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बलरामपुर को मिला प्रयास आवासीय विद्यालय, मंत्री रामविचार नेताम की पहल पर 25 करोड़ स्वीकृत

रायपुर बलराम पुर जिला मुख्यालय में 25 करोड़ रूपए की लागत से प्रयास आवासीय विद्यालय बनेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आदिम जाति विकास मंत्री राम विचार नेताम की पहल पर प्रयास आवासीय विद्यालय के भवन के लिए राशि की मंजूरी दी है।  मंत्री नेताम ने बताया कि बलरामपुर में प्रयास आवासीय विद्यालय प्रारंभ होने से अंचल के जनजातीय परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इन विद्यालयों में स्कूली शिक्षा के साथ-साथ अखिल भारतीय मेडिकल एवं इंजीनियरिंग परीक्षाआों के साथ-साथ अन्य परीक्षाओं की भी तैयारी करायी जाती है। बलरामपुर आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं। इस विद्यालय के प्रारंभ होने से न केवल जनजातीय बल्कि अन्य वर्गों के प्रतिभावान छात्रों को इसका लाभ मिलेगा।

01 नवंबर को राज्य स्थापना की रजत जयंती एवं 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर होगा वृहद आयोजन अभियान

रायपुर प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा द्वारा आज मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में 28 जिलों के कलेक्टर्स के साथ वीडियो कोफ्रेंसिंग के माध्यम से आदि कर्मयोगी अभियान की तैयारियों के संबंध में बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 28 जिलों के 128 विकासखण्डों एवं 6650 आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में इस अभियान के माध्यम से शत प्रतिशत संतृप्ति के लक्ष्य को प्राप्त किया जाना है इसके लिए अन्य विभागों से भी आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि चिन्हांकित आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में जो भी क्रिटिकल गैप है उसे इस अभियान के अंतर्गत जिला स्तर पर आदि कर्मयोगी, ब्लॉक स्तर पर आदि सहयोगी एवं ग्राम स्तर पर आदिसाथी के माध्यम से पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इस हेतु पूरे प्रदेश से लगभग 1.33 लाख वॉलंटियर तैयार किए जाने का लक्ष्य है, जो कि जमीनी स्तर पर जनजातीय समाज के लोंगों के बीच जाकर अभियान की सफलता को सुनिश्चित करेंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा 6 अगस्त को आदि कर्मयोगी अभियान के संबंध में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए थे। उन्होंने जिला कलेक्टर्स को 16 सितंबर से 02 अक्टूबर 2025 तक सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाए जाने के निर्देश भी दिए हैं। प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि इस अभियान हेतु रिस्पॉसिव गवर्नेस प्रोग्राम के तहत राजधानी रायपुर में जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के मुख्य तत्वाधान में संभागवार जिला मास्टर ट्रेनर्स के चार दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का दूसरा चरण चल रहा है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग इसका मुख्य आयोजक है, जबकि इसमें बीआरएलएफ (भारत ग्रामीण आजीविका मिशन) द्वारा विशेष सहयोग प्रदान किया जा रहा है। पहले चरण में 11 से 14 अगस्त तक रायपुर, बिलासपुर एवं दुर्ग संभाग एवं द्वितीय चरण 18 से 21 अगस्त में बस्तर एवं सरगुजा संभाग के जिला मास्टर ट्रेनर्स को अभियान की सभी सूक्ष्म जानकारियां राज्य मास्टर ट्रेनर्स द्वारा दी जा रही है। प्रदेश के मुख्य सचिव अमिताभ जैन द्वारा 12 अगस्त को संभागवार जिला मास्टर ट्रेनर्स के प्रथम सत्र का शुभारंभ किया गया था। इसी प्रकार 19 अगस्त को केन्द्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय दुर्गादास उइके द्वारा इसके द्वितीय चरण के प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मंत्री रामविचार नेताम द्वारा भी सत्र को संबोधित किया गया। प्रमुख सचिव ने बताया कि 01 नवंबर को राज्य स्थापना की रजत जयंती एवं 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर वृहद आयोजन किया जाना है। इसमें आदि कर्मयोगी, आदि सहयोगी एवं आदिसाथी की सहभागिता को सुनिश्चित किया जाना है। उन्होंने 16 सितंबर से 02 अक्टूबर 2025 के मध्य जिलों में ष्सेवा पर्व एवं आदि कर्मयोगी सेवा अभियानष् के रूप में मनाए जाने के संबंध में रूपरेखा को शीघ्र अंतिम रूप दिए जाने के र्निदेश दिए। उन्होंने जिला स्तर, ब्लॉक स्तर एवं ग्राम स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में जिले के प्रभारी मंत्री एवं अन्य जनप्रतिनिधियों तथा गणमान्य नागरिकों को शामिल किए जाने के निर्देश दिए। बैठक को राज्य नोडल अधिकारी हृदेश कुमार, प्रबंध संचालक, ट्राईफेड द्वारा भी वर्चुअली मोड संबोधित कर जिला कलेक्टर्स को अभियान की सफलता सुनिश्चित करने का आव्हान किया गया। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर्स को अभियान की पूरी रूपरेखा की जानकारी होनी चाहिए। इस हेतु एक व्यापक कार्ययोजना बनाकर उसपर पूरी गंभीरता के साथ काम किया जाए। साथ ही जिला स्तर, ब्लॉक स्तर एवं ग्राम स्तर पर भी अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि सभी जिला कलेक्टेरट में सूचना पटल आदि पर पीएम जनमन, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा आदि कर्मयोगी अभियान का बिन्दुवार व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए इस संबंध में स्थानीय स्तर पर इन अभियानों से संबंधित सामाचारों को भी चस्पा किया जाना चाहिए, ताकि लोगों के मध्य अभियान को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके। इस हेतु जिलों में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद ली जा सकती है। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार के डलळवअ पोर्टल पर जाकर जिलों में की जा रही गतिविधियों की फोटो सीधे अपलोड की जा सकती हैं। साथ ही अन्य राज्यों में इस संबंध में की जा रही अच्छी गतिविधियों का अवलोकन कर उसका अनुसरण किया जा सकता है। बैठक में आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर, संयुक्त सचिव बी.के. राजपूत एवं अपर संचालक संजय गौड़ उपस्थित थे।

राजस्व कार्यों में बढ़ेगी पारदर्शिता और गति: मंत्री टंक राम वर्मा

राजस्व कार्यों में बढ़ेगी पारदर्शिता और गति: मंत्री टंक राम वर्मा मंत्री टंक राम वर्मा का आश्वासन, राजस्व कार्य होंगे समय पर और पारदर्शी नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन से लेकर एग्रीस्टेक व जिओ-रिफ्रेंसिंग तक, जनता को मिलेगी त्वरित सुविधा: मंत्री टंक राम वर्मा रायपुर नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आज राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक लेकर राजस्व कार्यों की गहन समीक्षा की। बैठक में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, एग्रीस्टेक और जिओ-रिफ्रेंसिंग जैसे सीधे जनता से जुड़े विषयों पर विशेष चर्चा कर कार्याे की प्रगति की जानकारी ली गई। मंत्री वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता को राजस्व सेवाओं के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए सभी कार्य समय-सीमा में और पारदर्शिता के साथ पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे कार्य ग्रामीणों व किसानों की आजीविका से जुड़े हैं, ऐसे में इनकी समय पर पूर्ति सर्वाेच्च प्राथमिकता है। एग्रीस्टेक और जिओ-रिफ्रेंसिंग की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को नवीनतम तकनीक का अधिकतम उपयोग कर डिजिटल समाधान अपनाने के निर्देश दिए। मंत्री वर्मा ने कहा तकनीक से न केवल कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि भ्रष्टाचार और विवादों पर भी अंकुश लगेगा। जनता को पारदर्शी और त्वरित सेवा मिले, यही हमारी प्राथमिकता है। नई तकनीक अपनाने से  भूमि से जुड़े विवादों का भी त्वरित निराकरण संभव हो सकेगा। बैठक में राजस्व विभाग के सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। मंत्री वर्मा ने सभी अधिकारियों को राजस्व कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।उन्होंने अधिकारियों को कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने मंत्री के निर्देशों को अमल में लाने का भरोसा दिलाया।

छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया विधानसभा भवन, प्रधानमंत्री मोदी करेंगे उद्घाटन

रायपुर नवा रायपुर में तैयार हो रहे नए विधानसभा भवन का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकार्पण करेंगे। उन्होंने विधानसभा भवन और नवनिर्मित ब्रह्मकुमारी शांति शिखर के नये भवन के लोकार्पण की स्वीकृति दी है। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। एक नवंबर को राज्योत्सव के दिन विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रस्तावित है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दिल्ली प्रवास के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने प्रदेश के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक नवंबर को नवनिर्मित विधानसभा भवन में प्रवेश करने की जानकारी दी और लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह गौरवशाली क्षण प्रदेश की जनता और सभी विधानसभा सदस्यों के लिए स्मरणीय होगा। उन्हाेंने प्रधानमंत्री से चर्चा के दौरान बताया कि नवा रायपुर में ब्रह्माकुमारी बहनों का नया भवन बनकर तैयार है, जिसके लोकार्पण समारोह में आमंत्रित करना चाहती हैं। डा. रमन सिंह के आग्रह को प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने ओम बिरला से भी मुलाकात की और विधानसभा भवन के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया। छत्तीसगढ़ के नया विधानसभा भवन 52 एकड़ में बनाया जा रहा है। नए भवन के सदन में एक साथ 200 लोगों के बैठने की सुविधा होगी। साथ ही विधानसभा भवन के ऑडिटोरियम में 500 लोगों के क्षमता होगी। नए परिसर में 700 कार पार्किंग की सुविधा होगी। बता दें कि, 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ दिवस के रूप में मानाया जाता है। 1 नवंबर को 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया था। ऐसे में 1 नवंबर 2025 को राज्य के गठन को 25 वर्ष पूरे हो जाएंगे। 15 अगस्त को अपने भाषण के दौराण मुख्यमंत्री ने रजत राजोत्सव वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है। साथ ही 1 एक नवंबर से रायपुर सहित सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

पदोन्नत प्राचार्यों की पदस्थापना प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा विभाग की पारदर्शी पहल: पदोन्नत प्राचार्यों की ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारम्भ पदोन्नत प्राचार्यों की पदस्थापना प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 23 अगस्त तक चलेगी ऑनलाइन काउंसिलिंग, अंतिम दिन अनुपस्थितों को मिलेगा अवसर संचालक लोक शिक्षण की उपस्थिति और मार्गदर्शन में कराया जा रहा काउंसिलिंग ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारंभ : पदोन्नत प्राचार्यों को ऑनलाइन काउंसिलिंग से मिलेगा पदस्थापना स्थल 845 नव पदोन्नत प्राचार्यों के पदांकन हेतु ओपन काउंसिलिंग प्रारंभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज से राजधानी रायपुर स्थित शासकीय शिक्षा महाविद्यालय परिसर, शंकर नगर में पदोन्नत प्राचार्यों के लिए ऑनलाइन ओपन काउंसिलिंग की शुरुआत हो गई है। इस प्रक्रिया में कुल 845 नव पदोन्नत प्राचार्य शामिल होंगे। संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और मार्गदर्शन में काउंसिलिंग 20 अगस्त से 23 अगस्त 2025 तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से आयोजित होगी। प्रत्येक दिन दो पालियों में क्रमशः 150-150 प्राचार्यों को शामिल किया जाएगा। पदोन्नति आदेश एवं रिक्त पदों की सूची पूर्व में ही स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं सुगम हो। सरकार द्वारा तय नियमावली एवं वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिकता निर्धारित की जाएगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, इसके बाद महिला और फिर पुरुष अभ्यर्थियों को वरिष्ठता क्रम से संस्था चयन का अवसर मिलेगा। एक वर्ष से कम अवधि में सेवानिवृत्त होने वाले प्राचार्यों को भी प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। काउंसिलिंग हेतु वेटिंग हॉल और काउंसिलिंग कक्ष निर्धारित कर दिए गए हैं, जहाँ केवल अभ्यर्थियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। सभी पदोन्नत प्राचार्यों को अपने सेवा प्रमाण पत्र और मान्य फोटोयुक्त पहचान पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे। काउंसिलिंग में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम दिन 23 अगस्त को अवसर दिया जाएगा। काउंसिलिंग पूर्ण होने के पश्चात् शासन द्वारा पदस्थापना आदेश जारी किए जाएंगे तथा सभी को आदेश प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर पदग्रहण करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन की सरकार ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और सरलता लाने का संकल्प लिया है। इस पहल से अब प्राचार्यों की पदस्थापना की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है। पहले से ही रिक्त पदों का स्थान सार्वजनिक कर दिया गया है, जिससे सभी को अपने अधिकार और विकल्प स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सके।

सरकारी चरागाह भूमि पर आवंटन पर रोक, हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर लीज की मांग को लेकर याचिका दायर की थी, जिसे आज हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि संबंधित भूमि सरकारी भूमि है और इसे चरागाह के रूप में आरक्षित किया गया है. राजस्व प्राधिकारियों ने तथ्यात्मक आधार पर सही निर्णय लिया है और हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है. क्या है मामला बेमेतरा जिले के ग्राम धानगांव निवासी बनवाली दास ने 0.94 हेक्टेयर भूमि पर खेती करने के लिए लीज देने की मांग की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि वह वर्ष 1998 से उक्त भूमि पर काबिज है और उसके पास खेती के लिए कोई अन्य जमीन नहीं है. इसी आधार पर उसने कलेक्टर बेमेतरा को आवेदन दिया था. प्रशासनिक स्तर पर खारिज कलेक्टर ने 2014 में यह आवेदन खारिज कर दिया. इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपील आयुक्त दुर्ग और पुनरीक्षण राजस्व मंडल रायपुर के पास भी अपील दायर की, लेकिन दोनों ही स्तर पर उसकी मांग अस्वीकार कर दी गई. हाईकोर्ट का फैसला इन आदेशों को चुनौती देते हुए याचिका हाईकोर्ट में लगाई गई थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि संबंधित भूमि सरकारी भूमि है और इसे चरागाह (गाय-भैंस चराई) के लिए आरक्षित किया गया है. इस आधार पर कोर्ट ने राजस्व प्राधिकारियों के आदेश को सही ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.

जंगली हाथियों के हमले में ग्रामीण घायल, फसल और संपत्ति को भारी नुकसान

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर मनेंद्रगढ़ वन मंडल के ग्राम पंचायत कछौड़ में हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। करीब 12 हाथियों का झुंड, जिसमें दो शावक भी शामिल हैं, गांव में विचरण कर रहा है। हाथियों के हमले में एक ग्रामीण युवक की मौत हो गई। वहीं गांव के तीन घरों को भी क्षतिग्रस्त किया और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार, हाथियों का यह दल वर्तमान में बिहारपुर वन परिक्षेत्र में विचरण कर रहा है। वन विभाग लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए है और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है। ग्रामीणों को वन विभाग द्वारा जंगल की ओर न जाने और सतर्क रहने की अपील की गई है। घटना से प्रभावित परिवारों को प्राथमिक स्तर पर सहायता पहुंचाने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। यह पूरा मामला मनेंद्रगढ़ वन मंडल का है, जहां हाथियों के दल के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

बघेल ने उठाए सवाल: सरकार ने कैसे बनाई 14 मंत्रियों वाली नई टीम?

रायपुर मुख्यमंत्री साय के मंत्रिमंडल का विस्तार आखिरकार हो गया है, लेकिन 14 मंत्रियों की नियुक्ति ने राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे कानून के उल्लंघन का मामला बताया है और सवाल उठाया है कि क्या सरकार को इतनी बड़ी मंत्रिपरिषद बनाने की अनुमति मिली थी। इसको लेकर भूपेश बघेल ने सीएम साय से जवाब भी मांगा है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने साय सरकार में 14 मंत्रियों की संख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2003 में बने कानून के मुताबिक विधानसभा सदस्यों की संख्या में 15% तक ही मंत्री बन सकते हैं। जब 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तो मैंने भारत सरकार को पत्र लिखा था। छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20% तक करने की मांग की गई थी। इसके पीछे छत्तीसगढ़ का भौगोलिक रूप से बड़ा होना और विधानसभा परिषद न होने का तर्क दिया था। लेकिन पत्र का कोई जवाब नहीं आया और न ही अनुमति मिली। ऐसे में अब सवाल उठ रहा साय सरकार को अनुमति कब मिली ? बिना अनुमति अगर 14 मंत्री बनाए गए तो यह अवैधानिक है। मुख्यमंत्री साय को इसका जवाब देना चाहिए। हरियाणा की तर्ज पर हुआ मंत्रिमंडल का विस्तार हरियाणा में भी 90 विधायक हैं। हरियाणा में बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं। इस लिहाज से हरियाणा के फॉर्मूले को छत्तीसगढ़ में भी लागू करते हुए 3 और मंत्री बनाए गए हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से 13 मंत्री ही बनते आ रहे थे। नियमों के तहत विधायकों की संख्या के आधार पर 15 प्रतिशत ही मंत्री बन सकते हैं, इसलिए 90 विधायकों में 13.5 मंत्री के तहत मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री बनाए गए हैं। बता दें कि आज राज्यपाल रमेन डेका ने सुबह 10:30 बजे राजभवन में गजेन्द्र यादव, राजेश अग्रवाल एवं गुरू खुशवंत साहेब को मंत्री पद की शपथ दिलाई। गजेंद्र यादव को स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग सौंपा गया है। गुरु खुशवंत साहेब को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राजेश अग्रवाल को पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग सौंपा गया है।

गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे।  विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।

दंतेवाड़ा में 21 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 25.5 लाख का इनाम घोषित 13 शामिल

दंतेवाड़ा बस्तर में नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है. लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर दंतेवाड़ा में 21 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. 21 में से 13 नक्सलियों पर कुल 25 लाख 50 हजार का इनाम घोषित था. सभी आत्मसर्पित माओवादी अपने-अपने क्षेत्र में नक्सली बंद सप्ताह के दौरान रोड खोदना, पेड़ काटना, नक्सली बैनर, पोस्टर एवं पाम्प्लेट लगाने जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं.