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मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तृतीय चरण का सीएम साय ने वर्चुअल किया शुभारंभ

बीजापुर. मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तृतीय चरण का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ करते हुए बीजापुर जिले को दो नई बस सेवाओं की सौगात दी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण एवं सुदूर अंचलों में आवागमन को सुगम बनाते हुए परिवहन सुविधाओं का विस्तार करना है। शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने बीजापुर जिलेवासियों एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को बस सेवा प्रारंभ होने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सेवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तृतीय चरण के अंतर्गत बीजापुर जिले में जिन बस मार्गों पर संचालन प्रारंभ किया गया, उनमें कचलारम से जगदलपुर (तोयनार-धनोरा मार्ग होते हुए), कोतापाल-बीजापुर-नैमेड, भैरमगढ़-गीदम (एक फेरा वापसी) प्रतिदिन कुल 190 किलोमीटर, तथा पामेड़ से बीजापुर (कोण्डापल्ली-तर्रेम-बासागुड़ा-आवापल्ली मार्ग होते हुए) कुल 104 किलोमीटर शामिल हैं। वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान सीईओ जिला पंचायत नम्रता चौबे ने बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारीगण एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। ग्रामीण बस सेवा के प्रारंभ होने से बीजापुर जिले के सुदूर एवं आदिवासी क्षेत्रों के नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ एवं नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

रायपुर: स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं, साधारण जीवन के असाधारण दस्तावेज

रायपुर : स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं साधारण मनुष्य के असाधारण जीवन का दस्तावेज रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण 'स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां' विषय पर हुई परिचर्चा छत्तीसगढ़ ने बीते 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार नई दिशा दी, इनमें  शुक्ल भी शामिल : डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी रायपुर   नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन  देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने  उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने  शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया। रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि  शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है। नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार सु आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि  शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं। जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार  सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने  शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग  शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक  अनुभव शर्मा ने कहा कि  विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि  शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं। अभिनेत्री सु टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार  विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को  शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं। परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिले सुप्रसिद्ध अभिनेता नीतिश भारद्वाज

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  नीतीश भारद्वाज का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट से निर्मित महुआ वृक्ष की कलाकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की जानकारी भी साझा की।  इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा,मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

खड़गवाँ से बेलबहरा मार्ग को मिलेगा नया रूप, रायपुर में आवागमन होगा आसान

रायपुर : खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत बेलबहरा से ग्राम लालपुर मार्ग होगा सुगम, आवागमन को मिलेगा बड़ा लाभ सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण को पाँच करोड़ बारह लाख रुपये की मिली प्रशासकीय मंजूरी रायपुर मनेंद्रगढ़ विधानसभा के खड़गवाँ जनपद के ग्राम पंचायत बेलबहरा से ग्राम लालपुर मार्ग पर सुखाड़ नाला पर पुल निर्माण के लिए पाँच करोड़ बारह लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति लोक निर्माण विभाग द्वारा मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दी गई है। इस परियोजना से क्षेत्रवासियों को मनेंद्रगढ़ मुख्यालय की स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा साथ ही खडगंवा और बैंकुंठपुर की दूरी भी घटेगी। पुल निर्माण से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके पूरा होते ही पेंड्रा गौरेला मरवाही जिला नजदीक हो जाएगा, जिससे आवागमन सुगम बनेगा। वर्तमान में इस मार्ग पर नियमित परिवहन सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन पुल बनने के बाद बस सेवा शुरू होने की संभावना बढ़ेगी। स्थानीय विधायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री  अरुण साव को मनेंद्रगढ़ की समस्त जनता की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित कर उनका आभार प्रकट किया है । स्थानीय नागरिकों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पुल निर्माण से विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों का शहरों से सीधा संपर्क स्थापित होगा।

‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर हुई परिचर्चा

रायपुर. रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन  देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया। ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल : साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने  उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया। वक्ताओं ने  शुक्ल और उनकी रचनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उनके साहित्य को मानवीय संवेदना और मौलिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय उदाहरण बताया। रायपुर साहित्य उत्सव में  शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण परिचर्चा के प्रथम वक्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि वे वर्ष 1973 से लगातार विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार दिशा दी है। ठाकुर जगमोहन सिंह, माधवराव सप्रे, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पांडेय से लेकर विनोद कुमार शुक्ल तक की परंपरा ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि  शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुगमन नहीं किया, उनका संपूर्ण लेखन मौलिक है। उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी पूरी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है। शोषितों का जीवन, खुद के गढ़े हुए मुहावरे, सरल भाषा और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है। उनके उपन्यासों में ‘घर’ सबसे खूबसूरत और मानवीय प्रतीक के रूप में उभरता है। नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार सु आकांक्षा पारे ने कहा कि कई लोग विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं को दुरूह कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन बहुत से पाठकों को इन्हीं रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि  शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे, उनकी रचनाएं मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं। जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार  सौरभ शर्मा ने कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है। वे बड़े कवि और लेखक तो थे ही, उससे भी बड़े इंसान थे। उन्होंने  शुक्ल के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बैठना सुकून से भर देता था, समय का पता ही नहीं चलता था। उन्होंने बताया कि ‘स्मृति’ का प्रयोग  शुक्ल के साहित्य में विपुलता से हुआ है। उनकी रचनाएं पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक  अनुभव शर्मा ने कहा कि  विनोद कुमार शुक्ल को पढ़ने के बाद उन्होंने उनके साहित्य को जिया है। उनकी रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमें अपने आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि  शुक्ल ने उन्हें भी लिखने के लिए प्रेरित किया। ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ जैसे छोटे-छोटे प्रतीक उनकी रचनाओं में हर जगह मिलते हैं। उनकी कथाएं हमारी मिट्टी से उपजे शब्दों में अपनी बात कहती हैं और प्याज की तरह परत-दर-परत खुलती जाती हैं। अभिनेत्री सु टी.जे. भानु ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि साहित्य उन्हें बचपन से संबल देता रहा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार  विनोद कुमार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो लगा कि यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि वे हर वर्ष 1 जनवरी को  शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं। उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं। परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि स्वर्गीय  विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियां हैं। उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है। वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएं पूरी दुनिया को जोड़ती हैं।

दिल्ली के राजपथ से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ा, शहरी पथ-विक्रेताओं को पीएम का आमंत्रण: अरुण साव

रायपुर छत्तीसगढ़ के शहरी पथ-विक्रेताओं को पीएम मोदी का न्यौता मिलना बड़ी बात : उप मुख्यमंत्री  अरुण साव नई दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाले देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष एक नई और ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के शहरी पथ-विक्रेता भी सहभागी बनेंगे। यह पहली बार है जब छत्तीसगढ़ राज्य के शहरी पथ-विक्रेताओं को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर देश के माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम अपने संदेश में देशभर के पथ-विक्रेता भाई-बहनों को संबोधित करेंगे। उप मुख्यमंत्री-सह-नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरूण साव ने आज नगर पालिका परिषद मुंगेली के पथ-विक्रेता  बाबूलाल बुनकर और नगर पालिका परिषद लोरमी के शहरी पथ-विक्रेता  सोना कुमार कैवर्त्य से वीडियो कॉल पर बात की। इस दौरान दोनों से उनके कार्यों की चर्चा कर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मिलित होने पर बधाई दी। दोनों पथ-विक्रेता प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत लाभान्वित हैं तथा अपने-अपने क्षेत्रों में ईमानदारी एवं परिश्रम से आजीविका अर्जित कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री  साव ने दोनों पथ-विक्रेताओं से वीडियो काल से चर्चा कर इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह अवसर छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायी है। वर्षों से देश की शहरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे पथ-विक्रेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान एवं पहचान दिलाने की दिशा में यह एक सार्थक कदम है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व में उनकी भागीदारी सामाजिक समावेशन, आत्मनिर्भर भारत और समावेशी विकास की भावना को सशक्त रूप से दर्शाती है। छत्तीसगढ़ के पथ-विक्रेताओं को प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं लोटस टेंपल (कमल मंदिर) का भ्रमण भी कराया जाएगा। यह भ्रमण उनके लिए न केवल ज्ञानवर्धक होगा, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता एवं राष्ट्रीय मूल्यों को और अधिक गहराई से समझने का अवसर भी प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से देशभर के लाखों शहरी पथ-विक्रेताओं को स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता, डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा तथा सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। गणतंत्र दिवस समारोह जैसे राष्ट्रीय मंच पर पथ-विक्रेताओं की सहभागिता इस योजना की सफलता और इसके सामाजिक प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।                  उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने राज्य के दो पथ-विक्रेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह के राष्ट्रीय आयोजन में आमंत्रित किए जाने पर कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह क्षण विशेष रूप से गौरवपूर्ण है। राज्य के शहरी पथ-विक्रेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। इससे न केवल पथ-विक्रेताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि राज्य के अन्य पथ-विक्रेताओं को भी स्वावलंबन, अनुशासन और मेहनत से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। राज्य शासन एवं नगरीय निकायों द्वारा भी पथ-विक्रेताओं के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें सम्मानजनक आजीविका, सुरक्षित कार्यस्थल तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। गणतंत्र दिवस समारोह में भागीदारी इन प्रयासों की सार्थकता को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करती है। 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ के शहरी पथ-विक्रेताओं की सहभागिता समानता, सम्मान और समावेशी विकास के मूल्यों को सुदृढ़ करती है। यह पहल संदेश देती है कि राष्ट्र निर्माण में हर वर्ग, हर नागरिक और हर मेहनतकश की भूमिका महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ के लिए यह न केवल गर्व का विषय है, बल्कि सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी है।

राजभवन में सौजन्य मुलाकात: पुलिस कमिश्नर शुक्ला ने राज्यपाल डेका से की भेंट

रायपुर. राज्यपाल  रमेन डेका से आज लोक भवन में रायपुर के नवनियुक्त पुलिस कमिश्नर  संजीव शुक्ला ने सौजन्य मुलाकात की। पुलिस आयुक्त ने राज्यपाल को कानून व्यवस्था सहित विभिन्न विषयों की जानकारी दी। राज्यपाल  डेका ने उन्हें जनभावनाओं के अनुरूप बेहतर शान्ति और कानून-व्यवस्था बनाने रखने की शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ नीतिश भारद्वाज की सौजन्य मुलाकात, कई मुद्दों पर हुई चर्चा

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध फिल्म एवं टीवी अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्री नीतीश भारद्वाज का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट से निर्मित महुआ वृक्ष की कलाकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट की।मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की जानकारी भी साझा की। इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा,मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

फिल्मों से चमकेगा छत्तीसगढ़: चित्रोत्पला फिल्म सिटी रचेगी रचनात्मक अर्थव्यवस्था का नया अध्याय

रायपुर चित्रोत्पला फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को देगी नई गति छत्तीसगढ़ का बरसों पुराना सपना आज साकार हो गया है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के ग्राम माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का किया भूमि पूजन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण की आधारशिला रखी। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों, फिल्म कलाकारों, निर्माता-निर्देशकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के अभिनय और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के माध्यम से प्रदेश के हजारों हुनरमंद कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। स्थानीय फिल्म निर्माताओं को फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी तकनीकी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार में प्रदेश की कला और कलाकारों को उचित सम्मान मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने भूमिपूजन के साथ ही फिल्म निर्माण और कन्वेंशन सेंटर से संबंधित विभाग को चार प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण गतिविधियों को नई गति मिलेगी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को बड़े पर्दे पर स्थान मिलेगा। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज का यह अवसर छत्तीसगढ़ पर्यटन एवं फिल्म विकास उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक निर्माण परियोजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक भविष्य की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण राज्य है और इस पहल से पर्यटन के साथ-साथ फिल्म उद्योग को भी नया आयाम मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। हमारी स्पष्ट योजना है कि आगामी दो वर्षों के भीतर इन परियोजनाओं को पूर्ण कर राज्य को समर्पित किया जाएगा। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, विधायक  अनुज शर्मा, विधायक  इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष  नीलू शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल तथा पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने फिल्म सिटी के प्रस्तावित मास्टर प्लान का किया अवलोकन चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने परियोजना के प्रस्तावित मास्टर प्लान का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं तथा परियोजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी देखी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन अवसर पर पर्यटन विभाग को मिले 4 प्रस्ताव चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन के साथ ही पर्यटन विभाग को फिल्म निर्माण एवं कन्वेंशन सेंटर में इकाइयों की स्थापना हेतु चार प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। समारोह के दौरान ये प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपे गए। गदर फिल्म के निर्माता  अनिल शर्मा ने अपनी आगामी फिल्म का निर्माण चित्रोत्पला फिल्म सिटी में करने का प्रस्ताव दिया। इंडिया एक्सपोजीशन मार्ट लिमिटेड के चेयरमेन  राकेश कुमार ने ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर एवं ट्रेड मार्ट के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के चेयरमेन  नीरज खन्ना ने यहां वर्ल्ड क्लास हैंडीक्राफ्ट्स एंड गिफ्ट फेयर आयोजित करने का प्रस्ताव दिया। वहीं एटी फिल्म्स हॉलीवुड से  आशुतोष वाजपेयी ने हॉलीवुड फिल्मों एवं स्ट्रीमिंग वीडियो कंटेंट को चित्रोत्पला फिल्म सिटी में लाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा। उल्लेखनीय है कि राज्य में फिल्म टूरिज्म की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की “कैपिटल इन्वेस्टमेंट हेतु राज्यों को विशेष सहायता – ग्लोबल स्तर के आइकॉनिक पर्यटन केंद्रों का विकास” योजना के अंतर्गत इन दोनों परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के तहत चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण हेतु 95.79 करोड़ रुपये तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण हेतु 52.03 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं का क्रियान्वयन पीपीपी (पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र से लगभग 300 करोड़ रुपये के निवेश की भी संभावना है। परियोजनाओं को दो वर्षों की समयावधि में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे। फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ में स्थानीय एवं अन्य वाणिज्यिक फिल्मों और वेब सीरीज़ के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य के प्राकृतिक दृश्य, पर्यटन स्थल एवं समृद्ध संस्कृति फिल्म शूटिंग के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। फिल्म सिटी में गांव, शहर एवं गलियों के सेट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, जेल एवं पुलिस चौकी, स्कूल-कॉलेज, मंदिर एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों के सेट, स्कल्प्चर गार्डन, शॉपिंग स्ट्रीट, प्रोडक्शन ऑफिस, स्टूडियो, प्रशासनिक भवन एवं पार्किंग विकसित की जाएगी। साथ ही पर्यटकों के लिए टॉय म्यूजियम, स्नो वर्ल्ड, होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स एवं एक्सपीरियंस सेंटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में लगभग 1500 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कन्वेंशन हॉल विकसित किया जाएगा, जिसमें मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, बैंक्वेट, रेस्टोरेंट, अतिथि कक्ष, जिम, लाइब्रेरी, स्वीमिंग पूल एवं प्रशासनिक … Read more

राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा सम्मान समारोह में CM, जिम्मेदार ड्राइविंग पर दिया जोर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जन जागरूकता से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। यातायात नियमों के प्रति सजगता ही हमें जनहानि से बचा सकती है। मुख्यमंत्री राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा सम्मान समारोह में हुए शामिल मुख्यमंत्री  साय ने सड़क सुरक्षा का संदेश देते हुए स्वयं हेलमेट पहनकर बाइक चालकों के दल के साथ स्कूटी चलाई।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  साय ने राजधानी रायपुर के पंडरी में आधुनिक लाइसेंस सेंटर कार्यालय भवन पंडरी का भूमिपूजन और प्रदेश भर में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 12 नवीन मार्गों में 12 नवीन बसों का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मानव जीवन अनमोल है। उन्होंने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए यातायात नियमों के पालन की अपील आम नागरिकों से की जिससे वाहन दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके। आज इस कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे राहगीरों, पुलिस मितान, चिकित्सकों, यातायात पुलिस कर्मियों सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया गया है। ये सभी लोग इस कार्य में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में किसी माता की कोख सूनी हो जाती है, कई भाई अपनी बहन से हमेशा के लिए बिछड़ जाते हैं और कई बच्चे अनाथ हो जाते हैं।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए रायपुर पुलिस ने अभिनव पहल करते हुए 4500 पुलिस मितान बनाए हैं। ये पुलिस मितान गांवों में सड़क सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगें। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम ज्यादा होता है। ऐसे में पुलिस मितान की बड़ी भूमिका होगी। हमने इन पुलिस मितान साथियों को हेलमेट और फर्स्ट ऐड किट भी वितरित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हेलमेट पहनना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अक्सर सड़क दुर्घटनाओं में हेड इंजरी ही ज्यादा होती है। इसकी वजह से लोगों की जान जाती है। अतः हमें दुपहिया वाहनों में अनिवार्यतः हेलमेट पहनना चाहिए और चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट अवश्य लगाना चाहिए। वाहन चालक हमेशा ध्यान रखें कि वे वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात ना करें और ट्रैफिक सिग्नल ना तोड़े। कार्यक्रम में परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि आज का कार्यक्रम मात्र एक औपचारिकता ना रहे बल्कि सड़क सुरक्षा का जनांदोलन बने। सड़क दुर्घटना में तत्काल सहायता करने वाले राहगीरों को 25 हजार की राशि का प्रावधान किया गया है। सड़क दुर्घटना प्रभावितों के इलाज के लिए डेढ़ लाख के निःशुल्क इलाज की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है। सांसद  बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ये महीना कई माताओं की गोद सूनी होने से बचाने का महीना है। हेलमेट पहनना अब अनिवार्य किया जाना चाहिए। एक्सीडेंट से कई परिवार उजड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। हेलमेट को अनिवार्य करने से वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात करना भी बंद होगा और लोगों की जान बचे। कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा मितान साथियों को 25 हजार व 5 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई और सड़क सुरक्षा के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले चिकित्सा अधिकारियों, यातायात सिपाहियों, वाहनचालकों, भारत स्काउट गाइड के सदस्यों, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, एनएचएआई के अधिकारी तथा एनएसएस व एनसीसी कैडेट्स को भी सम्मानित किया गया । मुख्यमंत्री  साय ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026 के अंतर्गत आयोजित की गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी में सड़क सुरक्षा पर स्कूल व कॉलेज के बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग और साइंस मॉडल की सराहना की।   इस अवसर पर विधायक  सुनील सोनी और  पुरंदर मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर  नवीन अग्रवाल, परिवहन सचिव  एस प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त  डी रविशंकर सहित बड़ी संख्या में स्काउट गाइड व एनसीसी कैडेट्स और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।