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अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव महाराष्ट्र के बीड में आयोजित अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक और सामान्य सभा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। देशभर से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय अधिवेशन में समाज के विकास और सामाजिक हित पर चर्चा की। साव ने वहां काकू स्मृति स्थल में स्वर्गीय केशरबाई क्षीरसागर ‘केशर काकू’ को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को नमन किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मुख्य आतिथ्य में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में समाज हित के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। संगठन की गतिविधियों और सामाजिक हित से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। साव ने कहा कि तैलिक समाज अपने परिश्रम और ईमानदारी की वजह से देश का प्रतिष्ठित और व्यापक समाज है। हमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, शिक्षा के क्षेत्र में समाज को प्रभावी रूप से जोर देना चाहिए। इस तरह के मंच संवाद और सहभागिता को मजबूत करते हैं। केशर काकू को  दी श्रद्धांजलि, योगदान को किया याद सोनाजीराव क्षीरसागर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज परिसर में साव ने स्वर्गीय केशरबाई क्षीरसागर 'केशर काकू' के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। साव ने "केशर काकू" को समाज के नींव के रूप में स्मरण किया। केशर काकू महाराष्ट्र विधानसभा में विधायक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। तैलिक समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के दायित्व के दौरान उन्होंने देशभर की इकाईयों को एक छत के नीचे एकजुट कर समाज के उत्थान में हर वर्ग को किस तरह अपनी भूमिका निभानी चाहिए, इस पर जोर दिया। समाज की महिलाओं को सभी क्षेत्रों में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर समाज के हित में कार्य करने प्रेरित किया। साव ने 'केशर काकू' की स्मृति में आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। साव ने कहा कि महासभा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केशर काकू ने संगठन को मजबूत बनाने में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इससे सभी पदाधिकारियों को सीखना चाहिए। वर्तमान में उनके सुपुत्र महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री जयदत्त क्षीरसागर समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका निभाते हुए समाज को एकजुट कर बेहतर कार्य कर रहे हैं‌। केशर काकू के कार्यों और संकल्पों को पूरा करने का कार्य जयदत्त क्षीरसागर कर रहे हैं। सामान्य सभा में एकजुटता के साथ आगे बढ़ने पर चर्चा अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की सामान्य सभा में साव ने वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ सहभागिता की। इस दौरान समाज के विकास और सामाजिक हित के विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। साथ ही सामाजिक एकजुटता और समाज के उत्थान के लिए मिलकर कार्य करने पर विचार मंथन किया गया।

आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर आएगा बस्तर, पीड़ितों को मिलेंगे कृत्रिम हाथ-पैर – उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि बस्तर अब आईईडी विस्फोटों की विरह वेदना से बाहर निकलने को तैयार है। वर्षों तक नक्सल हिंसा के दौर में बस्तर के अनेक इलाकों में सड़कों, नदी-तालाबों के किनारे और स्कूलों के आसपास लगाए गए आईईडी की चपेट में सुरक्षाबलों के जवानों के साथ आम नागरिक और पशु भी आए। कई नागरिकों ने इन विस्फोटों में अपने हाथ-पैर गंवाए और आज भी दिव्यांगता के साथ कठिन जीवन जी रहे हैं। जिनकी वेदना को कम करने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ शासन भी लगातार प्रयासरत है। ऐसे लोगों के जीवन की मुश्किलें कम करने के उद्देश्य से बस्तर संभाग में दो चरणों में विशाल निःशुल्क दिव्यांग सेवा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। पहला तीन दिवसीय शिविर 5, 6 और 7 अक्टूबर को बस्तर के जिला मुख्यालय जगदलपुर में आयोजित होगा। इसमें बस्तर, कांकेर, नारायणपुर और कोण्डागांव जिले के दिव्यांगजन भी शामिल होंगे। दूसरा शिविर 15, 16 और 17 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आयोजित किया जाएगा, जिसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के हितग्राहियों को लाभ मिलेगा। इन शिविरों में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के तकनीकी सहयोग से जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।  जगदलपुर शिविर के लिए 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित शिविर की तैयारियां बड़े स्तर पर की जा रही हैं। उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार जगदलपुर में आयोजित होने वाले शिविर के लिए चार जिलों में कुल 2,953 दिव्यांगजन चिन्हांकित किए गए हैं। इनमें बस्तर के 1,570, कोण्डागांव के 1,080, कांकेर के 236 और नारायणपुर के 67 दिव्यांगजन शामिल हैं। समाज कल्याण विभाग के सहयोग से दिव्यांगों की अन्य सहायक उपकरण जैसे श्रवण यंत्र, वैशाखी, स्मार्ट छड़ी, वॉकिंग स्टिक, छड़ी, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स एवं दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी उपकरणों का भी वितरण किया जाएगा।  आईईडी पीड़ितों को कृत्रिम हाथ-पैर देकर जीवन आसान करने का प्रयास उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि आईईडी किसी को पहचानता नहीं था। उसकी चपेट में कभी जवान आए, कभी आम नागरिक और कभी पशु। जिन नागरिकों ने विस्फोटों में अपने पैर या हाथ गंवाए, उनका जीवन बच तो गया, लेकिन उन्हें वर्षों से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अब प्रयास है कि ऐसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी जरूरत के अनुरूप कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया जाए।  आईईडी मुक्त बस्तर के साथ ही आईईडी के प्रभावितों के साथ भी सरकार शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद की समाप्ति के बाद ना सिर्फ बस्तर को आईईडी के भय से मुक्त कराने बल्कि आईईडी से प्रभावितों के साथ भी खड़ी है। शिविर में आईईडी विस्फोट से दिव्यांग हुए नागरिकों को विशेष रूप से चिन्हांकित कर उनकी आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम पैर (जयपुर फुट), कृत्रिम हाथ तथा अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही अन्य कारणों से दिव्यांग हुए लोग भी शिविर का लाभ ले सकेंगे। विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण और नाप लेकर आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग तैयार करने तथा पुराने अथवा क्षतिग्रस्त कृत्रिम अंगों की मरम्मत की व्यवस्था भी शिविर में रखे जाने की जानकारी सामने आई है।  ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक पंजीयन की व्यवस्था उप मुख्यमंत्री शर्मा ने बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों और विशेष रूप से आईईडी विस्फोट पीड़ितों से शिविर में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हितग्राही अपने जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। ग्राम सभाओं में भी ऐसे हितग्राहियों के नाम ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से पंजीयन कर जनपद और जिला पंचायत तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश पूर्व पंजीयन नहीं हो पाया हो तो जरूरतमंद व्यक्ति सीधे शिविर में भी पहुंचें। शिविर में आने वाले हितग्राहियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इन दोनों शिविरों के माध्यम से प्रयास है कि समूचे बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों तक सहायता पहुंचे और वर्षों से उनके जीवन से जुड़ी इस पीड़ा को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि बस्तर में आईईडी विस्फोट के इस दंश को समाप्त कर देना है।

छत्तीसगढ़ में मानसून की विदाई शुरू! अगले 48 घंटे में कुछ हिस्सों से लौटेगा मानसून

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज अब तेजी से बदलने की उम्मीद है. शेष हिस्सों में बचे मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. इस माह दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंडक का अहसास होगा. फिलाहाल पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना है. दो दिन बाद कुछ इलाकों में बूंदाबांदी के संकेत हैं. रायपुर में रविवार को कैसा रहेगा मौसम? राजधानी रायपुर में 4 अक्टूबर को आसमान मुख्यतः साफ रहने का अनुमान है. अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री के आसपास रह सकता है. फिलहाल मौसम विभाग ने किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की है. अक्टूबर में मौसम का बदलेगा मिजाज अक्टूबर का महीना प्रदेश के मौसम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहेगा. मानसून की विदाई के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा. इस दौरान दिन में गर्मी बनी रहेगी, जबकि रातें धीरे-धीरे सुहानी होने लगेंगी. नवंबर के पहले सप्ताह में रात के तापमान में और गिरावट आने की संभावना है. ऐसे में दीपावली के आसपास रात में हल्की ठंड और दिन में मौसम अपेक्षाकृत आरामदायक रहने के आसार हैं. पिछले 24 घंटे ऐसा रहा प्रदेश का हाल प्रदेश में पिछले 24 घंटों में कहीं बारिश दर्ज नहीं की गई. सबसे गर्म इलाका रायपुर से लगा माना रहा, यहां 34.5 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम न्यूनतम तापमान पेंड्रा रोड में 18.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. यह संकेत है कि अब रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरने से ठंड बढ़ेगी. मौसम में बदलाव की वजह  मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा तेजी से आगे बढ़ रही है. अगले 2-3 दिनों छत्तीसगढ़ के अलावा मराठवाड़ा, विदर्भ, तेलंगाना और कर्नाटक से मानसून की वापसी के लिए हालात अनुकूल होने की संभावना है. यूपी और बिहार के ऊपर साइक्लोनिक सर्क्युलेशन बना हुआ है. बलरामपुर में मेघों की मेहरबानी राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक प्रदेशभर में बारिश का वितरण काफी विविध देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर बलरामपुर जिले ने 165.3 प्रतिशत की औसत दर और 1556.6 मिलीमीटर बारिश के साथ वर्षा प्रतिशत के मामले में पूरे राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया है. वहीं कुल वर्षा के मामले में नारायणपुर जिला 1720.2 मिलीमीटर के साथ सबसे आगे है. दूसरी ओर, राज्य के मैदानी और कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं हो पाई है, जिनमें बेमेतरा जिला महज 674.9 मिलीमीटर बारिश और 80.4 प्रतिशत वर्षा दर्ज करके सूची में सबसे निचले पायदान पर है. भौगोलिक आधार पर राज्य के विभिन्न इलाकों का हाल देखा जाए तो उत्तर छत्तीसगढ़ और मैदानी इलाकों के कई जिलों में जमकर बादल बरसे हैं. राजधानी रायपुर में सामान्य से काफी अधिक 1307.4 मिलीमीटर बारिश (135.4%) दर्ज की गई है. इसी तरह गरियाबंद में 1463.7 मिमी (130.7%), सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1181.4 मिमी (131.4%), मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1216.9 मिमी (122.7%), और बालोद में 1311.8 मिमी (121.6%) वर्षा के साथ औसत का आंकड़ा काफी ऊपर रहा है.

मंत्री टंक राम वर्मा बोले – हार से सीखें और जीत का अहंकार न करें, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

रायपुर सारंगढ़ की पावन धरा पर रविवार को खेल, उत्साह और राज्य स्तरीय खेल भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला। मौका था 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता 2026 के भव्य शुभारंभ का। इस गरिमामय अवसर पर प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को खेल और शिक्षा के क्षेत्र में दो बड़ी सौगातें देते हुए जिले में सिंथेटिक ट्रैक ग्राउंड तथा डाइट (DIET) कॉलेज प्रारंभ करने की ऐतिहासिक घोषणा की। ​इसके साथ ही उन्होंने अवगत कराया कि जिले में नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय की स्थापना से जुड़े प्रस्ताव आगे की प्रक्रिया में हैं, और राज्य सरकार स्कूल अधोसंरचना के विकास व आवश्यक जीर्णोद्धार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिले के प्रभारी एवं राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने खिलाड़ियों में नया जोश भरते हुए कहा कि खेलोगे तो जीतोगे, खेलोगे तो हारोगे, लेकिन नहीं खेलोगे तो केवल दर्शक बनकर रह जाओगे। हार से सीख लेकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए और विजेता खिलाड़ियों को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। कठिन परिस्थितियों में भी प्रयास जारी रखने वाले ही जीवन में नई ऊंचाइयों को छूते हैं। ​4 दिवसीय महाकुंभ: 5 संभाग, 330 खिलाड़ी और 3 प्रमुख खेल ​खेलभांठा मैदान सारंगढ़ में 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित इस चार दिवसीय प्रतियोगिता में प्रदेश के पाँचों संभागों—बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा—से आए 330 बाल-खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर रहे हैं। ​आयोजन के पहले दिन फुटबॉल (बालक 14 वर्ष), सॉफ्टबॉल (बालक एवं बालिका 17 वर्ष) और क्रिकेट (बालिका 17 वर्ष) की प्रतिस्पर्धाओं के साथ रोमांचक मुकाबलों की शुरुआत हुई। ​खेल अनुशासन, आत्मविश्वास और एकता का आधार: मंत्री गजेन्द्र यादव ​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने प्रदेशभर से आए खिलाड़ियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि जीतने के लिए सबसे पहले मैदान में उतरना जरूरी है। खेल केवल शारीरिक विकास नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता को भी निखारता है। छत्तीसगढ़ की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता ही हमारी ताकत है, और खेल इस विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने का सबसे सशक्त माध्यम है। ​​कलेक्टर  ने स्वागत भाषण में खिलाड़ियों के रहने, भोजन व सुरक्षा की सुव्यवस्थित व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में जिले का बोर्ड परीक्षा परिणाम शानदार रहा है और तीन विद्यार्थियों ने राज्य की टॉप-10 मेरिट सूची में स्थान बनाया है। ​उन्होंने जिले में शिक्षा के आधुनिक रुझानों का जिक्र करते हुए कहा कि कक्षा 11वीं एवं 12वीं के छात्रों के लिए नीट (NEET) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष कोचिंग सुविधा शुरू की जा रही है।विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कक्षाएं, रोबोटिक्स लैब्स और अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना की जा रही है। ​उद्घाटन समारोह में सारंगढ़ विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े, बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राण लहरे, सांसद राधेश्याम राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत उपाध्यक्ष समेत अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे।

शिक्षा मंत्री की पहल पर विद्यार्थियों को बड़ी राहत, अब शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर

रायपुर विद्यार्थियों को शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से अब राहत मिलेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की पहल पर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की महत्वपूर्ण सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समयबद्ध किया गया है। इससे विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा में उपलब्ध हो सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत डुप्लीकेट माइग्रेशन प्रमाण-पत्र, डुप्लीकेट अंकसूची, उत्तरपुस्तिका की पुनर्गणना एवं पुनर्मूल्यांकन तथा उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को समय-सीमा से जोड़ा गया है। डुप्लीकेट माइग्रेशन प्रमाण-पत्र और डुप्लीकेट अंकसूची के लिए 60 दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसी तरह उत्तरपुस्तिका की पुनर्गणना, पुनर्मूल्यांकन और फोटोकॉपी से संबंधित सेवाएं भी निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद 60 दिवस की समय-सीमा में प्रदान की जाएंगी। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने ही शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त करने के लिए परेशान होना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं है। परीक्षा परिणाम के बाद विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण होता है। उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं सहित विभिन्न शैक्षणिक कार्यों के लिए समय पर दस्तावेज उपलब्ध होना आवश्यक है। इसलिए विद्यार्थियों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक विद्यार्थीकेंद्रित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी अपना समय पढ़ाई और भविष्य निर्माण में लगाएं, न कि जरूरी दस्तावेजों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने में। लोक सेवा गारंटी के दायरे में इन सेवाओं को शामिल किए जाने से व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को विद्यार्थियों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करने और निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी को दस्तावेज प्राप्त करने अथवा परीक्षा संबंधी प्रक्रिया के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इस व्यवस्था का विशेष लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जिन्हें उच्च शिक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षा अथवा अन्य शैक्षणिक कार्यों के लिए डुप्लीकेट अंकसूची, माइग्रेशन प्रमाण-पत्र या उत्तरपुस्तिका से संबंधित सेवाओं की आवश्यकता होती है। समय-सीमा तय होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों को उनके आवेदनों के निराकरण को लेकर स्पष्टता मिलेगी और अनावश्यक विलंब पर भी अंकुश लगेगा।

‘आंगन मिलन’ समारोह में पहुंचे मंत्री टंक राम वर्मा और गजेंद्र यादव गर्भवती माताओं की गोदभराई कर बांटे पोषण किट

​रायपुर ​सेवा संकल्प अभियान के तहत सारंगढ़ के झारियापारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित 'आंगन मिलन सेवा समारोह' मातृ-शिशु स्वास्थ्य, सुपोषण और सामाजिक सरोकार के अनूठे रंगों में रंगा नजर आया। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा और स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विशेष रूप से शिरकत कर आंगनबाड़ी के बच्चों और माताओं के बीच आत्मीय समय बिताया। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित गतिविधियों का जायजा लिया और समुदाय को स्वास्थ्य व सुपोषण के प्रति जागरूक किया। ​समारोह के दौरान जब परंपरागत रीति-रिवाज से गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म निभाई गई, तो माहौल मंगलमय हो उठा।मंत्री वर्मा और मंत्री यादव ने स्वयं गोदभराई की रस्म में शामिल होकर माताओं को शुभकामनाएं दीं और उन्हें पोषण किट भेंट किए। मंत्रियों ने उपस्थित महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान स्वयं के स्वास्थ्य का ध्यान रखना और शिशु के जन्म के बाद उसके समुचित पोषण की देखभाल करना पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। ​कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों की मौजूदगी ने हर किसी का दिल जीत लिया। दोनों मंत्रियों ने बच्चों के बीच बैठकर उनसे पढ़ाई, खेल-कूद और आंगनबाड़ी की दैनिक गतिविधियों के बारे में सहजता से बातचीत की। बच्चों ने भी उत्साह के साथ अतिथियों का स्वागत किया, जिससे पूरे आंगनबाड़ी केंद्र का वातावरण आनंदमयी और आत्मीयता से भर उठा। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्रियों और पारंपरिक व्यंजनों की एक आकर्षक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मंत्रियों ने अवलोकन कर विभिन्न खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य की जानकारी ली। ​'आंगन मिलन सेवा समारोह' का मुख्य उद्देश्य केवल शासकीय योजनाओं की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों और स्थानीय समुदाय के बीच जीवंत संबंध स्थापित करना रहा। इसके माध्यम से महिलाओं को संतुलित आहार, गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल और बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में पोषण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। ​इस अवसर पर रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत अध्यक्ष, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, परियोजना अधिकारी सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, हितग्राही महिलाएं और बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित रहे।

नारायणपुर में ‘सेवा संकल्प’ की अनूठी मिसाल: छोटेडोंगर और कोहकामेटा के सेवा सेतु शिविरों में 331 ग्रामीण हुए लाभान्वित

​रायपुर ​छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं आकांक्षी जिले नारायणपुर में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत प्रशासनिक मुस्तैदी का एक सशक्त और सराहनीय रूप देखने को मिला। कलेक्टर के संवेदनशील मार्गदर्शन में जिले के छोटेडोंगर और कोहकामेटा में ब्लॉक स्तरीय 'सेवा सेतु शिविरों' का आयोजन संपन्न हुआ। ग्रामीणों को अपने छोटे-बड़े शासकीय कार्यों के लिए दूर न जाना पड़े, इसी सोच के साथ आयोजित इन शिविरों ने एक ही छत के नीचे विभिन्न विभागों की सेवाओं का संगम स्थापित किया, जहाँ दिन भर में कुल 331 ग्रामीणों को सीधे लाभान्वित कर प्रमाण-पत्र और स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए।  ​छोटेडोंगर में आयोजित शिविर में प्रशासनिक मुस्तैदी का माहौल रहा, जहाँ कुल 199 हितग्राहियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया। यहाँ सबसे भावुक और खुशी का क्षण वह रहा जब प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 35 परिवारों को उनके सपनों के पक्के मकान की चाबियां सौंपी गईं। इसके साथ ही राजस्व विभाग ने 47 मामलों का निपटारा किया, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने राशन कार्ड से जुड़े 39 प्रकरणों को हल करते हुए 18 पात्र वृद्धों व असहायों को पेंशन स्वीकृति पत्र प्रदान किए। कृषि विभाग ने फसल बीमा से जुड़े 11 किसानों को प्रमाण-पत्र सौंपे, श्रम विभाग ने 5 श्रमिकों को उनके कार्ड दिए और उद्यानिकी विभाग ने भी हितग्राहियों को लाभान्वित किया। इस अवसर पर जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट सेवा देने वाली 40 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रशस्ति-पत्र देकर उनका सम्मान भी किया गया। ​दूसरी ओर, कोहकामेटा के विकासखंड स्तरीय शिविर में स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर रहा, जहाँ कुल 132 ग्रामीणों को त्वरित राहत मिली। यहाँ अकेले स्वास्थ्य विभाग ने शिविर में पहुंचे 87 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर उपचार व दवाइयां उपलब्ध कराईं। साथ ही आयुष्मान योजना, श्रम, समाज कल्याण और पंचायत विभाग के लाभ वितरित किए गए तथा आय, जाति एवं निवास जैसे आवश्यक शासकीय प्रमाण-पत्रों का मौके पर ही वितरण किया गया। ​दोनों ही शिविरों में विभागीय प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ हमारी समृद्ध सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिला। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अत्यंत गरिमामय वातावरण में 'गोद भराई' और 'अन्नप्राशन' के संस्कार संपन्न कराए गए। इस दौरान विभागीय कार्यकर्ताओं ने गर्भवती माताओं और शिशुवती महिलाओं को संतुलित आहार, स्वास्थ्य देखभाल और शिशु पोषण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। ​जन-जागरूकता को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कोहकामेटा में 'विकसित और आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना पर आधारित एक जीवंत नुक्कड़ नाटक का मंचन भी किया गया। कलाकारों ने अपने रोचक संवादों और अभिनय से ग्रामीणों को जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान और आवास योजनाओं के लाभ तथा जनभागीदारी के महत्व को समझाया। ​शिविर में पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने भी इस प्रशासनिक पहल की जमकर सराहना की। जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश का चौमुखी विकास हो रहा है, जहाँ जल जीवन और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि से उन्हें आर्थिक सम्बल और आत्मसम्मान मिल रहा है। इस दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं सदस्य, जनपद उपाध्यक्ष, स्थानीय सरपंच और जनपद सीईओ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

SING फोरम 2026 में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधिमंडल भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा नामांकन के उपरांत सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) द्वारा आयोजित प्रथम ‘सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026’ में सहभागिता के लिए सिंगापुर प्रवास पर है। सिंगापुर प्रवास के पहले दिन मुख्यमंत्री साय एवं छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने विश्व प्रसिद्ध ‘गार्डन्स बाय द बे’ के जनरल मैनेजर, मास्टर प्लानिंग जेसन येओ तथा डायरेक्टर लिम चियाप सॉन्ग सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ औपचारिक बैठक की। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल को गार्डन्स बाय द बे की मास्टर प्लानिंग, सतत डिजाइन और उद्यान प्रबंधन से जुड़ी उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों की जानकारी दी गई। दोनों पक्षों के बीच उद्यानिकी, वनस्पति संरक्षण, शहरी हरियाली, ईको-टूरिज्म और क्षमता विकास के क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ समृद्ध वनों और जैव विविधता से परिपूर्ण प्रदेश है। गार्डन्स बाय द बे की विशेषज्ञता और अनुभवों का लाभ नवा रायपुर में बॉटनिकल गार्डन के विकास के साथ ही प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर लैंडस्केपिंग और हरित क्षेत्रों के विस्तार में लिया जा सकता है। इससे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाओं को नया विस्तार मिलेगा, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और सैकड़ों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के लीडरशिप डिनर में शामिल हुए मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री साय शाम को SING फोरम की पूर्व संध्या पर सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा आयोजित लीडरशिप डिनर में शामिल हुए। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले, सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के चेयरमैन मार्क ली और सीईओ कोक पिंग सून उपस्थित थे। लीडरशिप डिनर में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के सदस्यों के साथ मास्टरकार्ड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, नेस्ले और द इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा छत्तीसगढ़ के 7 सदस्यीय और हरियाणा के 26 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी सहभागिता की। यह आयोजन भारतीय राज्यों और सिंगापुर के व्यावसायिक समुदाय के बीच निवेश, व्यापार और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को लेकर संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ को तेजी से उभरते निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदेश की प्रगतिशील औद्योगिक नीति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए किए गए सुधारों तथा एमएसएमई, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक अवसरों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर के उद्योग जगत को ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण की यात्रा में सहभागी बनने और प्रदेश में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 5 अक्टूबर को SING फोरम 2026 में सहभागिता करेंगे। इसके पश्चात 6 अक्टूबर को सिंगापुर की प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व के साथ आयोजित सीईओ राउंडटेबल में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं और आर्थिक साझेदारी के अवसरों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

छत्तीसगढ़ में आश्रम और छात्रावास बने शिक्षा की नई ताकत, सुविधाओं के बीच पढ़ रहे छात्र-छात्राएं

बलौदा बाजार. केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में आश्रम और छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं. इनका लाभ मिडिल स्कूल से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक के छात्र-छात्राओं को मिल रहा है. वर्तमान में जिले के 81 आश्रम और छात्रावासों में 3736 विद्यार्थी रहकर अध्ययन कर रहे हैं. आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त सूरज दास मानिकपुरी ने बताया कि जिले में 81 आश्रम-छात्रावास संचालित हैं, जहां 3,736 छात्र-छात्राएं रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. इन छात्रावासों में शासन की ओर से विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. यहां गार्डन, ओपन जिम, पौष्टिक एवं स्वादिष्ट भोजन, स्वास्थ्य जांच और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं हैं. विद्यार्थियों को शांतिपूर्ण और घर जैसा माहौल देने का प्रयास किया जाता है, ताकि वे बेहतर तरीके से अध्ययन कर सकें. उन्होंने बताया कि समय-समय पर उच्च पदों पर पदस्थ अधिकारियों द्वारा u में मोटिवेशनल कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, करियर और भविष्य को लेकर मार्गदर्शन दिया जाता है.   छात्रावास से आसान हुई उच्च शिक्षा की राह पिछड़ा वर्ग छात्रावास में अध्ययनरत छात्रा विधि जायसवाल ने बताया कि वह छात्रावास से करीब 45 किलोमीटर दूर ग्राम जारा की रहने वाली हैं. पहले रोजाना कॉलेज आने-जाने में काफी परेशानी होती थी. अब वह शासन द्वारा संचालित छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही हैं, जिससे उनके लिए उच्च शिक्षा हासिल करना आसान हुआ है. छात्रावास में खेलकूद की सामग्री, ओपन जिम और शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध है. इसके अलावा पौष्टिक भोजन और नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी मिलती है, जो पढ़ाई में काफी मददगार है. छात्रावास में घर जैसा माहौल आदिवासी छात्रावास के छात्र अनुज कुमार कंवर ने बताया कि छात्रावास में शासन की ओर से सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. घर से दूर रहने के बावजूद यहां घर जैसा माहौल मिलता है. उन्होंने कहा कि वे अपने साथियों के साथ स्वतंत्र और शांत वातावरण में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. पिछड़ा वर्ग छात्रावास की अधीक्षिका स्वीटी बाजपेई ने बताया कि यह छात्रावास वर्ष 2014 से संचालित है. यहां शासन की ओर से विद्यार्थियों के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. वर्तमान में छात्रावास में 50 छात्राएं रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं. पढ़ाई के लिए मिल रहा अनुकूल वातावरण आदिवासी छात्रावास की अधीक्षिका मंजुलता उईके ने बताया कि उनका छात्रावास वर्ष 2013 से संचालित है. यहां विद्यार्थियों को शासन की ओर से निर्धारित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. उन्होंने कहा कि बच्चे यहां अपने भविष्य को बेहतर बनाने का सपना लेकर आते हैं. शिक्षा एवं सुविधाओं का लाभ लेकर सफलता हासिल कर आगे बढ़ते हैं.

छत्तीसगढ़ में तेंदुए की दहशत, घर में घुसकर 6 लोगों को बनाया निशाना; 3 गंभीर

महासमुंद. महासमुंद जिले के बागबाहरा वनपरिक्षेत्र के ग्राम झिटकी में देर रात करीब डेढ़ बजे उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक तेंदुआ यादव परिवार के घर में घुस गया। तेंदुए ने परिवार के 6 सदस्यों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घायलों में 4 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं, इनमें से 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, परिवार के सदस्य रात में घर के अंदर सो रहे थे। इसी दौरान उत्तरी बाई करीब डेढ़ बजे बाथरूम जाने के लिए घर से बाहर निकलीं। इसी दौरान उनका सामना तेंदुए से हो गया। तेंदुए ने उत्तरी बाई पर हमला कर दिया। इसके बाद तेंदुआ घर के अंदर घुस गया और वहां मौजूद परिवार के अन्य सदस्यों पर भी हमला कर दिया। हमले में सरजू यादव (60 वर्ष), जनक यादव, मनीष यादव, तुषार यादव, उत्तरी बाई और सुनीता यादव घायल हुए हैं। घायलों में उत्तरी बाई के चेहरे और गले पर चोट आई है। सुनीता यादव के आंख और चेहरे पर चोट बताई जा रही है, जबकि मनीष यादव के हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई हैं। तेंदुए के हमले के बाद परिवार के सदस्यों ने हिम्मत दिखाई। जनक यादव और उत्तरी बाई समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने किसी तरह तेंदुए को एक कमरे में बंद कर दिया। बताया जा रहा है कि घर में उस समय करीब 10 सदस्य मौजूद थे। घायलों को 112 की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को महासमुंद मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां गंभीर रूप से घायल 3 लोगों की हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंच गया है। तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग ने रायपुर से विशेष रेस्क्यू टीम बुलाई है। फिलहाल, तेंदुआ घर के एक कमरे में बंद है, और वन विभाग की टीम उसके रेस्क्यू में जुटी हुई है।