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सेवा सेतु छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल क्रांति का नया अध्याय

रायपुर छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी विजन का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल तक की 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ है सेवाओं का सरलीकरण और समयबद्धता। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। डिजिटल सुशासन- कार्यालयों के चक्करों से मिली मुक्ति एक समय था जब नागरिकों को प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती थी, बल्कि बिचौलियों का डर भी बना रहता था। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” पेश किया है। अब नागरिक घर बैठे या नजदीकी लोक सेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। तकनीकी उन्नयन की दिशा में राज्य ने लंबी छलांग लगाई है। छत्तीसगढ़ के पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहाँ केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं नए और उन्नत “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पर अब 441 सेवाएं लाइव हैं। इस पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है इस नई सेवा में 54 नई सेवाओं के साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का सफल एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना नहीं पड़ता। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवा देना अब केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि हकीकत है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं। कुल  75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदनों में से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामले का निराकरण किया जा चुका है। इस प्रकार 95 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर किया गया। प्रमाण-पत्रों की डिजिटल सुलभता आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मांग बुनियादी प्रमाण-पत्रों की रही है। चिप्स (ब्भ्पच्ै) कार्यालय के मुताबिक आय प्रमाण-पत्ररू 32 लाख से अधिक आवेदन, मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-नक़ल सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर डिजिटल उपयोग हुआ है। व्हाट्सएप और डिजिटल ट्रांजेक्शन- पहुँच हुई और भी आसान तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अब “सेवा सेतु” को व्हाट्सएप से भी जोड़ दिया गया है। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल “सेवा सेतु” केवल एक तकनीकी पोर्टल नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण अब हर आवेदन की रीयल-टाइम निगरानी संभव है, जिससे अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहा, तो छत्तीसगढ़ का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है।  

विष्णु सरकार ने बड़े प्रशासनिक बदलाव किए, नई टीम से अधिकारियों से उम्मीदें जुड़ीं

रायपुर  छतीसगढ़ में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की हुआ है। तबादलों की इस आंधी में कई अहम बदलाव हुए हैं जो प्रदेश सरकार के लिहाज से काफी अहम है। इस फेरबदल को रिजल्ट ओरिएंटिड तरीके से देखा जा रहा है। काफी लंबे से समय से इंतजार किए जा रहे आईएएस अफसरों के तबादले आज हो गए हैं। इन अधिकारियों में एसीएस स्तर से लेकर कलेक्टर तक शामिल रहे। इस बड़े फेरबदल को इसिलए महत्वपूर्ण कहा जा रहा है क्योंकि इसे सीएम विष्णुदेव साय ने की नई प्रशासनिक टीम कहा जा रहा है जो आगामी चुनाव तक काम करेगी। दरअसल छतीसगढ़ सरकार को ढाई साल पूरे हो गए हैं।अब बचे समय में नतीजे लाने की जिम्मेवारी है । लिहाजा नतीजे देने वाले अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है। सात कलेक्टरों को हटाकर नए चेहरों को तैनाती दी गई है। जानकारी आ रही है कि बलरामपुर कलेक्टर को मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद हटाया गया है। वहीं एसीएस ऋचा शर्मा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऋचा को नतीजे देने वाली अफसर के रूप में पहचाना जाता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ऊर्जा विभाग के प्रशासनिक प्रमुख तो बनाए गए हैं, साथ ही उन्हें बिजली कंपनी का अध्यक्ष भी बनाया गया है। वहीं बात अगर गृह एवं जेल विभाग की करें तो पहली बार महिला अधिकारी की तैनाती हुई है। निहारिका बारीक को इस अहम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह वित्त विभाग अब डॉ. रोहित यादव संभालेंगे। मुकेश बंसल को पीडब्ल्यूडी और छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। मुकेश बंसल से सरकार उम्मीद कर रही है कि चुनाव मोर्चे पर जाने से पहले तक स्थिति बेहतर हो जाए। वहीं इन तबादलों में सबसे ज्यादा चर्चा बसवराजू एस के मुख्यमंत्री सचिवालय से बाहर होने को लेकर रही। उन्हें अब कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार विभाग का प्रभार सौंपा गया है। 7 जिलों के कलेक्टरों को भी बदला गया है। सरकार ने संदेश  साफ और स्पष्ट है कि लोक हित योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लिहाजा सरकार ने बेहतर नतीजों की दिशा में बड़ा फेरबदल करके पहला कदम बढ़ा दिया है। देखना होगा सरकार कितनी सफल हो पाती है और ये अधिकारी लक्ष्यों के कितने करीब पहुंच पाते हैं।

कैंटीन से किराना दुकानों तक छापा, खाद्य विभाग ने पकड़ा एक्सपायरी सामान और गड़बड़ियों का जाल

खैरागढ़. जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे सघन निरीक्षण अभियान के दौरान व्यापक कार्रवाई देखने को मिली, जिससे अस्पताल कैंटीन संचालकों से लेकर किराना दुकानदारों तक हड़कंप मच गया। “सही दवा-शुद्ध आहार, यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत यह जांच अभियान चलाया गया। अस्पताल कैंटीनों में मिली खामियां, सुधार के निर्देश बता दें कि अभिहित अधिकारी सिद्धार्थ पांडे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा दल ने सिविल अस्पताल खैरागढ़ और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुईखदान की कैंटीनों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान महिला समूहों द्वारा संचालित किचन और कैंटीनों की साफ-सफाई, खाद्य भंडारण और सुरक्षा मानकों की गहन जांच की गई। निरीक्षण में कई स्थानों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं पाई गईं, जिसके बाद टीम ने तत्काल सुधार के सख्त निर्देश दिए। मावा केक का सैंपल लैब जांच के लिए भेजा गया कार्रवाई के दौरान छुईखदान स्थित मेसर्स कृष्णा बेकर्स से मावा केक का सर्विलांस सैंपल लिया गया। इस नमूने को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक्सपायरी सामान नष्ट, दुकानदारों को चेतावनी निरीक्षण के दौरान बाजार में बिक रहे एक्सपायरी कोल्ड ड्रिंक और कुरकुरे भी पाए गए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि एक्सपायरी खाद्य पदार्थों का विक्रय या भंडारण पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किराना दुकानों पर भी हुई जांच खाद्य सुरक्षा दल ने कई किराना दुकानों का निरीक्षण कर दुकानदारों को खाद्य अनुज्ञप्ति और पंजीयन अपडेट रखने, स्वच्छता बनाए रखने और एक्सपायरी सामान हटाने के निर्देश दिए। आगे भी जारी रहेगा अभियान विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिलेभर में इसी तरह की औचक कार्रवाई जारी रहेगी। खाद्य सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि आम लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

पहाड़ी और दूरस्थ कोरवा बस्तियों में अब नहीं होगी पानी की किल्लत, CM साय के निर्देश पर शुरू हुई बड़ी पहल

अम्बिकापुर. जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी। विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है। कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ों गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।

सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, माओवादियों के ठिकाने से करोड़ों रुपये और सोना मिला

जगदलपुर. बस्तर में माओवादी नेटवर्क के कमजोर पड़ने के साथ अब उनके आर्थिक ढांचे की परतें खुलने लगी है। सुरक्षा बलों की लगातार सर्चिंग में ऐसे डंप सामने आ रहे हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि संगठन सिर्फ बंदूक के दम पर नहीं बल्कि मजबूत आर्थिक जाल पर भी टिका था। बीते तीन महीनों में जवानों ने करीब 6 करोड़ 75 लाख रुपए नगद और 8 किलो सोना बरामद किया है, जो इस छिपे खजाने की एक झलक भर है। आईजी सुंदरराज पी के मुताबिक, यह बरामदगी अंदरूनी इलाकों में छिपाकर रखे गए डंप से हुई है, जिनकी तलाश अभी भी जारी है। जानकार बताते हैं कि नोटबंदी के बाद माओवादियों ने रणनीति बदली और नगद की जगह सोने में निवेश करना शुरू किया, ताकि जोखिम कम रहे। बरामद 8 किलो सोने की कीमत ही करीब 13 करोड़ रुपए आंकी गई है, जिससे संगठन की आर्थिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह पैसा तेंदूपत्ता संग्राहकों, ठेकेदारों और विकास कार्यों में लगे लोगों से लेवी के रूप में वसूला जाता था, जो साल दर साल करोड़ों में पहुंचता था। 50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है माओवादियों की छिपी पूंजी वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी मानते हैं कि अब तक मिली रकम सिर्फ सतह है, असल में बस्तर में ही माओवादियों की छिपी पूंजी 50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। यानी जैसे-जैसे माओवादी नेटवर्क खत्म हो रहा है, वैसे-वैसे उनका आर्थिक साम्राज्य भी उजागर हो रहा है। हालांकि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि जंगलों में छिपे ऐसे कई डंप अब भी सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं। फिलहाल बस्तर में जारी सर्च ऑपरेशन सिर्फ हथियारों की तलाश नहीं, बल्कि माओवादियों की उस आर्थिक रीढ़ को तोड़ने की कोशिश भी है, जिस पर उनका पूरा नेटवर्क खड़ा था।

नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ 09 मई 2026 को, आपसी सहमति से सुलझेंगे लंबित मामले

नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ 09 मई 2026 को, आपसी सहमति से सुलझेंगे लंबित मामले सुप्रीम कोर्ट की विशेष पहलः समाधान समारोह के जरिए घर बैठे आभासी (Virtual) माध्यम से भी जुड़ सकेंगे पक्षकार रायपुर आम जनता को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने तथा आपसी सहमति से विवादों के निपटारे को बढ़ावा देने के लिए भारत के सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा समाधान समारोह विशेष लोक अदालत 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत आगामी 09 मई 2026 को नेशनल लोक अदालत से होगी, जिसका समापन अगस्त माह में विशेष लोक अदालत के वृहद आयोजनों के साथ होगा। महत्वपूर्ण तिथियाँ और कार्यक्रम           नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ 09 मई 2026 को किया जाएगा। विशेष लोक अदालत (सुप्रीम कोर्ट परिसर) 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 का किया जाएगा। पूर्व सुलह वार्ता (Pre-Litigation) इसकी प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से ही प्रारंभ हो चुकी है। घर बैठे जुड़ने की सुविधा         इस बार की लोक अदालत की विशेषता यह है कि पक्षकार भैतिक (शारीरिक) उपस्थिति के साथ-साथ आभासी (Virtual)  माध्यम से भी जुड़ सकते हैं। प्रशिक्षित मध्यस्थ और विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी आपसी सुलह कराने में सहयोग करेंगे। पंजीयन की प्रक्रिया         अपने लंबित मामलों को इस विशेष लोक अदालत में शामिल करने के लिए पक्षकारों को सर्वाेच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध गूगल फॉर्म भरना होगा। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2026 तक भर सकेंगे। यहाँ करें संपर्क (सहायता केंद्र)        किसी भी प्रकार की जानकारी या तकनीकी सहायता के लिए पक्षकार निम्नलिखित केंद्रों और नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं 1. सर्वाेच्च न्यायालय (वन स्टॉप सेंटर/वार रूम) में संपर्क नंबर 011-2311565652, 011-23116464 ईमेल-speciallokadalat2026@sci.in पता कक्ष क्रमांक 806 एवं 808, बी ब्लॉक, अतिरिक्त भवन परिसर, सुप्रीम कोर्ट में संपर्क किया जा सकता है। 2. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर का पता जिला न्यायालय परिसर, रायपुर 0771-2425944, 91-8301508992 में  नंबर संपर्क किया जा सकता है।          विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी अधिवक्ताओं, वादीगणों और संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे इस समाधान समारोह में सक्रिय रूप से भाग लें। यह लंबित मामलों को बिना किसी कटुता के, आपसी समझौते के माध्यम से समाप्त करने का एक सुनहरा अवसर है।

‘वंदे मातरम्’ को मिला कानूनन संरक्षण, मुख्यमंत्री ने बताया—राष्ट्र और संस्कृति का सम्मान बढ़ा

‘वंदे मातरम्’ को वैधानिक संरक्षण: राष्ट्रभावना और सांस्कृतिक अस्मिता को मिला नया सम्मान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ‘वंदे मातरम्’ को वैधानिक संरक्षण देना राष्ट्र की आत्मा का सम्मान : मुख्यमंत्री साय 'वंदे मातरम्’ का सम्मान, राष्ट्रभावना का सम्मान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय गौरव को मिला नया सम्मान : मुख्यमंत्री राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने वाला निर्णय : मुख्यमंत्री रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करने संबंधी केंद्रीय मंत्रिमंडल के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए इसे देश की सांस्कृतिक चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत और राष्ट्रभक्ति की भावना को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान किया जाना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और आत्मसम्मान का विषय है।  उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’  भारत की आत्मा, स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और करोड़ों देशवासियों की राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों में नई ऊर्जा और आत्मबल का संचार किया था। यह गीत आज भी हर भारतीय के मन में मातृभूमि के प्रति समर्पण, सेवा और गौरव की भावना जागृत करता है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार निरंतर भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय गौरव और जनभावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान एवं गरिमा को बनाए रखने का आह्वान भी किया।

कलेक्टर और एसपी ने मोटरसाइकिल से तय किया दुर्गम पहाड़ी सफर, सुशासन का संदेश

सुशासन की मोटरसाइकिल से दुर्गम पहाड़ों तक पहुँचे कलेक्टर-एसपी  गोंडेरास और नीलावाया में ऐतिहासिक सुशासन चौपाल रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार 2026 अभियान के तहत अब विकास की किरण केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे सुदूर वनांचलों तक पहुँच रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ के सुकमा जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की। बुधवार को कलेक्टर श्री अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण ने किसी प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए, खुद मोटरसाइकिल चलाकर 30 किलोमीटर लंबे उबड़-खाबड़ और दुर्गम रास्तों को पार किया और पहुंचविहीन ग्राम गोंडेरास व नीलावाया पहुँचे।    जिला प्रशासन सुशासन तिहार के माध्यम से 31 व्यक्तिगत योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं को सीधे ग्रामीणों के द्वार तक पहुँचा रहा है। कलेक्टर और एसपी का यह दौरा साबित करता है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता के साथ दूरी मिटाता है, तो जनता के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास और बदलाव की नई उम्मीद जागती है। ग्राम गोंडेरास में इमली की छाँव में समस्याओं का तत्काल समाधान         गोंडेरास गांव में कलेक्टर और एसपी ने किसी आलीशान मंच के बजाय इमली के पेड़ के नीचे बिछी खाट पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। ग्रामीणों द्वारा सोलर प्लेट्स के खराब होने की शिकायत पर कलेक्टर ने तत्काल क्रेडा विभाग को सभी घरों में मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गाँव में आंगनबाड़ी और पंचायत भवन जैसे बुनियादी कार्यों के लिए 70 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई, जिसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को ही सौंपी गई है। शिविर में 17 किसान क्रेडिट कार्ड, 12 जाति प्रमाण पत्र और 11 पीएम-किसान प्रकरणों का निराकरण, 2  किसान किताब, 2 पटवारी प्रतिवेदन सहित कई दस्तावेज मौके पर ही वितरित किए गए।  स्वास्थ्य सुरक्षा और पुलिया की सौगात        ग्राम नीलावाया पहुँचकर अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर चौपाल लगाई। बारिश के दिनों में ग्रामीणों को होने वाली 15 किमी की अतिरिक्त दूरी को खत्म करने के लिए कलेक्टर ने मौके पर ही नाले पर पुलिया निर्माण की स्वीकृति दी। 4 मोतियाबिंद मरीजों को जिला अस्पताल भेजने और गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए सचिव को कड़े निर्देश दिए गए। शिविर के दौरान 2 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म पूरी की गई और 22 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र तत्काल बनाकर सौंपे गए। कागजी नहीं, धरातली सुशासन हमारा लक्ष्य        कलेक्टर श्री अमित कुमार ने ग्रामीणों से कहा कि शासन का लक्ष्य नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गाँव) योजना के जरिए हर घर को बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के सैचुरेशन (पूर्णता) से जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय पंचायत को निर्माण एजेंसी बनाना कार्य में तेजी और पारदर्शिता लाने का एक बड़ा कदम है। यह पहली बार है जब कोई कलेक्टर हमारे गाँव तक मोटरसाइकिल से पहुँचा है। अब हमें भरोसा है कि हमारी समस्याएँ अनसुनी नहीं रहेंगी। गांव के सरपंच श्री जोगा वंजामी ने अधिकारियों के आगमन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कोई कलेक्टर उनके गांव तक पहुंचा है।

सुशासन तिहार: आवेदन के घंटे भर में कौशिल्या को मिला आयुष्मान कार्ड, चेहरे खिले

सुशासन तिहार:आवेदन के चंद घंटों में कौशिल्या को मिला आयुष्मान कार्ड, खिले चेहरे रायपुर राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु आयोजित सुशासन तिहार शिविर ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। इसी क्रम में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम पंचायत मोहतरा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में प्रशासन की संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला, जहाँ ग्राम मोहतरा निवासी महिला कौशिल्या साहू को आवेदन करते ही तत्काल आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया। मौके पर ही हुआ समाधान          शिविर में अपनी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर पहुँची कौशिल्या साहू ने जैसे ही आयुष्मान कार्ड के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत किया, संबंधित विभाग के अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई। मौके पर ही पात्रता की जाँच कर ऑनलाइन प्रक्रिया पूर्ण की गई और तत्काल कार्ड प्रिंट कर उन्हें सौंप दिया गया। ग्रामीणों के द्वार तक पहुँची सरकार         हाथों-हाथ आयुष्मान कार्ड मिलने पर कौशिल्या साहू ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, ष्पहले छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन सुशासन तिहार के माध्यम से अब सरकार खुद हमारे द्वार तक आ रही है। उन्होंने इस त्वरित सुविधा के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्ड उनके परिवार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी है। सुशासन की नई मिसाल         जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से मिल रहे इन त्वरित समाधानों की ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक सराहना हो रही है। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली ने न केवल सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई है, बल्कि आम नागरिकों का शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ किया है।

सपनों को नई उड़ान, मुख्यमंत्री ने कहा—अब करोड़पति दीदी बनने की सोचिए

आम की छांव में बदले सपनों के मायने: मुख्यमंत्री ने कहा—अब करोड़पति दीदी बनने की सोचिए सुशासन तिहार में वनांचल की महिलाओं से आत्मीय संवाद: संघर्ष की कहानियों में दिखी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की तस्वीर रायपुर  कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था। आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे। गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं – कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर। जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा –  “आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।” मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। श्रीमती कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है। कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढ़ने का हौसला मिला है। सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में  लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है। कबीरधाम के इन वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल महिलाओं के भीतर जगे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है। “लखपति दीदी” से “करोड़पति दीदी” तक का यह सपना अब गांव-गांव में नई उम्मीद बनकर फैल रहा है।