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छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें लागू

आठ वर्षों बाद बड़े पैमाने पर रेशनलाइजेशन, शहरी–ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दूर हुई विसंगतियाँ रायपुर छत्तीसगढ़ शासन ने स्थावर संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करने और गाइडलाइन दरों में वर्षों से चली आ रही असमानताओं को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें पूरे राज्य में लागू कर दी हैं। “छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000” के तहत केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, रायपुर द्वारा अनुमोदित ये दरें 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गई हैं। यह संशोधन वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार राज्यव्यापी स्तर पर किया गया है। राज्य में पिछले आठ वर्षों से गाइडलाइन दरों में कोई वृद्धि नहीं होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच भारी अंतर पैदा हो गया था। इस स्थिति को सुधारने के लिए पूरे प्रदेश में वैज्ञानिक पद्धति से रेशनलाइजेशन कर नई दरें निर्धारित की गई हैं। जिलों की भौगोलिक स्थिति, शहरी संरचना, ग्रामीण बसाहट, सड़क संपर्क और आर्थिक गतिविधियों में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए अनेक जटिलताओं को सरल किया गया है। राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में पूर्व में एक ही वार्ड में 10 से 12 प्रकार की कंडिकाएँ लागू थीं, जिससे लोगों को अपने संपत्ति मूल्यांकन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई कंडिकाएँ तो वास्तविक रूप से अस्तित्व में ही नहीं थीं। नई गाइडलाइन दरों में अनावश्यक कंडिकाओं को हटाकर एक समान प्रकृति वाले क्षेत्रों को समाहित करते हुए सरल और पारदर्शी संरचना लागू की गई है। इससे अब एक ही क्षेत्र, समान सड़क या समान मार्ग पर संपत्तियों का मूल्यांकन एकरूपता के साथ होगा। इसी रेशनलाइजेशन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण जिला कोण्डागांव में दिखाई देता है, जहाँ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में भारी सुधार किए गए हैं। नगर पालिका कोण्डागांव के 22 वार्डों में पूर्व की 145 कंडिकाओं को घटाकर मात्र 30 कंडिकाएँ निर्धारित की गई हैं। इसी प्रकार नगर पंचायत फरसगांव में 49 कंडिकाओं को कम कर 15 तथा नगर पंचायत केशकाल में 45 कंडिकाओं को घटाकर 15 कंडिकाओं में समाहित किया गया है। इससे संपत्ति मालिकों को वास्तविक बाजार मूल्य की स्पष्ट समझ मिलेगी। राज्य के अनेक जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर बसे वार्डों या ग्रामों के दरों में भारी विसंगतियाँ थीं। उदाहरणस्वरूप, कोण्डागांव में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 से लगे वार्डों में पूर्व दरें एक-दूसरे से काफी भिन्न थीं। वार्ड क्रमांक 22 की एनएच-30 कंडिका का रेट 10,850 रुपये प्रति वर्गमीटर था, जबकि इसी मार्ग के वार्ड क्रमांक 4 में यह 10,000 रुपये था। आमने-सामने स्थित वार्ड क्रमांक 1 और 2 में यह दर क्रमशः 7,800 और 8,700 रुपये नियत थी। नई गाइडलाइन में इन सभी को एक समान कर 12,000 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रस्तावित किया गया है। इसी प्रकार केशकाल में एनएच-30 से लगे वार्डों के दरों को भी समायोजित करते हुए एक समान 9,500 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रस्तावित किए गए हैं। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भी दरों में भारी सुधार किया गया है। हजारों ग्रामों में एक ही प्रकार की भूमि या एक ही मार्ग पर लगने के बावजूद दरों में व्यापक असमानता थी। कई ग्रामों में प्रति हेक्टेयर 59,000 रुपये तक की अत्यंत कम दरें थीं, जिससे किसानों को न तो उचित मुआवजा मिल पाता था और न ही भूमि बिक्री में बाजार मूल्य का लाभ। पेरमापाल, हंगवा, तोतर, आमगांव, आदनार, चेमा, छोटेउसरी, छोटेकोडेर, टिमेनार, एहरा और गदनतरई जैसे गांवों में दरों को आसपास के विकसित गांवों के अनुसार समायोजित किया गया है। राज्य के अन्य जिलें दुर्ग, रायगढ़, सरगुजा, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर, कबीरधाम, कांकेर और बस्तर में भी इसी तरह सड़कों, बाजारों, बसाहटों और विकास की वास्तविक स्थिति का आकलन कर दरों में व्यापक सुधार किए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और प्रमुख जिला सड़कों के दोनों ओर बसे ग्रामों और बस्तियों को एक समान मानक पर मूल्यांकन करते हुए दरों को संशोधित किया गया है। नई गाइडलाइन दरों में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वर्गमीटर की दर समाप्त कर दी गई है। अब सभी प्रकार की आवासीय और कृषि भूमि का मूल्यांकन एक समान हेक्टेयर दर से किया जाएगा। इससे छोटे टुकड़ों की भूमि और कृषि भूमि के बाजार मूल्य में जो असमानता थी, वह समाप्त होगी और किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य व मुआवजा प्राप्त होगा। पिछले आठ वर्ष में पूरे राज्य के शहरों और गांवों का तीव्र विकास हुआ है। सड़क, संपर्क, व्यावसायिक परिसर, आवासीय विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी से वृद्धि हुई है। नई गाइडलाइन दरों में इन सभी परिवर्तनशील पहलुओं को वैज्ञानिक पद्धति से समाहित किया गया है, ताकि बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच का अंतर समाप्त हो तथा राज्य में संपत्ति आधारित लेनदेन अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बने। नई राज्य स्तरीय गाइडलाइन दरें भूमि मालिकों, किसानों, निवेशकों और आम नागरिकों को सही मूल्यांकन की सुविधा उपलब्ध कराएंगी। साथ ही यह कदम राजस्व वृद्धि, ग्रामीण-शहरी विकास और रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिरता एवं विश्वास बढ़ाने की दिशा में राज्य शासन का महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। ग्राम मसोरा में (विक्रेता– मनुराम चक्रधारी निवासी-गिरोला, क्रेता-शांति देवी कुशवाहा निवासी-कोंडागांव)रकबा 0.032 हेक्टेयर आवासीय भूमि का पूर्व गाइड लाइन के वर्गमीटर दर से गणना करने पर बाजार मूल्य 1,17,000/- पर कुल 12,402/- स्टाम्प व पंजीयन शुल्क होता जबकि नई गाइड लाईन हेक्टेयर दर अनुसार बाजार मूल्य 54,500/- पर स्टाम्प व पंजीयन शुल्क 5,777/- चुकाया गया जिससे पक्षकार को 6,625/- का लाभ हुआ! 

दंतेवाड़ा में कलेक्टर दुदावत ने नहाड़ी और पोटाली ग्रामों का किया दौरा

दंतेवाड़ा : कलेक्टर दुदावत ने नहाड़ी व पोटाली के ग्रामों का किया निरीक्षण ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं को सुनीं, मलेरिया मुक्त अभियान में सहयोग का आह्वान दंतेवाड़ा कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने जिले के दूरस्थ अंचल नाहाड़ी और पोटाली का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम के सरपंचों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी आवश्यकताओं, समस्याओं और लंबित कार्यों की जानकारी ली। कलेक्टर ने ग्रामीणों द्वारा रखे गए प्रत्येक बिंदु को गंभीरता से सुनते हुए अधिकारियों को स्थल पर ही आवश्यक दिशा निर्देश दिए। ग्राम पोटाली में ग्रामीणों ने पंचायत भवन, गांव की सड़क व्यवस्था, आंगनबाड़ी भवन, बाजार शेड, पीडीएस भवन में शेड की व्यवस्था, देवगुड़ी में शेड निर्माण, हैंडपंप की मरम्मत, स्थापना, तार-फेंसिंग तथा पीडीएस भवन परिसर में हाईमास्ट लाइट लगाने की मांग रखी। मौके पर ग्रामीणों ने बताया कि इनमें से अनेक कार्य पहले से स्वीकृत हैं, परंतु अब तक पूर्ण नहीं हो पाए हैं, जिससे दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्यों की अद्यतन सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए।  इस दौरान ग्राम नाहाड़ी में ग्रामीणों ने सड़क संपर्क, आंगनबाड़ी भवन तथा स्कूल भवन के निर्माण को प्रमुख मांग के रूप में प्रस्तुत किया। ग्रामीणों ने बताया कि भवनों की स्वीकृति होने के बावजूद निर्माण अधूरा है, जिससे बच्चों व महिलाओं के लिए असुविधा होती है। कलेक्टर  दुदावत ने आश्वासन दिया कि बुनियादी सुविधाओं को हर ग्राम तक पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधूरे कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कराए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य पारा-टोलों से मिली मांगों को जैसे ही संबंधित अधिकारी प्रस्तुत करेंगे, प्रशासन उन पर भी त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। कलेक्टर ने उक्त ग्रामों के सरपंचों से आग्रह किया कि वे स्वीकृत कार्यो को सर्वप्रथम कराने की पहल करे तत्पश्चात अन्य ग्राम संबंधित कार्य प्रारंभ किए जाएगें। इसके लिए उन्होंने जनपद पंचायत सहित अन्य विभागों को ग्राम सरपंचों से समन्वय एवं मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रतिदिन अपडेट करें और वास्तविक स्थिति की समीक्षा नियमित रूप से की जाए। निरीक्षण के अंत में कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने ग्रामीणों से अपील की कि जिले में 8 दिसंबर से 31 दिसंबर तक ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ शासन द्वारा संचालित किया जा रहा है, इसलिए सभी ग्रामीण अनिवार्य रूप से मलेरिया की जांच कराएं। उन्होंने कहा कि मलेरिया से बचाव के लिए समय पर जांच व उपचार अत्यंत आवश्यक है और ग्रामीणों के सहयोग से ही जिले को मलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ  जयंत नाहटा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

मानवाधिकार दिवस पर नारी निकेतन ने लिखी संवेदनशील कहानी

रायपुर : 4-5 वर्षों से लापता दिव्यांग युवती ममता की हुई घर वापसी मानवाधिकार दिवस पर नारी निकेतन ने लिखी संवेदनशील कहानी पिता-पुत्री का भावुक मिलन, बिहार शरीफ लौट सकी ममता उर्फ अंशु रायपुर स्वतंत्रता, समानता और न्याय के मौलिक अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के प्रति सदैव सजग रहेंगे, उन्हें महत्व देंगे। नारी निकेतन अम्बिकापुर ने मानवता और सेवा की मिसाल पेश करते हुए पिछले 4-5 वर्षों से लापता मानसिक रूप से विक्षिप्त एवं शारीरिक रूप से विकलांग युवती ममता उर्फ अंशु पासवान को उसके परिवार से मिलाया। यह मिलन विशेष रूप से भावुक रहा क्योंकि मानवाधिकार दिवस के अवसर पर ममता को अपने जीवन का सबसे बड़ा अधिकार घर और परिवार का स्नेह वापस मिला। वर्षों बाद अपनी बेटी को देखकर पिता भावुक हो उठे और संस्था द्वारा की गई देखभाल, सुरक्षा, पोषण, उपचार और सहयोग के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।            अक्टूबर 2025 में बैकुंठपुर रेलवे स्टेशन के पास भटकती हुई अवस्था में मिली ममता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और शारीरिक विकलांगता के कारण वह चलने-फिरने में भी असमर्थ थी। 15 अक्टूबर 2025 से वह नारी निकेतन में रह रही थी, जहाँ वह अपना नाम, घर और पहचान तक बताने में असमर्थ थी। नारी निकेतन ने उसे न केवल सुरक्षित आश्रय दिया, बल्कि जिला चिकित्सालय अम्बिकापुर के मनोरोग विभाग से निरंतर उपचार और संस्था के परामर्शदाताओं द्वारा नियमित काउंसलिंग की सुविधा प्रदान की। धीरे-धीरे मानसिक स्थिति सुधरने पर ममता को अपने पिता का मोबाइल नंबर याद आया, जिससे उसकी पहचान का महत्वपूर्ण सुराग मिला।             संस्था द्वारा संपर्क किए जाने पर पता चला कि ममता नालंदा (बिहार) की निवासी है। इसके बाद सखी वन स्टॉप सेंटर नालंदा ने फोटो के माध्यम से पहचान की पुष्टि की और उसके परिवार का पता निर्धारित किया। दोनों संस्थाओं के लगातार समन्वय एवं प्रयासों से युवती का पुनर्वास संभव हो सका। मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर 2025 को नारी निकेतन में औपचारिक रूप से ममता को उसके पिता  कैलाश पासवान और परिजनों को सौंप दिया गया। वर्षों बाद अपनी बेटी को देखकर पिता भावुक हो उठे और संस्था द्वारा की गई देखभाल, सुरक्षा, पोषण, उपचार और सहयोग के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। बिहार शरीफ के छोटे कृषक  पासवान ने कहा कि उनकी बेटी का सुरक्षित मिलना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।           नारी निकेतन के संवेदनशील प्रयासों, नियमित उपचार, परामर्श, पोषण और संरक्षण ने ही ममता को अपनी पहचान याद करने में सक्षम बनाया और अंततः उसकी घर वापसी सुनिश्चित की। यह सफलता न केवल एक परिवार के पुनर्मिलन की खुशी है, बल्कि मानवता और मानवाधिकारों की सच्ची जीत का प्रतीक भी है।

जिला स्तरीय चयन समिति द्वारा शुरू हुई चयन प्रक्रिया, 10 सर्वाधिक आबादी वाले ग्रामों में चलेगी प्रतिस्पर्धा

दंतेवाड़ा : पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत जिले में बनाये जायेगें ‘सोलर मॉडल विलेज’ जिला स्तरीय चयन समिति द्वारा शुरू हुई चयन प्रक्रिया, 10 सर्वाधिक आबादी वाले ग्रामों में चलेगी प्रतिस्पर्धा सौर संयंत्र स्थापना, जन जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और नवाचार पर तय होगा मॉडल विलेज का चयन  दंतेवाड़ा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले में एक ग्राम को पूर्णतः सौर ऊर्जा आधारित सोलर मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इस दिशा में कलेक्टर  कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में जिला स्तरीय चयन समिति ने औपचारिक रूप से चयन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। भारत सरकार द्वारा जारी अद्यतन दिशा-निर्देशों के अनुसार अब नवीन जनगणना के आधार पर ऐसे राजस्व ग्रामों का चयन किया जाना आवश्यक है जिनकी आबादी 5,000 से अधिक हो। जबकि नवीनतम जनगणना अनुसार जिले में 5,000 से अधिक आबादी वाले ग्रामों की संख्या 10 से कम होने के कारण जिला स्तरीय समिति द्वारा जिले के प्रथम 10 सर्वाधिक आबादी वाले ग्रामों के मध्य प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। इस प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम मॉडल सोलर विलेज का चयन किया जाएगा। दंतेवाड़ा जिले में केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार जिले में प्रतियोगिता के लिए चयनित 10 ग्रामों में ग्राम कारली, बालूद, टिकनपाल, कुआकोंडा, ग्राम गड़मिरी, मेटापाल, गुडसे, दुगेली, बड़े बचेली और कासोली शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति देने के लिए जिलों को निरंतर कार्य करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के हर घर सौर ऊर्जा लक्ष्य को धरातल पर साकार किया जा सके। इन्हीं ग्रामों में से एक ग्राम जिले का पहला सोलर मॉडल विलेज बनेगा। ‘सोलर मॉडल विलेज’ हेतु जिले के सभी विकासखंड से ग्रामों का चयन किया गया है। इन ग्रामों में अब माह फरवरी 2026 तक सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, जन जागरूकता अभियान चलाने, घरेलू एवं सामुदायिक सौर संयंत्रों की स्थापना, तथा योजनाओं के लिए ग्रामीणों द्वारा किए जाने वाले आवेदनों की सतत समीक्षा की जाएगी। इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक चयनित ग्राम में आदर्श ग्राम समिति गठित की जा रही है, जिसमें सरपंच, सचिव, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, डॉक्टर तथा ग्राम अंतर्गत शासकीय अधिकारी कर्मचारी सदस्य के रूप में शामिल हो सकते हैं। यह समिति डोर-टू-डोर संपर्क कर ग्रामीणों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही पी.एम. कुसुम योजना, जल जीवन मिशन के सोलर डुअल पंप, सौर सुजला योजना,  पी.एम. सूर्य घर योजना, सोलर हाईमास्ट, सोलर स्ट्रीट लाइट तथा अन्य नवीकरणीय ऊर्जा आधारित व्यवस्थाओं की जानकारी भी प्रदान करेगी।   इस संबंध में क्रेडा के सहायक अभियंता  रविकांत भारद्वाज ने बताया कि दिशा-निर्देशों के अनुसार जिस ग्राम में सरकारी अथवा गैर-सरकारी माध्यमों से सर्वाधिक सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित होगी, उसे मॉडल सोलर विलेज के रूप में प्राथमिकता दी जाएगी। इसी को प्रतिस्पर्धा हेतु सूचीबद्ध किया गया है। इन ग्रामों में सौर ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने और मूल्यांकन के लिए 28 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। इस प्रतियोगिता के दौरान प्रत्येक ग्राम अपनी जरूरतों के अनुसार सामुदायिक सौर संयंत्रों के प्रस्ताव तैयार कर जिला स्तर पर प्रस्तुत भी कर सकेगा। निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर जिला स्तरीय समिति द्वारा सभी ग्रामों का मूल्यांकन किया जाएगा। यह मूल्यांकन ग्राम में स्थापित सौर संयंत्रों की संख्या, योजनाओं के लिए किए गए आवेदनों, प्रेषित प्रस्ताव, सामुदायिक सहभागिता, उपलब्ध ऊर्जा सुविधाओं और सौर संसाधनों के उपयोग की आधारशिला पर होगा। इसी मूल्यांकन के आधार पर जिले के पहले सोलर मॉडल विलेज का चयन किया जाएगा और चयनित ग्राम के विकास हेतु 2 करोड़ रुपये की डी.पी.आर. तैयार कर 15 मार्च 2026 तक ऊर्जा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को भेजा जाएगा। ताकि उस ग्राम को पूर्णतः सौर ऊर्जा आधारित आदर्श मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जा सके। इस संबंध में क्रेडा विभाग द्वारा प्रतिस्पर्धा की प्रक्रिया जारी है और निर्धारित मानकों के आधार पर जिले के आदर्श सौर ग्राम का चयन समय सीमा में कर लिया जाएगा।

यह सम्मान हमारी सनातन परंपरा, राम के आदर्शों और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट ‘भांचा’ संस्कृति की वैश्विक पहचान है: मंत्री अग्रवाल

रायपुर : संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने दीपावली पर्व के यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने पर प्रदेश एवं देशवासियों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं यह सम्मान हमारी सनातन परंपरा, राम के आदर्शों और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट ‘भांचा’ संस्कृति की वैश्विक पहचान है:  मंत्री अग्रवाल रायपुर खुशियों और प्रकाश का पर्व दीपावली अब विश्व स्तर पर भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। यूनेस्को की इंटरगवर्नमेंटल कमेटी ने नई दिल्ली स्थित लाल किला परिसर में चल रही बैठक के दौरान ‘दीपावली, द फेस्टिवल ऑफ लाइट्स’ को प्रतिनिधि सूची में शामिल करने का निर्णय लिया, जिससे यह भारत की 16वीं अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर बन गई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों और देशवासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की है। उन्होंने कहा कि अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देने वाली दीपावली को वैश्विक मान्यता मिलना भारत की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और साझा उत्सवधर्मिता की स्वीकृति है। संस्कृति मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि प्रभु राम के वनवास का बड़ा हिस्सा आज के छत्तीसगढ़ क्षेत्र के घने वनों और आश्रमों में व्यतीत हुआ, जिससे यह धरती स्वयं राम की पावन चरण-पथ से अभिमंडित है। ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों में छत्तीसगढ़ को प्रभु  राम का ननिहाल माना जाता है, क्योंकि माता कौशल्या की जन्मस्थली मानी जाने वाली चंदखुरी में उनका प्राचीन मंदिर स्थित है, जो  राम-कौशल्या संबंध का सजीव प्रतीक स्थल है। उन्होंने कहा कि इसी भावनात्मक रिश्ते के कारण छत्तीसगढ़ की जनता प्रभु राम को स्नेहपूर्वक ‘भांचा राम’ कहकर संबोधित करती है। भांचा के प्रति विशेष सम्मान की अभिव्यक्ति के रूप में यहां चरण स्पर्श करने की लोकपरंपरा प्रचलित है, जो छत्तीसगढ़ी समाज में राम के प्रति अपनत्व, भक्ति और पारिवारिक निकटता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करती है।  अग्रवाल ने कहा कि दीपावली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का क्षण है, क्योंकि यह वही त्योहार है जो राम के अयोध्या लौटने की स्मृति में गांव-गांव में लोकोत्सव और पारिवारिक परंपराओं के रूप में यहां विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह मान्यता दीपावली को केवल धार्मिक पर्व न मानकर एक सांस्कृतिक, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मिलन, लोककला, दीप सज्जा, रंगोली, गीत-संगीत और पारंपरिक हस्तशिल्प के व्यापक उत्सव के रूप में स्वीकार करती है। उन्होंने रेखांकित किया कि सूची में शामिल होने के बाद भारत और छत्तीसगढ़ की साझा जिम्मेदारी है कि दीपावली से जुड़ी लोकपरंपराओं, शिल्पकला, पर्यावरण-संवेदनशील आचरण और सामूहिक उत्सव संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और सशक्त रूप से पहुँचाया जाए। संस्कृति मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, त्यौहारों, नृत्यों, गीतों और आस्थाओं की जड़ें गहराई से रामकथा और ग्रामीण जीवन से जुड़ी हैं। दीपावली को मिली वैश्विक मान्यता इस बात की प्रतीक है कि गाँव की चौपाल से लेकर शहरों की सड़कों तक जलने वाला हर दीया अब विश्व विरासत के आलोक में जगमगा रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रत्येक घरों में सायंकाल दिए जलाकर इस अवसर को उत्सव के रूप में मनाने का आह्वान किया।   अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र सद्भाव, सेवा, साझा आनंद और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राम के आदर्शों, माता कौशल्या की करुणा और ‘भांचा राम’ के प्रति छत्तीसगढ़ की आत्मीय श्रद्धा से प्रेरित होकर प्रदेश सामाजिक व आध्यात्मिक प्रगति के नए आयाम स्थापित करेगा।  राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह वर्ष हर घर में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और नई ऊर्जा लेकर आए। उन्होंने कामना की कि यूनेस्को की यह मान्यता भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नया आयाम दे, विश्व समुदाय में भारतीय त्योहारों के प्रति जिज्ञासा और सम्मान बढ़ाए, तथा छत्तीसगढ़ को राम के वनगमन पथ और कौशल्या धाम के रूप में देखने आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में सकारात्मक वृद्धि हो। उन्होंने अंत में सभी छत्तीसगढ़ वासियों, भारतीयों और प्रवासी भारतीय समुदाय को दीपावली पर्व के यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए इसे “विश्व को भारत के सांस्कृतिक प्रकाश से आलोकित करने वाला पर्व” बताया।

रायपुर: प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत ग्राम पिपलाकछार में आयोजित हुआ शिविर

रायपुर खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के अंतर्गत पाण्डादाह वितरण केंद्र अंतर्गत ग्राम पिपलाकछार में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से  ग्राम स्तरीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्राम सरपंच, पंचगण तथा स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।     कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभों, आवेदन की प्रक्रिया, पात्रता तथा सोलर रूफटॉप प्रणाली की स्थापना से संबंधित तकनीकी जानकारी विस्तारपूर्वक दी गई। साथ ही सब्सिडी एवं वित्तीय सहायता संरचना के बारे में भी बताया गया, जिससे आमजन सही तरीके से योजना का लाभ उठा सकें।     शिविर के दौरान ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और बिजली बचत एवं सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में रुचि प्रकट की। कई ग्रामीणों ने मौके पर ही पंजीयन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आयोजन के सफल संचालन के साथ कार्यक्रम सकारात्मक संदेश छोड़ते हुए संपन्न हुआ, जिससे गांव में नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

रायपुर साहित्य उत्सव 2026: कॉलेज विद्यार्थियों के लिए सभी जिलों में आयोजित होंगी कविता और कहानी प्रतियोगिताएं

रायपुर : रायपुर साहित्य उत्सव 2026 :कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए सभी जिलों में होगीं कविता-कहानी प्रतियोगिताएं पुरस्कार भी मिलेंगे, जिले के विजेताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा विद्यार्थियों से 30 दिसंबर तक ली जायेगी स्वरचित कहानियां और कविताएं रायपुर नवा रायपुर में अगले महीने होने वाले साहित्य उत्सव के पहले प्रदेश के सभी जिलों में महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए कहानी एवं कविता प्रतियोगिताएं आयोजित होगी। इन दोनों प्रतियोगिताओं में जिला स्तर पर विजेताओं को पुरस्कार भी मिलेंगे। जिले के विजेताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल किया जायेगा और सर्वोत्कृष्ठ कहानी तथा कविता को रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जायेगा। इस प्रतियोगिता के लिये जिलेवार नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।  प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेेने के इच्छुक छात्र-छात्राएं अपनी स्वरचित कविता और कहानी 30 दिसंबर 2025 तक जिले के नोडल अधिकारी कार्यालय में जमा करा सकते हैं। 30 दिसंबर के बाद मिली कहानियों-कविताओं को प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया जायेगा। प्रदेश की समृद्धशाली साहित्यिक विरासत को लोगों तक पहुंचानें और साहित्य लेखन में युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए नवा रायपुर में 23-25 जनवरी 2026 तक रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन होगा।  साहित्य उत्सव के तहत जिलेवार महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए आयोजित होने वाली कविता-कहानी प्रतियोगिताओं में पहले पुरस्कार के रूप में 5,100 रूपए, दूसरे पुरस्कार के रूप में 3,100 रूपए और तीसरे पुरस्कार के रूप में 1,500 रूपए की धनराशि दी जाएगी। इसी तरह दोनों प्रतियोगिताओं में 1000-1000 रूपए के तीन-तीन प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जायेंगे। जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त कहानी-कविताओं को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा। राज्य स्तर पर पहले पुरस्कार के रूप में 21,000 रूपए, दूसरे पुरस्कार के रूप में 11,000 रूपए और तीसरे पुरस्कार के रूप में 7,000 रूपए की धनराशि दी जाएगी। इसी तरह दोनों प्रतियोगिताओं में राज्य स्तर पर 5,100-5,100 रूपए के तीन-तीन प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए जायेंगे।  प्रतियोगिता में शामिल की जाने वाली कविता न्यूनतम 8 छंदों की मौलिक, अप्रकाशित तथा टंकित होनी चाहिए। इसी तरह कहानी 1200 शब्दों में मौलिक, अप्रकाशित और टंकित होनी चाहिए।  प्रतिभागी किसी महाविद्यालय-विश्वविद्यालय का विद्यार्थी हो एवं उसकी आयु 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रतिभागी को अपने महाविद्यालय का परिचय पत्र अथवा प्राचार्य का प्रमाणपत्र भी लगाना होगा। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होगा। पुरस्कारों की घोषणा जनवरी 2026 में की जाएगी और पुरस्कृत प्रतिभागियों को 23, 24, 25 जनवरी 2026 को होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव में पुरस्कृत किया जाएगा। प्रविष्टी जमा करते समय कविता-कहानी के प्रारंभ में ऊपर एवं लिफाफे पर “युवा हिंदी कविता-कहानी लेखन प्रतियोगिता“ अवश्य अंकित करना होगा। पुरस्कृत कविताओं-कहानियों  का संकलन कर प्रकाशित किया जाएगा जिसका विमोचन रायपुर साहित्य उत्सव के मंच पर किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र

रायपुर : विशेष लेख : सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र रायपुर सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रूप से कुटीर उद्योगों को केंद्रीकृत किया गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं तथा बेरोजगार लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 28 जिलों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित होंगे और आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के प्रयासों से यह क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय – विकास को जन-जन तक पहुँचाने वाले नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी सरलता, सहजता, दृढ़ता और ग्रामीण विकास के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनका यह स्पष्ट मानना है कि छत्तीसगढ़ का वास्तविक सामर्थ्य गाँवों में निहित है, जहाँ परंपरा, कौशल और संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। वे मानते हैं कि स्व-रोजगार ही आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि स्व-रोजगार योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे और कुटीर, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जाए। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव -ग्रामोद्योग के पुनर्जागरण के निर्माता गजेंद्र यादव अपने ऊर्जा से भरे कार्यशैली, जमीनी समझ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। वे लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि परंपरागत कौशलों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अधिक अवसर मिल सकें। उनकी पहल से कुटीर उद्योगों में नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता का वातावरण मजबूत हुआ है। उनके नेतृत्व में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने कई अभिनव कदम उठाए हैं, जिससे हजारों लोगों को आजीविका के नए साधन प्राप्त हुए हैं। कुटीर उद्योगों को नई ऊर्जा देने वाली दो प्रमुख योजनाएँ मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (CMEGP) यह राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अजा, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को छोटे उद्योग स्थापित करने हेतु प्रेरित करना है, जो अपने कौशल के आधार पर सेवा या विनिर्माण क्षेत्रों में कारोबार शुरू करना चाहते हैं। सेवा क्षेत्र जैसे साइकिल और मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक/इलेक्ट्रिक मरम्मत, ब्यूटी पार्लर, फोटोकॉपी, वीडियोग्राफी, टेंट हाउस, च्वाइस सेंटर और होटल जैसी गतिविधियों में उद्यम स्थापित करने हेतु ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रूपए निर्धारित है। वहीं विनिर्माण क्षेत्र जैसे दोना-पत्तल निर्माण, फेब्रिकेशन, डेयरी उत्पाद, साबुन, मसाला, दलिया, पशुचारा, फ्लाई ऐश ब्रिक्स और नूडल्स निर्माण जैसे उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु 3 लाख रूपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन दोनों ही श्रेणियों में 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, ताकि प्रारंभिक आर्थिक बोझ कम हो सके। योजना के अंतर्गत हितग्राही को केवल 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान करना होता है। यह योजना विशेषकर ग्रामीण युवाओं को उद्यम स्थापना के लिए प्रेरित करती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) यह केंद्र शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में प्रभावी रूप से किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य विभिन्न वर्गों-अजा, अजजा, ओबीसी तथा सामान्य वर्ग को उद्यमिता के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है। इस योजना में सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रूपए तक और विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रूपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे मध्यम स्तर के उद्यम भी आसानी से शुरू किए जा सकें। अनुदान की दृष्टि से यह योजना अत्यंत सहायक है। ग्रामीण क्षेत्रों के हितग्राहियों को 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र में 15 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है, जिसे च्डम्ळच् पोर्टल के माध्यम से सरलता से भरा जा सकता है। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो बड़े पैमाने पर उद्यम शुरू करने की क्षमता रखते हैं लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझते हैं। आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज आवेदन करने वाले आवेदकों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं जिनमें पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पैन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर अन्य दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। ये दस्तावेज आवेदक की पात्रता और परियोजना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं। आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम छत्तीसगढ़ में CMEGP और PMEGP जैसी योजनाएँ स्वरोजगार को एक संगठित और सशक्त दिशा प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव की दूरदर्शिता, समर्पण और सतत प्रयासों के कारण आज हजारों युवाओं के सपने साकार हो रहे हैं। राज्य सरकार की ये पहल न केवल रोजगार बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक संरचना को मजबूती प्रदान कर रही हैं। कोईे भी व्यक्ति अपना उद्योग शुरू करना चाहता है, उसके लिए यह अत्यंत उपयुक्त समय है। अधिक जानकारी एवं आवेदन हेतु खादी एवं ग्रामोद्योग शाखा, कार्यालय रायपुर से संपर्क किया जा सकता है।                                                                                                                                    • लक्ष्मीकांत कोसरिया, उप संचालक

रायपुर: धान खरीदी केंद्रों में पारदर्शी व्यवस्था, किसान आसानी से बेच रहे हैं अपना धान

रायपुर : धान खरीदी केंद्र में सुगम और पारदर्शी व्यवस्था से किसान आसानी से बेच रहे धान टोकन तुंहर हाथ ऐप से श्री भोलाराम को घर बैठे टोकन की मिली सुविधा रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों का सीधा लाभ इस वर्ष कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। टोकन तुंहर हाथ ऐप ने किसानों को घर बैठे ही सरलता से टोकन प्राप्त करने की सुविधा दी है, जिससे खरीदी केंद्रों में अनावश्यक भीड़, भागदौड़ और प्रतीक्षा जैसी समस्याएँ लगभग समाप्त हो गई हैं। केंद्रों में बारदाना उपलब्धता, तौल, भंडारण और भुगतान की सभी व्यवस्थाएँ इस बार पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और समयबद्ध हैं।       इन्हीं सुविधाओं का लाभ ग्राम छांटा के किसान श्री भोलाराम चंद्रवंशी को मिला है। 5.57 एकड़ भूमि वाले श्री भोलाराम चार एकड़ में धान और शेष में गन्ने की खेती करते हैं। इस सीजन उन्होंने 84.40 क्विंटल धान बेचा और बताते हैं कि पूरे खरीदी प्रक्रिया के दौरान उन्हें एक भी बार किसी प्रकार की समस्या या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। तौल से लेकर भुगतान तक उनका संपूर्ण कार्य निर्धारित समय में और बिना किसी भागदौड़ के पूरा हो गया।      समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलने से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है। वे बताते हैं कि उचित मूल्य से मिली यह आय उनके परिवार के सपनों को नई दिशा दे रही है। वर्तमान में वे अपने परिवार के लिए पक्का मकान बना रहे हैं और कहते हैं कि पहले जो सपने दूर लगते थे, वे अब सरकार की पारदर्शी और धान खरीदी व्यवस्था की बदौलत साकार हो रहे हैं। इस वर्ष धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता है। किसान की समृद्धि ही प्रदेश की प्रगति का मार्ग है।

रायपुर: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 35 श्रमिकों को राज मिस्त्री बनने की ट्रेनिंग, कुशल श्रमिक तैयार

रायपुर : प्रधानमंत्री आवास हेतु कुशल श्रमिक हो रहे तैयार, 35 श्रमिक बनेंगे राज मिस्त्री महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम प्रोजेक्ट उन्नति के तहत दी जा रही रूरल मेशन ट्रेंनिंग रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मुंगेली जिले में प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) की बड़ी संख्या में स्वीकृत आवासों के निर्माण के लिए मिस्त्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रोजेक्ट उन्नति के तहत जिले में 35 पात्र श्रमिकों को रूरल मेशन ट्रेनिंग प्रदान की जा रही है। यह 30 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, कोनी-सेंदरी, बिलासपुर द्वारा आयोजित किया जा रहा है।       प्रशिक्षण में वही श्रमिक शामिल किए गए हैं, जिन्होंने विगत वर्षों में कम से कम 60 मानव दिवस मनरेगा में कार्य पूरा किया है और जिनकी आयु 18 से 45 वर्ष के मध्य है। प्रशिक्षणार्थियों को प्रधानमंत्री आवास निर्माण स्थलों पर व्यावहारिक कार्य के माध्यम से राज मिस्त्री का कौशल सिखाया जा रहा है। संस्था द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क सेफ्टी किट हेलमेट, बेल्ट तथा मिस्त्री उपकरण करनी, शाहुल, टेप, धागा आदि भी उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशिक्षण के संचालन में सहायक परियोजना अधिकारी  विनायक गुप्ता तथा कार्यक्रम अधिकारी  अशोक साहू विशेष सहयोग प्रदान कर रहे हैं।            मनरेगा श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कौशल विकास प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से श्रमिकों को पूर्ण रोजगार, आत्मविश्वास और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। अधिकारियों ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए हैं। गत वर्ष जनपद पंचायत पथरिया के ग्राम कपुवा में भी 35 लाभार्थियों को रूरल मेशन ट्रेनिंग दी गई थी, जिनमें से अधिकांश लाभार्थी वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य निर्माण कार्यों में प्रतिदिन 600-700 रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है बल्कि जिले में आवास निर्माण के लिए कुशल मिस्त्रियों की उपलब्धता भी सुदृढ़ हुई है।