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भारत की बढ़ी परमाणु ताकत: MIRV क्षमता वाली अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण

नई दिल्ली भारत ने अपनी रक्षा क्षमता में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल) प्रणाली से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण 8 मई 2026 को ओडिशा के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) से किया गया। इस मिसाइल ने सभी निर्धारित मापदंडों को पूरा किया और हिंद महासागर क्षेत्र में विस्तृत भौगोलिक दायरे में अलग-अलग लक्ष्यों को सटीक रूप से निशाना बनाने की अपनी क्षमता साबित की। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस उन्नत अग्नि मिसाइल का परीक्षण स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के सहयोग से किया गया। मिसाइल कई पेलोड्स (वारहेड्स) से लैस थी, जिन्हें स्वतंत्र रूप से विभिन्न दिशाओं और दूरी पर स्थित लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया गया। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की यह क्षमता भारत को विश्व के चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) की पंक्ति में खड़ा करती है। राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और सेना को दी बधाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय सेना और संबंधित उद्योग जगत को बधाई देते हुए कहा कि इस सफल परीक्षण से बढ़ते खतरों के प्रति देश की रक्षा तैयारियों में अभूतपूर्व क्षमता जुड़ गई है। यह ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ को और मजबूत बनाएगा। उन्होंने वैज्ञानिकों की मेहनत की सराहना की और कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करती है। MIRV तकनीक का महत्व MIRV प्रणाली एक मिसाइल को एक साथ कई स्वतंत्र वारहेड्स ले जाने और उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों पर मार्गदर्शन करने की क्षमता देती है। इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देना आसान हो जाता है। अग्नि सीरीज की यह उन्नत संस्करण 5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला कर सकती है, जो चीन के अधिकांश हिस्सों और पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र को कवर करती है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे अग्नि-5 Mk2 या उन्नत वेरिएंट बताया जा रहा है, जिसमें हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) जैसी अतिरिक्त क्षमताएं भी शामिल हो सकती हैं। चीन-पाक की उड़ी नींद! यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत की रणनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। चीन की आक्रामक नीतियां और पाकिस्तान की सैन्य आधुनिकीकरण की कोशिशें देखते हुए यह सफलता सामरिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि MIRV-सक्षम अग्नि मिसाइल से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड और मजबूत होगी तथा क्षेत्रीय स्थिरता में नया संदेश जाएगा। DRDO के वैज्ञानिकों ने टेलीमेट्री, रडार और शिप-बेस्ड स्टेशनों से प्राप्त डेटा के आधार पर पुष्टि की कि मिशन के सभी उद्देश्य पूरे हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्रालय ने भी इस उपलब्धि पर DRDO की तारीफ की। यह सफल परीक्षण ‘मिशन दिव्यास्त्र’ (2024) के बाद MIRV तकनीक को और परिपक्व बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भारतीय सेना की मारक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और देश की सुरक्षा ढाल और मजबूत बनेगी।

दिल्ली को मिलेगा नया मेडिकल कॉलेज, 250 MBBS सीटों के साथ बढ़ेगी सुविधा

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने राजधानी के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए द्वारका में नया सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल कॉलेज बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी गई। इस महत्वाकांक्षी योजना पर 805.99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज के निर्माण को वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसके बनने से हर साल 250 एमबीबीएस सीटों पर दाखिले बढ़ेंगे। 150 छात्रों के साथ शुरू की जाएगी पढ़ाई उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में 150 छात्रों के साथ पढ़ाई शुरू की जाएगी। परियोजना के पहले चरण में अकैडमिक ब्लॉक, स्टूडेंट्स के अलग हॉस्टल और फैकल्टी के लिए रेजिडेंशल ब्लॉक बनाए जाएंगे। इसके निर्माण से स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को मेडिकल एजुकेशन का प्रमुख केंद्र बनाना है। 1.17 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में किया जाएगा निर्माण सीएम ने बताया कि मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल और रेजिडेंशल ब्लॉक का निर्माण करीब 1.17 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में होगा, जिसमें बेसमेंट पार्किंग और अन्य सुविधाएं भी रहेंगी। प्रोजेक्ट में ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन किया जाएगा।     परिसर में सोलर पावर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, वॉटर रीसाइक्लिंग, प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बिल्डिंग को भूकंपरोधी और दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जाएगा।  सरकार के मुताबिक, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। लोक निर्माण विभाग (PWD) निर्माण कार्य करेगा, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग परियोजना की मॉनिटरिंग करेगा। दिल्ली को एक नया मेडिकल कॉलेज मिलने से बड़ा फायदा होगा। पहला, छात्रों के लिए MBBS की सीटों में इजाफा होगा। दूसरा, दिल्ली सरकार के अस्पतालो में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। द्वारका के जिस इंदिरा गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल परिसर में यह कॉलेज बनेगा, वहां भी डॉक्टर्स की कमी है। इसके चलते अस्पताल पूरी क्षमता से काम नही कर रहा है। मेडिकल कॉलेज बनने, एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई शुरू होने के साथ अस्पताल को भी पूरी क्षमता के साथ चलाने में भी मदद मिलेगी। द्वारका के साथ-साथ दिल्ली के आसपास के इलाकों, बाहरी दिल्ली के इलाकों से आने वाले लोगों के लिए मेडिकल सुविधाएं बढ़ेगी।  

दिल्ली और सोनीपत के प्रतिष्ठित स्थल थे ISI की योजना में, पुलिस ने किया पर्दाफाश

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित शहजाद भट्टी मॉड्यूल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कई सनसनीखेज जानकारियां दी हैं, जिनसे पता चला है कि दिल्ली का एक ऐतिहासिक मंदिर भी आतंकवादियों के निशाने पर था. सूत्रों के मुताबिक इस मॉड्यूल से जुड़े एक आरोपी ने मंदिर की बाकायदा रेकी की थी. उसने मंदिर परिसर, वहां तैनात पुलिसकर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीरें और वीडियो तैयार किए थे. जांच एजेंसियों को शक है कि ये फोटो और वीडियो पाकिस्तान में बैठे सोशल मीडिया हैंडलर्स और कथित आईएसआई संपर्कों को भेजे गए थे।  जांच में सामने आया है कि साजिश सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं थी. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि मंदिर परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाकर गोलीबारी करने की योजना थी. इसके जरिए बड़े स्तर पर दहशत फैलाने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की साजिश रची जा रही थी।  दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार इस मॉड्यूल का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था. जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक प्रसिद्ध ढाबा भी आतंकियों के निशाने पर था. इस ढाबे पर हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है. आरोपियों ने खुलासा किया कि वहां हैंड ग्रेनेड हमला कर भारी तबाही मचाने की योजना बनाई गई थी. एजेंसियों को आशंका है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों को टारगेट कर ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की तैयारी थी।  हिसार में मौजूद एक सैन्य कैंप की भी रेकी इसके अलावा हरियाणा के हिसार में मौजूद एक सैन्य कैंप की भी रेकी किए जाने का खुलासा हुआ है. पूछताछ में सामने आया कि कैंप के वीडियो और आसपास की गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजी गई थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सैन्य प्रतिष्ठानों से जुड़ी और कौन-कौन सी सूचनाएं साझा की गई थीं।  सूत्रों के मुताबिक मॉड्यूल का टारगेट सिर्फ दिल्ली और हरियाणा तक सीमित नहीं था. उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस स्टेशनों पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाने की योजना थी. माना जा रहा है कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले कर आतंकवादियों का मकसद सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना और भय का माहौल बनाना था।  बता दें कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने बीते दिन दिल्ली समेत कई राज्यों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए शहजाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से हथियार, गोला-बारूद और संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए गए थे. गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कई राज्यों की पुलिस भी इस मामले में इनपुट साझा कर रही है।  जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मॉड्यूल को फंडिंग कहां से मिल रही थी, सोशल मीडिया के जरिए किस तरह संपर्क बनाए जा रहे थे और भारत में इनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील धार्मिक स्थलों, सैन्य प्रतिष्ठानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है।  मंदिर और मुरथल को लेकर क्या थी साजिश मॉडयूल की प्लानिंग थी कि मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और पैरामिलिट्री के जवानों को निशाना बनाया जाएगा। सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी करके पैनिक फैलाने और व्यवधान पैदा करने की कोशिश थी। सूत्रों ने बताया कि आरोपियों को दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर मौजूद एक मशहूर ढाबे पर हमले का काम भी दिया गया था। यहां हर दिन हजारों लोग आते हैं। दहशतगर्दों की साजिश थी कि भीड़भाड़ के बीच अचानक गोलीबारी की जाए, जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हों। मिलिट्री कैंप पर भी करने वाले थे हमला दहशतगर्त हरियाणा के हिसार में मौजूद एक मिलिट्री कैंप पर भी हमले की योजना तैयार कर रहे थे। उन्होंने कैंप की रेकी की थी और वीडियो बनाए थे। इन्हें सीमा पार भेजा गया था। उत्तर प्रदेश के कुछ पुलिस थानों पर भी आतंकी हमले की साजिश की बात सामने आई है।

NCRB रिपोर्ट: दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार 4 साल सबसे अधिक

नई दिल्ली भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सबसे असुरक्षित महानगरों की सूची में पहले नंबर पर आ गई है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली लगातार चौथे वर्ष देश के सबसे असुरक्षित महानगर के रूप में उभरी है. रिपोर्ट बताती है कि अन्य मेट्रो शहरों के मुकाबले दिल्ली में सबसे ज्यादा महिलाओं के खिलाफ अपराध किए गए हैं।  एनसीआरबी के आंकड़ों में भले ही दिल्ली में कुल आईपीसी और बीएनएस अपराधों में 15.1% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई और 2023 के 3.2 लाख से ज्यादा मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या लगभग 2.8 लाख रह गई लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध में यह अभी भी बाकी मेट्रो शहरों से आगे निकल गई है. राजधानी में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों की गंभीरता और उनकी तीव्रता चिंता का विषय बनी हुई है।  महिलाओं के खिलाफ अपराध दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या 7,827 मामलों में पहुंच गई है. सबसे ज्यादा परेशान करने वाला आंकड़ा बलात्कार का है, जब दिल्ली में करीब 1,058 मामले दर्ज हुए हैं. यह आंकड़ा अन्य महानगरों जयपुर (497) और मुंबई (411) की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है. 6 मामलों के साथ गैंग रेप या रेप के बाद हत्या जैसे जघन्य अपराधों में भी दिल्ली टॉप पर है. POCSO मामलों में भी दिल्ली (1,553) ने मुंबई (1,416) को पीछे छोड़ दिया है. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।  रेप के मामले कम हुए लेकिन बाकी शहरों से ज्यादा 2024 में दिल्ली में 1,058 बलात्कार के मामले दर्ज हुए. यह संख्या जयपुर (497) और मुंबई (411) से दोगुनी से भी ज्यादा है. हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में मामलों में मामूली कमी आई है. 2023 में 1,094 और 2022 में 1,212 मामले दर्ज हुए थे. लेकिन यह कमी इसलिए मामूली है क्योंकि दिल्ली इन सभी से आगे है. NCRB के अनुसार दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ कुल 13,396 मामले दर्ज हुए, जो अन्य महानगरों से कहीं ज्यादा हैं।  अपहरण और घरेलू हिंसा की स्थिति भी गंभीर दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अपहरण और अपहरण के 3,974 मामले दर्ज हुए. इनमें पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 4,647 मामले, छेड़छाड़ के 755 मामले, यौन उत्पीड़न के 316 मामले और स्टॉकिंग के 178 मामले सामने आए. सात मामले बलात्कार के साथ हत्या के भी दर्ज किए गए. दिल्ली पुलिस के पास 31,000 से अधिक मामले जांच के अधीन हैं, जो देश के 19 बड़े शहरों के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई है।  बच्चों पर बढ़ता खतरा दिल्ली बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद चिंताजनक स्थिति में है. 2024 में बच्चों के खिलाफ 7,662 अपराध दर्ज हुए हैं. यह आंकड़ा प्रति एक लाख बच्चों पर 138.4 अपराध दर राष्ट्रीय औसत (42.3) से बहुत अधिक है. चार्जशीट दर मात्र 31.7% रही, जबकि औसत 61.4% है।  यूपी में सबसे ज्यादा महिला अपराध, शहर में दिल्ली सबसे असुरक्षित महिलाओं के मामले में दिल्ली एक बार फिर सबसे असुरक्षित शहर बनकर उभरा है. रिपोर्ट के मुताबिक देश की 19 मेट्रोपॉलिटन सिटीज में दिल्ली में सबसे ज्यादा 2024 में 13396 अपराध दर्ज किए गए हैं. इन 19 बडे शहरों में मध्य प्रदेश का इंदौर 8वें स्थान पर है. हालांकि 2023 के मुकाबले 2024 में महिला अपराधों में कमी आई है. 2023 में इंदौर में 1919 अपराध घटित हुए थे, जबकि 2024 में 1884 मामले दर्ज किए गए।  बच्चों से जुड़े अपराध में एमपी तीसरे नंबर पर बच्चों से जुड़े अपराध देश में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में होते हैं. रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में 24 हजार 171 मामले दर्ज किए गए. दूसरे नंबर पर 22 हजार 222 अपराधों के साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है. 2024 में मध्य प्रदेश में 21 हजार 908 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए. इन राज्यों में जितने बच्चों से जुड़े अपराध हैं, जांच की गति भी उतनी ही धीमी है. मध्य प्रदेश में चार्जशीट प्रस्तुत करने की दर ही 55 फीसदी है. जबकि महाराष्ट्र में 52 फीसदी और राजस्थान में 49.2 फीसदी मामलों की ही चार्जशीट कोर्ट में पेश हो पाती है।  एससी-एसटी अपराध में कौन राज्य टॉप पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष राज्यों में है. अनुसूचित जाति वर्ग के खिलाफ होने अपराध सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए. यूपी में 2024 में 14 हजार 642 मामले दर्ज किए गए. दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है. एमपी में 7 हजार 765 और बिहार में 7 हजार 565 मामले दर्ज किए गए. जबकि राजस्थान में 7008 मामले दर्ज हुआ हैं।  वहीं अनुसूचित जनजाति यानि ST के सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए. एमपी में 3165, इसके बाद राजस्थान में 2 हजार 282 और 830 अपराधों के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है।  क्या सुधर रही है स्थिति? टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में अपराधों की उच्च संख्या रिपोर्टिंग और जागरूकता बढ़ने का परिणाम है. कुल अपराधों में थोड़ी कमी आई है, लेकिन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. दिल्ली में अपराध दर 176.8 प्रति लाख है, जो अन्य महानगरों से काफी ऊंची है।  ऐसे में NCRB 2024 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि दिल्ली में कानून व्यवस्था और महिला-बाल सुरक्षा को मजबूत करने की तत्काल जरूरत है. मात्र आंकड़ों में कमी से सुरक्षा की भावना नहीं बढ़ती. आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। 

4 मौतों के पीछे जहरीला सच, बिरयानी-तरबूज में मिला रैट पॉइजन

 नई दिल्ली साउथ मुंबई में पिछले महीने एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में इसे तरबूज खाने से हुई फूड पॉइजनिंग माना जा रहा था, लेकिन अब फॉरेंसिक जांच में पता चला है कि मौत जिंक फॉस्फाइड नाम के जहरीले रसायन से हुई। यह रसायन आमतौर पर चूहे मारने की दवा में इस्तेमाल किया जाता है। मृतकों में अब्दुल्ला दोकाडिया, उनकी पत्नी नसरीन और उनकी दो बेटियां जैनब और आयशा शामिल थीं। पुलिस के मुताबिक परिवार ने 25 अप्रैल को अपने घर पर रिश्तेदारों को खाने पर बुलाया था। सभी ने मटन पुलाव खाया था और रिश्तेदार रात करीब 10 से 10.30 बजे के बीच वहां से चले गए थे। इसके बाद परिवार ने रात करीब 1 बजे तरबूज खाया। सुबह 5 से 6 बजे के बीच सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में चारों की मौत हो गई। फॉरेंसिक जांच में हुआ बड़ा खुलासा शुरुआती जांच में पुलिस ने अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज किया था। पोस्टमार्टम के दौरान शवों से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। बाद में फॉरेंसिक जांच में चारों के शरीर में जिंक फॉस्फाइड के अंश मिले। जांच एजेंसियों को तरबूज के सैंपल में भी यही जहरीला रसायन मिला है। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह जहर गलती से तरबूज में पहुंचा या फिर जानबूझकर उसमें मिलाया गया था। इससे पहले जे जे अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि मृतकों के शरीर में किसी तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन नहीं मिला। उनके खून में भी कोई बैक्टीरिया नहीं पाया गया था, जिससे फूड इंफेक्शन की आशंका कमजोर पड़ गई थी। शरीर के अंगों का रंग भी बदला मिला फॉरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि मृतकों के कुछ अंगों जैसे दिमाग, दिल और आंतों का रंग हरा पड़ गया था। डॉक्टरों के मुताबिक यह जहरीले पदार्थ के असर का संकेत हो सकता है। जांच में अब्दुल्ला दोकाडिया के शरीर में मॉर्फिन के अंश भी मिले थे। मॉर्फिन एक तेज दर्द निवारक दवा होती है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर मेडिकल निगरानी में किया जाता है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह दवा शरीर में कैसे पहुंची। पुलिस ने परिवार के उन रिश्तेदारों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिन्होंने उसी रात मटन पुलाव खाया था। हालांकि उनकी तबीयत पर कोई असर नहीं पड़ा। अब अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत की पूरी वजह साफ हो सकेगी।  

रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर आपदा से निपटने के लिए DRDO का नया सेंटर, बुराड़ी में हुआ उद्घाटन

नई दिल्ली रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी के लिए तैयारी को बेहतर बनाने के मकसद से, डीआरडीओ ने दिल्ली के बुराड़ी मैदान में खास सेंटर खोला है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) फील्ड ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर खोला। डीआरडीओ के चेयरमैन समीर वी. कामत ने इसका उद्घाटन किया। यह ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन सेंटर, DRDO का एक अनोखा CBRN सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा, जिसमें कई अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद होंगी। डीआरडीओ का ये सेंटर क्यों है खास     इस सेंटर में एक खास रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर टेस्ट-बेड सुविधा और हेवी-आयन रिसर्च सुविधाएं शामिल हैं।     इसके साथ ही इमरजेंसी मेडिकल रिस्पॉन्स और रियल-टाइम फील्ड रिस्पॉन्स यूनिट्स भी हैं।     रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर टेस्ट-बेड सुविधा एक खास, नियंत्रित माहौल होता है।     इसे न्यूक्लियर एनर्जी, रेडिएशन का पता लगाने और खतरनाक पदार्थों के मैनेजमेंट से जुड़ी टेक्नोलॉजी को टेस्ट करने, उनकी पुष्टि करने और उन्हें प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया है।     ऐसी सुविधाएं न्यूक्लियर साइंस, मटीरियल टेस्टिंग और इमरजेंसी रिस्पॉन्स ट्रेनिंग में R&D के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराती हैं।     ये सुविधा, गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए जरूरी सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक ट्रेनिंग के बीच के अंतर को पाटती है।     यह सेंटर, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) के तहत बनने वाले CBRN सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का एक हिस्सा है। इसलिए खास है ये सेंट्रर, दी जाएगी प्रभावी ट्रेनिंग यह सेंटर, रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, NDMA और CBRN इमरजेंसी की तैयारी और संकट से निपटने के काम में शामिल अन्य विभिन्न एजेंसियों के रिस्पॉन्डर्स को प्रभावी ट्रेनिंग देने के लिए समर्पित है। ट्रेनिंग और वर्कशॉप के जरिए, INMAS विशेषज्ञों की अगली पीढ़ी को तैयार करेगा, ताकि वे इस काम को फ्रंटलाइन तक आगे बढ़ा सकें और नई तकनीकों और टेक्नोलॉजी को अपनाकर इस क्षेत्र को और समृद्ध बना सकें।  

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में 18 आरोपी, 2 नाबालिग जेजेबी के पास; उत्तम नगर हत्याकांड में हुआ नया मोड़

नई दिल्ली   दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन हुए विवाद में 26 वर्षीय तरुण की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए द्वारका कोर्ट में 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है जबकि इस पूरे मामले में कुल 20 आरोपी बनाए गए हैं, जिनमें से 2 नाबालिग हैं। नाबालिग आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) को भेजने की अपील की गई है। पुलिस के अनुसार, यह घटना 4 मार्च को होली के दिन उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में हुई थी। एक 7 से 9 साल की बच्ची द्वारा फेंका गया पानी का गुब्बारा सड़क पर खड़ी एक महिला को लग गया, जिसके बाद मामूली कहासुनी ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर एक पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। चार्जशीट में बताया गया है कि इस झड़प के बाद तरुण को उसके घर के पास रोककर बेरहमी से पीटा गया। गंभीर रूप से घायल तरुण को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अगले दिन उसकी मौत हो गई। तरुण डिजिटल मार्केटिंग का कोर्स कर रहा था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा भड़काने समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 95 और 103(2) भी जोड़ी गई हैं। जांच के दौरान दो आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। उनके खिलाफ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएअफ) की तैनाती की गई थी। मामले ने सांप्रदायिक रंग भी ले लिया था, जिसके चलते ईद के दौरान भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट पर नजर रखी गई। इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने इस घटना की निंदा करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था।

नोएडा प्राधिकरण का बड़ा फैसला: आवासीय और औद्योगिक जमीन की कीमतों में इजाफा

नोएडा नोएडा ने जमीन खरीदना अब और महंगा होने जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण ने आवासीय, संस्थागत, औद्योगिक आदि संपत्तियों की आवंटन दरें 11 प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लिया है। नई दरें एक-दो दिन में लागू हो जाएंगी। बीते वर्षों में आवासीय आदि संपत्तियों में करीब पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी होते आ रही थी। इस बार सबसे अधिक वृद्धि करने की तैयारी है। नोएडा में हर साल संपत्ति महंगी होती जा रही है। शहर में मध्यम वर्ग के लोगों के लिए संपत्ति खरीदना सपने जैसा होता जा रहा है। मांग अधिक होने की वजह से प्राधिकरण भी आवंटन दरें हर वर्ष बढ़ा रहा है। इसी क्रम में अब आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत, ग्रुप हाउसिंग आदि संपत्ति की आवंटन दरों में 11 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है। नई दरों को लेकर कार्यालय आदेश इसी सप्ताह जारी हो जाएगा। ऐसे में कुछ दिन बाद से प्राधिकरण संपत्तियों का आवंटन नई दरों के हिसाब से करेगा। आवंटन रेट बढ़ने का असर प्राधिकरण में हस्तांतरण होने वाली संपत्ति के शुल्क पर भी पड़ेगा। यह शुल्क भी महंगा हो जाएगा। गौरतलब है कि इस महीने ग्रेटर नोएडा ने भी संपत्ति की दरों में करीब साढ़े तीन प्रतिशत बढ़ोत्तरी करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राधिकरण की ओर से कराए कराने वाले काम पर खर्च यानि कोस्टिंग चार्ज अधिक आने की वजह से इस बार अधिक प्रतिशत में संपत्ति की दरें बढ़ाने का निर्णय गया है। औद्योगिक संपत्तियों में भी 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है। फेज-1 में चार हजार वर्ग मीटर तक के औद्योगिक भूखंड का आवंटन रेट 55,880 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है। फेज-2 में 60 हजार वर्ग मीटर से बड़े भूखंड का शुल्क 20 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर रखा गया है। व्यावसायिक संपत्तियों के दाम नहीं बढ़ेंगे प्राधिकरण की हर श्रेणी की संपत्ति बिक रही है। खरीदार आरक्षित मूल्य से कई गुना अधिक बोली लगाकर उसको प्राप्त कर रहे हैं। इन सबके बीच व्यावासयिक संपत्ति खरीदने के लिए खरीदार आगे नहीं आ रहे। इस वजह से प्राधिकरण ने इस बार भी व्यावसायिक संपत्ति की दरों में कोई इजाफा नहीं करने का निर्णय लिया है। आवासीय श्रेणी की आवंटन दरें श्रेणी    वर्तमान दरें    प्रस्तावित दरें ए प्लस    175000    175000 ए    132860                  147480 बी    92620                  102810 सी    67440                   74860 डी    56370                   62570 ई    51000                  56610         नोट- दरें रुपये प्रतिवर्ग मीटर आवासीय श्रेणी के हिसाब से सेक्टर ● सी: 42, 43,45,63ए, 104, 107, 110,118,119, 120,121, 128, 129,130, 131,133,134, 135,137, 143,143बी,144,151,168 ● डी: 86,112,113, 116,117 ● ई: 102,115,158,162 ● ए प्लस: सेक्टर-14ए, 15ए 44 (ब्लॉक ए और बी) ● ए: 14,17,19,30,35,36,39, 44,47,50,51,52,93,93ए,93बी ● बी: 11,12,15,20,21,22,23, 25 से 29,31,33,34,37,40,41, 46, 48, 49,53,55,56,61,62, 70,78,82,92,96 से 100,105, 108,122

गर्मी से राहत: कई राज्यों में स्कूलों की छुट्टियां घोषित, कहीं बदला समय

नई दिल्ली भारत में साल 2026 की गर्मियों ने दस्तक देते ही अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। झुलसाती धूप और लू (Heatwave) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देशभर के कई राज्यों ने करोड़ों स्कूली बच्चों को राहत देने के लिए या तो स्कूलों में छुट्टियों की घोषणा कर दी है या उनके समय में भारी कटौती की है। दिल्ली में 50 दिनों का अवकाश दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने राजधानी के सभी स्कूलों के लिए 50 दिनों की लंबी छुट्टियों का एलान किया है। दिल्ली के स्कूल 11 मई से 30 जून 2026 तक बंद रहेंगे और अब सीधे 1 जुलाई को ही खुलेंगे। बढ़ते पारे को देखते हुए अभिभावकों के लिए यह राहत की खबर है, हालांकि इतनी लंबी अवधि के कारण बच्चों की पढ़ाई और घर पर उनकी देखभाल को लेकर चुनौतियाँ भी बढ़ गई हैं。 विभिन्न राज्यों में छुट्टियों की स्थिति दिल्ली के अलावा कई अन्य राज्यों ने भी गर्मी की गंभीरता को देखते हुए समय से पहले कदम उठाए हैं: ओडिशा: यहां 27 अप्रैल से ही स्कूलों में ताले लग चुके हैं। पश्चिम बंगाल: दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों को छोड़कर पूरे राज्य में 22 अप्रैल से छुट्टियां शुरू हो गई थीं। छत्तीसगढ़: यहां छुट्टियों का सबसे लंबा अंतराल देखा जा रहा है, जहां 20 अप्रैल से 15 जून तक अवकाश घोषित है। उत्तर प्रदेश: लखनऊ, कानपुर और वाराणसी समेत पूरे राज्य में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के लिए 20 मई से 15 जून तक छुट्टियां रहेंगी। स्कूलों के समय में बदलाव जिन राज्यों में अभी छुट्टियां घोषित नहीं हुई हैं, वहां बच्चों को दोपहर की भीषण गर्मी से बचाने के लिए सुबह के समय ही स्कूल संचालित किए जा रहे हैं:- नोएडा और गाजियाबाद: स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक चल रहे हैं। झारखंड: यहां सुबह 11:30 बजे तक ही स्कूल खुले रखने के निर्देश हैं। महाराष्ट्र: राज्य में स्कूलों का समय सुबह 7:00 बजे से 11:15 बजे तक कर दिया गया है। राजस्थान: यहां भी नोएडा की तर्ज पर दोपहर 12:00 बजे तक स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले दिनों में गर्मी अभी और सताएगी। हालांकि, पंजाब और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में अगले सप्ताह सोमवार से बुधवार के बीच हल्की बारिश और आंधी की संभावना है। इस बदलाव से तापमान गिरकर 38-40 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है, जिससे अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकारी स्कूल छात्रों के लिए राहत: नौवीं–दसवीं में फेल विद्यार्थियों को मिलेगा दूसरा मौका

नई दिल्ली  शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों के उन विद्यार्थियों को एक और मौका दिया है जो नौवीं या 10वीं में लगातार असफल हो रहे हैं। निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) के माध्यम से 10वीं में दाखिले के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि सात जुलाई 2026 तय की गई है। साथ ही स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे पात्र विद्यार्थियों से संपर्क कर उन्हें इस योजना के लिए प्रेरित करें और आवश्यक दस्तावेज जुटाकर समय पर आवेदन सुनिश्चित करें। इस योजना का उद्देश्य स्कूल छोड़ने की कगार पर पहुंचे विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा में वापस लाना है, ताकि वे 10वीं पास कर आगे की पढ़ाई जारी रख सकें। सिर्फ दिल्ली के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी कर सकेंग आवेदन निर्देशों के अनुसार, केवल वही विद्यार्थी इस योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे, जो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे और नौवीं या 10वीं में कम से कम दो बार फेल या कंपार्टमेंट लाए हैं। वहीं, जो विद्यार्थी पहली बार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में फेल हुए हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें अपने स्कूल में ही पढ़ाई जारी रखनी होगी। दाखिले की पूरी प्रक्रिया आनलाइन एमआइएस माड्यूल के जरिए संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा पूरी की जाएगी। ये कक्षाएं दिल्ली के करीब 75 निर्धारित सरकारी स्कूलों में संचालित की जाएंगी, जहां अलग-अलग स्टडी सेंटर बनाए जाएंगे। निदेशालय ने कहा कि पांच विषयों तक का पंजीकरण शुल्क सरकार वहन करेगी, लेकिन परीक्षा शुल्क विद्यार्थियों को देना होगा। 300 रुपये की परीक्षा शुल्क तय परीक्षा शुल्क 300 रुपये प्रति विषय, प्रायोगिक के लिए 150 रुपये प्रति विषय और ट्रांसफर आफ क्रेडिट के लिए 230 रुपये प्रति विषय निर्धारित किया गया है। विद्यार्थियों को विषय चयन में भी विकल्प दिए गए हैं, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान के साथ विज्ञान, पेंटिंग और गृह विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा विद्यार्थी डाटा एंट्री आपरेशन विषय को अतिरिक्त रूप से चुन सकते हैं।