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रायगढ़ को मिली बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री ने किया एफएसएल लैब का शुभारंभ

अत्याधुनिक प्रयोगशाला के शुरू होने से रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस जांच व्यवस्था को मिलेगी बड़ी मजबूती स्थानीय स्तर पर होगी वैज्ञानिक जांच, अपराध अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट से सशक्त होगी पुलिस विवेचना रायपुर सुशासन तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ के राजामहल के पास क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल लैब) का विधिवत शुभारंभ किया। इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला के शुरू होने से रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस जांच व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी। अब हत्या, दुष्कर्म, आत्महत्या और एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों की वैज्ञानिक जांच के लिए नमूनों को बिलासपुर भेजने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।        मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच प्रणाली से मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आज के समय में अपराधों की जांच केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है। वैज्ञानिक साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच अपराधियों तक पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। रायगढ़ में इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला के शुरू होने से पुलिस को बड़ी सुविधा मिलेगी और अपराध अनुसंधान अधिक प्रभावी होगा।      वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला के शुभारंभ को रायगढ़ जिले के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में कानून व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक संसाधनों से मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ में एफएसएल लैब शुरू होने से अपराध जांच की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। अब स्थानीय स्तर पर ही वैज्ञानिक परीक्षण होने से पुलिस को समय पर जांच रिपोर्ट मिलेगी और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सकेगा।     उल्लेखनीय है कि अब तक पुलिस को ब्लड सैंपल, विसरा, स्लाइड, मादक पदार्थ, केमिकल और अल्कोहल जांच के लिए बिलासपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे जांच प्रक्रिया में समय लगता था और कई मामलों के निराकरण में देरी होती थी। लेकिन रायगढ़ में क्षेत्रीय एफएसएल शुरू होने के बाद अधिकांश परीक्षण स्थानीय स्तर पर ही संभव होंगे। इससे विवेचना की समय-सीमा घटेगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।                    इस अवसर पर लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह, नगर निगम रायगढ़ के महापौर जीवर्धन चौहान, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री साय ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को सौंपी भूमि आबंटन आदेश की प्रति

सुशासन तिहार के दौरान वनांचल क्षेत्र के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई गति रायपुर रायगढ़ जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम गंवरघुटरी अब स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल और राज्य शासन की जनकल्याणकारी सोच के परिणामस्वरूप यहां 100 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक बहुउद्देशीय अस्पताल स्थापित किया जाएगा। इस अस्पताल के निर्माण से धरमजयगढ़ सहित आसपास के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले हजारों ग्रामीणों, विशेष रूप से आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्राम गंवरघुटरी, तहसील धरमजयगढ़ की 2 हेक्टेयर भूमि 30 वर्ष की अस्थायी लीज पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को आबंटित की गई है। इस भूमि पर फाउंडेशन द्वारा गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 100 बिस्तरों का अस्पताल बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शनिवार को प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत रायगढ़ जिले के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बिलासपुर संभाग के जांजगीर-चांपा, कोरबा और रायगढ़ जिलों की समीक्षा बैठक ली। समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को भूमि आबंटन आदेश की प्रति सौंपते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय के साथ प्रदेश के वित्तमंत्री ओपी चौधरी, सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि विशेष तौर पर उपस्थित थे। उल्लखेनीय है कि यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का एक बड़ा केंद्र बनेगा। वर्तमान में धरमजयगढ़ और आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गंभीर बीमारी या विशेष उपचार के लिए रायगढ़, बिलासपुर अथवा अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक दोनों प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल बनने के बाद स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे ग्रामीणों को त्वरित उपचार मिल सकेगा। अस्पताल में सामान्य चिकित्सा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन उपचार, जांच सुविधाएं तथा अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहेगी। इससे वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर मजबूत होगा और ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा।   अस्पताल का संचालन गरीबों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाएगा। शासन द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार भूमि का उपयोग केवल अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों तथा अन्य वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा। शासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भूमि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए तथा समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसका निरीक्षण किया जाता रहे। राज्य शासन के इस फैसले का वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे स्वास्थ्य सुविधाओं की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अस्पताल निर्माण से न केवल बेहतर उपचार सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और अन्य सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।  

नहीं रहे भरत मटियारा, लंबे इलाज के बाद हैदराबाद अस्पताल में हुआ निधन

कांकेर. राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त एवं मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष भरत मटियारा का निधन हैदराबाद में इलाज के दौरान अस्पताल में निधन हो गया. भरत मटियारा के निधन की खराब लगते ही भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं में शोक की लहर छा गई है. जानकारी के अनुसार, दो बार कांकेर भाजपा जिला अध्यक्ष और दूसरी बार मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बने भरत मटियारा को एक महीने पहले अचानक स्वास्थ्य में समस्या आई थी. रायपुर में उपचार के बाद उन्हें उपचार के लिए हैदराबाद ले जाया गया था, जहां निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया. 

अब और तेज होगा पुलिस रिस्पांस, बिलासपुर में 24 नई Dial-112 वाहनों की एंट्री

बिलासपुर. आपातकालीन स्थिति में लोगों तक तेजी से सहायता पहुंचाने वाली डायल 112 सेवा अब बिलासपुर जिले में और अधिक मजबूत होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की पहल पर जिले के पुलिस बेड़े में 24 नए आधुनिक वाहन शामिल किए जाएंगे। इन वाहनों के शामिल होने से जिले में रियल टाइम रिस्पांस सिस्टम पहले से ज्यादा प्रभावी होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के लिए 400 नए आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें से 24 वाहन बिलासपुर पुलिस को सौंपे जाएंगे। पुराने और जर्जर वाहनों से मिलेगी राहत वर्तमान में जिले के 19 थानों में एक-एक डायल 112 वाहन तैनात है। ये वाहन सूचना मिलते ही घटना स्थल के लिए रवाना होते हैं। हालांकि लगातार कई वर्षों तक चौबीसों घंटे इस्तेमाल होने के कारण अधिकांश वाहन जर्जर और कंडम हो चुके थे। इससे पुलिस के रिस्पांस टाइम पर भी असर पड़ रहा था। इसी समस्या को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के लिए 400 नए वाहनों की स्वीकृति दी है। बिलासपुर में पुराने वाहनों की जगह नए आधुनिक वाहन तैनात किए जाएंगे। संवेदनशील इलाकों में रहेंगे अतिरिक्त वाहन बिलासपुर को मिलने वाले 24 वाहनों में से 19 वाहन जिले के सभी थानों में पुराने वाहनों की जगह लगाए जाएंगे। इसके अलावा बचे पांच अतिरिक्त वाहनों को उन क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा, जहां दुर्घटनाओं और अपराध की घटनाएं अधिक होती हैं। इन थाना क्षेत्रों में अतिरिक्त वाहन तैनात किए जाएंगे सरकंडा सिविल लाइन तोरवा कोतवाली सकरी तेजी से मिलेगी मदद पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील और व्यस्त क्षेत्रों में अतिरिक्त वाहन तैनात करने का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में पुलिस की पहुंच का समय (रिस्पांस टाइम) कम करना है। इससे दुर्घटना या किसी अन्य आपदा की स्थिति में पीड़ितों को गोल्डन ऑवर के भीतर त्वरित सहायता मिल सकेगी।

हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, रिक्त पद का बहाना बनाकर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना गलत

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित द्वारा समय पर आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद केवल “रिक्त पद उपलब्ध नहीं है” कहकर नियुक्ति से इंकार करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला “संतोष सिन्हा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक” प्रकरण में पारित किया गया. मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष यह प्रमुख तर्क रखा कि याचिकाकर्ता के पिता बैंक में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे, और उनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी. मृत्यु के मात्र दो माह के भीतर ही याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत कर दिया था, किंतु बैंक ने वर्षों मामला लंबित रख यह कहकर नियुक्ति से इंकार कर दिया कि संबंधित पद उपलब्ध नहीं है. सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अनादि शर्मा ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि याचिकाकर्ता के पिता की सेवा के दौरान मृत्यु होने के तुरंत बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया था तथा याचिकाकर्ता ने निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत कर दिया था. उन्होंने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि बैंक द्वारा मामले को वर्षों तक लंबित रखा गया, जबकि समान परिस्थिति वाले अन्य अभ्यर्थियों के प्रकरणों पर निर्णय लेकर उन्हें नियुक्ति प्रदान कर दी गई. अधिवक्ता ने यह भी प्रस्तुत किया कि बैंक अपनी ही अनुकंपा नियुक्ति नीति के विपरीत कार्य कर रहा है, जबकि नीति में स्पष्ट रूप से ऐसे मामलों को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से विचार करने तथा आश्रित परिवारों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है. उन्होंने यह तर्क भी रखा कि तकनीकी आधारों एवं प्रशासनिक बहानों का सहारा लेकर आश्रित परिवार को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब कर्मचारी की मृत्यु के पश्चात रिक्ति उत्पन्न हो चुकी थी, और आवेदन भी समय पर प्रस्तुत किया गया था. बैंक द्वारा “रिक्त पद उपलब्ध नहीं होने” का तर्क तथ्यों एवं नीति दोनों के विपरीत है, तथा यह संवेदनशील मामलों में संस्थागत उत्तरदायित्व की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता. एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा, “जब कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हुई, उसी क्षण संबंधित पद रिक्त हो गया था. याचिकाकर्ता ने समयसीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत किया था, इसलिए बाद में रिक्ति उपलब्ध नहीं होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता.” न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल राहत प्रदान करना है और ऐसे मामलों में संस्थाओं को संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है. न्यायालय ने बैंक द्वारा जारी आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश दिए. अपने आदेश में हाईकोर्ट ने बैंक द्वारा जारी 30 सितंबर 2022 के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर उपलब्ध किसी भी चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण नज़ीर साबित हो सकता है, जहां संस्थाएं तकनीकी आधारों का सहारा लेकर आश्रित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने से बचती रही हैं.

रायपुर में मौसम का डबल अटैक, अंधड़-बारिश के बाद फिर अलर्ट जारी

रायपुर. राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई इलाकों में शनिवार को आषाढ़ जैसी झमाझम बारिश हुई. तेज अधड़ और गरज-चमक का असर देखने को मिला. कुछ स्थानों पर बड़े पेश धराशाई हो गए, जिससे आवागमन बाधित रहा. इसके कारण वाहनें क्षतिग्रस्त भी हुई. रविवार सुबह तक पेड़ नहीं हटाए गए हैं. छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग को छोड़कर प्रदेश के शेष हिस्से में सोमवार को मौसम साफ होने लगेगा. आसमान अपेक्षाकृत साफ होगा और दिन के तापमान में वृद्धि होगी. वहीं मई के आखिरी सप्ताह तक कुछ इलाकों पर लू चलने की स्थिति बन सकती है. पूर्व-पश्चिम द्रोणिका पश्चिमी मध्य प्रदेश से पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर स्थित चक्रवाती परिसंचरण, दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तरी गांगेय पश्चिम बंगाल होते हुए उत्तरी बांग्लादेश तक बनी द्रोणिका और कुछ अन्य सिस्टमों के कारण पिछले दिनों समुद्र  से बड़ी मात्रा में नमी आई. ज्यादा नमी आने और प्रदेश में दोपहर में पड़ने वाली तेज गर्मी के कारण लोकल सिस्टम बनने से कहीं-कहीं बारिश की स्थितियां बनीं. रविवार तक इन हिस्सों में से कुछ जगहों पर हल्की बारिश और गरज-चमक पड़ सकती है. सोमवार से यहां मौसम साफ होने लगेगा. 20 मई के बाद पूरे प्रदेश में एक बार फिर से तापमान में बढ़ने पर गर्मी महसूस होगी. मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थियां अनुकूल  मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने बताया कि निकोबार द्वीप समूह और उससे लगे अंडमान द्वीप क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर लगातार वर्षा की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं. साथ ही इस क्षेत्र में पश्चिमी हवाएं 35 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से चल रही हैं, जो वातावरण में लगभग 4.5 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित हैं. इसके अलावा, धरती से उत्सर्जित दीर्घ तरंग विकिरण इन इलाकों में 200 वॉट प्रति वर्ग मीटर से कम दर्ज किया गया है. इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल बन गया है. दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चिन्हित निम्न दाब क्षेत्र बना हुआ है. इसके प्रभाव से जुड़ा ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण लगभग 4.5 किलोमीटर ऊंचाई तक फैला हुआ है. दूसरी ओर, एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू और उससे लगे उत्तर पाकिस्तान क्षेत्र के ऊपर सक्रिय है. इसके साथ ही उत्तर-पूर्व विदर्भ और आसपास के क्षेत्रों में भी 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. प्रदेश में रविवार को एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा और गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. अंधड़ और वज्रपात के भी आसार हैं. वहीं अधिकतम तापमान में अब बढ़ोतरी का दौर शुरू हो सकता है. कई इलाकों में बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी है. नारायणपुर, उत्तर बस्तर कांकेर, बालोद, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, में यलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग ने रायपुर में आज 17 मई को आसमान में बादल छाएंगे. बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है. अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.

प्रदेश में चमका गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जनगणना कार्य समय से पहले कर बना नंबर-1

​गौरेला-पेंड्रा-मरवाही. भारत की जनगणना 2027 के अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना के कार्य में जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) ने पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. निर्धारित समय-सीमा (30 मई) से काफी पहले, 16 मई की स्थिति में ही जिले ने शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण कर एक नया कीर्तिमान रचा है. ​इस बड़ी उपलब्धि पर कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. ​उल्लेखनीय है कि जब 8 मई 2026 को कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने कार्यभार ग्रहण किया था, तब जिले में जनगणना की प्रगति मात्र 6 प्रतिशत थी. राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने इसे मिशन मोड पर लिया. उनके निरंतर पर्यवेक्षण और कड़े नीतिगत फैसलों का ही नतीजा था कि महज 8 दिनों के भीतर (11 मई तक) आधे से अधिक ब्लॉक का काम पूरा हो गया और 16 मई को जिला प्रदेश में सबसे पहले 100% लक्ष्य हासिल करने वाला जिला बन गया. ​कलेक्टर ने बताया कि इस सफलता के पीछे जमीनी अमले का कड़ा परिश्रम है. कार्य की प्रगति को गति देने के लिए उन्होंने बीच में ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था, जिससे पूरी टीम का उत्साह दोगुना हो गया. इस पूरे महाअभियान में 513 प्रगणक और 85 पर्यवेक्षक मुस्तैदी से जुटे हुए थे. ​कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने इस सफलता के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी टीम की पीठ थपथपाई है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं. अमित बेक (जिला जनगणना अधिकारी), ​विक्रांत अंचल (अनुविभागीय जनगणना अधिकारी, पेंड्रारोड) ,​देवेंद्र सिरमौर (अनुविभागीय जनगणना अधिकारी, मरवाही), ​चार्ज जनगणना अधिकारी शेषनारायण जायसवाल (पेंड्रारोड ग्रामीण), प्रीति शर्मा (मरवाही ग्रामीण), अविनाश कुजूर (पेंड्रा ग्रामीण), दशोदा अर्मो (सकोला ग्रामीण), नारायण साहू (गौरेला नगरीय) और अमलदीप मिंज (पेंड्रा एवं मरवाही नगरीय) मुख्य रूप से रहे. ​कलेक्टर का कहना है कि यह सफलता निरंतर समीक्षा और हमारी टीम के कठिन परिश्रम का परिणाम है. मैं इस कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग करने के लिए जिले की आम जनता, जनप्रतिनिधियों और मीडिया साथियों का सहृदय आभार व्यक्त करता हूँ कार्य पूरा करने की अवधि 1 से 30 मई थी, जिसे 14 दिन पहले ही 16 मई को पूरा कर लिया गया. 8 मई को जो काम केवल 6% था, वह 100% मुकाम पर पहुँचा. 513 प्रगणकों और 85 पर्यवेक्षकों ने दिन-रात एक कर जिले को प्रदेश में नंबर-1 बनाया. मुख्यमंत्री साय ने दी जिला प्रशासन को बधाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनगणना कार्य में अव्वल रहने पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला प्रशासन को बधाई दी है. उन्होंने कहा, हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और सुशासन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है. आगामी जनगणना 2027 के ये आंकड़े भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्धारण की मजबूत बुनियाद बनेंगे. डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना सराहनीय है. जिन बड़े शहरों या नगर निगमों में गति धीमी है, वहां के अधिकारी मैदानी मॉनिटरिंग बढ़ाएं और जल्द इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को गति दें.

सुनियोजित साजिश के तहत महिला अधिवक्ता की निर्मम हत्या, आरोपी प्रेमी गिरफ्तार

रायगढ़  महिला अधिवक्ता की नग्न लाश मिलने वाली हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने बाइक नंबर और सीसीटीवी फुटेज सूक्ष्मता से खंगाल कर आरोपित विवाहित प्रेमी को धर दबोचा है। आरोपित ने लगातार बन रहे शादी के दबाव के चलते सुनियोजित तरीके से हत्या की वारदात को अंजाम निर्मम तरीके से दे दिया। आज पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस वार्ता में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने पूरे मामले का राजफाश किया है।एसएसपी ने वारदात के संबंध में बताया कि 12 मई को थाना पूंजीपथरा पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम पूंजीपथरा के कटेल टिकरा जंगल अंदर शासकीय जमीन पर एक अज्ञात महिला का शव पड़ा हुआ है।  

बस्तर के खिलाड़ियों को बड़ा मंच, पहली आवासीय खेल अकादमी से बदलेगी तस्वीर

जगदलपुर. बस्तर के युवाओं के लिए खेल के क्षेत्र में एक बड़ा अवसर तैयार हो रहा है. जगदलपुर में पहली बार आवासीय खेल अकादमी शुरू की जा रही है. इसमें एथलेटिक्स, फुटबॉल और आर्चरी को शामिल किया गया है. खेल एवं युवा कल्याण विभाग इस परियोजना को इस वित्तीय वर्ष में शुरू करेगा. संचालक तनुजा सलाम ने तैयारियों का जायजा लेने जगदलपुर का दौरा किया. खिलाड़ियों के रहने, खाने, पढ़ाई और प्रशिक्षण की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई. पंडरीपानी हॉकी सेंटर का निरीक्षण कर खिलाड़ियों से संवाद भी किया गया. 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बालकों के लिए.चयन ट्रायल जल्द शुरू होंगे. कुल 65 खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा. चयनित खिलाड़ियों को मुफ्त प्रशिक्षण, डाइट और आधुनिक उपकरण मिलेंगे. इसके साथ आवास, शिक्षा, इलाज और बीमा जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी. इस पहल से बस्तर की प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकेंगी. खेल के जरिए बस्तर की नई पहचान गढ़ने की तैयारी शुरू हो चुकी है.

अमित शाह के बस्तर आगमन से पहले हाई अलर्ट, विजय शर्मा ने संभाली तैयारियों की कमान

जगदलपुर. बस्तर एक बार फिर देश की सियासत और सुरक्षा रणनीति के केंद्र में है. केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह 18 और 19 मई को अपने दो दिवसीय दौरे पर बस्तर पहुंच रहे हैं. यह उनका 2019 के बाद दसवां दौरा होगा, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इस बार दौरे का फोकस सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि विकास और जनसुविधाओं पर भी रहेगा. आसना स्थित बादल अकादमी और नेतानार में प्रस्तावित कार्यक्रम इसकी झलक देंगे. प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने तैयारियों का जायजा लिया. अधिकारियों के साथ सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है. शाह का हर दौरा बस्तर में एक नई पहल या संदेश लेकर आता रहा है. तर्रेम हमले के बाद संवेदनशील दौरे से लेकर बस्तर दशहरा में शामिल होने तक, उनका जुड़ाव लगातार बढ़ा है. अब नक्सल उन्मूलन अभियान की सफलता के बाद यह दौरा और भी अहम माना जा रहा है. दो दिनों के प्रवास में सुरक्षा समीक्षा बैठक भी प्रस्तावित है. जहां नक्सल मुक्त बस्तर की स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी. बस्तर में यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि विश्वास और बदलाव का संकेत बन चुका है.