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ग्लोबल इन्वेस्टर्स को CM साय का बड़ा आमंत्रण, SING FORUM में निवेश के लिए दिया सहयोग का भरोसा

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन SING FORUM के मंच पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद किया और उन्हें छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने राज्य की औद्योगिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधनों और निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया. साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब खनिज और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, नवाचार और वैश्विक निवेश के लिए भी तेजी से उभर रहा है. सरकार संसाधनों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सिंगापुर की तकनीकी दक्षता और शहरी विकास का अनुभव छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता के साथ मिलकर नई विकास संभावनाएं खोल सकता है. राज्य सरकार निवेशकों को अनुकूल नीतिगत वातावरण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. बैठक में टेक्नोलॉजी एंव प्रोफेशनल कैपेबिलिटी सेंटर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी, औद्योगिक अधोसंरचना और शहरी विकास के क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर चर्चा हुई. साय ने कहा कि छत्तीसगढ़-सिंगापुर साझेदारी से निवेश के साथ रोजगार, कौशल विकास और तकनीकी हस्तांतरण को भी बढ़ावा मिलेगा.

महतारी वंदन योजना से बदली ईश्वरी की जिंदगी, ₹1,000 की मदद से बढ़ाई सब्जी-बाड़ी और परिवार की आमदनी

महतारी वंदन योजना से ईश्वरी ने बढ़ाए आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से संवारी सब्जी-बाड़ी, बच्चों की पढ़ाई में भी मिल रहा सहारा कभी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लेना पड़ता था उधार, अब अपनी मेहनत से बढ़ा रही परिवार की आमदनी रायपुर  जीपीएम जिले के पेण्ड्रा विकासखण्ड के दूरस्थ वनांचल ग्राम बम्हनी की 40 वर्षीय ईश्वरी मरकार के लिए हर महीने बैंक खाते में आने वाले एक हजार रुपये महज आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का आधार बन गए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का सदुपयोग कर ईश्वरी ने अपने घर के पीछे की जमीन पर सब्जी-बाड़ी विकसित की है। इस बाड़ी से न केवल उनके परिवार को ताजी सब्जियां मिल रही हैं, बल्कि अतिरिक्त उपज की बिक्री से उन्हें आमदनी भी हो रही है। कभी ईश्वरी की जिंदगी में ऐसे दिन भी थे, जब घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दूसरों से पैसे उधार मांगने पड़ते थे। कई बार जरूरत बेहद जरूरी होती थी, लेकिन उधार भी नहीं मिल पाता था। ऐसी परिस्थितियां उन्हें हताश कर देती थीं। सीमित आय में घर की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये ने ईश्वरी को आर्थिक संबल दिया है। नियमित रूप से मिलने वाली इस राशि से उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। ईश्वरी बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों से पैसे उधार मांगने पड़ते थे। कई बार बहुत जरूरी काम होने पर भी पैसे नहीं मिल पाते थे। इससे काफी परेशानी होती थी। अब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी ने हम जैसी जरूरतमंद महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना शुरू की है। हर महीने एक हजार रुपये खाते में आने से बहुत सहारा मिला है। अब हर जरूरत के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। एक हजार रुपये की सहायता को बनाया आमदनी का जरिया ईश्वरी ने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को केवल घरेलू जरूरतों पर खर्च करने के बजाय इसका एक हिस्सा अपनी सब्जी-बाड़ी में लगाना शुरू किया। उन्होंने घर के पीछे उपलब्ध जमीन पर विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाई हैं। इन सब्जियों का उपयोग परिवार के भोजन में किया जाता है और अतिरिक्त उपज को बाजार में बिक्री कर वे अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रही हैं। इस पहल से एक ओर परिवार के लिए सब्जियों पर होने वाला खर्च कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर बाजार में सब्जियां बेचने से आय का एक छोटा लेकिन नियमित जरिया भी तैयार हुआ है। घर के पीछे की यह छोटी-सी बाड़ी अब ईश्वरी के लिए केवल सब्जियां उगाने की जगह नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते उनके कदमों की पहचान बन गई है। बच्चों की पढ़ाई में भी मिल रहा सहारा महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग ईश्वरी अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जरूरतों को पूरा करने में भी कर रही हैं। हर महीने एक निश्चित राशि मिलने से परिवार के बजट में राहत मिली है और बच्चों की छोटी-छोटी शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल रही है। ईश्वरी की कहानी बताती है कि शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता जब मेहनत और सही सोच से जुड़ती है, तो वह जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाले एक हजार रुपये को ईश्वरी ने केवल सहायता राशि न मानकर उसे अपनी मेहनत से जोड़ा और आय बढ़ाने का माध्यम बनाया। सबसे बड़ा बदलाव-आत्मसम्मान और आत्मविश्वास ईश्वरी के जीवन में आया सबसे महत्वपूर्ण बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का भी है। कभी जरूरत के समय दूसरों से उधार मांगने की मजबूरी उन्हें हताश करती थी, आज अपनी बाड़ी में मेहनत कर होने वाली आमदनी उन्हें आत्मनिर्भर बनने का हौसला दे रही है। दूरस्थ वनांचल ग्राम बम्हनी में ईश्वरी की सब्जी-बाड़ी की हरियाली आज उनके बदलते जीवन की तस्वीर बन गई है। शासन की सहायता और ईश्वरी की मेहनत ने मिलकर उनके परिवार के लिए उम्मीदों की नई राह खोली है। ईश्वरी मरकार ने महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इस योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक सहारा दिया है, बल्कि अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया है। महतारी वंदन से मिला आर्थिक संबल और ईश्वरी की मेहनत मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक ताकत बनकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं।

कुलपति के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर बवाल, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के स्टाफ ने जताई नाराजगी

खैरागढ़. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कथित तथ्यहीन एवं भ्रामक सामग्री को लेकर विश्वविद्यालय परिवार ने आपत्ति जताई है। शिक्षकों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था के संबंध में आरोप लगाए जाने से पहले उनके समर्थन में तथ्य, दस्तावेज और प्रमाण होना आवश्यक है। बिना साक्ष्य गंभीर आरोपों का प्रचार-प्रसार विश्वविद्यालय की गरिमा के अनुरूप नहीं है। विश्वविद्यालय परिवार के अनुसार, कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के कार्यकाल में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकों ने समय पर परीक्षा परिणाम जारी किए जाने को भी प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि पूर्व वर्षों में परीक्षा परिणाम अक्टूबर तक लंबित रहने की स्थिति सामने आती रही है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की व्यवस्था पर भी दी सफाई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की व्यवस्था को लेकर शिक्षकों ने कहा कि यह आवश्यकता आधारित व्यवस्था है और पूर्व में भी विश्वविद्यालय में इसी प्रकार की व्यवस्था संचालित होती रही है। डीन की नियुक्ति लोकभवन स्तर से होने की बात कहते हुए शिक्षकों ने कहा कि इसे सीधे कुलपति के स्तर से जोड़ना उचित नहीं है। नियुक्तियों और पदोन्नति को लेकर दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात सीएसए पदोन्नति अथवा अन्य नियुक्तियों में किसी प्रकार की विसंगति होने की स्थिति में संबंधित दस्तावेज और प्रमाण सक्षम स्तर पर प्रस्तुत किए जाने की बात विश्वविद्यालय परिवार ने कही। शिक्षकों ने कहा कि विधिसम्मत शिकायत या जांच का विश्वविद्यालय परिवार स्वागत करता है लेकिन अनुमान और अपुष्ट जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर प्रचार करना उचित नहीं है। निरीक्षण दल और शैक्षणिक योग्यता पर भी पक्ष रखा शिक्षकों के अनुसार निरीक्षण दल में बाहरी सदस्यों की नियुक्ति संबंधित अध्यादेश में किए गए प्रावधानों के अनुरूप है। इसी तरह डॉक्टरेट योग्यताधारी व्यक्ति के मेट्रन पद पर होने को उन्होंने उच्च शैक्षणिक योग्यता का विषय बताया। उनका कहना है कि इसे अयोग्यता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। रायगढ़ प्रस्तुति की राशि स्वैच्छिक दान होने का दावा विश्वविद्यालय परिवार के अनुसार रायगढ़ की प्रस्तुति के दौरान प्राप्त सम्मान राशि संबंधित कलाकार द्वारा स्वेच्छा से दान की गई थी वहीं वर्तमान दीक्षांत समारोह का आयोजन पूर्व के दीक्षांत समारोह और खैरागढ़ महोत्सव की तुलना में कम व्यय में किए जाने की बात भी शिक्षकों ने कही। सोशल मीडिया आईडी को बताया फर्जी ग्राफिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित संबंधित आईडी विश्वविद्यालय के किसी छात्र की नहीं है। इसे फर्जी बताया गया है। शिक्षकों ने कहा कि यदि फर्जी पहचान अथवा दस्तावेजों के माध्यम से विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित करने का प्रयास किया गया है तो इसकी तथ्यात्मक जांच की जानी चाहिए। विश्वविद्यालय परिवार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित भ्रामक सामग्री पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी शिकायत अथवा आरोप के लिए विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। शिक्षकों के अनुसार शिकायतों की जांच और तथ्य सामने लाने के लिए सक्षम संस्थागत माध्यम उपलब्ध हैं। विश्वविद्यालय की गरिमा और प्रतिष्ठा की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए बड़ा अवसर, रायपुर रोजगार मेले में 8 हजार+ पदों पर भर्ती; CM साय होंगे मुख्य अतिथि

राज्य स्तरीय रोजगार मेला 7-8 अक्टूबर को रायपुर के इंडोर स्टेडियम  8 हजार से अधिक पदों पर युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा आयोजन तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों की रिक्तियों के लिए युवा कर सकेंगे आवेदन रायपुर प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में और कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब की अध्यक्षता में आयोजित इस रोजगार मेले में तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों के 8 हजार से अधिक रिक्त पदों पर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।           सचिव कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग ड. बसवराजू  एस. ने बताया कि द्वारा रोजगार मेले में प्रदेश के वृहद उद्योगों एवं निजी प्रतिष्ठानों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रिक्त पदों के लिए युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इच्छुक युवा erojgar.cg.gov.in (ई-रोजगार पोर्टल) पर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के साथ रोजगार मेले के लिए अपना पंजीयन भी करा सकते हैं। राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित आवेदकों को कार्यक्रम के दौरान ऑफर लेटर प्रदान किए जाने की भी तैयारी की गई है। इसके साथ ही रोजगार मेले में आने वाले युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों की जानकारी प्राप्त करने और अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार के लिए आवेदन करने का अवसर मिलेगा। रोजगार मेले में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों सहित विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। संबंधित विभागों एवं जिलों को भी युवाओं तक रोजगार मेले की जानकारी पहुंचाने और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।           राज्य शासन द्वारा आयोजित यह रोजगार मेला प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित संस्थानों एवं उद्योगों से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। शासन ने आयोजन को सफल बनाने तथा अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

कुरुद में महानदी का सीना छलनी, धड़ल्ले से हो रहा अवैध रेत उत्खनन; जिम्मेदार बेखबर

आरंग/रायपुर. शासन-प्रशासन की लाचार कार्यप्रणाली और रेत माफिया के बुलंद हौसलों की जीती-जागती बानगी देखनी हो, तो आरंग के कुरूद स्थित महानदी तट पर चले आइए। शनिवार देर रात खनिज विभाग की कथित छापामार कार्रवाई के महज़ कुछ ही घंटों बाद रेत माफिया का ‘सिंडिकेट’ एक बार फिर पूरी ताकत के साथ महानदी का सीना चीरने उतर आया है। हैरानी की बात यह है कि पहले जो अवैध उत्खनन रात के अंधेरे में छिपाकर किया जाता था, वही खेल अब सोमवार सुबह से दिन के उजाले में बेखौफ होकर खेला जा रहा है। तस्वीरों में यह साफ देखा जा सकता है कि महानदी के शुष्क तट पर दर्जनों ट्रैक्टर और भारी गाड़ियाँ कतारबद्ध खड़ी हैं, जहाँ दिनदहाड़े नदी से रेत का अवैध उत्खनन जारी है। शनिवार रात की ‘कार्रवाई’ पर उठे गंभीर सवाल शनिवार को मामला मीडिया में उजागर होने के बाद खनिज विभाग की टीम कुरूद खदान पहुँची तो ज़रूर, लेकिन पूरी कार्रवाई महज़ एक ‘औपचारिकता’ बनकर रह गई। विभागीय अधिकारियों के पहुँचने से पहले ही सूचना लीक हो चुकी थी, जिसके चलते खनन में लगे चालक वाहनों सहित अंधेरे का फायदा उठाकर आसानी से भाग निकले। सवाल यह उठता है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ मीडिया के दबाव को कम करने का एक पैंतरा थी..? क्योंकि जैसे ही टीम की गाड़ियाँ वापस लौटीं, अगले ही दिन रविवार शाम ढलते ही खनन की रफ्तार वही पुरानी हो गई और सोमवार सुबह होते-होते यह अवैध कारोबार दिनदहाड़े खुलेआम शुरू हो गया। जनसुनवाई का विरोध दरकिनार गौरतलब है कि कुरूद रेत खदान की लीज और संचालन को लेकर आयोजित आधिकारिक जनसुनवाई में स्थानीय ग्रामीणों ने पर्यावरण की तबाही और संभावित दुर्घटनाओं का हवाला देकर सख्त आपत्ति जताई थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट प्रतिबंधों और जनविरोध को दरकिनार करते हुए माफिया और स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों के गठजोड़ ने नदी को लूटने का यह संगठित रास्ता अपना लिया है। सरकारी खजाने पर डाका और बड़े हादसे की आशंका NGT के नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस अवैध कारोबार से राज्य सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। वहीं संकरे और ग्रामीण रास्तों पर पूरी रफ्तार से दौड़ती भारी गाड़ियों की वजह से क्षेत्र में किसी बड़े सड़क हादसे का खतरा लगातार मंडरा रहा है। शनिवार रात की अधूरी कार्रवाई और सोमवार सुबह दिनदहाड़े शुरू हुए इस उत्खनन ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग का खौफ माफिया के मन से पूरी तरह खत्म हो चुका है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस खुलेआम हो रही लूट पर कोई स्थायी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई करता है या फिर महानदी का यह सौदा इसी तरह जारी रहेगा?

लेमन ग्रास की खेती से महक रही आत्मनिर्भरता, GPM की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर

लेमन ग्रास की खुशबू से महक रही आत्मनिर्भरता, जीपीएम की महिलाएं बढ़ रहीं ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प को साकार कर रही बिहान की दीदियां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मिल रहा नया आधार, अमारू में 20 एकड़ में लेमन ग्रास की खेती रायपुर   प्राकृतिक सौंदर्य और वनौषधीय संपदा के लिए अपनी अलग पहचान रखने वाले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की वादियों में इन दिनों एक नई खुशबू फैल रही है। यह खुशबू केवल लेमन ग्रास की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, समृद्धि और महिला सशक्तिकरण की है। कभी परिवार की सीमित आय में घर-गृहस्थी संभालने वाली ग्रामीण महिलाएं आज संगठित होकर खेती और स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक ताकत बन रही हैं। ग्राम अमारू में बिहान योजना से जुड़ी महिला स्वसहायता समूहों की दीदियों ने लेमन ग्रास की खेती के जरिए ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में एक नई शुरुआत की है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में आगे बढ़ाने की परिकल्पना को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़ने के साथ उन्हें आर्थिक सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जीपीएम जिले में लेमन ग्रास जैसी औषधीय और व्यावसायिक फसलों को ग्रामीण महिलाओं की आय का नया माध्यम बनाने की पहल की गई है। जनपद पंचायत पेंड्रा के ग्राम अमारू में गठित 10 महिला स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने लगभग 20 एकड़ भूमि पर सामूहिक रूप से लेमन ग्रास की खेती शुरू की है। इनमें ज्योति महिला समूह, महामाया समूह, जय संतोषी माता समूह और हनी समूह सहित अन्य स्वसहायता समूह शामिल हैं। महिलाओं का यह सामूहिक प्रयास केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से स्थायी ग्रामीण आजीविका का एक नया मॉडल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खेतों से निकलेगा सुगंधित तेल, बाजार से जुड़ेगी महिलाओं की मेहनत लेमन ग्रास एक सुगंधित एवं औषधीय पौधा है, जिससे प्राप्त तेल का उपयोग विभिन्न उत्पादों में किया जाता है। ग्राम अमारू की महिलाएं इसकी खेती के बाद तेल निकालकर खुले बाजार और औषधीय संस्थानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं। इससे खेती को सीधे बाजार से जोड़कर महिलाओं की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। ज्योति महिला समूह की सदस्य श्रीमती गायत्री काशीपुरी ने बताया कि उनके समूह की 11 सदस्य पादप औषधि बोर्ड के सहयोग से लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लेमन ग्रास से तेल निकालकर बाजार एवं औषधीय संस्थानों में बेचा जाएगा। इसका उपयोग चाय, इत्र तथा विभिन्न औषधीय उत्पादों में किया जाता है। श्रीमती गायत्री ने उत्साह के साथ कहा कि समूह की महिलाएं इस खेती को आने वाले समय में और विस्तार देना चाहती हैं। सरकारी मदद ने बढ़ाया हौसला, आजीविका के खुले कई रास्ते महामाया समूह की  सुशीला भानू, जय संतोषी माता समूह की पाबरिया भानू और हनी समूह की श्रीमती पूजा ध्रुव ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं के लिए आजीविका के कई नए रास्ते खुले हैं। समूहों को 15 हजार रुपये की चक्रीय राशि, 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि तथा बैंक लिंकेज का लाभ मिला है। इस आर्थिक सहयोग और समूह की सामूहिक शक्ति के बल पर महिलाएं आज केवल लेमन ग्रास की खेती ही नहीं कर रही हैं, बल्कि सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, टेंट हाउस, सब्जी बाड़ी, किराना दुकान, बकरी पालन और मुर्गी पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से भी जुड़ रही हैं। इससे महिलाओं की स्वयं की आय बढ़ने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और उनमें निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। ‘लखपति दीदी’ के संकल्प की ओर मजबूत कदम प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने स्वसहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय बढ़ाकर उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ में साय सरकार द्वारा भी ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जीपीएम जिले के अमारू में लेमन ग्रास की खेती इसी दिशा में संभावनाओं से भरा प्रयास है। यदि उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और विपणन की मजबूत व्यवस्था विकसित होती है, तो यह गतिविधि महिलाओं के लिए नियमित और बेहतर आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। खेतों में उग रही फसल के साथ बढ़ रहे महिलाओं के सपने ग्राम अमारू की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आ रहे सकारात्मक बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करती है। जिन हाथों ने वर्षों तक परिवार और घर की जिम्मेदारियां संभालीं, वही हाथ अब खेतों में लेमन ग्रास लगाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं। समूह की ताकत, सरकारी योजनाओं का सहयोग और महिलाओं की मेहनत मिलकर गांव में आजीविका का नया रास्ता तैयार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने वाली राज्य सरकार की नीतियों के बीच ग्राम अमारू की महिलाएं बदलाव की मजबूत कड़ी बनकर उभरी हैं। लेमन ग्रास की यह महक अब केवल खेतों तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के आत्मविश्वास, उनके परिवारों की खुशहाली और आत्मनिर्भर ग्रामीण छत्तीसगढ़ की नई उम्मीद की खुशबू बन रही है।

बिलासपुर में जंगल की अवैध कटाई पर बड़ी कार्रवाई, सागौन की लाखों की लकड़ी जब्त

बिलासपुर. बिलासपुर के लमकेना में जंगल से अवैध सागौन कटाई के मामले में वन विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की है. टीम ने आरोपी के घर और बाड़ी से लाखों रुपये की लकड़ी बरामद की है. मौके से सागौन, साल और चिरान लकड़ी के अलावा आरा मशीन, इलेक्ट्रिक चेन सॉ मशीन, रमदा मशीन और बढ़ईगिरी में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान भी जब्त किया गया है. आरोपी पर अवैध रूप से काटी गई लकड़ी से फर्नीचर बनाने का आरोप है. कार्रवाई से पहले ही आरोपी मौके से फरार हो गया. वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है. 4 अक्टूबर को सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम साजापाली सोंठी में टीम ने रुद्रनारायण, पिता कीर्तन लाल के यहां दबिश दी। तलाशी में 51 नग सागौन और 3 नग खैर की लकड़ी, कुल 54 नग चिरान मिला। इसकी मात्रा 0.506 घनमीटर है। लकड़ी के संबंध में वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर इसे जब्त कर लिया गया। रेंजर रितू साहू के अनुसार जब्त लकड़ी की कीमत एक लाख रुपए से अधिक है। वहीं एक दिन पहले कोटा वन परिक्षेत्र के ग्राम लमकेना में अवैध लकड़ी के चिरान की सूचना पर 3 अक्टूबर को सर्च वारंट जारी किया गया। उपवन मंडलाधिकारी कोटा अनिल भास्करन के नेतृत्व में वन विभाग के उड़नदस्ते, कोटा टीम और पुलिस ने सुरेश खांडे के घर व बाड़ी में दबिश दी। तलाशी में मिनी आरा मशीन, इलेक्ट्रिक चेनसॉ, रंदा मशीन समेत बढ़ईगिरी के उपकरण मिले। मौके से सागौन, साल और मिश्रित प्रजाति की 1.024 घनमीटर लकड़ी जब्त की गई। वहीं आरोपी सुरेश मौके से फरार हो गया।  जंगल और उससे लगे गांवों में सर्चिंग बढ़ाई – बारिश थमते ही जंगल और उससे लगे गांवों में सर्चिंग बढ़ा दी गई है। उड़नदस्ता को लगातार निरीक्षण और जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध कटाई, परिवहन और भंडारण की सूचना मिलने पर कार्रवाई जारी रहेगी। – मनोज पांडे, सीसीएफ, बिलासपुर वृत्त

SET परीक्षा में कलावा काटने को लेकर हंगामा, Bilaspur में पुलिस ने संभाला मोर्चा

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (सीजी सेट) रविवार को जिले के 84 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित हुई। परीक्षा के लिए शहर के स्कूलों के साथ पुसौर, खरसिया और तमनार ब्लॉक के स्कूलों को भी केंद्र बनाया गया था। जिले में 19 हजार 92 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 13 हजार 475 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 4 हजार 890 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की आवाजाही शुरू हो गई थी। प्रवेश से पहले उनकी जांच की गई तथा प्रवेश पत्र और पहचान पत्र का सत्यापन किया गया। पहली पाली की परीक्षा सुबह 10 बजे से 11.15 बजे तक हुई। इसमें पेपर-1 में सामान्य अध्ययन, शिक्षण एवं शोध अभिरुचि से संबंधित प्रश्न पूछे गए। दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 4.15 बजे तक आयोजित हुई। इसमें अभ्यर्थियों ने अपने चयनित विषय का पेपर-2 दिया। दोनों पालियों के लिए अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से पहले केंद्र पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश के दौरान कलावा हटवाने को लेकर विवाद की स्थिति बनी। अभ्यर्थियों के हाथों में बंधे कलावे को हटवाने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और इस पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि धार्मिक आस्था से जुड़ी वस्तु को हटवाना उचित नहीं है। सीजी सेट का आयोजन छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए अभ्यर्थियों की पात्रता निर्धारित करने के लिए किया जाता है। पहली पाली में सामान्य अध्ययन, शिक्षण एवं शोध अभिरुचि से संबंधित पेपर-1 तथा दूसरी पाली में चयनित विषय का पेपर-2 आयोजित किया गया। सहायक प्राध्यापक के लिए पात्रता परीक्षा दो घंटे पहले केंद्र बुलाया गया, 30 मिनट पहले बंद कर दिए गए गेट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को केंद्र पर निर्धारित समय से कम से कम दो घंटे पहले पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले केंद्र का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ मूल फोटोयुक्त पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य था। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक घड़ी, पर्स और पाउच समेत कई वस्तुएं ले जाने पर प्रतिबंध था। प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की जांच की गई। महिला अभ्यर्थियों की जांच महिला पुलिसकर्मियों ने की।

छत्तीसगढ़ में सिंचाई और विकास को बढ़ावा

छत्तीसगढ़ में सिंचाई और विकास को बढ़ावा जशपुर जिले में मैनी एनीकट निर्माण के लिए 70.99 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के विकास और किसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसके तहत जशपुर जिले के विकासखंड-कांसाबेल अंतर्गत मैनी एनीकट के निर्माण कार्य के लिए 70 करोड़ 99 लाख 57 हजार रुपये (70.99 करोड़ रुपये) की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस एनीकट के निर्माण से क्षेत्र में भू-जल स्तर में सुधार होगा और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।               जशपुर के किसानों को कृषि के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिलेगा। इस योजना से कुल 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। खरीफ फसल के 1300 हेक्टेयर क्षेत्र में और रबी फसल के 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। इस एनीकट के बनने से क्षेत्र के किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि उत्पादन को भी नया संबल मिलेगा। स्थानीय नागरिकों के लिए निस्तारी और पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। इस परियोजना से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा भी सुगम होगी।

अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री पर प्रेमलता को मिली आर्थिक राहत, ऑनलाइन सुविधाओं से समय भी बचा

रायपुर अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचीं गरियाबंद जिले के पारागांव निवासी प्रेमलता गिरी को पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से दोहरा लाभ मिला। महिला क्रेता होने के कारण पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट से उन्हें करीब 2,430 रुपये की आर्थिक राहत मिली, वहीं ऑनलाइन और डिजिटल सुविधाओं के कारण उनका समय भी बचा। रजिस्ट्री से पहले ही संपत्ति के बाजार मूल्य और लगने वाले शुल्क की जानकारी मिली, सुगम एप से जमीन की पहचान सुनिश्चित हुई और पंजीयन के बाद दस्तावेज भी व्हाट्सएप पर प्राप्त हो गया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इन सुविधाओं से जुड़ा अपना अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को प्रोत्साहित करने के साथ पंजीयन सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार लागू किए गए हैं। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति अंतरण संबंधी दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस प्रकार महिला क्रेताओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की राहत मिल रही है। पंजीयन से पहले मिली शुल्क की जानकारी, रजिस्ट्री का खर्च भी हुआ कम प्रेमलता गिरी ने बताया कि पंजीयन से पहले ही संपत्ति के बाजार मूल्य और लगने वाले विभिन्न शुल्कों की जानकारी उपलब्ध होने से उन्हें पूरी प्रक्रिया और खर्च को समझने में आसानी हुई। अपने नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने पर महिला क्रेता के रूप में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिली, जिससे उन्हें करीब 2,430 रुपये की बचत हुई। यह आर्थिक राहत उनके लिए सीधे तौर पर उपयोगी साबित हुई। गिरी ने महिलाओं के नाम संपत्ति के पंजीयन को प्रोत्साहित करने वाली इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शुल्क में कमी से महिलाओं के लिए अपने नाम संपत्ति का पंजीयन कराना अधिक किफायती हुआ है। सुगम एप से जमीन की पहचान, ऑनलाइन सुविधाओं से कम हुई दौड़भाग पंजीयन प्रक्रिया में डिजिटल सुविधाओं का लाभ भी प्रेमलता गिरी को मिला। ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करने, आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक सहज हुई। आवश्यक जानकारी पहले से उपलब्ध होने और प्रक्रियाओं के ऑनलाइन होने से उनका समय बचा तथा कार्यालय के अनावश्यक चक्कर भी कम हुए। सुगम एप के माध्यम से पंजीकृत की जा रही जमीन की पहचान सुनिश्चित करने में भी सुविधा मिली। इससे संपत्ति से संबंधित जानकारी को अधिक स्पष्टता के साथ सत्यापित किया जा सका। रजिस्ट्री के बाद व्हाट्सएप पर मिला दस्तावेज गिरी के लिए एक और महत्वपूर्ण सुविधा पंजीयन के बाद दस्तावेज का डिजिटल माध्यम से मिलना रही। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद पंजीकृत दस्तावेज उन्हें व्हाट्सएप पर प्राप्त हुआ। इससे दस्तावेज प्राप्त करने के लिए अलग से कार्यालय जाने की जरूरत कम हुई और पूरी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनी। प्रेमलता गिरी ने पंजीयन शुल्क में राहत और डिजिटल सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी तथा पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। आर्थिक राहत के साथ महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को प्रोत्साहन महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से रजिस्ट्री का खर्च कम होने के साथ उनके नाम संपत्ति के पंजीयन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आया प्रेमलता गिरी का अनुभव बताता है कि शुल्क में राहत और तकनीक आधारित सुविधाएं मिलकर पंजीयन प्रक्रिया को कम खर्चीला और अधिक सुविधाजनक बना रही हैं। करीब 2,430 रुपये की बचत, सुगम एप से जमीन की पहचान और व्हाट्सएप पर पंजीकृत दस्तावेज मिलने जैसी सुविधाओं ने उनके लिए रजिस्ट्री के अनुभव को आसान बनाया है।