samacharsecretary.com

कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में CM विष्णु देव साय का सख्त संदेश — जनहित में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

राज्य एवं केन्द्र शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे बस्तर संभाग के मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाया जाए प्रभारी सचिवों और संभागीय आयुक्तों को योजना के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सुशासन, पारदर्शिता और जनहित योजनाओं पर मंथन रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रविवार को मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025 में सुशासन, पारदर्शिता और जनहित के नए मानक तय किए गए। बैठक की शुरुआत निर्धारित समय से पहले हुई, जिसने पूरे प्रशासन को मुख्यमंत्री की वर्क-डिसिप्लिन और परिणाम केंद्रित कार्यशैली का सीधा संदेश दिया।  बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, सभी विभागीय सचिव, संभागायुक्त और कलेक्टर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने प्रारंभ से ही स्पष्ट कर दिया कि शासन की नीतियों और योजनाओं का अंतिम लाभ जनता तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुँचना ही सुशासन का वास्तविक अर्थ है — और इस दिशा में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कॉन्फ्रेंस केवल समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि जनहित के नए मानक तय करने का अवसर है। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन में परिणाम दिखाई देने चाहिए, केवल रिपोर्टों में नहीं। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स कांफ्रेंस में कहा कि शासन की नीतियों और योजनाओं का अंतिम उद्देश्य आम जनता तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच आपकी उपस्थिति और संवेदनशीलता ही आपकी पहचान है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धान खरीदी 15 नवंबर से प्रारंभ होगी और इसकी सभी तैयारियाँ समय पर पूरी कर ली जाएं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धान खरीदी में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सीधे कलेक्टर जिम्मेदार होंगे। धान खरीदी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक धान खरीदी केंद्र की मॉनिटरिंग  हो। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रभारी सचिव जिलों में लगातार निगरानी रखें और संवेदनशील केंद्रों की विशेष मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी की चौकसी बढ़ाने के लिए अब इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उपयोग किया जाएगा। इससे जिलों में निगरानी तेज होगी और किसी भी गड़बड़ी पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी। उन्होंने निर्देश दिया कि अंतरराज्यीय सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरती जाए, ताकि बाहर से धान की अवैध आवाजाही को रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के किसानों के लिए विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय इलाकों में विशेष शिविरों के माध्यम से 100 प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भी पात्र किसान वंचित न रहे, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पात्र किसानों को लाभ पहुँचना चाहिए। उन्होंने कमिश्नरों को निर्देश दिया कि बस्तर और सरगुजा सम्भाग में विशेष रूप से योजना की प्रगति की सतत समीक्षा करें।  मुख्यमंत्री साय ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुँचे। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में हितग्राहियों को बैंक फाइनेंस की सुविधा आसानी से उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना से वंचित न रहे। स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शत प्रतिशत प्रसव सभी अस्पतालों में  सुनिश्चित हो। साथ ही टीकाकरण की वास्तविक स्थिति की फील्ड वेरिफिकेशन द्वारा पुष्टि की जाए। उन्होंने कहा कि मैटरनल डेथ ऑडिट प्रत्येक मामले में अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम की रणनीति बन सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआरसी सेंटरों का संचालन नियमित और प्रभावी होना चाहिए तथा माताओं और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने वेलनेस सेंटरों को सक्रिय कर गैर-संचारी रोगों  के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग में मलेरिया उन्मूलन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर विशेष अभियान चलाया जाए ताकि छत्तीसगढ़ को “मलेरिया-मुक्त राज्य” बनाने का लक्ष्य शीघ्र पूरा किया जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के अंतर्गत सभी पात्र वृद्धजनों के पंजीयन और कार्ड निर्माण कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रॉपआउट शून्य करने और सकल नामांकन अनुपात को 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य किसी भी हालत में पूरा होना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षण सामग्री अलमारियों में नहीं, कक्षाओं में दिखनी चाहिए। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि शिक्षण संसाधनों का उपयोग कक्षा में सुनिश्चित करें और नियमित मॉनिटरिंग करें। मुख्यमंत्री ने बीजापुर जिले की सराहना करते हुए कहा कि वहाँ स्थानीय युवाओं की मदद से गोंडी भाषा में शिक्षण से बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और ड्रॉपआउट घटा है। उन्होंने सभी जिलों को ऐसे नवाचार अपनाने की सलाह दी ताकि शिक्षा स्थानीय संस्कृति और भाषा से जुड़ सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 31 दिसंबर तक सभी विद्यार्थियों की आधार-बेस्ड APAR ID बनाकर रजिस्ट्रेशन पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था डिजिटल पारदर्शिता और छात्र लाभ वितरण में निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसी आधार पर छात्रों को गणवेश, किताबें और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” चलाया जाएगा। इसमें स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कर ग्रेडिंग होगी। उन्होंने कहा कि जिलों में परीक्षा परिणाम सुधार की ठोस योजना बने। जो जिले बेहतर कर रहे हैं, उनके मॉडल अन्य जिलों में लागू किए जाएँ।

24 घंटे तक सुरंग में छिपे रहे चोर: खदान से केबल चोरी की कोशिश नाकाम, 6 आरोपी गिरफ्तार

सूरजपुर बिश्रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एसईसीएल कुम्दा सहक्षेत्र स्थित अंडरग्राउंड माइंस में केबल चोरी करते हुए छह आरोपी पकड़े गए हैं. चोरी की भनक लगने पर सुरक्षा कर्मियों ने बाहर निकलने के रास्ते को बंद कर दिया, जिसके बाद सभी आरोपी करीब 24 घंटे तक सुरंग के अंदर ही फंसे रहे. बताया जा रहा है कि इस दौरान चोरों ने सुरक्षा अधिकारी पर हमला करने की भी कोशिश की. दरअसल, सुरक्षा अधिकारी को सूचना मिली कि अंडरग्राउंड कोयले की माइंस के अंदर कई लोग चोरी करने की इरादे से घुसे हुए हैं. जिसके बाद सिक्योरिटी विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर माइंस के अंदर जाने वाले रास्ते को जाली लगाकर बंद कर दिया. सुरक्षा अधिकारी और त्रिपुरा राइफल के जवानों ने चोरों का ढूंढना शुरू किया. जिन्हें देखते ही चोर भागने लगे, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया. सुरक्षा अधिकारी पर कुल्हाड़ी से किया हमला चोरों ने भागने निकलने की कोशिश में सरक्षा अधिकारी पर कुल्हाड़ी से हमला किया. हालांकि सुरक्षा अधिकारी बाल बाल बचे. इसके बाद सभी चोरों को पुलिस के हवाले कर दिया गया. आरोपियों के पास से हथियार और लाखों रुपए मूल्य का केबल तार बरामद किया गया.

एचआइवी पाजिटिव महिला मरीज की पहचान सार्वजनिक करने पर हाई कोर्ट ने अस्पताल पर उठाया सवाल, सुनवाई 15 को

बिलासपुर  हाई कोर्ट ने रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में एचआइवी पाजिटिव महिला मरीज की पहचान सार्वजनिक करने की घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा है. कोर्ट ने कहा कि यह कृत्य न केवल अमानवीय है बल्कि नैतिकता और निजता के अधिकार का घोर उल्लंघन है. मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी. दरअसल, 10 अक्टूबर को प्रकाशित खबर में बताया गया कि रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में नवजात शिशु के पास एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें यह लिखा था कि बच्चे की मां एचआईवी पाजिटिव है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह पोस्टर गाइनो वार्ड में भर्ती मां और नर्सरी वार्ड में रखे नवजात बच्चे के बीच लगाया गया था. जब बच्चे के पिता अपने शिशु को देखने पहुंचे तो उन्होंने यह पोस्टर देखा और भावुक होकर रो पड़ा. कोर्ट ने इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए सुनवाई की. कोर्ट ने कहा कि यह अत्यंत अमानवीय, असंवेदनशील और निंदनीय आचरण है, जिसने न केवल मां और बच्चे की पहचान उजागर कर दी बल्कि उन्हें सामाजिक कलंक और भविष्य में भेदभाव का शिकार भी बना सकता है. कोर्ट ने कहा कि यह कार्य सीधे तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, राज्य के इतने प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान से यह अपेक्षा की जाती है कि वह रोगियों के साथ अत्यधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करे. एचआइवी/एड्स जैसे सामाजिक रूप से संवेदनशील मामलों में पहचान उजागर करना गंभीर चूक है. मामले में कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे 15 अक्टूबर 2025 तक व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करते हुए यह स्पष्ट किया जाए कि, सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कालेजों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की गोपनीयता सुनिश्चित करने की वर्तमान व्यवस्था क्या है. इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने के क्या कदम उठाए गए हैं. डाक्टरों, नर्सों और पैरा-मेडिकल स्टाफ को कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के लिए भविष्य में क्या उपाय प्रस्तावित हैं.  कोर्ट ने कहा- दोबारा ऐसी गलती न दोहराई जाए.

दुर्ग पुलिस की नशा तस्करो पर लगातार कार्यवाही, 22 मामलों में 438.748 किलोग्राम गांजा पकड़ा

हेरोईन के 03 प्रकरण में 33 आरोपी पकड़े गए इनमें थाना मोहन नगर के प्रकरण में 246 ग्राम चिट्टा के साथ अभी तक कुल 30 आरोपी पकड़े जा चुके है इस वर्ष जिले में पहली बार अफीम के 03 आरोपी भी पकड़े गए, जिसमें 02 आरोपी पंजाब के रहने वाले है 01 सितम्बर को 239 मामलों में लगभग 1620.490 कि0ग्रा0 गांजा, हेराईन 277.29 ग्राम ब्राउन शुगर 214.398 ग्राम एवं 273776 नग नशीली दवाईयों का नष्टीकरण किया गया दुर्ग जिला पुलिस दुर्ग द्वारा 1 सितंबर 2025 से विशेष अभियान विश्वास चलाकर नशाखोरी में लिप्त नशा की तस्करी में लिप्त तस्करों एवं विक्रेताओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस कार्यवाही के तहत लगभग 84.77 लाख रुपए के नशीली दवाएं एवं टैबलेट्स तथा गांजा एवं चिट्टा पकड़ा गया है। थाना कुम्हारी में एक कंटेनर में तस्करी करते हुए 388 किलोग्राम गांजा पकड़ा तथा उनके साथ महाराष्ट्र के दो अंतर्राज्यीय तस्कर एवं ड्राइवर पकड़े गए।इसी तरह पंजाब के चार तस्करों के साथ 246 ग्राम चिट्टा थाना मोहन नगर क्षेत्र में पकड़ा गया और उसके गैंग में शामिल छोटे बड़े सभी विक्रेताओं को 30 की संख्या में पकड़ा गया है। इस प्रकरण में आगे भी गिरफ्तारी होना संभावित है। इसी अभियान में दिनांक 16.09.2025 को विशेष अभियान चला कर एक ही दिन में एनडीपीएस के 17 प्रकरण में 19.531 किलोग्राम गांजा तथा 106 नग टैबलेट्स/सीरप पकड़ा गया। साथ ही नशीली दवाओ एवं सिरींज के लिए भी पुलिस की टीम लगातार लगी रही तथा कुख्यात तस्कर वैभव खंडेलवाल से हजारों की संख्या में अल्प्राजोरम के टैबलेट बरामद किया गया। तत्पश्चात थाना दुर्ग कोतवाली में 10000 से ज्यादा नशीले दवाओ के टैबलेट एक साथ बरामद किए गए उक्त पूरी कार्यवाही एएसीसीयू के स्टाफ एवं थाना की टीमो द्वारा किया गया है।

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने स्कूलों की स्थिति पर लिया संज्ञान, अधिकारियों को सुधार के आदेश जारी

सरगुजा अंबिकापुर शहर सहित छत्तीसगढ़ के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को लेकर गाइडलाइन जारी की गई है, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के शौचालय जाने से लेकर उनके अधिकार और स्कूली बैग के वजन को लेकर राज्य बाल संरक्षण आयोग ने प्रदेश के सभी कलेक्टर, एसपी और शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी किया गया है, लेकिन इन आदेशों के परिपालन को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई जांच कमेटी का गठन नहीं किया है. अधिवक्ता व समाजसेविका शिल्पा पाण्डेय ने प्रेस वार्ता कर बताया कि विभिन्न विद्यालयों से शिकायत मिल रही थी कि छोटे बच्चों को कक्षा के दौरान शौचालय जाने से वंचित किया जा रहा है, साथ ही बच्चों के बस्ते का वजन भी निर्धारित मापदंड से अधिक रखा गया है. और तो और सप्ताह में एक दिन स्कूलों में होने वाला बैग लेस डे का पालन भी नहीं किया जा रहा है. इस पर उन्होंने राज्य बाल संरक्षण आयोग को पत्र लिखकर स्कूलों में नियमों का पालन करने की मांग की थी. शिल्पा पाण्डेय ने बताया कि कक्षा पहली से लेकर दूसरी तक के बच्चों के बस्ते का वजन डेढ़ से 2 किलो, तीसरी से पांचवी तक अधिकतम ढाई से 3 किलो, छठवीं से आठवीं तक 4 किलो और कक्षा नौवीं से दसवीं तक अधिकतम 5 किलो वजन निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही कक्षा पहली और दूसरी में गृह कार्य होमवर्क पर पूर्णता निषद्ध की गई है. लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. शिल्पा पाण्डेय के पत्र पर संज्ञान में लेते हुए राज्य बाल संरक्षण आयोग के द्वारा प्रदेश के सभी कलेक्टर एसपी और जिला शिक्षा अधिकारी को आदेश जारी कर नियमों का पालन करने निर्देशित किया है, जिसमें स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को शौचालय जाने से नहीं रोकने और बस्ते का वजन निर्धारित मापदंड अनुसार करने की बात कही गई है. लेकिन आदेशों का पालन हो रहा है या नहीं इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई जांच कमेटी का गठन नहीं किया है.

प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ 10 एकड़ जमीन मुक्त

रायपुर राजधानी रायपुर में अवैध प्लॉटिंग पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर ग्राम सेजबहार में करीब 10 एकड़ भूमि पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया. कार्रवाई के दौरान मौके पर बनी बाउंड्री वॉल, प्लिंथ और सड़क मार्ग को तोड़ा गया. साथ ही अवैध रूप से किए गए निर्माण को पूरी तरह हटाया गया है. यह संयुक्त कार्रवाई एसडीएम रायपुर नंदकुमार चौबे के नेतृत्व में राजस्व विभाग और नगर निगम की टीम प्रहरी द्वारा की गई. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध भूमि विक्रय, बेजा कब्जे पर नियंत्रण रखने और भू-उपयोग को नियमानुसार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग या निर्माण कार्य करने वालों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.

हमारी सरकार सुशासन और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय श्री श्री रणेश्वर रामचंडी मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में हुए शामिल लैलूंगा विकासखंड के ग्राम झगरपुर में कोलता समाज द्वारा आयोजित भव्य आयोजन: मुख्यमंत्री ने 63 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की घोषणाएं कीं 50 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा कुंजारा–तोलगे–मिलूपारा मार्ग रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम झगरपुर में कोलता समाज द्वारा आयोजित श्री श्री रणेश्वर रामचंडी मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी आत्मानंद शासकीय हिंदी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झगरपुर परिसर में किया गया, जहाँ समाज के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का पारंपरिक गजमाला पहनाकर और तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री श्री रणेश्वर रामचंडी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर माता रामचंडी के चरणों में पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि झगरपुर की इस पावन भूमि पर आकर उन्हें आत्मिक शांति का अनुभव हुआ है। यह मंदिर न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि समाज की सांस्कृतिक चेतना और एकता का भी सशक्त प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति और परंपराओं में बसती है। जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं ईश्वर का वास होता है। उन्होंने माता-पिता को सच्चा ईश्वर बताते हुए कहा कि यदि माता-पिता प्रसन्न हैं तो सभी देवी-देवता प्रसन्न रहते हैं। मुख्यमंत्री ने सभी से अपने घर के बड़ों के प्रति सम्मान और सेवा-भाव बनाए रखने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और विकास के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसके लिए ई-गवर्नेंस की शुरुआत हो चुकी है तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ सतत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार बनने के 18 से 19 माह के भीतर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को पूरा किया गया है। किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस दिया गया, धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल से बढ़ाकर 21 क्विंटल प्रति एकड़ की गई, और समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपए की सहायता दी जा रही है। 18 लाख प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैं। भूमिहीन मजदूर सहायता योजना, तेंदूपत्ता खरीदी 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा, रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जैसी योजनाएं जनहित में संचालित की जा रही हैं।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संसाधनों से समृद्ध राज्य है, और जनसहयोग तथा संसाधनों के सही उपयोग से हम विकास के नए अध्याय लिख रहे हैं। ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ यह केवल नारा नहीं, बल्कि हमारी कार्यसंस्कृति है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज 35,440 करोड़ रुपए के परिव्यय वाली दो प्रमुख योजनाओं – प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिशन – का शुभारंभ किया है। यह योजनाएं देश के किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, कृषि उत्पादन वृद्धि और ग्रामीण समृद्धि के लिए सतत प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि भूमि रजिस्ट्री व्यवस्था में सुधार कर शासन प्रणाली में नई पारदर्शिता और जवाबदेही लाई गई है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने झगरपुर में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपए, विकासखंड मुख्यालय लैलूंगा में कोलता समाज हेतु सामुदायिक भवन के लिए 25 लाख रुपए, कुंजारा–तोलगे–मिलूपारा मार्ग निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपए, वार्ड क्रमांक 5 पटेलपारा के बीच नदी में स्टॉप डैम कम कॉजवे निर्माण हेतु 2.5 करोड़ रुपए, लैलूंगा–कुंजारा से गमेकेला में खारुन नदी पुलिया निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए और वार्ड क्रमांक 11 में शासकीय कन्या हाईस्कूल के नवीन भवन निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए समर्पित है। कोलता समाज का आशीर्वाद और सहयोग सदैव प्रेरणास्रोत रहा है। वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि प्रदेश का सौभाग्य है कि उसे ऐसे जनसेवक का नेतृत्व प्राप्त है जो प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पदभार ग्रहण करने के मात्र 12 दिन बाद ही 13 लाख किसानों को 3,716 करोड़ रुपए बोनस का भुगतान कर दिया। धान खरीदी की सीमा 21 क्विंटल प्रति एकड़ और मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया। प्रदेश में 18 लाख से अधिक गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाभ दिया जा रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की भूमि है और प्रभु श्रीराम इस धरती के भांजा हैं। यही हमारी सांस्कृतिक पहचान और गर्व है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय का ध्यान प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है। लैलूंगा और आसपास के क्षेत्रों की आवश्यकताओं से मुख्यमंत्री पूर्णतः अवगत हैं, और क्षेत्र के विकास से जुड़े सभी कार्य चरणबद्ध रूप से पूरे किए जाएंगे।  

मिशन के तहत छत्तीसगढ़ के जशपुर, कोरबा और दंतेवाड़ा जिला के चयन पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का माना आभार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के लिए 41 हजार करोड़ रूपए से अधिक की दो नई योजनाओं का किया शुभारंभ मिशन के तहत छत्तीसगढ़ के जशपुर, कोरबा और दंतेवाड़ा जिला के चयन पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का माना आभार  मुख्यमंत्री ने किसानों को नई योजनाओं के लिए दी बधाई और शुभकामनाएं मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा : प्रदेश में खेती-किसानी की तस्वीर बदलेगी और आर्थिक सम्पन्नता आएगी पीएम धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से विकसित भारत का सपना होगा साकार     रायपुर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित मुख्य समारोह से देश के किसानों को 41 हजार करोड़ रूपए से अधिक की कृषि परियोजनाओं का उपहार दिया। उन्होंने इस मौके पर दो नई योजनाएं- प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ किया। इनमें प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए 30 हजार करोड़ रूपए और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए 11 हजार करोड़ रूपए शामिल है। इसके अलावा श्री मोदी कृषि और संरचना कोष, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की 1100 से अधिक परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषक सभागार से हजारों किसानों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा ऑनलाईन जुड़कर इस अभियान के शुभारंभ के साक्षी बने। इस मौके पर केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, पशुपालन, मत्स्यपालन एवं डेयरी विकास मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, सांसद और विधायक भी वर्चुअली रूप से जुड़े थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत रत्न जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख की जयंती के दिन आज देश कृषि आत्मनिर्भरता का नया इतिहास रच रहा है। आज से प्रारंभ हुई दोनों योजनाएं देश के अन्नदाताओं को सशक्त बनाने और कृषि आत्मनिर्भरता के नए युग की शुरुआत है। खेती को लाभकारी और आधुनिक बनाने की दिशा में यह पहल मील का पत्थर सिद्ध होंगी। उन्होंने बताया कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में भारत का कृषि निर्यात बढ़ा है, शहद उत्पादन, पशुपालन, मत्स्यपालन सहित सहायक कृषि गतिविधियों में बढ़ोत्तरी हुई है।              प्रधानमंत्री ने बताया कि विकास के पैरामीटर में पिछड़ रहे जिलों के लिए  केंद्रित आकांक्षी जिला योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से सुधार का काम हुआ है। ठीक उसी तरह प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत खेती किसानी में पिछड़े देश के 100 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 36 नई योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा किसानों की भागीदारी से खेती की तस्वीर बदलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।            प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों और आने वाली पीढ़ी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से दलहन आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया गया है। यह मिशन न केवल कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम है, बल्कि देश में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी प्रयास है। शारीरिक और मानसिक विकास के लिए प्रोटीन अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए हमें मिलकर दलहन उत्पादन की सशक्त व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत अपनी दलहन आवश्यकताओं को पूर्ण रूप से पूरा नहीं कर पा रहा है। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से दाल उत्पादन में वृद्धि होगी और लगभग दो करोड़ दाल उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बड़ी ख़ुशी की बात है कि किसान हित में दो नई योजनाओं में छत्तीसगढ़ के तीन जिलों जशपुर, कोरबा और दंतेवाड़ा को भी शामिल किया गया है। इसके लिए मैं छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से विशेष रूप से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी  और केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने इन दो नई योजनाओं के लिए प्रदेश के किसानों को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन योजनाओं से खेती-किसानी की तस्वीर बदलेगी और आर्थिक सम्पन्नता भी आएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने योजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर कृषि विभाग द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया और कृषि अभियांत्रिकी सब मिशन योजना के तहत किसानों को टैªक्टरों, कृषि उपकरणों की चाबी भी सौपी और अनुदान राशि का चेक प्रदान किया।   मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान का बोलबाला है। जीएसटी में बड़ा रिफॉर्म हुआ है। जीएसटी रिफॉर्म के बाद एक दिन मैं एक ट्रैक्टर शो रूम में गया, यहां आकर मुझे पता चला कि एक ट्रैक्टर के पीछे 40,000 से 60,000 तक की राशि बचत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टॉल देखने के दौरान यहां मुझे एक किसान भाई मिले जिन्होंने हार्वेस्टर खरीदा, उन्हें एक लाख रुपए से भी अधिक की भी बचत का फ़ायदा मिला। यह देखकर बड़ी ख़ुशी होती है कि हमारे किसान भाइयों को इतना फायदा मिल रहा है। श्री साय ने बताया कि सरकार छत्तीसगढ़ में किसानों के विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। किसानों से किया हर वादा हमने पूरा कर दिया है। 3100 रुपए प्रति क्विंटल में धान की खरीदी, दो साल का बकाया बोनस भुगतान किया। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने किसानों को प्राथमिकता में लेते हुए राज्य में 1500 से अधिक सिंचाई योजनाओं को दुरुस्त करने के लिए एकमुश्त 2800 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कृषि योजनाओं के मजबूतीकरण के लिए कई अहम कार्य हुए। किसान क्रेडिट कार्ड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ज्यादातर सीमांत किसान हैं, उन्हें सरकार की कृषि हितैषी योजनाओं का बड़ा लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए सतत प्रयासरत है और यह योजना उसी दिशा में एक ठोस पहल है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चन्द्रहास चंद्राकर, मछुआ … Read more

हाईकोर्ट का फैसला: केवल नोटों की बरामदगी से रिश्वत का आरोप सिद्ध नहीं, तहसील क्लर्क बरी

बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में बिल्हा तहसील कार्यालय के तत्कालीन रीडर/क्लर्क बाबूराम पटेल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी ने रिश्वत की मांग की थी, या उसे अवैध लाभ के रूप में स्वीकार किया था. यह फैसला जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बैंच ने सुनाया. 5000 की रिश्वत मांगने का आरोप दरअसल, लोकायुक्त कार्यालय, बिलासपुर में 20 फरवरी 2002 को शिकायतकर्ता मथुरा प्रसाद यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी बाबूराम पटेल ने उसके पिता की जमीन का खाता अलग करने के नाम पर 5000 रिश्वत की मांग की थी, जो बाद में 2000 में तय हुई. शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप की कार्रवाई की. शिकायतकर्ता को 15 नोट 100 के दिए गए, जिन पर फिनाल्फ्थेलीन पाउडर लगाया गया था. आरोप था कि आरोपी ने 1500 रिश्वत ली, जिसे मौके पर पकड़ लिया गया. जांच के बाद उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(1)(डी) सहपठित 13(2) के तहत दोषी ठहराया गया था. प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, बिलासपुर ने 30 अक्टूबर 2004 को उसे एक-एक वर्ष की कठोर कारावास और 500-500 के जुर्माने की सजा सुनाई थी. आरोपी बाबूराम पटेल ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी. अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता विवेक शर्मा ने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ झूठा प्रकरण रचा गया है. शिकायतकर्ता की पत्नी पूर्व सरपंच थीं और उनके खिलाफ एक जांच में आरोपी ने भाग लिया था, जिससे निजी द्वेष के चलते झूठा फंसाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा दिया गया 1500 रिश्वत नहीं, बल्कि ग्रामवासियों से पट्टा शुल्क के रूप में वसूला गया बकाया राशि था, जिसे जमा कराने के लिए आरोपी ने कहा था. इसके अलावा, कुल 3180 की जब्ती राशि में से 1500 रिश्वत के रूप में चिन्हित करना भी संदिग्ध था. राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि अभियोजन के साक्ष्य पर्याप्त हैं और आरोपित ने अवैध रूप से 1500 रुपए लिए. केवल नोट मिलने से आरोपी सिद्ध नहीं होता : बिलासपुर हाईकोर्ट कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय बी. जयाराज वर्सेज स्टेट आफ आंध्र प्रदेश (2014) और सौंदर्या राजन वर्सेज स्टेट (2023) का हवाला देते हुए कहा कि केवल नोटों की बरामदगी से रिश्वत का अपराध सिद्ध नहीं होता, जब तक मांग और स्वीकार का ठोस प्रमाण न हो. न्यायालय ने पाया कि, शिकायतकर्ता ने खुद कहा कि उसे यह स्पष्ट नहीं था कि 1500 रिश्वत थी या पट्टा शुल्क की राशि. उसने स्वीकार किया कि शिकायत लोकायुक्त एसपी के निर्देश पर लिखी गई थी और वह पूरी तरह नहीं पढ़ी गई थी. रिकार्ड किए गए वार्तालाप में भी आरोपी की आवाज स्पष्ट नहीं थी. ट्रैप टीम के तीन सदस्यों ने पैसे की बरामदगी के स्थान को लेकर विरोधाभासी बयान दिए, किसी ने दायें पाकेट, किसी ने बायें, तो किसी ने पीछे की जेब बताई. इन तथ्यों से कोर्ट ने कहा कि मांग, स्वीकारोक्ति और बरामदगी तीनों संदिग्ध और असंगत हैं. इसलिए, संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कोर्ट ने कहा कि, अभियोजन अपना मामला संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका. ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन नहीं किया. अतः दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं है. इस आधार पर हाई कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2004 का निर्णय रद्द करते हुए बाबूराम पटेल को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर करबला तालाब निर्माण रोक, वेटलैंड अथॉरिटी ने कलेक्टर को निर्देशित किया

रायपुर छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने राजधानी के करबला तालाब में किए जाने वाले डेढ़ करोड़ के नए निर्माण कार्य और अन्य कार्यों पर तत्काल रोक लगाने रायपुर कलेक्टर को रायपुर नगर निगम आयुक्त को आदेशित किया है. यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता की शिकायत पर की गई है. दरअसल, करबला तालाब के साथ अन्य तालाब जैसे बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंध और अन्य तालाबों की जांच के लिए छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने रायपुर कलेक्टर को मई 2023 में आदेशित किया था. रायपुर कलेक्टर ने रायपुर वन मंडल अधिकारी की अध्यक्षता में रायपुर के बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंध और अन्य तालाबों को दरकिनार कर सिर्फ करबला तालाब के लिए जांच दल गठित किया था. रायपुर वन मंडल अधिकारी ने करबला तालाब की जांच रिपोर्ट जुलाई 2023 में कलेक्टर को सौप दी. लेकिन यह रिपोर्ट आज तक कलेक्टर ने वेटलैंड अथॉरिटी को नहीं सौंप है. इस पर रायपुर शहर के ईएनटी विशेषज्ञ एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ राकेश गुप्ता ने सूचना का अधिकार के तहत कलेक्टर कार्यालय से जानकारी मांगी. इस पर डॉ. राकेश गुप्ता ने सितम्बर 2025 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में पदस्थ अतिरिक्त मुख्य सचिव को जांच रिपोर्ट के साथ शिकायती पत्र भेजा. जांच रिपोर्ट में करबला तालाब पर निजी कंपनी द्वारा सामाजिक दायित्व के तहत 1,13,61,323.00 रुपए के कई कार्य वेटलैंड रुल के विरुद्ध कराए जाने प्रस्तावित पाए गए, इसलिए जांच दल ने इन कार्यों को न करने की सलाह दी थी. उसके बावजूद भी फरवरी-मार्च 2024 में प्रतिबंधित कार्य कराए गए, जिनमें हाईएस्ट फ्लड लेवल (अधिकतम बाढ़ स्तर) से 50 मीटर के अंदर पेवर लगाना इत्यादि. डॉक्टर गुप्ता ने शिकायत पत्र में बताया कि अब करबला तालाब पर डेढ़ करोड़ रुपए लागत की नई रिटेनिंग वॉल और अन्य कार्य करना प्रस्तावित किया गया है, जो कि वेटलैंड के नियमों के विरुद्ध है. इस पर वेटलैंड अथॉरिटी ने रायपुर कलेक्टर को आदेश जारी कर करबला तालाब की 2023 की जांच रिपोर्ट तलब करने के साथ करबला तालाब में प्रस्तावित निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने रायपुर नगर निगम आयुक्त को निर्देशित करने कहा गया है. क्या है प्रतिबंधित गतिविधियां वेटलैंड रूल्स 2017 के अनुसार 2007 से आज तक के औसत हाईएस्ट फ्लड लेवल से 50 मीटर के अन्दर कोई भी स्थाई प्रकृति का निर्माण नहीं कराया जा सकता है जैसे कि पानी के चारों और बनाई जाने वाली रिटेनिंग वाल, मेड पर पाथवे, पेवर, सड़क, भवन इत्यादि. डॉ. गुप्ता ने बताया कि चूंकि करबला तालाब, बूढा तालाब, महाराज बंध, तेलीबांधा जैसे अन्य तालाब जो कि क्षेत्रफल में 2.25 हेक्टेयर से बड़े हैं पर मान. सर्वोच्च न्यायलय के आदेश अनुसार पुराने नियम (2010 के) लागू होते है सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इस लिए औसत हाईएस्ट फ्लड लेवल साल 2000 से निकालने होंगे. क्या पाया गया 2023 की जांच में 2023 की जांच रिपोर्ट में लिखा है कि करबला जलाशय में सौंदरीकरण हेतु निर्माण कार्य किया जाना प्रस्तावित है. जिसके अंतर्गत पार्किंग व्यवस्था, सीसी रोड, रेलिंग मरम्मत, रिटेनिंग वाल मरम्मत, प्रसाधन भवन इत्यादि कार्य प्रस्तावित है. मौका स्थल जांच उपरांत पाया गया कि उक्त कार्य के क्रियांनवयन से जलाशय के जल धारण क्षमता, जल क्षेत्रफल प्रभावित क्षेत्र कम होने के साथ-साथ जलाशय पर आश्रित जीव जंतुओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है जिससे आद्र भूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 में उल्लेखित नियम का उल्लंघन होगा. साथ ही इससे जलाशय का जल क्षेत्रफल गैर आद्र भूमि उपयोग हेतु परिवर्तित हो जायेगा. वेटलैंड अथॉरिटी को आरटीआई का सहारा लेने दिया सुझाव डॉ. गुप्ता ने वेटलैंड अथॉरिटी को सलाह दी कि चूंकि कलेक्टर रायपुर करबला जलाशय की जुलाई 2023 की जांच रिपोर्ट उनके बार-बार रिमाइंडर देने के बावजूद वेटलैंड अथॉरिटी को प्रस्तुत नहीं कर रहे है, और अन्य व्यक्तियों को आरटीआई में दे चुके हैं इसलिए वेटलैंड अथॉरिटी को भी कलेक्टर कार्यालय में सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत कर करबला जलाशय की जांच रिपोर्ट प्राप्त कर लेनी चाहिए. दूसरा आवेदन वेटलैंड अथॉरिटी को कलेक्टर कार्यालय में यह जरूर लगाना चाहिए कि वेटलैंड अथॉरिटी के मई 2023 के आदेश के बावजूद और बार-बार रिमाइंडर देने के बाद भी कलेक्टर बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराज बंध और रायपुर के अन्य तालाबों की जांच क्यों नहीं कर रहे हैं?