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रायपुर जिले के चिंगनार गांव में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन

रायपुर : जिले के दूरस्थ गांव चिंगनार में लगा जनसमस्या निवारण शिविर ग्रामीणों को मिला शासकीय योजनाओं का लाभ सांसद और विधायक हुए शामिल रायपुर माओवाद मुक्त बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में शासन की योजनाओं की पहुंच सुलभ हो रही है और विकास कार्यों को भी गति मिल रही है।  राज्य शासन के निर्देशानुसार कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड अंतर्गत दूरस्थ ग्राम चिंगनार में शासकीय योजनाओं का लाभ ग्रामवासियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में कांकेर सांसद भोजराज नाग और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम शामिल हुए। सांसद और विधायक ने शासन की विभिन्न योजनाओं अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री का विवरण किया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना और जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई भी उपस्थित रहे।  ग्रामीणों को मिला शासकीय योजनाओं का लाभ सांसद नाग ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पहले माओवाद के प्रभाव से इस क्षेत्र में सड़क पुल पुलिया और आधारभूत संरचना के कार्य नहीं हो पाता था। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के नेतृत्व में बस्तर अब माओवाद से मुक्त होने के बाद अब इन कार्यों को गति मिलेगी। केंद्र एवं राज्य सरकार महिलाओं किसानों के कल्याण के साथ  ग्रामीणों क्षेत्रों में अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति का विकास जरूरी है।  केशकाल विधायक ने कहा कि पहले इस क्षेत्र में माओवाद का बहुत दहशत हुआ करता था, विकास कार्य नहीं हो पा रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी सोच से अब इससे मुक्ति मिली है। दूरस्थ अंचलों में सड़क पुल पुलिया और बुनियादी सुविधाओं संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जाएगा। उन्होंने वन पट्टा धारियों से कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्होंने युवाओं को बेहतर भविष्य और महिलाओ के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए शासन की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामवासियों से कुल 115 प्राप्त हुए, जिसमें 49 आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया। शिविर के दौरान कुल 81 हितग्राहियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। आयुष्मान कार्ड के 7 तथा आधार कार्ड के 22 प्रकरणों का निराकरण किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गोद भराई एवं अन्नप्राशन कार्यक्रम के तहत 8 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इसी प्रकार विभिन्न विभागों द्वारा सामग्री वितरण के अंतर्गत राजस्व विभाग द्वारा 16 हितग्राहियों को बी-1/डिजिटल किसान किताब प्रदान की गई। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 12 जॉब कार्ड तथा 5 आवास स्वीकृत किए गए। श्रम विभाग द्वारा 11 श्रम कार्ड वितरित किए गए। शिक्षा विभाग द्वारा 24 जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा उद्यान विभाग द्वारा 3 हितग्राहियों को बागवानी किट प्रदान की गई। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष मानकु राम नेताम, झाड़ू राम सलाम एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, एस डी एम अश्वन पुसाम, जनपद पंचायत सीईओ रूपेंद्र नेताम, तहसीलदार जय नाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

जोखिम पहचान पर फोकस: मातृ-शिशु मौतों में कमी के लिए स्वास्थ्य सेवाएं होंगी मजबूत

रायपुर. प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता का समग्र आकलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में शुक्रवार को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की एक दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक स्वास्थ्य मंत्री के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं सेवा प्रदायगी की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जोखिम की समय पर पहचान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चिन्हित मामलों को आवश्यकता अनुसार उच्च स्तरीय शासकीय अथवा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में समय रहते रेफर किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि रेफरल प्रक्रिया के दौरान संबंधित चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधन प्रसूता एवं शिशु के डिस्चार्ज तक सतत संपर्क में रहें तथा सभी आवश्यक उपचार एवं सुविधाएं सुनिश्चित करें। साथ ही, मौसमी बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए अग्रिम तैयारियों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए। समीक्षा के दौरान सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों को प्रभावी औषधियां लिखने तथा आवश्यक जांच सुविधाएं संस्थागत स्तर पर ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े। बैठक का संचालन करते हुए सचिव अमित कटारिया ने मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक प्रकरण की अनिवार्य रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डेटा विश्लेषण के माध्यम से मृत्यु के कारणों की पहचान कर भविष्य में प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया गया, ताकि हितग्राहियों तक समयबद्ध एवं सरल जानकारी पहुंच सके और योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित हो। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के संचालक संजीव कुमार झा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक रणबीर शर्मा, महामारी नियंत्रण के संचालक डॉ. एस.के. पामभोई सहित सभी संभागों के संयुक्त संचालक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कुष्ठ एवं टीबी उन्मूलन सहित प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई। समापन संबोधन में सचिव कटारिया ने कहा कि प्रदेश को टीबी एवं मलेरिया मुक्त बनाना, मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार लाना तथा प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से सेवा भावना, प्रतिबद्धता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

सरेंडर की डेडलाइन खत्म, बस्तर में 5 माओवादी अब भी फरार—काउंटडाउन जारी

जगदलपुर. बस्तर में माओवादियों का नेटवर्क अब सिमटकर अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है. लेकिन इसी बीच कुछ गिने-चुने माओवादी अब भी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं और सुरक्षा बलों को सीधी चुनौती दे रहे हैं. माओवादी कमांडर पापाराव के जगदलपुर में और PLGA इंचार्ज सोढ़ी केसा के तेलंगाना में आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में सक्रिय माओवादियों की संख्या तेजी से घटी है. इसके बावजूद अब भी कुछ कट्टर कैडर अंडरग्राउंड रहकर गतिविधियां जारी रखे हुए हैं. स्थिति को देखते हुए बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने साफ और कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर में अब गिनती के माओवादी ही बचे हैं. और उनके पास मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका है. आईजी ने दो टूक कहा कि अगर अब भी ये माओवादी सामने नहीं आते हैं, तो सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज होगी. तेलंगाना DGP की माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील वहीं दूसरी ओर तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने भी तेलंगाना मूल के माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील दोहराई है. उन्होंने बताया कि साल 2024 में 125 तेलंगाना मूल के लोग माओवादी संगठन से जुड़े थे. लेकिन अब यह संख्या घटकर महज 5 रह गई है. इन बचे हुए माओवादियों में बड़े नाम भी शामिल हैं जिनमें गणपति और कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर में सक्रिय महिला माओवादी रूपी का नाम प्रमुख है जो अब भी अंडरग्राउंड हैं. यानी साफ है बस्तर में माओवाद का ढांचा लगभग ढह चुका है लेकिन आखिरी बचे माओवादी अब भी आत्मसमर्पण और मुठभेड़ के बीच खड़े हैं जहां अगला कदम उनकी किस्मत तय करेगा.

सूरजपुर : जनगणना 2027 – 13 अप्रैल से प्रारंभ होगा प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण

सूरजपुर जनगणना 2027 के प्रथम चरण – मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) – की तैयारी के अंतर्गत जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार जिले में 13 अप्रैल से प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जायेगा। जारी दिशानिर्देशों के अनुसार यह प्रशिक्षण 25 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाना है। तीन दिवसीय बैच प्रशिक्षण:- दो फील्ड ट्रेनर्स की जोड़ी द्वारा 40 से 45 प्रतिभागियों के बैचों में 03 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण से पूर्व सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का पंजीयन सीएमएमएस पोर्टल (census.gov.in) पर किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान एचएलओ निर्देश पुस्तिकाएँ, पीपीटी प्रस्तुतियाँ एवं लघु शिक्षण वीडियो हिन्दी भाषा में उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रशिक्षण की निगरानी सीएमएमएस डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी।      कलेक्टर एस. जयवर्धन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को निर्धारित समय-सीमा में सफलतापूर्वक पूर्ण कराया जाने हेतु चार्ज अधिकारियों को दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के दिशा निर्देश दिये।   

डॉ. रश्मि कुमार की वापसी से 220 बिस्तर अस्पताल में मातृ सेवाओं को मिली नई मजबूती

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले के 220 बिस्तर अस्पताल मनेंद्रगढ़ के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। निजी कारणों से अवकाश पर चल रही वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कुमार ने पुनः अपना कार्यभार संभाल लिया है। उनकी वापसी से अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नया विस्तार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। डॉ. रश्मि कुमार के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ अब फिर से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को मिलेगा। अपने पूर्व कार्यकाल में उन्होंने जटिल प्रसव और स्त्री रोग से जुड़े मामलों का सफलतापूर्वक उपचार कर मरीजों का भरोसा जीता था, जिससे अस्पताल की सेवाओं पर विश्वास और मजबूत हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि डॉ. रश्मि कुमार की वापसी से प्रसूति सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आएगा। अब सामान्य प्रसव के साथ-साथ जटिल मामलों का भी बेहतर इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगा, जिससे मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम पड़ेगी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने भी उनकी वापसी पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि मातृ मृत्यु दर को कम करने और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने भी डॉ. रश्मि कुमार की वापसी का स्वागत किया है। अस्पताल में लगातार सुविधाओं के विस्तार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, और उनकी पुनः तैनाती से इस दिशा में और सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक

गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र का छोटा सा गांव धोवाताल आज आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनकर उभर रहा है। जहां कई स्थानों पर गौठान योजनाएं निष्क्रिय हैं, वहीं इस गांव की 60 महिलाओं ने गौठान को किराए पर लेकर उसे आजीविका के सशक्त केंद्र में बदल दिया है। लगभग 150 घरों और 510 की आबादी वाले इस गांव में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं ने आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिखी है। पांच समूहों ने संभाली जिम्मेदारी गांव में पांच महिला समूह मिलकर विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। बजरंगबली समूह बकरी पालन, सिद्धबाबा समूह मुर्गी पालन, महिला सशक्तिकरण समूह किराना दुकान, सीता महिला समूह बहुआयामी गतिविधियों (सुअर, बटेर व मछली पालन) तथा दुर्गा महिला समूह किराना व मनिहारी दुकान संचालित कर रहे हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। सहायता राशि को बनाया निवेश महिलाओं को क्लस्टर स्तर से मिली 60-60 हजार रुपये की सहायता राशि को खर्च करने के बजाय व्यवसाय में निवेश किया गया। आज उनके उत्पाद स्थानीय हाट-बाजारों के साथ-साथ मध्यप्रदेश तक पहुंच रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं। पलायन पर लगी रोक इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव गांव में पलायन रुकने के रूप में सामने आया है। जो युवा पहले रोजगार की तलाश में रायपुर, गुजरात और मेरठ जैसे शहरों की ओर जाते थे, अब उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। NRLM से मिली दिशा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से मिले मार्गदर्शन और सहयोग ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। समूह की महिलाओं का कहना है कि अब पशुपालन और दुकान संचालन से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। युवाओं को मिला स्थानीय रोजगार गांव के युवाओं ने बताया कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही काम मिलने से आय के साथ संतोष भी मिल रहा है। प्रशासन ने सराहा पहल ग्राम सरपंच गोकुल प्रसाद परस्ते ने बताया कि गौठान आधारित गतिविधियों से गांव में आर्थिक समृद्धि आई है और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। जनपद भरतपुर के अधिकारियों ने भी धोवाताल मॉडल को प्रेरणादायक बताया है। प्रेरणादायक बना धोवाताल धोवाताल की यह पहल दर्शाती है कि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।

आत्मानंद स्कूल में एडमिशन की शुरुआत: सीमित सीटों पर लॉटरी से मिलेगा मौका

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मनेंद्रगढ़ में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित इस विद्यालय में इच्छुक छात्र-छात्राएं अब निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार प्रवेश हेतु आवेदन प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जो 5 मई 2026 को शाम 5:00 बजे तक जारी रहेगी। अभ्यर्थी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए अभिभावक CGSchool Portal के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विद्यालय द्वारा जारी सीटों के विवरण के अनुसार कक्षा 1वीं में 50 सीटें उपलब्ध हैं। वहीं कक्षा 3वीं, 4वीं और 5वीं में 1-1 सीट, कक्षा 7वीं में 2 सीटें तथा कक्षा 8वीं में 6 सीटें रिक्त हैं। इसके अलावा कक्षा 11वीं में कॉमर्स, जीव विज्ञान और गणित संकायों में 5-5 सीटें निर्धारित की गई हैं। सभी कक्षाओं में बालक एवं बालिकाओं के लिए समान रूप से प्रवेश की सुविधा उपलब्ध रहेगी। विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कक्षा में उपलब्ध सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पात्र अभ्यर्थियों का चयन पारदर्शी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसकी सूचना अभ्यर्थियों को पूर्व में ही दे दी जाएगी। अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील की गई है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा देने और क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करने की दिशा में यह पहल अहम मानी जा रही है।

विकास के मार्ग पर श्रमिकों का योगदान, श्रमिक सम्मेलन में योजनाओं की सौगात से बढ़ी उम्मीदें

रायपुर : विकास की नींव रखने वाले हाथों का सम्मान, श्रमिक सम्मेलन में योजनाओं की सौगात से खिले श्रमिकों के चेहरे रायपुर  जगदलपुर के स्थानीय वीर सावरकर भवन में  निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में विकास की रीढ़ कहे जाने वाले श्रमिकों का न केवल सम्मान किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस सम्मेलन में समूचे जिले के सुदूर अंचलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा परिसर उनकी उत्साहजनक उपस्थिति से सराबोर नजर आया।        कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद बस्तर महेश कश्यप और नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में श्रमिकों को राष्ट्र का असली निर्माता बताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रमिक केवल मजदूरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए विश्वास दिलाया कि सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। कश्यप ने शासन द्वारा श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न 31 योजनाओं की जानकारी और अन्य सुरक्षा योजनाओं के लाभ पर जोर देते हुए कहा कि हर श्रमिक का पंजीकरण होना अनिवार्य है ताकि शासन की मदद उन तक बिना किसी बाधा के पहुँच सके। इस अवसर पर नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।        मंच से जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों द्वारा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत सहायता राशि के चेक वितरित किए गए, जिसे पाकर श्रमिकों के चेहरों पर संतोष और खुशी के भाव स्पष्ट नजर आए। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता मौके पर ही समाधान की रही, जहाँ श्रम विभाग द्वारा लगाए गए विशेष पंजीकरण शिविरों के माध्यम से नए श्रमिकों का तत्काल पंजीयन किया गया। श्रम पदाधिकारी भूपेंद्र नायक ने बताया कि इस मुहिम का उद्देश्य बस्तर के उन मेहनतकश लोगों को विभागीय योजनाओं के दायरे में लाना है जो अब तक जागरूकता के अभाव में लाभ से वंचित थे। इस सार्थक प्रयास से बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक भी अब सरकार की कल्याणकारी नीतियों से सीधे जुड़ सकेंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।

आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, संस्कार निर्माण की पाठशाला बने – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर : आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने रायपुर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें ‘संस्कार निर्माण की पाठशाला’ के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के सर्वांगीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें दिए गए संस्कार जीवनभर उनकी सोच और व्यवहार को दिशा देते हैं। आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े मंत्री श्रीमती राजवाड़े अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में राज्य शैक्षणिक अनुसंधान केंद्र के ईसीसीई के राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन एवं विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर रही थीं। बैठक में प्रदेश के 52,518 आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को संस्कारपरक शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस पहल करने पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि बच्चे का पहला विद्यालय उसका घर और आंगनबाड़ी होता है, इसलिए यहां दी जाने वाली शिक्षा में भारतीय जीवन मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। संस्कारपरक शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही बड़ों का सम्मान, सत्य बोलना, स्वच्छता, अनुशासन, प्रकृति प्रेम तथा ‘धन्यवाद’ और ‘क्षमा’ जैसे व्यवहारिक गुणों का विकास करना है। मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों में इस प्रकार की शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कई व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने दिन की शुरुआत प्रार्थना, योग और प्राणायाम से करने, पंचतंत्र एवं लोककथाओं के माध्यम से नैतिक शिक्षा देने, त्योहारों और महापुरुषों की जयंती के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ाने, तथा दैनिक व्यवहार में ‘नमस्ते’, स्वच्छता और अनुशासन को शामिल करने पर बल दिया। साथ ही बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान और प्रकृति प्रेम विकसित करने के लिए पौधारोपण एवं स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे कार्यों को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महीने में ‘संस्कार सभा’ आयोजित कर माता-पिता को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाए, ताकि घर और आंगनबाड़ी दोनों स्थानों पर बच्चों को समान वातावरण मिल सके। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इस पहल से बच्चों में आत्मविश्वास, भाषा कौशल और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा, साथ ही कुपोषण के साथ ‘चरित्र पोषण’ भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि संस्कारित बच्चे आगे चलकर अनुशासित विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं, जिससे समाज और राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ‘दूसरी माँ’ की भूमिका निभाते हुए बच्चों को प्रेमपूर्वक संस्कार देने का आह्वान किया। वर्तमान सामाजिक परिवेश में बढ़ती सामाजिक बुराइयों और मानवीय मूल्यों में गिरावट को देखते हुए उन्होंने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को ‘संस्कार-केन्द्र’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

मई-जून में संभावित स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज

रायपुर : आगामी मई -जून माह में संभावित स्थानीय निकायो के आम/उप चुनाव के दृष्टिगत मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज त्रुटिरहित एवं समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करें प्रेक्षक : राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई जून-2026 की तैयारियों को गति प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में आज निर्वाचक नामावली प्रेक्षकों की ब्रीफिंग आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने की।राज्य निर्वाचन आयुक्त  अजय सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य त्रुटिरहित, पारदर्शी एवं समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए तथा सभी दावा-आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में उनका निराकरण किया जाए। उन्होंने पुनरीक्षण कार्य की सघन निगरानी और प्रभावी सुपरविजन पर विशेष बल दिया। बैठक में आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए 01 अप्रैल 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले तथा भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा मतदाता सूची में शामिल नागरिक ही स्थानीय चुनाव में मतदाता बनने के पात्र होंगे। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। इसके पश्चात 20 अप्रैल 2026 तक दावा-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी तथा 27 अप्रैल 2026 तक उनका निराकरण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा। आयोग द्वारा बताया गया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन एवं विलोपन के लिए निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे।  बैठक में रिक्त पदों की जानकारी भी साझा की गई। नगरीय निकायों में अध्यक्ष के 4पद एवं 60 पार्षद के पदों पर आम निर्वाचन तथा अध्यक्ष के 4 पद एवं 17 पार्षद पदों पर उप निर्वाचन प्रस्तावित है। वहीं, त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के अंतर्गत जनपद पंचायत सदस्य के 10 पद, सरपंच के 82 पद एवं पंचों के 1110 पद रिक्त हैं, जिन पर निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा। इस अवसर पर आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी ने भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ करें तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें।