samacharsecretary.com

भर्ती परीक्षा की तैयारी पूरी: 19 अप्रैल को 21 केंद्रों पर होगी परीक्षा, 5,720 परीक्षार्थी शामिल

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा परिवहन विभाग के अन्तर्गत परिवहन आरक्षक के रिक्त पदों के लिए लिखित भर्ती परीक्षा का आयोजन आगामी रविवार 19 अप्रैल 2026 को किया जा रहा है। बस्तर जिले में इस परीक्षा के सफल संचालन हेतु कुल 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 01ः15 बजे तक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस भर्ती परीक्षा के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं, जिसमें कुल 5,720 परीक्षार्थी शामिल हांेगे। जिसके तहत परीक्षा केंद्र शासकीय काकतीय पीजी कॉलेज धरमपुरा में 360, झाड़ा सिरहा शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में 360, शासकीय दन्तेश्वरी पीजी महिला महाविद्यालय में 360, शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल क्र.-1 में 360, और शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जगदलपुर में 360, सेजेस शासकीय कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल क्र.-2 में 360, स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल धरमपुरा में 360, स्वामी विवेकानंद एक्सीलेंट स्कूल संजय मार्केट में 360, स्वामी आत्मानंद हिन्दी मीडियम स्कूल रेल्वे कालोनी में 300 और धरमु माहरा शासकीय महिला पॉलिटेक्निक में 240, शासकीय हायर सेकेण्डरी विद्यालय भगत सिंह पथरागुड़ा में 300, पोटानार में 300, बिलोरी में 240, आसना में 300, बोरपदर में 180, हाईस्कूल केवरामुण्डा में 120, घाटलोहंगा में 120, आड़ावाल में 240, कालीबाड़ी हाईस्कूल में 120, पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय में 240 और शासकीय आईटीआई जगदलपुर में 140 परीक्षार्थी शामिल होंगे अभ्यर्थियों के लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें परीक्षा प्रारंभ होने से कम से कम 2 घंटा पूर्व केंद्र पहुंचना होगा, क्योंकि मुख्य द्वार परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट पहले, यानी सुबह 10ः30 बजे अनिवार्य रूप से बंद कर दिया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर से गहन जांच की जाएगी। परीक्षार्थियों को अपने साथ इंटरनेट से प्राप्त साफ-सुथरा मूल प्रवेश पत्र और एक मूल पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पैन कार्ड लाना अनिवार्य है, पहचान पत्र न होने पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यदि प्रवेश पत्र पर फोटो स्पष्ट न हो, तो दो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ रखना आवश्यक है। ड्रेस कोड का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को हल्के रंग के आधी बांह वाले कपड़े, टी-शर्ट और पैरों में चप्पल पहनकर आना होगा, जबकि जूते-मोजे, बेल्ट, घड़ी, चश्मा, स्कार्फ और किसी भी प्रकार के आभूषण जैसे बाली या झूमका पहनना पूरी तरह वर्जित है। परीक्षा हॉल में केवल काले या नीले बॉल पॉइंट पेन की ही अनुमति होगी।

AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने का उद्देश्य: CM साय

AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना हमारा ध्येय है: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ में AI आधारित शिक्षा की नई शुरुआत: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से गूगल इंडिया प्रतिनिधियों की मुलाकात रायपुर से शुरू होगा ‘AI सक्षम शिक्षा अभियान’, 2 लाख से अधिक शिक्षकों को मिलेगा AI प्रशिक्षण रायपुर  छत्तीसगढ़ में शिक्षा को भविष्य की तकनीकों से जोड़ते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख संजय जैन एवं गूगल इंडिया के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख राकेश रंजन ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने अतिथियों का पारंपरिक सम्मान करते हुए उन्हें शॉल एवं बस्तर कला की प्रतिकृति भेंट की। । गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख संजय जैन ने रायपुर जिला प्रशासन और गूगल के मध्य हुए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रायपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में “AI सक्षम शिक्षा अभियान” की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि “सक्षम शिक्षक अभियान” के तहत राज्य में शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स और AI आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के प्रथम चरण की शुरुआत रायपुर से की जाएगी, जिसके बाद इसे राज्य के सभी जिलों में विस्तार दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 2 लाख से अधिक शिक्षकों को AI प्रमाणन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए गूगल फॉर एजुकेशन अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को निःशुल्क उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, जिससे शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त किया जा सके। कार्यक्रम के तहत प्रारंभिक चरण में 200 शिक्षकों की सहभागिता से विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें गूगल फॉर एजुकेशन टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, कक्षा शिक्षण में AI के प्रभावी उपयोग और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीक-सक्षम और नवाचार आधारित बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को शिक्षा से जोड़ना केवल एक पहल नहीं, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल शिक्षण पद्धतियों में गुणवत्ता आएगी, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नए युग के कौशल विकसित होंगे, जो उन्हें आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “AI सक्षम शिक्षा अभियान” जैसे कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों से सशक्त कर कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है – छत्तीसगढ़ को एक ऐसे ज्ञान-आधारित और तकनीकी रूप से सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करना, जहाँ हर विद्यार्थी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अवसरों से भरपूर शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर एक सशक्त, आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बच्चों का चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव है — डॉ. वर्णिका शर्मा

 बच्चों का चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है — डॉ. वर्णिका शर्मा  रायपुर आज दिनांक 08 अप्रैल 2026 को महाराणा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा “मोर मयारू गुरुजी” कार्यक्रम कॉलेज के अनुरोध पर आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम प्रातः 10:30 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 1:00 बजे तक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि बच्चों को सही दिशा देना तथा उनका उत्तम चरित्र निर्माण करना एक शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को इस कार्य को यज्ञ मानकर करना चाहिए, क्योंकि राष्ट्र का भविष्य शिक्षकों द्वारा गढ़े गए बच्चों के चरित्र पर ही निर्भर करता है। इस अवसर पर आयोग के  सचिव श्री प्रतीक खरे ने प्रतिभागियों को बच्चों के अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विभिन्न गतिविधियों, फिल्मों, पावर पॉइंट प्रस्तुति, रोचक कहानियों एवं संवाद के माध्यम से उन्होंने समझाया कि बच्चे 80 प्रतिशत बातें अवलोकन से तथा 20 प्रतिशत बातें पढ़ने या सुनने से सीखते हैं। अतः शिक्षकों का व्यवहार बच्चों के समक्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कार्यक्रम में कॉलेज की प्राचार्य Dr. Jasmine Joshi, उपप्राचार्य Dr Sweta  Tiwari, वहां के बी.एड. संकाय के विभागाध्यक्ष वहां के शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि सरकार सहित समस्त फैकल्टी सदस्य एवं बी.एड./डी.एड. के लगभग 125 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन उपरांत प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं रोचक बताते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। आयोग द्वारा इस प्रकार के आयोजन हेतु कॉलेज का आभार व्यक्त किया गया। वहीं, महाराणा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज परिवार ने आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की कि उन्होंने अपने व्यस्त समय से समय निकालकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

अवैध अवकाश पर कड़ा एक्शन: नगर निगम ने कसी लगाम, दो अधिकारी निलंबित

भिलाई नगर. भिलाई नगर निगम क्षेत्र में जनगणना के कार्य की शुरुआत 1 मई से शुरू होने वाली है इसके पूर्व जनगणना प्रगणकों का प्रशिक्षण 10 अप्रैल को होने वाला है। नगर निगम के आयुक्त ने इस कार्य को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी अधिकारी-कर्मचारियों के अवकाश निरस्त कर दिए गए हैं बिना बताए अब कोई भी अधिकारी कर्मचारी अवकाश में नहीं जा सकते। जनगणना के प्रथम चरण में मकानों की सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य माह 1 मई से 30 मई के मध्य किया जायेगा जिसका प्रशिक्षण 10 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। नगर निगम भिलाई के समस्त अधिकारी, कर्मचारी बिना अनुमति के अवकाश पर नहीं जाएंगे एवं मुख्यालय नही छोड़ेंगे। कॉलोनी के अनुमोदन में खेला टाउन प्लानिंग राजनांदगांव में पदस्थ उप संचालक स्तर के दो अधिकारियों को राज्य शासन ने निलंबित करने का आदेश दिया है। इन अफसरों पर एक कॉलोनी के अनुमोदन के दौरान करोड़ों रूपये की गंभीर अनियमितता किए जाने का आरोप लगा है। एक अधिकारी सूर्यभान सिंह ठाकुर वर्तमान में दुर्ग में पदस्थ हैं, वहीं दूसरी महिला अधिकारी उप संचालक के पद पर राजनांदगांव में सेवारत है। मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन के अवर सचिव शत्रुहन यादव ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें उनके द्वारा कहा गया है कि 15 जनवरी 2026 को नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा सत्यम परिवेश कॉलोनी के अनुमोदन अभिन्यास में करोड़ों रूपये का हेरफेर की गई है, जिस संबंध में राजनांदगांव में पदस्थ रहे संयुक्त संचालक सूर्यभान सिंह ठाकुर जो वर्तमान में दुर्ग में पदस्थ है, कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। प्रकरण में दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद जांच हेतु गठित की गई समिति द्वारा जांच प्रतिवेदन में सूर्यभान ठाकुर एवं राजनांदगांव में पदस्थ उप संचालक कमला सिंह को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है, जिसके कारण निलंबित किए जाने का आदेश जारी किया है।

ऑनलाइन पोस्ट ने खोला राज: दुर्लभ गिलहरियों का शिकारी पुलिस के हत्थे चढ़ा

बीजापुर. जिले में वन्यजीव संरक्षण को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। दुर्लभ वन्य जीव मालाबार जायंट स्क्विरल (गिलहरी) का शिकार करने वाले एक आरोपी को वन विभाग की टास्क फोर्स ने गिरफ्तार किया है। इस मामले की खास बात यह रही कि आरोपी ने शिकार का वीडियो खुद ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया था, जो उसके लिए ही सबूत बन गया। वन विभाग की राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम ने वायरल वीडियो को ट्रैक करते हुए आरोपी की पहचान की और बीजापुर जिले के तोड़मा क्षेत्र से उसे गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि यह गिलहरी वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अनुसूची-1 में शामिल प्रजाति है, जिसका शिकार करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। बता दें कि आरोपी ने इंस्टाग्राम पर दुर्लभ गिलहरी के शिकार का वीडियो अपलोड किया था, जिसमें करीब 9 मालाबार जायंट स्क्विरल (गिलहरी) नजर आ रहे हैं। वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

सीएम साय की दिल्ली यात्रा पूरी, नक्सलवाद पर केंद्र की कार्रवाई को कहा धन्यवाद

रायपुर. दिल्ली दौरे से लौटे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई. नक्सलवाद की समाप्ति के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया. 4 दशकों के नक्सलवाद से बस्तर मुक्त हुआ है, वहां अब विकास कार्य किस तरह किए जाएंगे, इसकी जानकारी प्रधानमंत्री को दी. मुख्यमंत्री साय ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात हुई. वहीं असम के चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि भाजपा की बहुत अच्छी स्थिति रहेगी. असम में सरकार बनेगी. भाजपा के लिए अच्छी स्थिति है. बता दें कि मुख्यमंत्री साय अपने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के दौरान बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट सौंपा है. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है. 

हक की पुकार बनी आंदोलन की चेतावनी: प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द छलका, 15 अप्रैल तक न्याय नहीं तो हड़ताल तय

हक की पुकार बनी आंदोलन की चेतावनी: प्लेसमेंट कर्मचारियों का दर्द छलका, 15 अप्रैल तक न्याय नहीं तो हड़ताल तय मनेन्द्रगढ़/एमसीबी नगरीय निकायों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे प्लेसमेंट कर्मचारियों की पीड़ा अब शब्दों से आगे बढ़कर आंदोलन की दहलीज पर पहुंच गई है। लंबे समय से लंबित केन्द्रीय वेतनमान की मांग को लेकर कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय प्लेसमेंट कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। महासंघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सौरभ यादव के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में कर्मचारियों की पीड़ा साफ झलकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा श्रम सुधार के तहत 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 नए श्रम कोड लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और “समान कार्य के लिए समान वेतन” का अधिकार देना है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में अब तक इन प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे हजारों कर्मचारियों के मन में गहरी निराशा घर कर गई है। कर्मचारियों का कहना है कि आज के महंगाई भरे दौर में उनका वर्तमान वेतन उनके जीवन की बुनियादी जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम नहीं है। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के खर्च हर मोर्चे पर वे संघर्ष कर रहे हैं। सबसे अधिक पीड़ा उन्हें इस बात की है कि समान कार्य करने के बावजूद स्थायी कर्मचारियों और प्लेसमेंट कर्मचारियों के बीच वेतन में भारी असमानता बनी हुई है। महासंघ ने शासन से मांग की है कि नए श्रम कोड के अनुरूप केन्द्रीय दर पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सर्कुलर जारी किया जाए, ताकि वर्षों से उपेक्षित इन कर्मचारियों को राहत मिल सके और उनके साथ हो रहे आर्थिक अन्याय का अंत हो सके। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय सीमा तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो पहले चरण में प्रदर्शन और ज्ञापन, दूसरे चरण में कार्य बहिष्कार और अंततः अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम उठाए जाएंगे। यदि ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर नगरीय निकायों की दैनिक सेवाओं पर पड़ना तय है। फिलहाल शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों के तेवर और उनके भीतर पनपता आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गंभीर रूप ले सकता है, जहां सिर्फ मांग नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे का काला धब्बा, दो शिक्षक निलंबित

कलेक्टर की सख्त कार्रवाई: शिक्षा के मंदिर में नशे की कालिख, दो शिक्षक निलंबित मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा, जिसे समाज की आत्मा और भविष्य की नींव माना जाता है, जब उसी के मंदिर में अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदारी का साया पड़ जाए, तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक चेतावनी बन जाती है। ऐसा ही एक बेहद चिंताजनक और भावुक कर देने वाला मामला जिले के प्राथमिक शाला बाला, विकासखंड मनेंद्रगढ़ (तहसील केल्हारी) से सामने आया, जिसने हर संवेदनशील नागरिक को झकझोर कर रख दिया। यहां पदस्थ प्रधान पाठक पारस राम वर्मा और सहायक शिक्षक मेहीलाल सिंह, जिनके कंधों पर नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी थी, वे अपने कर्तव्यों से भटकते हुए शराब के नशे में स्कूल पहुंचे। यह दृश्य केवल एक नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के मूल्यों पर गहरी चोट जैसा था। मामले की गंभीरता को समझते हुए कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह न केवल हैरान करने वाली थी, बल्कि अत्यंत निराशाजनक भी। दोनों शिक्षक ड्यूटी के समय नशे की हालत में पाए गए। मौके पर ही पंचनामा तैयार कर उनके बयान दर्ज किए गए, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों को सिविल अस्पताल मनेंद्रगढ़ में चिकित्सकीय परीक्षण हेतु ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच में भी इस कड़वी सच्चाई पर मुहर लग गई। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय पहुंचते ही प्रशासन हरकत में आया और बिना किसी देरी के कड़ा निर्णय लिया गया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 एवं 23 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्रवाई केवल दो व्यक्तियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र के लिए एक सशक्त संदेश है—कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और अनुशासनहीनता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिन हाथों में हमारे बच्चों का भविष्य सौंपा जाता है, वे हाथ कितने जिम्मेदार और सजग होने चाहिए। प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई निश्चित ही व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम है, लेकिन साथ ही यह समाज और शिक्षा विभाग दोनों के लिए आत्ममंथन का भी अवसर है। क्योंकि अंततः, बच्चों का भविष्य केवल किताबों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और आदर्शों से भी निर्मित होता है।

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान

जमीनी ताकत से जीत का संकल्पः नई लेदरी में कांग्रेस ने भरी हुंकार, मजबूत संगठन के लिए बना एक्शन प्लान मनेन्द्रगढ़/एमसीबी राजनीतिक मजबूती का असली आधार केवल पद नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की ऊर्जा होती है – इसी सोच के साथ नगर पंचायत नई लेदरी में कांग्रेस ने संगठन को नई धार देने का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को आयोजित अहम बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि अब हर मंडल और हर बूथ पर मजबूत, जागरूक और सक्रिय टीम तैयार की जाएगी। बैठक में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विष्णु दास ने स्पष्ट कहा कि संगठन निर्माण का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि हर स्तर पर ऐसी टीम खड़ी करना है जो जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं होंगे, तब तक संगठन की असली ताकत सामने नहीं आ पाएगी। मंडल अध्यक्ष राजाराम कोल की उपस्थिति में हुई इस बैठक में संगठन की मजबूती को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि आने वाले समय में कांग्रेस को क्षेत्र में और सशक्त बनाने के लिए बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने और नियमित संवाद बनाए रखने की रणनीति तैयार की गई। बैठक में सांसद प्रतिनिधि मकबूल अख्तर, हसदेव मंडल प्रभारी लक्ष्मी दास, मंडल सचिव राम भजन, नेता प्रतिपक्ष विकास दीवान, ब्लॉक उपाध्यक्ष शंभु घोष सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्षद अनामिका, अजय लाल, रानी मैना, शेखर टंडन, अंकित खरे, अमर पाव और अन्य कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इस बैठक के माध्यम से कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि अब संगठन को कागजों से निकालकर जमीनी हकीकत में उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मजबूत रणनीति और सक्रिय टीम के सहारे पार्टी आने वाले समय में क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण: पक्के घर से सम्मानजनक जीवन की शुरुआत

नक्सल क्षेत्र में उम्मीद की नई किरण, पक्का घर बना सम्मानजनक जीवन का आधार रायपुर बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत धर्मावरम ग्राम से एक सकारात्मक बदलाव की कहानी सामने आई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास की नई तस्वीर बयान करती है। कभी नक्सल प्रभावित यह इलाका अब शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकास की मुख्यधारा से जुड़ता दिखाई दे रहा है। इसी परिवर्तन की मिसाल हैं 60 वर्षीय श्रीमती गुण्डी बुचम्मा, जिन्होंने वर्षों तक कच्चे एवं खपरैल वाले मकान में कठिन परिस्थितियों के बीच जीवन व्यतीत किया। बारिश के मौसम में घर की छत से पानी टपकना, असुरक्षा और असुविधा उनके जीवन का हिस्सा था। किन्तु अब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्का मकान प्राप्त हुआ है, जिसने उनके जीवन में एक नया आत्मविश्वास और सुरक्षा प्रदान की है।  यह पक्का मकान उनके लिए केवल एक आवास नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। उनके पुत्र जगत बुचम्मा के अनुसार, अब परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और दैनिक जीवन में काफी सुविधा महसूस कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में नक्सल प्रभाव के कारण विकास कार्य बाधित होते थे, लेकिन वर्तमान में प्रशासन की सक्रियता और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने से योजनाओं का क्रियान्वयन तेज हुआ है। शासन की योजनाएं अब दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं, जिससे आमजन का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है। धर्मावरम की यह कहानी केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते बीजापुर की तस्वीर है, जहां अब भय और असुरक्षा की जगह विकास, विश्वास और उम्मीद ने ले ली है। शासन की सतत पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की यह प्रक्रिया निरंतर आगे बढ़ रही है।