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लखपति दीदी पहल के अंतर्गत 04 महिलाओं को ई-रिक्शा वितरित

रायपुर लखपति दीदी पहल के अंतर्गत 04 महिलाओं को ई-रिक्शा वितरित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर  कोंडागांव जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लखपति दीदी पहल के अंतर्गत चार महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान किया गया। बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोंडागांव विधायक  लता उसेंडी ने रविवार को मोर सुआद में जिले की चार महिलाओं को ई-रिक्शा वितरित किया गया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना एवं पुलिस अधीक्षक श्री पंकज चंद्रा भी उपस्थित रहे। इस दौरान विधायक  उसेंडी एवं कलेक्टर श्रीमती पन्ना ने सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस पहल से महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। दीदी ई-रिक्शा योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत हितग्राहियों को ई-रिक्शा प्रदान किया गया। इनमें ग्राम सातगांव की श्रीमती मेहन्दी बाई पाण्डे, ग्राम पंचायत दुधगांव चिखलपुटी की श्रीमती बुका कश्यप और श्रीमती सोमारी बाई तथा ग्राम संबलपुर निवासी श्रीमती मीना पटेल शामिल हैं। इस पहल से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे तथा वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी। जिला पंचाययत के सीईओ श्री अविनाश भोई के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन बिहान की टीम का स्वसहायता समूह की महिलाओं को शासन की महात्वाकांक्षी योजना का लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक श्री विनय सिंह, डीपीएम श्री कुंजलाल सिंन्हा एवं श्री दुर्योधन मेघ, बीपीएम श्री फागूराम साहू, श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी सहित समूह की महिलाएं उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री साय बोले – जनजातीय समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा स्व. दिलीप सिंह जूदेव का जीवन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के मुख्यमंत्री निवास परिसर में उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के दीर्घ सामाजिक-राजनीतिक जीवन और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदानों को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।उन्होंने कहा कि स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव का संपूर्ण जीवन समाज सेवा, जनकल्याण और विशेष रूप से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर कार्य किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी के विचार, उनके आदर्श और सेवा का भाव आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज और प्रदेश के विकास के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी समाज की पहचान, स्वाभिमान और सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने में स्वर्गीय जूदेव का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके प्रयासों से जनजातीय समाज में आत्मगौरव की भावना सशक्त हुई और समाज में सकारात्मक चेतना का संचार हुआ। इस अवसर पर विधायक गोमती साय, विधायक  रायमुनि भगत, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

2000 से अधिक महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी, रायपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति और नारी शक्ति का संदेश

रायपुर 2000 से अधिक महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी, रायपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति और नारी शक्ति का संदेश2000 से अधिक महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी, रायपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति और नारी शक्ति का संदेश अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में “मैं भारत हूं” थीम पर भव्य बाइक-स्कूटी रैली का आयोजन किया गया। मातृशक्ति की ऐतिहासिक भागीदारी से सजी इस रैली में 2000 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और राष्ट्रभक्ति, अनुशासन तथा महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया। यह रैली अपनी विशिष्टता और व्यापक सहभागिता के कारण गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज की गई।        रैली का शुभारंभ माँ काली मंदिर से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम् गान के साथ हुई। इसके बाद अखिल भारतीय धर्मजागरण समन्वय कार्यसमिति सदस्य  राजेंद्र प्रसाद वास्तव और  विभा अवस्थी ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। रैली का नेतृत्व महिला पुलिस कर्मियों के अनुशासित दस्ते ने किया, जिसके पीछे हजारों महिलाएं हाथों में तिरंगा लिए उत्साहपूर्वक आगे बढ़ीं। यह रैली माँ काली मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए राम मंदिर, वीआईपी चौक पर संपन्न हुई। रास्ते भर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर रैली का स्वागत किया। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. भारवि वैष्णव और सह-संयोजिका तथा नगर निगम पार्षद डॉ. अनामिका सिंह के नेतृत्व में पूरे आयोजन का सफल संचालन किया गया।          समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा भी शामिल हुए। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि समाज में यातायात नियमों का पालन करने का संदेश देने के लिए आज महिलाओं ने जो स्कूटी रैली निकाली वह गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हो गयी है यह हमारे लिए गर्व का विषय है। उन्होंने अपने जीवन में अपनी बुआ अपनी मां अपनी पत्नी जैसी सशक्त महिलाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाएं पुरुषों से अधिक सहनशील और ज्यादा मजबूत होती हैं।  उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रेरक प्रसंग को याद करते हुए कहा कि यदि आज भारत की संस्कृति शाश्वत है, इस अविरल संस्कृति और सभ्यता को कोई आगे लेकर जाने वाला है तो वह भारत की महिलाएं हैं। अगर जीजा बाई ना होती तो शिवाजी का अस्तित्व नहीं होता और कौशल्या माता के संस्कार से ही तो भगवान  राम का अस्तित्व है। हर कामियाब व्यक्ति के पीछे महिला का हाथ होता है।          उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शासन की योजनाओं का लाभ लेकर लखपति दीदी से करोड़पति दीदी तक का सफर तय कर रहीं हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का भी कार्य कर रही हैं। महिलाओं के संकल्प के आगे कोई टिक नहीं सकता आज नक्सलावाद के नासूर को जड़ से मिटाने के लिए दिन रात पहाड़ों में रहकर कार्य करने वाली पुलिस विभाग की महिलाओं का भी उन्होंने अभिनंदन किया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकृत उद्घोषक सोनल शर्मा ने घोषणा करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक संदेश देने और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित यह स्कूटी रैली गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल की गई है, जो रायपुर और पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।           अखिल भारतीय धर्मजागरण विभाग के प्रमुख  राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि संगठित मातृशक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति और संस्कृति की संरक्षक है। वहीं बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने कहा कि आज की नारी हर क्षेत्र में अग्रणी है और यह आयोजन महिलाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है। आयोजन की संयोजिका डॉ. भारवि वैष्णव ने कहा कि रायपुर की सड़कों पर उमड़ा मातृशक्ति का यह जनसैलाब भारतीय नारी के राष्ट्रप्रेम और समर्पण का प्रमाण है। वहीं डॉ. अनामिका सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी पूर्ण है जब नारी मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने के लिए पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।          इस अवसर पर विभिन्न महिला संगठनों ने इस आयोजन में सहभागिता की और सभी प्रतिभागियों को हेलमेट भी प्रदान किया गया। सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और आदर्श नागरिक कर्तव्यों के पालन का संकल्प लिया। हाथों में तिरंगा और “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ संपन्न हुई यह रैली महिला शक्ति, संस्कार और आत्मविश्वास का प्रेरक उदाहरण बन गई।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा कवर्धा में जिलास्तरीय महतारी वंदन कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा कवर्धा में जिलास्तरीय महतारी वंदन कार्यक्रम में हुए शामिल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने महतारी वंदन योजना की 25 वीं किश्त की राशि बस्तर में आयोजित कार्यक्रम से जारी की। इस अवसर पर कवर्धा के वीर सावरकर भवन में महतारी वंदन सम्मेलन का आयोजन किया। इस आयोजन में उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा एवं सांसद  संतोष पाण्डेय भी कार्यक्रम में शामिल हुए।            सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष  चन्द्र प्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी,  जनपद पंचायत अध्यक्ष मती सुषमा बघेल, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट, डॉ वीरेन्द्र साहू, सभापति मती सुष्मिता पटेल,  नितेश अग्रवाल,  विजय पटेल,  मनीराम, मती मधु तिवारी, मती सुषमा चंद्रवंशी, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक अग्रवाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी  आनंद तिवारी, पार्षदगण सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रही।      उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने विश्व महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि सिर्फ आज ही नहीं हर दिन महिला दिवस है। समाज में जब भी कुछ सकारात्मक बदलाव लाना होता है इसकी शुरुआत महिलाओं से होती है। पुरातन काल और हजारों वर्षों से यह हमारी परम्परा है, जहां माताओं का स्थान समाज में सर्वोच्च है। हमारे देश में माताएं देवियों के रूप में पूजित हैं। आदि शंकराचार्य ने जब मंडन मिश्रा से शास्त्रार्थ किया था तो निर्णायक की भूमिका भी एक विदुषी महिला उभय भारती जो कि मंडन मिश्रा की पत्नी थी, उन्होंने निभाई थी।        भारत में परिवर्तन के लिए महिला शक्ति को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। महिलाओं को स्व रोजगार, उद्यमिता और सहकारिता से जोड़ते हुए लखपति दीदी के रूप आगे बढ़ाया जा रहा है। महतारी वंदन पूरे प्रदेश में सबसे बड़ी योजना है। महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हर माह 1 हजार रुपए की राशि महिलाओं को मिल रही है। आज योजना की 25 वीं किश्त जारी हो रही है। यह राशि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। महिलाएं स्व रोजगार और उद्यमिता को अपनाकर आय अर्जित कर रही हैं। जिससे वे अपने बच्चों और घर परिवार से जुड़े आर्थिक जरूरतों की पूर्ति खुद करने में सक्षम हो रही हैं।      उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के हाथ में योजना की राशि मिले और वे स्वयं अपने खाते से राशि निकाल सकें, इसके लिए हर पंचायत में अटल डिजिटल केंद्र खोल जा रहे हैं। जिससे महिलाओं को दूर शहरों में बैंक या सोसायटी तक जाना न पड़े। महिला स्व सहायता समूहों के लिए महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, यह विशेष रूप से महिलाओं के लिए ही होगा। इसका निर्माण क्लस्टर लेवल फेडरेशन स्तर पर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सदन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह नीति निर्धारण में महिलाओं की सहभागिता को बढ़ाएगा। राजनांदगांव सांसद  संतोष पांडे ने अपने सम्बोधन में कहा कि महिला एक परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज और देश की नींव तैयार करती है। माँ के रूप में महिला शक्ति अपने संतान को जो शिक्षा और सीख देती है वैसा ही उसका विकास होता है।     जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिससे महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक जीवन स्तर को और बेहतर बनाया जा सके। महतारी वंदन की राशि देने का वायदा किया था। सरकार बनने के बाद यह राशि जारी करने की शुरुआत की गईं अब तक 25 किश्त जारी की जा चुकी है।  उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले की 2.48 लाख से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना से अब तक 24 किश्तों में 563.49 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं।  ये हुए सम्मानित उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं और सामाजिक संस्थाओं को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में मती गंगोत्री, मती यशोधरा मानिकपुरी, मती प्रीति सिंह परिहार, मती श्वेता शर्मा, मती पायल वास्तव, मती सरस्वती निषाद, मती चंद्र कुमारी, मती रंजना भट्ट, मती सुकून चंद्रवंशी, मती अनीता पाली, मती खुशबू, अनीता केसरवानी, रीना शर्मा, अश्वनी वास्तव, विवेका हैरिस, मती सरोज शर्मा, निकिता डड़सेना एवं संगीता साहू शामिल हैं। इसके साथ ही सामाजिक संस्था नई सोच नई राह नारी शक्ति टीम को भी समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

स्व-सहायता समूह से जुड़कर पूनम देवी बनीं आत्मनिर्भर, अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में बना रहीं नई पहचान लखपति दीदी’ के रूप में बना रहीं नई पहचान

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं विभिन्न योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की  पूनम देवी भी इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं।       पूनम देवी,जो गणेश महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं। कभी सीमित संसाधनों के साथ घर-परिवार की जिम्मेदारियों में लगी रहने वाली पूनम देवी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी।      पूनम देवी बताती हैं कि पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक ही सीमित थीं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। आर्थिक स्थिति सामान्य थी, जिससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता था। इसी दौरान उन्होंने गणेश महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हंन बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली। समूह की अन्य महिलाओं को मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी प्रेरणा मिली। वर्ष 2025 के मार्च माह मं  उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण     प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने छोटे से किराना दुकान के विस्तार में किया।      किराना दुकान को व्यवस्थित और बड़ा करने के बाद उनके व्यवसाय में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी। वर्तमान में उनकी दुकान से हर माह लगभग 30 से 35 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती है। इस आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी तरह से कर पा रही हैं।      पूनम देवी का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता दोनों आए हैं। आज वे न केवल अपने परिवार के लिए सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।      ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों को मिला रहा है रोजगार के अवसर

रायपुर ग्रामीणों को मिला रहा है रोजगार के अवसर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशपुर जिले में भी पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहे हैं। जिले में संचालित होमस्टे में बाहरी क्षेत्रों से पर्यटक पहुंच रहे हैं और यहां की प्राकृतिक सुंदरता तथा स्थानीय संस्कृति का अनुभव कर रहे हैं।     जिला प्रशासन भी ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इन प्रयासों के कारण जशपुर के गांवों में स्थित होमस्टे धीरे-धीरे पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के रायपुर से आए दो पर्यटक केरे स्थित महुआ होमस्टे में ठहरे थे। पर्यटकों ने यहां के शांत वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और गांव के सादगीपूर्ण जीवन का अनुभव किया। उन्होंने स्थानीय खान-पान और ग्रामीण आतिथ्य की भी सराहना की।      वहीं मध्य प्रदेश के सीधी जिले से आए चार पर्यटक देवोबरा (मयाली) स्थित बनफूल होमस्टे में ठहरे। इन पर्यटकों ने भी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और गांव के माहौल को बेहद पसंद किया। ग्रामीणों द्वारा की गई आत्मीय मेहमाननवाजी उनके लिए खास अनुभव रही।      स्थानीय होमस्टे में पर्यटक कार्तिकेय सिंह, कुसुम, अरविन्द पटेल,निधि , रोशन साहू प्रीति साहू आदि अन्य पर्यटकों के ठहरने के लिए सुविधा दी जा रही है। जशपुर में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान मिल रही है और आने वाले समय में इसके और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

जिला पुरातत्त्वीय संघों के गठन पर तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू

रायपुर महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में 07 से 09 मार्च तक आयोजन, विशेषज्ञों ने साझा किए विरासत संरक्षण के अनुभव प्रदेश की पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और जनभागीदारी को सुदृढ़ बनाने की दिशा में संस्कृति विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के निर्देश पर संस्कृति विभाग अंतर्गत पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, रायपुर द्वारा “जिला पुरातत्त्वीय संघों के निर्माण एवं कार्यविधियाँ” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 07 से 09 मार्च 2026 तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, सिविल लाइन्स, रायपुर में आयोजित की जा रही है। महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में 07 से 09 मार्च तक आयोजन, विशेषज्ञों ने साझा किए विरासत संरक्षण के अनुभव      कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य के विभिन्न जिलों में जिला पुरातत्त्वीय संघों के गठन, उनके कार्य एवं दायित्वों को स्पष्ट करना तथा पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण में उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना है। इस आयोजन के माध्यम से जिला स्तर पर पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार करने और स्थानीय स्तर पर जनसहभागिता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यशाला के दौरान पुरातत्त्व, संग्रहालय प्रबंधन तथा विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इन सत्रों में जिला पुरातत्त्वीय संघों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे अपने-अपने जिलों में धरोहर संरक्षण से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकें।      प्रथम तकनीकी सत्र में “संग्रहालयों के संचालन में जिला पुरातत्त्वीय संघों की भूमिका” विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रो. आर. एन. विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त प्राध्यापक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व, इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान में संग्रहालयों के सुचारु संचालन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी तथा पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण में जिला स्तर के संगठनों की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।      इसके बाद आयोजित परिचर्चा सत्र में राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जिला पुरातत्त्वीय संघों के माध्यम से संचालित गतिविधियों की जानकारी साझा की। साथ ही उन्होंने कार्यान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों और समस्याओं पर भी चर्चा की, जिन पर विशेषज्ञों ने व्यावहारिक और समाधानकारी सुझाव प्रस्तुत किए।      पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय के संचालक  विवेक आचार्य ने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से जिला स्तर पर पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। इससे प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को नई गति मिलेगी।      कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पी.सी. पारख, प्रभात कुमार सिंह, डॉ. अरुंधति परिहार, मती रोशनी शर्मा, डॉ. वृषोत्तम साहू, प्रवीन तिर्की, डॉ. राजीव मिंज, विष्णु नेताम, समीर टल्लू, मुकेश जोशी, अमर भरतद्वाज, नूतन एक्का एवं अरुण निर्मलकर सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

लोकभवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ज़मीनी स्तर पर काम कर रही महिलाओं का हुआ सम्मान

रायपुर लोकभवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ज़मीनी स्तर पर काम कर रही महिलाओं का हुआ सम्मान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और रंग पंचमी के अवसर पर लोकभवन में महिला सम्मान समारोह और फूलों की होली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, उद्यम और पत्रकारिता के क्षेत्र मेें उल्लेखनीय भूमिका अदा करने वाली महिलाएं शामिल हुई। इस अवसर पर राज्यपाल  रमेन डेका ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आई शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, आदिवासी विकास के क्षेत्र में ज़मीनी स्तर पर कार्य कर रही महिलाओं का सम्मान किया। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान कर प्रदेश में जन कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने और समाज के सभी लोगों की निःस्वार्थ भाव से सेवा के लिए उनके योगदान की सराहना की।  डेका ने देश के विकास में महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति इस देश के विकास की धुरी है और मेरी सरकार अंतिम पंक्ति की महिलाओं तक विकास पहुंचाने के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हम सभी के लिए एक गौरवशाली दिन है। यह दिन महिला समानता की दिशा में कार्य करने प्रेरित करता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हुए, हम सभी को एक ऐसे विश्व के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः मजबूत करने की आवश्यकता है जहाँ सभी महिलाओं को सशक्त, सम्मानित और समावेशी बनाया जा सके। लोकभवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ज़मीनी स्तर पर काम कर रही महिलाओं का हुआ सम्मान  डेका ने कहा कि भारत सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला शक्ति केंद्र, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र योजना, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन जैसी योजनाएं महिलाओं के सशक्तिकरण में मददगार साबित हुई है। महिला सशक्तिकरण एक सतत और प्रगतिशील समाज के निर्माण का एक शक्तिशाली साधन है। इसलिए, छत्तीसगढ़ सरकार ने भी महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ और नीतियाँ विकसित की हैं। इनमें से कुछ हैं महतारी वंदन योजना, जो समाज के कमजोर वर्ग की महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तीकरण सहायता योजना, किशोरी शक्ति योजना और सुकन्या योजना का उद्देश्य लड़कियों को लाभ पहुँचाना है। इस अवसर पर स्पीकर के रूप में आमंत्रित डॉ. शम्पा चौबे ने कहा कि महिलाओं को सशक्त होने के लिए सबसे पहले अपनी मनःस्थिति को मजबूत करना आवश्यक है। शिक्षिका रंजीता साहू ने सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा का अलख जगाने की यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि समाज से हमें बहुत कुछ मिलता हैं उसे धीरे-धीरे कर समाज को लौटाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि लोकभवन के प्रति उनके मन में बहुत आदर है क्योंकि 2005 में उनके पति को तात्कालिक राज्यपाल  के. एम. सेठ ने शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया था। इसलिए वे और उनके पति गरीब बच्चों की बेहतर शिक्षा की दिशा में काम कर रहे है। उन्होंने 12 लाख रूपए का बैंक लोन लेकर वनांचल क्षेत्रों में 162 स्कूलों में स्मार्ट टी.व्ही. के माध्यम से आधुनिक शिक्षा के लिए काम किया। इसके अलावा गुल्लक कार्यक्रम चलाकर बचत हेतु प्रेरित किया। अंतरर्राष्ट्रीय खिलाड़ी सु नेहा यादव ने अपनी सफलता के पीछे अपनी मां की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि उनकी मां ने एक सिंगल पैरेंट के रूप में उनका पालन पोषण किया। जबकि उनके जन्म के पहले ही पिता द्वारा त्याग दिए जाने के बाद उनके पास आय का कोई जरिया नहीं था फिर भी उन्होंने अकेले ही अपनी बेटी को अच्छी परवरिश दी और अंतरर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बनाया। कार्यक्रम में डॉ प्रीति सतपथी ने महिलाओं से जुडे़ आवश्यक कानूनों और अधिनियमों की जानकारी दी। इस अवसर पर मती प्रदीपा प्रसन्ना ने वनांचल क्षेत्रों में कार्य के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ की महिलाएं संघर्ष करते हुए भी मजबूती से अपने घर और समाज के विकास में योगदान दे रही हैं, जो प्रेरणादायक है।  राज्यपाल के गोद ग्राम से आए सोनपुरी जिला खैरागढ़ की मती निलेश्वरी वर्मा, मती सोहद्रा पाल, ग्राम बिजली गरियाबंद की मती हेम कुमारी निषाद, मती पुरईन निषाद, ग्राम टेमरी जिला बेमेतरा की मती रितु देवांगन, मती पूजा घृतलहरे का सम्मान किया साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, धरसींवा मती अनुबाला चक्रवर्ती, BETEO तिल्दा सामुदायिक विकासखण्ड अधिकारी सु शिखा कुशवाहा, अस्पताल परिचालक AIIMS  मती आरती देवांगन, मती माधूरी बरवा, महिला बाल विकास, निमोरा की सहायिका कार्यकर्ता मती रामवती साहू, महिला बाल विकास, तुता की सहायिका कार्यकर्ता मती लक्ष्मी यादव, नगर निगम, रायपुर सुपरवाईजर मती पिंकी तांडी, मती वर्षा तांडेकर, पं. रविशंकर शुक्ल विवि, रायपुर की कर्मचारी टी मोहिनी, कलेक्टोरेट, रायपुर ज्योति साहू, पूनम सिंह ठाकुर, सुजाता शेष, रूद्राणी सिंह राजपूत, गोपा सान्याल, डॉ. प्रीति सतपथी, लोकभवन कर्मचारी कुसुम मानिकपुरी, अन्नपूर्णना महोबिया, श्यामा वर्मा, महिला आरक्षक को सम्मानित किया गया। इस अवसर राज्यपाल ने जी. एस. टी. से संबंधित ई-बुक का भी विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक मती सोनालिका शुक्ला ने किया।                                          लोकभवन में आयी महिलाओं ने रंग पंचमी के अवसर पर फूलों वाली होली खेलकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी।  इस अवसर पर महिला बाल विभाग द्वारा क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी हुईं और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।  इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना एवं लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

सीमा पर दहशत का बाघ: मवेशी पर झपटा, जान बचाने पेड़ पर चढ़े ग्रामीण

 मोहला-मानपुर जिला अंतर्गत छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा में बाघ का आतंक एक बार फिर सामने आया है। बीते 12 फरवरी से अब तक एक माह के भीतर एक ग्रामीण समेत दो मवेशियों को मौत के घाट उतार चुके बाघ की इस बार औंधी तहसील क्षेत्र अंतर्गत बागडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र में आमद हुई, जहां 6 मार्च को दिन-दहाड़े बाघ ने आतंक मचाया और मवेशियों पर हमला किया। वहीं 6 और 7 मार्च की दरमियानी रात बाघ इंसानी बस्ती में पहुंच गया, जिससे ऐसे खौफनाक हालात बन गए कि ग्रामीणों को पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचानी पड़ी। बता दें, मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र अंतर्गत औंधी क्षेत्र के बागडोंगरी गांव निवासी ग्रामीण का बैल, जो गांव के आसपास चर रहा था, उस पर बाघ ने हमला कर दिया। जैसे-तैसे बाघ के चंगुल से छूटकर बैल अपने पालक के घर पहुंचा तो पता चला कि बैल के शरीर में बाघ के पंजों की खरोंचें हैं और बाघ के दांतों ने भी बैल की गर्दन में छेद कर दिए हैं। यही नहीं, बाघ ने इसी बागडोंगरी ग्राम पंचायत के आश्रित मोहल्ले मरकाटोला में भी आतंक मचाया, जहां खेत में भुट्टे की फसल की रखवाली के लिए घूम रहे दो ग्रामीणों को इस बाघ ने दौड़ाया। हालांकि ये ग्रामीण फुर्ती से एक पेड़ पर चढ़ गए, जिससे वे बाघ के हमले से बच गए, लेकिन जिस पेड़ पर ये ग्रामीण चढ़े, उसके इर्द-गिर्द ही बाघ मंडराते हुए ग्रामीणों पर हमले की फिराक में जुटा रहा। इसी बीच गांव में लोगों को इस हालात की जानकारी लगी और बड़ी संख्या में ग्रामीण टॉर्च जलाते हुए मौके की ओर बढ़े। तब जाकर टॉर्च की रोशनी और ग्रामीणों की आहट से घबराकर बाघ मौके से भागा और पेड़ पर चढ़े ग्रामीण सुरक्षित नीचे उतर सके। क्षेत्रवासी ग्रामीण बाघ की लगातार आमद और उसके द्वारा किए जा रहे शिकार से खासे भयभीत हैं। यह महुआ जैसे अहम वनोपज के संग्रहण का दौर है, लेकिन महुआ संग्रहण और बिक्री से आय अर्जित करने वाले ग्रामीणों के सामने बाघ के भय के चलते महुआ व अन्य वनोपज के लिए जंगल जाना दूभर होता दिख रहा है। दूसरी ओर वन महकमा भी अपनी यथासंभव कसरतों में जुटा हुआ है। ट्रैप कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। वन महकमे ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि सुरक्षित रहें, सतर्क रहें। क्योंकि यह केवल वनोपज संग्रहण का मसला नहीं है, बल्कि स्कूली बच्चे भी जंगल के रास्ते स्कूलों का सफर तय करते हैं। और बाघ की चहलकदमी से स्कूली बच्चों की राह भी खौफजदा प्रतीत हो रही है। गौरतलब है कि बाघ का आतंक इस इलाके में बीते करीब डेढ़ पखवाड़े से फैला हुआ है। बीते 12 फरवरी को बाघ ने गहनगट्टा गांव में एक मवेशी का शिकार किया था। इसके बाद बाघ ने इसी औंधी इलाके से लगे महाराष्ट्र के केहकावाही में एक ग्रामीण को मार डाला था। यही नहीं, ग्रामीण को मारने के अगले रोज फिर छत्तीसगढ़ में आकर पीटेमेटा गांव में एक मवेशी को भी बाघ ने शिकार बनाया था। इन घटनाक्रमों के बाद अब बाघ ने बागडोंगरी इलाके में आतंक मचाया है।

साय ने महिला पत्रकारों से साझा किया: पिता की मौत के बाद मां ने की दोनों की जिम्मेदारी पूरी

रायपुर  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला पत्रकारों से बातचीत में अपने निजी जीवन और महिलाओं के सशक्तिकरण पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि 10 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उनकी मां ने परिवार को संभाला और वही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बनी। सीएम ने कहा कि 26 साल की उम्र में विधायक बनने के बाद पत्नी ने घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें राजनीति में ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला। घर में सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और परिवार की महिलाएं उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करती हैं। महिला सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं अधिकतर घर तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब स्व-सहायता समूहों और सरकार की योजनाओं से महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। छत्तीसगढ़ में लगभग 8 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और सरकार का लक्ष्य इसे 10 लाख तक पहुंचाना है। बस्तर में नक्सलवाद के बाद महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। महिलाओं का योगदान प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में निर्णायक है। घर की महिलाएं हमेशा प्रोत्साहित करती हैं सीएम साय ने कहा घर में कोई भी बड़ा फैसला हम सब मिलकर लेते हैं। मां हैं, पत्नि हैं सभी की राय ली जाती है। मेरे घर की महिलाएं हमेशा मुझे प्रोत्साहित करती है। मेरे ज्यादातर कपड़े श्रीमती जी खरीदतीं हैं सीएम ने कहा कि एक समय घर में सबके कपड़े मैं ही खरीदता था लेकिन 10 साल से बढ़ी व्यस्तता के कारण मेरे ज्यादातर कपड़े श्रीमति जी ही खरीदतीं हैं।