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नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: पहली बार देवजी सहित दो शीर्ष माओवादी नेताओं ने डाले हथियार

जगदलपुर माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक झटका लगा है। पोलित ब्यूरो सदस्य टिप्पिरी थिरुपथी उर्फ देवजी उर्फ कुम्मा दादा ने अपने तीन शीर्ष साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। सभी ने तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष हथियार डालते हुए मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। देवजी के साथ जिन बड़े माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, उनमें केंद्रीय समिति सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, स्टेट कमेटी मेंबर बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर, स्टेट कमेटी सदस्य नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नू दादा शामिल हैं। यह आत्मसमर्पण कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार दो केंद्रीय स्तर के माओवादी नेताओं ने एक साथ हथियार डाले हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लगातार बढ़ते फोर्स प्रेशर, सघन ऑपरेशनों और संगठन के भीतर कमजोर पड़ते नेटवर्क के चलते यह बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वहीं इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में सुरक्षा बलों की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ का 1.72 लाख करोड़ रुपये का बजट 2026-27 के लिए पेश, किसानों की आय में होगी बढ़ोतरी

रायपुर: छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने मंगलवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। यह बजट 'संकल्प' (एसएएनकेएएलपी) विषयवस्तु पर आधारित है, जिसमें समावेशी विकास एवं अवसंरचना को तेज करना और निवेश को बढ़ावा देना शामिल है। वर्ष 2023 में सत्ता में आई भाजपा के नेतृत्व वाली विष्णु देव साय सरकार का यह तीसरा बजट है। सरकार का पहला बजट 'ज्ञान' (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी) विषयवस्तु पर आधारित था, जबकि पिछले साल यह 'गति' (सुशासन, अवसंरचना को तेज करना, प्रौद्योगिकी और आद्योगिक विकास) पर केंद्रित था। किसानों के लिए खास तोहफा राज्य सरकार ने भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस योजना के तहत भूमिहीन श्रमिकों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कृषक उन्नति योजना के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जो किसानों के हित में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आंकड़ा राज्य की कृषि उत्पादन क्षमता और समर्थन मूल्य नीति की सफलता को भी दर्शाता है। सिंचाई सुविधा को सुदृढ़ करने के लिए निशुल्क पंप योजना हेतु 5500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों को बिजली आधारित सिंचाई साधनों का लाभ मिलेगा और खेती की लागत में कमी आएगी। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पाम ऑयल की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसके लिए 150 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य पारंपरिक धान आधारित खेती के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों की आय के स्रोत बढ़ सकें। महिलाओं और स्वास्थ्य के लिए बड़े प्रावधान महिला सशक्तिकरण को मजबूती देते हुए सरकार ने महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 70 लाख महिलाओं को 14 हजार करोड़ रुपये वितरित किए जाने की जानकारी दी। नए बजट में इस योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री लखपति दीदी भ्रमण योजना और महतारी सदन के लिए 275 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। बालिकाओं के जन्म पर ‘दुर्गावती योजना’ शुरू की जाएगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 1.50 लाख रुपये दिए जाएंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र में 5 नई आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 42 करोड़, आयुष्मान योजना के लिए 1,500 करोड़ और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। दवाओं की गुणवत्ता जांच हेतु 25 करोड़ रुपये की लागत से लैब स्थापित की जाएगी। रायपुर में नया होम्योपैथी कॉलेज भी खोला जाएगा। बजट पेश करते हुए चौधरी ने कहा कि इस साल का बजट 'संकल्प' – समावेशी विकास, अवसंरचना, निवेश, कुशल मानव संसाधन, अंत्योदय, जीवनयापन और नीति से परिणाम तक, पर केंद्रित है जिसका मकसद राज्य के विकास के सफर को तेज करना है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में रानी दुर्गावती योजना शुरू करेगी, जिसके तहत बालिकाओं को 18 साल की उम्र पूरी होने पर 1.5 लाख रुपये मिलेंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि बस्तर इलाके के अबूझमाड़ और जगरगुंडा में शिक्षा शहर बनाने के लिए एक सौ करोड़ रुपये दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कुनकुरी, मनेंद्रगढ़ और दंतेवाड़ा में नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। चौधरी ने कहा कि राज्य में खेल एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बजट में बस्तर और सरगुजा ओलंपिक के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि बस्तर नेट परियोजना के लिए पांच करोड़ रुपये मंजूर करके दूरदराज के इलाकों में डिजिटल संपर्क को मजबूत किया जाएगा। वहीं बस्तर में इंद्रावती नदी पर मतनार और देउरगांव बैराज बनाने के लिए बजट में 2,024 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढञ में निवेश और रोजगार बढ़ाने, 23 नए औद्योगिक पार्क बनाने के लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान है। वहीं सरगुजा के मैनपाट में पर्यटन विकास के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा कि जगदलपुर और अंबिकापुर में हवाई सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।   बस्तर-सरगुजा पर खास ध्यान बजट में बस्तर और सरगुजा अंचल के विकास को प्राथमिकता दी गई है। इंटरनेट सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और 70 नई बस सेवाओं के संचालन के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे पॉलिसी हेतु 10 करोड़ और मैनपाट पर्यटन विकास के लिए 5 करोड़ रुपये रखे गए हैं। कृषि और रोजगार सृजन के लिए निवेशकों को 100 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के लिए 50 करोड़ रुपये और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की भी घोषणा की गई है। आधारभूत संरचना में निवेश सड़क और नगरीय विकास कार्यों में भी उल्लेखनीय राशि आवंटित की गई है। नारायणपुर-जटलूर मार्ग के लिए 28 करोड़, दंतेवाड़ा के लिए 9 करोड़, सुकमा के लिए 7 करोड़, बलरामपुर के लिए 10 करोड़ तथा इंद्रावती क्षेत्र में 68 किलोमीटर नगर निर्माण के लिए 2024 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कांकेर बैराज परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। बस्तर विकास प्राधिकरण को 75 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। Chhattisgarh Budget 2026: सत्र की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से 20 मार्च तक चलेगा। सत्र की शुरुआत राज्यपाल रमेन डेका के अभिभाषण से हुई थी, जिसमें राज्य के विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया था। साय सरकार का यह तीसरा बजट ‘संकल्प’ थीम के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी क्षेत्रों के विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित नजर आता है। बिजली सब्सिडी के लिए 5,500 करोड़ बजट में विद्युत पंपों की बिजली सब्सिडी के लिए 5,500 करोड़, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 820 करोड़ वहीं दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट में गन्ना किसानों को बोनस हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट में ये एलान भी किए गए स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना के लिए 100 करोड़ रुपये तो बैगा और पुजारी को … Read more

अग्निवीर भर्ती के 1 अप्रैल तक ऑनलाइन शुरू हुए आवेदन

रायपुर. भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती वर्ष 2027 के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इस के लिए इच्छुक अभ्यर्थी जॉइन इंडियन आर्मी की आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in की ऑनलाइन पंजीयन पोर्टल पर जाकर 01 अप्रैल 2026 तक पंजीयन कर सकते हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (सीईई) जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित की जाएगी। परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को जनवरी 2027 में आयोजित होने वाली रैली के लिए बुलाया जाएगा। भर्ती कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य को आवंटित अग्निवीर पदों की संख्या सीधे तौर पर पंजीयन की संख्या के अनुपात में निर्धारित की जाती है। विगत तीन वर्षों में देखा जाए तो वर्ष 2023-24 में 14,153 पंजीयन हुए और 895 पद आबंटित, वर्ष 2024-25 में 19,355 पंजीयन हुए एवं 731 पद आबंटित, वर्ष 2025-26 में 28,547 युवाओं द्वारा पंजीयन किया गया है। इसके आधार पर अनुमानित 1100 से 1300 तक पद छत्तीसगढ़ के लिए आबंटित होने की संभावना है।

स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने दो-दो लाख स्वीकृत

मुंगेली. समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत राज्य कार्यालय द्वारा मुंगेली जिले के चिन्हांकित हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु प्रत्येक विद्यालय को दो लाख की स्वीकृति दी गई है। इस राशि का उद्देश्य विद्यालयों में संचालित व्यवसायिक ट्रेड के अनुरूप आवश्यक सामग्री एवं संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं व्यवहारिक शिक्षा मिल सके। इन स्कूलों में आवश्यकता आधारित कार्य योजना के निर्माण व परीक्षण के लिए एसडीएम कीअध्यक्षता में बीईओ एवं बीआरसी सहित एक कमेटी का गठन किया गया है,जो कि प्रत्येक स्कूल के लिए पृथक कार्य योजना प्रस्तुत करेगी। ताकि शासन से प्राप्त राशि का सदुपयोग सुनिश्चित किया जा सके। डीईओ को निर्देशित किया गया है कि वित्तीय समय सीमा में राशि का उपयोग सुनिश्चित करें। कलेक्टर कुंदन कुमार के मार्गदर्शन में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विद्यालयों में आवश्यक संसाधन शीघ्र उपलब्ध हों,जिससे व्यवसायिक शिक्षा को मजबूती मिले।

अवैध रेत उत्खनन रोकने बनेगी ग्राम निगरानी समिति

जांजगीर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने और रेत माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हेतु योजना बनाई है। उन्होंने तस्करों और अवैध रेत उत्खनन करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ग्राम स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सचिव, सरपंच और कोटवार को शामिल करते हुए विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। अवैध उत्खनन और परिवहन पर विशेष टीम तत्काल तहसीलदार और एसडीएम को सूचना देगी, इसके बाद माइनिंग, टास्क फोर्स, राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा अवैध उत्खनन और परिवहन पर कार्यवाही करेगी। इसके अलावा कलेक्टर ने धान खरीदी के दौरान भौतिक सत्यापन में जहां-जहां गड़बड़ी पाई गई है वहां तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रत्येक मंगलवार और बुधवार को सभी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से अपने-अपने कार्यालय में उपस्थित रहने को कहा है ताकि आमजन की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी निराकरण किया जा सके । इसके अलावा ई–ऑफिस के माध्यम से सभी फाइलों का संचालन करने और विभागीय पत्राचार में डिजिटल माध्यम अपनाने के निर्देश दिए हैं।

जशपुर के दूरस्थ ग्रामों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना शुरू

जशपुर. मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 के तहत तीन रूट के बसों को नगरपालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत द्वारा हरी झण्डी दिखाकर शुभारंभ किया गया। इनमें क्रमशः बिचीटोली से मनोरा, जूनाडीह (लवाकेरा) से बासनतला, नारायणपुर (किलकिला) से पत्थलगांव रूट के बसें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व में 08 बसें संचालित है। इस प्रकार जशपुर जिले में कुल 11 बसे संचालित हो रही है। इससे जिले के ग्रामीण अंचलों के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सुविधाजनक परिवहन का लाभ मिल सकेगा। यह पहल ग्रामीण अंचलों में बेहतर यातायात सुविधा प्रदान करने और आम जनता की आवागमन को और अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

CM साय का बड़ा बयान: छत्तीसगढ़ बजट 2026 किसानों और युवाओं के लिए होगा ऐतिहासिक

रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के राज्य बजट को प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि नवीन विधानसभा भवन में प्रस्तुत होने जा रहा हमारी सरकार का यह तीसरा बजट विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार के विज़न को नई मजबूती प्रदान करेगा।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का यह बजट समावेशी विकास, सुशासन और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाने वाला होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुद्दढ़ करने के साथ-साथ आमजन के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प को केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। किसानों, गरीबों, युवाओं, मातृशक्ति और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं।  उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वित्त वर्ष 2026-27 का यह बजट प्रदेश के‘‘सुशासन से समृद्धि‘'मॉडल को मजबूत आधार प्रदान करेगा और विकास की गति को और तेज करेगा।  यह बजट राज्य के बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन, कृषि उन्नयन, सामाजिक सुरक्षा तथा मानव संसाधन विकास को नई दिशा देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के अपने संकल्प पर द्दढ़ है और यह बजट उस दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बजट से प्रदेश आत्मनिर्भरता, आर्थिक प्रगति और समृद्धि के नए दौर में प्रवेश करेगा।  साय ने प्रदेशवासियों को आगामी बजट के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह बजट छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला साबित होगा।  

प्रकृति की गोद में रोमांच — बारनवापारा अभयारण्य की अनोखी दुनिया

रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर महासमुंद जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। लगभग 245 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभ्यारण्य साल और सागौन के घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां का शांत वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियां पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराती है। बारनवापारा में चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, चौसिंगा, भालू तथा कभी-कभी तेंदुए की झलक भी देखने को मिल जाती है। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के पक्षी यहां के वातावरण को और जीवंत बनाते हैं। वन विभाग द्वारा संचालित जीप सफारी पर्यटकों को जंगल के भीतर सुरक्षित भ्रमण का अवसर देती है। सुबह और शाम का समय वन्यजीवों को देखने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह अभयारण्य सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट है। रेल यात्रियों के लिए रायपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन सबसे सुविधाजनक स्टेशन है। रायपुर, महासमुंद और बलौदाबाजार से नियमित बस एवं टैक्सी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। निजी वाहन से पहुंचना अधिक सुविधाजनक रहता है। अभयारण्य में प्रवेश शुल्क और सफारी शुल्क निर्धारित हैं। यहां पार्किंग, गाइड, वॉच टॉवर, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे सफारी के लिए अग्रिम बुकिंग कराएं और प्लास्टिक का उपयोग न करें। बारनवापारा की यात्रा को और अधिक सुखद बनाने के लिए पर्यटन मंडल द्वारा संचालित मोहदा रिसोर्ट विशेष आकर्षण का केंद्र है। यह रिसोर्ट प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित है और यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त कमरे, रेस्टोरेंट, बच्चों के खेलने की जगह तथा हरियाली से घिरा शांत परिसर उपलब्ध है। परिवार और समूह में आने वाले पर्यटकों के लिए यह ठहरने का एक उत्कृष्ट विकल्प है। यहां स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी लिया जा सकता है। जंगल सफारी और मोहदा रिसोर्ट की बुकिंग वनविभाग और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की साइट से की जा सकती है। बारनवापारा के समीप स्थित तुरतुरिया भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां प्राचीन अवशेष, शांत वन क्षेत्र और जलधाराएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। तुरतुरिया को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ी मान्यता के कारण धार्मिक और पौराणिक महत्व भी प्राप्त है। यहां पिकनिक और प्रकृति अवलोकन के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है। लोक मान्यता है कि माता सीता ने वनवास के दौरान यहीं आश्रय लिया था और लव-कुश का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ। इस कारण यह स्थल धार्मिक आस्था का केंद्र है। यह क्षेत्र घने जंगलों, पहाड़ियों और शांत वातावरण से घिरा हुआ है। यहां बहने वाली छोटी जलधाराएं और प्राकृतिक झरने इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और पिकनिक मनाने वालों के लिए यह आकर्षक स्थान है। तुरतुरिया में प्राचीन मंदिरों और संरचनाओं के अवशेष मिले हैं, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को दर्शाते हैं। पुरातात्विक दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्राकृतिक गरम जल कुंड भी पाए जाते हैं, जिनके बारे में स्थानीय मान्यता है कि इनका जल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। यही “तुर-तुर” ध्वनि से निकले नाम की एक मान्यता भी बताई जाती है। अभयारण्य से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित सिरपुर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। प्राचीन मंदिर, बौद्ध विहार और पुरातात्विक अवशेष यहां के प्रमुख आकर्षण हैं, जो इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। बारनवापारा घूमने का सर्वाेत्तम समय अक्टूबर से जून तक माना जाता है। वर्षा ऋतु में हरियाली अपने चरम पर होती है, हालांकि कभी-कभी सफारी सेवाएं सीमित हो सकती हैं। यात्रा के दौरान हल्के रंग के वस्त्र पहनना, दूरबीन और कैमरा साथ रखना तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। बारनवापारा अभयारण्य, सिरपुर और तुरतुरिया मिलकर एक ऐसा पर्यटन परिपथ तैयार करते हैं, जहां प्रकृति, रोमांच, इतिहास और आरामदायक आवास की सुविधाएं एक साथ मिलती हैं। यदि आप सप्ताहांत में सुकून भरी और यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह क्षेत्र आपके लिए एक आदर्श गंतव्य सिद्ध हो सकता है।

रायपुर में पार्किंग की समस्या होगी खत्म: पहली मैकेनाइज्ड मल्टीलेवल पार्किंग बनकर तैयार, जल्द शुरू होगी सेवा

रायपुर राजधानी रायपुर में बढ़ती वाहनों की संख्या और पार्किंग की समस्या को देखते हुए नगर निगम ने महानगरों की तर्ज पर पहला मैकेनाइज्ड मल्टीलेवल पार्किंग तैयार कर लिया है। यह पार्किंग निगम मुख्यालय परिसर में बनाई गई है। इस अत्याधुनिक पार्किंग सिस्टम को एक सप्ताह के भीतर शुरू भी कर दिया जाएगा। फिलहाल इसमें नगर निगम की गाड़ियां ही खड़ी की जाएंगी। बता दें कि निगम मुख्यालय परिसर में बनाई गई यह पार्किंग करीब 20 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुई है, जहां एक समय में 12 कारों को पार्क करने की सुविधा होगी। पूरी तरह से तैयार हो चुके इस पार्किंग सिस्टम में हाइड्रोलिक सिस्टम लगाया गया है, जिससे कम जगह में अधिक वाहनों को सुरक्षित तरीके से खड़ा किया जा सकेगा। नगर निगम के अधीक्षक अभियंता इमरान खान ने बताया कि मैकेनाइज्ड पार्किंग पूरी तरह बनकर तैयार है और एक सप्ताह के भीतर इसे निगम को हैंडओवर कर दिया जाएगा। प्रारंभिक चरण में यहां केवल निगम की गाड़ियां ही पार्क की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से परिसर में जगह की बचत होगी और वाहन सुरक्षित भी रहेंगे। पंडरी स्थित महालक्ष्मी मार्केट के पास बन रही दूसरी पार्किंग गौरतलब है कि निगम मुख्यालय परिसर के अलावा पंडरी स्थित महालक्ष्मी मार्केट के पास भी मैकेनाइज्ड मल्टीलेवल पार्किंग तैयार की जा रही है, जिसकी क्षमता 16 कारों की होगी। शहर में स्मार्ट और व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नगर निगम का मानना है कि भविष्य में ऐसे और भी मैकेनाइज्ड पार्किंग सिस्टम विकसित किए जा सकते हैं, जिससे शहर में पार्किंग की समस्या को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

कल्याणपुर–लटोरी–दतिमा–सलका मार्ग का होगा सुदृढ़ीकरण ,40.93 करोड़ रुपए स्वीकृत, 29 किमी सड़क उन्नयन से विकास को मिलेगी नई रफ्तार रायपुर, राज्य सरकार की जनकल्याणकारी एवं विकासोन्मुखी नीति के अनुरूप क्षेत्र में आधारभूत अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री एवं भटगांव विधायक लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से जिला सूरजपुर अंतर्गत कल्याणपुर–लटोरी–दतिमा– सलका (मुख्य जिला मार्ग) के विभिन्न खंडों में सड़क सुदृढ़ीकरण एवं निर्माण कार्य के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। लगभग 29 किलोमीटर लंबाई में प्रस्तावित इस कार्य के लिए 40.93 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। यह मार्ग क्षेत्र के अनेक ग्रामों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिसके उन्नयन से आवागमन अधिक सुगम, सुरक्षित एवं तीव्र होगा। इससे ग्रामीण अंचलों का जिला मुख्यालय एवं अन्य प्रमुख स्थलों से बेहतर संपर्क स्थापित होगा। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सड़क केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि विकास की जीवनरेखा है। सुदृढ़ सड़क संपर्क से किसानों को अपनी उपज समय पर बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी, विद्यार्थियों को शिक्षा संस्थानों तक सुगमता से पहुंच सुनिश्चित होगी तथा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक त्वरित पहुंच संभव हो सकेगी। साथ ही व्यापार, लघु उद्योग एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता एवं समावेशी विकास के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। अधोसंरचना विकास के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से चरणबद्ध रूप से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।