samacharsecretary.com

गृह निर्माण मंडल का सख्त एक्शन, निजी बिल्डर से छुड़ाई करोड़ों की सरकारी जमीन

रायपुर. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपनी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। मंडल की टीम ने निजी बिल्डर द्वारा अनधिकृत निर्मित सड़क को हटाकर भूमि को अपने कब्जे में लिया। अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि भविष्य की आवासीय परियोजनाओं के लिए सुरक्षित रखी गई है। जानकारी के अनुसार, दीनदयाल आवास योजना के तहत कलेक्टर रायपुर के 3 फरवरी 2006 के आदेश के माध्यम से ग्राम सेजबहार और ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (करीब 53.19 एकड़) भूमि गृह निर्माण मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए आबंटित की गई थी। इसमें ग्राम सेजबहार के खसरा नंबर 162/1 के हिस्से तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा नंबर 341/1 और 341/3 की भूमि शामिल है। इस परियोजना के लिए 17 मई 2006 को विकास अनुज्ञा भी स्वीकृत की गई थी। 1435 एलआईजी आवासों का था प्रस्ताव स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण किया जाना था। मंडल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण और अभिलेखों की जांच में पाया गया कि इनमें से 1327 आवास निर्धारित ले-आउट के अनुरूप बनाए गए थे, जबकि 39 भवन स्वीकृत अभिन्यास से अलग निर्मित किए गए। इस प्रकार कुल 1366 आवासों का निर्माण हुआ। भूमि विवाद के कारण अधूरी रह गई परियोजना मंडल के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान भूमि विवाद उत्पन्न होने के कारण भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। सातवें चरण के तहत 7 अगस्त 2006 को किए गए अनुबंध क्रमांक-41 में 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत 193 एलआईजी भवन बनाए गए। हालांकि विवादित क्षेत्र में प्रस्तावित 79 आवास न तो निर्मित हो सके और न ही उनका विक्रय किया गया। सीमांकन में उजागर हुआ अतिक्रमण हाल ही में गृह निर्माण मंडल ने अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया। इस प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि एक निजी बिल्डर ने मंडल की भूमि के एक हिस्से पर बिना अनुमति कब्जा कर सड़क का निर्माण शुरू कर दिया था। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया। टीम ने हटाई अवैध सड़क कार्यपालन अभियंता नितेश कश्यप के नेतृत्व में मंडल की टीम मौके पर पहुंची और अवैध रूप से बनाई गई सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। कार्रवाई में संपदा अधिकारी अमृत लाल बरमन, सहायक अभियंता हेमंत निषाद, उप अभियंता निकिता मिश्रा, अनुपम राठौर, पेमेन्द्र ध्रुव, अमय विक्रम और कमलेश दास सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। नई आवासीय परियोजना की तैयारी मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि उनकी महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है और भविष्य में यहां नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंडल अपनी भूमि और परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के खिलाफ आगे भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

रात के अंधेरे में चल रहा था रेत का कारोबार, विधायक ने मौके पर पहुंचकर खोली पोल

बीजापुर. मिनगाछल नदी में चल रहे रेत के अवैध कारोबार की जानकारी लगते ही बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी मौके पर पहुंचे. रेत उत्खनन में लगी मशीनों को बंद कराकर विभागीय अधिकारी व नैमेड थाना प्रभारी को मौके पर बुलाकर जब्ती करवाई, साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया. विधायक विक्रम मंडावी की कार्रवाई के बाद अब लोग सवाल कर रहे हैं कि कैसे प्रशासन की नाक के नीचे रात के अंधेरे में देर रात तक रेत का अवैध कारोबार चल रहा था? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों के संलिप्तता के बिना यह कार्य संभव है? क्या सरकार के किसी नेता के संरक्षण में यह बड़ा खेल चल रहा है? क्या मामले की प्रशासन जांच कर संलिप्त अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई करेगा? या यह पहले की ही तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा. कार्रवाई के दौरान नदी क्षेत्र से टिप्पर, ट्रैक्टर, जेसीबी और अन्य भारी मशीनें जब्त की गईं। जबकि कुछ वाहन चालक और खनन से जुड़े लोग मौके से भागने में सफल रहे। विधायक ने अधिकारियों को अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अवैध खनन पर सख्त रुख उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध रेत खनन को लेकर प्रशासन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जब्त वाहनों और मशीनों पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

कुपोषण के खिलाफ बड़ा अभियान, मुनगा को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी, मंत्री राजवाड़े का संदेश

‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’ बनेगा जनआंदोलन महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने जनप्रतिनिधियों से किया व्यापक पौधरोपण का आह्वान रायपुर प्रदेश में कुपोषण की समस्या के समाधान और जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने ‘‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’’ के रोपण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों से वर्षा ऋतु के दौरान बड़े पैमाने पर मुनगा (सहजन) का पौधरोपण कर ‘‘घर-घर मुनगा, हर घर सुपोषण’’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस संबंध में जारी अपने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश को सुपोषित बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों एवं हितग्राहियों के घरों में ‘‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’’ लगाने की परिकल्पना की गई है। उन्होंने बताया कि मुनगा एक अत्यंत पौष्टिक एवं बहुउपयोगी पौधा है, जिसके पत्ते, फलियां और अन्य भाग पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन ‘ए’ और विटामिन ‘सी’ सहित अनेक आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने के कारण इसे ‘‘मदर ट्री’’ के नाम से भी जाना जाता है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुनगा का नियमित सेवन बच्चों, महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में सहायक है। यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ-साथ एनीमिया जैसी समस्याओं की रोकथाम में भी मददगार सिद्ध होता है। श्रीमती राजवाड़े ने सभी जनप्रतिनिधियों से वर्षा ऋतु में जल स्रोतों के आसपास, ग्राम पंचायत परिसरों, सार्वजनिक स्थलों तथा हितग्राहियों के घरों में मुनगा पौधों का रोपण सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।  उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से संचालित यह अभियान प्रदेश में सुपोषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा तथा लोगों में पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक बनेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर ‘‘सुपोषित छत्तीसगढ़’’ के निर्माण में योगदान देने की अपील की है।

बयान बदलने के लिए पैसों का प्रलोभन देने का आरोप, मुकेश चंद्राकर केस में नया मोड़

बीजापुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के चर्चित पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड मामले में गवाहों को प्रभावित करने और उनके बयान बदलवाने के प्रयास का मामला सामने आया है। इस संबंध में पत्रकार चेतन कापेवार एवं पवन दुर्गम ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मामले के प्रमुख गवाहों को धनराशि एवं अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर उनके बयान बदलवाने का प्रयास किया जा रहा है। आवेदन के अनुसार बीजापुर निवासी सुनील मर्सकोले ने पत्रकार चेतन कोपवार से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क कर मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर के पक्ष में बयान देने के एवज में एक लाख रुपये का प्रलोभन दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बातचीत के दौरान पत्रकार पवन दुर्गम का नाम भी लिया गया और यह बताया गया कि उनसे भी इस संबंध में चर्चा की गई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पवन दुर्गम का बयान पहले ही देवाड़ा न्यायालय में दर्ज हो चुका है, जो मुकेश चंद्राकर के पक्ष और आरोपियों के खिलाफ है। पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि गवाहों को अलग-अलग धनराशि देकर बयान बदलवाने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और निष्पक्ष जांच में बाधा उत्पन्न करने का गंभीर प्रयास है। उन्होंने कहा कि गवाहों पर दबाव, धमकी या प्रलोभन देना कानूनन अपराध है। इससे न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता प्रभावित होती है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी : एसपी शिकायतकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने और प्रकरण के प्रमुख गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि वे बिना किसी भय, दबाव या प्रलोभन के न्यायालय एवं जांच एजेंसियों के समक्ष अपना पक्ष स्वतंत्र रूप से रख सकें। इस मामले में एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। जानिए पूरा मामला एक जनवरी 2025 को मुकेश चंद्राकर अपने घर से निकले थे और फिर लापता हो गए। परिवार ने उनके गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी। 3 जनवरी को उनकी लाश एक बंद पड़े सेप्टिक टैंक से मिली थी। पुलिस ने हत्याकांड के मास्टरमाइंड सड़क ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। इस हत्याकांड में सुरेश के साथ रितेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके का नाम भी शामिल है। इन चारों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था। मुकेश चंद्राकर की हत्या की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर सहित 4 लोगों को आरोपी बनाया था। साथ ही 70 लोगों को इस मामले में गवाह बनाया गया। एसआईटी की जांच में सामने आया था कि आरोपी सुरेश चंद्राकर उसके सड़क निर्माण के काम में भ्रष्टाचार उजागर करने वाली खबरों से काफी नाराज था। मुकेश ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की खबरें दिखाई थी। इसके बाद उसने हत्या की पूरी प्लानिंग की। उसके घटना से कुछ दिन पहले ही अपने बैंक खाते से बड़ी रकम भी निकाली थी। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था। 5 जनवरी को आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। उसका भाई और सुपरवाइजर भी गिरफ्तार हुआ था।

प्रशासनिक कसावट के लिए बड़ा फेरबदल, राजस्व निरीक्षकों का हुआ ट्रांसफर

जांजगीर-चांपा. जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने भू-अभिलेख शाखा अंतर्गत कार्यरत राजस्व निरीक्षकों की नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश प्रशासनिक एवं कार्यालयीन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है। जारी आदेश के तहत अशोक कुमार साहू को राजस्व निरीक्षक मंडल जांजगीर से अमोरा, मिमांशु भास्कर को सुकली से मुलमुला, ऋचा राठौर को बिरगहनी से नजूल चांपा, चंदराम साहू को नवागढ़ से पहरिया तथा किशोर सिंह सिदार को शिवरीनारायण से सारागांव पदस्थ किया गया है। वहीं जितेंद्र सिंह को कोटगढ़ एवं अकलतरा से बलौदा, जागेश्वर सिहानी को बलौदा से अकलतरा, रामायण प्रसाद सूर्यवंशी को पहरिया से बम्हनीडीह, जयनारायण भूपेंद्र को मुलमुला से शिवरीनारायण तथा आदित्य झा को राहौद से पामगढ़ भेजा गया है। इसके अलावा संजय सोनी को खरौद से राहौद, शीला देवांगन को नजूल चांपा से सुकली, भागवत सिंह गौड़ को सारागांव से जांजगीर, शेख मोहम्मद मुजीब को बम्हनीडीह से नवागढ़ तथा साहेब लाल टंडन को राजस्व निरीक्षक वर्कलोड से नजूल शाखा जिला कार्यालय में पदस्थ किया गया है। कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। प्रशासन का मानना है कि इस फेरबदल से राजस्व कार्यों के संचालन में तेजी आएगी और आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

कामकाज से नाराज दिखे अरुण साव, बिलासपुर में PWD अफसरों की लगाई क्लास

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने बिलासपुर में बहतराई स्थित स्वर्गीय बीआर यादव राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र का सरप्राइज इंस्पेक्शन किया। यहां हॉकी स्टेडियम की अधूरी गैलरी, फंड मिलने के बाद भी मैपलवुड लगाने में देरी और मरम्मत कार्यों में लापरवाही देखी तो अधिकारियों पर नाराज हुए। उन्होंने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर बीबीएस गौतम से जानकारी मांगी, जब वे तुरंत जवाब नहीं दे पाए साव ने कहा वेरी गूड, ढूंढते रहो। बिलासपुर में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव जमकर भड़क गए। बहतराई स्टेडियम के अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर उन्होंने ईई, एसडीओ सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कलेक्टर संजय अग्रवाल की मौजूदगी में निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने 2017 से लंबित चल रहे कार्यों की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान सरल स्वभाव के उपमुख्यमंत्री का ऐसा रूप पहली बार सामने आया। अधिकारियों से उन्होंने कहा कि अगली बार आया और काम नहीं हुआ तो आप दिक्कत में पड़ जाएंगे। काम कंप्लीट करिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा, ‘काम करना है या नहीं? पहले जांच क्यों नहीं हुई? 2017 से काम अधूरा पड़ा है। यह कोई काम करने का तरीका है क्या? मजाक कर रहे हैं या नौकरी?’ जल्द काम पूरा करने के निर्देश इस दौरान अरुण साव ने अधिकारियों से कहा, ‘ईई साहब, आपका सुपरविजन कैसा है? इतने साल बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। अगर समय पर निगरानी होती तो यह स्थिति नहीं बनती।’ करीब 9 साल पहले बने इस खेल प्रशिक्षण केंद्र में अब भी कई काम अधूरे हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों पर डिप्टी सीएम ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को जल्द सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए। डिप्टी सीएम बोले- दिक्कत में पड़ेंगे आप लोग डिप्टी सीएम अरुण साव ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता (ईई) बीबीएस गौतम को सभी पेंडिंग काम जल्द पूरा करने के लिए संयुक्त बैठक बुलाकर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 15 दिनों के अंदर सभी निर्माण और मरम्मत कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सौंपी जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि हर काम की खुद जांच कीजिए और 15 दिन में रिपोर्ट दीजिए। मैं दोबारा निरीक्षण के लिए आऊंगा। अगर काम में लापरवाही मिली तो आप लोग दिक्कत में पड़ेंगे। हॉस्टल की स्थिति पर भी नाराजगी इसके बाद अरुण साव ने हॉस्टल की स्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिला खनिज न्यास (DMF) से पैसा मिलने के बावजूद जरूरी मरम्मत और रखरखाव के काम समय पर नहीं हो रहे हैं, इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। साल 2017 से शुरू हुआ काम अधूरा उन्होंने कहा कि इंडोर स्टेडियम में मैपलवुड फ्लोरिंग का काम साल 2017 में शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। ये गंभीर लापरवाही है। अरुण साव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण और मरम्मत कार्य तय समय में और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। साथ ही कामों की नियमित निगरानी भी की जाए। अरुण साव ने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता (ईई) बीबीएस गौतम को काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। तीरंदाजी मैदान जुलाई तक पूरा करने के निर्देश डिप्टी सीएम ने एसईसीएल की ओर से करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे तीरंदाजी मैदान के निर्माण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने खेल विभाग के सहायक संचालक ए. एक्का को जुलाई तक मैदान का निर्माण पूरा कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आउटडोर स्टेडियम में लगी हाईमास्ट लाइट को जल्द ठीक कराने के लिए कहा। पीडब्ल्यूडी और खेल विभाग के अधिकारियों को पूरे स्टेडियम का संयुक्त निरीक्षण करने और जरूरी कामों का प्रस्ताव तैयार कर भेजने के भी निर्देश दिए। साव ने हॉकी मैदान में बन रहे पैवेलियन में अधिकारियों के लिए शौचालय बनाने और दर्शकों के लिए शौचालयों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की अधिकारियों को फील्ड में जाकर गुणवत्ता और निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्णता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश रायपुर.   लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में विभाग के प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन कार्यों की समीक्षा की। विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े, कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।  लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्माणाधीन सड़कों, पुलों और भवनों के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा फील्ड में जाकर कार्य की गुणवत्ता व समय-सीमा में पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तथा निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने को कहा।  विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े ने सचिव श्री बंसल को कोरिया जिले की बहुप्रतीक्षित सड़कों और पुलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनके निर्माण से जिलेवासियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कोरिया जिले और वहां के नागरिकों के लिए प्रस्तावित महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों से लोक निर्माण विभाग के सचिव को अवगत कराने के साथ ही विकासखंड मुख्यालय सोनहत में सर्किट हाउस के निर्माण का भी आग्रह किया। श्री बंसल ने विधायक श्री भईया लाल राजवाड़े और कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव द्वारा प्रस्तुत सुझावों व प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा प्रक्रिया का विधिवत पालन करते हुए एकीकृत प्राक्कलन शासन को भेजने को कहा, ताकि निविदा प्रक्रिया समय पर प्रारंभ की जा सके।

जशपुर में किसानों को राहत, खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता; प्रशासन की सख्ती से कालाबाजारी पर लगाम

जशपुर में किसानों को खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, प्रशासन की कड़ी निगरानी से कालाबाजारी पर रोक 44 सहकारी समितियों में 9,285 मीट्रिक टन उर्वरक और 6,836 क्विंटल बीज का भंडारण 10 हजार से अधिक किसानों को 37.79 करोड़ रुपये का कृषि ऋण वितरित रायपुर खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जशपुर जिले में खाद, बीज एवं कृषि ऋण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कृषि एवं सहकारिता विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में कृषि आदानों का पर्याप्त भंडारण किया गया है। साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और उर्वरकों के अवैध विक्रय पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। उप संचालक कृषि श्री एम.आर. भगत ने बताया कि किसानों को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद और जैविक विकल्पों को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। विभागीय अमला गांव-गांव पहुंचकर किसानों को वैज्ञानिक खेती और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी जानकारी भी दे रहा है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में सहकारी समितियों की संख्या 24 से बढ़ाकर 44 कर दी गई है। इससे किसानों को खाद एवं बीज प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है और समय तथा परिवहन व्यय दोनों में कमी आई है। वर्तमान में जिले की 44 सहकारी समितियों में 9,285 मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है। इनमें से 3,681 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार 6,836 क्विंटल धान बीज का भंडारण किया गया है, जिसमें से 1,872 क्विंटल बीज किसानों तक पहुंचाया जा चुका है। आगामी मांग को देखते हुए खाद एवं बीज का भंडारण लगातार बढ़ाया जा रहा है। कृषि ऋण वितरण के क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 10,187 किसानों को कुल 37 करोड़ 79 लाख 12 हजार रुपये का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसमें 31 करोड़ 33 लाख 08 हजार रुपये नगद तथा 6 करोड़ 46 लाख 04 हजार रुपये वस्तु ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं। इस सहायता से किसानों को समय पर कृषि निवेश करने और खेती की लागत वहन करने में मदद मिल रही है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को खाद, बीज एवं कृषि ऋण की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सभी सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लगातार निरीक्षण कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने, हरी खाद एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है, ताकि आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके।

परीक्षार्थियों को नहीं होगी कोई परेशानी, NEET UG री-एग्जाम से पहले कलेक्टर ने परखी व्यवस्थाएं

रायपुर. 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (यूजी) 2026 पुनः परीक्षा के सुचारु एवं व्यवस्थित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने जिले के 11 परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला सेरीखेड़ी, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उपरवारा, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल फॉरेस्ट कॉलोनी (अभनपुर रोड, माना बस्ती), शासकीय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक शाला माना कैंप, मिंटू शर्मा स्मृति हायर सेकेंडरी स्कूल डुमरतराई, माधवराव सप्रे उच्चतर माध्यमिक शाला बुढ़ापारा, जे.आर. दानी शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कालीबाड़ी, संत कंवरराम शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला कटोरा तालाब, शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ कॉलेज बैरन बाजार तथा प्रो. जे.एन. पांडे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नलघर चौक का निरीक्षण किया। बारिश को देखते हुए विशेष व्यवस्था के निर्देश कलेक्टर डॉ. सिंह ने संभावित बारिश को देखते हुए निर्देश दिए कि परीक्षार्थियों की फ्रिस्किंग शेड अथवा छायादार स्थान पर की जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों में पेयजल, शौचालय, साफ-सफाई तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर प्रतिबंध के निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहे तथा केंद्र तक पहुंचने वाले मार्गों को सुगम और व्यवस्थित रखा जाए, जिससे परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। रायपुर में 25 परीक्षा केंद्र बनाए गए री-नीट परीक्षा को लेकर रायपुर जिले में कुल 25 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। निरीक्षण के दौरान लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत करते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा केंद्र तक पहुंचने वाले मार्गों को सुगम और व्यवस्थित रखा जाए, जिससे परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। निरीक्षण के दौरान रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता सिन्हा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन, डीसीपी मयंक गुर्जर, डीसीपी उमेश कुमार गुप्ता, डीसीपी संदीप कुमार पटेल, एसडीएम नंदकुमार चौबे, एसडीएम अभनपुर रवि सिंह, एडीसीपी राहुल देव शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) प्रशांत शुक्ला, डिप्टी कलेक्टर उपेन्द्र किंडों सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

डिजिटल लॉकर में सुरक्षित होगा भविष्य, ‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी पढ़ाई; उच्च शिक्षा को केंद्र की बड़ी सौगात

विशेष आलेख ​डिजिटल लॉकर में भविष्य, 'क्रेडिट बैंक' में जमा होगी पढ़ाई ​छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में केंद्र की बड़ी सौगात                रायपुर       ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छत्तीसगढ़ को मिली सबसे बड़ी सौगातों में से एक—'एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से सत्र 2023-24 से अनिवार्य रूप से लागू हुई यह योजना वर्ष 2026 में पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है। अब राज्य का हर छात्र अपनी जेब में डिजिटल यूनिवर्सिटी लेकर घूम रहा है। ​क्या है यह 'क्रेडिट बैंक' और कैसे बदलेगी जिंदगी?     ​कल्पना कीजिए एक ऐसे बैंक की, जहाँ पैसा नहीं बल्कि आपकी पढ़ाई और कॉलेज के 'क्रेडिट' (अंक) जमा होते हैं। यदि किसी वजह से आपकी पढ़ाई बीच में छूट जाए, तो यह बैंक आपकी मेहनत को बेकार नहीं जाने देता। ​      मान लीजिए बस्तर के किसी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र को पारिवारिक कारणों से सेकंड ईयर के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पहले की व्यवस्था में उसकी दो साल की पढ़ाई 'जीरो' मान ली जाती थी। अब पहले दो वर्षों में छात्र ने जो भी अंक या 'क्रेडिट' कमाए हैं, वे उसकी ABC ID के जरिए डिजिटल बैंक में सुरक्षित रहेंगे। दो या तीन साल बाद जब वह दोबारा पढ़ना चाहेगा, तो वह रायपुर, बिलासपुर या देश के किसी भी अन्य विश्वविद्यालय में सीधे 'थर्ड ईयर' में प्रवेश ले सकेगा। इसे ही "मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट" कहा गया है। ​छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति का 'स्कोरकार्ड'     ​यह एकीकृत डिजिटल सिस्टम न केवल छात्रों के दस्तावेजों को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें देशव्यापी स्तर पर अपनी पढ़ाई को सुगम बनाने की आजादी भी दे रहा है। वर्तमान में यह योजना छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है, जिसके दायरे में राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं आ रहे हैं। ​     इस महा-अभियान में राज्य के अग्रणी विश्वविद्यालय जैसे पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालय पूरी सक्रियता के साथ भागीदार बन चुके हैं। ​शत-प्रतिशत केंद्रीय सहयोग        तकनीक की यह इतनी बड़ी अवसंरचना (Infrastructure) छत्तीसगढ़ को पूरी तरह निःशुल्क मिली है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और शिक्षा मंत्रालय द्वारा शत-प्रतिशत तकनीकी व वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसके चलते राज्य सरकार पर आर्थिक भार पूरी तरह से शून्य है। ​डिजीलॉकर बना 'सुरक्षा कवच': गुम होने का डर खत्म     ​अक्सर दुर्घटना या लापरवाही के कारण छात्रों की मूल अंकसूची (Marksheet) या डिग्रियां नष्ट हो जाती थीं, जिसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया गया है। ​विश्वविद्यालयों को सीधे 'नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी' (NAD) पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे छात्र की डिग्री और सर्टिफिकेट सीधे उसके डिजीलॉकर में अपलोड हो रहे हैं।  ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से उतने ही मान्य हैं जितनी मूल हार्ड कॉपी। यानी नौकरी के इंटरव्यू में अब भारी-भरकम फाइल ले जाने की जरूरत नहीं, सिर्फ मोबाइल ही काफी है। ​'ग्लोबल' हो रहा है छत्तीसगढ़ का युवा     ​इस योजना ने सुदूर वनांचल जैसे सुकमा, बीजापुर या सरगुजा के कॉलेजों को भी नेशनल पोर्टल से सीधे जोड़कर अमीर और गरीब छात्र के बीच का डिजिटल फासला पूरी तरह खत्म कर दिया है।     ​'ABC ID' के माध्यम से छत्तीसगढ़ का युवा अब सिर्फ अपने राज्य तक सीमित नहीं है। उसके क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा ने उसे पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ दिया है। यह सिर्फ कागजों का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के 6.5 लाख युवाओं के सपनों को मिला एक नया 'डिजिटल पंख' है।  विष्णु प्रसाद वर्मा  सहायक संचालक