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छत्तीसगढ़ में बड़ा हादसा टला! ओवरफ्लो पुल पर बहने लगी बस, पुलिस ने 70 यात्रियों को बचाया

रायपुर. राजधानी रायपुर के पास सारागांव में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कोल्हान नाले के तेज बहाव में जय अंबे की बस फंस गई. रायपुर से बलौदाबाजार जा रही बस में 70 यात्री सवार थे. मार्ग पर पानी के तेज बहाव के कारण सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात थी. बाकी वाहनों की तरह बस को भी आगे जाने से रोका गया, लेकिन चालक ने ब्रेक नहीं लगाया. जानकारी के मुताबिक, विधानसभा थाना क्षेत्र के कोल्हान नाले में पानी के तेज बहाव को देखकर बस में सवार यात्रियों ने चालक को आगे जाने से मना किया. इसके बावजूद वह बस को आगे बढ़ाता गया. आगे से आ रही ट्रकों को रास्ता देने के लिए बस को साइड देना पड़ा. तभी तेज बहाव में बस फंस गई, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया. कुछ  लोगों ने घबराकर खिड़की से बाहर कूदने की तैयारी कर ली थी. स्थिति को संभालते हुए पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने बस के पास पहुंचकर लोगों को बाहर निकाले की प्रक्रिया शुरू की. दाई ओर की खिड़की से यात्रियों को बाहर निकाला गया. रेस्क्यू अभियान में ग्रामीणों ने भी पुलिस की मदद की. सभी 70 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया. पुलिस की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया. पुलिस ने बस चालक को हिरासत में ले लिया है. पूछताछ में चालक से पता लगाया जा रहा  कि चेतावनी के बावजूद उसने बस को आगे क्यों बढ़ाया. साथ ही बस परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस समेत अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई. सीएसपी विधानसभा वीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि शनिवार को कोल्हान नाले में पानी का बहाव बढ़ा हुआ था. मौके पर मौजूद टीम वाहनों को आगे जाने से रोक रही थी. इसके बावजूद यात्री बस आगे बढ़ गई. ट्रकों की आवाजाही के दौरान बस को साइड करना पड़ा, जिसके बाद वह पानी के बहाव में फंस गई. पुलिस ने तत्काल यात्रियों को खिड़कियों के रास्ते बाहर निकाला. सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया और बस को भी बाहर कर लिया गया. चालक को हिरासत में लिया गया है. मामले में जांच जारी है.

छत्तीसगढ़ में बाढ़ का खतरा, शबरी पुल के 6 फीट ऊपर बह रही महानदी; शिवरीनारायण से संपर्क टूटा

जांजगीर-चाम्पा. प्रदेश में बीते तीन दिनों तक हुई लगातार बारिश से तमाम नदियां उफान पर है. नगर के शवरी पुल पर 6 फ़ीट ऊपर पानी बह रहा है, जिसकी वजह से जांजगीर का शिवरीनारायण का सम्पर्क टूट गया है. महानदी के तट तोड़कर बहने से नगर के बिलासपुर रोड और केरा रोड में पानी भर गया है. आलम यह है निचली बस्तियों में पानी भरने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है. वार्ड एक में पानी भरने की वजह से वार्ड के लोगों को संस्कृतिक भवन में रखा गया है. मेला ग्राउंड में भी पानी गया है. पानी के भराव की वजह से लोग नाव में सवार होकर आना-जाना कर रहे है. स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात किया है. इसके साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिए खाने-पीने और रहने के लिए अलग-अलग स्थानों में इंतजाम किया है. देर शाम तक शबरी सेतु के ऊपर ढाई फीट तक पानी बह रहा था जिससे गिधौरी बलौदाबाजार से शिवरीनारायण का सड़क संपर्क पूरी तरह से कटा रहा। सुबह 9 बजे बेरिकेट्स लगाकर पुल पर आना-जाना पूरी तरह से बंद करवा दिया गया था। एहतियात के लिए मोटरबोट और गोताखोरों को पुल के पास ही तैनात किया गया है। लगातार जल स्तर बढ़ने से क्षेत्र के छोटे-बड़े नालों के ऊपर से भी पानी बहने लगा था जिससे चारों दिशाओं से शिवरीनारायण का सड़क संपर्क टूट गया। बिलासपुर से शिवरीनारायण पहुंच मार्ग में मेन रोड़ में देवरी मोड़ के पास नाला से ऊपर पानी बहने से आना-जाना बंद हो गया। केरा से शिवरीनारायण मार्ग में नगारीडीह के पास कंजीनाला, केरा रोड मेंं कनस्दा से पहले पुराने पुल, दुरपा से पहले ललारी पुल भी उफान पर होने से संपर्क कट गया। तुस्मा पुल में पानी बहने से खैरताल से शिवरीनारायण मार्ग का भी संपर्क टूट गया था। हालांकि नगर के किसी बस्ती में पानी नहीं घुसा था। देर रात महानदी का जलस्तर बढ़ते क्रम में था जिससे शिवरीनारायण से लेकर चन्द्रपुर तक नदी तटों में बाढ़ की संभावना बनी हुई है। महानदी नदी के किनारे लगे ग्राम तनौद के नवापारा मोहल्ला पानी से डूब गया जिससे करीब चार दर्जन मवेशी और दो जेसीबी मशीन डूब गई।

प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल

आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल सुपोषित थाली के प्रदर्शन के साथ माताओं और बच्चों के पोषण पर हुआ संवाद रायपुर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए। महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।

BSP कर्मचारियों के बोनस पर NJCS बैठक में होगा मंथन

भिलाई. सेल मैनेजमेंट ने बोनस के मुद्दे पर 1 अक्टूबर को एनजेसीएस कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। हालांकि, 23 मार्च 2023 को सेल मैनेजमेंट ने बोनस के लिए जो फार्मूला तय किया था, उसके हिसाब से गणना करने पर 30,200 रुपए बोनस बनेगा। इसमें मैनेजमेंट चाहे तो कर्मियों के प्रोत्साहन के लिए दो से तीन हजार रुपए की बढ़ोतरी कर सकता है। एनुअल सेल परफार्मेस लीक्ड इंसेंटिव स्कीम (एएसपीएलआईएस) यानी बोनस के लिए सेल मैनेजमेंट ने 1 अक्टूबर को दोपहर 01 बजे से नईदिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में बैठक रखी है। इसमें केवल एनजेसीएस कोर कमेटी के ही सदस्यों को बुलाया गया है। सेल मैनेजमेंट ने 23 मार्च 2023 से बोनस का नया फार्मूला लागू किया। इसके तहत यदि बोनस की गणना की जाए तो यह राउंड फिगर में 30200 रुपए ही बनेगा। दरअसल, जिस फार्मूले के आधार पर बोनस की गणना अब तक की जाती रही है वह फार्मूला पाँच वर्षों के लिए बनाया गया था। यह पाँचवाँ व अंतिम वर्ष है। ऐसे में उस फार्मूले में बदलाव के लिए सेल मैनेजमेंट तैयार नहीं होने वाला है। बल्कि सेल मैनेजमेंट ने फार्मूले के हिसाब से बोनस की गणना कर ली है, वह यूनियन नेताओं को इस राशि की केवल जानकारी देने के लिए ही बुलाया है। यानी यूनियन नेताओं को बोनस के कागजात पर जाकर केवल हस्ताक्षर ही करना है। बोनस पर डिस्कशन करने की स्थिति में यूनियन नेता नहीं रहेंगे। हाँ, यूनियन नेता बेहतर प्रोडक्शन परफार्मेस और लाभ का हवाला देते हुए बोनस को बढ़ाने के लिए केवल अनुरोध कर सकते हैं। वे दबाव बनाने की स्थित में नहीं होंगे। यूनियन नेताओं के अनुरोध पर कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए मैनेजमेंट 30200 रु. में दो-तीन हजार रु. की और बढ़ोतरी कर सकता है। यानी 32200 रु. से लेकर 33200 रु. तक बोनस मिलने की उम्मीद सेल कार्मिक कर सकते हैं।

नगरीय विकास पर सोनमणि बोरा का जोर, बोले- शहर की जरूरत के हिसाब से तैयार हो प्लान

शहर की तासीर के अनुरूप हो विकास की योजना : सोनमणि बोरा नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव ने हुडको द्वारा नई दिल्ली में आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला को किया संबोधित केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव तथा हुडको के अधिकारियों से भी मिले, छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय योजनाओं के प्रभावी अमल व आगामी रणनीति पर की चर्चा रायपुर.  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने नई दिल्ली में हुडको (HUDCO) द्वारा अर्बन चैलेंज फंड (UCF) पर आयोजित क्षमता विकास कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों एवं नगरीय निकायों से कार्यशाला में हिस्सा ले रहे प्रतिभागियों से कहा कि शहरों के दीर्घकालिक विकास के लिए बेहतर नियोजन, क्षमता विकास एवं वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने शहरों की भावी जरुरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर नियोजन, संस्थागत क्षमता विकास एवं उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया। प्रमुख सचिव बोरा ने केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के सचिव सतेंद्र सिंह से नई दिल्ली में भेंट कर राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत मिशन, पीएम स्वनिधि, पीएम ई-बस और अर्बन चैलेंज फंड की प्रगति, उनके प्रभावी क्रियान्वयन तथा आगामी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने इन योजनाओं के लक्ष्यों की प्राप्ति तथा नगरीय निकायों की क्षमताओं को और सुदृढ़ बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। बोरा ने हुडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुलश्रेष्ठ और उनकी टीम के साथ बैठक कर राज्य के नगरीय निकायों के समग्र एवं आवश्यकता आधारित विकास की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में राज्य के नगरीय निकायों की स्थानीय आवश्यकताओं, संभावनाओं एवं विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक विकास योजना तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। औद्योगिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यटन, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले शहरों के लिए उनकी प्रकृति एवं विशिष्टताओं के अनुरूप विकास की रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा की गई, जिससे नगरीय सेवाओं एवं आधारभूत संरचनाओं का विस्तार स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में शहरों की आवश्यकतानुसार फूड पार्क, रेंटल हाउसिंग, पर्यटन संवर्धन, स्लम क्षेत्र के पुनर्विकास, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) सहित अन्य संभावित विकास के पहलुओं को शहरों की विकास योजनाओं में शामिल करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं, उनके क्रियान्वयन अनुभवों तथा चुनौतियों का अध्ययन कर राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त पहलुओं को अपनाने एवं राज्य की नीतियों में आवश्यक प्रावधान किये जाने पर भी चर्चा की गई। बैठक में हुडको के सीएमडी ने परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (PPR) तैयार करने तथा राज्य स्तर पर कार्यशाला आयोजित कर राज्य व नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों का क्षमता विकास करते हुए विशिष्ट परियोजनाओं के चिन्हांकन एवं दस्तावेजीकरण के लिए सहमति प्रदान की। उन्होंने नगरीय परियोजनाओं हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने सहयोग प्रदान करने का भी आश्वासन दिया। बैठक में विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय स्रोतों के बेहतर उपयोग तथा केंद्र एवं राज्य योजनाओं के माध्यम से वित्तीय अभिसरण (Convergence) की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

घर बैठे मिलेगी सरकारी सेवा, छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ ‘आपके द्वार’ अभियान

​विशेष लेख ​"सेवा_संकल्प_अभियान" ​कागजी उलझनों से मुक्ति—छत्तीसगढ़ में सेवा का संकल्प पहुँचा आपके द्वार रायपुर ​छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में वर्षों से किसानों तथा भू-स्वामियों के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा कागजी दफ्तरों के चक्कर काटने और प्रशासनिक उलझनों से जूझने में बीत जाता था। नामांतरण की एक छोटी-सी अर्जी हो, जमीन का सटीक सीमांकन, प्राकृतिक आपदा के समय फसल बीमा का क्लेम हासिल करना हो या फिर कृषि विकास के लिए बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लोन लेना हो—हर छोटे-बड़े काम के लिए तहसील, राजस्व अनुविभागीय अधिकारी और पटवारी कार्यालयों के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते थे। इस पूरी जटिल प्रक्रिया के दौरान बिचौलियों का अनुचित हस्तक्षेप, अतिरिक्त आर्थिक बोझ और पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद की निरंतर बनी रहने वाली चिंता ग्रामीण जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी। ​प्रशासनिक पहल: आधुनिक तकनीक से आई सुशासन की नई क्रांति          ​लेकिन जब प्रदेश प्रशासन ने "सेवा का संकल्प, सेवा पहुँची आपके द्वार" के मूलमंत्र को अपनी कार्यशैली में आत्मसात किया, तो छत्तीसगढ़ के राजस्व प्रशासन के इतिहास में एक युगपरिवर्तकारी क्रांति की शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत प्रशासनिक सोच में आमूलचूल बदलाव लाया गया। अब किसान या भूमि स्वामी को अपनी वाजिब मांगों और भूमि संबंधी सुधारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रही, बल्कि शासन का अमला खुद आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक जीपीएस उपकरणों और दक्ष सर्वेयरों की समर्पित टीम लेकर ग्रामीणों के सीधे दरवाजे तक पहुँचा। इस पहल ने न केवल शासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाया, बल्कि सुशासन और पारदर्शिता की एक नई मिसाल भी कायम की। ​डिजिटल सर्वेक्षण का विशाल दायरा और अभूतपूर्व उपलब्धियाँ           ​प्रशासन के इस दृढ संकल्प और सुनियोजित क्रियान्वयन का ही सुखद नतीजा है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 राजस्व ग्रामों में से 19,805 ग्रामों (लगभग 96.37%) में विस्तृत डिजिटल सर्वेक्षण का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। मैदानी क्षेत्रों के प्रमुख जिलों जैसे रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर में डिजिटल सर्वे का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।        ​दूसरी ओर, बस्तर संभाग के अत्यंत दुर्गम, वनांचल और संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे नारायणपुर, सुकमा तथा बीजापुर—में भी अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों और हाई-प्रिसिजन जीपीएस तकनीक के जरिए शेष बचे गाँवों को मानचित्र पर सटीक रूप से दर्ज करने का काम युद्ध स्तर पर निरंतर जारी है। ​भू-स्वामियों को मिले प्रमुख ऐतिहासिक लाभ         ​प्रशासनिक दक्षता और जन-कल्याण की इस अनुपम पहल से प्रदेश के लाखों भू-स्वामियों को दशकों पुरानी असुविधाओं से स्थायी मुक्ति मिल चुकी है। डिजिटल नक्शों और सटीक सीमांकन के कारण ग्रामीण अंचलों में वर्षों से चले आ रहे भूमि संबंधी आपसी विवादों तथा कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अद्यतित और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड्स से पूरी राजस्व प्रणाली विश्वसनीय बनी है, जिससे दलालों और बिचौलियों का एकाधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया है।        ​पूर्णतः त्रुटिरहित और सुधारे गए राजस्व रिकॉर्ड्स के आधार पर अब बैंक किसानों को बिना किसी अनावश्यक देरी के कृषि ऋण स्वीकृत कर रहे हैं। इसके साथ ही, किसान न्याय योजना, आपदा राहत और फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी कटौती के सीधा और समय पर वास्तविक हितग्राहियों तक पहुँच रहा है। ​आत्मनिर्भरता और आदर्श राज्य की ओर सुदृढ़ कदम         ​शत-प्रतिशत डिजिटल, पारदर्शी और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला देश का आदर्श राज्य बनने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा बढ़ाया गया यह ऐतिहासिक कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व संबल प्रदान कर रहा है। "सेवा संकल्प अभियान" ने यह साबित कर दिया है कि जब दृढ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मिलन होता है, तो "सेवा पहुँची आपके द्वार" का संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर बदलती व्यवस्था की एक जीवंत और सुखद सच्चाई बन जाता है। विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक

घरेलू हिंसा मामले में पत्नी के रिश्तेदार भी आरोपी हो सकते हैं

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि घरेलू हिंसा के मामलों में केवल पति ही नहीं, बल्कि परिवार के अन्य सदस्य जैसे सास, बहू, ननद और उसके मायके पक्ष के लोग भी दायरे में आ सकते हैं. हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने बहू और उसके परिजनों की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि साझा घर और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े विवादों का फैसला बिना सबूतों और गवाहों के शुरुआती स्तर पर नहीं किया जा सकता, इसके लिए ट्रायल जरूरी है. इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां शिकायत किसी बहू ने अपनी सास के खिलाफ नहीं बल्कि सास और ननद ने अपनी बहू और उसके मायके पक्ष के लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी. दरअसल रायपुर निवासी निर्मला अग्निवंशी और उनकी बेटी श्रुति अग्निवंशी ने रायपुर की निचली अदालत में घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 12 के तहत एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में उन्होंने अपनी बहू अनिशा अग्निवंशी और बहू के मायके पक्ष के भाई बहनों व अन्य रिश्तेदारों सुषमा सिंह, अभिषेक सिंह, अविनाश सिंह, अंजू सिंह और अलका सिंह को आरोपी बनाया था. इन पर आरोप लगाया कि बहू और उसके परिवार के लोग लगातार उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं, मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और उन्हें घर से अलग करने के लिए दवाब बना रहे हैं. बहू और उसके परिजनों ने निचली अदालत में तर्क पेश करते हुए कहा कि वे साझा घर में एक साथ नहीं रहते हैं इसलिए उनपर घरेलू हिंसा का कानून लागू नहीं होता. निचली अदालत ने उनके तर्क को खारिज कर दिया, जिसके वे निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे, जहां हाईकोर्ट ने भी याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी है.

अस्पताल में 32 हफ्ते का भ्रूण मिला, 3 डॉक्टर दोषी

बिलासपुर. कोरबा जिले के दीपका स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल में अवैध गर्भपात और भ्रूण मिलने के 15 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को आंशिक रूप से पलट दिया है, और हाईकोर्ट ने तीन चिकित्सकों को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत दोषी करार दिया है. हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि आरोपी डाक्टर यह साबित करने में नाकाम रहे कि अस्पताल में मिले 16 से 32 सप्ताह का भ्रूण किसी वैध चिकित्सीय जरूरत के तहत सद्भावना पूर्ण तरीके से रखे गए थे. SDM के छापे में मिले थे भ्रूण दरअसल, कोरबा के सीएमएचओ और कठघोरा के एसडीएम ने 7 अगस्त, 2011 को दीपका स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल में छापा मारा था. कार्रवाई के दौरान अलग अलग बोतलों में 16 से 32 सप्ताह के भ्रूण मिले थे और कुछ एक्सपायर्ड दवाएं व गर्भपात में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बरामद किए गए थे. हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला मामले में सुनवाई के बाद कटघोरा अपर सत्र न्यायाधीश ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद रविदास, डॉ. मिथिलेश प्रसाद और रेणू श्रीवास्तव को बरी कर दिया था. राज्य शासन ने निचली अदालत के इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तीनों चिकित्सकों के पक्ष में निचली अदालत के फैसले में आंशिक बदलाव करते हुए उन्हें दोषी करार दिया है.

छत्तीसगढ़ में बढ़ी बाढ़ की चिंता! गंगरेल के 14 गेट खुले, तटीय इलाकों में प्रशासन अलर्ट

गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खुले, महानदी के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट मोड पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर-एसपी ने संभाला मोर्चा, संवेदनशील क्षेत्रों का किया निरीक्षण शिवरीनारायण में मोटर बोट और बचाव उपकरणों के साथ DDRF की टीम तैनात, दूसरी टीम जिला मुख्यालय में रिजर्व घाट-पुलों पर बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती, जलस्तर एवं बहाव पर लगातार निगरानी रायपुर,  गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले जाने और जांजगीर-चांपा जिले में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार जांजगीर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने महानदी के तटीय और संवेदनशील क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण कर जलस्तर, नदी के बहाव और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर और एसपी संबंधित अधिकारियों से लगातार फीडबैक लेकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और आवश्यकता के अनुरूप दिशा-निर्देश दे रहे हैं। कलेक्टर-एसपी ने राजस्व, पुलिस, जल संसाधन, नगर सेना सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। नदी के जलस्तर और तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर सतत निगरानी रखने के साथ ही किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधन और उपकरण तैयार रखने कहा गया है। शिवरीनारायण में DDRF की टीम तैनात, SDRF बिलासपुर से लगातार समन्वय जिले में बाढ़ एवं आपदा की संभावित स्थिति से निपटने के लिए होमगार्ड जवानों की जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की दो टीमों को तैयार रखा गया है। इनमें से एक टीम को मोटर बोट एवं अन्य आवश्यक बचाव उपकरणों के साथ शिवरीनारायण में तैनात किया गया है, जबकि दूसरी टीम जिला मुख्यालय में रिजर्व रखी गई है। इसके साथ ही एसडीआरएफ बिलासपुर से लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखा जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अतिरिक्त सहायता प्राप्त की जा सके। शिवरीनारायण और बसंतपुर बैराज सहित संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कलेक्टर-एसपी ने शिवरीनारायण क्षेत्र में महानदी के शिवरीनारायण बैराज, घाट, पुल, सांस्कृतिक भवन और बसंतपुर बैराज सहित विभिन्न संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया। सुरक्षा की दृष्टि से घाटों और पुलों पर बैरिकेडिंग की गई है तथा आवश्यक संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों को नदी के जलस्तर और बहाव पर लगातार नजर रखने तथा परिस्थिति के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान नदी पर स्थित पुल-पुलियों और आवागमन वाले क्षेत्रों की स्थिति का भी जायजा लिया गया। कलेक्टर-एसपी ने निर्देश दिए कि यदि किसी पुल या पुलिया पर पानी का बहाव आवागमन के लिए जोखिमपूर्ण हो तो तत्काल यातायात नियंत्रित किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर आवागमन पूरी तरह रोका जाए। ऐसे सभी स्थानों पर सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। तटीय गांवों में मुनादी के निर्देश, सुरक्षित स्थानों पर आवश्यक व्यवस्था रखने कहा कलेक्टर ने महानदी के तटीय क्षेत्रों और पूर्व में जलभराव से प्रभावित आबादी वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों को संभावित जलभराव और आवश्यक सावधानियों की जानकारी मुनादी के माध्यम से देने कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पूर्व से चिन्हांकित स्थानों पर जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें, सेल्फी-वीडियो के लिए जोखिम न उठाएं कलेक्टर-एसपी ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदी, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं। तेज बहाव वाले पानी के पास सेल्फी या वीडियो बनाने का जोखिम न उठाएं और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। किसी भी आकस्मिक अथवा आपात स्थिति की जानकारी तत्काल जिला प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय पर राहत एवं बचाव कार्रवाई की जा सके। वर्तमान में जिले में स्थिति सामान्य है। एहतियात के तौर पर महानदी के तटीय क्षेत्रों, पुल-पुलियों और जलस्तर पर प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने और किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार पोयाम, एसडीएम सुभावना साहू सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

बाल आयोग के ‘रक्षक’ अभियान को मिला गोल्डन अवार्ड

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। आयोग के अभिनव नवाचार ‘रक्षक’ कार्यक्रम को देश के प्रतिष्ठित SKOCH गोल्डन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में यह सम्मान प्राप्त हुआ है। बाल अधिकारों के क्षेत्र में यह पुरस्कार पाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। इस उपलब्धि पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि अवार्ड के लिए चयन प्रक्रिया काफी कठोर थी। सर्वप्रथम आयोग की ओर से जूरी के समक्ष ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसके बाद कड़े परीक्षण के उपरांत इसे गोल्ड श्रेणी के लिए चुना गया है। SKOCH गोल्डन अवार्ड प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुनीता नारायण, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पूनम मुटरेजा, भारत सरकार के पूर्व सचिव संजय कुमार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व महासचिव भरत लाल की गरिमामयी उपस्थिति में SKOCH ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर द्वारा प्रदान किया गया। SKOCH अवार्ड क्या है? SKOCH ग्रुप 1997 से कार्यरत देश का एक प्रमुख स्वतंत्र थिंक-टैंक है। यह वर्ष 2003 से सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्रदान करता है, जिसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिना जाता है। क्या है ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम? ‘रक्षक’ का पूरा नाम Post Graduation Diploma in Protection of Child Rights (PGDPCR) है। यह एक वर्षीय (2 सेमेस्टर) डिप्लोमा कोर्स है, जिसकी न्यूनतम योग्यता स्नातक है। डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी को देखते हुए यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रैक्टिकल मॉडल है। छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं लेंगे, बल्कि आयोग की संवाद इकाइयों के माध्यम से बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड केयर संस्थानों और स्वैच्छिक संगठनों के साथ सीधे जुड़कर फील्ड वर्क, केस स्टडी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर कार्य करेंगे। पाठ्यक्रम में पॉक्सो एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम 2015, बाल विवाह एवं बाल श्रम प्रतिषेध, दत्तक ग्रहण कानून, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और पुनर्वास योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। यह पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में उनके बोर्ड/परिषद की अनुमति से प्रारंभ किया जा रहा है। इससे युवाओं के लिए बाल संरक्षण, काउंसलिंग और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।