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हरियाली से महका मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर, फलदार वृक्ष बने आकर्षण का केंद्र

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिला मुख्यालय स्थित मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर इन दिनों अपनी हरियाली और फलदार वृक्षों के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। परिसर में लगे लीची, आम और कटहल के पेड़ न केवल पर्यावरण की सुंदरता को बढ़ा रहे हैं, बल्कि यहां आने वाले लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच ये घने वृक्ष परिसर में ठंडी छाया और सुकून का एहसास करा रहे हैं। न्यायालय में आने वाले अधिवक्ता, कर्मचारी और पक्षकार इन पेड़ों की छांव में राहत महसूस कर रहे हैं। परिसर में विशेष रूप से लीची के गुच्छेदार फल, आम के कच्चे-पके फलों की बहार और कटहल के बड़े आकार के फल इसे किसी बाग-बगीचे जैसा मनोहारी स्वरूप दे रहे हैं। यह प्राकृतिक सौंदर्य लोगों के लिए खास आकर्षण का विषय बन गया है। अधिवक्ता श्रीमती पूनम गुप्ता के अनुसार, न्यायालय परिसर में इस प्रकार की हरियाली न केवल वातावरण को शुद्ध करती है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण का एक सकारात्मक संदेश भी देती है। यदि न्यायालय प्रशासन और अधिवक्ता संघ द्वारा इस हरियाली को और बढ़ावा दिया जाए, तो आने वाले समय में यह परिसर एक आदर्श उदाहरण बन सकता है, जहां न्यायिक कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक संतुलन का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।

जिले में परिवहन सुविधा केंद्र खोलने का सुनहरा मौका, 15 मई तक आवेदन आमंत्रित

जिले में परिवहन सुविधा केंद्र खोलने का सुनहरा मौका, 15 मई तक आवेदन आमंत्रित "एक ही स्थान पर ड्राइविंग लाइसेंस सहित सभी परिवहन सेवाएं, स्थानीय स्तर पर रोजगार के भी बनेंगे अवसर" मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में परिवहन सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत परिवहन सुविधा केंद्र (Transport Facilitation Center) स्थापित करने के लिए इच्छुक व्यक्तियों एवं संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। जिला परिवहन अधिकारी, कोरिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को परिवहन संबंधी सभी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और समय की बचत हो सके। एक ही केंद्र पर मिलेंगी सभी सेवाएं परिवहन सुविधा केंद्र के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कार्य, ऑनलाइन आवेदन, शुल्क भुगतान, दस्तावेजों का स्कैन एवं अपलोड, तथा विभिन्न प्रपत्रों के प्रिंट आउट जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इससे नागरिकों को त्वरित, सरल और पारदर्शी सेवाएं मिल सकेंगी। पहले भी हुई थी प्रक्रिया, अब फिर अवसर गौरतलब है कि इस योजना के तहत पहले भी आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के लिए प्रक्रिया संचालित की गई थी। अब पुनः चयनित क्षेत्रों के लिए आवेदन आमंत्रित कर अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर दिया जा रहा है। 15 मई तक करें आवेदन इच्छुक आवेदक 15 मई 2026 तक निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रशासन ने समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है, ताकि पात्र अभ्यर्थियों का चयन कर शीघ्र केंद्र स्थापित किए जा सकें। रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे प्रशासन का मानना है कि इन केंद्रों की स्थापना से जहां आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार के साथ-साथ जनसेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

महासमुंद में ई-ऑफिस की शुरुआत, फाइल ट्रैकिंग और काम में तेजी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित

महासमुंद  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिजिटल इंडिया पहल और विष्णुदेव साय के सुशासन एवं पारदर्शिता के संकल्प को साकार करते हुए महासमुंद जिला प्रशासन ने ई-ऑफिस प्रणाली को तेजी से अपनाया है। शासन की प्राथमिकता के अनुरूप ई-ऑफिस प्रणाली अब जिले के लगभग सभी विभागों में गति पकड़ चुकी है। जिले के लगभग सभी विभागों में अब परंपरागत कागज़ी फाइलों के स्थान पर ई-ऑफिस के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं। 1366 अधिकारी-कर्मचारियों का ई-ऑफिस के लिए ऑनबोर्डिंग किया जा चुका है, जो इस प्रणाली के व्यापक क्रियान्वयन को दर्शाता है। अब तक लगभग साढ़े 5 हजार से अधिक फाइलों का मूवमेंट डिजिटल माध्यम से किया जा चुका है, जिससे कार्यों में गति और दक्षता आई है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में कलेक्ट्रेट का अधिकांश कार्य ई-ऑफिस प्रणाली से संचालित हो रहा है। प्रत्येक सप्ताह समय-सीमा की बैठकों में इसकी समीक्षा कर विभागवार प्रगति की समरी रिपोर्ट ली जाती है। सभी शासकीय पत्राचार, नियमित फाइलें और वित्तीय स्वीकृतियाँ यहां तक कि छोटी नोटशीट्स भी अब ऑनलाइन दर्ज की जा रही हैं, जिससे कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी आसान हो गई है। ई-ऑफिस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण लाभ इसकी ऑनलाइन ट्रैकिंग सुविधा है। अब किसी भी फाइल की स्थिति को आसानी से देखा जा सकता है, वह किस अधिकारी के पास लंबित है और कितने समय से। इससे कार्यों में अनावश्यक विलंब कम हुआ है और जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है। इस प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों को तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे फाइल निर्माण, नोटशीट लेखन और दस्तावेज अपलोडिंग में दक्ष हो चुके हैं। तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए एनआईसी और तकनीकी टीम का सहयोग भी लगातार लिया जा रहा है। शासन की मंशा है कि भविष्य में संपूर्ण पत्राचार केवल ई-ऑफिस के माध्यम से ही किया जाए। शासन की यह कदम समय की बचत और विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा कार्यों में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगा। महासमुंद जिले में यह पहल निश्चित रूप से डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में सार्थक रूप से संचालित हो रहा है।

रायपुर: राज्यपाल ने कोसा वस्त्रों के नवाचार और बुनकरों के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा साड़ी, शाल और गमछा का अवलोकन किया तथा राज्य के हाथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए नवाचार, डिज़ाइन विकास और मूल्य संवर्धन पर विशेष बल दिया। राज्यपाल ने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कोसा साड़ी एवं शाल में डॉबी और जैकार्ड तकनीक का उपयोग कर आधुनिक डिज़ाइन विकसित किए जाएं। साथ ही विभिन्न आयु वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए उत्पादों को आकर्षक एवं किफायती बनाया जाए, ताकि इनकी बाजार में मांग बढ़ सके। उन्होंने उत्तर-पूर्व के प्रसिद्ध रेशम क्षेत्र असम के सुवालकुची, विजयनगर और डेमाजी क्षेत्रों के सफल मॉडल का अध्ययन कर वहां के लोकप्रिय डिज़ाइनों को छत्तीसगढ़ के कोसा वस्त्रों में समाहित करने का सुझाव दिया। राज्यपाल ने कहा कि इससे राज्य के बुनकरों को नई पहचान मिलेगी तथा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। राज्यपाल ने कोसा साड़ी को अधिक किफायती बनाने के लिए साड़ी की बॉडी और बॉर्डर को पृथक रूप से तैयार कर नई शैली की साड़ियों के निर्माण का सुझाव भी दिया। उन्होंने विशेष रंगों एवं धागोंकृएक्रेलिक, स्पन और टू-प्लाई यार्न का उपयोग कर आकर्षक मोटिफ और डिज़ाइन विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने आगामी एक माह में इस दिशा में हुई प्रगति की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामोद्योग विभाग  को राज्य की किसी एक बुनकर सहकारी समिति को गोद लेकर उसके समग्र विकास हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्याम धावड़े, राज्य हाथकरघा संघ के सचिव एम. एम. जोशी, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार बुनकर सेवा केंद्र रायगढ के उपनिदेशक विजय सावनेरकर सहित तकनीकी विशेषज्ञों तथा डिज़ाइनर उपस्थित रहे।

कोरिया: राज्य से आए तकनीकी अधिकारी एस.के. साहू ने परखी मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता

कोरिया : ’राज्य से आए तकनीकी अधिकारी एस के साहू ने परखी मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता’ ग्राम पंचायत भ्रमण के बाद तीन जिलों की तकनीकी टीम की बैठक लेकर दिया मार्गदर्शन कोरिया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में आयुक्त मनरेगा तारण प्रकाश सिन्हा के निर्देशानुसार राज्य कार्यालय में पदस्थ तकनीकी अधिकारी एस के साहू ने गत दिवस कोरिया जिले में जनपदों का भ्रमण कर योजनाओं के कार्यों का आंकलन किया। दोनों जनपदों की विभिन्न ग्राम पंचायतों में भ्रमण के बाद देर शाम उन्होने तीन जिलों की तकनीकी टीम के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। विदित हो कि राज्य कार्यालय द्वारा अधिकारियों को अलग अलग जिलों के प्रभार आवंटित किए गए हैं और वह प्रतिमाह आकर योजनाओं के क्रियान्वयन की भौतिक जांच कर रहे हैं। इससे कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।  ’दस ग्राम पंचायतों के दर्जनों कार्यों का निरीक्षण’ राज्य से आए सहायक अभियंता से एस के साहू ने कोरिया जिले मे जनपद पंचायत सोनहत के ग्राम पंचायत मझारटोला में हितग्राही जयसिंह के आजीविका डबरी का निरीक्षण कर हितग्राही से बात की। इसके बाद उन्होने ग्राम पंचायत मधौरा के नवा तरिया स्थल का निरीक्षण किया। जनपद मुख्यालय सोनहत की ग्राम पंचायत तथा रजौली में बने धान चबूतरे के अलावा साहू ने अमृत सरोवर, बोड़ार मे बने कंटूर टें्रच कार्य, अक्लासरई के बंधवागढ़ा अमृत सरोवर, ग्राम पंचायत किशोरी में बने 30-40 माडल का निरीक्षण किया। जनपद पंचायत सोनहत के बाद उन्होने बैकुण्ठपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सलका में जाकर नवीन आंगनबाड़ी भवन कार्य तथा ग्राम पंचायत जामपारा में बने धान संग्रहण चबूतरा कार्य का अवलोकन किया।  ’तकनीकी टीम की समीक्षा बैठक’ सहायक अभियंता साहू को राज्य द्वारा कोरिया जिले के अलावा सूरजपुर तथा एमसीबी जिले में निरीक्षण का दायित्व सौंपा गया है। वह बीते तीन दिनों से निरंतर भ्रमण कर अलग अलग ग्राम पंचायतों में निरीक्षण कर चुके हैं। कल शाम उन्होने मनरेगा के समस्त तकनीकी टीम के साथ एक समीक्षा बैठक लेकर कार्यों की प्रगति का आंकलन किया। इसके बाद उन्होने तीनों जिलों से आए समस्त तकनीकी सहायकों को कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। इस बैठक में सहायक परियोजना अधिकारी व कार्यक्रम अधिकारी भी शामिल रहे।  ’समीक्षा के विषय’ राज्य के तकनीकी अधिकारी साहू ने बैठक में नवा तरिया निर्माण, आजीविका डबरी निर्माण कार्य, समूहों के गठन और उनके लाभ के लिए संगम परियोजना के कार्य, एमआईएस रिपोर्ट, फेस अथेंटिकेशन प्रणाली, जियो टेग, आवास हितग्राहियों को 90 कार्यदिवस के रोजगार, युक्तधारा पोर्टल पर प्रगति सहित क्षेत्र भ्रमण के दौरान आए हुए विषयों पर विस्तार से जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।

न्यू एज मीडिया में दक्ष बनें जनसंपर्क अधिकारी : आयुक्त रजत बंसल

रायपुर.  जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने आज नवा रायपुर स्थित संवाद कार्यालय में जनसंपर्क संचालनालय और जिला जनसंपर्क अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि वर्तमान दौर में जनसंपर्क अधिकारियों को न्यू एज मीडिया की सभी विधाओं में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ तकनीक और संचार के नए माध्यमों को अपनाना ही प्रभावी जनसंपर्क की कुंजी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जनसंपर्क का कार्य अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण है, इसलिए इसे पूरी गंभीरता के साथ किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की कोताही से बचना जरूरी है। जनसंपर्क अधिकारी शासन और जनता के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि परिणाम के अनुरूप हर अधिकारी के कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा।  बैठक में उन्होंने निर्देशित किया कि मंत्रिगणों, विभागीय सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिले के कलेक्टरों के साथ नियमित संपर्क और समन्वय बनाएं। इससे सूचनाओं का समयबद्ध और प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा, जो शासन की योजनाओं के सही क्रियान्वयन और प्रचार के लिए अत्यंत आवश्यक है। जनसंपर्क आयुक्त ने आगामी एक मई से शुरू हो रहे प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के प्रचार-प्रसार की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर माध्यम का प्रभावी उपयोग कर योजनाओं की पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।  उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि राज्य में हो रहे विकास कार्यो और योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के वास्तविक अनुभवों को वीडियो पोस्ट और समाचारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए। इससे अन्य लोगों को भी इनका लाभ लेने के लिए प्रेरणा मिलती है। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ सतत संपर्क और समन्वय बनाए रखा जाए, ताकि योजनाओं की उपलब्धियों और सरकार के कार्यों का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जा सके। जनसंपर्क आयुक्त ने कहा कि सभी अधिकारी सक्रिय और जिम्मेदार तरीके से कार्य करें ताकि शासन की योजनाएं आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें वहीं उन्होंने प्रचार-प्रसार कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन जिला जन संपर्क अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए है। बैठक में अपर संचालक सर्वउमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव और श्रीमती हर्षा पौराणिक सहित संचालनालय और जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी मौजूद थे।

राज्य में नहीं है खाद की कमी, पंजीकृत रकबे के मुताबिक सभी किसानों को मिलेगी समय पर खाद: कृषि मंत्री रामविचार नेताम

रायपुर.  पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका – इज़राइल और ईरान के बीच तनाव के बीच आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार द्वारा 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आबंटित हुआ है। जिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में गोदामों एवं समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी किसानों को पारदर्शिता के साथ पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद का आबंटन सुनिश्चित हो।  मंत्री नेताम ने बताया कि 30 मार्च की स्थिति में राज्य में कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक में मौजूद है, जिसमें यूरिया 2,43,717 मीट्रिक टन, डीएपी 1,05,631 मीट्रिक टन, एनपीके 1,69,109 मीट्रिक टन, एमओपी 50,431 मीट्रिक टन और एसएसपी 1,78,657 मीट्रिक टन  इस तरह कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद स्टॉक में मौजूद है। मंत्री नेताम ने बताया कि पश्चिमी एशियाई संकट के चलते रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत एनपीके 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13, हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।  मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर उर्वरकों में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।  कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने रायपुर और दुर्ग संभाग के विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर आगामी खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर अधिकारियों से कहा है कि पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों के पंजीयन तेजी से पूर्ण कर लिया जाए। बीज एवं उर्वरक वितरण के लिए नई ई-वितरण प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। वही रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के उपयोग के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।  उन्होंने रासायनिक उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और डायवर्जन रोकने के लिए जिलों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उपार्जन को भी प्राथमिकता में रखा गया है। उन्होंने हर जिले में सुगंधित धान की प्रजाति के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही दलहन-तिलहन फसलों तथा उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले – पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है हमारी सरकार

रायपुर.  डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है। साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। सम्मेलन को सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध, आपूर्ति पूरी तरह सामान्य: खाद्य विभाग

रायपुर. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के साथ ही आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र राज्य सरकार लगातार भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संपर्क में है, ताकि प्रदेश की ईंधन आवश्यकताओं की निर्बाध पूर्ति सुनिश्चित की जा सके। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आपूर्ति की साप्ताहिक समीक्षा नियमित रूप से की जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। शासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रदेश में संचालित 2516 पेट्रोल पंपों तथा तीनों प्रमुख ऑयल कंपनियों के डिपो में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल एवं डीजल उपलब्ध है। मार्च 2026 में प्रदेश की मासिक पेट्रोल आवश्यकता 1.01 लाख किलोलीटर के विरुद्ध 1.27 लाख किलोलीटर (126 प्रतिशत) की आपूर्ति की गई। वहीं अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.60 लाख किलोलीटर पेट्रोल प्राप्त हो चुका है। इसी प्रकार मार्च में डीजल की आवश्यकता 1.64 लाख किलोलीटर के मुकाबले 3.00 लाख किलोलीटर (183 प्रतिशत) आपूर्ति हुई, जबकि अप्रैल 2026 में 23 अप्रैल तक 1.38 लाख किलोलीटर डीजल की आपूर्ति हो चुकी है। स्पष्ट है कि प्रदेश में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों में आकस्मिक निरीक्षण एवं छापेमारी की कार्रवाई जारी है। राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। आम नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिए विभागीय कॉल सेंटर (1800-233-3663) भी सक्रिय रूप से कार्यरत है। 23 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग के संचालक की अध्यक्षता में तीनों ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह सामने आया कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता रिटेल आउटलेट से डीजल खरीद रहे हैं, जिससे अस्थायी दबाव की स्थिति बनती है। इस पर कंपनियों को निर्देशित किया गया है कि वे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करें। वर्तमान स्थिति के अनुसार, प्रदेश में लगभग 77,111 किलोलीटर पेट्रोल उपलब्ध है, जो लगभग 22 दिनों की आवश्यकता के बराबर है। इसी प्रकार 84,295 किलोलीटर डीजल उपलब्ध है, जो करीब 15 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। सरकार ने पुनः आश्वस्त किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है तथा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।

बालोद : मई के पहले सप्ताह से शुरू होगा तेंदुपत्ता संग्रहण का कार्य

बालोद     जिले में वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य मई माह के प्रथम सप्ताह से शुरू होने जा रहा है। जिसके लिए जिला यूनियन वनमंडल बालोद द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। वनमण्डलाधिकारी एवं जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित बालोद के प्रबंध संचालक श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि जिले के लगभग 25 हजार संग्राहकों के द्वारा तेंदुपत्ता संग्रहण का कार्य किया जाना है। जिन्हंें 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से ऑनलाइन भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य मई माह के प्रथम सप्ताह से शुरू होगा। जिसके लिए 252 फड़ खोले जाएंगे। कलेक्टर द्वारा अन्य विभागों से 151 फड़ एवं वनमंडलाधिकारी द्वारा 101 विभागीय और अभिरक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इसके अलावा निगरानी के लिए जोनल अधिकारी और पोषक अधिकारियों की नियुक्तियां भी पूर्ण हो चुकी हैं।     प्रबंध संचालक ने बताया कि संग्रहण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ’शाखकर्तन कार्यशाला’ का आयोजन पूर्व में किया जा चुका है। फड़मुंशियों का अनुमोदन भी हो गया है। जब तक अच्छी गुणवत्ता के पत्ते प्राप्त होंगे, तब तक संग्रहण केंद्र खुले रहेंगे ताकि संग्राहकों को अधिकतम लाभ मिल सके। संग्रहण और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके अलावा 21 अप्रैल 2026 को जिला पंचायत की वन स्थायी समिति के सदस्यों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। समिति के सदस्य स्वयं फड़ों का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने बताया कि संग्रहण कार्य को अंतिम रूप देने के लिए इसी सप्ताह क्रेता, प्रबंधक और पोषक अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। जिले में तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए पूरी व्यवस्था चाक-चौबंद है। संग्राहकों को सही समय पर उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और संग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी संपन्न कराना हमारा लक्ष्य है।