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छत्तीसगढ़ में राशन व्यवस्था को मिलेगा नया बल, CM साय बोले- गरीब कल्याण की दिशा में बड़ा कदम

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सार्थक-पीडीएस फेज-2 के लिए 25,530 करोड़ रुपए की मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे गरीब कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय बताया है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि, यह निर्णय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को तकनीक आधारित, अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार गरीबों तक योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पारदर्शिता के साथ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है. सार्थक-पीडीएस फेज-2 के माध्यम से एआई-इनेबल्ड लाभार्थी रजिस्ट्री, जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड टैगिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आधुनिक सप्लाई चेन प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं से राशन वितरण प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी. इससे पात्र हितग्राहियों तक सस्ते अनाज और खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा.

तेंदूपत्ता और महुआ संग्रह से लेकर भारतीय वन सेवा तक का प्रेरक सफर

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से  भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चयनित रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव निवासी अजय गुप्ता ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने अजय को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर वनांचल क्षेत्र के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण बताया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय गुप्ता ने केवल अपने माता-पिता का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायी है कि एक ऐसा युवा, जिसने बचपन में जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रह कर परिवार का हाथ बंटाया, आज उन्हीं जंगलों के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि अवसर और संकल्प मिल जाए तो दूरस्थ अंचलों के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपनी जगह बना सकते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति’ तथा ‘पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति’ जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अजय की सफलता वनांचल समाज के सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत है तथा यह हजारों युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देगी। उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले के संबलपुरी गांव में साधारण परिवेश में पले-बढ़े अजय गुप्ता का बचपन जंगलों, वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी के बीच बीता। छुट्टियों के दौरान वे अपने माता-पिता के साथ जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ एकत्रित करते थे। आर्थिक अभावों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया और 10वीं में 92.66 प्रतिशत तथा 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी मेधा का परिचय दिया। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर अजय को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर में प्रवेश मिला, जहां अध्ययन के दौरान उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति का लाभ मिला। अजय ने कठिन परिस्थितियों के बीच अध्ययन जारी रखते हुए भारतीय वन सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 91वीं रैंक प्राप्त की और अपने सपनों को साकार किया। अजय गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जीवन में उनके सपने सीमित थे और लगता था कि दुनिया गांव तक ही सीमित है, लेकिन उच्च शिक्षा और नए अनुभवों ने उनके सोचने का दायरा विस्तृत किया। उन्होंने कहा कि जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और बचपन से प्रकृति के साथ बने इसी जुड़ाव ने उन्हें वन सेवा में जाने की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि जंगल ने उन्हें केवल आजीविका ही नहीं, बल्कि जीवन की दिशा भी दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अजय की सफलता प्रदेश के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उन्होंने कहा कि सही अवसर, मार्गदर्शन, मेहनत और शासन के सहयोग से गांवों और वनांचल क्षेत्रों के युवा भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकते हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अजय गुप्ता जैसे युवा आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष, आत्मविश्वास और संकल्प की शक्ति का संदेश देंगे तथा छत्तीसगढ़ के युवाओं को नई दिशा और नई प्रेरणा प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री साय की घोषणा का हुआ पालन

रायपुर   छत्तीसगढ़ सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए जिला पंचायतों को भी गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी राजस्व राशि में हिस्सा देने का आदेश जारी कर दिया है। राष्ट्रीय पंचायत दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जिला पंचायतों को भी गौण खनिज निधि का हिस्सा दिए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने मंच से ही इस मांग को स्वीकार करते हुए घोषणा की थी, जिसका अब राज्य शासन द्वारा पालन कर दिया गया है। खनिज साधन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार गौण खनिजों से प्राप्त कुल राजस्व का 33 प्रतिशत हिस्सा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पूर्ववत दिया जाएगा, जबकि शेष 67 प्रतिशत राशि का वितरण ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायतों के बीच निर्धारित स्लैब के अनुसार किया जाएगा।  जारी आदेश के तहत 7.50 लाख रुपये तक की राशि पूरी तरह ग्राम पंचायत को मिलेगी। 7.50 लाख से 10 लाख रुपये तक की राशि में 80 प्रतिशत ग्राम पंचायत, 10 प्रतिशत जनपद पंचायत और 10 प्रतिशत जिला पंचायत को दिया जाएगा। 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की राशि में ग्राम पंचायत को 70 प्रतिशत तथा जनपद और जिला पंचायत को 15-15 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। इसी तरह 25 लाख से 50 लाख रुपये तक की राशि में ग्राम पंचायत को 60 प्रतिशत और जनपद व जिला पंचायत को 20-20 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। 50 लाख रुपये से अधिक की राशि में ग्राम पंचायत को 50 प्रतिशत तथा जनपद और जिला पंचायत को 25-25 प्रतिशत राशि मिलेगी।  राज्य शासन ने निधि के उपयोग के दायरे का भी विस्तार किया है। अब इस राशि का उपयोग स्कूलों और अस्पतालों में रनिंग वाटर सुविधा, सामुदायिक शौचालय, मुक्तिधाम निर्माण, पहुंच मार्ग तथा वाचनालय निर्माण जैसे कार्यों में किया जा सकेगा। जिला पंचायतों को मिलने वाली राशि का उपयोग उन क्षेत्रों के विकास कार्यों में किया जाएगा जहां खनन गतिविधियों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और गांवों में विकास कार्यों को गति देने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायतों को गौण खनिज निधि में हिस्सेदारी मिलने से स्थानीय विकास योजनाओं को मजबूती मिलेगी और त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। मुख्यमंत्री की घोषणा का पालन होने पर जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन कुमार अग्रवाल सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रसन्नता जताई है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से पंचायतों के कामकाज और संचालन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति मिलेगी।

टेक्नोलॉजी आधारित पारदर्शी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से गरीबों को मिलेगा अधिक लाभ – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा SARTHAK-PDS फेज-2 के लिए 25,530 करोड़ रुपये की मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे गरीब कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को तकनीक आधारित, अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार गरीबों तक योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पारदर्शिता के साथ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। SARTHAK-PDS फेज-2 के माध्यम से  एआई-इनेबल्ड लाभार्थी रजिस्ट्री, जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड टैगिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आधुनिक सप्लाई चेन प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं से राशन वितरण प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी। इससे पात्र हितग्राहियों तक सस्ते अनाज और खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय केवल तकनीकी उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को राशन परिवहन, हैंडलिंग तथा उचित मूल्य दुकानों के संचालन में बढ़ती लागत के लिए आर्थिक सहयोग देकर वितरण व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाएगा। राशन दुकानों के डीलरों के पारिश्रमिक में वृद्धि का प्रावधान जमीनी स्तर पर व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगा। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2031 तक संचालित होने वाली यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के करोड़ों हितग्राहियों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि AI, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे नवाचारों के उपयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को नई मजबूती मिलेगी तथा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को और बल मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल  राशन वितरण को आधुनिक बनाने का नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन में भरोसा, सुविधा और सुशासन को और मजबूत करने का निर्णय है। उन्होंने गरीब कल्याण को समर्पित इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

अवैध खनन पर शासन-प्रशासन सख्त : केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की कार्रवाई में 4 हाईवा जब्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े और स्पष्ट निर्देशों तथा राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग का मैदानी अमला लगातार सक्रियता के साथ कार्यवाही कर रहा है। शासन स्तर पर की जा रही गहन समीक्षा, सख्त निगरानी और प्रशासनिक चौकसी के परिणामस्वरूप अवैध खनिज गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगा है।         खनिज विभाग के सचिव एवं संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता तथा जिला स्तरीय टीमों द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण और संयुक्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 27 मई 2026 को केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने जिला रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद क्षेत्र अंतर्गत सघन निरीक्षण अभियान चलाया। निरीक्षण के दौरान रायपुर जिले के विधानसभा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिरदा एवं घिवरा में गौण निम्न श्रेणी चूनापत्थर से भरे 01 हाईवा तथा रेत के 03 हाईवा को वैध अभिवहन पास एवं अनुमति के बिना खनिज परिवहन करते पाए जाने पर अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए चारों हाईवा वाहनों को जब्त कर संबंधित वाहन चालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। जब्त वाहनों को आगामी आदेश तक रायपुर जिले के समीपस्थ विधानसभा एवं खरोरा थाना परिसर में अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है। जांच के दौरान केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार राज्य में अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। शासन-प्रशासन की सख्ती, बढ़ी चौकसी और सतत निगरानी के कारण अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाही सुनिश्चित की जा रही है।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन पुलों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज सेतु परिक्षेत्र के अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेशभर में निर्माणाधीन पुलों, रेलवे ओवरब्रिजेस और फ्लाईओवर्स के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विभागीय मुख्यालय निर्माण भवन में आयोजित बैठक में नागरिकों की सुविधा, बारहमासी संपर्क, तेज और सुव्यवस्थित यातायात के लिए पुलों, रेलवे ओवरब्रिजेस और फ्लाईओवर्स के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने इनके प्रस्ताव और कार्ययोजना तैयार करते समय यातायात के दबाव, दोनों ओर की सड़कों, तथा आसपास स्थित वर्तमान पुलों व फ्लाईओवर्स के साथ ही भविष्य की जरुरतों का भी ध्यान रखने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी और सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता भी एस.के. कोरी भी बैठक में मौजूद थे। सभी सेतु संभागों के अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता और अनुविभागीय अभियंता भी बैठक में उपस्थित थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में स्वीकृत कार्यों के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया मिशन मोड में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने मैदानी स्तर पर वन व्यपवर्तन, भू-अर्जन और इलेक्ट्रिक पोल शिफ्टिंग के लंबित मामलों से यथासमय शासन को अवगत कराने को कहा, जिससे इनके निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर से सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त होने के बाद तकनीकी स्वीकृति, भू-अर्जन और निविदा की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से तेजी से पूर्ण कर कार्यारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों के लिए अर्जित भूमि का तत्काल नामांतरण भी कराने को कहा। विभागीय सचिव ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत कार्यों की प्राथमिकता सूची तैयार कर 10 जून तक भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने 31 जुलाई तक इन सभी कार्यो के प्राक्कलन भी भेजने को कहा। उन्होंने अप्रारंभ कार्यों की निविदा प्रक्रिया आगामी एक-दो महीने में पूर्ण कर बरसात के तुरंत बाद कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों का परीक्षण कर हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के साथ ही 30 अप्रैल तक किए कार्यों का भुगतान तत्काल करने को कहा। श्री बंसल ने सेतु परिक्षेत्र के सभी कार्यपालन अभियंताओं और एसडीओ को अपने क्षेत्र में चल रहे सभी कार्यों और उनके कार्यस्थलों की पूरी जानकारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड का नियमित दौरा कर ठेकेदारों से सख्ती से काम कराने और उन्हें समय-सीमा में पूर्ण कराने को कहा। उन्होंने काम में ढिलाई, लापरवाही और लेट-लतीफी करने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध नियमानुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने मार्च-2026 तक पूर्ण हुए कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र और फाइनल बिल समीक्षा के लिए शासन को भेजने के भी निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 12.29 करोड़ रूपए के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन और लोकार्पण

रायपुर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने नारायणपुर प्रवास के दौरान जिलेवासियों को विकास की बड़ी सौगात दी। उन्होंने एजी सिनेमा हॉल में आयोजित कार्यक्रम में 12 करोड़ 29 लाख रूपए की लागत से स्वीकृत विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने नगर पालिका नारायणपुर के विकास के लिए 5 करोड़ रूपए देने की घोषणा भी की। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप भी उपस्थित रहे। नारायणपुर को विकसित, खुशहाल और समृद्ध बनाने का संकल्प           उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार नारायणपुर जिले को विकसित, खुशहाल और समृद्ध बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जिले के युवाओं ने शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। विशेष रूप से मलखंभ जैसे कठिन खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं की उन्होंने सराहना की। यह कार्यक्रम नारायणपुर जिले के विकास, शिक्षा, युवा सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। युवाओं की प्रतिभा को मिला सम्मान         उप मुख्यमंत्री साव ने नेशनल स्कूल ड्रामा, नई दिल्ली की प्रस्तुति “चंदा के चकोर” की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जिले की प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान दिला रही हैं। उन्होंने जिले में आयोजित पांच दिवसीय करियर गाइडेंस कार्यक्रम को युवाओं के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर मिलेंगे।  जिले के विकास के लिए 307 करोड़ रूपए की स्वीकृति           साव ने बताया कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद नारायणपुर जिले के विकास कार्यों के लिए 307 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिले में 32 करोड़ रूपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य शुरू किए गए हैं, जिन्हें जल्द पूरा किया जाएगा। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में नारायणपुर को नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मॉडल नगर के रूप में विकसित होगा नारायणपुर           वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि नारायणपुर को एक विकसित और आधुनिक नगर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि नगरीय निकाय क्षेत्र में 120 करोड़ रूपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 23 करोड़ रूपए की लागत से लाइब्रेरी भवन का भूमिपूजन किया गया है। मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षकों का सम्मान           कार्यक्रम में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी प्रकार उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को भी शॉल औरफल भेंटकर सम्मानित किया गया। किसानों और हितग्राहियों को मिला लाभ           विभिन्न विभागों की योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। कृषि विभाग द्वारा पांच किसानों को किसान समृद्धि योजना अंतर्गत बोर खनन एवं पंप स्थापना के लिए 1.99 लाख रूपए की सहायता राशि प्रदान की गई। उद्यानिकी विभाग द्वारा दो किसानों को बागवानी विकास हेतु 3.85 लाख रूपए के चेक प्रदान किए गए। मत्स्य पालन विभाग द्वारा तीन हितग्राहियों को मछली पकड़ने के जाल वितरित किए गए। विभागीय योजनाओं की जानकारी ली       उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन कर योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने शिक्षा विभाग के स्टॉल में स्वयं विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों, वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।

राईस मिलों के आधुनिकीकरण और गुणवत्ता सुधार पर जोर, छत्तीसगढ़ में लागू होगी ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’

रायपुर छत्तीसगढ़ में भारत सरकार की नवीन ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ को प्रभावी, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण तरीके से लागू करने की दिशा में आज न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों, भारतीय खाद्य निगम (FCI), मार्कफेड तथा प्रदेशभर के राईस मिलर्स ने भाग लिया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा कि भारत सरकार आगामी खरीफ विपणन वर्ष में ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ को प्राथमिकता के साथ लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के राईस मिलों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तकनीकी रूप से उन्नत (अपग्रेड) करना आवश्यक होगा, ताकि गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि मिलर्स द्वारा कार्यशाला में रखे गए सुझावों एवं व्यवहारिक समस्याओं का परीक्षण कर आवश्यक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जाएंगे। कार्यशाला में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 से लागू की जाने वाली ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ के विभिन्न प्रावधानों, गुणवत्ता मानकों, भंडारण व्यवस्था, अनुबंध प्रक्रिया, लागत एवं क्रियान्वयन संबंधी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतिकरण के माध्यम से 10 प्रतिशत अरवा ब्रोकन चावल एवं 5 प्रतिशत उसना ब्रोकन चावल के निर्धारित गुणवत्ता मानकों की विस्तृत जानकारी भी साझा की गई, ताकि योजना के अनुरूप मिलिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने व्यवहारिक चुनौतियों एवं उद्योग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा। मिलर्स ने प्रदेश में उन्नत धान किस्मों की खेती को बढ़ावा देने, भारतीय खाद्य निगम में रैक मूवमेंट को तेज करने तथा मिलिंग लागत में वृद्धि जैसे विषयों पर ध्यान आकृष्ट किया। साथ ही स्कीम के सफल क्रियान्वयन के लिए तकनीकी एवं आधारभूत सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राईस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कान्ति लाल बोथरा, महामंत्री विष्णु बिंदल, कोषाध्यक्ष रमेश अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी एवं प्रदेशभर से आए राईस मिलर्स उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने योजना लागू करने से पहले इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित करने के लिए खाद्य विभाग और खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले का आभार व्यक्त करते हुए ‘इम्प्रूव्ड राईस स्कीम’ के सफल क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर मार्कफेड के एमडी जितेन्द्र शुक्ला, भारतीय खाद्य निगम के जीएम दीपक शर्मा सहित खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं राईस मिलर्स एसोसिएशन के लगभग 60 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित थे।

अनुपयोगी सरकारी जमीनों के बेहतर उपयोग की तैयारी, अधिकारियों को मिले दिशा-निर्देश

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में शासकीय विभागों, निगम-मंडलों, कंपनियों और बोर्डों के स्वामित्व वाली अनुपयोगी व खाली जमीनों के व्यवस्थित विकास और सदुपयोग के लिए एक व्यापक रिडेवलपमेंट कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर आज मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों से चिन्हित की गई भूमियों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि वर्तमान में अनुपयोगी पड़ी सरकारी जमीनों से न तो शासन को कोई आय हो रही है और न ही जनता को इसका लाभ मिल रहा है। इस रिडेवलपमेंट योजना से जहां शहरों को एक नियोजित विकास मिलेगा, वहीं शासकीय परिसंपत्तियों का मूल्य भी कई गुना बढ़ जाएगा। डिजिटल लैंड बैंक और जीआईएस मैपिंग से होगी निगरानी बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्षों से खाली पड़ी या अतिक्रमण की आशंका वाली सरकारी जमीनों को चिन्हित कर उनका व्यावसायिक व जनहित में बेहतर उपयोग किया जाएगा। शासकीय विभागों के अंतर्गत आने वाली सभी खाली जमीनों का एक केंद्रीय डिजिटल लैंड बैंक तैयार किया जाएगा। मैपिंग के जरिए हर प्लॉट की सटीक लोकेशन, रकबा (क्षेत्रफल) और वर्तमान स्थिति का डेटा जीआईएस (GIS) मैपिंग ऑनलाइन दर्ज होगा। शहरों में प्राइम लोकेशन पर स्थित खाली जमीनों पर आवासीय योजनाएं, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, पार्किंग और नए सरकारी कार्यालय बनाए जाएंगे। बड़ी जमीनों के विकास के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को राजस्व भी मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों का विकास ग्रामीण इलाकों की जमीनों पर कृषि, उद्यानिकी, आधुनिक वेयरहाउस या कौशल विकास केंद्र (Skill Development Centers) प्रस्तावित किए जाएंगे। बड़ी जमीनों के सुनियोजित विकास के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे शासन को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी। जर्जर भवनों को ढहाकर होगा नवनिर्माण, सुरक्षा के कड़े इंतजाम योजना के तहत ऐसे शासकीय भवनों और परिसरों को चिन्हित किया जाएगा, जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और जिनकी मरम्मत करना वित्तीय दृष्टि से फायदेमंद नहीं है। ऐसी जगहों पर पुरानी संरचनाओं को हटाकर शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य सरकारी विभागों या उनके उपक्रमों के लिए नए और आधुनिक निर्माण किए जाएंगे। सुरक्षा के लिहाज से चिन्हित जमीनों पर तत्काल फेंसिंग (घेराबंदी) की जाएगी और शासकीय स्वामित्व का बोर्ड लगाया जाएगा। इन जमीनों पर अवैध कब्जे रोकने के लिए राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से निगरानी रखेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक में विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी संभागायुक्त व कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।

तेंदूपत्ता गोदाम में फिर लगी आग, जगदलपुर में दमकल की 2 गाड़ियों ने संभाला मोर्चा

जगदलपुर. जगदलपुर के सरगीपाल स्थित तेंदूपत्ता गोदाम के 5 नंबर फड़ में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। आग लगने का कारण फिलहाल अज्ञात बताया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंच गई है और आग पर काबू पाने का प्रयास जारी है। बताया जा रहा है कि गोदाम में रखा तेंदूपत्ता पिछले वर्ष का संग्रहित माल था, जो पहले ही बिक चुका था। हालांकि आग से हुए नुकसान का सही आंकलन अभी नहीं हो पाया है। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और नुकसान का मूल्यांकन करने में जुटी हुई है। गौरतलब है कि हाल ही में बीजापुर के तेंदूपत्ता गोदाम में भी भीषण आग लगी थी, जिसमें करीब 10 करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। इसके बाद अब जगदलपुर में हुई इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आग लगने की घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। फिलहाल दमकल कर्मियों और वन विभाग की टीम द्वारा आग बुझाने और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।