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जल जीवन मिशन से सुदूर गांव में बदलाव, डांडजमड़ी के सभी 90 घरों को मिला नल कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ संकल्प से बदली डांडजमड़ी की तस्वीर, सभी 90 घरों तक पहुंचा नल से शुद्ध पेयजल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल जीवन मिशन से सुदूर गांवों में आ रहा बदलाव रायपुर,    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर घर तक सुरक्षित और शुद्ध पेयजल पहुंचाने के संकल्प ने छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों में लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव लाना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के आकांक्षी विकासखंड गौरेला की ग्राम पंचायत डांडजमड़ी के सभी 90 घरों में अब नल से शुद्ध पेयजल पहुंचने लगा है। कभी पानी के लिए दूर स्थित कुएं तक जाना यहां के ग्रामीणों की दिनचर्या का हिस्सा था, लेकिन अब घर के आंगन में नल से पानी मिलने की सुविधा ने विशेषकर महिलाओं और परिवारों के जीवन को अधिक सहज बनाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण भारत के प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाते हुए दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। डांडजमड़ी की उपलब्धि इसी अभियान के जमीनी असर की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है। घर में नल आया तो दूर हुई वर्षों की परेशानी डांडजमड़ी की ग्रामवासी श्रीमती ललिता वाकरे के लिए घर में नल से पानी आना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की एक बड़ी परेशानी से मुक्ति है। उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि पहले पानी लेने के लिए उन्हें घर से दूर स्थित कुएं तक जाना पड़ता था। इसमें समय और मेहनत दोनों लगते थे। अब घर में ही नल से शुद्ध पेयजल मिलने लगा है। इससे परिवार की दिनचर्या आसान हुई है और पानी की चिंता भी कम हुई है। ललिता वाकरे का अनुभव उस बदलाव की कहानी है, जो जल जीवन मिशन देश के गांवों में ला रहा है। ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम से राहत मिलने के साथ ही स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक बन रही है। सभी 90 परिवारों के घर तक पहुंचा नल से जल जल जीवन मिशन के तहत डांडजमड़ी पंचायत के सभी 90 घरों तक नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति प्रारंभ हो गई है। इस व्यवस्था को स्थायी और स्थानीय सहभागिता पर आधारित बनाने के उद्देश्य से योजना के संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी गई है। इस पहल के माध्यम से गांव को केवल पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि ग्रामीण समुदाय को जल स्रोतों के संरक्षण और उपलब्ध पानी के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। पानी मिला है तो उसे बचाने की जिम्मेदारी भी हमारी ग्राम पंचायत के सरपंच इंजोर सिंह धुर्वे, पंचायत सचिव रतन सिंह, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों तथा ग्रामवासियों को जल की उपयोगिता, जल प्रबंधन, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई है। ग्रामीणों को यह समझाया गया है कि हर घर तक नल से पानी पहुंचने के साथ जल स्रोतों को सुरक्षित रखना और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करना भी सामुदायिक जिम्मेदारी है। जल जीवन मिशन की अवधारणा में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। स्थानीय स्तर पर संचालन एवं संधारण की व्यवस्था से ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित होने के साथ पेयजल व्यवस्था को दीर्घकाल तक सुचारु बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। विकसित भारत की बुनियाद मजबूत कर रहा ‘हर घर जल’ केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन केवल पाइपलाइन बिछाने या घरों में नल लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण परिवर्तन है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता गांवों में बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता की दिशा में आधारभूत भूमिका निभाती है। इसके साथ ही पानी जुटाने में लगने वाले समय की बचत ग्रामीण महिलाओं और परिवारों के दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में मिशन के क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच मजबूत हो रही है। आकांक्षी विकासखंड गौरेला का डांडजमड़ी गांव इसका उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां सभी 90 परिवार अब अपने घर में नल से शुद्ध पेयजल प्राप्त कर रहे हैं। डांडजमड़ी में नल से बहती पानी की हर धार केवल एक सरकारी योजना की उपलब्धि नहीं है। यह उस ग्रामीण परिवार के लिए राहत है, जिसे अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता; उस महिला के लिए समय की बचत है, जिसकी दिनचर्या कभी पानी जुटाने से शुरू होती थी; और उस गांव के लिए बदलाव का प्रतीक है, जो अब जल संरक्षण की जिम्मेदारी के साथ अपने भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

गांवों में पर्यटन बढ़ाने की पहल, विजेताओं को मिलेगा ₹1 लाख का ‘चेन्दरू पुरस्कार’

रायपुर. छत्तीसगढ़ के गांवों की समृद्ध संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रभावी कार्य करने वाले व्यक्तियों के साथ संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए गए हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी होंगे। नकद राशि और प्रशस्ति पत्र से किया जाएगा सम्मानित इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय रोजगार, आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास का प्रभावी माध्यम बनाना भी है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव हमारी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति की जीवंत विरासत हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचे। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आजीविका तथा स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन लोगों और संस्थाओं को पहचान देने का प्रयास है, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर और समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित कर छत्तीसगढ़ देश में ग्रामीण पर्यटन का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ग्रामीण पर्यटन में यह क्षमता है कि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा, खान-पान और जीवनशैली को करीब से अनुभव करें। इससे पर्यटन से होने वाली आय सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुंच सकती है। ‘चेन्दरू’ नाम से छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय मंच पुरस्कार का नाम ‘चेन्दरू’ छत्तीसगढ़ की उस विशिष्ट पहचान को सामने लाता है, जिसने कभी बस्तर और यहां के सहज प्राकृतिक जीवन को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। अब इसी नाम से स्थापित राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार छत्तीसगढ़ के गांवों में पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जमीनी नायकों और संस्थाओं को सम्मान और पहचान प्रदान करेगा। एक लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र से होगा सम्मान पुरस्कार के अंतर्गत चयनित व्यक्ति अथवा संस्था को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति को यह सम्मान जीवनकाल में केवल एक बार प्रदान किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक नवाचारी और प्रभावशाली प्रयासों को सामने लाकर राज्य में ग्रामीण पर्यटन की नई प्रेरक कहानियां तैयार करना है। छह सदस्यीय जूरी करेगी उत्कृष्ट कार्यों का मूल्यांकन पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों के मूल्यांकन हेतु छह सदस्यीय निर्णायक मंडल का प्रावधान किया गया है। जूरी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक करेंगे। इसमें पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्य, उसके प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन तथा संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा। समाचार पत्रों के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी प्रविष्टियां ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएंगी। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटोग्राफ, छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों और उपलब्धियों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। राज्योत्सव में मिलेगा सम्मान, देश के सामने आएंगी सफलता की कहानियां चयनित विजेता अथवा संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर विजेता के कार्यों, नवाचारों और उपलब्धियों को रेखांकित करती सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। इससे ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों को व्यापक पहचान मिलेगी और अन्य गांवों तथा समुदायों को भी पर्यटन आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। होमस्टे और सामुदायिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएं राज्य की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से जुड़ी हुई हैं। बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति से लेकर ग्रामीण अंचलों के पारंपरिक व्यंजन, लोककला, हस्तशिल्प, मेले, पर्व, प्राकृतिक स्थल और स्थानीय जीवनशैली पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करते हैं। ऐसे में होमस्टे और समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से पर्यटन गतिविधियों का विकेंद्रीकरण होगा और इसका आर्थिक लाभ गांवों तक पहुंचेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ पारंपरिक कला, शिल्प, खान-पान, लोकसंस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार का प्रयास ग्रामीण पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आर्थिक-सामाजिक सशक्तता, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करना है।

9 एमबीबीएस, 2 बीडीएस और एनआईटी रायपुर में 2 बीटेक दाखिले; पहली पीढ़ी के डॉक्टर और इंजीनियर बनने की ओर बढ़े छात्र

दंतेवाड़ा/बस्तर  एनएमडीसी-समर्थित छू लो आसमान : दंतेवाड़ा के वंचित परिवारों के छात्रों ने 9 एमबीबीएस, 2 बीडीएस सीटें हासिल कीं, पहली पीढ़ी के डॉक्टर और इंजीनियर के तौर पर प्रोफेशनल कॉलेजों में दाखिला लिया दंतेवाड़ा के छात्रों की एनईईटी (NEET) में सफलता के बाद हुई काउंसलिंग के पहले दौर ने एनएमडीसी के सहयोग से चल रही ‘छू लो आसमान’ पहल को नई पहचान दिलाई है, जिसमें अब तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करने वाले 22 छात्रों में से 11 छात्रों ने एमबीबीएस में नौ और बीडीएस में दो सीटें हासिल की हैं । सफल छात्रों ने दंतेवाड़ा में आवासीय कोचिंग कार्यक्रम में शुरू हुई यात्रा में अगला कदम रखते हुए मेडिकल कॉलेजों में अपनी पढ़ाई शुरू कर दी है । शेष छात्रों के लिए काउंसलिंग अभी भी जारी है । इस पहल से जुड़े दो अन्य छात्र, जिन्होंने जेईई (JEE) परीक्षा उत्तीर्ण की है, उन्होंने एनआईटी रायपुर में जैव प्रौद्योगिकी और खनन में बी.टेक कार्यक्रमों में दाखिला लिया है । वंचित परिवारों के छात्रों के लिए प्रोफेशनल शिक्षा की नई राह छात्रों और उनके परिवारों के लिए, दाखिला का अर्थ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता से कहीं अधिक है । एक सामान्य श्रेणी के छात्र को छोड़कर, सभी सफल उम्मीदवार अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से हैं । अधिकांश आर्थिक रूप से वंचित परिवारों से आते हैं, जिनके माता-पिता खेती या कृषि मजदूरी का कार्य करते हैं । कई लोगों के लिए, व्यावसायिक शिक्षा में प्रवेश पाना उनके परिवार में इस तरह की पहली उपलब्धि है । प्रवेश पाने वालों में 21 वर्षीय दीपा मरकाम भी शामिल हैं, जिन्होंने एनईईटी में 412 अंक प्राप्त करने के बाद छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (सीआईएमएस), बिलासपुर में एमबीबीएस कार्यक्रम में प्रवेश लिया है । दंतेवाड़ा के पोटाली की निवासी दीपा एक दूर-दराज के इलाके से आती हैं, जहां स्वास्थ्य-सेवा तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है । “हिंसा से बुरी तरह प्रभावित एक गाँव में पले-बढ़े होने के कारण, जहां लोगों को डॉक्टर तक पहुंचने के लिए घंटों यात्रा करनी पड़ती है, मैं जानती हूँ कि हमारे क्षेत्र को स्वास्थ्य-सेवा की कितनी सख्त जरूरत है । अब जब मैंने अपनी मेडिकल सीट हासिल कर ली है, तो मेरा मिशन अपने गृह-नगर लौटना है और अपने लोगों के लिए एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण करना है, जिन्होंने बहुत लंबे समय तक कष्ट सहा है,” मरकाम ने कहा । 2011 से जारी है ‘छू लो आसमान’ की शैक्षणिक यात्रा ‘छू लो आसमान’ के तहत नवीनतम दाखिले प्रोफेशनल शिक्षा परिणामों के लंबे रिकॉर्ड में वृद्धि करते हैं । 2011 में दंतेवाड़ा जिला प्रशासन और एनएमडीसी की एक संयुक्त पहल के रूप में शुरू किया गया यह कार्यक्रम राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग प्रदान करता है । दंतेवाड़ा जिले के कक्षा 8 उत्तीर्ण छात्रों के लिए एक प्रतियोगी प्रवेश-परीक्षा के माध्यम से छात्रों का चयन किया जाता है । चयनित लोगों को कक्षा 9 से कक्षा 12 तक रहने की सुविधा, यूनिफॉर्म, अध्ययन-सामग्री और अन्य आवश्यक सहायता के साथ-साथ निरंतर कोचिंग भी दी जाती है । इस कार्यक्रम के तहत कक्षा 9 से कक्षा 12 वीं तक प्रत्येक कक्षा में 80 बालक और 80 बालिकाओं को वार्षिक प्रवेश दिया जाता है । ‘छू लो आसमान’ के तहत अब तक 7,140 छात्र पढ़ाई समाप्त कर चुके हैं, जिसमें लगभग ₹3.7 करोड़ रुपये का वार्षिक परिचालन व्यय और अब तक ₹19.63 करोड़ रुपये का कुल व्यय हुआ है । इस पहल के माध्यम से सहायता प्राप्त छात्र बी.टेक/बी.ई., बी.फार्मा, बी.एससी.-नर्सिंग, पॉलीटेक्निक, कृषिविज्ञान, एमबीबीएस और पशु-चिकित्सा विज्ञान सहित प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में पढ़ाई कर रहे हैं और साथ ही एनआईटी (NIT) और आईआईटी (IIT) जैसे प्रमुख संस्थानों में भी दाखिला ले रहे हैं । मेडिकल और इंजीनियरिंग दाखिलों से उपलब्धियों के रिकॉर्ड में जुड़ा नया अध्याय नवीनतम काउंसलिंग परिणामों ने अब उस रिकॉर्ड में नौ एमबीबीएस और दो बीडीएस दाखिला जोड़े हैं, जबकि जेईई में चयनित दो छात्रों ने एनआईटी रायपुर में दाखिला लिया है । “एक सामान्य श्रेणी के छात्र को छोड़कर, हमारे सभी सफल उम्मीदवार एसटी समुदाय से हैं और पहली पीढ़ी के प्रोफेशनल के रूप में इतिहास रच रहे हैं । एनईईटी पास करने वाले 22 छात्रों में से 13 के लिए काउंसलिंग के नतीजे प्राप्त हुए हैं, जिनमें से नौ ने एमबीबीएस और दो ने बीडीएस सीटें हासिल की हैं । इसके साथ ही, दो छात्रों ने जेईई के माध्यम से एनआईटी रायपुर में प्रवेश प्राप्त किया है । शेष छात्रों के लिए काउंसलिंग अभी भी जारी है और हम आने वाले दिनों में और अधिक सकारात्मक परिणामों की उम्मीद कर रहे हैं ।” ‘छू  लो आसमान’ के प्रिंसिपल शैनी रवींद्र ने कहा । एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि ये उपलब्धियां वंचित समुदायों के छात्रों के लिए सतत शैक्षणिक अवसर पैदा करने के महत्व को दर्शाती हैं । उन्होंने कहा, “इन होनहार युवा प्रतिभाओं को गंभीर सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को पार कर वास्तव में प्रतिष्ठित मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश करते देखना हमारे लिए गर्व का क्षण है । वे केवल प्रोफेशनल डिग्री हासिल नहीं कर रहे हैं; वे परिवर्तन के शक्तिशाली उत्प्रेरक बन रहे हैं, जो अपने परिवारों का उत्थान कर सकते हैं और अपने गृह-नगर के सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य परिदृश्य में योगदान कर सकते हैं ।” नवीनतम काउंसलिंग परिणामों के साथ, दंतेवाड़ा के छात्र अब सीआईएमएस बिलासपुर, गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज रायपुर और एनआईटी रायपुर जैसी संस्थानों में मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । शेष एनईईटी-उत्तीर्ण छात्रों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है, जिसमें आगे चलकर और भी दाखिला मिलने की उम्मीद है ।

रायपुर के लोगों को बड़ी राहत, टाटीबंध-बिरगांव में खुलेंगे रजिस्ट्री ऑफिस; कलेक्ट्रेट की दौड़ होगी खत्म

रायपुर. राजधानी रायपुर में जमीन और प्रॉपर्टी की बढ़ती खरीदी-बिक्री को देखते हुए पंजीयन विभाग उपपंजीयक कार्यालयों का विस्तार करने जा रहा है. इसी कड़ी में टाटीबंध और बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में जल्द ही नए उपपंजीयक दफ्तर शुरू किए जाएंगे. इसके लिए विभाग तैयारी में जुटा हुआ है. संभावना है कि आगामी दो महीने के भीतर दोनों क्षेत्रों में उपपंजीयक कार्यालय शुरू हो जाएंगे. इसके बाद टाटीबंध, बिरगांव और आसपास के गांवों के लोगों को रजिस्ट्री के लिए कलेक्टोरेट स्थित मुख्य पंजीयन कार्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, मास्टर प्लान-2031 के तहत राजधानी रायपुर के निवेश क्षेत्र का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है. पहले निवेश क्षेत्र में 41 गांव शामिल थे, लेकिन नए मास्टर प्लान में 65 नए गांवों को भी इसमें शामिल किया गया है. इस तरह निवेश क्षेत्र में शामिल गांवों की संख्या बढ़कर 106 हो गई है. निवेश क्षेत्र का विस्तार होने के साथ इन गांवों में विकास गतिविधियां और जमीन की खरीदी-बिक्री भी बढ़ रही है. प्रॉपर्टी की बढ़ती रजिस्ट्री को देखते हुए पंजीयन विभाग ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक उपपंजीयक कार्यालयों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसका उद्देश्य लोगों को उनके क्षेत्र के नजदीक रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध कराना और मुख्य कार्यालयों में होने वाली भीड़ को कम करना है. रायपुर कलेक्टोरेट परिसर स्थित मुख्य पंजीयन कार्यालय में त्योहारों और वित्तीय वर्ष के अंत में मार्च क्लोजिंग के दौरान रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या काफी बढ़ जाती है. ऐसे समय में ऑनलाइन आवेदन और अपॉइंटमेंट लेने से लेकर रजिस्ट्री कराने तक लोगों को भीड़ और लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या को देखते हुए पंजीयन विभाग ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में उपपंजीयक कार्यालय शुरू किए हैं. सड्डू-मोवा तरफ विधानसभा रोड स्थित बेबीलॉन टॉवर और श्रीराम बिजनेस पार्क में उपपंजीयक दफ्तर पहले ही शुरू हो चुके हैं. इन कार्यालयों में रजिस्ट्री की सुविधा मिलने से आसपास के क्षेत्र के लोगों को कलेक्टोरेट तक लंबा सफर तय नहीं करना पड़ रहा है. इससे लोगों के समय और श्रम के साथ आने-जाने में होने वाले खर्च की भी बचत हो रही है. अब टाटीबंध और बिरगांव में नए उपपंजीयक कार्यालय शुरू होने से इन क्षेत्रों के साथ आसपास के निवेश ग्रामों में रहने वाले लोगों को भी रजिस्ट्री के लिए बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का रंगारंग समापन, रायपुर संभाग बना ओवरऑल चैंपियन

26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का रंगारंग समापन रायपुर संभाग बना ओवरऑल चौम्पियन, बलौदाबाजार में खुलेगा डाइट रायपुर,   छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार -भाटापारा जिले केे पंडित चक्रपाणी शुक्ल हाई स्कूल मैदान में 3 से 6 अक्टूबर तक आयोजित चार दिवसीय 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का मंगलवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हुआ। शैक्षणिक पांचों संभाग के खिलाड़ियों ने बैंड की धुन पर आकर्षक मार्च पास्ट किया। समारोह के मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने ध्वज अवरोहण कर प्रतियोगिता के समापन की विधिवत घोषणा की और विभिन्न विधाओं के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित किया। शानदार प्रदर्शन के दम पर रायपुर संभाग ने ओवरऑल चौम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया। इस दौरान मंत्री श्री यादव ने बलौदाबाजार में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) खोलने की बड़ी घोषणा की। खेलों से बढ़ती है सांस्कृतिक समझ- शिक्षा मंत्री        खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि खेल से शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ विभिन्न संस्कृतियों, खान-पान और रहन-सहन को भी सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई से 31 अक्टूबर तक चलने वाली इस स्पर्धा का उद्देश्य बच्चों को अलग-अलग जिलों की संस्कृति से रूबरू कराना है। हार-जीत पर सीख देते हुए उन्होंने कहा कि हार से निराश होने के बजाय कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय खेल में शामिल कराए गए श्कुराशश् खेल का आयोजन भी इसी स्पर्धा के तहत बलौदाबाजार में हुआ है। विभिन्न खेल स्पर्धाओं के प्रमुख परिणाम        रग्बी (14 वर्ष) बालक और बालिका दोनों वर्गों में रायपुर संभाग प्रथम, बस्तर द्वितीय तथा दुर्ग संभाग तृतीय स्थान पर रहा। नेटबॉल (19 वर्ष) बालक और बालिका दोनों वर्गों में रायपुर संभाग ने प्रथम, बिलासपुर ने द्वितीय और दुर्ग संभाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कुराश प्रतियोगिता       14 वर्ष बालक दुर्ग प्रथम, सरगुजा द्वितीय, रायपुर तृतीय। बालिका वर्ग में रायपुर प्रथम, बिलासपुर द्वितीय, दुर्ग संभाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार 17 वर्ष बालक रायपुर प्रथम, सरगुजा द्वितीय, दुर्ग तृतीय। बालिका वर्ग में दुर्ग प्रथम, बिलासपुर द्वितीय, रायपुर तृतीय। 19 वर्ष बालक रायपुर प्रथम, सरगुजा द्वितीय, दुर्ग तृतीय। बालिका वर्ग में बिलासपुर प्रथम, दुर्ग द्वितीय, रायपुर तृतीय स्थान पर रहे।      इस गरिमामयी अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल,  पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े, भारत स्काउट गाइड के राज्य उपाध्यक्ष विजय केशरवानी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पवन साहु, कलेक्टर बलौदाबाजार -भाटापारा, एसपी, आनंद यादव, राकेश ध्रुव सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित रहे।

CG में सड़क निर्माण को मिली रफ्तार, ₹101.24 करोड़ से चौड़ी और मजबूत होंगी सड़कें

बरसात के बाद अब धरातल पर दिखेंगे सड़कों के काम, लोक निर्माण विभाग ने 6 कार्यों की निविदा को दी मंजूरी कुल 101.24 करोड़ की लागत से सड़कें होंगी चौड़ी और मजबूत, गौरव पथ निर्माण और सौंदर्यीकरण भी होगा उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यादेश जारी कर तत्काल काम शुरू कराने के दिए निर्देश  रायपुर.   राज्य शासन ने बरसात के बाद सड़कों के निर्माण में तेजी लाने की तैयारी पूरी कर ली है। लोक निर्माण विभाग ने धमतरी जिले में 6 कार्यों के लिए कुल 101 करोड़ 23 लाख 55 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दी है। इनमें पांच सड़कों के मजबूतीकरण और चौड़ीकरण तथा आमदी नगर पंचायत में फोरलेन गौरव पथ एवं सौंदर्यीकरण का काम शामिल है। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने नए कार्यों की निविदा मंजूर करते हुए धमतरी संभाग के कार्यपालन अभियंता को चयनित ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को कार्यादेश जारी कर तत्काल कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए हैं।  कई महत्वपूर्ण मार्गों का होगा चौड़ीकरण और मजबूतीकरण लोक निर्माण विभाग ने धमतरी जिले में मेघा रोड तिराहा-स्टेशन रोड-चरमुड़िया राष्ट्रीय राजमार्ग-30 में 3.75 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 14 करोड़ 45 लाख 12 हजार रुपए, पचपेड़ी-तर्रागोंदी-भेलवाकूदा-टिपानी-सेमरा (बी) मार्ग में पांच किलोमीटर चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 13 करोड़ 32 लाख 82 हजार रुपए, नौ किलोमीटर छाती-गागरा-कंडेल-देवपुर मार्ग के लिए 23 करोड़ 12 लाख 46 हजार रुपए तथा 10 किलोमीटर अर्जुनी-भानपुरी-तरसींवा-कुर्रा-अमलीडीह-हसदा सड़क के लिए 19 करोड़ 42 लाख 22 हजार रुपए की निविदा मंजूर की है। विभाग ने राजनांदगांव-गुंडरदेही-धमतरी-नगरी सिहावा-बोराई राज्य मार्ग में 23 किलोमीटर लंबाई के मजबूतीकरण एवं डामरीकरण के लिए 11 करोड़ 70 लाख 83 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दी है। लोक निर्माण विभाग द्वारा इसी मार्ग में पड़ने वाले आमदी नगर पंचायत में 3.50 किलोमीटर फोरलेन गौरव पथ के निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए भी 19 करोड़ 26 लाख 10 हजार रुपए की निविदा स्वीकृत की है। विभाग द्वारा इन निविदाओं का अनुमोदन अनुबंध के पूर्व ठेकेदारों से संपूर्ण कार्यावधि के लिए प्रभावशील एपीएस (Additional Performance Security) की राशि की बैंक गारंटी प्राप्त करने की शर्त पर की गई है। मापदंडों के अनुसार कार्यों का संपादन और पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें, गुणवत्ता व समय-सीमा पर दें विशेष ध्यान – अरुण साव उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने धमतरी संभाग के कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित कार्यों का संपादन और पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुसार सुनिश्चित करते हुए कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ये कार्य किसी अन्य को सबलेट नहीं करने तथा कार्य संपादन के लिए पॉवर-ऑफ-अटॉर्नी को मान्य नहीं करने भी कहा है। साव ने अनुबंधित समयावधि में कार्यों को पूर्ण करने, कार्यों का संपादन अनुबंधानुसार प्रशासकीय स्वीकृति एवं आबंटन की सीमा में करने के भी निर्देश दिए हैं।

अजय चंद्राकर ने सुखदेव पर साधा निशाना, ‘बाढ़ में बस्तर नहीं आए, अब राजनीति करने पहुंच रहे’

रायपुर. कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के छत्तीसगढ़ दौरे और जगदलपुर में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सियासत तेज हो गई है। वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बाढ़ के दौरान सुखदेव भगत बस्तर नहीं आए और अब जब हालात सामान्य हो चुके हैं और व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं, तब राजनीति करने पहुंच रहे हैं। अजय चंद्राकर ने कहा कि बाढ़ के समय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल बस्तर पहुंचकर प्रभावितों से मुलाकात की थी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जितनी व्यवस्था की जानी थी, वह सरकार की ओर से की गई। अब जो कुछ हो रहा है, वह राजनीति है। झारखंड में क्यों नहीं बनी सरकार- अजय चंद्राकर सुखदेव भगत पर निशाना साधते हुए अजय चंद्राकर ने झारखंड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले सुखदेव भगत को यह तलाशना चाहिए कि झारखंड में सरकार क्यों नहीं बनी और इसके क्या कारण रहे। कोल घोटाले की चार्जशीट पर भी बोले अजय चंद्राकर ACB-EOW की ओर से कोल घोटाले में कांग्रेस नेताओं सहित 12 लोगों के खिलाफ चालान पेश किए जाने पर भी अजय चंद्राकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी ने अपनी जांच की है और अब यह न्यायालय का मामला है। जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे कांग्रेस के बड़े नाम हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों ने सारी सीमाएं लांघ दी थीं और उनकी जो भी गतिविधियां रही हैं, उनकी जानकारी जांच एजेंसी के पास है। चिंतामणि महाराज का नाम हटाने के आरोप पर पलटवार कांग्रेस नेता देवेंद्र यादव द्वारा जांच के दौरान चिंतामणि महाराज का नाम हटाने का आरोप लगाए जाने पर अजय चंद्राकर ने कहा कि जांच एजेंसी को पता है कि किसका नाम है और किसका नहीं। अगर देवेंद्र यादव को लगता है कि किसी का नाम हटाया गया है, तो उन्हें कोर्ट में इसकी जानकारी देनी चाहिए।

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी, अंबिकापुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस के फेरे बढ़े, अब हफ्ते में दो दिन संचालन

अंबिकापुर. सरगुजा के रेल यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। अब अंबिकापुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन चलेगी। अंबिकापुर से दिल्ली के लिए ट्रेन का दूसरा साप्ताहिक फेरा शुरू हो गया है। सांसद चिंतामणि महाराज ने आज हरी झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। इस अतिरिक्त फेरे से दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों के लिए आवागमन का विकल्प बढ़ेगा। विद्यार्थियों, व्यवसायियों और नौकरीपेशा लोगों को भी इसका फायदा मिलेगा। दूसरे साप्ताहिक फेरे को सरगुजा में रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। बेहतर रेल सुविधा देना प्राथमिकता- सांसद बता दें कि सांसद चिंतामणि महाराज ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर अंबिकापुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस का दूसरा साप्ताहिक फेरा शुरू करने की मांग उठाई थी, जिसे अब पूरा कर दिया गया है। सांसद ने कहा कि यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा और कनेक्टिविटी देना प्राथमिकता है।

जंक फ़ूड पर जागरूकता का पहरा अब स्कूलों में दिखेगी शक्कर की मात्रा

स्वस्थ बचपन की ओर बड़ा कदम, स्कूलों में शुगर कैलोरी बोर्ड लगाने बाल आयोग की अनुशंसा जंक फ़ूड पर जागरूकता का पहरा अब स्कूलों में दिखेगी शक्कर की मात्रा पालकों एवं बच्चों के व्यवहार परिवर्तन की सकारात्मक कार्यवाही किये जाने हेतु अनुशंसा – डाॅ. वर्णिका शर्मा  रायपुर,  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों में बढ़ते मोटापा एवं मधुमेह के खतरे को देखते हुए राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों तथा आवासीय संस्थाओं में शुगर एवं कैलोरी बोर्ड स्थापित करने की अनुशंसा की है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों में जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ एवं पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता है। प्रस्तावित बोर्ड में विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद शक्कर, नमक एवं कैलोरी की मात्रा को सरल एवं दृश्य माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही लाल, पीला एवं हरा ट्रैफिक लाइट सिस्टम के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ एवं अस्वस्थ खाद्य पदार्थों की जानकारी दी जाएगी। राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों एवं आवासीय आश्रम शालाओं/छात्रावासों में बच्चों को कुपोषण, बाल-मोटापे एवं मधुमेह से बचाने हेतु शुगर एवं कैलोरी जागरूकता बोर्ड स्थापित करते हुए जंक फूड की बिक्री पर नियंत्रण, पौष्टिक एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने, ईट राइट क्लब एवं छात्र स्वास्थ्य एंबेसडर बनाने तथा प्रार्थना सभा में पोषण संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की अनुशंसा की गई है। आश्रम शालाओं, पोटा केबिन, प्रयास एवं एकलव्य विद्यालयों में भी भोजन सारणी के साथ शुगर एवं कैलोरी बोर्ड लगाने तथा स्थानीय पौष्टिक आहार को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा पालकों तथा शिक्षकों की बैठक में पोषण एवं संतुलित आहार पर चर्चा कर पालकों को बच्चों के स्वस्थ खान-पान के लिए प्रेरित करने तथा उत्कृष्ट प्रयास करने वाले पालकों को “च्ंतमदजे व िजीम डवदजी” जैसी प्रोत्साहन व्यवस्था प्रदान करने की अनुशंसा की गई है। आयोग द्वारा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्यवाही करते हुए आयोग को अवगत कराने का लेख किया गया है ।