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राष्ट्रपति ने आदिवासी बालिका को पढ़ाने का किया आह्वान

रायपुर. बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति  मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।  जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े। राष्ट्रपति  मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल  रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे। राज्यपाल  डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है। बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।        

कदमघर खरीदारों के हित में छत्तीसगढ़ रेरा का अहम निर्णय छत्तीसगढ़ में

रायपुर. रेरा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में छत्तीसगढ़ रेरा का महत्वपूर्ण कदम छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण ने राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन तथा रियल एस्टेट अधिनियम, 2016 के प्रभावी अनुपालन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 14 बैंकों को अंतिम पैनल (फाइनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया है। रेरा अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ रेरा द्वारा 03 अप्रैल 2025 को 17 बैंकों को अस्थायी पैनल (प्रोविजनल एम्पैनलमेंट) में शामिल किया गया था। निर्धारित प्रक्रियाओं, आवश्यक शर्तों एवं मापदंडों की पूर्ति के उपरांत अब इनमें से 14 बैंकों को अंतिम पैनल में सम्मिलित किया गया है। अंतिम पैनल में शामिल बैंकों में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, केनरा बैंक, डीसीबी बैंक, फेडरल बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, कर्नाटक बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा यूको बैंक शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रेरा अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं से संबंधित पृथक रेरा खाते केवल उन्हीं बैंकों में संचालित किए जाएं, जो रेरा नियमों एवं दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करते हों। इससे परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन में अनुशासन स्थापित होगा, निधियों के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा घर खरीदारों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इस संबंध में छत्तीसगढ़ रेरा के अध्यक्ष  संजय शुक्ला ने कहा कि रेरा के अंतर्गत पंजीकृत परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बैंकों के अंतिम पैनल में शामिल होने से परियोजना खातों की निगरानी एवं नियंत्रण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, जिससे घर खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा और राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र अधिक व्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनेगा। छत्तीसगढ़ रेरा ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र को पारदर्शी, व्यवस्थित एवं भरोसेमंद बनाने के लिए इस प्रकार की पहलें भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगी।

नन्हे वीरों की बड़ी उड़ान: अबूझमाड़ के मल्लखंब खिलाड़ियों ने राष्ट्रपति के समक्ष रचा इतिहास

रायपुर. राष्ट्रपति  मुर्मु ने की प्रशंसा, ताली बजाकर हौसला बढ़ाया छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और लंबे समय तक संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले अबूझमाड़ ने शनिवार को अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम के शुभारंभ समारोह में अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी के नन्हे खिलाड़ियों ने देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु के समक्ष मल्लखंब की अद्भुत प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह पहला अवसर था जब अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने एक साथ राष्ट्रपति के समक्ष मल्लखंब का जीवंत और साहसिक प्रदर्शन किया। लकड़ी के खंभे पर जब इन नन्हे कलाकारों ने असाधारण संतुलन, फुर्ती और कठिन करतबों का प्रदर्शन किया, तो मैदान में मौजूद दर्शक विस्मय से भर उठे। जोश, अनुशासन और उत्कृष्ट तकनीक से सजी इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु स्वयं बच्चों की प्रतिभा से अत्यंत प्रभावित हुईं । उन्होंने न केवल उनके साहस, कला और अनुशासन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी प्रदान कीं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव नारायणपुर जिले के उन दुर्गम और बीहड़ इलाकों में पड़ी है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं सीमित हैं। कुटूर, करपा और परपा जैसे सुदूर वनांचलों से निकलकर इन बच्चों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा न तो संसाधनों की मोहताज होती है और न ही भौगोलिक सीमाओं की। इस संघर्षपूर्ण यात्रा के प्रेरणास्रोत मनोज प्रसाद हैं, जो एकेडमी के संस्थापक होने के साथ-साथ 16वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। उनके कुशल नेतृत्व, अनुशासन और सतत मार्गदर्शन में इन बच्चों ने अभावों को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इन नन्हे मल्लखंब खिलाड़ियों ने ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ का खिताब जीतकर और ‘रोमानियाज गॉट टैलेंट’ में उपविजेता बनकर पहले ही वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में 40 से 50 से अधिक टेलीविजन शो, देशभर में सैकड़ों मंचीय प्रस्तुतियों, तथा अनेक प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और रजत पदक जीतकर यह टोली निरंतर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही है। अब यह दल अपनी मिट्टी की खुशबू, लोक-संस्कृति और अद्वितीय कौशल को और अधिक सशक्त रूप में सात समंदर पार ले जाने के लिए तैयार है। एकेडमी का अगला लक्ष्य भविष्य में ‘अमेरिकाज गॉट टैलेंट’ और ‘ब्रिटेन्स गॉट टैलेंट’ जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर भारत और अबूझमाड़ की लोक-कला का प्रदर्शन करना है। जगदलपुर में हुआ यह ऐतिहासिक प्रदर्शन न केवल अबूझमाड़ मल्लखंब एंड स्पोर्ट्स एकेडमी, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। यह आयोजन ‘बदलते बस्तर’ की उस सशक्त तस्वीर को प्रस्तुत करता है, जहां संघर्ष की जमीन से प्रतिभा के नए सितारे उभर रहे हैं।

जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज अब भी अधूरा

जगदलपुर. जगदलपुर का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बस्तरवासियों के लिए राहत का केंद्र बनना था, लेकिन अब सवालों में है. दिल, किडनी और न्यूरो इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी खत्म करने का दावा अब खोखला दिख रहा है. 240 बिस्तरों वाला अस्पताल शुरू तो हो गया, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है. कई विभागों में आधुनिक मशीनें मौजूद हैं, पर उन्हें संचालित करने वाले विशेषज्ञ नहीं. ओपीडी को आनन-फानन में शुरू कर दिया गया, लेकिन परामर्श की व्यवस्था कमजोर बनी हुई है. आईसीयू और आपात सेवाओं के 24 घंटे संचालन के दावे जमीन पर पूरे नहीं उतर रहे. गंभीर मरीजों को आज भी बड़े शहरों में रेफर किया जा रहा है. सरकारी दरों पर इलाज का वादा, निजी मॉडल की कार्यप्रणाली में उलझता दिख रहा है. मरीजों से शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन सुविधाएं अधूरी हैं. अब सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बनी यह व्यवस्था आम जनता को कब राहत देगी. स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रशासनिक निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है.

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव पर रोक की याचिका खारिज

बिलासपुर. बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए अब हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है। कोर्ट ने चुनाव से जुड़े विवादों का समाधान सही समय और मंच पर करने का निर्देश कहा है। याचिकाकर्ताओं ने महिला आरक्षण के साथ ही कार्यकारिणी का पद बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी की कोर्ट में हुई। दरअसल, बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लिए 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अध्यक्ष सहित 17 पदों के लिए 61 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। एडवोकेट निरूपमा वाजपेयी ने हाई कोर्ट में यााचिका दायर कर कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रशासक समिति द्वारा चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी 15 की थी, जिसे गलत तरीके से बढ़ाकर महिला आरक्षण तय किया गया है। जबकि, प्रशासक को कार्यकारिणी के पदों में वृद्धि करने का अधिकार नहीं है। केवल सामान्य सभा के जरिए ही पद बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, सामान्य सभा की अनुमति जरुरी है। हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद, चुनावी प्रक्रिया जारी रखने पर उन्होंने आवेदन भी प्रस्तुत किया था, जिसमें चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कार्यकाल खत्म हो चुका है, जिसके चलते हाई कोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद ने प्रशासक नियुक्त किया है। प्रशासक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद से मार्गदर्शन लेकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की है। मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा, चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई और मतदान की तारीख के साथ ही नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी हो चुकी है। ऐसे में चुनाव पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी बस्तर पंडुम का शुभारंभ

रायपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज छत्तीसगढ़ के बस्तर दौरे पर रहेंगी. वह सुबह 9.10 बजे भुवनेश्वर से उड़ान भरकर मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगी. इसके बाद राष्ट्रपति लाल बाग मैदान में आयोजित बस्तर पण्डुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगी. 10.55 से 11.10 बजे तक वह बस्तर पण्डुम में लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन करेंगी, जबकि 11.10 से 12.15 बजे तक कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ करेंगी. राष्ट्रपति मुर्मू करीब तीन घंटे छत्तीसगढ़ में प्रवास के बाद दोपहर 1.30 बजे रायपुर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होंगी. सीएम विष्णुदेव साय का बस्तर दौरा  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुबह 10.05 बजे मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत करेंगे. वह 11 बजे बस्तर पण्डुम 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके बाद दोपहर 12.30 बजे मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से रायपुर के लिए रवाना होंगे और रायपुर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति मुर्मू को विदाई देंगे. सीएम साय 1.45 बजे नए मुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे. शाम 4.15 बजे वह दोबारा रायपुर एयरपोर्ट जाएंगे और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का स्वागत करेंगे. इसके बाद शाम 6 बजे एक निजी होटल जाएंगे और वहां से सीधे नए सीएम हाउस पहुंचकर कुछ देर विश्राम करेंगे. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचेंगे. वह 7 फरवरी को शाम 4.40 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचकर निजी होटल के लिए रवाना होंगे. 8 फरवरी को सुबह 11 बजे से बैठकों का दौर शुरू होगा, जहां शाम 5 बजे तक नक्सलवाद को लेकर हाई लेवल मीटिंग की जाएगी. इस दौरान केंद्र और राज्य के अधिकारियों के साथ LWE और विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक में रणनीति तैयार की जाएगी. शाम 5 से 6.10 बजे तक वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होंगे और होटल में ही रात्रि विश्राम करेंगे. 9 फरवरी को अमित शाह बस्तर पण्डुम के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे. वह सुबह 11 बजे विशेष विमान से रायपुर से दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगे और सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल जाएंगे. दोपहर 12.05 से शाम 4 बजे तक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शाम 4.20 बजे जगदलपुर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे.

रात का पारा बढ़ने से दिन रहेगा गर्म

रायपुर. छत्तीसगढ़ में आज फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है. फरवरी के पहले सप्ताह में दोपहर के वक्त गर्मी लोगों के पसीने छूटा रही है. हालांकि सुबह को कोहरे और रात के समय हल्की ठंड का सिलसिला जारी है. आगामी दिनों में रात के तापमान में बढ़ोतरी के संकेत है. राजनांदगांव में 32 डिग्री रिकॉर्ड मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश में मौसम शुष्क रहा. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज किया गया. बढ़ेगा रात का पारा मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तर अफगानिस्तान उससे लगे क्षेत्र में स्थित है. प्रदेश में 7 फरवरी को मौसम शुष्क रहने की संभावना है. प्रदेश में न्यूनतम तापमान में अगले दो दिनों तक कोई विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है, उसके बाद न्यूनतम तापमान में 2 डिग्री के आसपास वृद्धि होने की संभावना है. एक नया पश्चिमी विक्षोभ 8 फरवरी को उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?  राजधानी रायपुर में शनिवार को सुबह के वक्त धुंध छाया रह सकता है. मौसम विभाग का अनुमान है कि आज अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है.

शिक्षा विभाग का फैसला- मास्टर कैडर के लिए PSTET-2 पास करना जरूरी

पटियाला. पंजाब में मास्टर कैडर के पदों पर प्रमोशन को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। डायरेक्टर ऑफ स्कूल एजुकेशन (सेकेंडरी) पंजाब की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब मास्टर कैडर में नियुक्ति और प्रमोशन के लिए पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET-2) पास करना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि पहले मेमो नंबर 19/23-16 A-4 (5) दिनांक 14.09.2017 के तहत कुछ कर्मचारियों को PSTET से छूट दी गई थी। यह छूट उन अध्यापकों को मिली थी जो NCTE की अधिसूचना 23.08.2010 और RTE एक्ट 2009 के तहत PSTET की पहली घोषणा 30.07.2011 के बाद सेवा में आए थे। हालांकि, अब माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 01 सितंबर 2025 को दिए गए फैसले (भरुनेग मुथविभा वेवत तैले अंजुमन-ए-इशात बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) के बाद स्थिति बदल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मास्टर कैडर में नियुक्ति और प्रमोशन के लिए PSTET-2 पास करना अनिवार्य घोषित किया है। इस फैसले के आधार पर शिक्षा विभाग ने पुराने नोटिस को रद्द करते हुए नया आदेश जारी किया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि जो कर्मचारी प्रमोशन के बाद मास्टर कैडर में कार्यरत हैं और जिनकी शेष सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक है, यदि उन्होंने अब तक PSTET-2 पास नहीं किया है तो उन्हें दो वर्षों के भीतर PSTET-2 पास करना होगा। ऐसा न करने पर विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राज्यपाल डेका और CM साय ने काफिला रोककर देखी NH-30 के कार्य की प्रगति

कोंडागांव. रायपुर से जगदलपुर जाते समय शुक्रवार को केशकाल में अचानक राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय का काफिला रुक गया. वजह थी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर चल रहा सड़क उन्नयन कार्य. मुख्यमंत्री ने मौके पर उतरकर निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया और अधिकारियों को साफ शब्दों में चेताया कि काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एनएच-30 बस्तर संभाग की सबसे अहम सड़क है, जो राजधानी रायपुर को बस्तर और अन्य राज्यों से जोड़ती है. ऐसे में सड़क निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को तय मापदंडों के अनुसार काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए. केशकाल बायपास पर भी नजर निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री साय ने केशकाल नगर के साथ-साथ केशकाल बायपास निर्माण कार्य की जानकारी ली. कलेक्टर को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य समय-सीमा के भीतर पूरा कराया जाए और नियमित निगरानी रखी जाए, ताकि आम लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके. कोंडागांव में दीदी की रसोई पहुंचे, फरा-अंगाकर रोटी चखी इसके बाद राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय कोंडागांव पहुंचे. यहां उन्होंने बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित “मोर सुआद–दीदी की रसोई” का निरीक्षण किया. महिलाओं ने पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया. मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने बस्तर के पारंपरिक व्यंजन फरा और अंगाकर रोटी का स्वाद लिया. मुख्यमंत्री साय ने समूह की महिलाओं से आय और कामकाज की जानकारी ली और कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत माध्यम हैं. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि महिलाओं को आजीविका के लिए हर संभव सहयोग दिया जाए. लोक कलाकारों की पेंटिंग्स देखी इस दौरान जिले के लोक कलाकारों की पेंटिंग्स का भी अवलोकन किया गया. मुख्यमंत्री साय ने कलाकारों से बातचीत कर उनके रचनात्मक प्रयासों की सराहना की. कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, बस्तर सांसद, कोंडागांव विधायक सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.

जनकल्याण को बढ़ावा: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने हितग्राहियों को सौगातें प्रदान कीं

  रायपुर. वन मंत्री  केदार कश्यप एवं विधायक  किरण सिंह देव भी रहे उपस्थित स्थानीय सर्किट हाऊस में शुक्रवार की शाम उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित एक गरिमामय समारोह में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ जब जमीनी स्तर पर उतरा, तो हितग्राहियों के चेहरे खिल उठे। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप एवं विधायक  किरण सिंह देव ने विभिन्न विभागों के माध्यम से पात्र लोगों को सामग्री और सहायता राशि वितरित कर सबका साथ, सबका विकास के मंत्र को चरितार्थ किया। कार्यक्रम के दौरान सबसे भावुक और उत्साहजनक क्षण तब देखने को मिले जब समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने की पहल की गई। उप मुख्यमंत्री  शर्मा, वनमंत्री  कश्यप एवं विधायक  देव ने करण नाग, संजय सांतरा और विजय मौर्य को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल सौंपी, जिससे अब उनकी जिंदगी की रफ्तार नहीं थमेगी। इसी क्रम में राकेश कुमार मिश्रा को कृत्रिम पैर और विपिन सिंह को श्रवण यंत्र प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्य धारा में सम्मान के साथ जीने का संबल दिया गया। शिक्षा और तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए समग्र शिक्षा अभियान के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, विवेक कुमार और सुभद्रा को मोबाइल किट तथा जयबती और गायत्री को टैबलेट वितरित किए गए, ताकि ये बच्चे डिजिटल युग के साथ कदमताल कर सकें। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत महिला समूहों को बड़े संसाधन सौंपे गए। जागृति, तिरंगा, इंद्रावती और झांसी की रानी महिला क्लस्टर संगठनों को ईंट-सीमेंट निर्माण इकाई के संचालन हेतु चेक व स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही कंकालीन और दुर्गा स्व-सहायता समूहों जैसी संस्थाओं को भी प्रोत्साहित किया गया। बरसों से अपने पक्के मकान का सपना देख रहे परिवारों के लिए भी यह शाम यादगार बन गई। उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण) के तहत लक्ष्मी बाई राव, बबिता कश्यप, अलाबती, गजमती और सेवती नायक समेत कई गृहणियों को उनके सपनों के घर की चाबी सौंपी। वहीं छोटे व्यापारियों को मदद पहुंचाने के लिए पीएम स्वनिधि योजना के तहत ममता यादव और नासिर खान को चेक प्रदान किए गए, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुजुर्ग हितग्राहियों को प्रधानमंत्री वय वंदना योजना का लाभ देकर सरकार ने हर वर्ग के प्रति अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी, सीईओ जिला पंचायत  प्रतीक जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।