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इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, यूपी पंचायत चुनाव में देरी पर निर्वाचन आयोग को तीन महीने की समयसीमा

प्रयागराज उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के पद पर बनाए रखने का निर्देश दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के शासनादेश में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके तहत निवर्तमान प्रधान प्रशासक के पद पर बने रहेंगे। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही थी. याचिकाओं में योगी सरकार के 25 मई के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था. इन मामलों में यूपी सरकार, निदेशक पंचायती राज, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है।  ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर भी असंतोष हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से जुड़ी सभी याचिकाओं को संबद्ध कर दिया था और सभी पर एक साथ सुनवाई हुई. याची दशरथ यादव समेत अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन, अनिल कुमार, अकबर अंसारी और हेमचंद्र की ओर से दाखिल याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई कर रही थी।  इससे पहले शुक्रवार को हुई सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर असंतोष जताया था. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रिपोर्ट फील्ड में जाकर तैयार नहीं की गई, बल्कि दफ्तर में बैठकर तैयार की गई है।  दरअसल, ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने का मामला कोर्ट पहुंचा था। इस मामले में याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा- कच्चे घर थे, लेकिन इरादे पक्के थे, विपरीत परिस्थितियों में कभी संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए

अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का मार्ग बनाया, रामनाथ कोविन्द की जीवन यात्रा हर भारतीय के लिए प्रेरणा: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने लोकभवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का किया विमोचन गांव के स्कूल से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे रामनाथ कोविन्द का जीवन संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ की मिसाल मुख्यमंत्री ने कहा- कच्चे घर थे, लेकिन इरादे पक्के थे, विपरीत परिस्थितियों में कभी संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय विकसित कर रही सरकार, 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय के लिए अलग कक्ष: सीएम सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय महापुरुषों की जीवनी और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें युवा: मुख्यमंत्री लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन सभागार में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की गरिमामयी उपस्थिति में उनकी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को अभावों से संघर्ष करते हुए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की प्रेरणादायी यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने अभावों को ढाल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और संघर्ष करने का मार्ग बनाया। उन्होंने परिश्रम, पुरुषार्थ और दृढ़ संकल्प के बल पर अपने जीवन की दिशा तय की। उनका जीवन देश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द का आगमन हमेशा प्रदेशवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश उनकी जन्मभूमि भी है और उनकी कर्मसाधना की भूमि भी। यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिस आत्मकथा का पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा विमोचन किया गया था, उसका हिंदी रूपांतरण अब उनकी पावन जन्मभूमि वाले प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विमोचित हुआ है।  अभावों में जन्म, संघर्ष से संवैधानिक शिखर तक का सफर मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा एक ऐसे भारतीय की कहानी है, जिसने जीवन की कठिनाइयों को प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया। परौंख गांव के एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्म लेने वाले रामनाथ कोविन्द के सिर से बचपन में ही मां का साया उठ गया था। इसके बावजूद उन्होंने अभावों को कभी पलायन का कारण नहीं बनने दिया और न ही अपनी परिस्थितियों को किसी से कुछ मांगने का आधार बनाया। उन्होंने गांव के विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की, फिर उच्च शिक्षा अर्जित की और अधिवक्ता के रूप में वंचितों-गरीबों की आवाज बने। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा और सार्वजनिक जीवन को अपने संघर्ष का हिस्सा बनाया। भारतीय जनता पार्टी के सदस्य एवं पदाधिकारी के रूप में राजनीतिक यात्रा शुरू करने के बाद वह राज्यसभा के सदस्य बने, बिहार के राज्यपाल पद पर पहुंचे और अंततः भारत के राष्ट्रपति के रूप में सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की यात्रा हमें बताती है कि महानता केवल अनुकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने से नहीं आती, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने के साहस से प्राप्त होती है। घर कच्चे थे, लेकिन इरादे पक्के थे। यही दृढ़ संकल्प उनकी यात्रा की शुरुआत बना। जब परिस्थितियां अनुकूल हों तो लोककल्याण और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करने का जज्बा होना चाहिए। यही विशेषता रामनाथ कोविन्द को उस मुकाम तक लेकर गई, जहां उन्होंने पांच वर्ष तक 145 करोड़ भारतवासियों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में देश का नेतृत्व किया। उन्हें जो भी दायित्व मिला, उसका निर्वहन उन्होंने सहजता, सरलता और भारतीय जनभावनाओं के अनुरूप किया। जन्मभूमि के प्रति अनुराग जीवन के संस्कारों का परिचायक मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की विशेषता केवल सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना नहीं है, बल्कि अपनी जन्मभूमि, गांव और पुराने संबंधों के प्रति उनका अनुराग भी है। उन्हें परौंख गांव जाने का कई बार अवसर मिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी उनके गांव पहुंच चुके हैं। जन्मभूमि के प्रति अनुराग रखना प्रत्येक भारतीय के जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार होना चाहिए। राष्ट्रपति पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद भी रामनाथ कोविन्द जब अवसर मिलता है, पुराने साथियों से मिलने पहुंचते हैं। कानपुर आने पर वह अपने गांव की ओर रुख करते हैं और लखनऊ आने पर पुराने परिचितों से मिलना नहीं भूलते। चाट वाले, चाय वाले, कपड़े वाले और दूसरे पुराने परिचितों के साथ उनके संबंध आज भी बने हुए हैं। उनका जीवन हमें अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का संदेश देता है। व्यक्ति जीवन में कितनी भी ऊंचाई प्राप्त कर ले, उसे अपने मूल, अपने गांव, अपने समाज और उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने उसकी जीवन यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भगवान राम का उदाहरण देकर समझाया जन्मभूमि का महत्व मुख्यमंत्री ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंका विजय के बाद जब लक्ष्मण सोने की लंका देखकर वहां कुछ समय रुकने की बात करते हैं, तब भगवान श्रीराम उन्हें अपनी जन्मभूमि और मातृभूमि का महत्व समझाते हैं। भगवान श्रीराम कहते हैं- ‘अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।’ अर्थात सोने की लंका भी उन्हें आकर्षित नहीं करती, क्योंकि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।  राष्ट्रपति के रूप में दुनिया में प्रभावी ढंग से रखा भारत का पक्ष मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति के रूप में देश के विभिन्न राज्यों और दुनिया के अनेक देशों की यात्राएं कीं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने प्रभावी ढंग से भारत का पक्ष रखा और दूसरे देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया। उनका सार्वजनिक जीवन संवैधानिक मर्यादा, सहज व्यवहार और देश के प्रति समर्पण का उदाहरण है। गांव से लेकर राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और परिश्रम के बल पर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। युवाओं को महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथा पढ़ने की सलाह मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे आगे बढ़ने के लिए महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथाएं पढ़ें। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन संघर्ष का … Read more

समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट! अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी बीजेपी में शामिल

 लखनऊ अमेठी में अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. तीनों ने स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. मंच से बोलते हुए अभय सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़ीने की वजह भी बताई।  उन्होंने सपा पर सनातन विरोधी आचरण, भर्तियों में भेदभाव और चापलूसी को बढ़ावा देने के आरोप लगाए. साथ ही दिल्ली के आंदोलन, नौकरी घोटालों और 2024 के अयोध्या चुनाव पर भी बात रखी।  अमेठी में हुए इस कार्यक्रम में बीजेपी नेताओं के सामने तीनों नेताओं ने पार्टी का दामन थामा. तीनों नेताओं ने एक साथ पार्टी की सदस्यता ली. इस मौके पर स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहे. अभय सिंह ने अपना संबोधन भारत माता की जय के नारे के साथ शुरू किया. इसके बाद उन्होंने सपा छोड़ने की वजह बताई।  अमेठी में हुआ ज्वॉइनिंग का कार्यक्रम बीजेपी ने इस बड़े ज्वॉइनिंग कार्यक्रम के लिए अमेठी को चुना है। इस कार्यक्रम में स्मृति ईरानी और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहीं। इस कार्यक्रम के जरिए बीजेपी विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है।  1. राकेश प्रताप सिंह (गौरीगंज सीट, अमेठी) 2.अभय सिंह (गोसाईंगंज सीट, अयोध्या) 3. विनोद चतुर्वेदी  (कल्पी सीट, जालौन) जानिए राकेश प्रताप सिंह के बारे में राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक हैं। 2012 से समाजवादी पार्टी के साथ थे। 2017, 2022 में सपा के टिकट पर विधायक बने। लगातार तीसरी बार 2022 में विधायक बने। फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत की थी। राज्यसभा चुनाव में BJP कैंडिडेट को वोट किया था। जून 2025 में सपा ने निष्कासित कर दिया था। सपा पर तुष्टिकरण और सनातन के अपमान का आरोप लगाते रहे हैं। जानिए अभय सिंह के बारे में अयोध्या जिले की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह भी समाजवादी पार्टी के चर्चित नेताओं में शामिल रहें। उनका नाम पहले भी पार्टी नेतृत्व से मतभेदों और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में रहा है। उनके पाला बदलने की स्थिति में अयोध्या क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है। अब अभय सिंह ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है। जानिए विनोद चतुर्वेदी के बारे में जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी भी इस चर्चा में शामिल हैं। उनके बीजेपी में जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें पहले से ही लगाई जा रही थी। आज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, स्मृति ईरानी के सामने भाजपा में शामिल हो गए हैं। सपा पर लगाए गंभीर आरोप अभय सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी का आचरण सनातन विरोधी रहा है. उनका आरोप है कि पार्टी में रामचरितमानस को फाड़ने जैसा काम किया गया. उन्होंने दावा किया कि सपा में जब भी किसी भर्ती की बात आई, जानबूझकर एक तरफ के लोगों को ही लिया गया।  अभय सिंह के मुताबिक पहले नौकरी उसी को मिलती थी जो चापलूसी करता था. उन्होंने दावा किया कि आज किसी के लिए कोई भेदभाव नहीं है. उन्होंने सपा के दौर और आज के हालात की तुलना करते हुए अपनी बात रखी।  राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सपा ने किन लोगों को आगे रखा, इसके मुकाबले भाजपा ने सभी दलों को आगे रखा. दिल्ली में चल रहे आंदोलन को लेकर अभय सिंह ने कहा कि यह आंदोलन विदेशी फंडिंग के लिए चलाया जा रहा है. नौकरी घोटालों पर उन्होंने कहा कि जो घोटाले हुए, उनमें सभी की गिरफ्तारी हो रही है।  अभय सिंह ने आरोप लगाया कि 2024 में अयोध्या की भोली भाली जनता को बरगला कर सांसद बनाया गया. उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में अयोध्या की जनता इसका जवाब लाखों वोट से देगी. अभय सिंह ने जय श्री राम के नारे के साथ अपनी बात पूरी की. यह सारी बातें उन्होंने भाजपा में शामिल होने के बाद मंच से कही।  तीन बार सपा के टिकट पर विधायक चुने गए राकेश प्रताप सिंह की पार्टी से दूरियां पिछले तीन वर्षों में लगातार बढ़ती गईं। स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से रामचरितमानस और अन्य धार्मिक विषयों को लेकर की गई टिप्पणियों के विरोध में राकेश प्रताप सिंह ने एक कथा मंच से अपनी बात रखी थी। इसके बाद सपा नेतृत्व के साथ उनकी तल्खियां बढ़ती गईं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी गठबंधन की राजनीतिक दिशा से अलग हटकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी के पक्ष में प्रचार किया था। चुनाव से पहले ही उनके परिवार के अन्य सदस्य भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके अलावा राकेश प्रताप सिंह ने गौरीगंज से अयोध्या स्थित राम मंदिर तक पदयात्रा भी निकाली थी। इन घटनाक्रमों के बीच पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में समाजवादी पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। राष्ट्र और राम के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे: राकेश सिंह राकेश प्रताप सिंह ने कहा है कि वह राष्ट्र और राम के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। उनके साथ अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के भी भाजपा में शामिल होने की तैयारी है। इसके अलावा अमेठी जिले के सैकड़ों ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, पूर्व ग्राम प्रधानों और सपा से जुड़े लोगों के भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने का दावा किया जा रहा है। कार्यक्रम में जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिभा शुक्ला, मंत्री दारा सिंह चौहान और भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री भोला सिंह समेत कई मंत्री व विधायक मौजूद रहेंगे।  

मोदी-योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्की छत के साथ दी गरिमा, टपकती छत के नीचे बीता था मेरा बचपन : पूर्व राष्ट्रपति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुशासन से यूपी के विकास को दी नई गति : पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द   लोकभवन में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों का जताया आभार   मोदी-योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्की छत के साथ दी गरिमा, टपकती छत के नीचे बीता था मेरा बचपन : पूर्व राष्ट्रपति   भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना, यहां साधारण परिवार का व्यक्ति भी बन सकता है प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति : रामनाथ कोविन्द   योगी सरकार की कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की सराहना, एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो के विस्तार का किया उल्लेख   यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी के संकल्प को सराहा    लखनऊ  पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों और सुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को नई ऊर्जा दी है। उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के प्रयासों को अभूतपूर्व गति मिली है। एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से आवागमन सुगम हुआ है। सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से गरीब परिवारों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी के संकल्प की भी प्रशंसा की।   पूर्व राष्ट्रपति बुधवार को लोकभवन सभागार में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह में उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक अवसर है। इससे पहले अनेक मंचों से लोगों को संबोधित किया, लेकिन आज चर्चा का विषय उनका अपना जीवन है। इसी प्रदेश में जन्मे, यहीं की मिट्टी में पले-बढ़े और शिक्षा प्राप्त की। उत्तर प्रदेश ही उनकी कर्मभूमि भी बना।   भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि, राजनीति का उद्देश्य राष्ट्रसेवा पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति के लिए भाजपा को चुनने का प्रमुख कारण पार्टी में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना है। यहां जातिवाद, क्षेत्रवाद और वंशवाद से ऊपर उठकर समावेशी विकास पर बल दिया जाता है। इसी पार्टी में साधारण शिक्षक का पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री, कल्याण सिंह मुख्यमंत्री, गरीब परिवार में जन्मे योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। समाज के कमजोर वर्ग से आने वाला व्यक्ति भी राष्ट्रपति बन सकता है। यही भारतीय गणतंत्र की सच्ची विजयगाथा है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। उनसे राजनीति को सत्ता प्राप्त करने के बजाय राष्ट्रसेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा मिली।   टपकती छत के नीचे बीता बचपन, आज गरीबों को मिल रहे पक्के घर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि कानपुर देहात के छोटे से गांव में उनका साधारण घर था। बरसात में छत टपकती थी। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति चुने जाने पर वे स्मृतियां फिर ताजा हो गई थीं। तब उन्होंने कहा था कि देश के किसी गांव में आज भी कोई छोटा-सा रामनाथ टपकती छत के नीचे खड़ा होकर बेहतर भविष्य के सपने देख रहा होगा। आज मोदी और योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्के मकान के साथ गरिमा और सुरक्षा का एहसास कराया है।   उन्होंने कहा कि उनके पिता शिक्षा को जीवन बदलने का माध्यम मानते थे। जमीन दान करने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव से मिले भाईचारे, संवेदना और बड़ों के सम्मान के संस्कार जीवनभर उनके साथ रहे।   यूपी से राष्ट्रपति बनना करोड़ों लोगों के सपनों का सम्मान पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए, लेकिन यहां जन्मे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति बनने का अवसर पहली बार मिला। इसे वह अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों लोगों के सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान मानते हैं। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता की शक्ति दिखाई। उन्होंने बताया कि उनकी आत्मकथा आने वाले दिनों में देश की सभी क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां कूष्मांडा को बताया सृजन, ऊर्जा व समृद्धि की सनातन प्रतीक

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की निर्माता और नए भारत की भाग्य विधाता बन रही यूपी की नारी: सीएम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां कूष्मांडा को बताया सृजन, ऊर्जा व समृद्धि की सनातन प्रतीक  गांव की बहनों को आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ रही डबल इंजन सरकार: सीएम योगी  लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्रि की चतुर्थी पर मां कूष्मांडा के चरणों में श्रद्धा निवेदित की। उन्होंने  प्रदेशवासियों को सृजन, ऊर्जा और समृद्धि की सनातन प्रतीक मां कूष्मांडा की आराधना का संदेश भी बताया। उन्होंने कहा कि जहां नारी को शक्ति व अवसर मिलता है, वहां अभाव परिश्रम में, परिश्रम आत्मनिर्भरता में और आत्मनिर्भरता समृद्धि में बदलती है।   2017 से पहले महिलाओं के लिए नहीं था अवसर मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश की नारी अब केवल विकास की लाभार्थी नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की निर्माता और नए भारत की भाग्य विधाता बन रही है। वर्ष 2017 से पहले महिलाओं के लिए न अवसर था, न संसाधन और न ही सरकार के पास नीति और नीयत।  गांव की बहनों को आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ रही सरकार सीएम ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार गांव की बहनों को आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ रही है। बीसी सखी गांवों में बैंकिंग सेवाओं की सशक्त कड़ी हैं। लखपति दीदी आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन गई हैं। ड्रोन दीदी खेती में आधुनिक तकनीक का नेतृत्व कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओज) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका, उद्यमिता और कृषि आधारित रोजगार के अवसरों का विस्तार हो रहा है।   नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा की नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री ने लिखा कि अब महिलाएं केवल परिवार की समृद्धि का आधार नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की संचालक और नए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा की नेतृत्वकर्ता बन रही हैं। जब गांव की नारी समृद्ध होगी, तभी उत्तर प्रदेश सही मायने में समृद्ध और सशक्त बनेगा।

‘दिल्ली वाले दोस्तों ने आपकी हैसियत दिखा दी’, इंडी गठबंधन के नेताओं की तस्वीर शेयर कर राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना

'दिल्ली में पिछलग्गू बनकर घूमने में मजा आ रहा है?', ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर तंज, बोले- सत्ताइस में सपा साफ 'दिल्ली वाले दोस्तों ने आपकी हैसियत दिखा दी', इंडी गठबंधन के नेताओं की तस्वीर शेयर कर राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना 'दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे अखिलेश जी', राजभर का सपा पर तीखा हमला 'कुर्सी की ख्वाहिश पाले हैं और दिल्ली में दरी बिछा रहे हैं', ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर तंज 'इंडी गठबंधन में लोडर बन गए हैं अखिलेश यादव', दिल्ली प्रदर्शन की तस्वीर शेयर कर सपा पर बरसे राजभर 'लग रहा है बारात के ट्रैक्टर में जबरन ठूंस दिया गया हो', अखिलेश की तस्वीर शेयर कर राजभर ने कसा तंज 'दूल्हे के दोस्त के ममेरे भाई के नाराज फूफा जैसे हो गए अखिलेश', राजभर ने उड़ाया सपा प्रमुख का मजाक 'चुनाव यूपी में, दौड़ लगा रहे दिल्ली की', राजभर बोले- करा लिए न घनघोर बेइज्जती 'दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों से तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिलेगा', राजभर ने अखिलेश को दी नसीहत लखनऊ,  यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा पोस्ट किया है। राजभर ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन की एक तस्वीर शेयर करते हुए अखिलेश को 'पिछलग्गू' बताया। उन्होंने लिखा कि विपक्षी गठबंधन में अखिलेश की असली हैसियत उनके दिल्ली वाले दोस्तों ने सबके सामने दिखा दी है। दरअसल, इंडी गठबंधन की भीड़ वाली इस तस्वीर में अखिलेश यादव सबसे पीछे नजर आ रहे हैं। 'दिल्ली में पिछलग्गू बनकर घूमने में मजा आ रहा है?' ओमप्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में लिखा,'प्रिय अखिलेश यादव जी, दिल्ली में पिछलग्गू बनके घूमने में मजा आ रहा है कि नहीं?' उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि गठबंधन में अखिलेश की असली हैसियत उनके दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों ने सबके सामने दिखा दी है। राजभर ने लिखा कि अखिलेश की स्थिति ऐसी लग रही है, जैसे उन्हें बारात वाले ट्रैक्टर में जबरन ठूंस दिया गया हो। उन्होंने आगे तंज कसा कि अखिलेश दूल्हे के दोस्त के ममेरे भाई के नाराज फूफा जैसे दिखाई दे रहे हैं। 'अवतारी भैया जी अब भीड़ में खो जा रहे हैं' राजभर ने अखिलेश यादव के समर्थकों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा कि जो समर्थक अखिलेश को 'अवतारी भैया जी' बताते नहीं थकते थे, अब वही देख रहे होंगे कि उनके भैया जी सबके सामने 'लोडर' बनकर भीड़ में खो जा रहे हैं। राजभर ने अखिलेश की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर तंज कसते हुए लिखा, 'कुर्सी की ख्वाहिश पाले दरी बिछाने में लगे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि गठबंधन की नैया की पतवार राहुल गांधी के हाथ में चली गई है। 'दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे महाराज?' राजभर ने अखिलेश यादव के दिल्ली दौरे पर सवाल उठाते हुए लिखा कि चुनाव उत्तर प्रदेश में होना है, लेकिन अखिलेश दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। उन्होंने तंज कसा, 'और जाइए, भाग-भाग के दिल्ली! करा लिये न घनघोर बेइज्जती?' राजभर ने आगे लिखा, 'आप भी गजब करते हैं! चुनाव यूपी में है और आप दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं…! दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे महाराज?' 'दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों से तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिलेगा' राजभर ने अखिलेश यादव को आगाह करते हुए लिखा कि दिल्ली के मतलबी दोस्तों से उन्हें तिरस्कार के अलावा कुछ नहीं मिलने वाला। उन्होंने कहा कि जिस तरह अखिलेश दिल्ली की भीड़ में खो गए हैं, उसी तरह इस बार उत्तर प्रदेश में भी विपक्ष की भीड़ में उनका पता नहीं चलेगा। 'सत्ताइस में सपा साफ होने जा रही है' राजभर ने अपने पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव की राजनीतिक गतिविधियों पर निशाना साधते हुए लिखा, आपके आजकल के लच्छनों से तो यही समझ में आ रहा है कि 'सत्ताइस में सपा साफ' होने जा रही है।

नीले ड्रम हत्याकांड में 14 अक्टूबर को फैसला, मुस्कान-साहिल को मिलेगी सजा; अभियोजन ने की थी फांसी की मांग

 मेरठ उत्तर प्रदेश के मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में आज गुरुवार को सजा सुनाई जानी है. मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को कोर्ट 30 सितंबर को दोषी करार दे चुकी है. अब दोनों की सजा पर फैसला होना है. इस मामले में अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मौत की सजा की मांग की है।  इस मामले में 17 सितंबर को कोर्ट में अंतिम बहस पूरी हुई थी. अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर अपनी दलीलें रखीं. सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता विजय बहादुर ने बताया कि सौरभ के परिवार की ओर से कुल 22 गवाह पेश किए गए. इनमें सौरभ का भाई बबलू, उनकी मां और दोस्त शामिल हैं।  इसके अलावा उन दुकानदारों की भी गवाही हुई, जिनसे तौर पर ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और रेत खरीदी गई थी. अभियोजन पक्ष ने हत्या से पहले की तैयारियों और वारदात के बाद आरोपियों के शिमला जाने से जुड़े साक्ष्य भी कोर्ट में रखे।  जेल में मुस्कान से मिलने नहीं आया परिवार  बातचीत में मेरठ जेल के अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान और साहिल को नशे की लत से बाहर निकालने में शुरुआत में काफी मुश्किलें आईं. इसमें 3 से 4 महीने लगे. उन्होंने बताया कि साहिल से पहले उसकी दादी मिलने आती थीं, बाद में उसका भाई भी मिलने आने लगा, लेकिन अब तक मुस्कान से मिलने परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा है।  जेल अधीक्षक का कहना है कि पिछले साल नवंबर में जेल में बेटी को जन्म देने के बाद मुस्कान धार्मिक हो गई है. वह अपनी करीब 6.5 साल की बेटी से मिलना चाहती है, लेकिन बेटी खुद अपनी मां से नहीं मिलना चाहती. मुस्कान को बताया गया है कि वह अपने परिवार को पत्र लिखकर बेटी से मुलाकात कराने की बात कह सकती है. जेल अधीक्षक ने यह भी बताया कि मुस्कान और साहिल दोनों मौजूदा स्थिति से वाकिफ हैं. आज जेल अधिकारियों के साथ उनकी नियमित मुलाकात भी हुई।  नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव दरअसल, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे. 25 फरवरी को घर में मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया. 28 फरवरी को बेटी पीहू का जन्मदिन था।  अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ को नींद की दवा देने के बाद उनकी हत्या कर दी गई. इसके बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया. 4 मार्च को मुस्कान बेटी को मायके छोड़कर साहिल के साथ शिमला चली गई. उसने सौरभ के फोन से मैसेज भेजकर परिवार को गुमराह किया।  17 मार्च को मामले का खुलासा हुआ. पुलिस ने घर में रखे नीले ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए. इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया।  मामले में हुईं 126 पेशियां  इस मामले में मार्च 2025 से सितंबर 2026 तक सुनवाई चली. अदालत में कुल 126 पेशियां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. 30 सितंबर को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था. इसके बाद सजा तय करने के लिए समय लिया गया. अब आज आने वाले कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। 

आजम खान के खिलाफ अजीमनगर थाने में केस दर्ज, जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़ा है मामला

रामपुर   उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई है. यह एफआईआर रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज हुई है. मामले में बड़े पैमाने पर आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए हैं।  मिली जानकारी के मुताबिक, ईडी के लखनऊ कार्यालय में तैनात डिप्टी डायरेक्टर पीयूष एस. थ्रोट ने पुलिस को शिकायत दी. इसके आधार पर अजीमनगर थाने में FIR दर्ज की गई है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत की गई शिकायत से जुड़ी है।  जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में कथित आर्थिक अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसी ने यह कदम उठाया है. हालांकि, एफआईआर दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं. मामले की जांच के बाद ही आरोपों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 316(5) और 318(4) के तहत भी FIR दर्ज की गई है. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1) और 13(2) भी लगाई गई हैं. इन धाराओं के तहत दर्ज मामले में कथित वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की जा सकती है. फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में एफआईआर में लगाए गए आरोपों का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है।  जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े इस मामले में अब जांच के दौरान अहम दस्तावेजों और लेन-देन की पड़ताल की जा रही है. ईडी की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की जांच पर निर्भर करेगी. आजम खान की ओर से इस एफआईआर पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह मामला पैसों के लेन-देन में कथित गड़बड़ी का है. ईडी को शक है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी को मिले पैसों के सोर्स और उनके इस्तेमाल में गड़बड़ी हुई है. जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि ट्रस्ट को पैसा कहां से मिला और उसे किन कामों में खर्च किया गया. इस मामले में सरकारी ठेकेदारों से जुड़े पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है. ईडी इससे पहले ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी है।  13 अक्टूबर को ईडी ने रामपुर जेल में आजम खान से भी करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी. अब एजेंसी की शिकायत पर रामपुर के अजीमनगर थाने में आजम खान के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. हालांकि, अभी ये आरोप हैं और जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। 

योगी सरकार का बिजली व्यवस्था सुधारने पर जोर, राजस्व वसूली और बिलिंग पर रहेगी सख्त निगरानी

योगी सरकार का बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार पर जोर, राजस्व वसूली और सही बिलिंग की होगी सख्त निगरानी लाइन हानि कम करने और उपभोक्ता सेवाएं बेहतर बनाने के लिए वितरण निगमों को निर्देश गलत बिजली बिलों पर तय होगी जिम्मेदारी, डिस्कॉम प्रबंध निदेशक हर सप्ताह 7 से 10 बिलों की करेंगे रैंडम जांच लखनऊ,  योगी सरकार प्रदेश में विद्युत वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने, राजस्व संग्रह बढ़ाने और उपभोक्ताओं को पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपीपीसीएल के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने वितरण निगमों की साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर राजस्व प्राप्ति, लाइन हानि, बिलिंग व्यवस्था, स्मार्ट मीटर स्थापना, परिवर्तकों की क्षतिग्रस्तता और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि सभी वितरण निगमों के प्रबंध निदेशक एवं संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। अध्यक्ष ने कहा कि राजस्व वृद्धि, विद्युत हानियों में कमी और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के लिए प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। राजस्व वृद्धि और लाइन हानि में कमी पर जोर वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व प्राप्ति और केवाईपी अभियान की समीक्षा करते हुए रणवीर प्रसाद ने राजस्व संग्रह में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने पांच रुपये से कम थ्रू रेट वाले फीडरों की विशेष समीक्षा करने तथा सर्वाधिक लाइन हानि वाले 10 पोषकों को प्राथमिकता के आधार पर लेकर सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा। सहारनपुर में 1.71 रुपये थ्रू रेट पर असंतोष जताते हुए सुधार के निर्देश दिए, जबकि मुरादाबाद में राजस्व प्राप्ति कम होने पर संबंधित अधिकारियों से प्रभावी प्रयास करने को कहा। गलत बिलिंग पर तय होगी जिम्मेदारी यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने उपभोक्ताओं को सही और समयबद्ध बिजली बिल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने गलत बिल तत्काल ठीक करने, बिलिंग संबंधी शिकायतों का निस्तारण करने और बिल संशोधन में अनियमितता रोकने के निर्देश दिए। सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को प्रत्येक सप्ताह सात से दस उपभोक्ताओं के बिलों की रैंडम जांच करने को कहा। लंबित बिल संशोधन मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने और लापरवाही मिलने पर संबंधित कार्मिक की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए। बकायेदारों पर कार्रवाई, परिवर्तकों की सुरक्षा पर ध्यान बकाया वसूली के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के बकायेदार उपभोक्ताओं के संबंध में ग्राम प्रधानों को पत्र भेजकर अवगत कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के गोला और नवाबगंज, गोंडा क्षेत्रों में बिलों की जांच तथा 10 बड़े बकायेदारों को चिह्नित कर नियमानुसार नोटिस और आवश्यक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं। बैठक में 100 केवीए से कम क्षमता वाले परिवर्तकों पर फ्यूज सेट लगाने का कार्य तेज करने तथा परिवर्तकों की क्षतिग्रस्तता कम करने के तकनीकी उपायों पर भी जोर दिया गया।  इसके अलावा बिजनेस प्लान 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के स्वीकृत कार्यों की प्रगति, एमबी, ईआरपी क्लोजर और अंतिम भुगतान से जुड़े मामलों को समय से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। रणवीर प्रसाद ने कहा कि सही बिलिंग, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, राजस्व वृद्धि और विद्युत हानियों में कमी वितरण निगमों की जिम्मेदारी है। इसके लिए नियमित निगरानी और निर्धारित समयसीमा में परिणाम सुनिश्चित किए जाएं।

राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा’ का विमोचन करेंगे योगी आदित्यनाथ

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा 'भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष' का विमोचन करेंगे सीएम योगी पूर्व राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति में लोक भवन सभागार में होगा रूपा पब्लिकेशंस इंडिया द्वारा प्रकाशित पुस्तक का विमोचन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और दोनों डिप्टी सीएम भी रहेंगे मौजूद साधारण पृष्ठभूमि से सर्वोच्च संवैधानिक पद तक के संघर्ष, अनुभव व राष्ट्रपति भवन के अनछुए पहलुओं पर आधारित है पुस्तक लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार, 14 अक्टूबर को भारत के 14वें राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा 'भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष' का विमोचन करेंगे। पूर्व राष्ट्रपति की गरिमामय उपस्थिति में यह कार्यक्रम लोकभवन सभागार में आयोजित किया गया है। रूपा पब्लिकेशंस इंडिया द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन समारोह में विधानसभा अध्य्क्ष सतीश महाना, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक समेत अन्य अतिथिगण उपस्थित रहेंगे। पुस्तक में कई अनछुए पहलुओं और निर्णयों का विवरण पूर्व राष्ट्रपति द्वारा लिखी गई पुस्तक में केवल उनके व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के रूप में 5 वर्षीय कार्यकाल के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों, संवैधानिक शक्तियों, कोविड-19 संकट, केंद्र-राज्य संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े कई अनसुने-अनदेखे अनुभवों का विवरण दर्ज है। साथ ही, इसमें देश की शासन व्यवस्था और सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनके दायित्वों को भी गहराई से साझा किया गया है। यह पुस्तक न केवल एक पूर्व राष्ट्रपति की जीवनगाथा है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संवैधानिक आदर्शों और सामाजिक-राजनीतिक परिवेश की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है।  संघर्ष से शिखर तक की प्रेरक यात्रा यह कार्यक्रम भारतीय गणतंत्र की उस मूल भावना का उत्सव है, जिसमें एक साधारण नागरिक अपने दृढ़ संकल्प, परिश्रम और सादगी के बल पर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। उत्तर प्रदेश के एक साधारण ग्रामीण परिवेश (परौंख) से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक का पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का सफर प्रेरणादायी है। श्री कोविन्द ने 25 जुलाई 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इससे पहले वह बिहार के राज्यपाल पद पर कार्यरत रहे। अप्रैल 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए और मार्च 2006 तक लगातार दो कार्यकाल पूरे किए। इस दौरान उन्होंने कई संसदीय समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वकील के तौर पर उन्होंने 1977 से 1979 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। वह सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड भी बने। उनकी रुचि कानून, इतिहास, राजनीति और अध्यात्म में है।