाहिए : केशव मौर्य उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सादगी और अहंकार से मुक्त रहने की प्रेरणा देती है। व्यक्ति कितना भी बड़ा पद प्राप्त कर ले, उसके संस्कार और विचार नहीं बदलने चाहिए। रामनाथ कोविन्द का जीवन इसका उदाहरण है।   गरीब परिवार का बेटा राष्ट्रपति बने, यही गणतंत्र की खूबसूरती : ब्रजेश पाठक उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानपुर के छोटे से गांव में जन्मा गरीब परिवार का व्यक्ति अपनी योग्यता और कार्यक्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। यही भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती है। पूर्व राष्ट्रपति का जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता की मिसाल है।   विधायकों के लिए मांगी पुस्तक की 500 प्रतियां विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को ‘कच्चे घर, पक्के इरादे’ की यात्रा बताया। उन्होंने प्रकाशक से विधानसभा सदस्यों के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों और पुस्तकालयों में अच्छी हिंदी पुस्तकों की पहुंच बढ़ी है। किताबें बच्चों तक पहुंच रही हैं।   पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का किया सम्मान कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत के गायन से हुआ। मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। उनकी पत्नी सविता कोविन्द का भी स्वागत किया। पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों के साथ आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन किया।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, उनकी पत्नी सविता कोविन्द, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव … Read more

योगी सरकार की पहल से छात्राओं को बड़ी जिम्मेदारी, चार बेटियों ने एक दिन के लिए संभाला विभागीय कामकाज

योगी सरकार में मिशन शक्ति से बेटियों को नेतृत्व का अवसर, चार छात्राओं ने संभाली मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की कमान – केजीबीवी काकोरी की मुस्कान, सरिता, साक्षी और राधिका ने एक दिन की निदेशक बनकर समझी प्रशासनिक कार्यप्रणाली – छात्राओं ने विद्यालयों के किचन शेड में स्वच्छता, गुणवत्तापूर्ण भोजन और रसोइयों के प्रशिक्षण पर दिया जोर – निदेशक प्रेमरंजन सिंह ने छात्राओं के सुझावों की सराहना की, विद्यालयों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाने की तैयारी – मिशन शक्ति के माध्यम से बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता, निर्णय कौशल और प्रशासनिक समझ विकसित करने पर जोर लखनऊ,   योगी सरकार की प्रेरणा से मिशन शक्ति अभियान प्रदेश में बालिकाओं को आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और नेतृत्व के व्यावहारिक अवसरों से जोड़ रहा है। इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी), काकोरी, लखनऊ की चार छात्राओं मुस्कान (कक्षा 8), सरिता (कक्षा 8), साक्षी (कक्षा 8) और राधिका (कक्षा 7) ने बुधवार को मध्याह्न भोजन प्राधिकरण पहुंचकर एक दिन की निदेशक के रूप में सांकेतिक दायित्व संभाला।  इस पहल के माध्यम से छात्राओं को प्रशासनिक कार्यप्रणाली समझने, विभागीय व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और जनहित से जुड़े विषयों पर सुझाव रखने का अवसर मिला। प्राधिकरण के निदेशक प्रेमरंजन सिंह ने छात्राओं का मार्गदर्शन किया और उनके विचारों को सुना। छात्राओं ने विद्यालयों में रसोई की स्वच्छता, बच्चों को ताजा एवं संतुलित भोजन उपलब्ध कराने तथा रसोइयों के प्रशिक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत इस प्रकार की पहल बालिकाओं को नेतृत्व का अनुभव देने के साथ उनकी निर्णय क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का अवसर प्रदान करती है। नेतृत्व का अनुभव, प्रशासनिक कार्यप्रणाली की समझ सांकेतिक पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान चारों छात्राओं ने निदेशक की कुर्सी संभाली और विद्यालयों में मध्याह्न भोजन व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने परिषदीय एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के किचन शेड में स्वच्छता के मानकों का पालन सुनिश्चित करने, बच्चों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन देने और भोजन तैयार करने वाली रसोइयों को समय-समय पर स्वच्छता एवं पोषण प्रबंधन का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। स्वच्छता और पोषण पर छात्राओं के सुझाव छात्राओं ने मध्याह्न भोजन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुरूप भोजन तैयार करने, निर्धारित मेन्यू में पोषण का ध्यान रखने और आधुनिक किचन व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करने जैसे सुझाव दिए। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर अस्वस्थ बच्चों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी ध्यान देने की बात कही। निदेशक ने की छात्राओं की पहल की सराहना मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक प्रेमरंजन सिंह ने छात्राओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य बालिकाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और समाज में अपनी प्रभावी भूमिका निभाने के अवसर उपलब्ध कराना है। इस तरह के अनुभव छात्राओं को प्रशासनिक व्यवस्था समझने और भविष्य में जनसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। विद्यालयों की स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता पर जोर निदेशक ने छात्राओं की ओर से उठाए गए स्वच्छता एवं पोषण संबंधी विषयों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने बताया कि विद्यालयों के किचन शेड में स्वच्छता बनाए रखने और बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेशभर में विशेष स्वच्छता अभियान चल रहा है। इस पहल के माध्यम से विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता, रसोई की स्वच्छता और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मानकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

यूपी पुलिस भर्ती 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी, 32,679 पदों पर चयन; ऐसे चेक करें मेरिट लिस्ट

लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है. यूपी पुलिस में 32,679 पदों पर भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जारी किया है. इस भर्ती के तहत सिविल पुलिस, पीएसी, आर्म्ड पुलिस, यूपीएसएसएफ, महिला बटालियन, घुड़सवार पुलिस और जेल वार्डर के पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई है.इस भर्ती के लिए करीब 28.86 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून 2026 को छह पालियों में आयोजित की गई थी. अब भर्ती प्रक्रिया का फाइनल रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इससे जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।  किस विभाग में कितने पदों पर भर्ती? यूपी पुलिस की इस भर्ती में अलग-अलग इकाइयों के लिए पद निर्धारित किए गए थे. इनमें सिविल पुलिस में 10,469 पद, पीएसी और आर्म्ड पुलिस में 15,131 पद और उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (UPSSF) में 1,341 पद शामिल हैं. इसके अलावा महिला बटालियन में कांस्टेबल के 2,282 पदों, घुड़सवार पुलिस में सिपाही के 71 पदों, पुरुष जेल वार्डर के 3,279 पदों और महिला जेल वार्डर के 106 पदों के लिए भी फाइनल रिजल्ट जारी किया गया है।  कितने अभ्यर्थी सफल हुए? फाइनल रिजल्ट में अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों के पदों और सफल अभ्यर्थियों का विवरण भी दिया गया है. सामान्य वर्ग के 6,685 पदों के सापेक्ष 4,628 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों सहित कुल 8,818 अभ्यर्थियों के चयन का विवरण दिया गया है. अनुसूचित जाति (SC) के 6,857 पदों के सापेक्ष 7,136 अभ्यर्थी सफल हुए हैं. वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) के 647 पदों के सापेक्ष 648 अभ्यर्थियों को सफलता मिली है।  4,481 महिला अभ्यर्थियों का चयन यूपी पुलिस की इस भर्ती में कुल 4,481 महिला अभ्यर्थियों का चयन हुआ है. महिला बटालियन में कांस्टेबल के 2,282 पदों के अलावा अन्य संबंधित पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया के तहत चयन किया गया है।  28.86 लाख ने किया था आवेदन इस भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों के बीच काफी प्रतिस्पर्धा रही. उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुल 28.86 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. भर्ती परीक्षा 8, 9 और 10 जून 2026 को छह पालियों में आयोजित की गई थी. अब पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया गया है।  कहां देखें यूपी पुलिस भर्ती का फाइनल रिजल्ट? अभ्यर्थी यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाकर भर्ती के फाइनल रिजल्ट से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं. रिजल्ट देखने के लिए वेबसाइट पर संबंधित भर्ती के परिणाम से जुड़े लिंक को तलाशें और उसमें दिए गए निर्देशों का पालन करें। 

इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, यूपी पंचायत चुनाव में देरी पर निर्वाचन आयोग को तीन महीने की समयसीमा

प्रयागराज उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के पद पर बनाए रखने का निर्देश दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के शासनादेश में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके तहत निवर्तमान प्रधान प्रशासक के पद पर बने रहेंगे। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही थी. याचिकाओं में योगी सरकार के 25 मई के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था. इन मामलों में यूपी सरकार, निदेशक पंचायती राज, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है।  ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर भी असंतोष हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से जुड़ी सभी याचिकाओं को संबद्ध कर दिया था और सभी पर एक साथ सुनवाई हुई. याची दशरथ यादव समेत अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन, अनिल कुमार, अकबर अंसारी और हेमचंद्र की ओर से दाखिल याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई कर रही थी।  इससे पहले शुक्रवार को हुई सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर असंतोष जताया था. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रिपोर्ट फील्ड में जाकर तैयार नहीं की गई, बल्कि दफ्तर में बैठकर तैयार की गई है।  दरअसल, ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने का मामला कोर्ट पहुंचा था। इस मामले में याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा- कच्चे घर थे, लेकिन इरादे पक्के थे, विपरीत परिस्थितियों में कभी संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए

अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का मार्ग बनाया, रामनाथ कोविन्द की जीवन यात्रा हर भारतीय के लिए प्रेरणा: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने लोकभवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का किया विमोचन गांव के स्कूल से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे रामनाथ कोविन्द का जीवन संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ की मिसाल मुख्यमंत्री ने कहा- कच्चे घर थे, लेकिन इरादे पक्के थे, विपरीत परिस्थितियों में कभी संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय विकसित कर रही सरकार, 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय के लिए अलग कक्ष: सीएम सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय महापुरुषों की जीवनी और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें युवा: मुख्यमंत्री लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन सभागार में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की गरिमामयी उपस्थिति में उनकी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को अभावों से संघर्ष करते हुए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरणादायी यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने अभावों को ढाल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और संघर्ष करने का मार्ग बनाया। उन्होंने परिश्रम, पुरुषार्थ और दृढ़ संकल्प के बल पर अपने जीवन की दिशा तय की। उनका जीवन देश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द का आगमन हमेशा प्रदेशवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश उनकी जन्मभूमि भी है और उनकी कर्मसाधना की भूमि भी। यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिस आत्मकथा का पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा विमोचन किया गया था, उसका हिंदी रूपांतरण अब उनकी पावन जन्मभूमि वाले प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विमोचित हुआ है।  अभावों में जन्म, संघर्ष से संवैधानिक शिखर तक का सफर मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा एक ऐसे भारतीय की कहानी है, जिसने जीवन की कठिनाइयों को प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया। परौंख गांव के एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्म लेने वाले रामनाथ कोविन्द के सिर से बचपन में ही मां का साया उठ गया था। इसके बावजूद उन्होंने अभावों को कभी पलायन का कारण नहीं बनने दिया और न ही अपनी परिस्थितियों को किसी से कुछ मांगने का आधार बनाया। उन्होंने गांव के विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की, फिर उच्च शिक्षा अर्जित की और अधिवक्ता के रूप में वंचितों-गरीबों की आवाज बने। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा और सार्वजनिक जीवन को अपने संघर्ष का हिस्सा बनाया। भारतीय जनता पार्टी के सदस्य एवं पदाधिकारी के रूप में राजनीतिक यात्रा शुरू करने के बाद वह राज्यसभा के सदस्य बने, बिहार के राज्यपाल पद पर पहुंचे और अंततः भारत के राष्ट्रपति के रूप में सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की यात्रा हमें बताती है कि महानता केवल अनुकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने से नहीं आती, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने के साहस से प्राप्त होती है। घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे। यही दृढ़ संकल्प उनकी यात्रा की शुरुआत बना। जब परिस्थितियां अनुकूल हों तो लोककल्याण और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करने का जज्बा होना चाहिए। यही विशेषता रामनाथ कोविन्द को उस मुकाम तक लेकर गई, जहां उन्होंने पांच वर्ष तक 145 करोड़ भारतवासियों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में देश का नेतृत्व किया। उन्हें जो भी दायित्व मिला, उसका निर्वहन उन्होंने सहजता, सरलता और भारतीय जनभावनाओं के अनुरूप किया। जन्मभूमि के प्रति अनुराग जीवन के संस्कारों का परिचायक मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की विशेषता केवल सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना नहीं है, बल्कि अपनी जन्मभूमि, गांव और पुराने संबंधों के प्रति उनका अनुराग भी है। उन्हें परौंख गांव जाने का कई बार अवसर मिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी उनके गांव पहुंच चुके हैं। जन्मभूमि के प्रति अनुराग रखना प्रत्येक भारतीय के जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार होना चाहिए। राष्ट्रपति पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद भी रामनाथ कोविन्द जब अवसर मिलता है, पुराने साथियों से मिलने पहुंचते हैं। कानपुर आने पर वह अपने गांव की ओर रुख करते हैं और लखनऊ आने पर पुराने परिचितों से मिलना नहीं भूलते। चाट वाले, चाय वाले, कपड़े वाले और दूसरे पुराने परिचितों के साथ उनके संबंध आज भी बने हुए हैं। उनका जीवन हमें अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का संदेश देता है। व्यक्ति जीवन में कितनी भी ऊंचाई प्राप्त कर ले, उसे अपने मूल, अपने गांव, अपने समाज और उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने उसकी जीवन यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भगवान राम का उदाहरण देकर समझाया जन्मभूमि का महत्व मुख्यमंत्री ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंका विजय के बाद जब लक्ष्मण सोने की लंका देखकर वहां कुछ समय रुकने की बात करते हैं, तब भगवान श्रीराम उन्हें अपनी जन्मभूमि और मातृभूमि का महत्व समझाते हैं। भगवान श्रीराम कहते हैं- ‘अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।’ अर्थात सोने की लंका भी उन्हें आकर्षित नहीं करती, क्योंकि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।  राष्ट्रपति के रूप में दुनिया में प्रभावी ढंग से रखा भारत का पक्ष मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति के रूप में देश के विभिन्न राज्यों और दुनिया के अनेक देशों की यात्राएं कीं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने प्रभावी ढंग से भारत का पक्ष रखा और दूसरे देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया। उनका सार्वजनिक जीवन संवैधानिक मर्यादा, सहज व्यवहार और देश के प्रति समर्पण का उदाहरण है। गांव से लेकर राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और परिश्रम के बल पर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। युवाओं को महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथा पढ़ने की सलाह मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे आगे बढ़ने के लिए महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथाएं पढ़ें। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन संघर्ष का … Read more

समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट! अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी बीजेपी में शामिल

 लखनऊ अमेठी में अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. तीनों ने स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. मंच से बोलते हुए अभय सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़ीने की वजह भी बताई।  उन्होंने सपा पर सनातन विरोधी आचरण, भर्तियों में भेदभाव और चापलूसी को बढ़ावा देने के आरोप लगाए. साथ ही दिल्ली के आंदोलन, नौकरी घोटालों और 2024 के अयोध्या चुनाव पर भी बात रखी।  अमेठी में हुए इस कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं के सामने तीनों नेताओं ने पार्टी का दामन थामा. तीनों नेताओं ने एक साथ पार्टी की सदस्यता ली. इस मौके पर स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहे. अभय सिंह ने अपना संबोधन भारत माता की जय के नारे के साथ शुरू किया. इसके बाद उन्होंने सपा छोड़ने की वजह बताई।  अमेठी में हुआ ज्वॉइनिंग का कार्यक्रम बीजेपी ने इस बड़े ज्वॉइनिंग कार्यक्रम के लिए अमेठी को चुना है। इस कार्यक्रम में स्मृति ईरानी और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहीं। इस कार्यक्रम के जरिए बीजेपी विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है।  1. राकेश प्रताप सिंह (गौरीगंज सीट, अमेठी) 2.अभय सिंह (गोसाईंगंज सीट, अयोध्या) 3. विनोद चतुर्वेदी  (कल्पी सीट, जालौन) जानिए राकेश प्रताप सिंह के बारे में राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक हैं। 2012 से समाजवादी पार्टी के साथ थे। 2017, 2022 में सपा के टिकट पर विधायक बने। लगातार तीसरी बार 2022 में विधायक बने। फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत की थी। राज्यसभा चुनाव में BJP कैंडिडेट को वोट किया था। जून 2025 में सपा ने निष्कासित कर दिया था। सपा पर तुष्टिकरण और सनातन के अपमान का आरोप लगाते रहे हैं। जानिए अभय सिंह के बारे में अयोध्या जिले की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह भी समाजवादी पार्टी के चर्चित नेताओं में शामिल रहें। उनका नाम पहले भी पार्टी नेतृत्व से मतभेदों और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में रहा है। उनके पाला बदलने की स्थिति में अयोध्या क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है। अब अभय सिंह ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है। जानिए विनोद चतुर्वेदी के बारे में जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी भी इस चर्चा में शामिल हैं। उनके बीजेपी में जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें पहले से ही लगाई जा रही थी। आज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, स्मृति ईरानी के सामने भाजपा में शामिल हो गए हैं। सपा पर लगाए गंभीर आरोप अभय सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी का आचरण सनातन विरोधी रहा है. उनका आरोप है कि पार्टी में रामचरितमानस को फाड़ने जैसा काम किया गया. उन्होंने दावा किया कि सपा में जब भी किसी भर्ती की बात आई, जानबूझकर एक तरफ के लोगों को ही लिया गया।  अभय सिंह के मुताबिक पहले नौकरी उसी को मिलती थी जो चापलूसी करता था. उन्होंने दावा किया कि आज किसी के लिए कोई भेदभाव नहीं है. उन्होंने सपा के दौर और आज के हालात की तुलना करते हुए अपनी बात रखी।  राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सपा ने किन लोगों को आगे रखा, इसके मुकाबले भाजपा ने सभी दलों को आगे रखा. दिल्ली में चल रहे आंदोलन को लेकर अभय सिंह ने कहा कि यह आंदोलन विदेशी फंडिंग के लिए चलाया जा रहा है. नौकरी घोटालों पर उन्होंने कहा कि जो घोटाले हुए, उनमें सभी की गिरफ्तारी हो रही है।  अभय सिंह ने आरोप लगाया कि 2024 में अयोध्या की भोली भाली जनता को बरगला कर सांसद बनाया गया. उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में अयोध्या की जनता इसका जवाब लाखों वोट से देगी. अभय सिंह ने जय श्री राम के नारे के साथ अपनी बात पूरी की. यह सारी बातें उन्होंने भाजपा में शामिल होने के बाद मंच से कही।  तीन बार सपा के टिकट पर विधायक चुने गए राकेश प्रताप सिंह की पार्टी से दूरियां पिछले तीन वर्षों में लगातार बढ़ती गईं। स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से रामचरितमानस और अन्य धार्मिक विषयों को लेकर की गई टिप्पणियों के विरोध में राकेश प्रताप सिंह ने एक कथा मंच से अपनी बात रखी थी। इसके बाद सपा नेतृत्व के साथ उनकी तल्खियां बढ़ती गईं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी गठबंधन की राजनीतिक दिशा से अलग हटकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी के पक्ष में प्रचार किया था। चुनाव से पहले ही उनके परिवार के अन्य सदस्य भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके अलावा राकेश प्रताप सिंह ने गौरीगंज से अयोध्या स्थित राम मंदिर तक पदयात्रा भी निकाली थी। इन घटनाक्रमों के बीच पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में समाजवादी पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। राष्ट्र और राम के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे: राकेश सिंह राकेश प्रताप सिंह ने कहा है कि वह राष्ट्र और राम के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। उनके साथ अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के भी भाजपा में शामिल होने की तैयारी है। इसके अलावा अमेठी जिले के सैकड़ों ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, पूर्व ग्राम प्रधानों और सपा से जुड़े लोगों के भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने का दावा किया जा रहा है। कार्यक्रम में जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिभा शुक्ला, मंत्री दारा सिंह चौहान और भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री भोला सिंह समेत कई मंत्री व विधायक मौजूद रहेंगे।  

मोदी-योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्की छत के साथ दी गरिमा, टपकती छत के नीचे बीता था मेरा बचपन : पूर्व राष्ट्रपति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुशासन से यूपी के विकास को दी नई गति : पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द   लोकभवन में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों का जताया आभार   मोदी-योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्की छत के साथ दी गरिमा, टपकती छत के नीचे बीता था मेरा बचपन : पूर्व राष्ट्रपति   भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना, यहां साधारण परिवार का व्यक्ति भी बन सकता है प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति : रामनाथ कोविन्द   योगी सरकार की कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की सराहना, एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो के विस्तार का किया उल्लेख   यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी के संकल्प को सराहा    लखनऊ  पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों और सुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को नई ऊर्जा दी है। उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के प्रयासों को अभूतपूर्व गति मिली है। एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से आवागमन सुगम हुआ है। सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से गरीब परिवारों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी के संकल्प की भी प्रशंसा की।   पूर्व राष्ट्रपति बुधवार को लोकभवन सभागार में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह में उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक अवसर है। इससे पहले अनेक मंचों से लोगों को संबोधित किया, लेकिन आज चर्चा का विषय उनका अपना जीवन है। इसी प्रदेश में जन्मे, यहीं की मिट्टी में पले-बढ़े और शिक्षा प्राप्त की। उत्तर प्रदेश ही उनकी कर्मभूमि भी बना।   भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि, राजनीति का उद्देश्य राष्ट्रसेवा पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति के लिए भाजपा को चुनने का प्रमुख कारण पार्टी में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना है। यहां जातिवाद, क्षेत्रवाद और वंशवाद से ऊपर उठकर समावेशी विकास पर बल दिया जाता है। इसी पार्टी में साधारण शिक्षक का पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री, कल्याण सिंह मुख्यमंत्री, गरीब परिवार में जन्मे योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। समाज के कमजोर वर्ग से आने वाला व्यक्ति भी राष्ट्रपति बन सकता है। यही भारतीय गणतंत्र की सच्ची विजयगाथा है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। उनसे राजनीति को सत्ता प्राप्त करने के बजाय राष्ट्रसेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा मिली।   टपकती छत के नीचे बीता बचपन, आज गरीबों को मिल रहे पक्के घर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि कानपुर देहात के छोटे से गांव में उनका साधारण घर था। बरसात में छत टपकती थी। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति चुने जाने पर वे स्मृतियां फिर ताजा हो गई थीं। तब उन्होंने कहा था कि देश के किसी गांव में आज भी कोई छोटा-सा रामनाथ टपकती छत के नीचे खड़ा होकर बेहतर भविष्य के सपने देख रहा होगा। आज मोदी और योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्के मकान के साथ गरिमा और सुरक्षा का एहसास कराया है।   उन्होंने कहा कि उनके पिता शिक्षा को जीवन बदलने का माध्यम मानते थे। जमीन दान करने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव से मिले भाईचारे, संवेदना और बड़ों के सम्मान के संस्कार जीवनभर उनके साथ रहे।   यूपी से राष्ट्रपति बनना करोड़ों लोगों के सपनों का सम्मान पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए, लेकिन यहां जन्मे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति बनने का अवसर पहली बार मिला। इसे वह अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों लोगों के सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान मानते हैं। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता की शक्ति दिखाई। उन्होंने बताया कि उनकी आत्मकथा आने वाले दिनों में देश की सभी क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां कूष्मांडा को बताया सृजन, ऊर्जा व समृद्धि की सनातन प्रतीक

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की निर्माता और नए भारत की भाग्य विधाता बन रही यूपी की नारी: सीएम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां कूष्मांडा को बताया सृजन, ऊर्जा व समृद्धि की सनातन प्रतीक  गांव की बहनों को आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ रही डबल इंजन सरकार: सीएम योगी  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्रि की चतुर्थी पर मां कूष्मांडा के चरणों में श्रद्धा निवेदित की। उन्होंने  प्रदेशवासियों को सृजन, ऊर्जा और समृद्धि की सनातन प्रतीक मां कूष्मांडा की आराधना का संदेश भी बताया। उन्होंने कहा कि जहां नारी को शक्ति व अवसर मिलता है, वहां अभाव परिश्रम में, परिश्रम आत्मनिर्भरता में और आत्मनिर्भरता समृद्धि में बदलती है।   2017 से पहले महिलाओं के लिए नहीं था अवसर मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश की नारी अब केवल विकास की लाभार्थी नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की निर्माता और नए भारत की भाग्य विधाता बन रही है। वर्ष 2017 से पहले महिलाओं के लिए न अवसर था, न संसाधन और न ही सरकार के पास नीति और नीयत।  गांव की बहनों को आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ रही सरकार सीएम ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार गांव की बहनों को आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ रही है। बीसी सखी गांवों में बैंकिंग सेवाओं की सशक्त कड़ी हैं। लखपति दीदी आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन गई हैं। ड्रोन दीदी खेती में आधुनिक तकनीक का नेतृत्व कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओज) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका, उद्यमिता और कृषि आधारित रोजगार के अवसरों का विस्तार हो रहा है।   नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा की नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री ने लिखा कि अब महिलाएं केवल परिवार की समृद्धि का आधार नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की संचालक और नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा की नेतृत्वकर्ता बन रही हैं। जब गांव की नारी समृद्ध होगी, तभी उत्तर प्रदेश सही मायने में समृद्ध और सशक्त बनेगा।

‘दिल्ली वाले दोस्तों ने आपकी हैसियत दिखा दी’, इंडी गठबंधन के नेताओं की तस्वीर शेयर कर राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना

'दिल्ली में पिछलग्गू बनकर घूमने में मजा आ रहा है?', ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर तंज, बोले- सत्ताइस में सपा साफ 'दिल्ली वाले दोस्तों ने आपकी हैसियत दिखा दी', इंडी गठबंधन के नेताओं की तस्वीर शेयर कर राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना 'दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे अखिलेश जी', राजभर का सपा पर तीखा हमला 'कुर्सी की ख्वाहिश पाले हैं और दिल्ली में दरी बिछा रहे हैं', ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर तंज 'इंडी गठबंधन में लोडर बन गए हैं अखिलेश यादव', दिल्ली प्रदर्शन की तस्वीर शेयर कर सपा पर बरसे राजभर 'लग रहा है बारात के ट्रैक्टर में जबरन ठूंस दिया गया हो', अखिलेश की तस्वीर शेयर कर राजभर ने कसा तंज 'दूल्हे के दोस्त के ममेरे भाई के नाराज फूफा जैसे हो गए अखिलेश', राजभर ने उड़ाया सपा प्रमुख का मजाक 'चुनाव यूपी में, दौड़ लगा रहे दिल्ली की', राजभर बोले- करा लिए न घनघोर बेइज्जती 'दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों से तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिलेगा', राजभर ने अखिलेश को दी नसीहत लखनऊ,  यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा पोस्ट किया है। राजभर ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन की एक तस्वीर शेयर करते हुए अखिलेश को 'पिछलग्गू' बताया। उन्होंने लिखा कि विपक्षी गठबंधन में अखिलेश की असली हैसियत उनके दिल्ली वाले दोस्तों ने सबके सामने दिखा दी है। दरअसल, इंडी गठबंधन की भीड़ वाली इस तस्वीर में अखिलेश यादव सबसे पीछे नजर आ रहे हैं। 'दिल्ली में पिछलग्गू बनकर घूमने में मजा आ रहा है?' ओमप्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में लिखा,'प्रिय अखिलेश यादव जी, दिल्ली में पिछलग्गू बनके घूमने में मजा आ रहा है कि नहीं?' उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि गठबंधन में अखिलेश की असली हैसियत उनके दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों ने सबके सामने दिखा दी है। राजभर ने लिखा कि अखिलेश की स्थिति ऐसी लग रही है, जैसे उन्हें बारात वाले ट्रैक्टर में जबरन ठूंस दिया गया हो। उन्होंने आगे तंज कसा कि अखिलेश दूल्हे के दोस्त के ममेरे भाई के नाराज फूफा जैसे दिखाई दे रहे हैं। 'अवतारी भैया जी अब भीड़ में खो जा रहे हैं' राजभर ने अखिलेश यादव के समर्थकों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा कि जो समर्थक अखिलेश को 'अवतारी भैया जी' बताते नहीं थकते थे, अब वही देख रहे होंगे कि उनके भैया जी सबके सामने 'लोडर' बनकर भीड़ में खो जा रहे हैं। राजभर ने अखिलेश की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर तंज कसते हुए लिखा, 'कुर्सी की ख्वाहिश पाले दरी बिछाने में लगे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि गठबंधन की नैया की पतवार राहुल गांधी के हाथ में चली गई है। 'दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे महाराज?' राजभर ने अखिलेश यादव के दिल्ली दौरे पर सवाल उठाते हुए लिखा कि चुनाव उत्तर प्रदेश में होना है, लेकिन अखिलेश दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। उन्होंने तंज कसा, 'और जाइए, भाग-भाग के दिल्ली! करा लिये न घनघोर बेइज्जती?' राजभर ने आगे लिखा, 'आप भी गजब करते हैं! चुनाव यूपी में है और आप दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं…! दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे महाराज?' 'दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों से तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिलेगा' राजभर ने अखिलेश यादव को आगाह करते हुए लिखा कि दिल्ली के मतलबी दोस्तों से उन्हें तिरस्कार के अलावा कुछ नहीं मिलने वाला। उन्होंने कहा कि जिस तरह अखिलेश दिल्ली की भीड़ में खो गए हैं, उसी तरह इस बार उत्तर प्रदेश में भी विपक्ष की भीड़ में उनका पता नहीं चलेगा। 'सत्ताइस में सपा साफ होने जा रही है' राजभर ने अपने पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव की राजनीतिक गतिविधियों पर निशाना साधते हुए लिखा, आपके आजकल के लच्छनों से तो यही समझ में आ रहा है कि 'सत्ताइस में सपा साफ' होने जा रही है।