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सीपत चौक में गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण उजागर, 54 सिलेंडर जब्त

सीपत चौक में गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण उजागर, 54 सिलेंडर जब्त कलेक्टर के निर्देश पर ताबड़तोड़ कार्रवाई   गैस रिफिलिंग का गोरखधंधा पकड़ा गया बिलासपुर  कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर शुक्रवार की सुबह सीपत चौक में अवैध गैस सिलेंडर भंडारण और रिफिलिंग के खिलाफ बड़ी छापामार कार्रवाई की गई। खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर के मार्गदर्शन में एएफओ अजय मौर्य एवं विनीता दास के नेतृत्व में टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए एक बड़े गोरखधंधे का पर्दाफाश किया।        खाद्य नियंत्रक श्री कुजूर ने बताया कि कार्रवाई के दौरान महामाया गैस चूल्हा सुधारक एवं विक्रेता तथा गर्ल्स हॉस्टल संचालक लव निमेष जायसवाल के कब्जे से 19 नग 14.2 किलोग्राम के भरे एवं आंशिक भरे घरेलू गैस सिलेंडर तथा 35 नग 5 किलोग्राम के घरेलू एवं व्यावसायिक सिलेंडर, इस प्रकार कुल 54 गैस सिलेंडर जब्त किए गए। मौके से 7 नग रिफिलिंग बंशी (नोजल), एक इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन सहित अन्य उपकरण भी बरामद हुए। जांच में सामने आया कि बिना वैध अनुमति के गैस सिलेंडरों का भंडारण एवं रिफिलिंग कर अवैध रूप से विक्रय किया जा रहा था, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी होने के साथ ही आमजन की जान-माल को खतरा बना हुआ था। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी जब्त सामग्री को सुरक्षित किया और मौके से गुजर रही कोनी इंडेन की डिलीवरी वैन को रुकवाकर संबंधित एजेंसी के सुपुर्द किया। इसी क्रम में विजय स्टील नामक प्रतिष्ठान जिसके मालिक सनटी अग्रवाल है से भी 2 घरेलू गैस सिलेंडर, 3 रिफिलिंग बंशी एवं एक तौल मशीन जब्त की गई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर सख्ती से अंकुश लगाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अधिक धान उत्पादन के लिए कृषि विभाग का अभियान तेज, हरी खाद से खेतों में वृद्धि

हरी खाद से लहलहाएंगे खेत: धान उत्पादन बढ़ाने कृषि विभाग का विशेष अभियान तेज "रासायनिक उर्वरकों का विकल्प बन रही हरी खाद, 176 हेक्टेयर में विस्तार का लक्ष्य तय" मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में मृदा की सेहत सुधारने और धान उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने खरीफ सीजन में हरी खाद और जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। विभाग का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों के लगातार उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। अभियान के तहत किसानों को रोपा पद्धति से धान की खेती से पहले खेतों में ढैंचा, सन जैसी शीघ्र बढ़ने वाली दलहनी फसलों की बुवाई करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन फसलों को एक निश्चित अवस्था में मिट्टी में पलटने से मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है और प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ढैंचा एक अत्यंत प्रभावी हरी खाद है, जिससे प्रति हेक्टेयर 30 से 40 किलोग्राम तक नाइट्रोजन प्राप्त हो सकती है। इसकी बुवाई 35 से 45 दिन पहले की जाती है और 2 से 3 फीट ऊंचाई होने पर इसे मिट्टी में मिला दिया जाता है, जो कुछ ही दिनों में सड़-गलकर फसल के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराती है। जिले में इस अभियान के तहत कुल 176 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद के उपयोग का लक्ष्य रखा गया है। इसमें मनेन्द्रगढ़ के लिए 62 हेक्टेयर, खड़गवां के लिए 52 हेक्टेयर और भरतपुर के लिए 62 हेक्टेयर निर्धारित किए गए हैं। कृषि विभाग किसानों को हरी खाद के बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करा रहा है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे इस पहल का लाभ उठाकर मृदा स्वास्थ्य सुधारें और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करें।

कैंसर से जूझ रही महिला को जिला अस्पताल में भर्ती, कलेक्टर ने दिए उपचार के निर्देश

कैंसर पीड़ित महिला को जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती, कलेक्टर ने बेहतर उपचार के दिए निर्देश मरीज को बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा में करवाया जायेगा एडमिट थायराइड कैंसर के चौथे स्टेज से पीड़ित है महिला, बीते नवंबर एम्स में करवाई गई थी कीमोथेरेपी एक साल तक रायपुर में एम्स व मेकाहारा में इलाज के बाद टाटा मेमोरियल मुंबई में भी हुआ है उपचार रायपुर काटाबहरा (नगवाही) निवासी समलू मरकाम जिनकी पत्नी कपूरा मरकाम थायराइड कैंसर के चौथे स्टेज से पीड़ित है और चलने फिरने में असमर्थ है। उन्हें बाइक में लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। यहां कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने मामला संज्ञान में आते ही तत्काल एम्बुलेंस बुलवा कर पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपचार के लिए निर्देशित किया। महिला को बेहतर उपचार के लिए रायपुर में एडमिट करवाया जाएगा।     मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 11 नवंबर को ग्राम कांटाबहरा (नगवाही) के श्री समलु मरकाम द्वारा थायराइड कैंसर पीड़ित पत्नी श्रीमती कपूरा मरकाम को उपचार के लिए बाइक में लिटा कर उपचार के लिए ले जाने की सूचना संज्ञान में आने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम 12 नवंबर को पीड़िता के घर पहुंची और उसे 108 एम्बुलेंस में बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा रायपुर भेजा गया। यहां महिला को कैंसर रिसर्च युनिट में भर्ती कराया गया है जहां कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज हुआ।     उन्होंने आगे बताया कि पूर्व में पीड़िता के स्वास्थ्य समस्या की जानकारी मिलने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रेगांखार/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बोड़ला विकासखण्ड बोड़ला स्वास्थ्य विभाग के टीम द्वारा पीड़ित कपूरा मरकाम पति समलू मरकाम के ग्राम काटाबहरा (नगवाही) के निवास स्थान पर जाकर निरीक्षण करने पर पाया गया कि श्री समलू मरकाम द्वारा अपनी पत्नी कपूरा मरकाम के गले का गांठ में दर्द होने पर प्राथ. स्वा. रेगांखर जंगल में ईलाज के लिए ले जाया गया। वहां पदस्थ डाक्टर द्वारा जिला स्वासस्थ्य विभाग के अधिकारियों से मरीज के बीमारी के संबंध में चर्चा कर उपचार के लिए रायपुर रिफर किया गया। जहां वर्ष 2024 में एक वर्ष तक एम्स, मेकाहारा तथा डीकेएस अस्पताल सहित कुछ निजी अस्पतालों में ईलाज चला। इसके पश्चात जनवरी 2025 में टाटा मेमोरियल मुंबई में एक माह तक ईलाज चला। वहां से ईलाज उपरांत घर लाया गया। पीड़िता की परेशानी पुनः बढ़ने पर उन्हें 12 नवंबर को स्वास्थ्य विभाग द्वारा रायपुर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास ईलाज के लिए ले जाया गया। जहां वे 12 और 13 नवंबर को मेकाहारा में भर्ती रही और 14 से 19 नवंबर 2025 तक एम्स में भर्ती कर कीमोथेरेपी दी गई। जिसके पश्चात 20 नवंबर को मरीज को वापस घर लाया गया। जिसके पश्चात घर पर रहकर वह स्वास्थ्य लाभ ले रही थी। जिसके पश्चात महिला को आज फिर स्वास्थ्य खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां से उन्हें रायपुर में एडमिट करवाया जाएगा।

हरियाली की गोद में न्याय का मंदिर:मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर बना प्रकृति का मनमोहक आंगन

हरियाली की गोद में न्याय का मंदिर:मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर बना प्रकृति का मनमोहक आंगन लीची, आम और कटहल से लदे वृक्षों ने बढ़ाई रौनक, तपती गर्मी में भी सुकून का एहसास मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिला मुख्यालय स्थित मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर इन दिनों केवल न्यायिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रकृति की अनुपम छटा का जीवंत उदाहरण बन गया है। परिसर में लगे लीची, आम और कटहल के घने एवं फलदार वृक्ष इसे एक सजीव बाग-बगीचे का रूप प्रदान कर रहे हैं, जहां हरियाली की ठंडक और फलों की बहार लोगों का मन मोह लेती है। गर्मी के इस तीखे मौसम में, जब चारों ओर तपिश और उमस से लोग बेहाल हैं, वहीं न्यायालय परिसर में प्रवेश करते ही वातावरण बदल जाता है। पेड़ों की घनी छांव, पत्तों से छनकर आती धूप और हवा में घुली ताजगी एक अलग ही सुकून का अनुभव कराती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो न्याय के इस मंदिर में प्रकृति ने स्वयं अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी हो। परिसर में लगे लीची के गुच्छेदार फल, आम के कच्चे-पके रंग और कटहल के विशाल फलों की भरमार न केवल आंखों को आनंदित करती है, बल्कि यहां आने वाले अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और पक्षकारों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बन गई है। हर ओर फैली हरियाली और फलदार वृक्षों की छटा इस स्थान को किसी उद्यान से कम नहीं रहने देती। अधिवक्ता श्रीमती पूनम गुप्ता का कहना है कि न्यायालय परिसर में इस प्रकार की हरियाली वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रदान करती है। उनका मानना है कि यह नजारा केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त संदेश भी देता है। यदि न्यायालय प्रशासन और अधिवक्ता संघ द्वारा इस हरियाली को और अधिक प्रोत्साहन दिया जाए, तो आने वाले समय में यह परिसर एक आदर्श उदाहरण बन सकता है—जहां न्यायिक प्रक्रियाओं के साथ प्रकृति का संतुलन भी सहज रूप से दिखाई दे। यहां का हर पेड़, हर फल और हर छांव मानो यही संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक साथ कदम बढ़ा सकते हैं।

प्राकृतिक आपदा में मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता स्वीकृत

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा मृतकों के वारिसों को आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। शासन के राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में संशोधित प्रावधानों के तहत यह सहायता दी जा रही है। जारी आदेश के अनुसार, तहसील नागपुर के ग्राम बरकेला निवासी सरिता की सर्पदंश से मृत्यु होने पर उनके वारिस जगरनाथ सिंह को 4 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। वहीं तहसील खड़गवां के ग्राम जरौंधा निवासी फुलकुंवर की कुएं में डूबने से मृत्यु होने पर उनके वारिस धर्मपाल सिंह को 4 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसी क्रम में ग्राम बेलकामार निवासी अजय कुमार की तालाब में डूबने से मृत्यु होने पर उनके वारिस दीपक कुमार सिंह को 4 लाख रुपये तथा तहसील केल्हारी के ग्राम मुसरा निवासी गीता की नाला में डूबने से मृत्यु होने पर उनके वारिस संतलाल को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह सहायता राशि पीड़ित परिवारों को कठिन समय में आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से दी जा रही है। स्वीकृत राशि का व्यय वित्तीय वर्ष 2025-26 में मांग संख्या-58 के मुख्य शीर्ष 2245 (प्राकृतिक आपदा राहत) के अंतर्गत किया जाएगा।

प्रशासनिक फेरबदल में बड़े बदलाव, इन अधिकारियों का तबादला और नई जिम्मेदारी सौंपी गई

रायपुर  छत्तीसगढ़ में से बड़े प्रशासनिक फेरबदल की खबर सामने आई है। यहां डिप्टी कलेक्टर टीकाराम देवांगन का तबादला किया गया है। उन्हें जिला कार्यालय कांकेर में भेजा गया है। इसके लिए कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने आदेश जारी किया है।   जारी आदेश के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर टीकाराम देवांगन को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पखांजूर के पद से हटाया गया। उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपते हुए जिला कार्यालय कांकेर में पदस्थ किया गया है। वहीं, उनके स्थान पर मनीष देव साहू, जो डिप्टी कलेक्टर एवं नजूल अधिकारी कांकेर के पद पर कार्यरत थे, उन्हें अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पखांजूर की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस आदेश के तहत जिला प्रशासन में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है, ताकि प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। छत्तीसगढ़ सरकार ने आगामी महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से शासकीय कर्मचारियों के अवकाश संबंधी नियमों को अस्थायी रूप से कड़ा कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश को बुधवार को सभी विभागों में भेजा गया। जारी निर्देशों के अनुसार, अगले तीन महीनों तक बिना पूर्व स्वीकृति किसी भी कर्मचारी को अवकाश पर जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासनिक अधिकारीयों के अनुसार, यह निर्णय जनगणना कार्य और राज्य में प्रस्तावित 'सुशासन तिहार' जैसे बड़े कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित न हो और सभी कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण किए जा सकें। जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना अनुपस्थित रहने को अनुशासनहीनता माना जाएगा और ऐसे मामलों में विभागीय कारर्वाई की जा सकती है। वहीं, आकस्मिक परिस्थितियों में भी कर्मचारियों को अवकाश लेने से पहले दूरभाष या डिजिटल माध्यम से सूचना देना अनिवार्य होगा तथा बाद में इसकी औपचारिक पुष्टि करनी होगी। इसके अतिरिक्त, लंबी अवधि के अवकाश पर जाने से पूर्व संबंधित कर्मचारी को अपने कार्यभार का विधिवत हस्तांतरण सुनिश्चित करना होगा, ताकि कार्यालयीन कार्य प्रभावित न हों। राज्य सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागीय अधिकारियों और जिला कलेक्टरों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। इसे प्रशासनिक दक्षता बनाए रखने और प्राथमिकता वाले कार्यों को समय पर पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अधूरे निर्माण के भुगतान के दबाव की खबर भ्रामक, शिक्षा विभाग ने किया खंडन

अधूरे निर्माण के भुगतान के दबाव की खबर भ्रामक, शिक्षा विभाग ने किया खंडन प्रधान अध्यापक की आत्महत्या मामले में पुलिस जांच जारी, विभाग दे रहा पूरा सहयोग रायपुर  बीजापुर जिले में प्रधान अध्यापक की आत्महत्या से जुड़ी हालिया मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा बीजापुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अधूरे निर्माण कार्य के भुगतान के दबाव जैसी खबरें तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं। जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा बीजापुर द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग निष्पक्ष रूप से पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग कर रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पालनार अंतर्गत प्राथमिक शाला मझारपारा में पदस्थ प्रधान पाठक श्री राजू पुजारी का 22 अप्रैल 2026 को निधन हो गया, जो एक अत्यंत दुखद घटना है। पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच के दौरान मृतक के पास से कुछ पत्र बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर जांच की कार्यवाही जारी है। समग्र शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराया गया था, जिसमें प्रधान अध्यापक पदेन अध्यक्ष होते हैं। निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत राशि के अनुरूप प्रथम किस्त का भुगतान नियमानुसार किया गया तथा कार्य पूर्ण होने के पश्चात माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र, हस्तांतरण प्रमाण पत्र एवं फोटोग्राफ्स प्राप्त होने पर प्रगति के आधार पर रनिंग बिलों के माध्यम से राशि जारी की गई। विभाग के अनुसार, प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष दोनों का निर्माण फरवरी 2026 में पूर्ण हो चुका था तथा शेष 60 प्रतिशत राशि राज्य स्तर से प्राप्त होना लंबित है। भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार का दबाव या अनियमितता नहीं पाई गई है। जिला मिशन समन्वयक ने कहा कि कुछ समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में बिना तथ्यों की पुष्टि के प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं, जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने अपील की है कि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही समाचारों का प्रकाशन किया जाए। विभाग ने पुनः स्पष्ट किया है कि इस दुखद घटना के सभी पहलुओं की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और शिक्षा विभाग द्वारा हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

10 दिनों में 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, दुर्गम अंचलों तक पहुंचीं टीमें; हजारों मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार

रायपुर.  बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है। अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है। जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी। इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है।

स्किन ग्राफ्टिंग से मरीज के पलक का सफल पुनर्निर्माण

रायपुर.  छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में एक बार फिर जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए डॉक्टरों की टीम ने 22 वर्षीय युवक को नई दृष्टि और सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर प्रदान किया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई आंख की निचली पलक का सफल ऑपरेशन कर मरीज को बड़ी राहत मिली है। दिसंबर 2025 की दुर्घटना के बाद बढ़ी थी परेशानी प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक दिसंबर 2025 को एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे में उसकी आंख की निचली पलक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे वह अपनी आंख पूरी तरह बंद नहीं कर पा रहा था। प्रारंभिक उपचार के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद वह सिम्स के नेत्र रोग विभाग पहुंचा। विशेषज्ञों ने किया सर्जरी का निर्णय नेत्र विशेषज्ञों द्वारा गहन जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान पलक पर बने पुराने कठोर निशान (स्कार टिश्यू) को सावधानीपूर्वक हटाया गया। इसके बाद पलक की संरचना को पुनः सामान्य करने के लिए उन्नत स्किन ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग किया गया। जटिल सर्जरी के बाद तेजी से सुधार सर्जरी अत्यंत जटिल थी, क्योंकि ग्राफ्ट का आकार बड़ा था। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने सफलतापूर्वक स्किन ग्राफ्ट का प्रत्यारोपण कर पलक और गाल के हिस्से का पुनर्निर्माण किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की आंख की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और अब वह सामान्य रूप से देख पा रहा है। पलक भी पूरी तरह से बंद हो रही है, जिससे चेहरे की विकृति दूर हो गई है। इन विशेषज्ञों की टीम ने निभाई अहम भूमिका इस सफल सर्जरी में डॉ. सुचिता सिंह, डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. कौमल देवांगन, डॉ. विनोद ताम्कनंद, डॉ. डेलीना नेल्सन, डॉ. संजय चौधरी एवं डॉ. अनिकेत सहित नर्सिंग स्टाफ सिस्टर संदीप कौर तथा नेत्र, सर्जरी एवं निश्चेतना विभाग की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मरीज व परिजनों ने जताया आभार अस्पताल प्रशासन के अनुसार सर्जरी पूरी तरह सफल रही है। मरीज की पलक सामान्य स्थिति में लौट आई है और आंख की कार्यक्षमता भी बहाल हो गई है। चेहरे की विकृति समाप्त होने से मरीज और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली तथा सिम्स के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि “सिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर निरंतर बेहतर हो रहा है। हमारे विशेषज्ञ चिकित्सक जटिल से जटिल मामलों में भी उत्कृष्ट परिणाम दे रहे हैं। यह उपलब्धि संस्थान की आधुनिक सुविधाओं और डॉक्टरों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।” चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि “इस प्रकार की जटिल सर्जरी का सफल निष्पादन हमारी टीम की समन्वित कार्यप्रणाली और विशेषज्ञता को दर्शाता है। सिम्स में अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार यहीं मिल रहा है।” सरकारी संस्थान में विश्वस्तरीय उपचार का उदाहरण इस सफल सर्जरी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के बल पर जटिल से जटिल बीमारियों का विश्वस्तरीय उपचार संभव है।

Amit Jogi को बड़ी राहत: Supreme Court of India ने CBI जवाब तक सरेंडर टाला

रायपुर. एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए सीबीआई का जवाब आने तक सरेंडर पर रोक लगाई है. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. बता दें कि एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में दो अप्रैल को हाई कोर्ट ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) सुप्रीमो अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था. इस पर अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. राम अवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने लल्लूराम डॉट कॉम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर टू में आज इस मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सीबीआई, स्टेट और उन्हें (सतीश जग्गी) तो नोटिस जारी किया है. सीबीआई का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी. 2007 में निचली अदालत ने किया बरी एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की साल 2003 में हुई हत्या के मामले में निचली अदालत ने 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों का अभाव बताते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था. इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया था. हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना और दोषी करार देते हुए 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया था. 2004 में सीबीआई ने शुरू की जांच सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर जग्गी हत्याकांड का आरोप लगाया था. केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने जांच के बाद करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 31 लोगों को आरोपी बनाया गया. मई 2007 में स्पेशल कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. दो लोग सरकारी गवाह बन गए, जबकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था.