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स्टील घोटाले पर बड़ा एक्शन: CBI ने महारत्न कंपनी SAIL पर कसा शिकंजा

भिलाई. देश की प्रतिष्ठित महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सेल में सामने आई कथित स्टील आपूर्ति अनियमितता अब बड़े घोटाले का रूप ले चुकी है। लोकपाल के स्पष्ट निर्देश के बाद सीबीआइ ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे अब कंपनी के शीर्ष प्रबंधन और पूर्व निदेशकों तक जांच की आंच पहुंच गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में सेल को लगभग 300 से 350 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बीएसपी में तैयार टीएमटी स्टील की बड़ी मात्रा भी कथित तौर पर फर्जी या गैर-पात्र प्रोजेक्ट कंपनियों को सप्लाई की गई। इससे संकेत मिलता है कि अनियमितता केवल एक इकाई तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क में फैली हुई थी। 1.5 लाख टन स्टील से खुला घोटाले का राज जांच की शुरुआत तब हुई जब यह सामने आया कि वेंकटेश इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को प्रोजेक्ट वर्क्स स्कीम के तहत 1.5 लाख टन से अधिक स्टील की आपूर्ति की गई, जबकि कंपनी इस योजना के लिए पात्र ही नहीं थी। लोकपाल ने 10 जनवरी 2024 को सीबीआइ जांच के आदेश दिए, जिसके बाद एजेंसी ने 10 अक्टूबर 2024 को एफआइआर दर्ज कर मामले की औपचारिक जांच शुरू की। 29 वरिष्ठ अधिकारी निलंबित, फिर बहाली पर उठे सवाल लोकपाल के आदेश के बाद सेल प्रबंधन ने 29 वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया था, जिनमें निदेशक स्तर के दो अधिकारी भी शामिल थे। हालांकि, 28 जून 2024 को जांच में देरी का हवाला देकर सभी अधिकारियों की बहाली कर दी गई। इस निर्णय ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 35 निजी कंपनियां जांच के घेरे में जांच में यह भी सामने आया है कि वेंकटेश इंफ्रा के अलावा 35 से अधिक निजी कंपनियों को नियमों को दरकिनार कर स्टील सप्लाई की गई। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और गैर-प्रोजेक्ट सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें इस स्कीम का लाभ मिलना ही नहीं चाहिए था। इन कंपनियों में कई नाम शामिल हैं, जैसे ब्रिक टू वाल इंफ्राटेक, ओएफबी टेक, लैंडसिएर्ज स्टेट, नोबेल टेक इंडस्ट्रीज, आर्टिस्टी इंफ्राकॉन, स्ट्राइक इंफ्राकान, जारैली प्रोजेक्ट्स, श्री सिद्धबाली इस्पात, एसएमडब्ल्यू इस्पात, रुद्रनाथ इंफ्रा, रेनबो वाणिज्य, सिल्वर वाटर मेटल एंड मिनरल्स, पीवीवी इंफ्रा लिमिटेड सहित अन्य। व्हिसलब्लोअर को ही चुकानी पड़ी कीमत इस पूरे मामले को उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर राजीव भाटिया बताए जा रहे हैं। उन्होंने पहले भी स्टील आपूर्ति में गड़बड़ी को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत की थी। लेकिन कार्रवाई भ्रष्टाचार पर होने के बजाय, उन्हें 11 फरवरी 2025 को सीसीएस नियम 56(जे) के तहत समयपूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, भाटिया को एक ईमानदार और निर्भीक अधिकारी माना जाता था। उनकी बर्खास्तगी को लेकर उच्च स्तर तक असंतोष की चर्चाएं हैं। सीएमडी पर भी उठे सवाल, इस्तीफे की अटकलें जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सेल के वर्तमान सीएमडी अमरेंदु प्रकाश भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कई कंपनियों को स्टील आपूर्ति की अनुमति दी गई। प्रशासनिक हलकों में उनके इस्तीफे को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सरकारी धन से कानूनी खर्च पर विवाद एक और बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हुआ है कि सीबीआइ जांच का सामना कर रहे अधिकारियों की कानूनी लड़ाई के लिए सेल द्वारा करीब 70 लाख रुपये अधिवक्ताओं की फीस में खर्च किए गए। अब मांग उठ रही है कि यह राशि संबंधित अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूली जाए। सबसे बड़ा सवाल, क्या होगी कार्रवाई? पूरे मामले ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या इस कथित स्टील घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर मामला अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

फर्जीवाड़े का जाल टूटा: रायपुर में करोड़ों के हाउसिंग लोन स्कैम का पर्दाफाश

रायपुर. राजधानी रायपुर में अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष थावर दास माधवानी और तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत साहू की 26 वर्षों बाद पिछले दिनों हुई गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले की गहरी साजिश का राजफाश हुआ है। 186 लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए मुख्य आरोपित थावर दास ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को मोहरा बनाकर 186 लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये के हिसाब से कुल 1.86 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत कराया। अन्य शहरों में निवासरत पीड़ितों के बयान दर्ज किए जब इस मामले की शिकायत और जांच शुरू हुई, तब यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। ईओडब्ल्यू की टीम ने दोनों आरोपितों को 25 मार्च तक रिमांड पर लेकर पूछताछ की और रायपुर, भाटापारा सहित अन्य शहरों में निवासरत पीड़ितों के बयान दर्ज किए। वास्तविकता में समिति के पास एक इंच भी जमीन नहीं थी थावर दास ने पंडरी में अपनी कपड़ा दुकान के माध्यम से रायपुरा, बोरियाकला, राखी और पंडरी-कांपा जैसे क्षेत्रों में 80 एकड़ जमीन होने का दावा किया, लेकिन ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया कि वास्तविकता में समिति के पास एक इंच भी जमीन नहीं थी। कागजों पर मकानों का निर्माण कार्य भी दिखाया जाता रहा हैरानी की बात यह है कि आवास संघ के तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों पर मकानों का निर्माण कार्य भी दिखाया जाता रहा। दिवंगत क्षेत्रीय अधिकारी एई ग्रेबियल और पर्यवेक्षक बसंत साहू ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के आवास निर्माण पूर्ण होने के प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए। वर्षों तक पता नहीं चला कि उनके नाम पर लाखों का कर्ज लिया गया जब ईओडब्ल्यू की टीम पीड़ितों के घर पहुंची, तो कई लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। लक्ष्मीचंद चिमनानी, दिलीप बलानी, त्रिजुगी नारायण, मोहनलाल अग्रवाल, नरेंद्र कश्यप, अशोक नाग और लक्ष्मीचंद ललवानी जैसे पीड़ितों ने बताया कि उन्हें वर्षों तक इस बात का पता नहीं चला कि उनके नाम पर लाखों का कर्ज लिया गया है। थावर दास पर उनका इतना भरोसा था कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उनके नाम का उपयोग कर इतना बड़ा घोटाला कर देगा। जब अधिकारियों ने लोन के कागजात दिखाए, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे बिना मकान के ही कर्जदार बना दिए गए हैं। फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया गया कई पीड़ितों ने कहा कि उनसे न तो कभी हस्ताक्षर लिए गए और न ही उन्हें समिति का सदस्य बनाने की जानकारी दी गई। यह पूरी तरह से एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र था, जिसमें फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया गया। मुख्य आरोपित थावर दास ने अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को इस ठगी का औजार बनाया। 186 जरूरतमंदों के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए 1995 से 1998 के बीच, तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार की शहरी आवास योजना के तहत 186 जरूरतमंदों के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। इन फर्जी सदस्यों के नाम पर मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया। विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं ईओडब्ल्यू के जांच अधिकारियों ने बताया कि इस घोटाले की जड़ें आवास संघ के भीतर तक फैली थीं। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं। उपयोगिता प्रमाण पत्र से लेकर निर्माण के विभिन्न चरणों की रिपोर्ट तक, सब कुछ दफ्तर में बैठकर तैयार किया गया। ईओडब्ल्यू अब इस मामले में अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

मंदिर में अफरा-तफरी: खल्लारी रोप-वे केबल टूटने से 8 लोग जख्मी

महासमुंद. खल्लारी स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में रविवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में संचालित रोप-वे का केबल अचानक टूट गया। घटना के समय रोप-वे में श्रद्धालु सवार थे, जिससे अफरा-तफरी मच गई। केबल टूटते ही ट्रॉली झटके के साथ नीचे की ओर आई, जिससे उसमें बैठे लोग घायल हो गए। हादसे में कुल 8 श्रद्धालु घायल हादसे में कुल 8 श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। मौके पर मौजूद लोगों और मंदिर प्रबंधन व पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल महासमुंद भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। एहतियात के तौर पर रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी को हादसे का कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाया स्थानीय लोगों ने रोप-वे की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञात हो कि नवरात्र जारी है और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ है। अप्रैल 2024 से शुरू है रोप-वे सेवा महासमुंद जिले के प्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में रोप-वे की सुविधा अप्रैल 2024 चैत्र नवरात्रि से पूरी तरह से संचालित है, जिससे श्रद्धालुओं को 842-981 सीढ़ियां चढ़ने की थकान से मुक्ति मिल गई है। रोप-वे का भूमिपूजन 2021 में किया गया था। इसका निर्माण कोलकाता की कंपनी "रोपवे एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया। रोप-वे का संचालन मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से नियमित रूप से भक्तों के लिए किया जा रहा है। चैत्र नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी हुई है। पहाड़ी की 130 मीटर की ऊंचाई को कवर करता है इस रोप-वे परियोजना का निर्माण मंदिर ट्रस्ट और कोलकाता की इस निजी कंपनी ने मिलकर किया है। इस रोप-वे में कुल चार ट्रॉली लगाई गई हैं, जिसमें प्रत्येक ट्रॉली में 4 व्यक्ति बैठ सकते हैं। यह प्रणाली एक घंटे में लगभग 200 लोगों को दर्शन कराने की क्षमता रखती है। यह रोप-वे लगभग 300-350 मीटर लंबा है और पहाड़ी की 130 मीटर की ऊंचाई को कवर करता है।

तेज रफ्तार ट्रेन में नशे का खेल: वंदे भारत से 24 किलो गांजा बरामद, दो महिलाएं पकड़ी गईं

रायपुर. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर रात घेराबंदी कर वंदे भारत एक्सप्रेस से दो युवतियों को पकड़ा। आरोपित युवतियों से 24 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसे वे सूटकेस में छिपाकर ले जा रही थीं। एनसीबी को पहले ही सूचना मिली थी कि विशाखापत्तनम की ओर से दो युवतियां मादक पदार्थ लेकर लौट रही हैं। सूचना के आधार पर टीम ने शुक्रवार रात करीब 10:30 बजे रायपुर स्टेशन पर जाल बिछाया। बिलासपुर के तिफरा की रहने वाली हैं आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही संदिग्ध युवतियां वीआइपी गेट से बाहर निकल रही थीं, तभी टीम ने दबोच लिया। तलाशी में सूटकेस से गांजा बरामद हुआ। गिरफ्तार की गई आरोपित युवतियां बिलासपुर के तिफरा की रहने वाली हैं। इनमें नीलम राठौर (23) और रीना वर्मा (21) शामिल हैं। लग्जरी सफर का लिया सहारा जांच में यह बात सामने आई कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए तस्करों ने वंदे भारत एक्सप्रेस के सेकंड एसी कोच का सहारा लिया। सामान्यतः प्रीमियम ट्रेनों में कड़ी जांच की संभावना कम मानकर तस्कर इस तरह के लग्जरी कोच का उपयोग कर रहे हैं। रायगढ़ में दो करोड़ के पौधे व अफीम जब्त वहीं, आमाघाट में अफीम की खेती का राजफाश होने के बाद जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। फल में चीरा लगाकर 3.02 किलोग्राम अफीम तैयार कर ली गई थी, जिसे आरोपित के घर से बरामद किया गया है। इसके साथ ही खेत से 60,326 अफीम के पौधे जब्त किए गए हैं, जिनका कुल वजन 2,877 किलोग्राम है। अफीम और पौधों की कीमत करीब दो करोड़ रुपये है। 20 मार्च को अफीम की खेती का राजफाश किया था रिकॉर्ड के अनुसार, जिस भूमि पर खेती की जा रही थी, वह पांच खसरा भागों में 70 डिसमिल है। 20 मार्च को पुलिस-प्रशासन की टीम ने आमाघाट क्षेत्र में अफीम की खेती का राजफाश किया था। कार्रवाई के दौरान खेत में काम कर रहे दो व्यक्ति मौके से फरार हो गए, जबकि एक व्यक्ति मार्शल संगा को गिरफ्तार किया गया। वह झारखंड के खूंटी का निवासी है और आमाघाट में घर जमाई बनकर रह रहा था। मार्शल संगा ने घर में छिपा रखी थी 15 लाख की अफीम पूछताछ में मार्शल संगा ने बताया कि उसके पास इस खेती से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। उसने खूंटी से ही इमानवेल भेंगरा और सीप्रियन भेंगरा को अपने साथ लाने की बात भी स्वीकार की। राजस्व विभाग की टीम ने पुष्टि की कि फसल लगी जमीन पांच खसरा में विभाजित है। मार्शल संगा ने यह भी बताया कि उसने फसल से निकाली गई अफीम को अपने घर में छिपाकर रखा था। उसके निवास पर जाकर जांच करने पर एक प्लास्टिक में 3.02 किलोग्राम अफीम बरामद की गई, जिसकी कीमत 15 लाख 10 हजार रुपये है। पुलिस ने मार्शल संगा, इमानवेल भेंगरा और सीप्रियन भेंगरा के खिलाफ धारा 8 (बी) और 18 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस टीम फरार आरोपितों की तलाश में झारखंड और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

स्कूल हॉस्टल में बड़ा मामला: 10वीं की छात्रा प्रेग्नेंट, कलेक्टर का सख्त एक्शन

सुकमा. जिले के एक शासकीय विद्यालय में कक्षा 10वीं की छात्रा के गर्भवती पाए जाने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है. जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद छात्रावास अधीक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. दरअसल, 17 मार्च को विद्यालय में निवासरत छात्रा के स्वास्थ्य संबंधी सूचना मिलने पर मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था. जांच दल ने 20 मार्च को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें अधीक्षिका द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही की पुष्टि की गई. जांच में सामने आया कि छात्रा के गर्भवती होने की जानकारी अधीक्षिका को होने के बावजूद इसे उच्चाधिकारियों से साझा नहीं किया गया. साथ ही, छात्रावास के संचालन में भी खामियां पाई गईं और छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक उजागर हुई. मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अमित कुमार ने माहेश्वरी निषाद (मूल पद: प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला ओडडीन गुड़ा) को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित कर दिया है. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोंटा निर्धारित किया गया है. विद्यालय के संचालन की जिम्मेदारी आगामी आदेश तक सहायक अधीक्षिका को सौंप दी गई है. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी.

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को मिलेगा नया काम, SIR के बाद अब जनगणना की ड्यूटी

राजनांदगांव. एसआईआर की जटिल प्रक्रिया से गुजरने के बाद अब शिक्षको को जनगणना में ड्यूटी देनी होगी. जनगणना शाखा द्वारा इसके लिए जानकारी जुटाई जा रही हैं. अफसरों ने बताया कि, आगामी 31 मार्च तक मकानों की नंबरिंग किए जाने के बाद एक मई से पहले चरण की शुरूआत हो जाएगी. जिला प्रशासन द्वारा शिक्षक की जानकारी शिक्षा विभाग से भी जुटाई जा रही हैं. जनगणना-2027 को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है. जनगणना के प्रथम चरण यानी मकान सूचीकरण की तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया. एक मई से शुरू होने वाले जनगणना के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की सूची जल्द तैयार कर प्रस्तुत करने की तैयारी है. जिसमें 10 प्रतिशत अतिरिक्त रिजर्व स्टाफ भी शामिल किए जाने की तैयारी है. बताया जा रहा है कि, इस कार्य के लिए शासकीय प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों, हेडमास्टरों तथा शासकीय कॉलेजों के स्टाफ की नगरीय ड्यूटी लगाने की तैयारी है. साथ ही सभी निकायों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित शासकीय प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों, हेडमास्टरों तथा शासकीय कॉलेजों के स्टाफ की ड्यूटी इस कार्य में लगाया प्रगणकों विभाग द्वारा जाएगा. जनगणना और पर्यवेक्षकों की विस्तार से ली जा रही है और नियुक्ति से जुड़ी जानकारी उनके पदनाम, मोबाइल नंबर, पता सहित सभी आवश्यक विवरण शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं. अफसरों की माने तो इस प्रक्रिया में जिले का कोई भी व्यक्ति या परिवार गणना से वंचित नहीं रहना चाहिए. जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी. पहले चरण में 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) किया जाएगा, जिसमें सभी भवनों और मकानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार जनगणना-2027 का अगले किया जाएगा. इसके बाद दूसरे चरण में माह से पहला चरण होगा शुरू एकत्रित की जाएगी. विग जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारी नगरनिगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने मकान सूचीकरण ब्लॉक का कार्य 31 मार्च तक हर हाल में पूरा करने कहा गया था.

उत्तर बस्तर कांकेर में जल संरक्षण और आजीविका पर कार्य करने वाली महिलाओं ने साझा किया अपना अनुभव

उत्तर बस्तर कांकेर : आजीविका और जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूह की महिलाओं ने साझा किए अनुभव संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले हुए सम्मानित उत्तर बस्तर कांकेर ग्रामों में जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं, सामुदायिक सदस्यों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं अन्य हितधारकों के अनुभवों को साझा करने शुक्रवार 20 मार्च को जिला पंचायत एवं गैर शासकीय संगठन प्रदान के संयुक्त तत्वावधान में जिला पंचायत के सभाकक्ष में "प्रेरणा से प्रगति" नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और पंचायत स्तर पर जल संरक्षण और संवर्धन पर चर्चा की गई, साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री हरेश मंडावी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समुदाय एवं ग्राम पंचायतों को प्रेरित करने के साथ-साथ उनके कार्यों को नई दिशा मिलती है। उन्होंने पंचायत उन्नति सूचकांक (पीएआई) के महत्व, ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) की प्रभावशीलता तथा महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही यह भी बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में एक डिजिटल टूल विकसित कर ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया को डिजिटाइज किया गया है, जिसके माध्यम से जिले की प्रगति अब ऑनलाइन रूप से देखी जा सकती है। इस डिजिटल व्यवस्था से योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता एवं समयवद्ध क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, स्व सहायता समूह की महिलाओं एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कैडरों ने अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने बताया कि किस प्रकार जल संसाधन आधारित आजीविका गतिविधियों जैसे मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन एवं अन्य कृषि आधारित कार्यों के माध्यम से उनकी आय में वृद्धि हुई है तथा जीवन स्तर में सुधार आया है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संकुल स्तरीय संघ, उच्च पंचायत उन्नति सूचकांक प्राप्त करने वाली तथा बेहतर ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने वाली ग्राम पंचायतों एवं सक्रिय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कैडरों का सम्मान किया गया। विशेष रूप से आजीविका संवर्धन हेतु जल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली दीदियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि अन्य समुदाय सदस्यों के लिए भी प्रेरणा का कार्य किया है। इस अवसर पर जिला एवं जनपद पंचायतों के अधिकारी कर्मचारी और समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

सूरजपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर सूरजपुर जिले के विकासखण्ड ओड़गी अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरगढ़ पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी आस्था के केंद्र कुदरगढ़ धाम का भव्य विकास होगा। माता के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने माँ कुदरगढ़ी के पावन धाम में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व है और मैं आज माँ कुदरगढ़ी के दरबार में आया हूँ। सूरजपुर वासियों ने मुझे यह सौभाग्य दिया, इसके लिए मैं आप सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेश के कोने-कोने से मां कुदरगढ़ी के दर्शन के लिए पहुंचे भक्तजनों को भी मैं सादर प्रणाम करता हूँ। जब चैत्र नवरात्रि पर देवी मंदिरों में भक्तों का उत्साह देखता हूँ तो बहुत अच्छा लगता है। हमारे देवी-देवता हमारे आस्था के प्रतीक तो हैं ही, वे हमारे जीवन में उत्सव का रंग भी भरते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस शुभ दिन सूरजपुर जिले में 185 करोड़ रुपए के 76 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। सूरजपुरवासियों को इसके लिए मैं हार्दिक बधाई देता हूँ। इन कार्यों में 20 करोड़ रुपए के 52 कार्यों के लोकार्पण तथा 164 करोड़ रुपए के भूमिपूजन के कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कार्यों में सड़क, भवन, पेयजल, शिक्षा, जलाशय एवं नगरीय अधोसंरचना से जुड़े निर्माण शामिल हैं। साथ ही कुदरगढ़ में सर्वसुविधायुक्त नवनिर्मित विश्रामगृह भवन का लोकार्पण भी किया गया है। लगभग 3 करोड़ 9 लाख 60 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस आधुनिक भवन में अतिथियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि माता के आशीर्वाद से बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद समाप्त करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयासरत है । कुदरगढ़ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीघ्र ही रोपवे का निर्माण कराया जाएगा, जिससे दर्शन करना और अधिक सुगम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि क्षेत्र में डोम, बिजली सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि कुदरगढ़ धाम का समग्र और सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने जिले में पोषण के प्रति जागरूकता के लिए सुपोषण रथ, आपराधिक जागरूकता रथ और यातायात जागरूकता रथ को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण के लिए जनजागरूकता बेहद आवश्यक है। स्वस्थ महिला और बच्चों से परिवार की खुशियां मजबूत होती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यातायात के नियमों के प्रति सभी को सजग होना चाहिए जिससे सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सूरजपुर जिले में रेडी टू ईट निर्माण कार्य के माध्यम से पोषण कार्यक्रम का संचालन बेहतर ढंग से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने इस पहल को जिले के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पावन पर्व नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की उन्नति के लिए निरंतर कार्य कर रही है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक के आयोजन से इस क्षेत्र के खिलाड़ियों को खेल का नया अवसर मिला है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर माता रानी का आशीर्वाद सभी जिले वासियों पर बना रहे। सरकार महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करते हुए महिलाओं और बच्चो को बेहतर पोषण प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में आपके क्षेत्रों के विकास के लिए निरन्तर कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर वन विकास निगम के अध्यक्ष  राम सेवक पैंकरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, जिले के वरिष्ठ अधिकारीगण, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री का कुदरगढ़ी माता मंदिर दौरा: पूजा कर प्रदेश की खुशहाली की प्रार्थना

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर कुदरगढ़ी माता के दर्शन करने सूरजपुर जिले स्थित कुदरगढ़ी माता मंदिर पहुंचे। कुदरगढ़ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंदिर के नीचे प्रांगण स्थल पर ही हिंगुलाज माता एवं झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और  खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंदन लगाकर एवं चुनरी चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक माता का नमन किया। इस दौरान स्थानीय बैगा  राम कुमार बंछोर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। उनके परिवार की लगभग 10 पीढ़ियां कुदरगढ़ी माता की सेवा में निरंतर लगी हुई हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और सभी को कुदरगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृषि मंत्री  रामविचार नेताम,  वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ी मंदिर मां बागेश्वरी लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष  रामसेवक पैंकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि जनश्रुतियों के अनुसार कुदरगढ़ी माता मंदिर की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी कारणवश जिले सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।

वनौषधि परंपरा के संरक्षण को सरकार प्रतिबद्ध: वन मंत्री केदार कश्यप का बयान जड़ी-बूटी विरासत बचाने पर

रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप आज छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  अंजय शुक्ला के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। यह कार्यक्रम राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर, जीरो प्वाइंट, रायपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा , विधायक  किरण सिंह देव, विधायक  अनुज शर्मा और विधायक  इंद्रकुमार साहू अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।        वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक वन संपदा से समृद्ध राज्य है, जहां लगभग 44.21 प्रतिशत क्षेत्र में वन हैं। यहां के वनों में विभिन्न प्रकार की वनौषधियां पाई जाती हैं, जिनका उपयोग प्राचीन काल से उपचार के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और आमजन तक इसके लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 से 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन  अंजय शुक्ला द्वारा उपाध्यक्ष का पदभार ग्रहण करना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके अनुभव से औषधि पादप बोर्ड को मजबूती मिलेगी और यह नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।          समारोह में तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि औषधि पादप बोर्ड द्वारा वैद्य सम्मेलन, वनौषधि प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि  शुक्ला के मार्गदर्शन में बोर्ड और बेहतर कार्य करेगा। कार्यक्रम को विधायक  किरण सिंह देव ने भी संबोधित करते हुए कहा कि  शुक्ला के अनुभव का लाभ औषधि पादप बोर्ड को मिलेगा और बोर्ड नए आयाम स्थापित करेगा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष  विकास मरकाम ने कि राज्य सरकार वन औषधीय के पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन के लिए पादप बोर्ड का गठन किया है। जो लगातार बेहतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने  शुक्ला को बधाई देते हुए कहा पादप बोर्ड को उनके अनुभव का निश्चित ही लाभ मिलेगा और बोर्ड बेहतर नवाचार करेगा।      कार्यक्रम में  अपेक्स बैंक के अध्यक्ष  केदारनाथ गुप्ता, खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, अध्यक्ष अल्प संख्यक आयोग  अमरजीत सिंह छाबड़ा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम,  लोकेश कावड़िया, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण  नंदकुमार साहू , जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य मती स्वाती वर्मा, सतनामी समाज के धर्मगुरू गुरू बालदास,  रमेश सिंह ठाकुर,  अशोक पाण्डे,  श्याम नारंग सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जे.ए.सी.एस. राव  सुरेन्द्र पाटनी,  अमित साहू,  आलोक साहू सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।