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उत्तर बस्तर कांकेर : महतारी वंदन योजना के तहत हितग्राहियों का ई-केवायसी कराने की अपील

उत्तर बस्तर कांकेर राज्य शासन द्वारा समस्त हितग्राही मूलक योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने वाले हितग्राहियों का ई-केवायसी कराये जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग की महतारी वंदन योजना के तहत लाभान्वित समस्त महिलाओं का ई-केवायसी कराया जाना है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जिले में महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 01 लाख 80 हजार महिलाओं को प्रतिमाह लाभान्वित किया जा रहा है, इनमें से लगभग 27 हजार महिलाओं का ई-केवायसी पूर्ण हो चुका है। इस प्रकार जिले में महतारी वंदन योजना से लाभान्वित लगभग 01 लाख 53 हजार हितग्राहियों का ई-केवायसी कराया जाना है। इन महिलाओं के नाम, सूची संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के महतारी वंदन एप के लॉगिन आईडी में उपलब्ध है। केवल इन्हीं महिलाओं का ई-केवायसी निकट के कॉमन सर्विस सेंटर में जाकर निःशुल्क कराया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा राज्य स्तर से चिप्स को नोडल एजेंसी बनाते हुए उनके अधीनस्थ संचालित कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से उक्त कार्य निःशुल्क कराये जाने के निर्देश दिये गए हैं। साथ ही सभी परियोजनाओं में व्हीएलई एवं पर्यवेक्षकों का संयुक्त प्रशिक्षण भी आयोजित किया जा चुका है। महतारी वंदन योजना से लाभान्वित ऐसी समस्त महिलाएं जिनका ई-केवायसी नहीं हुआ है उन्हें आवश्यक अभिलेखों जैसे अद्यतन आधार कार्ड की मूलप्रति एवं आंगनबाडी कार्यकर्ता से महतारी वंदन योजना का हितग्राही पंजीयन क्रमांक प्राप्त कर निकट के कॉमन सर्विस सेंटर सीएससी में अपना ई-केवायसी कराने कहा गया है, ताकि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत निरन्तर लाभान्वित किया जा सके। उल्लेखनीय हैं कि महतारी वंदन योजना से लाभान्वित जिन महिलाओं का ई-केवायसी 2-3 माह पूर्व कराया जा चुका है उन्हें पुनः ई-केवायसी कराये जाने की आवश्यकता नहीं है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए निकट की आंगनबाडी कार्यकर्ताओं एवं पर्यवेक्षक से संपर्क किया जा सकता है।

थाने में बड़ा घोटाला: 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, SP ने कड़ी कार्रवाई की

डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ थाना एक बार फिर विवादों में है। सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो सामने आते ही पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एएसआई रोहित खूंटे और आरक्षक लक्ष्मी शंकर कंवर को निलंबित कर दिया है। वायरल हो रहे इस कथित वीडियो में थाना परिसर के भीतर संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। फुटेज में एक एएसआई, जिसे रोहित खूंटे बताया जा रहा है, मोबाइल फोन में एक महिला की तस्वीर को ज़ूम कर देखते नजर आते हैं। यह दृश्य पुलिस आचरण को लेकर कई सवाल खड़े करता है। इसके बाद वीडियो में कथित तौर पर एक वर्दीधारी आरक्षक, जिसे लक्ष्मी शंकर कंवर बताया जा रहा है, नगदी लेकर अपनी जेब में रखते दिखाई देता है।  आगे के हिस्से में एएसआई द्वारा बाहर आकर संबंधित व्यक्ति से और पैसों की मांग करने और “मामला निपटाने” की बात कहने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आए दृश्य पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना रहे हैं और इसी संवेदनशीलता के चलते एसपी ने दोनों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। घटनाक्रम ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब यह सब थाने के भीतर हो रहा था, तो क्या थाना प्रभारी को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर यह सब उनकी जानकारी में ही चल रहा था? किसी भी थाने की गतिविधियों की अंतिम जिम्मेदारी थाना प्रभारी की होती है, ऐसे में जांच का दायरा केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए।  मामला सामने आते ही एसपी अंकिता शर्मा ने “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत त्वरित कदम उठाते हुए वीडियो में दिख रहे एएसआई रोहित खूंटे और आरक्षक लक्ष्मी शंकर कंवर को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विभाग की सख्ती का संकेत जरूर है, लेकिन साथ ही यह भी सवाल उठता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस विभाग इस पूरे मामले की जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करता है।  जनता के बीच फिलहाल एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या वर्दी के भीतर चल रही इस कथित ‘सौदेबाज़ी’ पर सख्त कार्रवाई होगी, या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?  

जहाँ बंदूकें थीं, अब बहता है पानी – हेटारकसा की बदली हुई तस्वीर

जहॉ बन्दूकें थीं, अब बहता है पानी- हेटारकसा की बदली तस्वीर रायपुर   कभी नक्सल गतिविधियों के कारण विकास से अछूता रहा कोयलीबेड़ा विकासखंड के ग्राम हेटारकसा आज बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जहां पहले सड़क, संचार और मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच मुश्किल थी, वहीं अब शासन के नक्सल उन्मूलन अभियान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गांव में विकास दिखने लगा है। नक्सल प्रभाव के कारण वर्षों तक इस क्षेत्र में योजनाओं का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा कारणों से पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही थी। ग्रामीण, कुएं और नालों पर निर्भर थे, और गर्मी के दिनों में पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन और राज्य शासन के प्रयासों से ग्राम हेटारकसा के 63 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाए गए हैं। दो सोलर पंप आधारित जल टंकियों के माध्यम से अब गांव के हर घर में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। गांव के निवासी राजनाथ पोटाई बताते हैं कि पहले पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था, जिसमें अधिक समय व श्रम लगता था। वहीं अब घर में ही दिनभर पानी मिलने से दैनिक जीवन काफी आसान हो गया है। गांव की महिला सविता बेन ने कहती हैं कि पहले पानी की समस्या के कारण दिन का बड़ा हिस्सा इसी कार्य में चला जाता था, लेकिन अब नल-जल सुविधा से उन्हें राहत मिली है और वे अन्य कामों में समय दे पा रही हैं। स्वास्थ्य और आजीविका पर सकारात्मक असर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से गांव में जलजनित बीमारियों में कमी आई है। साथ ही ग्रामीण अब घरों के आसपास सब्जी-बाड़ी कर रहे हैं, जिससे टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी जैसी फसलें उगाकर वे पोषण के साथ-साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित इस दूरस्थ क्षेत्र में योजनाओं का सफल क्रियान्वयन प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज ग्राम हेटारकसा यह साबित कर रहा है कि जब सुरक्षा, विश्वास और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव संभव है।

रायपुर: फार्मेसी शिक्षा और शोध से स्वास्थ्य व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव, स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

रायपुर : फार्मेसी शिक्षा और शोध से बदलेगी स्वास्थ्य व्यवस्था: स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल फार्मा अन्वेषण 2026 में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल रायपुर  राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस के अवसर पर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में आयोजित फार्मा अन्वेषण 2026 कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यक्रम का आयोजन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी द्वारा फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम की थीम “Future Pharma Ecosystem: Academia, Industry, Research, Regulatory and Practice के बीच समन्वय” रही, जिसमें फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बेहतर तालमेल पर विशेष चर्चा की गई। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि फार्मेसी क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में इसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ-साथ फार्मेसी शिक्षा और रिसर्च को भी प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने युवाओं और शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि नवाचार (Innovation) और अनुसंधान के माध्यम से ही हम बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, जिससे नए अवसरों का सृजन हो सके। कार्यक्रम में कीनोट सेशन, इंडस्ट्री-एकेडमिक संवाद, पेटेंट एवं इनोवेशन शोकेस, ओरल एवं पोस्टर प्रेजेंटेशन जैसे विभिन्न सत्र आयोजित किए गए, जिनमें छात्रों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस आयोजन के माध्यम से फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता, कौशल विकास और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।

श्रमिक महासम्मेलन में निर्धारित मानकों का पालन, अनुबंधित दरों पर विभाग ने कराया कार्य

रायपुर छत्तीसगढ़ में आयोजित श्रमिक महासम्मेलन में विभाग  व्यय पूर्णतः टेंडर के अनुसार अनुबंधित दर पर तथा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के पश्चात किया गया है। इस कार्यक्रम में मनमाना व्यय व वित्तीय अनियमितता का आरोप निराधार है। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव ने बताया कि बिना निविदा प्रक्रिया के कुर्सी और नाश्ते पर मनमाने खर्च के आरोपों को श्रम विभाग ने निराधार और भ्रामक है।         छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव श्री गिरीश रामटेके ने बताया कि विभागीय जानकारी के अनुसार, 17 सितंबर 2024 को विश्वकर्मा जयंती और छत्तीसगढ़ श्रम दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में बड़े स्तर पर श्रमिक महासम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 5,000 से 8,000 लोग शामिल हुए थे।            श्रम विभाग ने बताया कि कार्यक्रम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ जैसे मंच, बैठक व्यवस्था, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य शिविर रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतर्गत पूर्व से अनुबंधित संस्था के माध्यम से स्वीकृत दरों पर कराई गईं। विभाग के अनुसार कार्यक्रम स्थल में अंतिम समय में बदलाव और समयाभाव के कारण निविदा प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं था। ऐसे में पूर्व अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से कार्य कराना प्रशासनिक दृष्टि से उचित निर्णय था। आयोजन के बाद सभी व्ययों का परीक्षण एवं सत्यापन कर का भुगतान अनुबंधित संस्था को नियमों के तहत किया गया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत तय मानक के अनुरूप नहीं होने पर बदली जाएंगी साड़ियां रायपुर महिला एवं बाल विकास विभाग  द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुआ है, लेकिन जहां भी गड़बड़ी मिली है, वहां सुधार किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर साड़ियां बदली जाएंगी।     आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दी गई साड़ियों की लंबाई और गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक्शन लिया है। विभाग के मुताबिक, केंद्र सरकार के प्रावधान के तहत हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को साल में दो साड़ी यूनिफॉर्म दी जाती है। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपए तय हैं। इसी आधार पर राज्य में करीब 1.94 लाख साड़ियों की आपूर्ति का आदेश छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी को दिया गया था। साड़ियों के रंग, डिजाइन और लंबाई का मापदंड राज्य स्तर पर तय किया गया था। इसके अनुसार साड़ी की लंबाई 5.50 मीटर और ब्लाउज पीस सहित कुल लंबाई 6.30 मीटर निर्धारित है।       महिला एवं बाल विकास विभाग को साड़ी की आपूर्ति से पहले छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी के  सैंपल की जांच तकनीकी एजेंसी राइट्स लिमिटेड, मुंबई से कराई गई थी, जिसमें गुणवत्ता सही पाई गई।                आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी वितरित की गई l हालांकि वितरण के बाद दुर्ग, धमतरी, रायगढ़ और कबीरधाम जिलों से कुछ शिकायतें सामने आईं। इनमें साड़ी छोटी होने, धागा निकलने और रंग छोड़ने की बात कही गई। विभाग ने तुरंत जांच समिति बनाकर इन मामलों की पड़ताल कराई। जांच में कुछ मामलों में लंबाई कम और बुनाई में खामियां सामने आईं।विभाग का कहना है कि कॉटन साड़ी होने के कारण पहली धुलाई में रंग छोड़ने की स्थिति कुछ जगहों पर दिखी, लेकिन बाद में रंग सामान्य रहा।          महिला एवं बाल विकास विभाग ने अब सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे साड़ियों की दोबारा जांच करें और जहां मापदंड से कमी मिले, उसकी जानकारी भेजें। साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को भी साफ निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी साड़ियों को बदलकर मानक के अनुसार नई साड़ियां उपलब्ध कराई जाएं।       विभाग ने यह भी बताया कि जारी कार्यादेश में ही एजेंसी को गुणवत्ता बनाए रखने और शिकायत मिलने पर सामग्री बदलने की शर्त लिखी गई थी।विभाग का कहना है कि किसी भी हितग्राही को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी मानक के अनुरूप साड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

एमसीबी : भीषण गर्मी में राहतरू बंद हैंडपंप चालू, गांवों में लौटी पानी की उम्मीद

एमसीबी : भीषण गर्मी में राहतरू बंद हैंडपंप चालू, गांवों में लौटी पानी की उम्मीद PHE की मुहिम से ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत, जल संकट में आई कमी एमसीबी जिले में भीषण गर्मी और बढ़ते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की पहल ग्रामीणों के लिए राहत लेकर आई है। विभाग द्वारा बंद पड़े हैंडपंपों की मरम्मत और संधारण कार्य तेज़ी से किया जा रहा है, जिससे गांवों में पेयजल की उपलब्धता फिर से सुनिश्चित हो रही है। गर्मी के इस कठिन दौर में पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए विभाग की टीम लगातार गांव-गांव पहुंचकर खराब हैंडपंपों को सुधार रही है। इसी क्रम में विकासखंड खड़गवां के ग्राम पंचायत सलका के स्कूल पारा में लंबे समय से खराब पड़े हैंडपंप को ठीक कर पुनः चालू किया गया। पानी मिलते ही खिले ग्रामीणों के चेहरे हैंडपंप के चालू होते ही पानी की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से लोगों के चेहरे पर खुशी लौट आई और दैनिक जीवन भी सुगम हुआ। संवेदनशील प्रशासन, त्वरित समाधान विभाग की त्वरित और सक्रिय कार्यप्रणाली यह दर्शाती है कि प्रशासन आमजन की मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर पूरी तरह सजग है। समय पर किए जा रहे ये प्रयास न केवल जल संकट को कम कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन को भी आसान बना रहे हैं।

राज्य के सिंचाई जलाशयों में 67% से अधिक जल भराव, पिछले दो सालों से बेहतर जल उपलब्धता

राज्य के सिंचाई जलाशयों में अभी 67 प्रतिशत से अधिक जल भराव पिछले दो सालों की तुलना में जल उपलब्धता की स्थिति काफी बेहतर रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य के 12 वृहद एवं 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में इस वर्ष जल भराव की स्थिति काफी बेहतर है। वर्तमान में राज्य के कुल 46 प्रमुख सिंचाई जलाशयों में औसत रूप से 67.43 प्रतिशत जल भराव है, जो कि वर्ष 2025 मेें इसी अवधि में औसत रूप से 45.23 प्रतिशत तथा वर्ष 2024 के 42 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। यह स्थिति राज्य में बेहतर वर्षा, सुनियोजित जल प्रबंधन तथा जलाशयों के प्रभावी संचालन का परिणाम है। राज्य के 12 वृहद सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान में 68.19 प्रतिशत जल भराव है, जबकि वर्ष 2025 में यह 45.84 प्रतिशत तथा वर्ष 2024 में 38.62 प्रतिशत था। प्रमुख वृहद जलाशयों में शामिल मनियारी जलाशय में 90.41 प्रतिशत, मुरूमसिल्ली में 86.85 प्रतिशत, खारंग में 84.99 प्रतिशत, दुधावा में 84.54 प्रतिशत, रविशंकर सागर में 76.72 प्रतिशत, सोंढूर में 70.65 प्रतिशत एवं तांदुला में 66.19 प्रतिशत में जल उपलब्ध है। वहीं मिनीमाता बांगो जलाशय में 63.86 प्रतिशत तथा केलो में अभी 51.83 प्रतिशत जल भराव है। कोडार जलाशय में अपेक्षाकृत कम 35.45 प्रतिशत जल उपलब्ध है।  इसी प्रकार राज्य की 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान में 63.38 प्रतिशत जल भराव है, जो कि वर्ष 2025 के 44.62 प्रतिशत एवं वर्ष 2024 के 45.38 प्रतिशत से अधिक है। मध्यम जलाशयों में छिरपानी जलाशय मेें 92.23 प्रतिशत, खपरी में 92.98 प्रतिशत, पिपरिया नाला में 89.69 प्रतिशत, गोंडली में 85.53 प्रतिशत, सुतियापाट में 79.82 प्रतिशत, सारोदा में 77.57 प्रतिशत एवं कोसारटेडा में 77.46 प्रतिशत जल भराव अपने उच्च स्तर पर हैं।  प्रदेश में उपलब्ध जल का उपयोग किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं से नियंत्रित एवं चरणबद्ध रूप से जल छोड़ा जा रहा है। रविशंकर सागर (गंगरेल) परियोजना से नहरों के माध्यम से धमतरी एवं रायपुर क्षेत्रों में निस्तारी एवं सिंचाई जल उपलब्ध कराया जा रहा है। दुधावा जलाशय से मुख्य नहरों के जरिए पानी दिया जा रहा है। सोंढूर परियोजना से नहर प्रणाली के माध्यम से जल छोड़ा जा रहा है। कोडार जलाशय से लगभग 6.84 क्यूमेक्स (घन मीटर प्रति सेकण्ड) जल नहरों के माध्यम से छोड़ा जा रहा है। इसके अतिरिक्त परालकोट परियोजना से दाएं एवं बाएं तट नहरों के जरिए जल वितरण किया जा रहा है। मध्यम परियोजनाओं में भी खरखरा, गोंडली, पिपरिया, सारोदा, जुमका, केदार नाला एवं अन्य जलाशयों से आवश्यकता अनुसार नहरों एवं स्लुइस गेट के माध्यम से जल छोड़ा जा रहा है, जिससे रबी फसलों की अंतिम सिंचाई एवं ग्रीष्मकालीन फसलों एवं निस्तारी के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जा सके। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जल का सदुपयोग तथा सभी सिंचित क्षेत्रों को आवश्यकतानुसार पानी मिल सके। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए जल संसाधनों का वैज्ञानिक एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जलाशयों में बेहतर जल भराव समन्वित प्रयासों का परिणाम है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश के किसानों को समय पर पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध हो, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हो और किसानों की आय में सुधार हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जलाशयों के जल स्तर की सतत निगरानी करते हुए जल का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

रायपुर : सोनपुरी डायवर्सन के कार्यों के लिए 4.04 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के विकासखण्ड-खैरागढ़ की सोनपुरी डायवर्सन के शीर्ष कार्य एवं नहरों के रिमाडलिंग एवं सी.सी. लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 04 लाख 17 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत रूपांकित सिंचाई क्षमता 115 हेक्टेयर क्षेत्र के विरूद्ध 59 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति तथा बचत जल से 50 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई सहित कुल 165 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। 

काम में लापरवाही पड़ी भारी: फाइलों में देरी और गैरहाजिरी पर तीन कर्मचारियों को नोटिस

बिलासपुर. नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने बीते दिन शाम 4:30 बजे विकास भवन स्थित निगम मुख्यालय का औचक निरीक्षण किया। अचानक पहुंचे कमिश्नर ने सभी शाखाओं में जाकर कर्मचारियों की मौजूदगी, फाइलों की स्थिति और लंबित मामलों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान योजना शाखा के दो कर्मचारी ड्यूटी के समय सीट से गायब मिले। इस पर नाराजगी जताते हुए कमिश्नर ने दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि काम में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं होगी। पीएम आवास शाखा के क्लर्क को नोटिस कमिश्नर ने पीएम आवास शाखा में आवेदनों की स्थिति देखी, जहां कई प्रकरण लंबे समय से लंबित मिले। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और जिम्मेदार क्लर्क को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को साफ कहा कि पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ देने में देरी नहीं होनी चाहिए। भवन शाखा और अन्य विभागों की भी जांच भवन शाखा में लंबित भवन अनुज्ञा प्रकरणों की जानकारी लेते हुए समय सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए गए। वहीं, पहले दिए गए निर्देश के बावजूद विभागों के बाहर पट्टिका नहीं लगाए जाने पर स्टोर प्रभारी को भी नोटिस जारी किया गया। सफाई और व्यवस्था सुधारने के निर्देश निरीक्षण के दौरान कार्यालय परिसर की साफ-सफाई और फाइलों के रख-रखाव पर भी जोर दिया गया। कमिश्नर ने कहा कि दफ्तर साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहेगा तो काम की गति भी बढ़ेगी और लोगों को बेहतर अनुभव मिलेगा।