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Agentic AI के भविष्य पर IIIT रायपुर में चर्चा, अनुप्रयोगों से चुनौतियों तक विशेषज्ञों ने रखी राय

रायपुर. ट्रिपल आईटी नया रायपुर में आयोजित IEEE एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोडश का आज 6 अक्टूबर को अंतिम दिन है. तीन दिवसीय आयोजन में विशेषज्ञ, शोधकर्ता, शिक्षाविद और विद्यार्थी एजेंटिक AI की संभावनाओं, अनुप्रयोगों और चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं. अंतिम दिन एआई सिस्टम, एथिकल और जिम्मेदार AI, मानव-एआई सहयोग और व्यावहारिक उपयोग पर विशेष फोकस रहेगा. कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी चर्चा और प्रदर्शन के साथ आइडियाथॉन भी आयोजित किया जा रहा है. आयोजन IEEE कंप्यूटर सोसाइटी स्पेशल प्रोजेक्ट, ट्रिपल आईटी और AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सहयोग से हो रहा है. विकसित होगा एआई इकोसिस्टम रायगढ़ के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की आधुनिक तकनीक से जोड़ने, इसके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देने और नवाचार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिले में एआई एक्सीलेंस सेंटर विकसित किया जाएगा। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक  ओ.पी. चौधरी ने आज संत पूज्य  प्रियदर्शी राम जी ऑडिटोरियम, पंजरी प्लांट में आयोजित एक दिवसीय एआई कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर यह घोषणा की। ‘रायगढ़ की एआई उड़ान-जागरूकता से नवाचार तक’ थीम पर आयोजित कार्यशाला में 1500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि आईआईआईटी नया रायपुर के सहयोग से रायगढ़ में एआई से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित एआई एक्सीलेंस सेंटर में एआई से संबंधित गतिविधियों का चरणबद्ध विस्तार किया जाएगा। जिले के चयनित प्रतिभाशाली युवाओं को आईआईआईटी नया रायपुर के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

गांवों की संस्कृति और प्रकृति को मिलेगी नई पहचान, छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ ‘चेन्दरू’ पुरस्कार

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान देगा ‘चेन्दरू’ पुरस्कार, उत्कृष्ट योगदान पर मिलेगा एक लाख रुपये का सम्मान गांवों की संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार और समृद्धि के नए द्वार-पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सतत ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे, स्थानीय संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को मिलेगा प्रोत्साहन राज्योत्सव में होगा विजेता का सम्मान, उपलब्धियों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी होगी जारी रायपुर  छत्तीसगढ़ के गांवों की समृद्ध संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रभावी कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए गए हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होंगे। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय रोजगार, आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास का प्रभावी माध्यम बनाना भी है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव हमारी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति की जीवंत विरासत हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचे। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आजीविका तथा स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित कर छत्तीसगढ़ देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ग्रामीण पर्यटन में यह क्षमता है कि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा, खान-पान और जीवनशैली को करीब से अनुभव करें। इससे पर्यटन से होने वाली आय सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुंच सकती है। ‘चेन्दरू’ नाम से छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय मंच पुरस्कार का नाम ‘चेन्दरू’ छत्तीसगढ़ की उस विशिष्ट पहचान को सामने लाता है, जिसने कभी बस्तर और यहां के सहज प्राकृतिक जीवन को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। अब इसी नाम से स्थापित राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार छत्तीसगढ़ के गांवों में पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जमीनी नायकों और संस्थाओं को सम्मान और पहचान प्रदान करेगा। एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र से होगा सम्मान पुरस्कार के अंतर्गत चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति को यह सम्मान जीवनकाल में केवल एक बार प्रदान किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक नवाचारी और प्रभावशाली प्रयासों को सामने लाकर राज्य में ग्रामीण पर्यटन की नई प्रेरक कहानियां तैयार करना है। छह सदस्यीय जूरी करेगी उत्कृष्ट कार्यों का मूल्यांकन पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों के मूल्यांकन हेतु छह सदस्यीय निर्णायक मंडल का प्रावधान किया गया है। जूरी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक करेंगे। इसमें पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्य, उसके प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन तथा संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा। समाचार पत्रों के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी प्रविष्टियां ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएंगी। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटोग्राफ, छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों और उपलब्धियों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। राज्योत्सव में मिलेगा सम्मान, देश के सामने आएंगी सफलता की कहानियां चयनित विजेता अथवा संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर विजेता के कार्यों, नवाचारों और उपलब्धियों को रेखांकित करती सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। इससे ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों को व्यापक पहचान मिलेगी और अन्य गांवों तथा समुदायों को भी पर्यटन आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। होमस्टे और सामुदायिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएं राज्य की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से जुड़ी हुई हैं। बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति से लेकर ग्रामीण अंचलों के पारंपरिक व्यंजन, लोककला, हस्तशिल्प, मेले, पर्व, प्राकृतिक स्थल और स्थानीय जीवनशैली पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करते हैं। ऐसे में होमस्टे और समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।  ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से पर्यटन गतिविधियों का विकेंद्रीकरण होगा और इसका आर्थिक लाभ गांवों तक पहुंचेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही पारंपरिक कला, शिल्प, खान-पान, लोकसंस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार का प्रयास ग्रामीण पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आर्थिक-सामाजिक सशक्तता, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करना है।

छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए बड़ा मौका, रायपुर में दो दिवसीय रोजगार मेला

युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने रायपुर में होगा दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे अध्यक्षता सेवा संकल्प अभियान के तहत राज्य स्तरीय रोजगार मेला 7-8 अक्टूबर को रायपुर में रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रोजगार विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को रायपुर में राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा में आयोजित इस दो दिवसीय रोजगार मेले के मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे।          राज्य स्तरीय रोजगार मेले का मुख्य कार्यक्रम 8 अक्टूबर को प्रातः 10 बजे प्रारम्भ होगा। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, मंत्री केदार कश्यप, गुरु खुशवंत साहेब, राम विचार नेताम, दयाल दास बघेल, लखन लाल देवांगन, श्याम बिहारी जायसवाल, ओ.पी. चौधरी, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, टंकराम वर्मा, राजेश अग्रवाल एवं गजेन्द्र यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।          कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, राजेश मूणत, अनुज शर्मा, सुनील सोनी, मोतीलाल साहू एवं इंद्र कुमार साहू तथा नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे और जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।            राज्य स्तरीय रोजगार मेले के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। रोजगार मेले में युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों एवं प्रतिष्ठानों में उपलब्ध रोजगार अवसरों की जानकारी मिलने के साथ ही उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप नियोजन का अवसर प्राप्त होगा। रोजगार विभाग द्वारा युवाओं से राज्य स्तरीय रोजगार मेले में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने की अपील की गई है।

बीजेपी सहयोग केंद्र में आज स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की सुनवाई, कार्यकर्ता रखेंगे अपनी समस्याएं

रायपुर. भारतीय जनता पार्टी का सहयोग केंद्र आज सोमवार से एक बार फिर सक्रिय हो रहा है। राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में मंत्री पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे और उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब आज सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे। इसके बाद 6 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, 8 अक्टूबर को पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा 9 अक्टूबर को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व अगस्त माह में भाजपा के सहयोग केंद्र का संचालन नौ दिनों तक किया गया था। अब इसे पुनः शुरू किया जा रहा है, ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा सके। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब आज सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे। इस दौरान वे भाजपा कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे और उनकी ओर से सामने रखी जाने वाली समस्याओं, मांगों एवं सुझावों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद 6 अक्टूबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहयोग केंद्र में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। 8 अक्टूबर को पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल तथा 9 अक्टूबर को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने के लिए सहयोग केंद्र में मौजूद रहेंगे। अलग-अलग विभागों से संबंधित मामलों को संबंधित मंत्रियों के समक्ष रखने की व्यवस्था से कार्यकर्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी माध्यम उपलब्ध होगा। भाजपा के सहयोग केंद्र की यह पहल पार्टी संगठन और सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक मामलों और विभागीय कार्यों से संबंधित विषयों को मंत्रियों के समक्ष रख सकेंगे। इसके बाद आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों के अधिकारियों से समन्वय कर मामलों के निराकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले अगस्त माह में भाजपा के सहयोग केंद्र का संचालन लगातार नौ दिनों तक किया गया था। उस दौरान भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी समस्याएं और मांगें मंत्रियों के सामने रखी थीं। अब एक बार फिर सहयोग केंद्र को शुरू किया जा रहा है। पार्टी का प्रयास है कि कार्यकर्ताओं की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुना जाए और संबंधित विभागों के सहयोग से उनके निराकरण की प्रक्रिया को तेज किया जाए। सहयोग केंद्र के दोबारा सक्रिय होने से कार्यकर्ताओं को सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक सीधा और व्यवस्थित मंच मिलेगा।

बलौदाबाजार में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने हाथों में उठाई झाड़ू

सेवा संकल्प अभियान स्वच्छता एक आदत है जो धीरे-धीरे संस्कार बनेगी – मंत्री टंक राम वर्मा  बलौदाबाजार में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने हाथों में उठाई झाड़ू षष्ठी मंदिर परिसर में चला विशेष स्वच्छता अभियान ​रायपुर        प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के ऐतिहासिक 25 वर्ष पूर्ण होने के सुअवसर पर जारी 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत जिले भर में विविध जनसेवा कार्यक्रमों की धूम है। इसी कड़ी में 'सेवा मेरा योगदान' कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की अगुवाई में बलौदाबाजार स्थित ऐतिहासिक षष्ठी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया।      ​अभियान के दौरान राजस्व मंत्री वर्मा, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों ने स्वयं हाथों में झाड़ू थामकर सड़कों पर बिखरे कचरे को साफ किया और उसे डस्टबिन में एकत्रित किया।             मंत्री वर्मा के इस प्रतीकात्मक पहल ने आमजनों को स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने का एक सशक्त संदेश दिया। ​स्वच्छता एक आदत है जो धीरे-धीरे संस्कार बनती है।           राजस्व मंत्री वर्मा ने ​उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 सफल वर्षों के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 'सेवा संकल्प अभियान' चलाया जा रहा है। स्वच्छता केवल एक दिवस का कार्य नहीं, बल्कि एक आदत है जो धीरे-धीरे हमारे व्यवहार का हिस्सा बनती है। हर्ष का विषय है कि आज इस अभियान के माध्यम से जन-जन में स्वच्छता के प्रति अभूतपूर्व जागरूकता देखने को मिल रही है।         ​स्वच्छता के इस महाअभियान में कलेक्टर , भारत स्काउट एवं गाइड के राज्य उपाध्यक्ष, नगर पालिका उपाध्यक्ष सहित विभिन्न वार्डों के पार्षदगण एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होकर अपना श्रमदान दिया।

स्कूलों में कोल्ड ड्रिंक की बोतल बताएगी कितनी शक्कर, छत्तीसगढ़ बाल आयोग की अहम अनुशंसा

छत्तीसगढ़ में स्कूलों में अब दिखेगा कोल्ड ड्रिंक में कितना शक्कर, बाल आयोग की अनुशंसा पालकों एवं बच्चों के व्यवहार परिवर्तन की सकारात्मक कार्यवाही किये जाने हेतु अनुशंसा – डाॅ. वर्णिका शर्मा  रायपुर,  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों में बढ़ते मोटापा एवं मधुमेह के खतरे को देखते हुए राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों तथा आवासीय संस्थाओं में शुगर एवं कैलोरी बोर्ड स्थापित करने की अनुशंसा की है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों में जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ एवं पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता है। प्रस्तावित बोर्ड में विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक एवं कैलोरी की मात्रा को सरल एवं दृश्य माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही लाल, पीला एवं हरा ट्रैफिक लाइट सिस्टम के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ एवं अस्वस्थ खाद्य पदार्थों की जानकारी दी जाएगी। राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों एवं आवासीय आश्रम शालाओं/छात्रावासों में बच्चों को कुपोषण, बाल-मोटापे एवं मधुमेह से बचाने हेतु शुगर एवं कैलोरी जागरूकता बोर्ड स्थापित करते हुए जंक फूड की बिक्री पर नियंत्रण, पौष्टिक एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने, ईट राइट क्लब एवं छात्र स्वास्थ्य एंबेसडर बनाने तथा प्रार्थना सभा में पोषण संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की अनुशंसा की गई है। आश्रम शालाओं, पोटा केबिन, प्रयास एवं एकलव्य विद्यालयों में भी भोजन सारणी के साथ शुगर एवं कैलोरी बोर्ड लगाने तथा स्थानीय पौष्टिक आहार को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा पालकों तथा शिक्षकों की बैठक में पोषण एवं संतुलित आहार पर चर्चा कर पालकों को बच्चों के स्वस्थ खान-पान के लिए प्रेरित करने तथा उत्कृष्ट प्रयास करने वाले पालकों को “च्ंतमदजे व िजीम डवदजी” जैसी प्रोत्साहन व्यवस्था प्रदान करने की अनुशंसा की गई है। आयोग द्वारा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्यवाही करते हुए आयोग को अवगत कराने का लेख किया गया है ।

चालू है न्यायधानी में अवैध रेत खनन का कारोबार! नदी में दिनदहाड़े चल रहे ट्रैक्टर, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

चालू है न्यायधानी में अवैध रेत खनन का कारोबार! नदी में दिनदहाड़े चल रहे ट्रैक्टर, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल  बिलासपुर  न्यायधानी बिलासपुर में रेत खनन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोनी क्षेत्र में नदी के किनारे बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन और परिवहन किए जाने का दृश्य सामने आया है। मौके की तस्वीर में नदी के बीच रेत के बड़े-बड़े हिस्से दिखाई दे रहे हैं और ट्रैक्टर भी रेत वाले क्षेत्र में मौजूद नजर आ रहे हैं।  यह पूरा मामला कोनी, बिलासपुर क्षेत्र का बताया गया है। सुबह करीब 6:53 बजे की तस्वीर में नदी क्षेत्र में मशीनरी और ट्रैक्टर की मौजूदगी दिखाई दे रही है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या यहां रेत का उत्खनन और परिवहन अधिकृत अनुमति के तहत हो रहा है या नियमों को दरकिनार कर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं?  नदी का सीना खोदकर निकाली जा रही रेत?  मौके के दृश्य में नदी के बड़े हिस्से में रेत का फैलाव और पानी की संकरी धार दिखाई दे रही है। आसपास कई स्थानों पर खुदाई जैसे निशान भी नजर आ रहे हैं। यदि यहां बिना वैध अनुमति या निर्धारित खनन सीमा के बाहर रेत निकाली जा रही है, तो यह जांच का विषय है।  प्रशासन की निगरानी पर सवाल रेत खनन को लेकर शासन द्वारा नियम और अनुमति व्यवस्था निर्धारित की गई है। इसके बावजूद यदि नदी क्षेत्र में सुबह-सुबह ट्रैक्टरों की आवाजाही और रेत उठाने का काम चल रहा है, तो संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि खनिज विभाग, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में मौके का निरीक्षण कर खनन की अनुमति, रॉयल्टी, खनन क्षेत्र और परिवहन दस्तावेजों की जांच करते हैं या नहीं।  सबसे बड़ा सवाल यही है— यदि खनन वैध है तो मौके पर इसकी अनुमति और रॉयल्टी संबंधी दस्तावेज क्या हैं, और यदि अनुमति नहीं है तो नदी क्षेत्र में यह गतिविधि किसकी निगरानी में चल रही है?

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जशपुर में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास अधोसंरचना का विस्तार

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार जशपुर जिले में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। जिले में 24 पोस्ट एवं प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास भवनों के निर्माण के लिए कुल 77 करोड़ 86 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन छात्रावासों के निर्माण से विशेषकर दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं सुविधायुक्त आवास के साथ पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा। स्वीकृत कार्यों में पोस्ट मैट्रिक एवं प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक और कन्या छात्रावास भवन शामिल हैं। जिले के विभिन्न विकासखंडों में इन छात्रावासों के निर्माण से विद्यार्थियों के लिए आवास, अध्ययन और दैनिक आवश्यकताओं से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बनेंगे नए छात्रावास भवन स्वीकृत कार्यों में पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास जशपुर के लिए 1 करोड़ 92 लाख रुपए, प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास लोदाम एवं पैकू के लिए 1 करोड़ 53 लाख रुपए प्रत्येक, पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास मनोरा एवं बगीचा के लिए 1 करोड़ 92 लाख रुपए प्रत्येक तथा प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास रौनी के लिए 1 करोड़ 53 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास पतराटोली एवं बालक छात्रावास दुलदुला के लिए 1 करोड़ 92 लाख रुपए प्रत्येक, प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास दुलदुला एवं कुनकुरी क्रमांक-02 के लिए 1 करोड़ 53 लाख रुपए प्रत्येक की स्वीकृति दी गई है। पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास पंडरीपानी एवं तपकरा के लिए 1 करोड़ 92 लाख रुपए प्रत्येक, प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास लवाकेरा, पंडरीपानी एवं दोकड़ा के लिए 1 करोड़ 53 लाख रुपए प्रत्येक तथा पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास दोकड़ा के लिए 1 करोड़ 92 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। कांसाबेल में पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास के लिए 2 करोड़ 89 लाख रुपए तथा प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1 करोड़ 53 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इसके साथ ही बटईकेला में प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1 करोड़ 53 लाख रुपए, कोतबा में पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1 करोड़ 92 लाख रुपए और प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1 करोड़ 53 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। बागबहार एवं गाला में प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास के लिए भी 1 करोड़ 53 लाख रुपए प्रत्येक की स्वीकृति प्रदान की गई है। दूरस्थ अंचलों के आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई होगी आसान नए छात्रावास भवनों के निर्माण से दूरस्थ गांवों से उच्च एवं माध्यमिक शिक्षा के लिए आने वाले आदिवासी विद्यार्थियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। उन्हें अपने शैक्षणिक संस्थानों के नजदीक सुरक्षित आवास मिलने के साथ अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में शिक्षा से जुड़ी अधोसंरचना को सुदृढ़ करने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है। छात्रावास भवनों के निर्माण से आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा तक पहुंच आसान होने के साथ उनके लिए गुणवत्तापूर्ण आवासीय एवं शैक्षणिक वातावरण का भी विस्तार होगा।

रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए नहीं लगाने पड़े चक्कर, गौतम सिंह को मिली बड़ी राहत

रायपुर जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए तहसील और पटवारी कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी अब तकनीक आधारित व्यवस्था से कम हो रही है। बलरामपुर निवासी  गौतम सिंह ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। पंजीयन विभाग की ऑटो म्यूटेशन सुविधा से रजिस्ट्री के बाद उनके नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी। इससे उन्हें अलग से तहसील और पटवारी कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ी।  सिंह के अनुसार इस व्यवस्था से उनका समय बचा और आने-जाने सहित अन्य खर्चों को मिलाकर करीब 10 हजार रुपये की बचत भी हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया को जोड़ने, आधार आधारित ई-केवाईसी से पहचान सत्यापन और व्हाट्सऐप के माध्यम से पंजीयन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से नागरिकों की अनावश्यक दौड़भाग कम करने का प्रयास किया जा रहा है। रजिस्ट्री हुई तो नामांतरण की प्रक्रिया भी स्वतः बढ़ी आगे  गौतम सिंह ने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील और पटवारी कार्यालय जाना पड़ता था। प्रक्रिया पूरी कराने के लिए बार-बार आने-जाने में समय लगता था और अतिरिक्त खर्च भी होता था। ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था ने उन्हें इस परेशानी से राहत दी है।  सिंह ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “पहले पंजीयन के बाद तहसील और पटवारी के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सीधे रजिस्ट्री कार्यालय से ऑटो म्यूटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ जाती है। इससे समय एवं धन दोनों की बचत हुई है।” उनके अनुसार कार्यालयों की दौड़भाग कम होने से उन्हें करीब 10 हजार रुपये की बचत का अनुभव हुआ। इस सुविधा ने रजिस्ट्री के बाद नामांतरण को लेकर उनकी चिंता भी कम की। आधार आधारित ई-केवाईसी से पहचान सत्यापन हुआ मजबूत पंजीयन व्यवस्था में तकनीक का उपयोग नामांतरण तक सीमित नहीं है। आधार आधारित ई-केवाईसी के माध्यम से पक्षकारों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है। इससे पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और गलत पहचान के आधार पर होने वाली गड़बड़ी की आशंका को कम करने में मदद मिल रही है।  गौतम सिंह ने भी तकनीक आधारित इन सुधारों को सुविधाजनक बताया। उनका कहना है कि पहचान सत्यापन की डिजिटल व्यवस्था से प्रक्रिया के प्रति भरोसा बढ़ा है और पंजीयन का काम अधिक सहज हुआ है। व्हाट्सऐप पर जानकारी से सामान्य कामों के लिए कार्यालय जाने की जरूरत हुई कम नागरिकों की सुविधा के लिए पंजीयन के विभिन्न चरणों, अपॉइंटमेंट और पंजीकृत दस्तावेजों से संबंधित जानकारी व्हाट्सऐप के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे सामान्य जानकारी और दस्तावेज के लिए बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता कम हो रही है। गौतम की कहानी—कम दौड़भाग, समय और खर्च की बचत  गौतम सिंह का अनुभव बताता है कि पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रियाओं के बीच तकनीकी समन्वय नागरिकों को व्यावहारिक राहत दे रहा है। उनके लिए ऑटो म्यूटेशन का अर्थ केवल एक डिजिटल सुविधा नहीं, बल्कि तहसील और पटवारी कार्यालय की दौड़भाग से राहत, समय की बचत और आने-जाने सहित अन्य खर्चों में कमी है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन सुधारों के जमीनी प्रभाव, अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है। गौतम सिंह की कहानी इसी बदलाव की तस्वीर है—जहां तकनीक से प्रक्रिया छोटी हो रही है और नागरिकों के लिए संपत्ति पंजीयन से लेकर नामांतरण तक का सफर अधिक सहज बन रहा है।  

जल की हर बूंद सहेजने की मुहिम, ग्रामीणों को मिल रहा स्थानीय रोजगार

रायपुर जशपुर जिले में वर्षा जल को सहेजने, भू-जल संवर्धन और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाया जा रहा है। वी बी जी राम जी योजना के अंतर्गत मनोरा जनपद की ग्राम पंचायत ओरडीह एवं आश्रित ग्राम आराकोना में जल संरक्षण की विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा के पानी को गांव में ही अधिक से अधिक रोकने, पानी के तेज बहाव को नियंत्रित करने, मिट्टी के कटाव को कम करने और भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से कृषि एवं आजीविका गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना के साथ स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। ओरडीह और आराकोना में 3800 कंटूर ट्रेंच का निर्माण जल संरक्षण की दिशा में आराकोना में 1700 और ओरडीह में 2100 सहित कुल 3800 कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही 5 आजीविका डबरी और 10 गैबियन संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है। ओरडीह में 10 एलबीसीडी का कार्य भी पूर्ण हो गया है। आराकोना के लोहड़ा नाला में 10 बोल्डर चेकडैम बनाए जाने हैं, जिनमें से 6 का निर्माण पूरा हो चुका है और शेष कार्य प्रगतिरत हैं। अलग-अलग प्रकृति की इन जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप वर्षा जल को रोकने और उसका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में सहेजने की पहल कंटूर ट्रेंच, गैबियन और बोल्डर चेकडैम जैसी संरचनाएं वर्षा जल के बहाव की गति को कम कर पानी को स्थानीय स्तर पर रोकने में सहायक होती हैं। इससे मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने के साथ भू-जल पुनर्भरण और आसपास के क्षेत्रों में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इसका लाभ आगे चलकर खेती और अन्य आजीविका गतिविधियों में भी मिल सकता है। वहीं आजीविका डबरी ग्रामीण परिवारों के लिए जल संरक्षण के साथ सिंचाई, मछलीपालन एवं अन्य आयमूलक गतिविधियों का आधार बन सकती है। इस तरह जल संरक्षण के लिए तैयार की जा रही संरचनाएं प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने के साथ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की संभावनाएं भी बढ़ा रही हैं। जल संरक्षण के साथ गांव में ही मिल रहा रोजगार जल संवर्धन के इन कार्यों की एक महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन भी है। जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण में ग्रामीणों की भागीदारी से उन्हें गांव में ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इससे एक ओर वर्षा जल को सहेजने के लिए स्थायी परिसंपत्तियां तैयार हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है। जिले में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप जल संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। ओरडीह और आराकोना में किए जा रहे ये प्रयास वर्षा जल की हर बूंद को सहेजकर गांवों को जल की दृष्टि से अधिक सक्षम बनाने तथा जल संरक्षण को रोजगार और आजीविका से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।