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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा – किसानों की प्रगति के लिए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य

रायपुर : किसानों की समृद्धि के लिए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना आवश्यक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लंबे समय से अधूरे सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने को लेकर मुख्यमंत्री सख्त मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा की रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं। इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पुल की चोरी: कोरबा में 11 बजे तक था सही, सुबह अचानक 60 फीट लंबा लोहे का पुल गायब

 कोरबा     छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक अजब गजब मामले की पुलिस रिपोर्ट दर्ज हुई है. सिविल लाइन थाना की सीएसईबी पुलिस चौकी में 60 फीट लंबे पुल के चोरी हो जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. कलेक्टर कोरबा कुणाल दुदावत और एसपी सिद्धार्थ तिवारी से शिकायत किए जाने के बाद यह रिपोर्ट दर्ज हुई है और इस मामले को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप बचा हुआ है. पुलिस ने चोरी के पुल की तलाश में एक विशेष जांच दल गठित कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. छत्तीसगढ़ के कोरबा में शहर के मध्य भाग से होकर गुजरने वाले हसदेव बायीं तट नहर में वर्षों पहले बनाया गया पुल रातो-रात चोरी हो गया. नगर निगम के वार्ड नंबर 17 के नागरिकों के शहर आवागमन के लिए यह पुल करीब 40 साल पहले बनाया गया था. रात 11 बजे तक था, सुबह हुआ लापता पुल की लंबाई लगभग 60 फीट और चौड़ाई 5 फीट थी. यह पुल रात 11 बजे तक सही सलामत था. वार्ड 17 के लोग इस समय तक पुल से होकर घर लौटे थे. लेकिन सुबह उन्होंने देखा कि पुल अपनी जगह से गायब है. पुल के चोरी चले जाने की सूचना तुरन्त वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास को दी गई. वे भी भागते दौड़ते मौके पर पहुंचे, तो देख की पुल वास्तव में चोरी हो गया था. वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने तुरंत आवेदन पत्र तैयार किया और एसपी सिद्धार्थ तिवारी के पास पहुंच कर शिकायत दर्ज कराई. वे यहीं नहीं रुके. उन्होंने पुल चोरी की लिखित शिकायत कलेक्टर कुणाल दुदावत से भी की और पुल के चोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से शिकायत के बाद पुलिस विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया. पुलिस ने एक विशेष जांच दल का गठन कर मामले की तेज गति से जांच शुरू कर दी है. दरअसल, जिस पुल की चोरी हुई है, वह मजबूत लोहे का बना हुआ था. मोटे मोटे लोहे के गर्डर यानी रेल पटरियों जैसी संरचना से यह 60 फीट लंबा पुल शहरी क्षेत्र में नहर निर्माण के बाद नागरिकों के आवागमन के लिए बनाया गया था.  गर्डर के ऊपर लोहे की मोटी-मोटी प्लेट लगाई गई थी. यह पुल इतना मजबूत था कि बीते 40 सालों में इसे कोई क्षति नहीं पहुंची थी. इसी पुल की रातो रात चोरी हो गई है. मौके पर पुल को गैस कटर से काटने के निशान थे. नहर के दोनों सिरों पर पुल के जमीन में लगे टुकड़ों में गैस कटर से पुल काटने के निशान दिखाई दे रहे थे. 30 टन लोहा और करीब 15 लाख कीमत स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह चोरी शहर में सक्रिय स्क्रैप माफिया ने कराई है. चोरी गए पुल के लोगों का वजन अनुमानित 25 से 30 टन है और उसका बाजार मूल्य करीब 15 लाख रुपए होता है.  टल गया बड़ा जल संकट चोरों ने कोरबा शहर में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नगर निगम की ओर से बिछाई गई पानी की पाइप लाइन की सुरक्षा के लिए उसके तीन दिशाओं में लगाए गए लोहे के मोटे सुरक्षा कवच को भी काटकर चोरी कर ली है. गनीमत है कि पानी का पाइप लाइन सुरक्षित है, वरना कोरबा की ढाई लाख से अधिक की आबादी बूंद बूंद पानी के लिए तरस जाती और शहर में हाहाकार मच जाता. प्रशासन में हड़कंप, SIT का गठन कोरबा जिला पुलिस जिले में स्क्रैप कारोबार यानी कबाड़ का व्यवसाय  बंद होने का दावा करती है. लेकिन पिछले कुछ माह से जगह जगह संचालित स्क्रैप के दुकान इस दावे को साफ साफ नकारते हैं. नगर के वार्ड नंबर 17 में पुल चोरी की घटना से सिद्ध हो जाता है कि जिले में संगठित रूप से माफिया की तर्ज पर स्क्रैप के कारोबार का संचालन किया जा रहा है. पुलिस ने शहर के दो कबाड़ियों के ठिकानों पर छापामार कार्रवाई भी की, लेकिन उसे वांछित सफलता नहीं मिली.

लंबे समय से अधूरे सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने को लेकर मुख्यमंत्री साय सख्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं। इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके। बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

जैव विविधता की वापसी: बारनवापारा अभयारण्य में वर्षों बाद नजर आया दुर्लभ जीव

  रायपुर.   दुर्लभ ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन,बर्ड सर्वे के दौरान हुई विशेष फोटोग्राफी बारनवापारा अभयारण्य से पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। हाल ही में अभ्यारण्य में आयोजित बर्ड सर्वे के दौरान दुर्लभ 'ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन' (ट्रेरॉन बाइसिंक्टस) की उपस्थिति दर्ज की गई है।              ऐतिहासिक रूप से इस पक्षी की उपस्थिति बारनवापारा में पहले भी दर्ज की गई थी, जब वर्ष 2015-16 में विख्यात पक्षी विशेषज्ञ ए.एम.के. भरोस ने इसे देखा था। उसके बाद से यह प्रजाति यहाँ से ओझल रही थी, जिससे अब इसकी पुनः वापसी वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से एक बड़ा रिकॉर्ड मानी जा रही है।           इस दुर्लभ पक्षी की साइटिंग पकरीद टीम द्वारा की गई, जिसमें बर्डर एवं वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर राजू वर्मा और प्रतीक ठाकुर सहित कर्नाटक, बिहार और ओडिशा के विशेषज्ञ शामिल थे। टीम को उस वक्त बड़ी सफलता मिली जब इस पक्षी का एक जोड़ा उनके ठीक ऊपर पेड़ पर बैठा पाया गया, जिससे उड़ने से पहले उनकी विस्तृत फोटोग्राफी और रिकॉर्डिंग करना संभव हो सका।           वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह साइटिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस प्रजाति को कई वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस क्षेत्र में देखा गया है।          भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला यह पक्षी मुख्य रूप से अंजीर और जंगल के अन्य रसीले फलों पर निर्भर रहता है। इसे एक निवासी प्रजाति माना जाता है जो स्थानीय मौसमी बदलावों के साथ अपनी गतिविधियां संचालित करता है। छत्तीसगढ़ के अन्य वनों में भी इसकी मौजूदगी समय-समय पर दर्ज होती रही है, लेकिन बारनवापारा में इसकी वापसी पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को दर्शाती है।             सर्वे टीम ने इस पक्षी की पहचान इसकी विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं के आधार पर की है। ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन की नीली-धूसर गर्दन, पीले-हरे रंग का सिर और शरीर का निचला हिस्सा इसे विशेष बनाता है। इसके लाल पैर और स्लेटी-धूसर केंद्रीय पूंछ के पंख इसे आमतौर पर दिखने वाले 'येलो-फुटेड ग्रीन-पिजन' (हरियल) से स्पष्ट रूप से अलग करते हैं।            विशेष रूप से नर पक्षी की पहचान उसके सीने पर मौजूद गहरे नारंगी रंग के पैच से की गई। कई वर्षों बाद इस प्रजाति का कैमरे में कैद होना न केवल फोटोग्राफर्स के लिए उत्साह का विषय है बल्कि यह अभयारण्य में पक्षियों के अनुकूल वातावरण और विविधता का एक सशक्त प्रमाण भी है।

जल जीवन मिशन के सुजल ग्राम संवाद में ग्राम पंचायत साल्हेभाट की राष्ट्रीय पहचान

रायपुर. सुजल ग्राम संवाद के तृतीय चरण में ग्राम पंचायत साल्हेभाट ने किया छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व जल जीवन मिशन जल जीवन मिशन जल जीवन मिशन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित सुजल ग्राम संवाद के तृतीय चरण में छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत साल्हेभाट ने प्रतिनिधित्व किया। वी सी के माध्यम से आयोजित इस संवाद में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, दादर एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव तथा लक्षद्वीप के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।     कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के मिशन संचालक द्वारा ग्राम पंचायत साल्हेभाट के प्रतिनिधियों से पेयजल की उपलब्धता, जल जीवन मिशन से ग्रामीणों के जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तनों, जल वहिनियों द्वारा एफटीके के माध्यम से जल परीक्षण एवं नमूना जांच की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इसके साथ ही ग्रामवासियों द्वारा पेयजल हेतु मासिक शुल्क निर्धारण, योजना के संचालन एवं संधारण की व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।     इस अवसर पर जिला कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कलेक्टर कोंडागांव श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने जिले में जल जीवन मिशन की प्रगति की जानकारी दी तथा जल सेवा आकलन एवं जल अर्पण दिवस को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में जेरेना/GRAMG द्वारा पेयजल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु तैयार की गई कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। वहीं, मिशन संचालक जल जीवन मिशन छत्तीसगढ़ शासन श्री जितेन्द्र शुक्ला ने राज्य स्तर पर योजना की प्रगति से अवगत कराया।

राज्यपाल डेका ने कोपलवाणी चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन को दिया 2 लाख रुपये का निजी अनुदान

रायपुर. सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल : राज्यपाल  डेका ने कोपलवाणी चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन को दिया 2 लाख रूपए का निजी अनुदान राज्यपाल  रमेन डेका ने सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत अपने पिता स्वर्गीय  सुरेन्द्र डेका की स्मृति में दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित कोपलवाणी चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन को 2 लाख रूपए का निजी अनुदान प्रदान किया  है। इस अनुदान से संस्था में सुरेन्द्र डेका पुरस्कार की स्थापना की जाएगी। इस राशि के माध्यम से प्रतिवर्ष संस्था के दो उत्कृष्ट बच्चों को स्वर्गीय  सुरेन्द्र डेका के जन्मदिवस के अवसर पर पुरस्कृत किया जाएगा। यह पुरस्कार बच्चों को शिक्षा, प्रतिभा और समग्र विकास के लिए आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करेगा। राज्यपाल ने आशा व्यक्त की है कि यह पहल बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए सहायक सिद्ध होगी। आज लोकभवन में राज्यपाल  डेका ने संस्था की अध्यक्ष श्रीमती पद्मा शर्मा को उक्त राशि का चेक प्रदान किया। इस अवसर पर संस्था की सदस्य श्रीमती भारती शर्मा, सु सेजल सिंघानिया और  कुणाल टांक उपस्थित थे।

युवा नेतृत्व को राष्ट्रीय पहचान: सहभागितापूर्ण शासन के लिए 28 जनवरी को सम्मान

रायपुर.  छत्तीसगढ़ के लिए बड़े गौरव के क्षण में, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS), कोसमबुड़ा ने अपनी तरह की पहली ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ (MYGS) प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता बनकर उभरने का गौरव प्राप्त किया है। पंचायती राज मंत्रालय आगामी 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ की इस विजेता टीम को औपचारिक रूप से सम्मानित करेगा। छत्तीसगढ़ की जनजातीय शिक्षा प्रणाली की बड़ी जीत देश भर के 800 से अधिक स्कूलों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए, ईएमआरएस कोसमबुड़ा के छात्रों ने ग्रामीण शासन की असाधारण समझ का प्रदर्शन किया। 30 अक्टूबर 2025 को जनजातीय कार्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य युवाओं को मॉक ग्राम सभा सत्रों के माध्यम से जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करना था। छत्तीसगढ़ का शीर्ष स्थान यह दर्शाता है कि राज्य ने अपनी जनजातीय आवासीय स्कूल प्रणाली के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को कितनी मजबूती से आत्मसात किया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ईएमआरएस कोसमबुड़ा के प्राचार्य, डॉ. कमलाकांत यादव ने कहा:"मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) पहल में हमारे विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना हर्ष का विषय है। यह सफलता हमारे विद्यार्थियों के कड़े परिश्रम और ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाती है। पंचायती राज मंत्रालय और केंद्र सरकार की यह दूरदर्शी पहल छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सहभागी शासन से जोड़ने का एक प्रभावी मंच है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला है। हम आगामी 28 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले सम्मान समारोह में सहभागिता को लेकर उत्साहित हैं।" युवा सहभागिता के लिए दूरदर्शी पहल ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ को 30 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया गया था। इस कार्यक्रम ने तीन महीने से भी कम समय में भारत के 800 से अधिक स्कूलों तक पहुँच बनाकर युवाओं में सहभागी शासन की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। देश भर से शॉर्टलिस्ट की गई शीर्ष 6 टीमों में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने ग्राम सभा के संचालन में अनुशासन और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के लिए नए मानक स्थापित किए हैं। 28 जनवरी को होने वाला सम्मान समारोह लोकतंत्र के इन युवा राजदूतों की उपलब्धि का उत्सव मनाएगा, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

ऑटो सेक्टर को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राडा ऑटो एक्सपो–2026 का शुभारंभ किया

रायपुर . मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के  राम बिजनेस पार्क में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री   साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर क्षेत्र में निरंतर विकास के लिए प्रयासरत है। राज्य में आम नागरिकों की परचेसिंग पावर बढ़ी है, जिसके चलते बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए लोगों से ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की।     मुख्यमंत्री   साय ने कार्यक्रम के दौरान यामाहा एक्सएसआर-155, टाटा सिएरा तथा महिंद्रा 7 एक्सओ वाहनों की लॉन्चिंग की। इसके साथ ही उन्होंने “मनी मैटर्स” पुस्तक का भी विमोचन किया।     राडा ऑटो एक्सपो-2026 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री   साय ने कहा कि विगत दो वर्षों में राज्य के किसानों को धान का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरों में किए गए सुधारों से कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर लोगों से चर्चा के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि जीएसटी दरों में कमी से बाइक की कीमत में लगभग 15 से 25 हजार रुपए तक का लाभ हो रहा है। वहीं, एक व्यक्ति ने बताया कि हार्वेस्टर की कीमत में करीब 2 लाख रुपए तक की कमी आई है।     मुख्यमंत्री   साय ने कहा कि राज्य में नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसकी देश-विदेश में सराहना हो रही है। पिछले एक वर्ष में लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और कई परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी उन्हें ऑटो एक्सपो में आने का अवसर मिला था, उस समय भी सरकार द्वारा रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी गई थी, जिसका व्यापक लाभ मिला। उस दौरान 25 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लगभग 29 हजार वाहनों का विक्रय हुआ। इससे सरकार को करीब 800 करोड़ रुपए का जीएसटी तथा परिवहन विभाग को 129 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। आम नागरिकों को भी ऑटो एक्सपो का प्रत्यक्ष लाभ मिला।     मुख्यमंत्री   साय ने कहा कि इस वर्ष राडा ऑटो एक्सपो का आयोजन और अधिक वृहद स्तर पर किया गया है। एक्सपो का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है तथा इसमें 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। पूरे प्रदेश से उद्यमी और विभिन्न कंपनियां इसमें सहभागिता कर रही हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि पहले ही दिन लगभग 2000 वाहनों का पंजीयन हो चुका है और उन्हें विश्वास है कि इस वर्ष 50 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य भी अवश्य पूरा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑटो एक्सपो का आयोजन प्रतिवर्ष इसी तरह किया जाना चाहिए।     वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री   केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि राडा ऑटो एक्सपो का यह नौवां संस्करण केवल वाहनों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में रोजगार सृजन और ऑटो सेक्टर की प्रगति का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रोड टैक्स में दी जा रही 50 प्रतिशत छूट से ग्राहकों के साथ-साथ प्रदेश के छोटे और मध्यम व्यवसायियों को भी लाभ मिल रहा है। राज्य में सड़कों का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे कनेक्टिविटी बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ में ऑटो सेक्टर लगातार आगे बढ़ रहा है।     उल्लेखनीय है कि मंत्रिपरिषद द्वारा राजधानी रायपुर में 20 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के पश्चात पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। इस निर्णय का लाभ पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को मिलेगा, इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।     कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री   साय ने ऑटो एक्सपो में सड़क सुरक्षा शपथ पर हस्ताक्षर किए और आमजन से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने आगामी महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली नारी मैराथन के पोस्टर का भी विमोचन किया।     इस अवसर पर परिवहन सचिव   एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त   डी. रविशंकर, कैट के वाइस चेयरमैन   अमर परवानी,   राजकुमार सिंघानिया,   रविन्द्र भसीन,   विवेक गर्ग सहित बड़ी संख्या में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के सदस्यगण उपस्थित थे।

फैक्ट्री दुर्घटना पर सीएम साय का बयान, घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश

रायपुर बलौदाबाजार जिले के बकुलाही स्थित आयरन फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट की घटना को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक बताया है। इस दर्दनाक हादसे में 6 श्रमिकों की असमय मृत्यु हो गई, जबकि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें बेहतर एवं उच्च स्तरीय उपचार के लिए बिलासपुर रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शोकाकुल परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। सीएम ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न हो एवं उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। सीएम ने हादसे के कारणों की तथ्यपरक जांच सुनिश्चित करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।