samacharsecretary.com

“स्कूटी दीदी” एनु की उड़ान

रायपुर सपनों को उड़ान देने के लिए पंख नहीं, साहस और संकल्प की जरूरत होती है। इसी बात को सत्य साबित किया है छत्तीगसढ के धमतरी की एक साधारण लेकिन जुझारू युवती एनु ने, जो आज “स्कूटी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव और सीमित अवसरों के बावजूद एनु ने न केवल आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई।           एनु का जन्म एक सामान्य ग्रामीण परिवार में हुआ, जहाँ आर्थिक स्थिति सशक्त नहीं थी। परिवार में आय के सीमित स्रोत थे, और लड़कियों की शिक्षा को लेकर अब भी संकोच और संकीर्ण सोच (prevalent ) थी। परन्तु एनु की सोच इससे बिल्कुल अलग थी। वे हमेशा कुछ नया करने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा रखती थीं। कठिनाइयों और प्रतिकूलताओं के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में परास्नातक(Post Graduation inEconomics) की उपाधि हासिल की। यह उपलब्धि ही अपने आप में उनके संघर्ष और लगन का प्रतीक थी।           एनु का लक्ष्य केवल डिग्री लेनी ही मंज़िल नहीं थी। एनु जानती थीं कि केवल शिक्षा से रोजगार नहीं मिलेगा, जब तक उनके पास कोई कौशल न हो। इसी सोच के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला मजबूत कदम उठाने का अवसर दिया। लेकिन उनका सपना सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं था।          एनु का अगला कदम था -मोबिलिटी यानी गतिशीलता की। वे चाहती थीं कि खुद स्कूटी चला सकें, ताकि गांव-गांव जाकर महिलाओं से मिलें, प्रशिक्षण दें और उनके जीवन को बदलने में योगदान दे सकें, लेकिन एक ग्रामीण युवती के लिए दोपहिया वाहन चलाना समाज के लिए असामान्य बात थी। इसके लिए उन्हें न केवल आत्मसंदेह से लड़ना पड़ा, बल्कि समाज की रूढ़िवादी सोच से भी लडना पडा। यही पर ‘प्रथम संस्था’ (PRATHAM Foundation) ने उन्हें स्कूटी चलाने का प्रशिक्षण दिया। पहले-पहले जब उन्होंने स्कूटी की चाबी हाथ में ली, तो लोगों ने ताने दिए – “लड़की होकर गाड़ी चलाएगी?”, “क्या ज़रूरत है इधर-उधर घूमने की?”, लेकिन एनु अडिग रहीं। उन्होंने अपने आत्मविश्वास के साथ इन बातों को अनसुना कर, प्रैक्टिस जारी रखी और जल्द ही स्कूटी चलाने में दक्ष हो गईं।           धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास और कौशल दोनों बढ़ने लगे। अब वे गांवों में स्वतंत्र रूप से घूमने लगीं, महिलाओं से जुड़ीं, उन्हें मोटिवेट करने लगीं और अपनी यात्रा की कहानी सुनाकर उनमें भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देने लगीं। यही वह मोड़ था जब उन्होंने तय किया कि अब वह खुद एक ड्राइविंग स्कूल शुरू करेंगी, ताकि अन्य महिलाओं को भी गाड़ी चलाना सिखा सकें। यह पहल ग्रामीण परिवेश में महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।           सन 2023 में एनु अपने सीमित संसाधनों के साथ “महिला दोपहिया प्रशिक्षण केंद्र” की शुरुआत की। शुरू में केवल 2-3 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया, लेकिन जल्द ही यह संख्या बढ़ती चली गई। आज उनकी पहचान पूरे ब्लॉक और जिले में “स्कूटी दीदी” के रूप में हो गई है। उन्होंने अब तक 30 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को दोपहिया वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से कई महिलाएं अब स्वयं स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र या बैंक जैसी जगहों पर काम करने के लिए आत्मनिर्भर रूप से आने-जाने लगी हैं।            एनु की यह पहल न केवल महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता लाई है, बल्कि सामाजिक सोच को भी बदला है। अब गांवों में लोग अपनी बेटियों और बहुओं को एनु के पास भेजते हैं, यह सीखने कि कैसे वे भी “अपने सपनों की सवारी” कर सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों ने उन्हें सम्मानित भी किया है। हाल ही में उन्हें जिला प्रशासन द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया। एनु का सपना है कि वे आने वाले वर्षों में 1000 महिलाओं को ड्राइविंग सिखाएं और इसके लिए वे जल्द ही चारपहिया ड्राइविंग स्कूल भी शुरू करने की योजना बना रही हैं।           एनु का जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो समाज की जंजीरों को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती है। स्कूटी दीदी एनु ने दिखा दिया कि सच्ची ताकत बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि भीतर के आत्मबल और दृढ़ निश्चय में होती है।  

मुफ्त बिजली की ओर कदम: प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से निशि हुईं लाभान्वित, लगाया सोलर प्लांट

रायपुर. खैरागढ़, छुईखदान गंडई जिले के ग्राम टेकापार कला की निवासी श्रीमती निशि श्रीवास ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कर प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ प्राप्त किया है। सोलर प्लांट लगवाने से पहले उनके घर का बिजली बिल लगभग ₹500 प्रतिमाह आता था, जिससे घरेलू खर्चों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। योजना के अंतर्गत सोलर पैनल स्थापित होने के बाद अब उनकी स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। सोलर सिस्टम से बिजली का उत्पादन होने के कारण उनका बिजली बिल अब शून्य (₹0) हो गया है। हाल ही में उनके सोलर प्लांट से कुल 282 यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ, जिस पर उन्हें ₹474 का सोलर रिबेट भी प्राप्त हुआ। श्रीमती निशि श्रीवास का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से न केवल बिजली बिल में राहत मिली है, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। अब वे अपने गांव तथा आसपास के लोगों को भी इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

मौसम बदलेगा मिजाज: तेज धूप के बाद हल्की बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट

रायपुर. अगर आप भी संडे को कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर पूरी पढ़ लें. छत्तीसगढ़ के मौसम में बदलाव के आसार है. धूप की तेज तपिश से लोगों को राहत मिल सकती है. प्रदेश में रविवार को बादल छाने के आसार हैं. दक्षिणी और उत्तरी के कुछ इलाकों में हल्की बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है. मौसम में बदलाव के कारण दिन आगामी दिनों के तापमान में भी गिरावट हो सकती है. मौसम विभाग ने बताया कि शनिवार को प्रदेश में मौसम शुष्क रहा. सबसे ज्यादा तापमान बिलासपुर में 39.6 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम न्यूनतम तापमान में 14.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया.  रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी में आज मौसम का मिजाज घूमने के लिए अनुकूल रहने वाला है. रविवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा सकता है. मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि एक द्रोणिका उत्तर पूर्व उत्तर प्रदेश के मध्य भाग से दक्षिण अंदरूनी उड़ीसा तक छत्तीसगढ़ होते हुए 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. एक पश्चिमी विक्षोभ द्रोणिका के रूप में मध्य क्षोभमंडल में 5.8 किलोमीटर ऊंचाई पर 60 डिग्री पूर्व और 32 डिग्री उत्तर में स्थित है. प्रदेश में आज एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा और गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. इसके अलावा प्रदेश में एक दो स्थानों पर गरज चमक के साथ अंधड़ चलने और वज्रपात होने की संभावना बनी हुई है. प्रदेश में अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट संभावित है. मुख्य तौर पर दक्षिण छत्तीसगढ़ में वर्षा का क्षेत्र रहने की आसार है. उत्तर में सरगुजा संभाग के जिले संभावित हैं.

हरियाणा में सुरक्षा पर फोकस: CM सैनी ने सड़क किनारे बिजली के खंभों को लेकर लिया बड़ा एक्शन

चंडीगढ़. हरियाणा में आए दिन होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार ने अब बिजली के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट कर दिया है कि सड़कों के बिल्कुल साथ सटे बिजली के खंभे अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। चंडीगढ़ में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सीएम ने निर्देश दिए कि नए खंभे लगाते समय सड़क के किनारे से कम से कम 3 फीट की दूरी सुनिश्चित की जाए। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि वाहन चालकों को पर्याप्त जगह मिल सके और अनियंत्रित होने की स्थिति में गाड़ियां सीधे खंभों से न टकराएं। बैठक में मुख्यमंत्री ने केवल नए नियमों की बात नहीं की, बल्कि सड़कों के किनारे खड़े पुराने और खतरनाक खंभों को लेकर भी सख्त लहजे में बात की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जो खंभे जर्जर हो चुके हैं या जिनका अब कोई उपयोग नहीं रह गया है, उन्हें तुरंत हटाया जाए। अक्सर देखा गया है कि सड़क चौड़ीकरण के बाद पुराने खंभे बीच रास्ते या बिल्कुल किनारे रह जाते हैं, जो रात के अंधेरे में जानलेवा साबित होते हैं। अब ऐसे सभी 'ब्लैक स्पॉट्स' को चिन्हित कर सफाई अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने एक अहम पहलू संसाधनों की बर्बादी को लेकर भी उठाया। उन्होंने निर्देश दिए कि हटाए गए खंभों का प्रॉपर स्टॉक रिकॉर्ड बनाया जाए। सीएम का विजन साफ है कि जो खंभे हटाए जा रहे हैं, अगर वे ठीक हालत में हैं तो उन्हें बेकार छोड़ने के बजाय किसी अन्य उपयोगी जगह पर लगाया जाए। लोक निर्माण मंत्री रणबीर सिंह गंगवा की मौजूदगी में सीएम ने विभागों के बीच आपसी तालमेल (Inter-departmental coordination) की कमी पर भी चुटकी ली और कहा कि जनहित की योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की नीतियों का असली मकसद आम आदमी का जीवन सरल बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि योजनाओं को केवल फाइलों तक सीमित न रखें, बल्कि पारदर्शिता और दक्षता के साथ जमीन पर उतारें। सड़कों को बाधा मुक्त बनाने का यह मिशन न केवल प्रदेश के विकास को गति देगा, बल्कि कीमती जानों को बचाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

राशन घोटाले की आशंका: सरकारी दुकान से चावल की हेराफेरी, ग्रामीणों ने वाहन पकड़कर खोली पोल

बलौदा बाजार. जिले के ग्राम रसेड़ी में संचालित उचित मूल्य की दुकान में राशन की गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों के आरोप के बाद सरपंच की सूचना पर खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए चावल से भरे एक वाहन को जब्त कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार ग्राम रसेड़ी में संचालित उचित मूल्य की दुकान के संचालक पर ग्रामीणों ने राशन में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि दुकान संचालक द्वारा हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा था और बचा हुआ चावल इकट्ठा कर बेचा जा रहा था। ग्रामीणों को जब इस बात की जानकारी मिली कि दुकान के सामने एक वाहन में बड़ी मात्रा में चावल लोड किया जा रहा है, तब उन्होंने इसकी सूचना ग्राम सरपंच को दी। सूचना मिलते ही सरपंच मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर वाहन को रोक दिया। वाहन की जांच करने पर उसमें 50 से अधिक बोरियों में चावल भरा हुआ पाया गया। इसके बाद सरपंच द्वारा इसकी सूचना तत्काल खाद्य विभाग को दी गई। मामले की सूचना मिलने पर खाद्य विभाग के खाद्य निरीक्षक मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। सरपंच और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए। प्राथमिक जांच के बाद चावल से भरे उक्त वाहन को जब्त करने की कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान संचालक द्वारा लोगों को कम राशन देकर बचा हुआ चावल इकट्ठा किया गया था और उसे वाहन के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा था। ग्रामीणों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं उचित मूल्य दुकान के संचालक झमकलाल साहू ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वाहन में जो चावल लोड किया जा रहा था, वह उन्होंने राशन कार्डधारी उपभोक्ताओं से खरीदा था। इस संबंध में खाद्य निरीक्षक ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जब्त किए गए चावल और वाहन से संबंधित पूरी जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और इसे एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सेल्समैन ने यह स्वीकार किया है कि एपीएल कार्डधारकों से चावल खरीदकर बिक्री करने ले जा रहा था। सेल्समैन का यह कृत्य शासकीय दृष्टि से उचित नहीं है। मामले की जांच कर उच्चाधिकारियों के निर्देश अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में अधिकांश सोसायटियों में इस तरह के काम हो रहे हैं और चावल की अफरातफरी हो रही है, वहीं बाहरी दुकानदार इन चावलों को खरीद रहे हैं। आपको बता दें कि शासन की योजना है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए, पर यहां इसका गलत उपयोग हो रहा है। देखना होगा कि शासन अब आगे क्या कार्रवाई करता है।

आदि परब में छाया जशप्योर स्टॉल: महुआ की खासियत ने बटोरी सराहना

रायपुर. आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI), नवा रायपुर द्वारा 13–14 मार्च 2026 को आयोजित आदि परब–2026 कार्यक्रम “From Tradition to Identity” थीम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और वन आधारित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं, अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में आगंतुकों ने भाग लिया। इस आयोजन में जशपुर जिले के ब्रांड जशप्योर  द्वारा भी स्टॉल लगाया गया, जिसे आगंतुकों, अधिकारियों और विशेषज्ञों से व्यापक सराहना प्राप्त हुई। स्टॉल पर प्रदर्शित उत्पादों की उच्च गुणवत्ता, पारंपरिक प्रसंस्करण पद्धति और प्रीमियम पैकेजिंग को लेकर लोगों ने विशेष रुचि दिखाई। स्टॉल का मुख्य आकर्षण महुआ आधारित उत्पाद रहे। बड़ी संख्या में आगंतुकों ने महुआ के पारंपरिक उपयोगों के साथ-साथ उसे पोषण से भरपूर एक प्राकृतिक सुपरफूड के रूप में प्रस्तुत करने की पहल की सराहना की। जय जंगल  द्वारा महुआ को केवल पारंपरिक मद्य से जोड़कर देखने की धारणा से बाहर निकालते हुए उसे स्वास्थ्य, पोषण और पारंपरिक खाद्य प्रणाली के रूप में स्थापित करने का प्रयास लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता दिखाई दिया। जशप्योर, जशपुर जिले से शुरू हुई एक पहल है, जिसका उद्देश्य जंगल और जनजातीय समुदायों से जुड़े पारंपरिक खाद्य संसाधनों को सम्मानपूर्वक मुख्यधारा तक पहुँचाना है। यह पहल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की  दूरदर्शी सोच से प्रेरित है जिसमें महुआ को केवल शराब तक सीमित न रखकर उसे पोषण, स्वास्थ्य और जनजातीय आजीविका के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। आदि परब–2026 में जशप्योर का प्रतिनिधित्व अनिश्वरी भगत एवं प्रभा साय द्वारा किया गया, जिन्होंने आगंतुकों को उत्पादों की विशेषताओं, पारंपरिक प्रसंस्करण विधियों तथा महुआ के पोषण महत्व के बारे में जानकारी दी। स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोगों ने उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी ली और जशपुर से जुड़ी इस पहल की सराहना की। जशप्योर के माध्यम से महुआ, मिलेट्स और पारंपरिक रूप से संसाधित चावल जैसे उत्पादों को आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह पहल न केवल पारंपरिक खाद्य प्रणालियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी सशक्त बना रही है।

गुणवत्ताहीन सड़क पर सख्त एक्शन: विधायक रायमुनी भगत ने मौके पर अफसरों को लगाई डांट

जशपुर. छत्तीसगढ़ के जशपुर में बनी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। सड़क का निरीक्षण करने पहुंचीं विधायक रायमुनी भगत निर्माण कार्य की गुणवत्ता देखकर भड़क गईं और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। विधायक रायमुनी ने सड़क की खराब हालत देखकर मौके से ही ईई संतोष नाग को वीडियो कॉल किया और सड़क की स्थिति दिखाई। उन्होंने कहा कि डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क कुछ ही महीनों में खराब होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। विधायक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खराब बनी सड़क को उखाड़कर दोबारा बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कल तक काम शुरू नहीं किया गया तो इस पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह सड़क बगीचा नगर के वार्ड क्रमांक 4 से वार्ड क्रमांक 5 तक बनाई गई है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सड़क कुछ माह पहले ही तैयार हुई थी, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विधायक के सख्त रुख के बाद संबंधित विभाग में हड़कंप मच गया है और अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर जांच की भी संभावना जताई जा रही है।

नेशनल लोक अदालत में बड़ी राहत: रायपुर में आपराधिक व चेक बाउंस के लंबित मामलों का निपटारा

रायपुर. रायपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में शनिवार को वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत लगी. इस अदालत में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से बड़ी संख्या में लोग अपने विवादों के समाधान के लिए पहुंचे. आपराधिक, चेक बाउंस, पारिवारिक, बैंक रिकवरी, विद्युत, राजस्व और यातायात जैसे राजीनामा योग्य लंबित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित निस्तारण किया गया. 159 प्रकरण मामलों पर आपसी राजीनामा के लिए सुनवाई की गई, जिसमें से कुल 57 प्रकरणों का निराकरण हआ. इन मामलों में कुल 2 करोड़ 46 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया गया. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने जानकारी दी कि राजीनामा से संबंधित मामले यहां रखे हुए थे. 12 लाख के करीब राजस्व के मामले हैं. नगर पालिका के करीब 2.5 लाख मामले हैं. कोर्ट के करीब 24 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग है. यातायात से जुड़े मामले में सेटलमेंट के लिए है. उन्होने कहा कि 90 दिनों के अंदर, जिन्होंने चलान नहीं पटाया है. उन मामलों को भी नेशनल लोक अदालत में रखा गया है. इन सभी मामलों का आज निराकरण हो रहा है. ट्रैफिक से जुड़े मामले में मिनिमम दर के हिसाब चलान कर रहे हैं. मोहल्ला अदालत का आयोजन बलराम प्रसाद वर्मा ने कहा कि मोहल्ला अदालत का आयोजन भी किया गया है. इसमें अधिकारी मोहल्ले में बैठे हुए हैं. जिनकी बिजली, सड़क और पानी की जुड़ी समस्या है. वह अपनी समस्या बता सकतें है. तत्काल उनकी समस्या का निराकरण हो रहा है. क्या है लोक अदालत के लाभ ? आपको बता दें कि लोक अदालत में विभिन्न मामलों के निपटारे से जल्द न्याय मिलता हैं. लोक अदालत में निपटारा प्रकारणों में दोनों पक्षों की जीत होती है. आपसी राजीनामा के कारण मामलों की अपील नहीं होती. दीवानी प्रकरणों के परिणाम तुरंत मिलता है. दावा प्रकरणों में बीमा कंपनी राजीनामा मामलों में तुरंत एवार्ड राशि जमा करती है. लोक अदालत में राजीनामा करने से बार-बार अदालतों में आने से रुपयों, समय की बर्बादी और अकारण परेशानी से बचा जा सकता है. लोक अदालत में राजीनामा करने से दीवानी प्रकरणों में कोर्ट फीस पक्षकारों को वापस मिल जाती है, किसी पक्ष को सजा नहीं होती. मामले को बातचीत कर हल कर लिया जाता है. सभी को आसानी से न्याय मिल जाता है. फैसला अन्तिम होता है. फैसला के विरूद्ध कहीं अपील नहीं होती है.

ड्रग्स माफिया पर सख्त प्रहार: साय सरकार ने बनाई SOG और एंटी नारकोटिक्स सेल

रायपुर. छत्तीसगढ़, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्राकृतिक संसाधनों और शांत सामाजिक जीवन के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्य हिस्सों की तरह यहाँ भी अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने चिंतनीय स्थिति पैदा की है। नशीले पदार्थ केवल कानून-व्यवस्था की दृष्टि से ही समस्या नहीं हैं बल्कि यह समाज, परिवार और युवाओं के भविष्य के लिए भी गंभीर चुनौती है। इसका सामना करने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार ने कुछ निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान समूह (एसओजी) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन का फ़ैसला किया है। राज्य सरकार पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने से साथ ही साथ प्रदेश को नशामुक्त बनाने की व्यापक रणनीति तैयार की है। साय सरकार का स्पष्ट संदेश है कि छत्तीसगढ़ में नशे के व्यापार के लिए कोई जगह नहीं है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर अब क़ानून का शिकंजा कसा जाएगा। नशे की समस्या बन रही समाज के लिए गंभीर चुनौती दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी आज नशे की समस्या से जूझ रहा है। तरह-तरह के मादक पदार्थों जैसे गांजा, चरस, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम, डोडा और सिंथेटिक ड्रग्स समाज के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में बहुत से क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय हो रहा है। विधानसभा में उठाए गए प्रश्नों और विभिन्न सर्वेक्षणों के आधार पर कहा जा सकता है कि राज्य में नशे के सेवन करने वालों की संख्या चिंताजनक हो सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ में लगभग 1.5 से 2 लाख लोग अफीम और इंजेक्टेबल ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। 3.8 से 4 लाख लोग गांजा का उपयोग कर रहे हैं। 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 40,000 से अधिक किशोर इनहेलेंट और कफ सिरप जैसी नशीली चीजों के आदी हो रहे हैं। यह आंकड़े उस सामाजिक चुनौती का संकेत हैं जिसका सामना समाज और सरकार दोनों को मिलकर करना होगा। नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के अलावा अपराध, हिंसा, मानसिक तनाव और सामाजिक अस्थिरता भी बढ़ाने वाला होता है। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं होती बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। सरकार की सक्रियता और कड़े अभियान आंकड़ों में दिखाई दे रहा छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार और प्रभावी कार्रवाई की जारी है। इसका नतीजा हाल के वर्षों में हुई गिरफ्तारियों और जब्तियों के आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पिछले 13 महीनों में 1,434 मामले दर्ज किए गए, 2,599 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 20,089 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया और 3,00,408 नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए राज्य सरकार की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय रूप से नशे के नेटवर्क को तोड़ने में सलगन हैं। साल 2025 में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में और भी तेज़ी लाई गई। इस साल 1,288 मामले दर्ज हुए और 2,342 आरोपी गिरफ्तार किए गए। अभियान में जब्त किए गए पदार्थों में शामिल थे 16,999.7 किलोग्राम गांजा,141 ग्राम ब्राउन शुगर,1,259 ग्राम अफीम, 2.039 किलोग्राम हेरोइन, 27.68 ग्राम चरस, 23.56 ग्राम कोकीन, 70.46 ग्राम एमडीएमए, 1,524 किलोग्राम डोडा, और 2,41,138 नशीली दवाएं यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ व्यापक, सख़्त और संगठित कार्रवाई कर रही है। 2026 की शुरुआत में भी जारी अभियान साल 2026 की शुरुआत में भी यह अभियान जारी है। 31 जनवरी 2026 तक नशे के ख़िलाफ़ 146 मामले दर्ज हुए जिसमें 257 आरोपी गिरफ्तार किए गए और बरामदगी की सूची इस प्रकार से है 3,090 किलोग्राम गांजा, 8.85 ग्राम ब्राउन शुगर, 277.2 ग्राम अफीम, 123.8 ग्राम हेरोइन, 15.29 किलोग्राम डोडा और 59,270 नशीली दवाएं इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के द्वारा नशे के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई कितनी सख़्त है। एसओजी और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स साबित हो रहा है एक रणनीतिक कदम छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने अब मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराधों से निपटने के लिए नई संस्थागत व्यवस्था बनाने का फ़ैसला किया है।प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो महत्वपूर्ण कदम उठाए गए जिसमें पहला है विशेष अभियान समूह (SOG) एसओजी का गठन पुलिस मुख्यालय के अंतर्गत किया गया इसका उद्देश्य है आतंकवादी खतरों से निपटना और संगठित अपराधों पर कार्रवाई करना अचानक उत्पन्न होने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए यह समूह आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण से लैस होगा। दूसरा कदम है एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स, नशे के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए 10 जिलों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई जा रही है। इसके लिए 100 नए पदों के लिए मंजूरी दे दी गई है।इस फ़ोर्स से खुफिया जानकारी जुटाने में तेजी आएगी, तस्करी के नेटवर्क को जल्दी पकड़ा जा सकेगा और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ेगा। राज्य सरकार का यह कदम दर्शाता है कि सरकार समस्या की गंभीरता को समझते हुए दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है। एनडीपीएस अधिनियम से किया जा रहा है आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रहार नशे का कारोबार केवल ड्रग्स की बिक्री तक सीमित नहीं होता। इसके पीछे कई बड़े आर्थिक नेटवर्क भी काम करते हैं जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत वित्तीय जांच को भी प्राथमिकता देने का काम किया है। इसके तहत 2025 में 16 आरोपियों की 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई इसके अलावा 145 आदतन अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS कानून के तहत कार्रवाई की गई। छत्तीसगढ़ के साय सरकार की यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जब तक अपराधियों के आर्थिक स्रोतों को खत्म नहीं किया जाएगा तब तक नशे के कारोबार को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। ड्रग उपयोग के उपकरणों पर भी हो रही कार्रवाई छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने यह भी समझा है कि नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ड्रग्स के अलावा उससे जुड़े उपकरणों पर भी नियंत्रण जरूरी है। यही वजह है कि … Read more

SSP का जंबो ट्रांसफर ऑर्डर: रायगढ़ में 219 पुलिसकर्मी इधर से उधर, कई ASI बदले गए

रायगढ़. पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पुलिसकर्मियों को हटाते हुए जंबो ट्रांसफर आदेश जारी किया है। इस आदेश में एक एसआई, करीब एक दर्जन एएसआई सहित कुल 219 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग थानों और इकाइयों में नई जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और जिले में लॉ एंड ऑर्डर को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह तबादला सूची जारी की गई है। इसके तहत कई पुलिसकर्मियों को नई जगहों पर पदस्थ किया गया है। विभिन्न विभागों में प्रशासनिक कसावट और कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बिलासपुर जिले में एक बार फिर पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस विभाग में प्रशासनिक कसावट लाने और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पुलिसकर्मियों को बदलने के उद्देश्य से तबादले किए गए हैं। इस संबंध में एसएसपी रजनेश सिंह ने आदेश जारी किया है। 130 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण जारी आदेश के अनुसार, जिले में कुल 130 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किया गया है। इनमें 3 उप निरीक्षक (SI), 10 सहायक उप निरीक्षक (ASI), 23 प्रधान आरक्षक और 94 आरक्षक शामिल हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस फेरबदल का उद्देश्य कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाना तथा व्यवस्था में कसावट लाना है।