samacharsecretary.com

3 एकड़ में धान की खेती, पीएम किसान निधि से दशरथ राठौर को मिली आर्थिक मजबूती

पीएम किसान सम्मान निधि से खेती को मिला सहारा, किसान दशरथ राठौर हुए आत्मनिर्भर तीन एकड़ में धान की खेती कर रहे किसान को कृषि कार्यों की जरूरतें पूरी करने में मिल रही आर्थिक मदद रायपुर  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए खेती-किसानी की आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक संबल का माध्यम बन रही है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत आन्दुल निवासी किसान दशरथ राठौर भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपनी खेती को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। दशरथ राठौर लगभग 3 एकड़ भूमि में धान की खेती करते हैं। खेती से होने वाली आय के साथ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से उन्हें कृषि कार्यों से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है। दशरथ राठौर बताते हैं कि खेती के दौरान बीज, खाद, कृषि सामग्री सहित अन्य आवश्यकताओं के लिए समय-समय पर धनराशि की जरूरत होती है। ऐसे समय में पीएम किसान सम्मान निधि से मिलने वाली राशि उनके लिए उपयोगी साबित होती है। इससे खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है और कृषि कार्यों को बिना रुकावट जारी रखने में सहूलियत होती है। उन्होंने बताया कि योजना से मिलने वाली सहायता भले ही खेती की कुल लागत का एक हिस्सा है, लेकिन जरूरत के समय यह राशि उनके लिए काफी उपयोगी होती है। इससे उन्हें कृषि कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने में आर्थिक सहयोग मिलता है और खेती को बेहतर ढंग से जारी रखने का भरोसा भी मिलता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिले आर्थिक सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए दशरथ राठौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को निरंतर आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर रही है।

महानदी के बढ़े जलस्तर से जांजगीर-चांपा में अलर्ट, कलेक्टर-SP ने किया निरीक्षण

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार महानदी के बढ़ते जलस्तर और जांजगीर-चांपा जिले के तटीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे एवं पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने शिवरीनारायण पहुंचकर बैराज, पुल और महानदी के तटीय क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने नदी के जलस्तर एवं बहाव की स्थिति के साथ सुरक्षा, राहत और बचाव की तैयारियों का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कलेक्टर-एसपी ने शिवरीनारायण बैराज और पुल के साथ तटीय क्षेत्रों तथा महंत लालदास महाविद्यालय में बनाए गए राहत शिविर का निरीक्षण किया। राहत शिविर में प्रभावित लोगों के ठहरने के साथ भोजन, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और शौचालय सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। अधिकारियों को प्रभावित नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। महानदी पुल पर आवागमन बंद, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई महानदी के पुल पर पानी का बहाव बढ़ने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से आवागमन बंद कर दिया गया है। कलेक्टर-एसपी ने पुल और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा लोगों को तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से रोकने के निर्देश दिए हैं। नदी के जलस्तर एवं बहाव को देखते हुए अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें सक्रिय, नियमित स्वास्थ्य जांच प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं और नागरिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जलभराव के कारण होने वाली संभावित बीमारियों और संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। कलेक्टर-एसपी ने राजस्व, पुलिस, नगर सेना, जल संसाधन और स्वास्थ्य सहित संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। तटीय एवं जलभराव संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य शुरू करने आवश्यक मानव संसाधन एवं अन्य संसाधनों को तैयार रखा गया है। तटीय क्षेत्रों में मुनादी, लोगों को सतर्क रहने की समझाइश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। तटीय और पूर्व में जलभराव से प्रभावित आबादी वाले क्षेत्रों में मुनादी के माध्यम से नागरिकों को संभावित जलभराव तथा सुरक्षा संबंधी सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। नदी के जलस्तर, पुल-पुलियों और आवागमन वाले मार्गों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि स्थिति में बदलाव होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें। कलेक्टर-एसपी ने नागरिकों से नदी, पुल, घाट और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि तेज बहाव वाले पानी के पास सेल्फी या वीडियो बनाने का जोखिम न उठाएं तथा प्रशासन द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से बंद किए गए मार्गों और स्थानों पर जाने का प्रयास न करें। किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय पर राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके। जिला प्रशासन द्वारा महानदी के तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा, राहत और आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। राहत शिविर में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्वास्थ्य जांच में जुटी हैं, वहीं पुलिस, राजस्व, नगर सेना और जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं। निरीक्षण के दौरान नगर पालिका शिवरीनारायण के अध्यक्ष राहुल थवाईत, एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान, एसडीएम शिवरीनारायण सुभावना साहू, कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

बाढ़ में प्रशासन और टीमवर्क की मिसाल, राहत-बचाव अभियान से लोगों को मिली सुरक्षा

बाढ़ आपदा के बीच जिला प्रशासन की तत्परता और टीमवर्क से सुरक्षित किया गया रेस्क्यू अभियान राहत शिविरों में सेवा एवं समपर्ण से किए जा रहे कार्य     रायपुर  धमतरी जिले में लगातार हो रही बारिश और जलभराव के बीच जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों के समन्वित प्रयासों से संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का सिलसिला लगातार जारी है।     कुरुद क्षेत्र के लोमश ऋषि आश्रम में बाढ़ के पानी के बीच फंसे 9 लोगों को पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन एवं पुलिस की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय लोगों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी 9 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर राहत दल, पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। सलोनी राहत शिविर में बेहतर व्यवस्थाएं, राजस्व अमले ने सेवा और समर्पण से किया कार्य     सलोनी स्थित बाढ़ राहत शिविर में साफ-सफाई, स्वच्छता एवं भोजन व्यवस्था संतोषजनक और व्यवस्थित रही। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरंतर जायजा ले रहे हैं। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों के लिए सुबह नाश्ते के साथ नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। शिविर परिसर में स्वच्छता एवं हाईजीन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

युवा नवाचार और उद्यमिता की ओर बढ़ें, राज्यपाल रमेन डेका ने दिया संदेश

विचारों को उद्यम में बदलने का साहस रखें युवा-  रमेन  डेका तीन दिवसीय यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव का शुभारंभ, सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण किया राज्यपाल ने रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि युवाओ को सिर्फ नौकरी पाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि  अपने विचारों को उद्यम में बदलने का साहस भी रखना चाहिए। एक अच्छा विचार, सही मार्गदर्शन और उपयुक्त तकनीक के साथ आगे बढ़े तो वही नवाचार सफल स्टार्टअप का रूप ले सकता है और आगे चलकर अनेक लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बन सकता है। राज्यपाल डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर रायपुर में छत्तीसगढ़ के युवाओं में नवाचार, उद्यमिता विकास और प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय ‘यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026’ के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर उन्होंने  विश्वविद्यालय में स्थापित  सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल ने कहा कि हर क्षेत्र में नवाचार की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में कृषि के क्षेत्र में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। देश की बढ़ती आबादी की खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ नई तकनीकों और नए प्रयोगों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य के लिए आवश्यक मूलभूत खाद्य पदार्थों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है। जब हमारी खाद्य आवश्यकताएं सुरक्षित होंगी, तभी हम विकास के अन्य क्षेत्रों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नवाचार की सबसे बड़ी संभावनाएं हमारे अपने संसाधनों में हैं। कृषि, वनोपज, खाद्य प्रसंस्करण, मिलेट, जैविक खेती, पशुपालन और जनजातीय उत्पादों जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार अवसर हैं। कृषि और जैव-प्रौद्योगिकी राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज ऐसे नवाचारों की आवश्यकता है, जो किसानों की लागत कम करें, उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाएं, फसल के नुकसान को कम करें तथा किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य और बाजार उपलब्ध कराने में मदद करें। ऐसे नवाचार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। उन्होंने किचन गार्डन और बाड़ी की अवधारणा को फिर से बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि स्टार्टअप शुरू करने से पहले बाजार का सर्वेक्षण करें और उत्पाद या सेवा की मांग तथा बाजार की संभावनाओं को समझें। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले उसकी स्पष्ट योजना और रोडमैप तैयार करना चाहिए। योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने पर सफलता की संभावनाएं बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के लिए परिश्रम और प्रशिक्षण के साथ बाजार का सर्वेक्षण, प्रबंधन क्षमता और वित्तीय समझ भी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के साथ युवाओं को कौशल प्रदान करना आवश्यक है, ताकि वे अपनी पारिवारिक आय बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास में योगदान दे सकें और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। उन्होंने कहा कि देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और नई शिक्षा नीति में भी कौशल एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है। इस अवसर पर डेका ने युवा नवाचारी उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन  भी किया। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल, आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर डॉक्टर राजीव प्रकाश, एनआईटी के डायरेक्टर डॉ समीर बाजपेई, नाबार्ड के अधिकारी, सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्यमी और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

संकट की इस घड़ी में हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है सरकार – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बस्तर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के डोंगाघाट पहुंचे और बाढ़ से प्रभावित परिवारों से आत्मीयतापूर्वक मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रभावित लोगों को आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से खड़ी है तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए शासन के प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त प्रत्येक प्रभावित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹10-10 हजार की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे और आकलन तेजी से पूरा कर पात्र परिवारों तक शासन की सहायता शीघ्र पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री  साय ने डोंगाघाट में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावितों से बाढ़ के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों, मकानों एवं घरेलू सामान को हुए नुकसान तथा वर्तमान में उपलब्ध कराई जा रही राहत के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न हो। भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री प्रभावित लोगों तक समय पर पहुंचाई जाए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं तथा जरूरतमंद लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए राहत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इंद्रावती के जलस्तर और प्रभावित इलाकों का किया अवलोकन मुख्यमंत्री  साय ने इंद्रावती पुल पहुंचकर नदी के जलस्तर तथा आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से जिले में बारिश एवं बाढ़ की स्थिति, प्रभावित गांवों और शहरी क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित परिवारों के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलस्तर में बदलाव और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए। निचले एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी आपात स्थिति में सहायता पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह तैयार रहनी चाहिए। बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। जलस्रोतों की सफाई एवं आवश्यक उपचार के साथ जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रखा जाए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविर लगाने, दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता रखने और बीमारी के किसी भी संभावित प्रकोप पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कार्य केवल बाढ़ का पानी उतरने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन को सामान्य बनाने तक आवश्यक व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से जारी रहें। मकान, फसल और पशुधन की क्षति का शीघ्र हो आकलन मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों को बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों, पशुधन और अन्य संपत्तियों का संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ सर्वे करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का वास्तविक आकलन कर संबंधित परिवारों को शासन के प्रावधानों के अनुसार सहायता शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। कोई भी पात्र प्रभावित परिवार सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत शिविरों और प्रभावित बस्तियों में नियमित रूप से पहुंचकर लोगों की जरूरतों की जानकारी लेने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि राहत कार्यों में मानवीय संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक आवश्यक मदद समय पर पहुंचे। हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है सरकार : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ी है। प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत और उनके जीवन को जल्द से जल्द सामान्य बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं। प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं के अनुरूप भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुरूप त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। इस अवसर पर महापौर  संजय पाण्डेय, नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन,   कमलचंद्र भंजदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा कमिश्नर बस्तर  डोमन सिंह, आईजी  बी.एन. मीणा, कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि, Singapore-India Growth Forum 2026 में CM साय करेंगे प्रतिनिधित्व

रायपुर. विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर दौरे पर रहेंगे। जहां वे छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री 5 अक्टूबर को होने वाले सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में शामिल होंगे। यह फोरम सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) की ओर से आयोजित किया जा रहा है और इसका यह पहला संस्करण है। फोरम में सिंगापुर और भारत के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उद्योग जगत के प्रमुख, निवेशक और उद्यमी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारी के अवसरों को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में विभिन्न भारतीय राज्यों की आर्थिक प्राथमिकताओं और निवेश अवसरों को भी सामने रखा जाएगा। एमएसएमई और स्टार्टअप की संभावनाएं रखेंगे मुख्यमंत्री साय फोरम में छत्तीसगढ़ में एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर राज्य का पक्ष रखेंगे। इसके जरिए राज्य की उपलब्धियों और कारोबारी अवसरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर के स्किल सेंटर, मंडई वाइल्डलाइफ रिजर्व और गार्डन्स बाय द बे के साथ भी बैठकें करेगा। इन बैठकों में कौशल विकास, वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर यात्रा छत्तीसगढ़ को वैश्विक साझेदारों से जोड़ने और राज्य के विकास के लिए नए सहयोग के अवसर तलाशने का माध्यम बनेगी। ये अधिकारी भी रहेंगे प्रतिनिधिमंडल में मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार और मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) उमेश अग्रवाल शामिल रहेंगे।

पर्यटन के क्षेत्र में GPM की बड़ी उपलब्धि, ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ से सम्मानित

विश्व पर्यटन दिवस पर जीपीएम जिले को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ पुरातात्विक धरोहर धनपुर पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन जिले की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को मिली नई पहचान रायपुर  गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने तथा यहां की समृद्ध प्राकृतिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के उल्लेखनीय प्रयासों के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा जीपीएम जिले को ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। राजधानी रायपुर में 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं ‘छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन’ (सीजीटीटीए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केटप्लेस’ के दौरान जिले को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर जिले की महत्वपूर्ण पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर ‘धनपुर’ पर आधारित आकर्षक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया। कॉफी टेबल बुक का विमोचन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे, कलेक्टर जीपीएम श्री विजय दयाराम के. तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे द्वारा किया गया। धनपुर की पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को समर्पित इस कॉफी टेबल बुक में क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व, पुरातात्विक धरोहर और पर्यटन संभावनाओं को आकर्षक एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह पहल धनपुर को प्रदेश और देश के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ ही जीपीएम जिले की अन्य पर्यटन एवं सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति पर्यटकों की रुचि बढ़ाने में भी सहायक होगी। उल्लेखनीय है कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी समृद्ध है। जिले में पर्यटन स्थलों की पहचान, संरक्षण, प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन की संभावनाओं के विकास के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ जिले के इन्हीं प्रयासों को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। यह सम्मान जीपीएम को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

कुनकुरी को बड़ी सौगात, सूर्य नमस्कार चौक और सामुदायिक भवन के लिए ₹1.01 करोड़ स्वीकृत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर अमल, कुनकुरी में 1.01 करोड़ रुपये के दो विकास कार्यों को मिली स्वीकृति सूर्य नमस्कार चौक के लिए 76.81 लाख और सामुदायिक भवन के लिए 24.83 लाख रुपये स्वीकृत कुनकुरी में अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को मिलेगी गति, नगरवासियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा के अनुरूप जशपुर जिले के कुनकुरी नगर में दो महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 1 लाख 64 हजार रुपये की अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें सूर्य नमस्कार चौक और सामुदायिक भवन का निर्माण शामिल है। दोनों कार्यों की स्वीकृति मिलने से कुनकुरी में अधोसंरचना विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने ग्राम कलिबा में नवनिर्मित कलिबेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान इन दोनों विकास कार्यों की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अब दोनों कार्यों को अंतिम स्वीकृति मिलने के साथ ही इनके निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 76.81 लाख रुपये से विकसित होगा सूर्य नमस्कार चौक कुनकुरी के वार्ड क्रमांक 06 में हनुमान टेकड़ी के पास सूर्य नमस्कार चौक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 76.81 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। चौक के विकसित होने से नगर को एक आकर्षक और व्यवस्थित सार्वजनिक स्थल मिलेगा। यह नगर की पहचान को नया स्वरूप देने के साथ नागरिकों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा। 24.83 लाख रुपये से बनेगा सामुदायिक भवन वार्ड क्रमांक 06 में हनुमान टेकड़ी के पास ही सामुदायिक भवन का निर्माण भी किया जाएगा। इसके लिए 24.83 लाख रुपये की अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है। सामुदायिक भवन बनने से स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी होने पर नगरवासियों में खुशी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा के अनुरूप दोनों विकास कार्यों को स्वीकृति मिलने पर कुनकुरी नगरवासियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया है। नगरवासियों का कहना है कि इन कार्यों के पूरा होने से स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाएं बढ़ेंगी और कुनकुरी के विकास को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने सुकमा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा, पीड़ित परिवारों से मिलकर जाना हाल

बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ने सुकमा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा, पीड़ित परिवारों से मिलकर जाना हाल राहत शिविर में प्रभावितों को स्वयं भोजन परोसकर मुख्यमंत्री ने बढ़ाया हौसला सुकमा में बाढ़ प्रभावित करीब 300 परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलेंगे 10-10 हजार रुपये अतिरिक्त बाढ़ से हुई क्षति का शीघ्र आकलन कर आरबीसी 6-4 के तहत मुआवजा देने के निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा – प्रत्येक प्रभावित परिवार तक शीघ्र पहुंचे सहायता, राहत और पुनर्वास में नहीं हो कोई कमी रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनका हाल जाना। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बाढ़ से प्रभावित शबरीनगर, श्रीनगर, लाइनपारा सहित विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने राहत एवं स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याएं एवं आवश्यकताएं जानीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है। बाढ़ से जिन परिवारों के मकान, घरेलू सामान अथवा अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, उन्हें नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के साथ राहत और पुनर्वास के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने शबरीनगर में स्थापित राहत एवं स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री राहत शिविर में रह रहे प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे और उन्हें स्वयं भोजन परोसकर आत्मीयता के साथ उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित परिवार के घर भी पहुंचे। उन्होंने परिवार के सदस्यों से बातचीत कर बाढ़ के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों और हुए नुकसान की जानकारी ली तथा उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों की कठिनाइयों को समझते हुए सहायता पहुंचाने में किसी प्रकार का विलंब नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि 23 एवं 24 सितंबर को हुई अतिवृष्टि से सुकमा जिले के अनेक क्षेत्रों में बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति निर्मित हुई थी। प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के साथ स्वास्थ्य शिविर संचालित किए जा रहे हैं। जरूरतमंद परिवारों को तात्कालिक सहायता, सूखा राशन एवं गर्म वस्त्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन और आवश्यक स्वच्छता संबंधी उपाय भी किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कोंटा क्षेत्र में भी बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। पिछले दिनों लगातार बारिश के कारण सबरी नदी में जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के गांवों के साथ कोंटा नगर पालिका के चार वार्डों में पानी भर गया था। कोंटा क्षेत्र में प्रभावितों के 19 राहत केंद्रों में ठहरने, भोजन, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं है। मुख्यमंत्री ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों को देखा और प्रभावित परिवारों से बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ से मकानों, घरेलू सामान तथा अन्य परिसंपत्तियों को हुए नुकसान का प्राथमिकता से आकलन करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पात्र प्रभावितों को आरबीसी 6-4 के प्रावधानों के तहत मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि शीघ्र प्रदान की जाए। करीब 300 परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ के कारण घरों में रखे सामान को नुकसान पहुंचने से प्रभावित परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे करीब 300 प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी। यह राशि आरबीसी 6-4 के तहत पात्रता के अनुसार मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में हर संभव सहयोग दिया जाए। क्षति के आकलन से लेकर सहायता राशि के वितरण तक पूरी प्रक्रिया संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पूरी हो। कोई भी पात्र परिवार सहायता से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत के बाद अब पुनर्वास के कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जाए। जिन परिवारों ने इस आपदा में नुकसान सहा है, उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए शासन की सहायता समय पर उन तक पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार इस कठिन समय में प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे वित्त मंत्री ओपी चौधरी, जाना लोगों का हाल

बाढ़ की मुश्किल घड़ी में अपनों के बीच पहुंचे वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सरिया के राहत शिविर में माताओं-बहनों, बुजुर्गों और बच्चों से मिलकर जाना हाल, कहा—हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है सरकार ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर जानी जरूरतें, अधिकारियों को राहत शिविर में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश रायपुर  महानदी के बढ़ते जलस्तर से रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सरिया अंचल में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति के बीच वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी आज प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचे। चौधरी ने सरिया स्थित कन्या शाला में बनाए गए राहत शिविर पहुंचकर वहाँ ठहरे ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। राहत शिविर में चौधरी ने माताओं-बहनों, बुजुर्गों, बच्चों और युवाओं के बीच बैठकर उनसे सीधे संवाद किया। उन्होंने बाढ़ के कारण उत्पन्न परेशानियों और परिवारों की आवश्यकताओं की जानकारी ली। मुश्किल परिस्थितियों के बीच अपने जनप्रतिनिधि को अपने बीच पाकर प्रभावित ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी बातें साझा कीं। चौधरी ने कहा कि बाढ़ के कारण लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में आना पड़ा है। यह समय प्रभावित परिवारों के लिए कठिन जरूर है, लेकिन वे स्वयं को अकेला न समझें। शासन-प्रशासन उनके साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ा है। प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उन्हें हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने राहत शिविर में भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, दवाइयों, साफ-सफाई सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर में रह रहे किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की परेशानी न हो। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जरूरतों का संवेदनशीलता के साथ ध्यान रखने के निर्देश दिए। चौधरी ने अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और महानदी के जलस्तर की सतत निगरानी रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में प्रशासन पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करे तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करे। उल्लेखनीय है कि महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रायगढ़ जिले के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है और प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तथा राहत शिविरों तक पहुंचाने के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।