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नगरीय निकायों में खुलेंगे आदर्श सुविधा केंद्र, मुख्यमंत्री साय और उप मुख्यमंत्री साव ने भारत सरकार को दिया धन्यवाद

पहले चरण में सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं में शुरू होगी सुविधा सभी सेवाओं के लिए एकीकृत केन्द्र की तरह कार्य करेगा आदर्श सुविधा केंद्र, नागरिकों को होगी सहूलियत रायपुर. उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव की विशेष पहल पर केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्य के नगरीय निकायों में आदर्श सुविधा केंद्र खोलने के लिए 50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। पहले चरण में सभी 14 नगर निगमों और सभी 55 नगर पालिकाओं में ये केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे। ये सुविधा केंद्र नागरिकों को विभिन्न तरह के प्रमाण पत्र और लाइसेंस प्राप्त करने तथा पंजीयन व शिकायत निवारण जैसी सेवाओं के लिए एकीकृत केंद्र की तरह काम करेंगे। भारत सरकार ने नगरीय निकायों से जुड़ी सभी तरह की सेवाओं पर आधारित आदर्श सुविधा केन्द्र खोलेने के लिए म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विसेस सेंटर (Municipal Shared Services Centre) के अंतर्गत सिटीजन एक्सपिरियंस सेंटर (Citizen Experience Centre) के लिए यह राशि मंजूर की है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नगरीय निकायों में आदर्श सुविधा केंद्र स्थापित किए जाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल हमारी सुशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत हम प्रदेश के नागरिकों को पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध हैं। छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर सुविधाएँ और जीवन स्तर प्राप्त हो, यह हमारी सरकार का लक्ष्य है। आदर्श सुविधा केंद्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नगरीय प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाएगा। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सुशासन की सरकार नगरीय निकायों के नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना बनाकर कार्य कर रही है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के माध्यम से केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा प्रदेश में सिटीजन एक्सपिरियंस सेंटर स्थापित करने के लिए म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विसेस सेंटर के अंतर्गत प्रस्ताव प्रेषित किया गया था। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के इस प्रस्ताव को स्वीकृति एवं अनुशंसा प्रदान करते हुए इसके लिए 50 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। ये सिटीजन एक्सपीरियंस सेंटर नगरीय निकायों से संबंधित सेवाओं (म्यूनिसिपल सर्विसेस) के लिए वन-स्टॉप हब के रूप में काम करेंगे।  साव ने प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करने के लिए केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रदेश के नागरिकों को बधाई दी है।          उप मुख्यमंत्री  साव ने बताया कि आदर्श सुविधा केंद्रों (Citizen Experience Centers) के माध्यम से ‘‘वन स्टेट – वन पोर्टल‘‘ सिंगल प्लेटफार्म की तर्ज पर नागरिकों को जन्म, मृत्यु, विवाह जैसे आवश्यक प्रमाण पत्र, व्यापार, वेंडिंग, विज्ञापन के लिए लाइसेंस सेवाएं, संपत्ति कर, जल/सीवरेज, ठोस अपशिष्ट सेवाएँ, नगर निगम संपत्ति बुकिंग के लिए  पंजीकरण, शिकायत निवारण की सुविधा तथा डिजिटल समावेशन सेवाओं का लाभ सुलभ और समयबद्ध रूप से प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि ये केन्द्र नागरिक सेवाओं को सरल और मानकीकृत करने के साथ ही प्रशासनिक बाधाओं को भी दूर करेगी, जिससे लोगों और नगरीय निकायों के अधिकारियों के मध्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इसके साथ ही यह पहल पूरे राज्य में समावेशिता को बढ़ावा देगी तथा इज ऑफ लिविंग (Ease of Living) में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित करेगी। क्या है आदर्श सुविधा केन्द्र आदर्श सुविधा केन्द्र नगरीय निकायों में जनसुविधाओं से संबंधित समस्त सेवाओं के लिए एकीकृत केन्द्र की तरह कार्य करेगी। इस केन्द्र के माध्यम से नगरीय निकायों में नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज व सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रदेश में संचालित अन्य नागरिक सुविधा पोर्टल जैसे निदान-1100, मोर संगवारी, संपत्ति कर तथा नगरीय प्रशासन से संबंधित अन्य सेवाओं व सुविधाओं को भी आदर्श सुविधा केन्द्र के साथ जोड़ा जाएगा। कैसे मिलेगी नागरिकों को सुविधाएं आदर्श सुविधा केन्द्र के माध्यम से सेवाएं प्राप्त करने के लिए नागरिकों को अपनी इच्छित सेवाओं से संबंधित आवेदन सुविधा केन्द्र में जाकर दर्ज/जमा करानी होगी। नागरिकों से प्राप्त आवेदन की प्रकृति एवं गुण-दोष के आधार पर नगरीय निकाय द्वारा आदर्श सुविधा केन्द्र के माध्यम से निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ी होगी और इसकी मॉनिटरिंग राज्य शहरी विकास अभिकरण में स्थापित राज्य स्तरीय कमाण्ड एंड कण्ट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी।  

रजत जयंती महोत्सव एवं सेवा पखवाड़ा: दिव्यांगजन के लिए स्वास्थ्य परीक्षण और सहायक उपकरण वितरण शिविर सफलतापूर्वक आयोजित

सूरजपुर, रजत जयंती महोत्सव एवं सेवा पखवाड़ा दिवस के अवसर पर आज शनिवार को जनपद पंचायत सूरजपुर के साधु राम सेवा कुंज में दिव्यांगजन एवं वृद्धजनों हेतु विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिला अस्पताल से मेडिकल बोर्ड तथा पीपीआरसी रायपुर के विशेषज्ञों द्वारा दिव्यांगजनों की जांच की गई। इस दौरान 7 कृत्रिम अंगों का मापन, 39 मेडिकल प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा कुल 89 पंजीयन सम्पन्न हुए। कार्यक्रम में जनपद पंचायत सूरजपुर की अध्यक्ष माननीय श्रीमती स्वाति सिंह, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। शिविर में दिव्यांगजनों और वृद्धजनों को 17 सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिनमें 4 ट्रायसायकल, 3 व्हीलचेयर, 3 श्रवण यंत्र एवं 7 छड़ियां शामिल हैं।

फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में कांकेर पुलिस ने पकड़े दो बांग्लादेशी, आदिवासी समुदाय की सख्त प्रतिक्रिया

कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे 2 बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी समाज मोर्चा खोलने वाला है. समाज लंबे समय से पखांजूर क्षेत्र में बांग्लादेशियों के अवैध रूप से रहने का लगातार मुद्दा उठाते आ रहा है. इस बीच पखांजूर क्षेत्र में 2 बांग्लादेशियों ने अवैध रूप से रहते जन्म प्रमाण पत्र बनवा लिया था. हालांकि तहसीलदार की शिकायत पर दोनों बांग्लादेशियों को गिरफ्तार कर वीजा जब्त कर लिया गया है. सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष कन्हैया उसेंडी ने कहा कि हम लगातार आवाज उठाते आए हैं कि पखांजूर क्षेत्र में अवैध रूप से बांग्लादेशी रह रहे हैं और यहां के निवासी बनने की कोशिश कर रहे हैं. प्रशासन को क्षेत्र में जांच करनी चाहिए और उन पर कार्रवाई करनी चाहिए. अभी दो लोग गिरफ्तार हुए हैं, उनके जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले संलिप्त व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए. गौरतलब हो कि प्रशांत बैरागी एवं उसके पुत्र सुकृक्ति बैरागी ग्राम पीव्ही 127 अनुपपुर अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं. जांच के दौरान पता चला कि दोनों आरोपी प्रशांत बैरागी एवं सुकृति वैरागी वीजा अवधी समाप्त होने के पश्चात भी अवैध रूप से ग्राम पीव्ही 127 अनुपपुर तहसील पखांजूर में निवासरत थे. प्रशांत बैरागी अपने पुत्र सुकृति बैरागी का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने तहसील न्यायालय पखांजूर को गुमराह करते हुए गलत जानकारी दी और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे. वीजा को पुलिस ने जब्त कर लिया है. आरोपी प्रशांत वैरागी एवं सुकृति बैरागी निवासी ग्राम औसखली पोस्ट कंचन नगर थाना बोटियाघाट जिला खुलना (बांग्लादेश) को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है.

पंजाब जाते वक्त सड़क हादसे में कोल व्यापारी अमन बाजवा और मां की जान गई

कोरबा गेवरा–दीपका क्षेत्र के प्रमुख कोल ट्रांसपोर्टर और व्यवसायी अमन बाजवा उर्फ तलविंदर सिंह (34) की सड़क हादसे में मौत हो गई. इस दर्दनाक दुर्घटना में उनकी मां की भी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके मौसा गंभीर रूप से घायल हैं. अमन बाजवा अपने पत्नी और बच्चों से मिलने पंजाब जा रहे थे, इसी दौरान मध्य प्रदेश के चित्रकूट के पास बुंदेलखंड नेशनल हाईवे पर वे हादसे का शिकार हो गए. पंजाब परिवार से मिलने जा रहे थे अमन जानकारी के अनुसार, अमन बाजवा अपनी मां और मौसा के साथ स्कॉर्पियो कार से पंजाब जा रहे थे. परिवार से मिलने की खुशी में वे सफर पर निकले थे, लेकिन रास्ते में हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली. बताया गया कि उनकी पत्नी और बच्चे फिलहाल पंजाब में रह रहे हैं, जहां से उन्हें लाने के लिए वे रवाना हुए थे. मौके पर ही मां-बेटे की मौत चित्रकूट के समीप नेशनल हाईवे पर हुए इस हादसे में गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. टक्कर इतनी भीषण थी कि अमन और उनकी मां ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. उनके मौसा को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. कोयलांचल क्षेत्र में शोक की लहर अमन बाजवा दीपका थाना क्षेत्र के झाबर निवासी थे और कोरबा के नामी ट्रांसपोर्ट व्यवसायी माने जाते थे. उनकी असामयिक मृत्यु की खबर मिलते ही गेवरा–दीपका क्षेत्र के ट्रक मालिक एसोसिएशन और कोयला कारोबारियों में शोक की लहर दौड़ गई.

हाईकोर्ट में भाषण देते हुए जज माहेश्वरी ने चुनी मातृभाषा हिंदी

  बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की रजत जयंती का अवसर सोमवार को इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया. न्याय और आस्था के इस संगम को और गरिमामय बनाने मंच पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस प्रशांत मिश्रा, तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी. सैम कोशी तथा पूर्व जज मनींद्र मोहन श्रीवास्तव की उपस्थिति रही. इस कार्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने संबोधित करते हुए कहा कि मैं छत्तीसगढ़ आया हूं तो हिंदी में ही बोलूंगा… जस्टिस माहेश्वरी का आत्मीय संबोधन जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने अपने संबोधन में कहा कि “मैं छत्तीसगढ़ आया हूं तो हिंदी में ही बोलूंगा. मैं मध्यप्रदेश का हूं और छत्तीसगढ़ से मेरा आत्मीय जुड़ाव है. बेंच और बार एक रथ के दो पहिए हैं, और कर्म ही सच्चा धर्म है.”  उन्होंने आगे कहा- “न्यायालय इमारतों से नहीं, बल्कि आम जनता को मिलने वाले न्याय से पहचाना जाएगा. आने वाले 25 वर्ष न्यायपालिका की उपलब्धियों और सबकी सहभागिता से तय होंगे.” चीफ जस्टिस सिन्हा ने गिनाई उपलब्धियां छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने रजत जयंती अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि बीते 25 वर्षों में हाईकोर्ट ने लंबित मामलों को घटाने और न्यायिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. जनता की आस्था अटूट रहेगी: तोखन साहू समारोह में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने भरोसा जताया कि न्यायपालिका पर जनता की आस्था हमेशा अटूट रहेगी. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने 25 वर्षों की यात्रा में जिस तरह से न्याय के नए आयाम गढ़े हैं, वह आने वाले समय में और भी प्रेरणादायी साबित होंगे.

रायपुर में पीएम सूर्यघर योजना से सोलर पैनलों की बड़ी राहत, मुफ्त बिजली का लाभ

रायपुर के घरों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर पैनलों से मुफ्त बिजली सुविधा पर्यावरण संरक्षण और बचत का साधन बनी पीएम सूर्यघर योजना रायपुर पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: सोलर पैनलों से मिल रही बड़ी राहतपीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से छत्तीसगढ़ में बिजली उपभक्ताओं को बिजली बिल में बड़ी राहत मिल रही है। सौलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल या तो शून्य या बहुत कम हो जाता है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिल रहा है और स्वच्छ ऊर्जा से लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं। योजना के लाभार्थियों ने बताया कि सोलर पैनल लगाने से उन्हें आर्थिक बचत हुई है और कुछ परिवारों ने अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं।       बिलासपुर शहर के राधिका विहार फेस 2 निवासी  क्रांति कुमार शर्मा ने बताया कि एक साल पहले उन्होंने पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत 5 किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाया था। पैनल लगने के पहले बिजली बिल लगभग 6 हजार रूपए प्रतिमाह आता था। सोलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल अब शून्य हो गया है। एक भी रूपए खर्च नहीं करने पड़ रहे है। सोलर पैनल स्थापित करवाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार से उन्हें सब्सिडी भी मिली है। उन्होंने सभी निवेदन किया कि वे इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं। शहर के एक अन्य निवासी  गुरमुख दास मूलचंदानी ने बताया कि उन्होंने अपने पिताजी के नाम पर योजना के तहत अपनी छत पर सोलर पैनल स्थापित करवाया है। पहले लगभग 5 हजार रूपए प्रतिमाह बिजली बिल आता था। पैनल लगने के बाद अब उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। योजना से मिल रहे लाभ से वे बहुत ही खुश है। केंद्र एवं राज्य सरकार से भी सब्सिडी मिली है। वैभव कुमार अग्रवाल ने बताया कि योजना के अंतर्गत सोलर पैनल लगाने से उन्हें बिजली बिल में बहुत राहत मिली है। यह योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देती है।      पीएम सूर्यघर योजना में एक बार निवेश करने पर 25 वर्षों तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है और इस पर कोई विशेष मेंटेनेंस खर्च भी नहीं है। साथ ही अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में सप्लाई कर आय अर्जित करने का अवसर भी मिलता है। यह योजना  पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा बड़ा कदम है। योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने पर केन्द्र सरकार से 78 हजार रुपये तक सब्सिडी और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपये तक सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही सरकार 300 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली प्रदान कर रही है।योजना के तहत ऋण का भी प्रावधान है जिसमें एक बार निवेश पर 25 वर्षों तक मुफ्त और सतत बिजली पाई जा सकती है।

रायपुर में पीएम सूर्यघर योजना ने दिया राहत और मुनाफा, प्रतिकूल मौसम में भी सफलता

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना ने प्रतिकूल मौसम में भी किसानों को दी राहत और मुनाफा पड़ोसी को देख पड़ोसी ने लगवाया अपनी छत पर भी सोलर पैनल रायपुर छत्तीसगढ़ में अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाने और उसका उपयोग करने की प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस योजना से घरों के बिजली बिलों में कटौती तो हो ही रही है, इसके साथ-साथ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर मुनाफा भी हो रहा है। गरमी, उमस भरी बरसात या ठंड जैसे प्रतिकूल मौसम में भी इस योजना से बिजली की आबाध आपूर्ति के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी हो रहा है। कोरबा जिले के कटघोरा में पड़ोसी ने पड़ोसी को देखकर अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाया है।  कटघोरा कस्बे में श्रीमती ज्योति अनंत और श्री गोरे सिंह राजपूत आसपास रहते हैं। श्रीमती ज्योति ने अपनी घर की छत पर सोलर पैनल लगवाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया। उन्होंने बताया कि अब उनके घर के सभी उपकरण निर्बाध रूप से चल रहे हैं और घर की ऊर्जा का उत्पादन पूरी तरह आत्मनिर्भर है। “पहले गर्मी का मौसम चुनौतीपूर्ण लगता था, अब वही मौसम राहत और मुनाफा लेकर आता है। हम अपनी जरूरत की बिजली स्वयं बना रहे हैं और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर आर्थिक लाभ भी अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने योजना की सबसे बड़ी खासियत यह बताई कि यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित और हरित ऊर्जा के लिए लाभकारी है। उनकी छत केवल बिजली उत्पादन का केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ में योगदान का प्रतीक बन गई है।   पड़ोसी से प्रेरित होकर श्री गोरे सिंह राजपूत ने भी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाया। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से उनके घर की छत पर तीन किलोवाट का सोलर पैनल इंस्टॉल हुआ, जिसकी कुल लागत एक लाख 95 हजार रुपये थी और केंद्र सरकार की 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। उन्होंने बताया कि अब उनका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है और घर की विद्युत आपूर्ति के लिए वे पूरी तरह आत्मनिर्भर है। श्री राजपूत ने कहा, “सौर ऊर्जा अपनाकर हम न केवल अपने खर्च में संतुलन ला रहे हैं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान दे रहे हैं। इस योजना से हमारा जीवन आसान और आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है। यह अनुभव अन्य स्थानीय निवासियों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।” प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री श्री साय ने इस योजना के माध्यम से नागरिकों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराई है। इस पहल से परिवारों में आत्मनिर्भरता, आर्थिक स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है। श्रीमती ज्योति और श्री गोरे सिंह राजपूत ने योजना के लिए अपना हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया और भविष्य में इस तरह की योजनाओं के निरंतर लाभ की उम्मीद जताई। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना देश के आम नागरिकों के लिए स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बन चुकी है। योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, घरेलू खर्च में संतुलन लाना और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाना है। इस योजना के तहत रियायती दरों पर सोलर पैनल उपलब्ध कराए जाते हैं और केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपये की सब्सिडी और राज्य सरकार से रूपये 30 हजार की राशि लाभार्थियों को प्रदान की जाती है। इससे न केवल आर्थिक राहत मिलती है, बल्कि परिवारों को उनकी बिजली की जरूरतों के लिए स्वतंत्रता भी मिलती है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का लाभ लेने के लिए नागरिक सरल प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। योजना की वेबसाइट और स्थानीय प्रशासन कार्यालय इसके लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह योजना पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के प्रति नागरिकों में जागरूकता भी बढ़ा रही है। इससे सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा भी मिल रहा है।

घर बनाने का सपना महंगा बना हुआ, कीमतें कम होने के बावजूद लाभ नहीं

रायपुर केंद्र सरकार ने सीमेंट पर जीएसटी की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. यानी सीमेंट पर जीएसटी की दरें 10 प्रतिशत कम हो गई हैं. राजधानी रायपुर में सीमेंट की कीमत होलसेल में 310-305 रुपए व रिटेल में 320-330 रुपए प्रति बैग थी. जीएसटी दर में कटौती के बाद सीमेंट अब प्रति बैग लगभग 20 से 25 रुपए तक सस्ता होना चाहिए था, लेकिन रिटेलर अभी भी पुरानी कीमत पर ही उपभोक्ताओं को सीमेंट बेच रहे हैं. बताया गया है कि जीएसटी की नई दर लागू होने के बाद सीमेंट कंपनियों ने सीमेंट की कीमत 20 से 25 रुपए तक कम कर दी है, लेकिन रिटेलरों द्वारा अभी भी पुरानी दरों में ग्राहकों को सीमेंट बेचा जा रहा है. इसके चलते आम उपभोक्ताओं को सीमेंट पर जीएसटी दर में कटौती का सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है. निर्माण लागत में कमी सीमेंट की कीमत घटने से ग्रामीण व शहरी इलाके के सभी वर्ग के उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा. वहीं, निर्माण लागत पर सीधा असर पड़ेगा. मकानों की निर्माण लागत में कमी आएगी और आम लोग आसानी से मकान बना पाएंगे. सीमेंट की कीमत में प्रति बैग 20 से 25 रुपए तक की कमी आने से आम उपभोक्ताओं को काफी राहत मिल सकती है.

रायपुर : प्रदेश में अब तक 1126.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 1126.4 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बीजापुर जिले में सर्वाधिक 1549.5 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 519.0 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 1021.8 मि.मी., बलौदाबाजार में 906.1 मि.मी., गरियाबंद में 1084.8 मि.मी., महासमुंद में 931.5 मि.मी. और धमतरी में 1050.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 1129.0 मि.मी., मुंगेली में 1097.3 मि.मी., रायगढ़ में 1331.9 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1065.9 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 1347.1 मि.मी., सक्ती में 1234.6 मि.मी., कोरबा में 1116.3 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 1030.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 877.0 मि.मी., कबीरधाम में 786.3 मि.मी., राजनांदगांव में 951.3 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1400.4 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 836.0 मि.मी. और बालोद में 1176.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 756.1 मि.मी., सूरजपुर में 1138.0 मि.मी., बलरामपुर में 1512.0 मि.मी., जशपुर में 1049.5 मि.मी., कोरिया में 1189.3 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1072.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 1516.8 मि.मी., कोंडागांव जिले में 1084.7 मि.मी., कांकेर में 1305.7 मि.मी., नारायणपुर में 1375.8 मि.मी., दंतेवाड़ा में 1529.8 मि.मी. और सुकमा में 1198.1 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

आपदा प्रबंधन की तैयारी: बाढ़ व क्लोरीन रिसाव पर मॉकड्रिल

कोरबा शनिवार की सुबह कटघोरा स्थित राधासागर तालाब में जलजनित आपदा से निपटने के लिए मॉक ड्रील का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत एक काल्पनिक स्थिति तैयार की गई, अचानक भारी वर्षा के कारण जलस्रोतों में जलस्तर बढ़ गया और कुछ लोग पानी में फंस गए। इस स्थिति में बचाव दलों ने वास्तविक परिस्थिति की तरह तत्काल कार्रवाई की। रेस्क्यू टीम ने लाइफ जैकेट, रस्सियों और नाव की मदद से तालाब में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रशिक्षित गोताखोरों और रेस्क्यू टीम ने पानी में फंसे व्यक्तियों की पहचान की, फंसे व्यक्तियों तक रस्सियां और लाइफ जैकेट पहुंचाई गईं, नाव और टीम के सहयोग से सभी लोगों को पानी से बाहर लाकर किनारे तक पहुंचाया गया। मेडिकल टीम ने तत्काल मौके पर ही उनकी स्वास्थ्य जांच की। डूबने की स्थिति में कृत्रिम श्वसन (सीपीआर), ऑक्सीजन सपोर्ट और प्राथमिक दवाओं का प्रदर्शन किया गया और गंभीर स्थिति के अनुमानित मरीजों को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। इसी क्रम में कोहड़िया स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में क्लोरीन गैस रिसाव पर आधारित मॉक ड्रील का आयोजन किया गया। क्लोरीन गैस का उपयोग पेयजल शोधन के लिए किया जाता है, किंतु इसका अधिक मात्रा में रिसाव मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अभ्यास में यह स्थिति बनाई गई कि संयंत्र में अचानक क्लोरीन गैस का रिसाव हो गया है। जैसे ही अलार्म बजा, आपदा प्रबंधन टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए सिलेंडर को बंद करने, वाटर स्प्रे कर प्रभावित क्षेत्र को सील करने और गैस को फैलने से रोकने के उपायों का प्रदर्शन किया गया। मेडिकल टीम ने गैस से प्रभावित व्यक्तियों का प्राथमिक उपचार किया। उन्हें ताजी हवा में लाया गया, आंखों और त्वचा को साफ पानी से धोने की प्रक्रिया दिखाई गई तथा सांस लेने में कठिनाई होने पर ऑक्सीजन सपोर्ट प्रदान किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका, अग्निशमन दल तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।