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जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने लिया सामूहिक संकल्प, जनभागीदारी से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

रायपुर  कलेक्टर  विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण, स्वच्छता एवं जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज जोगी डोंगरी जलाशय के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान एवं जल स्रोत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं पंचायत विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उत्साहपूर्वक शामिल हुए। अभियान के दौरान जोगी डोंगरी जलाशय परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इसमें जलाशय के आसपास बिखरे कचरे एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों की साफ-सफाई की गई। स्वच्छता अभियान के माध्यम से जल स्रोतों को प्रदूषण से मुक्त रखने और उनके संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, जल के अपव्यय को रोकने तथा उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के संबंध में जागरूक किया गया। जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों से अपने गांव के तालाबों, जलाशयों, कुओं एवं अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई और देखरेख में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की गई। जल स्रोतों की स्वच्छता सभी की सामूहिक जिम्मेदारी कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण केवल विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों को प्रेरित किया गया कि वे अपने आसपास के जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के साथ ही जल के संरक्षण और सदुपयोग के लिए निरंतर प्रयास करें। ग्रामीणों ने लिया जल संरक्षण का संकल्प अभियान में ग्रामीणजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाते हुए जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, पानी की बर्बादी रोकने तथा जल संरक्षण के लिए अपने स्तर पर निरंतर प्रयास करने का सामूहिक संकल्प लिया। ग्रामीणों की सहभागिता ने जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम के माध्यम से “जल है तो कल है” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाते हुए जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता और जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया गया। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जल संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन का स्वरूप देने का संदेश दिया गया।

सेवा की कहानी: आयुष्मान कार्ड से शिशु खलखो को इलाज के खर्च की चिंता से मिली राहत

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से आम नागरिकों के जीवन में आ रहे बदलाव की कहानियां सामने आ रही हैं। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत घोघरा निवासी श्रीमती शिशु खलखो के लिए आयुष्मान कार्ड स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आर्थिक राहत का भी माध्यम बना है। पहले परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने पर उपचार के खर्च की चिंता उनके घरेलू बजट पर असर डालती थी। अब आयुष्मान कार्ड बनने से पात्रता एवं योजना के प्रावधानों के अनुसार पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा का लाभ मिल सकेगा। श्रीमती शिशु खलखो ने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान उनकी समस्या का समाधान हुआ और उनका आयुष्मान कार्ड बनाया गया। कार्ड मिलने के बाद बीमारी की स्थिति में उपचार पर होने वाले बड़े खर्च को लेकर उनकी चिंता पहले की तुलना में कम हुई है। सीमित आय वाले परिवार के लिए स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक खर्च कई बार घरेलू जरूरतों और बजट को प्रभावित करता था, लेकिन आयुष्मान कार्ड ने उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा दिया है। इलाज के खर्च से मिली राहत, परिवार को मिला भरोसा शिशु खलखो बताती हैं कि पहले परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर इलाज के लिए बड़ी राशि जुटानी पड़ती थी। इससे घर के दूसरे जरूरी खर्च प्रभावित होते थे और आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। अब आयुष्मान कार्ड उनके परिवार के लिए उपचार के समय आर्थिक सहारा बन गया है। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजना के प्रावधानों के अनुसार उपचार की सुविधा मिलने से गंभीर बीमारी या आकस्मिक स्वास्थ्य जरूरत के समय परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिलती है। शिशु खलखो के लिए यह कार्ड बीमारी के समय इलाज की सुविधा के साथ आर्थिक सुरक्षा का भरोसा भी लेकर आया है। जनकल्याणकारी योजनाओं से मजबूत हो रहा सामाजिक सुरक्षा का आधार सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से शासन की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की कहानियां जन-जन तक पहुंचाई जा रही हैं। शिशु खलखो की कहानी बताती है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक पहुंचता है, तो स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकता के समय उन्हें उपचार के साथ आर्थिक सुरक्षा का भी संबल मिलता है।

उपचारित जल के उपयोग पर जोर, निकायों को 50 किमी के दायरे में यूजर तलाशने के निर्देश

रायपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी के सदुपयोग के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग गंभीरता से पहल कर रही है। विभाग ने उपचारित जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने नगरीय निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और उनकी जल आवश्यकता के आकलन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से समन्वय करने को कहा गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राज्य के जिन 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन है, वहां के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इन निकायों को एसटीपी के उपचारित जल के संभावित उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने को कहा गया है। साथ ही संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में उपचारित जल की आवश्यकता होगी, इसका भी आकलन करने को कहा गया है।  50 किमी के दायरे में तलाशेंगे उपयोगकर्ता उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए एसटीपी के आसपास के क्षेत्र को केंद्र में रखा गया है। निकायों को 50 किलोमीटर की परिधि में स्थित थर्मल पावर प्लांट, उद्योगों, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी जल आवश्यकता की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। इससे एसटीपी से उपचारित जल उपलब्ध होने के बाद उसके उपयोग के लिए संभावित उपभोक्ताओं की पहचान पहले से की जा सकेगी। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। केंद्र सरकार और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप राज्य शासन की पहल सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरोदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगाव के निगम आयुक्तों को परिपत्र जारी कर बताया है कि भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी एसटीपी के उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए निर्देशित किया है। सूडा ने संबंधित निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता के संबंध में जानकारी 15 दिनों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

कच्चे घर से पक्के आशियाने तक: पीएम जनमन योजना से नंदबाई बैगा के जीवन में आई नई खुशियां

रायपुर कभी बारिश की बूंदों के बीच कच्चे घर में रात गुजारने को मजबूर गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत धनौली के खर्रीपारा निवासी मती नंदबाई बैगा के जीवन में अब खुशियों की नई शुरुआत हुई है। पीएम जनमन योजना के तहत पक्का आवास मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और मजबूत छत मिली है। वर्षों से कच्चे मकान में रहने के दौरान बारिश, सीलन और पानी टपकने जैसी परेशानियों का सामना करने वाली नंदबाई बैगा अब अपने पक्के घर में परिवार के साथ सुकून और सुरक्षा के साथ जीवन बिता रही हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विशेष रूप से कमजोर एवं जनजातीय परिवारों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पीएम जनमन योजना इसी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को आवास सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। नंदबाई बैगा का परिवार इस प्रयास से आए सकारात्मक बदलाव का एक उदाहरण है। कच्चे घर में हर मौसम रहती थी चिंता नंदबाई बैगा बताती हैं कि पहले उनका घर कच्चा था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और घर में सीलन बनी रहती थी। बरसात के दौरान परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। घर की खराब स्थिति के कारण हर मौसम में परिवार के मन में चिंता बनी रहती थी। सुरक्षित और मजबूत घर का अभाव उनके दैनिक जीवन की परेशानियों को और बढ़ा देता था। पक्के आवास से मिली सुरक्षा और सुकून पीएम जनमन योजना के तहत पक्का आवास मिलने के बाद नंदबाई बैगा के परिवार की परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। अब परिवार सुरक्षित और मजबूत घर में रह रहा है। बारिश के दिनों में न तो छत से पानी टपकने की चिंता है और न ही सीलन की परेशानी। पक्का आवास उनके लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन गया है। सरकार की योजनाओं से जीवन में आया व्यापक बदलाव नंदबाई बैगा को शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन मिलने से खाना पकाने में सुविधा हुई है। इस तरह विभिन्न योजनाओं का लाभ एक साथ मिलने से उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विजन से जनजातीय परिवारों तक पहुंच रही सुविधाएं प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के जीवन में बुनियादी सुविधाओं और बेहतर अवसरों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पक्का आवास, स्वच्छ ईंधन और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं का लाभ मिलने से नंदबाई बैगा जैसे परिवारों के जीवन में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके लिए पक्का घर बदलती परिस्थितियों और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद का आधार बना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों को आवास, आर्थिक सहायता, रसोई गैस सहित विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। नंदबाई बैगा का परिवार भी इन योजनाओं के समन्वित लाभ से बेहतर और सुरक्षित जीवन की ओर आगे बढ़ रहा है।

विशेष बच्चों के लिए बना भरोसे का केंद्र, 10 साल से निःशुल्क मिल रहा विशेषज्ञ उपचार

रायपुर ‘जतन केंद्र’ ने बदली 27 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और उनके परिवारों के लिए जतन केंद्र उम्मीद और संबल का केंद्र बनकर उभरा है। रायगढ़ जिले में वर्ष 2016 को शुरू हुए इस केंद्र में अब तक 27,088 बच्चों का परीक्षण, मूल्यांकन और उपचार किया जा चुका है। वहीं अप्रैल से अगस्त 2026 तक 5,397 बच्चों को विभिन्न सेवाओं का लाभ मिला है। जतन की खासियत इसका बच्चों के अनुकूल माहौल है। केंद्र को प्ले स्कूल जैसे सहज और खुशनुमा वातावरण में तैयार किया गया है, ताकि बच्चे अस्पताल के डर या तनाव के बिना उपचार करा सकें। यहां आने वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। केंद्र में शिशु रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट, विशेष शिक्षक, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, नर्स, पैथोलॉजी, समाजसेवक और काउंसलर की सेवाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध हैं। विकासात्मक देरी, देर से बोलने, सीखने में परेशानी और ऑटिज्म जैसे लक्षणों वाले बच्चों का नियमित आकलन और उपचार किया जा रहा है। मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में सामने आ रही लर्निंग प्रॉब्लम के मामलों में भी विशेषज्ञ सेवाएं दी जा रही हैं। टंग-टाई के 285 बच्चों का निःशुल्क उपचार जतन के दंत चिकित्सा विभाग में टंग-टाई यानी जीभ के जुड़ाव की समस्या वाले बच्चों का फ्रेनेक्टमी पद्धति से निशुल्क उपचार किया जा रहा है। अब तक करीब 285 बच्चे इस सुविधा से लाभान्वित हो चुके हैं। इसके साथ ही बच्चों के दांत और मुंह से जुड़ी अन्य बीमारियों का भी इलाज किया जाता है। श्रवण जांच से फिजियोथेरेपी तक सुविधा श्रवण संबंधी परेशानी वाले बच्चों के लिए केंद्र में बीईआरए और पीटीए टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। ये जांच दिव्यांगता प्रमाण पत्र और कॉक्लियर इंप्लांट की प्रक्रिया में भी उपयोगी होती हैं। वहीं फिजियोथेरेपी विभाग में शारीरिक रूप से बाधित बच्चों के उपचार और पुनर्वास पर काम किया जाता है, ताकि वे दैनिक गतिविधियां अधिक आसानी से कर सकें। समय पर उपचार से आसान हो रही बच्चों की राह स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित जतन डीईआईसी में सेवाओं के लगातार सुधार और विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। निःशुल्क विशेषज्ञ उपचार, बच्चों के अनुकूल वातावरण और समय पर हस्तक्षेप ने इस केंद्र को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के परिवारों के लिए भरोसे का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है। पिछले 10 वर्षों में हजारों बच्चों तक पहुंची यह सेवा उनकी बेहतर सेहत, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में महुआ को मिल रहा नया स्वरूप, जशप्योर और जय जंगल के प्रयासों से जनजातीय परिवारों एवं महिला स्वसहायता समूहों के लिए आजीविका की नई संभावनाएं

रायपुर  कभी जंगलों में सहज रूप से मिलने वाली वन उपज और पारंपरिक उपयोग तक सीमित महुआ आज नए रूप, नई पहचान और नई संभावनाओं के साथ बाजार तक पहुंच रहा है। जशपुर में महुआ को केवल वन उपज के रूप में नहीं, बल्कि खाद्य नवाचार, मूल्य संवर्धन, अनुसंधान और जनजातीय आजीविका के अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने महुआ की पहचान को नई ऊंचाई दी है। इसी बदलाव की झलक रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देखने को मिली, जहां जशप्योर और जय जंगल के स्टॉल पर जशपुर के महुआ आधारित उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने महुआ से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों को देखा, उनके बारे में जानकारी ली और उनकी गुणवत्ता, स्वाद तथा आधुनिक पैकेजिंग की सराहना की। महुआ की बदली तस्वीर, पारंपरिक वन उपज से आधुनिक फूड प्रोडक्ट तक महुआ का नाम सुनते ही लंबे समय तक लोगों के मन में इसकी पारंपरिक उपयोगिता की ही तस्वीर उभरती रही। जशपुर में इसी धारणा को बदलते हुए महुआ को आधुनिक खाद्य उत्पादों के रूप में विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। अब महुआ केवल जंगल से संग्रहित होने वाली वन उपज नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने वाला उत्पाद बन रहा है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के हॉल नंबर-3 के स्टॉल नंबर 4 एवं 5 पर महुआ नेक्टर, महुआ नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी, महुआ आधारित कुकीज़, रागी-महुआ उत्पाद, महुआ लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल सहित अनेक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। उत्पादों की विविधता के साथ उनकी आकर्षक पैकेजिंग और आधुनिक प्रस्तुति ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि जंगलों से मिलने वाला पारंपरिक महुआ आधुनिक खाद्य बाजार में इतने नए रूपों में भी अपनी जगह बना सकता है। कई आगंतुकों ने पहली बार महुआ को इतने विविध खाद्य स्वरूपों में देखा। उत्पादों की प्रस्तुति और स्वाद ने यह संदेश दिया कि यदि स्थानीय संसाधनों को उचित तकनीक, गुणवत्ता और बाजार की समझ के साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की पारंपरिक उपज भी व्यापक बाजार तक पहुंच सकती है। जशप्योर बना स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन का माध्यम जशपुर की पहचान केवल अपने जंगलों और प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों से भी जुड़ी है। इसी स्थानीय ताकत को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में जशप्योर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन, स्थानीय समुदाय, महिला समूहों, उत्पादक संस्थाओं और तकनीकी संस्थानों के साझा प्रयासों से महुआ सहित स्थानीय वन उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को स्थानीय स्तर पर ही अधिक मूल्यवान बनाना और उनसे जुड़े परिवारों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर तैयार करना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय एवं जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जशपुर में महुआ को लेकर हो रहे प्रयास इसी सोच को जमीन पर साकार करते हुए दिखाई देते हैं। पेड़ से बाजार तक तैयार हो रही पूरी वैल्यू चेन महुआ की कहानी केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पेड़ से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने का प्रयास है। स्वच्छ और फूड-ग्रेड संग्रहण से लेकर डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण, अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, उत्पाद विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक प्रत्येक चरण को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। जिला प्रशासन जशपुर के सहयोग से संचालित Mahua Centre of Excellence और ‘Mahua Kosh’ में महुआ के खाद्य उपयोग, नए उत्पादों, फूड-ग्रेड कलेक्शन, डिहाइड्रेशन और प्रसंस्करण तकनीक सहित विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान एवं प्रयोग किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का व्यापक उद्देश्य महुआ की गुणवत्ता और बाजार मूल्य बढ़ाने के साथ इससे जुड़े जनजातीय परिवारों और महिला स्वसहायता समूहों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है। जब जंगल में संग्रहित होने वाली उपज को वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर बाजार तक पहुंचाया जाता है, तो उसका लाभ केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े लोगों तक पहुंचने की संभावना बनती है। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही नई पीढ़ी इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशप्योर एवं जय जंगल के स्टॉल का प्रतिनिधित्व जशपुर की अनेश्वरी भगत और गणपति बाई कर रही थीं। वे आगंतुकों को केवल उत्पादों की जानकारी ही नहीं दे रही थीं, बल्कि यह भी बता रही थीं कि महुआ का संग्रहण किस तरह किया जाता है, उसे फूड-ग्रेड बनाने के लिए किन प्रक्रियाओं को अपनाया गया है और किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक फूड प्रोसेसिंग से जोड़ा जा रहा है। यह तस्वीर जशपुर में हो रहे बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी है—जहां जंगल से जुड़ा पारंपरिक ज्ञान अब आधुनिक उत्पाद विकास और बाजार की जरूरतों के साथ जुड़ रहा है। अनुसंधान से पोषण की नई संभावनाओं की तलाश महुआ के खाद्य उपयोग के विस्तार के साथ इसके पोषण संबंधी पहलुओं पर भी अनुसंधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। जय जंगल के निदेशक समर्थ जैन ने बताया कि ग्राहकों से महुआ के सेवन के बाद आयरन और हीमोग्लोबिन से जुड़े सकारात्मक अनुभवों की बातें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों को वैज्ञानिक रूप से समझना जरूरी है और महुआ में आयरन की मात्रा के साथ शरीर में उसकी उपलब्धता एवं उपयोगिता का व्यवस्थित अध्ययन अगला महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक अध्ययन इन अनुभवों के पीछे ठोस आधार स्थापित करते हैं, तो महुआ पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वन उपज के रूप में नई संभावनाएं प्रस्तुत कर सकता है। उनका प्रयास जशपुर के जंगलों में उपलब्ध इस वन उपज को अनुसंधान, बेहतर प्रसंस्करण और नए उत्पादों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाना है। जशपुर के जंगलों से देश-दुनिया तक पहुंचने की राह 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशपुर के महुआ उत्पादों … Read more

सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह के खिलाफ अजय चंद्राकर की कानूनी कार्रवाई, मानहानि का दावा

धमतरी. वायरल वीडियो को लेकर चल रहा सियासी विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। पूर्व मंत्री और कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और लोकगायिका व सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर के खिलाफ जिला सत्र न्यायालय में याचिका दायर की है। मामला स्वतंत्रता दिवस के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से जुड़ा है। चंद्राकर का आरोप है कि भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बनाया गया पुराना वीडियो स्वतंत्रता दिवस का बताकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। उनका कहना है कि इस तरह वीडियो प्रसारित किए जाने से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसी आधार पर उन्होंने दोनों के खिलाफ मानहानि का दावा पेश किया है। दो आरोपी भी हो चुके हैं गिरफ्तार वायरल वीडियो मामले में धमतरी पुलिस ने अलग कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार कुरूद स्थित भाजपा कार्यालय में 22 मार्च 2026 को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भाजपा का झंडा फहराए जाने का वीडियो बनाया गया था। आरोप है कि बाद में इसी मूल वीडियो को डाउनलोड कर एडिट किया गया और उसे स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। पुलिस ने भुनेश्वर निराला (25) और राकेश निराला (35) को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया। दोनों सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम जिल्दी के रहने वाले हैं। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पूछताछ के बाद दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। पुलिस का दावा है कि वीडियो एडिट करने और सोशल मीडिया पर अपलोड करने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। क्या है पूरा विवाद स्वतंत्रता दिवस के दौरान सोशल मीडिया पर अजय चंद्राकर का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे भाजपा का झंडा फहराते नजर आ रहे थे। वीडियो को इस दावे के साथ प्रसारित किया गया कि 15 अगस्त को उन्होंने तिरंगे की जगह भाजपा का झंडा फहराया। बाद की पड़ताल में पुलिस के अनुसार यह वीडियो 15 अगस्त 2026 का नहीं, बल्कि पहले के भाजपा प्रशिक्षण कार्यक्रम का था। इसी वीडियो को लेकर रायपुर के सिविल लाइन थाने में सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह राठौर के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 336(4), 353(2) और 196 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। अब अजय चंद्राकर की ओर से दायर मानहानि याचिका के बाद विवाद का एक और पहलू अदालत पहुंच गया है। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही और दोनों पक्षों की दलीलों पर नजर रहेगी।

राजस्व प्रशासन में डिजिटल बदलाव, जनहित और पारदर्शिता को मिलेगी नई गति

​डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रशासन: जनहित में सुशासन का नया अध्याय ​रायपुर        राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटक है। भूमि संबंधी मामलों की जटिलताओं को समाप्त करने, प्रशासनिक तंत्र को अधिक पारदर्शी बनाने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग द्वारा हाल ही में कई बड़े और दूरगामी नीतिगत निर्णय लिए गए हैं। ये सुधार न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम और सरल बना रहे हैं, बल्कि वर्षों से लंबित पड़ी समस्याओं का समयबद्ध व निष्पक्ष निराकरण भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ​डिजिटल प्रणाली से सुगम हुआ रिकॉर्ड प्रेषण       02 अप्रैल 2025 को जारी विशेष आदेश के तहत अब सभी भौतिक दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में प्राप्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। भारसाधक अधिकारी को सत्यापनकर्ता का दायित्व सौंपते हुए अब समस्त राजस्व रिकॉर्ड ई-प्रणाली के माध्यम से मंगाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल से रिकॉर्ड के त्वरित संप्रेषण की सुविधा मिली है, जिससे कागजी औपचारिकताओं में होने वाला अनावश्यक विलंब पूरी तरह समाप्त हो गया है और प्रकरणों के निराकरण में अप्रत्याशित गति आई है। ​कृषि भूमि की अदला-बदली हुई आसान        कृषकों और भू-स्वामियों को अपनी सुविधा अनुसार कृषि भूमि की परस्पर अदला-बदली करने का विधिक अधिकार संहित के तहत प्राप्त है। इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम और स्पष्ट बनाने के लिए 21 अक्टूबर 2025 को नए मार्गदर्शी निर्देश जारी किए गए हैं। इससे किसानों को अपनी ज़मीन के बेहतर प्रबंधन में काफी सहूलियत मिल रही है। ​त्रुटि सुधार प्रक्रिया का सरलीकरण        अक्सर राजस्व अभिलेखों में लिपिकीय या मामूली त्रुटियों जैसे नाम, जाति, पता या फसल प्रविष्टि के कारण भू-स्वामियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। 19 जुलाई 2024 की अधिसूचना के माध्यम से इन त्रुटियों के त्वरित सुधार हेतु सीधे तहसीलदार को सशक्त बनाया गया है। इस फैसले ने आम जनता के अदालती चक्करों और समय की बर्बादी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।     ​अवैध प्लाटिंग पर कड़ी नकेल        जनवरी 2026 में राजस्व विभाग ने अवैध प्लाटिंग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी किए। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित विशेष समिति अब अवैध प्लाटिंग के खिलाफ समुचित व त्वरित कानूनी कार्यवाही कर रही है, जिससे आम खरीदारों के हितों की रक्षा हो रही है। ​पुराने परिपत्रों का निरस्तीकरण       प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रासंगिक और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 23 जुलाई 2024 के आदेश द्वारा नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि एवं अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन तथा आवंटन से संबंधित 2019, 2020 और 2022 के पूर्व परिपत्रों एवं निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है।         ​डिजिटल ई-प्रणाली, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और त्वरित निवारण की इस समावेशी नीति ने राज्य के राजस्व प्रशासन को एक नई दिशा दी है। यह कदम सुशासन की दिशा में एक सशक्त और जन-हितैषी प्रयास सिद्ध हो रहा है।  ​विष्णु प्रसाद वर्मा  सहायक संचालक

भिलाई में कॉलेज फीस के लिए बुजुर्ग महिला से सोने की चेन लूटी, B.Tech छात्र-छात्रा गिरफ्तार

 भिलाई  छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर में बीटेक के छात्र और छात्रा को पुलिस ने सोने की चेन छीनने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि निजी इंजीनियरिंग कॉलेज की फीस चुकाने के लिए दोनों ने अपराध को अंजाम दिया है। पुलिस ने बताया कि नेहरू नगर स्थित विद्या विहार कॉलोनी की रहने वाली 62 वर्षीय वृद्धा गीता देवी के साथ चैन स्नेचिंग की घटना को अंजाम दिया गया। प्रार्थी महिला का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के कारण वह अधिकांश समय घर पर ही रहती हैं और सुबह-शाम नियमित रूप से टहलने जाती हैं। रविवार की सुबह करीब छह बजे वह शिवाजी पार्क की तरफ टहलने के लिए निकली थीं। उसी समय उनकी चैन छीन ली गई।  

अब तक किसानों को 13.04 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण

रायपुर  प्रदेश में खेतों में बोनी का कार्य लगभग अंतिम चरण पर है। 22 सितंबर की स्थिति में राज्य के 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 99 प्रतिशत बोनी पूर्ण हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश किसानों को सुगमता से मिले खाद-बीज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।  किसानों को 13.14 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.58 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 13.14 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.58 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। खेती का प्रारंभिक कार्य लगभग अंतिम चरण में है। राज्य में अब तक 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 99 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।  प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 17.64 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। जो चालू खरीफ सीजन के लिए निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। उक्त भंडारण के विरूद्ध राज्य के किसानों को 13.14 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 74 प्रतिशत है।    इसी प्रकार खरीफ सीजन 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.80 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.58 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 93 प्रतिशत है।  प्रदेश में अब तक 1008.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मि.मी. अधिकारियों ने बताया कि 22 सितंबर सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 1008.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। गौरतलब है कि औसत दर्ज वर्षा जिलों की आज तक की औसत वर्षा पिछले 10 वर्षाे के आधार पर 1061.6 मि.मी. से 53.5 मिली मीटर कम है। गत वर्ष इसी अवधि में 881.4 मिली मी. वर्षा दर्ज की गई थी।  जरूरतमंद किसानों को 8125.51 करोड़ रूपये का निःशुल्क अल्पकालीन कृषि ऋण कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियत हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 21 सितंबर की स्थिति में 8125.51 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 6740.75 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।