samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ नेक्स्ट यूथ कॉन्क्लेव में हुए शामिल, विभिन्न क्षेत्रों की युवा प्रतिभाओं का किया सम्मान

सीधी और सच्ची बात साहस के साथ रखें युवा, नई सोच को दें नई पहचान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ नेक्स्ट यूथ कॉन्क्लेव में हुए शामिल, विभिन्न क्षेत्रों की युवा प्रतिभाओं का किया सम्मान युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और रचनात्मकता से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में आज की जनधारा मीडिया समूह द्वारा आयोजित ‘छत्तीसगढ़ नेक्स्ट यूथ कॉन्क्लेव’ में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर प्रदेश का नाम रोशन करने वाली युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया। उन्होंने आज की जनधारा की 36वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित ‘आज की जनधारा साहित्यिक वार्षिकी-2026’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री साय ने युवाओं से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का युवा प्रतिभाशाली, परिश्रमी और संभावनाओं से भरपूर है। युवाओं की नई सोच, ऊर्जा और रचनात्मकता प्रदेश के भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। युवाओं को अपनी बात सीधी, सच्ची और साहस के साथ रखनी चाहिए तथा अपने विचारों और कार्यों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ युवाओं के सामने अवसरों का नया संसार खुला है। आवश्यकता इस बात की है कि वे अपनी प्रतिभा को पहचानें, बड़े लक्ष्य तय करें और पूरे आत्मविश्वास के साथ उन्हें हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और नए विचारों को साकार करने के लिए व्यापक अवसर मिल रहे हैं। आज भारत का युवा नवाचार, स्टार्टअप, विज्ञान, तकनीक, खेल, कला-संस्कृति सहित हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। छत्तीसगढ़ के युवाओं में भी अपार सामर्थ्य है और वे अपनी प्रतिभा तथा परिश्रम से विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे प्रेरणादायी प्रयासों को सामने लाने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने का सशक्त माध्यम बना है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, पोषण और जनभागीदारी के संदेश का उल्लेख करते हुए ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान की चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनगा पोषण का सहज और स्थानीय स्रोत है। इसे जनभागीदारी से घर-घर तक पहुंचाकर स्वस्थ और सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूत किया जा सकता है। प्रकृति और संस्कृति छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पहचान मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक समृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा प्रदेश प्रकृति की अनुपम देन से समृद्ध है। यहां के वन, पहाड़, जलप्रपात, गांवों का सहज जीवन और विविध लोक परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान देती हैं। उन्होंने मधेश्वर पहाड़ और वहां की शिवलिंग सदृश प्राकृतिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में अनेक ऐसे स्थल हैं, जिनमें पर्यटन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली आत्मा यहां के गांवों, लोकजीवन और संस्कृति में बसती है। सादरी सहित प्रदेश की विभिन्न बोलियां, लोककला, लोकगीत और नागपुरी संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाते हैं। नई पीढ़ी को आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी जड़ों, भाषा-बोली और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े रहना चाहिए। संघर्ष से ही मिलता है आगे बढ़ने का संबल मुख्यमंत्री साय ने अपने जीवन के अनुभव युवाओं के साथ साझा करते हुए कहा कि कम उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था और परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। उन्होंने खेती-बाड़ी करते हुए परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और अपने छोटे भाइयों की शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया। जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें संघर्ष करना और जिम्मेदारियों से पीछे न हटना सिखाया। उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं होतीं, लेकिन कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका सामना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। परिश्रम, धैर्य और संकल्प के साथ किया गया प्रयास व्यक्ति के लिए आगे बढ़ने के नए रास्ते खोलता है। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकार पीयूष मिश्रा ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला एवं संस्कृति की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पंडवानी की महान कलाकार पद्म विभूषण स्वर्गीय श्रीमती तीजन बाई के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्भुत कला के माध्यम से महाभारत के विभिन्न पात्रों को मंच पर जीवंत किया और पंडवानी को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। मिश्रा ने कार्यक्रम में अपने प्रसिद्ध गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ की प्रस्तुति भी दी। मुख्यमंत्री साय ने कॉन्क्लेव में सम्मानित युवा प्रतिभाओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं के विचारों, उपलब्धियों और प्रतिभा को समाज के सामने लाने के साथ उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार कृष्णा दास,मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, आज की जनधारा के प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा उपस्थित सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की सराहना

रायपुर : नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में शांति के साथ खुल रहे विकास और समृद्धि के नए द्वार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में शांति के साथ खुल रहे विकास और समृद्धि के नए द्वार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अंतागढ़ के लामकन्हार में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की सराहना मुख्यमंत्री ने कहा – छत्तीसगढ़ के जनभागीदारी आधारित नवाचारों को मिल रही राष्ट्रीय पहचान मुनगा के पोषण लाभों को जन-जन तक पहुंचाने और हर घर में पौधा लगाने का किया आह्वान ग्राम लामकन्हार में शिक्षा, अधोसंरचना एवं सामुदायिक सुविधाओं के लिए 85 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने विद्यालय परिसर में लगाया अमरूद का पौधा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम लामकन्हार स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी का श्रवण किया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान का उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के अलग-अलग हिस्सों में जनभागीदारी से हो रहे सकारात्मक बदलावों और नवाचारों को ‘मन की बात’ के माध्यम से राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ के प्रयासों का उनके द्वारा लगातार उल्लेख किया जाना प्रदेशवासियों के परिश्रम और सहभागिता का सम्मान है। इससे हमारे स्थानीय प्रयासों को नई पहचान मिलने के साथ ही बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान कुपोषण के विरुद्ध छत्तीसगढ़ की लड़ाई को जनभागीदारी से और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुनगा सहज उपलब्ध होने के साथ पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके पत्ते, फल और फूल भोजन में उपयोग किए जाते हैं तथा इनमें आयरन सहित अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों और विद्यार्थियों से अपने घरों में मुनगा का पौधा लगाने तथा इसके पोषण संबंधी लाभों के प्रति अन्य लोगों को भी जागरूक करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने पोषण से लेकर स्वच्छता, पर्यावरण और ‘वोकल फॉर लोकल’ तक विभिन्न विषयों पर किया संवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी में आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति, जनगणना में नागरिकों की भागीदारी, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर देशवासियों से संवाद किया। प्रधानमंत्री ने सितंबर माह को कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई को समर्पित पोषण माह के रूप में रेखांकित करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में पोषण को लेकर किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। इसी क्रम में उन्होंने छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की चर्चा की। इस अभियान के माध्यम से लोगों को पौष्टिक मुनगा अर्थात मोरिंगा को दैनिक खान-पान का हिस्सा बनाने और इसके पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के नवाचारों की ‘मन की बात’ में लगातार हो रही चर्चा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के जनभागीदारी आधारित प्रयासों और नवाचारों को लगातार स्थान दे रहे हैं। इससे पहले बस्तर पंडुम, बस्तर ओलंपिक, मल्हार में प्राप्त ऐतिहासिक ताम्रपत्र और कोरिया जिले के ‘5 प्रतिशत जल संचय मॉडल’ जैसे प्रयासों की प्रधानमंत्री द्वारा सराहना की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरिया जिले का ‘5 प्रतिशत जल संचय मॉडल’ स्थानीय आवश्यकता और जनभागीदारी से निकला एक प्रभावी समाधान है। इसके अंतर्गत किसान अपने खेत के पांच प्रतिशत हिस्से में जल संचयन की व्यवस्था करते हैं। इससे आवश्यकता के समय फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है और भूजल स्तर बढ़ाने में भी सहायता मिलती है। ऐसे नवाचार बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी से किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी व्यापक बदलाव का आधार बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ‘मन की बात’ में ऐसे कार्यों को देश के सामने लाकर उनसे जुड़े लोगों का उत्साहवर्धन करते हैं। साथ ही देश के अन्य क्षेत्रों के लोगों को भी अपने गांव, शहर और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे आने की प्रेरणा मिलती है। नक्सलवाद के प्रभाव से निकलकर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा क्षेत्र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर के साथ कांकेर का यह क्षेत्र भी लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के जवानों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय और असुरक्षा का वातावरण था, वहां अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। शांति और सुरक्षा का वातावरण मजबूत होने के साथ दूरस्थ अंचलों में विकास के नए अवसर भी निर्मित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अंचल दशकों तक विकास की मुख्यधारा से अपेक्षाकृत दूर रहा, लेकिन अब सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, संचार, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ को निरंतर सहयोग मिल रहा है। राज्य सरकार भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ क्षेत्र में शांति के साथ समृद्धि और विकास को गति देने में जुटी है। लामकन्हार के विकास के लिए 85 लाख रुपए की सौगात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर ग्राम लामकन्हार में शिक्षा, अधोसंरचना और सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार के लिए कुल 85 लाख रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने लामकन्हार में शीतला मंदिर के पास सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 15 लाख रुपए, प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला भवन निर्माण के लिए 37 लाख रुपए, छोटे पारा में … Read more

संजू देवी की जीत पर गदगद छत्तीसगढ़, डिप्टी CM साव ने कहा- बढ़ाया मान

रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने एशियन गेम्स की कबड्डी गोल्ड मेडलिस्ट संजू देवी से बात कर दी बधाई, कहा आपने छत्तीसगढ़ का बढ़ाया मान संजू देवी ने राज्य सरकार के सहयोग और प्रोत्साहन के लिए जताया आभार रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने जापान में इन दिनों चल रहे एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी से वीडियो कॉल पर बात कर बधाई दी। साव ने बातचीत के दौरान संजू देवी की स्वर्णिम सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए उनसे कहा कि आपने देश के साथ छत्तीसगढ़ को भी गौरवान्वित किया है। आपकी मेहनत, संघर्ष और खेल के प्रति जुनून प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। उप मुख्यमंत्री साव ने संजू देवी को आगे भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश और देश का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश को अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व है। बातचीत के दौरान संजू देवी ने आगे बढ़ने और अपने खेल को निखारने के लिए राज्य शासन तथा खेल विभाग की ओर से मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए  आभार जताया। साव ने कहा कि संजू देवी की यह सफलता उनके समर्पण और लगातार संघर्ष का परिणाम है। खेल के प्रति उनका जुनून प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। खासकर खेलों में आगे बढ़ने का सपना देख रही बेटियों को उनकी उपलब्धि नई प्रेरणा देगी। बिलासपुर के बहतराई खेल अकादमी में प्रशिक्षण ले रही कोरबा की संजू देवी भारतीय कबड्डी टीम की महत्वपूर्ण सदस्य है। भारत की ओर से खेलते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों में तीसरी स्वर्णिम सफलता हासिल की है। उन्होंने कबड्डी विश्वकप और एशियन चौंपियनशिप में भी भारत को विजेता बनाने में उम्दा प्रदर्शन किया था।

छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा’ अभियान का किया उल्लेख

रायपुर : मुनगे से पोषण की बेहतरीन पहल: ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा’ अभियान का किया उल्लेख पोषक तत्वों से भरपूर मुनगा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण प्रदेशभर में अब तक कुल 10 लाख 29 हजार 831 मुनगा के पौधे का वितरण स्थानीय स्तर पर सहज उपलब्ध संसाधनों और जनभागीदारी को जोड़ने वाली पहल की प्रशंसा रायपुर कुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय पहल अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने पोषण की चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और जनभागीदारी को जोड़ने वाली इस पहल की सराहना की। छत्तीसगढ़ में सितंबर माह को पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य मुनगा के पौधे को घर-घर पहुंचाने के साथ उसके पोषण संबंधी लाभों के प्रति परिवारों को जागरूक करना है। मुनगा या सहजन छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर सहज उपलब्ध है। पोषक तत्वों से भरपूर मुनगा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन ए, सी, कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व के साथ ही औषधीय गुणों से युक्त है। मुनगा को अपने भोजन में पौष्टिक आहार के रूप में शामिल करने की पहल बेहतरीन है। मुनगे के पेड़ को पेड़ तेजी से बढ़ता है और अपेक्षाकृत कम देखभाल की जरूरत होती है। मुनगा पोषण, औषधीय गुणों एवं हरियाली के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पौधा माना गया है। स्थानीय भोजन और पोषण से जोड़ते हुए राज्य सरकार ने इसे कुपोषण के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनाया है। खासतौर पर महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण के लिए ध्यान केंद्रित कर ’हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान चलाया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों को इस अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है, जहां पोषण जागरूकता के साथ परिवारों को मुनगा के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ’हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के तहत प्रदेशभर में विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों एवं जनमानस के घरों के लिए व्यापक तौर पर मुनगे के पौधे का वितरण किया गया है, जिसके अंतर्गत प्रदेशभर में अब तक कुल 10 लाख 29 हजार 831 मुनगा के पौधें का वितरण का किया गया है। जिलों में क्रमशः बस्तर जिले में 25,244, कांकेर जिले में 43,071, दंतेवाड़ा में 7,056, नारायणपुर में 21,224, बीजापुर में 15699, सुकमा में 4,835, कोंडागांव में 31983, सरगुजा में 43754, कोरिया में 19022, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 11939, सूरजपुर में 64599, बलरामपुर में 27107, जशपुर जिले में 1,62271 पौधे लगाएं गए है। इसी प्रकार रायपुर जिले में 23948, महासमुंद में 6420, धमतरी में 48833, बलौदाबाजार में 28398, गरियाबंद में 10527, दुर्ग में 42474 राजनांदगांव जिले में 3480, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 21991, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 39222, कबीरधाम में 75776, बेमेतरा में 19575, बालोद में 50933, बिलासपुर में 14965, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 43007, जांजगीर-चांपा में 57653, सक्ती में 6425, कोरबा में 1,01,002, रायगढ़  में 41,776, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 9,824, मुंगेली जिले में 6,518 पौधे लगाएं गए है। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी महंगे या बाहरी संसाधन के बजाय स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध पौधे को पोषण अभियान का माध्यम बनाया गया है। यानी घर के आंगन में लगा एक पौधा परिवार के भोजन में पोषण बढ़ाने के साथ कुपोषण के खिलाफ जागरूकता का भी जरिया बने। ‘हर घर मुनगा’ को केवल पौधरोपण अभियान के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए पौधरोपण, पोषण जागरूकता, आंगनबाड़ी सेवाओं और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

अशोक सिंघल ने समाज को जोड़ा, राम मंदिर निर्माण में अहम योगदान: CM साय

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए समाज को एकजुट करने में अशोक सिंघल जी का योगदान अविस्मरणीय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित निरंजन धर्मशाला में अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अशोक सिंघल जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का स्मरण करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का संपूर्ण जीवन समाज को संगठित करने, सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित रहा। वे कुशल संगठनकर्ता थे और समाज की सामूहिक शक्ति पर उनका अटूट विश्वास था। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने तथा भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के प्रति चेतना जागृत करने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की आकांक्षा को व्यापक जनभावना से जोड़ने और इसके लिए समाज को एकजुट करने में श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे अनेक पीढ़ियों का संघर्ष, तप, त्याग और समर्पण जुड़ा हुआ है। श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का योगदान भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल्यों के प्रति समाज में जागरूकता और स्वाभिमान का भाव सुदृढ़ करने के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। प्रभु श्रीराम और छत्तीसगढ़ का संबंध अत्यंत आत्मीय : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का संबंध केवल आस्था का नहीं, बल्कि अत्यंत गहरा और आत्मीय है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की भूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। वनवास काल में प्रभु श्रीराम ने लंबा समय छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर व्यतीत किया। माता शबरी की अनन्य भक्ति से जुड़ी शिवरीनारायण की धरती सहित प्रदेश के अनेक स्थान आज भी रामायणकालीन स्मृतियों और जनआस्था को संजोए हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसी आत्मीय संबंध के कारण अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा का अवसर छत्तीसगढ़ के लिए भी विशेष भावनात्मक महत्व रखता था। उस समय पूरे प्रदेश में उत्सव और उल्लास का वातावरण था। छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक सुगंधित चावल अयोध्या भेजकर प्रदेशवासियों ने अपनी श्रद्धा अर्पित की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेशवासियों की इसी आस्था को ध्यान में रखते हुए रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम जाकर प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिल रहा है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से रामलला के दर्शन कर चुके हैं और यह क्रम निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का जन्म शताब्दी वर्ष उनके विराट व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को उनके जीवन से परिचित कराने का महत्वपूर्ण अवसर है। उनके जीवन से यह प्रेरणा मिलती है कि दृढ़ संकल्प, संगठन और समाज के प्रति समर्पण के माध्यम से व्यापक परिवर्तन की दिशा में कार्य किया जा सकता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष के तीन दिवसीय समारोह का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की धरती से होना प्रदेशवासियों के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित संतों को नमन करते हुए कहा कि संतों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन सदैव समाज को सही दिशा प्रदान करता है। इस अवसर पर संत परमात्मानंद जी महाराज, संत युधिष्ठिर लाल जी, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा,  अम्बरीश , टोपलाल वर्मा, राजाराम, कुलवंत सिंह सैनी सहित संतगण,  देश-विदेश से आए पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

महतारी वंदन योजना से लक्ष्मी मांझी की जिंदगी में आया बदलाव, सिलाई मशीन ने खोली आत्मनिर्भरता की राह

रायपुर महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई राह खोल रही है। योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ स्वरोजगार की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत गोरखपुर के आवास मोहल्ला निवासी लक्ष्मी मांझी की कहानी भी इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है। लक्ष्मी मांझी बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें लगातार आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना की 31वीं किस्त की राशि भी उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई है। इस आर्थिक सहायता ने उनके लिए न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान बनाया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर भी दिया। सिलाई मशीन खरीदकर शुरू किया स्वरोजगार लक्ष्मी मांझी ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को बचाकर सिलाई मशीन खरीदने का निर्णय लिया। सिलाई मशीन मिलने के बाद उन्होंने घर से ही सिलाई का काम शुरू कर दिया। अब वे आसपास की महिलाओं और परिवार के लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आय अर्जित कर रही हैं। पहले जहां अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता रहती थी, वहीं अब सिलाई के काम से होने वाली आमदनी के माध्यम से लक्ष्मी मांझी परिवार की आर्थिक व्यवस्था में स्वयं योगदान दे रही हैं। घर से ही काम करने की सुविधा के कारण वे घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए स्वरोजगार भी कर पा रही हैं। बच्चों की पढ़ाई में भी कर रहीं सहयोग लक्ष्मी मांझी बताती हैं कि सिलाई से होने वाली आय और महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि का उपयोग वे परिवार की आवश्यकताओं के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी कर रही हैं। बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर पाना उनके लिए संतोष और आत्मविश्वास का विषय है। वे कहती हैं कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत हुई है। इसी सहायता को बचाकर उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और आज यही मशीन उनके लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन गई है। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से घरेलू जीवन भी हुआ आसान लक्ष्मी मांझी को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन का लाभ भी प्राप्त हुआ है। इससे खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली है और घरेलू कार्य पहले की तुलना में अधिक आसान हुए हैं। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने से उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। सरकारी योजनाओं का लाभ बन रहा आत्मनिर्भरता का आधार लक्ष्मी मांझी का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है, तो उसका असर केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों को आगे बढ़ने और अपने लिए नए अवसर तैयार करने का रास्ता भी मिलता है। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग उन्होंने अपनी जरूरतों के साथ-साथ स्वरोजगार शुरू करने में किया, जिससे अब वे स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। लक्ष्मी मांझी ने महतारी वंदन योजना सहित शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं से मिली सहायता ने उनके परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। लक्ष्मी मांझी की यह कहानी इस बात की मिसाल है कि यदि आर्थिक सहायता का सही उपयोग किया जाए तो सरकारी योजनाएं परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकती हैं।

सेवा की कहानी: अमृत सरोवर बना महिलाओं की आजीविका का आधार, मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

रायपुर  गांव में बना अमृत सरोवर अब जल संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का जरिया भी बन रहा है। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत बिरीमकेला के ज्योति स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अमृत सरोवर में मछली पालन शुरू कर आय की नई राह बनाई है। पहले किसी आयमूलक गतिविधि से नहीं जुड़ी इन महिलाओं को सरोवर के रूप में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधन मिला तो उन्होंने सामूहिक प्रयास से इसे अपनी आजीविका का माध्यम बना लिया। पहली बार मछलियों की बिक्री से हुई आमदनी ने समूह का हौसला बढ़ाया है और अब महिलाओं ने दोबारा मछली पालन शुरू कर दिया है। पहली बिक्री से मिली आमदनी ने बढ़ाया महिलाओं का हौसला ज्योति स्व-सहायता समूह की सदस्य रजनी चौहान बताती हैं कि अमृत सरोवर मिलने के बाद समूह ने पहली बार मछली पालन की गतिविधि शुरू की। तैयार हुई मछलियों में से लगभग 15 किलो मछली की बिक्री की गई, जिससे समूह को पहली बार इस गतिविधि से आमदनी हुई। मछली पालन से मिली इस शुरुआती सफलता ने समूह की महिलाओं को इसे आगे भी जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। अब महिलाएं इस गतिविधि को नियमित आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। दोबारा शुरू किया मछली पालन, नियमित आजीविका बनाने की तैयारी रजनी बताती हैं कि समूह ने एक बार फिर अमृत सरोवर में मछलियां डाली हैं। इस बार 10 पैकेट डाले गए हैं। समूह की महिलाएं मिलकर मछली पालन का काम कर रही हैं और आने वाले समय में इससे अपनी आमदनी को और बढ़ाना चाहती हैं। अमृत सरोवर से जुड़ने से पहले समूह के पास ऐसी कोई आयमूलक गतिविधि नहीं थी। अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जल संसाधन का उपयोग करते हुए महिलाएं सामूहिक रूप से मछली पालन कर रही हैं। इससे उन्हें गांव में ही काम और आय का अवसर मिला है। “आजीविका बढ़ाएंगे और अपने पैरों पर खड़े होंगे” रजनी चौहान ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “पहले हम लोग समूह में कुछ नहीं करते थे। अब अमृत सरोवर मिला है, जिसमें मछली पालन कर रहे हैं और हमारी आजीविका बढ़ रही है। आगे भी हम लोग आजीविका बढ़ाएंगे और अपने पैरों पर खड़े होंगे।” उन्होंने समूह की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। जल संरक्षण के साथ आजीविका का भी बना माध्यम सेवा संकल्प अभियान के तहत ज्योति स्व-सहायता समूह की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि गांव में तैयार जल संरचनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं। अमृत सरोवर में मछली पालन से रजनी और उनकी साथी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है। अब उनका प्रयास इस गतिविधि को आगे बढ़ाकर अपनी आमदनी मजबूत करने और अपने पैरों पर खड़े होने का है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में जिले में 96 हजार से अधिक परिवारों को मिला पक्का मकान

रायपुर कभी बारिश में टपकती छत और कमजोर दीवारों के बीच रात गुजारने को मजबूर परिवार आज अपने पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना जशपुर जिले के ऐसे हजारों परिवारों के लिए केवल एक आवास योजना नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सपने को साकार करने और जीवन में स्थायित्व लाने का माध्यम बनी है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में अब तक 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 96 हजार 801 आवास पूर्ण हो चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक भी पक्के आवास और बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री  साय की मंशा के अनुरूप आवास प्लस 2.0 के तहत पूर्व में छूटे परिवारों का सर्वेक्षण कर पात्रतानुसार उन्हें भी योजना से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कच्चे मकान की चिंता खत्म, पक्की छत ने दिया सुरक्षा और सम्मान का भरोसा जशपुर जिले के अनेक परिवारों का जीवन वर्षों तक कच्चे मकानों में अभाव और कठिनाइयों के बीच बीता। कमजोर दीवारें, टूटी-फूटी छत और बरसात के दिनों में घर के भीतर टपकता पानी उनकी रोजमर्रा की परेशानी का हिस्सा था। बारिश के दौरान सामान को भीगने से बचाना और परिवार के लिए सुरक्षित जगह तलाशना बड़ी चुनौती होती थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपना पक्का घर बनाना ऐसे परिवारों के लिए आसान नहीं था। प्रधानमंत्री आवास योजना ने इस स्थिति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पक्की छत मिलने से परिवारों को मौसम की मार से सुरक्षा के साथ अपने घर में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का भरोसा मिला है। आज ये आवास केवल ईंट और सीमेंट से बने मकान नहीं, बल्कि परिवारों के बेहतर भविष्य, सुरक्षा और आत्मसम्मान की मजबूत नींव बन रहे हैं। जशपुर में 1.12 लाख से अधिक आवास स्वीकृत, 96,801 आवास पूर्ण प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में अब तक कुल 1 लाख 12 हजार 948 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 96 हजार 801 आवासों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन पक्के घरों में हजारों परिवार अब अपने बच्चों और परिजनों के साथ सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन स्तर में व्यापक सुधार का प्रयास किया जा रहा है। आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय और एलपीजी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच परिवारों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हो रही है। इस तरह पक्का मकान परिवार की सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और बेहतर जीवन स्तर का भी आधार बन रहा है। पीएम जनमन से पहाड़ी कोरवा परिवारों के जीवन में आया बदलाव जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों तक विकास की बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2023 से 2025 तक जिले में पीएम जनमन के अंतर्गत 2,100 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 1,614 से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। इससे विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को सुरक्षित पक्के आवास का लाभ मिला है। पीएम जनमन के तहत आवास के साथ स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सड़क एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी और स्थायी आजीविका जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल उनके जीवन में स्थायी बदलाव का आधार बन रही है। आवास प्लस 2.0 : छूटे 1.02 लाख से अधिक परिवारों का हुआ सर्वेक्षण पक्के आवास की सुविधा से कोई पात्र परिवार वंचित न रहे, इसके लिए आवास प्लस 2.0 के तहत जिले में पूर्व में छूटे परिवारों का पुनः सर्वेक्षण किया गया है। इसके अंतर्गत 1 लाख 2 हजार 371 परिवारों का सर्वे किया गया है। सर्वेक्षण के बाद निर्धारित पात्रता के आधार पर परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित संबंधित योजनाओं से लाभान्वित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस पहल से उन जरूरतमंद परिवारों के लिए भी पक्के आवास की उम्मीद मजबूत हुई है, जो किसी कारणवश पूर्व में योजना में शामिल नहीं हो पाए थे। इससे जिले में पक्के आवास का दायरा और व्यापक होगा तथा अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक योजना का लाभ पहुंच सकेगा। एक पक्का घर, परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव प्रधानमंत्री आवास योजना से जशपुर में दिखाई दे रहा बदलाव केवल मकानों की बढ़ती संख्या तक सीमित नहीं है। पक्के घर ने हजारों परिवारों को मौसम की चिंता से राहत, बच्चों को बेहतर वातावरण और पूरे परिवार को सुरक्षा तथा सम्मान का अहसास दिया है। पीएम जनमन और आवास प्लस 2.0 जैसी पहलों के माध्यम से इस बदलाव का दायरा दूरस्थ और वंचित परिवारों तक भी लगातार बढ़ रहा है। सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच जशपुर के हजारों पक्के आवास बदलाव की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। कभी जो पक्का घर परिवारों के लिए दूर का सपना था, वही आज उनके सुरक्षित वर्तमान और बेहतर भविष्य का आधार बन चुका है।

374.96 लाख रुपये की लागत से तैयार जल संरचना बनी सिंचाई, निस्तारी और मवेशियों के पेयजल का आधार

रायपुर ग्रामीणों की एक मांग ने आज सरगुजा जिले के सकालो और आसपास के क्षेत्र में जल उपलब्धता की तस्वीर बदल दी है। मवेशियों के लिए पेयजल और निस्तारी की समस्या को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर निर्मित सकालो मुरना बांध अब सिंचाई, निस्तारी और जल संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। बांध से खरीफ की 30 हेक्टेयर और रबी की 15 हेक्टेयर फसल को पानी मिल रहा है। इस तरह कुल 45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को खेती में सहूलियत मिली है। ग्रामीणों की जरूरत बनी बांध निर्माण की पहल का आधार अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो में ग्रामीणों ने मवेशियों के लिए पेयजल संकट और निस्तारी की समस्या को देखते हुए जल संसाधन विभाग से सकालो मुरना में बांध निर्माण की मांग की थी। ग्रामीणों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग ने स्थल का मुआयना किया और बांध निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा। सकालो मुरना बांध निर्माण योजना को 30 जनवरी 2023 को 374.96 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली। इसके बाद निविदा प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू किया गया और 15 जून 2024 को बांध का निर्माण पूर्ण हुआ। पूरी क्षमता से भरा बांध, आसपास के क्षेत्र में बढ़ा जलस्तर वर्तमान में सकालो मुरना बांध पूरी क्षमता से भरा हुआ है। बांध में पर्याप्त जलभराव होने से सकालो मुरना के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी जलस्तर बढ़ा है। इससे निस्तारी और जल संकट की समस्या से राहत मिलने के साथ मवेशियों के लिए भी पेयजल की उपलब्धता बेहतर हुई है। स्थानीय स्तर पर जल संग्रहण की सुविधा विकसित होने से ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है और क्षेत्र में जल संरक्षण को भी मजबूती मिली है। 45 हेक्टेयर खेती को मिला सिंचाई का सहारा बांध का बड़ा लाभ क्षेत्र के किसानों को मिल रहा है। इससे लगभग 30 हेक्टेयर खरीफ और 15 हेक्टेयर रबी फसल के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध हो रहा है। कुल 45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में पानी की सुविधा मिलने से किसानों के लिए खेती करना आसान हुआ है। रबी सीजन में भी पानी की उपलब्धता ने किसानों के लिए खेती की संभावनाओं को मजबूत किया है। सिंचाई का स्थानीय स्रोत उपलब्ध होने से खेती को सहारा मिलने के साथ किसानों की आजीविका को भी संबल मिला है। जल संरक्षण के साथ आवागमन की भी मिली सुविधा सकालो मुरना बांध का लाभ केवल जल संग्रहण और सिंचाई तक सीमित नहीं है। बांध निर्माण के बाद आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में भी सुविधा मिली है। इस प्रकार ग्रामीणों की मांग पर तैयार हुई यह जल संरचना सिंचाई, निस्तारी, मवेशियों के पेयजल और आवागमन जैसी कई जरूरतों को पूरा कर रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सकालो मुरना बांध की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि स्थानीय जरूरत के अनुरूप तैयार जल संरचना किस तरह पूरे क्षेत्र में बदलाव का आधार बन सकती है। जल संसाधन संभाग क्रमांक-01, अम्बिकापुर द्वारा निर्मित यह बांध आज जल संरक्षण के साथ किसानों की खेती और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों को सहारा देने वाली महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बन गया है।

घोटिया और नारायणपाल पहुंचकर देखी बाढ़ की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं होने के दिए निर्देश

रायपुर वन मंत्री  केदार कश्यप ने बस्तर के बाढ़ प्रभावित घोटिया और नारायणपाल क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का मौके पर जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली और अधिकारियों को नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  कश्यप ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर कमी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित लोगों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखते हुए उन्हें समय पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। मंत्री  कश्यप ने जगदलपुर टाउन हॉल में बनाए गए राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और उनकी आवश्यकताओं के संबंध में चर्चा की। उन्होंने शिविर में नाश्ता, भोजन, पेयजल और आवश्यक दवाइयों सहित उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली।  वन मंत्री  कश्यप ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत शिविर में रह रहे परिवारों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित होती रहें और प्रभावित परिवारों की जरूरतों के अनुसार तत्काल सुविधाएं मुहैय्या कराई जाएं। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संकट की इस घड़ी में बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहना और प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अवसर पर जगदलपुर के महापौर  संजय पांडे भी उपस्थित थे।