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मुख्यमंत्री साय बोले—वंदे मातरम् का इतिहास भारत की आत्मा और गौरव का प्रतीक

रायपुर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्रद्धालुओं की बस दुर्घटनाग्रस्त: तिरुपति यात्रा के दौरान एक की मौत

जगदलपुर भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम तारागांव में गुरुवार सुबह एक दर्शनार्थी बस अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई. हादसे में राजनांदगांव निवासी तामेश्वर साहू की मौत हो गई, जबकि बस में सवार अन्य दर्शनार्थी घायल हो गए. जानकारी के अनुसार, दुर्ग से करीब 30 से अधिक लोगों को लेकर तिरुपति जा रही बस गुरुवार सुबह लगभग 5–6 बजे तारागांव के पास पहुंची थी. इस दौरान चालक को झपकी आने से बस का संतुलन बिगड़ गया और दुर्घटना का शिकार हो गई. घटना की सूचना मिलते ही भानपुरी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया. मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज परिजनों को सूचना दे दी गई है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.

GST विभाग की बड़ी कार्रवाई: नवीन इंजीनियरिंग वर्क्स में छापेमारी, रिकॉर्ड खंगाले गए

अंबिकापुर शहर के एमजी रोड स्थित नवीन इंजीनियरिंग संस्थान में जीएसटी विभाग ने छापेमार कार्रवाई की है. जीएसटी विभाग के अधिकारी लगातार 12 घंटे तक दस्तावेजों और उपकरणों की जांच करते रहे. जीएसटी विभाग की टीम ने रेड कार्रवाई में फर्म से संबंधित दस्तावेज और बिजली उपकरण ज्बत किया है. जानकारी के अनुसार, नवीन इंजीनियरिंग संस्थान मशीन मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों में सामग्री सप्लाई का कार्य करता है. छापेमारी के दौरान विभागीय टीम ने संस्थान से बड़ी मात्रा में बिल, वाउचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं. हालांकि, अधिकारियों ने फिलहाल किसी भी तरह की अनियमितता या कार्रवाई के निष्कर्ष पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुए इसे नियमित प्रक्रिया बताया है. गौरतलब है कि अंबिकापुर में जीएसटी विभाग द्वारा लगातार जांच और कार्रवाई की जा रही है, जिससे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हलचल का माहौल बना हुआ है.

सुकमा :गोलापल्ली के जंगल में एनकाउंटर, सुरक्षाबलों ने माओवादियों को घेरा

सुकमा  छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में DRG जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। खबर है कि इस दौरान  तीन नक्सली मारे गए हैं, जबकि कुछ घायल भी हुए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस को सूचना मिली थी कि गोलापल्ली इलाके में भारी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इस आधार पर DRG के जवान जंगल में सर्च ऑपरेशन के लिए गए थे। 18 दिसंबर की सुबह जब जवान उस इलाके में पहुंचे, तो माओवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी के आधार पर जिला सुकमा की डीआरजी(जिला रिजर्व गार्ड) टीम ने गुरुवार की सुबह सर्च आपरेशन शुरू किया था। अभियान के दौरान सुबह से ही सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ स्थल से हथियारों की बरामदगी हुई है, हालांकि मारे गए माओवादियों की पहचान और बरामद सामग्री का विस्तृत विवरण अभियान पूर्ण होने के बाद जारी किया जाएगा। इस पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग स्वयं सुकमा एसपी किरण चव्हाण कर रहे हैं। क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर सर्च ऑपरेशन को और तेज किया गया है। बता दें कि पिछले दो वर्ष में माओवादियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, शीर्ष माओवादी नेताओं सहित 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ में मारे गए हैं। इसके जवाब में जवानों ने भी कार्रवाई की और दोनों तरफ से सुबह से ही गोलीबारी जारी है। मारे गए नक्सलियों में एरिया कमेटी मेंबर (ACM) कैडर के होने की संभावना जताई जा रही है। इस कैडर पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया है। 3 दिसंबर को मुठभेड़ में मारे गए थे 12 नक्सली इससे पहले 3 दिसंबर को दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर जवानों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) वेल्ला मोडियम भी मारा गया था। वहीं, इस एनकाउंटर में DRG के 3 जवान शहीद और 2 घायल हुए थे। 16 नवंबर- 3 नक्सली मारे गए थे 16 नवंबर 2025 को भेज्जी-चिंतागुफा के सीमावर्ती क्षेत्र में जवानों ने तीन नक्सलियों को मार गिराया था। इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद DRG की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान तुमालपाड़ के जंगल में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाला। नक्सलियों की गोलियों का जवाब दिया। सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर फायरिंग हुई। इसमें तीन नक्सली मारे गए थे। जवानों ने सर्चिंग के दौरान जंगल से तीनों नक्सलियों के शव बरामद किए गए थे।

वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण हर भारतीय के लिए गर्व का विषय – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सुकमा में आत्मसमर्पित माओवादियों को मिला सम्मानजनक नया जीवन

छत्तीसगढ़ की पुनर्वास नीति से लौटी उम्मीदें 75 को 5G स्मार्टफोन, 25 को मेसन किट का वितरण रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। आत्मसमर्पण करने वाल 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट इस क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन तथा 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने संकल्पित जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे।आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है l  पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया। डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है। सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बाबा गुरु घासीदास जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ

“मनखे-मनखे एक समान” का संदेश बाबा गुरु घासीदास जी की अमर विरासत: सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध चेतना के अग्रदूत थे बाबा गुरु घासीदास जी – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय रायपुर   मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास जी की 18 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी ने अपने दिव्य उपदेशों और आचरण से समाज को सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक सद्भाव के मार्ग पर अग्रसर किया। उनका अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” केवल एक विचार नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला ऐसा जीवन-दर्शन है, जो भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की मजबूत नींव रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी ने छत्तीसगढ़ की धरती पर सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरण की सुदृढ़ आधारशिला रखी। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, असमानताओं और अंधविश्वासों के विरुद्ध चेतना जगाते हुए नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की और जनमानस को आत्मसम्मान एवं मानवीय गरिमा का बोध कराया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा जी का जीवन-दर्शन करुणा, सहिष्णुता, प्रेम, सत्यनिष्ठा और परस्पर सम्मान जैसे मानवीय गुणों के विकास का मार्गदर्शक है। उनके विचार और आदर्श समय की कसौटी पर खरे उतरते हुए आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और वर्तमान समाज के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत बने हुए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बाबा गुरु घासीदास जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा सामाजिक समरसता, शांति और सौहार्द के साथ एक समृद्ध एवं समावेशी छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को राज्य स्तरीय ओपन फिटनेस रन का आमंत्रण

रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में विधायक श्री मोतीलाल साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बलौदाबाजार जिले के ग्राम खरतोरा में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय ओपन फिटनेस रन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया तथा आयोजन की प्रतीकात्मक टी-शर्ट भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना, पुलिस तथा सीमा सुरक्षा बल के जवानों को सम्मानित किया जाएगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में सतत रूप से समर्पित जवानों का सम्मान करना पूरे समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि फिटनेस, अनुशासन और देशभक्ति जैसे मूल्यों को एक मंच पर जोड़ने वाले ऐसे आयोजन स्वस्थ, सशक्त और जागरूक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दो वर्ष की निरंतर सेवा, निरंतर विकास की दिशा में एक और पहल: मुख्यमंत्री साय ने कॉफी टेबल बुक्स का किया विमोचन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शाम नवीन विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में “दो साल निरंतर सेवा,निरंतर विकास” की भावना को समर्पित छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाने वाली जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित आठ कॉफी टेबल बुक्स का विमोचन किया गया।  इनमें बस्तर दशहरा (हिन्दी), बस्तर दशहरा (अंग्रेजी),पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ (हिन्दी),पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ (अंग्रेजी), छत्तीसगढ़ के अतुल्य जलप्रपात (हिन्दी), छत्तीसगढ़ के अतुल्य जलप्रपात (अंग्रेजी),बैगा टैटू (हिन्दी) और बैगा टैटू (अंग्रेजी) शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये कॉफी टेबल बुक्स छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, ऐतिहासिक परंपराओं, आदिवासी कला और प्राकृतिक विरासत को देश-विदेश तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इसे राज्य की पहचान को सशक्त करने वाला सार्थक प्रयास बताया। इस अवसर पर जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव , महासमुन्द विधायक श्री योगेश्वर सिन्हा, जनसंपर्क विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, जनसंपर्क आयुक्त श्री रवि मित्तल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, पूर्व विधायक श्री खिलावन साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कोहरे की चेतावनी: परिवहन आयुक्त ने जारी किए सड़क सुरक्षा दिशा-निर्देश

महासमुंद उत्तर भारत में यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे एवं दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे के कारण हुए भीषण सड़क हादसों में कई लोगों की जान चली गई है। इन दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए कार्यालय परिवहन आयुक्त छत्तीसगढ़ द्वारा राज्यभर के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। एडवाइजरी में प्रदेश सहित महासमुंद जिले के समस्त यात्री बस संचालकों एवं व्यावसायिक वाहन चालकों से अपील की गई है कि घने कोहरे में वाहन चलाना अत्यंत जोखिम भरा होता है। कोहरे में वाहन चलाना मानो आंखों पर पट्टी बांधकर गाड़ी चलाने जैसा है, इसलिए विशेष सावधानी बरतना अनिवार्य है। परिवहन आयुक्त द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार कोहरे में वाहन चलाते समय गति कम रखें और हेडलाइट हमेशा चालू रखें। हेडलाइट को लो बीम मोड पर ही रखें, क्योंकि हाई बीम कोहरे में दृश्यता को और कम कर देती है। जिन वाहनों में फॉग लैंप उपलब्ध हैं, उन्हें अवश्य चालू करें। कोहरे में न केवल स्वयं को दिखाई देना जरूरी है, बल्कि दूसरों को दिखाई देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कोहरे के दौरान डिफॉस्टर एवं विंडस्क्रीन वाइपर का उपयोग करें, वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा लेन अनुशासन का पालन करते हुए ओवरटेक करने से बचें। यदि परिस्थितियां अत्यधिक प्रतिकूल हों और वाहन चलाना संभव न हो, तो वाहन को सड़क के किनारे सुरक्षित स्थान पर खड़ा कर इंडिकेटर लाइट चालू रखें। जिला प्रशासन एवं परिवहन विभाग महासमुंद ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे जारी की गई एडवाइजरी का सख्ती से पालन करें, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके और जन-जीवन सुरक्षित रह सके।