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IMD की बड़ी चेतावनी: 13-14 दिसंबर को मूसलाधार बारिश, इन राज्यों में रेडी रहें अलर्ट पर

नई दिल्ली  इस साल मानसून का सीजन बेहद शानदार रहा। देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई और पिछले सालों की तुलना में इस बार बारिश का स्तर अधिक रहा। मानसून के बाद भी कुछ राज्यों में बारिश और ठंड का असर जारी है। मौसम विभाग ने 12 से 14 दिसंबर तक देश के विभिन्न हिस्सों के लिए चेतावनी जारी की है।  उत्तर प्रदेश: घना कोहरा, बारिश का कोई अलर्ट नहीं उत्तर प्रदेश में 13 और 14 दिसंबर को कई जिलों में घना कोहरा रहने की संभावना है। प्रभावित जिले है बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, मऊ, देवरिया और गाजीपुर। मौसम विभाग ने इस दौरान बारिश का कोई अलर्ट नहीं दिया है। सुबह-सुबह कोहरे के कारण दृश्यता कम रहने की संभावना है, इसलिए वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड: शुष्क मौसम और तेज धूप उत्तराखंड में 13 और 14 दिसंबर को मौसम शुष्क रहने की संभावना है। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में तेज धूप देखने को मिलेगी। दिन का तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा, लेकिन रात के समय न्यूनतम तापमान में गिरावट होने से ठंड बढ़ सकती है। दिल्ली: बढ़ती ठंड और शीतलहर का खतरा दिल्ली में ठंड बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार, 13 और 14 दिसंबर के बीच शीतलहर चल सकती है। इससे कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है। लोग ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनें और आवश्यक सावधानी बरतें।   बारिश और बर्फबारी का अलर्ट मौसम विभाग ने देश के कुछ हिस्सों में बारिश और बर्फबारी को लेकर चेतावनी जारी की है।      कर्नाटक के कुछ जिले, अंडमान-निकोबार, माहे, पुडुचेरी और कराईकल में 12 से 14 दिसंबर तक रुक-रुककर भारी बारिश की संभावना।     हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में 13 दिसंबर से तेज बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो सकता है।     तमिलनाडु में 12 से 14 दिसंबर के बीच जमकर बादल बरसेंगे। इस दौरान बिजली गिरने और तेज हवा चलने का अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम विशेषज्ञों की सलाह     सुबह और शाम को घने कोहरे और कम दृश्यता के समय वाहन चलाते समय सतर्क रहें।     पहाड़ों और नदियों के किनारे रहने वाले लोग अलर्ट रहें।     ठंड और बारिश से बचाव के लिए गर्म कपड़े और जरूरी इंतजाम रखें।     स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करें। देश में 12 से 14 दिसंबर के बीच कोहरा, ठंड, बारिश और बर्फबारी के रूप में मौसम सक्रिय रहेगा। लोगों को मौसम की स्थितियों के अनुसार अपनी सुरक्षा और गतिविधियों की तैयारी करनी चाहिए।  

राजधानी में बड़ा बदलाव: दिल्ली में अब 13 जिले, सरकार ने नए भू-प्रस्ताव को दी हरी झंडी

नई दिल्ली  दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। राजधानी में अब तक 11 राजस्व जिले थे, लेकिन सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत इन्हें बढ़ाकर 13 जिले कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी गई। सरकार का दावा है कि इस कदम से प्रशासनिक सेवाएं लोगों तक तेजी से पहुंचेंगी और वर्षों से चला आ रहा विभागों के बीच तालमेल का संकट खत्म होगा। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यह मसला कई सरकारों के दौरान लंबित रहा, लेकिन उनकी टीम ने इसे सिर्फ 10 महीनों में सुलझा दिया। उनका कहना है कि यह बदलाव राजधानी के लिए आवश्यक था क्योंकि दिल्ली की आबादी लगातार बढ़ रही है और पुरानी व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा था। नए 13 जिले और उनसे जुड़े सब-डिविजन सरकार द्वारा घोषित नए जिलों और उप-विभागों की सूची इस प्रकार है:      जंगपुरा     कालकाजी     बदरपुर Old Delhi (पुरानी दिल्ली)     सदर बाजार     चांदनी चौक North (उत्तर)     बुराड़ी     आदर्श नगर     बड़ली New Delhi (नई दिल्ली)     दिल्ली छावनी     नई दिल्ली Central (केंद्रीय दिल्ली)     पटेल नगर     करोल बाग Central North (केंद्रीय-उत्तर)     शकरपुर बस्ती     शालीमार बाग     मॉडल टाउन South West (दक्षिण-पश्चिम)     नजफगढ़     मटीयाला     द्वारका     बिजवासन Outer North (बाहरी उत्तर)     मुंडका     नरेला     बवाना North West (उत्तर-पश्चिम)     किराड़ी     नांगलोई जाट     रोहिणी North East (उत्तर-पूर्व)     करावल नगर     गोकुलपुरी     यमुना विहार     शाहदरा East (पूर्वी दिल्ली)     गांधी नगर     विश्वास नगर     पटपड़गंज South (दक्षिण)     छतरपुर     मालवीय नगर     देवली     महरौली West (पश्चिम)     विकासपुरी     जनकपुरी     राजौरी गार्डन सीमाएं अब एक जैसी होंगी—MCD, NDMC और कैंट बोर्ड का तालमेल सुधरेगा मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक दिल्ली की सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि राजस्व जिलों की सीमाएं,     MCD     NDMC     दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड की सीमाओं से मेल नहीं खाती थीं। ऐसे में यह साफ नहीं होता था कि किसी शिकायत पर कार्रवाई कौन करेगा। फाइलें एक विभाग से दूसरे में घूमती रहती थीं, जिससे लोगों को समय पर सेवा नहीं मिलती थी। नई व्यवस्था में सभी सीमाएं एकसमान होंगी, जिससे भ्रम खत्म होगा और काम की रफ्तार बढ़ेगी। हर जिले में बनेगा मिनी सचिवालय सरकार के अनुसार, 13 जिलों के साथ अब कुल 39 सब-डिविजन होंगे। हर जिला मुख्यालय पर एक मिनी सचिवालय बनाया जाएगा, जिसमें:    SDM कार्यालय     ADM     तहसील     सब-रजिस्ट्रार ऑफिस     राजस्व से जुड़ी सभी सेवाएं एक ही इमारत में उपलब्ध होंगी। इससे लोगों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। संपत्ति रजिस्ट्रेशन होगा आसान नए ढांचे के तहत सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की संख्या बढ़ेगी और इन्हें सीधे सब-डिविजन से जोड़ा जाएगा। इससे:     मकानों और जमीन के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तेज होगी     रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन बेहतर होगा     नागरिकों को दूर-दूर जाकर कागज जमा नहीं कराने होंगे सरकार का दावा: सेवाएं होंगी तेज, जवाबदेही होगी मजबूत दिल्ली सरकार का कहना है कि इस कदम से:     विभागों में तालमेल बढ़ेगा     शिकायतों का निस्तारण तेजी से होगा     अधिकारियों पर कार्यभार संतुलित रहेगा     शहर की शहरी योजना और आपदा प्रबंधन बेहतर होगा     भूमि रिकॉर्ड में पारदर्शिता आएगी सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से प्रशासन और नागरिकों के बीच दूरी कम होगी और सेवा वितरण पहले से अधिक सरल और विश्वसनीय बन जाएगा। 2012 के बाद सबसे बड़ा बदलाव दिल्ली में इससे पहले वर्ष 2012 में बड़ा प्रशासनिक पुनर्गठन हुआ था, जब जिलों की संख्या 9 से बढ़ाकर 11 की गई थी। लंबे समय से विशेषज्ञ और विभिन्न समितियां यह सुझाव दे रही थीं कि लगातार बढ़ती आबादी के चलते ज्यादा और छोटे जिलों की जरूरत है। अब 13 जिलों का यह नया मॉडल राजधानी की प्रशासनिक प्रणाली को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।  

16 से 29 दिसंबर तक उमर खालिद को इंटरिम बेल, अदालत का बड़ा फैसला

नई दिल्ली  दिल्ली दंगा मामले में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को कड़कड़डूमा कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने गुरुवार को उनकी ओर से दायर उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने अपनी बहन के निकाह में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी। सुनवाई के बाद, अदालत ने खालिद को 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक अंतरिम जमानत प्रदान की है। खालिद की बहन का निकाह 27 दिसंबर को होना है और याचिका में 14 दिसंबर से 29 दिसंबर तक की जमानत अवधि मांगी गई थी। हालांकि, अदालत ने खालिद को 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक की अंतरिम जमानत मंजूर की है।  अदालत ने अंतरिम रिहाई के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं, जिनमें उमर खालिद सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे, किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे और केवल परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, और करीबी दोस्तों से ही मिल सकेंगे। रिहाई के दौरान खालिद अपने घर पर ही रहेंगे या केवल उन स्थानों पर जा सकेंगे जहां शादी की रस्में और कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अलावा, उन्हें 29 दिसंबर की शाम तक सरेंडर करना होगा। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2020 में उमर खालिद को गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने फरवरी 2020 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रची थी। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। खालिद के साथ शरजील इमाम और कई अन्य लोगों पर भी इसी मामले में साजिशकर्ता होने का आरोप है। दिल्ली दंगे में कई लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा की शुरुआत सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी, जहां कई स्थानों पर हालात बेकाबू हो गए थे। पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (जो दिल्ली पुलिस का पक्ष रख रहे हैं) ने कहा था कि 2020 की हिंसा कोई अचानक हुई सांप्रदायिक झड़प नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करने के लिए सुविचारित, सुनियोजित और योजनाबद्ध षड्यंत्र था। उन्होंने कहा था कि हमारे सामने यह कहानी रखी गई कि एक विरोध प्रदर्शन हुआ और उससे दंगे भड़क गए। मैं इस मिथक को तोड़ना चाहता हूं। यह स्वतःस्फूर्त दंगा नहीं था, बल्कि पहले से रचा गया था, जो सबूतों से सामने आएगा। मेहता ने दावा किया था कि जुटाए गए सबूत (जैसे भाषण और व्हाट्सएप चैट) दिखाते हैं कि समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की स्पष्ट कोशिश की गई थी। उन्होंने विशेष रूप से शरजील इमाम के कथित भाषण का जिक्र करते हुए कहा था कि इमाम कहते हैं कि उनकी इच्छा है कि हर उस शहर में चक्का जाम हो जहां मुसलमान रहते हैं।

शीतकालीन व बजट सत्र दिल्ली से बाहर करने की मांग तेज, सांसद ने दिए नए विकल्प

नई दिल्ली  बीजू जनता दल के सांसद मानस रंजन मंगराज ने मांग की है कि संसद का सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल बहुत अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में संसद का शीतकालीन सत्र और बजट सत्र दिल्ली से बाहर लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हर साल ही हवा खराब हो जाती है और यह आपदा मानव जनित है। शून्य काल के दौरान ओडिशा के सांसद ने कहा कि दिल्ली में पलूशन हर साल ही बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए ओडिशा जैसा फॉर्मूला अपनाना चाहिए। मानस मंगराज ने कहा कि ओडिशा में प्राकृतिक आपदाओं से हर साल ही सरकार निपटती है और कभी कोई बड़ा संकट सामने नहीं आता। उन्होंने कहा, 'हम ओडिशा से आते हैं। एक ऐसा राज्य जहां अकसर चक्रवात आते हैं और बाढ़ आती है। इसके अलावा अन्य आपदाएं भी आती हैं। इनसे हम नियमित तौर पर निपटते हैं। इसलिए हम समझते हैं कि दिल्ली में यह कैसा संकट है। लेकिन दिल्ली का संकट हमें परेशान करता है।' उन्होंने कहा कि दिल्ली में सांसदों को पलूशन का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा संसद सदस्यों के साथ लगे कर्मचारियों को भी इसका सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम इन लोगों की परेशानी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। यह सामान्य नहीं है, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाए। मानस मंगराज ने कहा कि ऐसे कई शहर हैं, जहां की हवा साफ है। ऐसी स्थिति में वहां पर संसद का सेशन चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर, हैदराबाद, गांधीनगर, बेंगलुरु, गोवा और देहरादून में सत्र चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि चक्रवात की स्थिति में ओडिशा से कुछ घंटों के अंदर ही लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है तो फिर भारत सरकार भी लोगों की सेहत का ध्यान रखने के लिए सांसदों और अन्य स्टाफ को दूसरी लोकेशन पर ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रस्ताव में किसी तरह की राजनीति नहीं है। यह हमारे जीवन और गरिमा का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि संसद से ही यह राह निकलनी चाहिए, जिससे संदेश जाए कि जीवन का अधिकार सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि हर साल ही दिल्ली में सर्दियां ऐसी रहती हैं। इसके लिए कुछ ऐक्शन प्लान बनाना ही होगा।

दिल्ली-NCR में तैयार हुआ देसी ‘आयरन डोम’, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम से दुश्मन को मिलेगी कड़ी चुनौती

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली को दुश्मन के हवाई खतरों से बचाने के लिए एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है. दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को मिसाइलों, ड्रोनों और तेज गति वाले विमानों से सुरक्षित करने के लिए स्वदेशी इंटीग्रेटिड एयर डिफेंस वेपन सिस्‍टम (IADWS) की तैनाती की जा रही है. IADWS एक मल्‍टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्‍टम है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने इसके तहत कुल तीन प्रमुख सिस्‍टम विकसित किए हैं। पहला- क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM), दूसरा- एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) और तीसरा- डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW)। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के दौरान देश को कथित तौर पर निशाना बनाने की कोशिश की थी. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार पहले भारत अमेरिकी NASAMS-II खरीदने की योजना बना रहा था, लेकिन कीमत काफी ज्‍यादा होने के कारण स्वदेशी प्रणाली को प्राथमिकता दी गई. 1. क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM) • खासियत: यह एक कैनिस्टर-आधारित मिसाइल प्रणाली है. यह एक मोबाइल सिस्‍टम है, जिसका मतलब है कि इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है. यह प्रणाली पहला निशाना दागने में बहुत कम समय लेती है. • रेंज: QRSAM की मारक क्षमता लगभग 25 से 30 किलोमीटर तक है. यह कम दूरी पर मौजूद विमानों और ड्रोनों के लिए एक घातक हथियार है. • फायदे: यह दुश्मन के कम-ऊंचाई वाले विमानों और क्रूज मिसाइलों को तुरंत नष्ट कर सकती है. इसकी त्वरित प्रतिक्रिया इसे अचानक हमले से बचाव के लिए आदर्श बनाती है. 2. एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) • खासियत: VSHORADS एक पोर्टेबल (Portable) मिसाइल प्रणाली है. इसे एक व्यक्ति या छोटे समूह द्वारा कंधे पर रखकर भी संचालित किया जा सकता है. यह पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सैन्य टुकड़ियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है. • रेंज: इसकी मारक क्षमता बहुत कम दूरी की होती है, आमतौर पर 6 से 8 किलोमीटर तक. यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों के लिए सटीक है. इसे रिसर्च सेंटर इमारात (RCI) द्वारा विकसित किया गया है. • फायदे: यह दुश्मन के हेलिकॉप्टरों और छोटे यूएवी (ड्रोन) को नजदीक आने से पहले ही मार गिराती है. इसकी स्वदेशी इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक इसे अत्यधिक प्रभावी बनाती है. 3. डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) – लेजर तकनीक • खासियत: यह हाई-पावर वाली लेजर-आधारित प्रणाली है. इसे सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (CHESS) द्वारा विकसित किया गया है. यह प्रणाली परंपरागत मिसाइलों के विपरीत, किरणों का उपयोग करके लक्ष्य को नष्ट करती है. • रेंज: DEW की रेंज लक्ष्य और लेजर की शक्ति पर निर्भर करती है, लेकिन यह ड्रोन जैसे खतरों को करीबी से मध्यम दूरी पर निष्क्रिय कर सकती है. • फायदे और कीमत: यह प्रणाली गोला-बारूद पर निर्भर नहीं करती. इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रति-शॉट लागत बहुत कम होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह बिजली का उपयोग करती है. यह सैकड़ों ड्रोनों को तेजी से बेअसर कर सकती है, जिससे पारंपरिक मिसाइलों की हाई-कॉस्‍ट बचती है. IADWS की शक्ति और सफल परीक्षण IADWS का नियंत्रण एक केंद्रीय कमांड और नियंत्रण केंद्र द्वारा किया जाता है. 23 अगस्त 2025 को ओडिशा के तट पर इसका सफल परीक्षण किया गया था. परीक्षण के दौरान, QRSAM, VSHORADS और हाई एनर्जी लेजर ने एक साथ तीन अलग-अलग लक्ष्यों (दो तेज गति वाले यूएवी और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन) को अलग-अलग रेंज और ऊंचाई पर नष्ट कर दिया था. भारतीय वायु सेना (IAF) को इस महत्वपूर्ण परियोजना की जिम्‍मेदारी दी गई है. यह प्रणाली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा करेगी. DRDO उत्पादन एजेंसियों के साथ मिलकर नेटवर्किंग और कमांड एवं नियंत्रण प्रणालियों पर काम कर रहा है.

पर्यटन और सुशासन को गति देने दिल्ली में शुरू हुआ बड़ा मिशन: रेखा गुप्ता का बयान चर्चा में

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि राजधानी की वैश्विक छवि का पुनर्निर्माण करने और पर्यटन को मजबूत करने के लिए बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। गुप्ता ने जोर देकर कहा कि काफी समय से लंबित व्यवस्थागत समस्याओं का समन्वित शासन के माध्यम से अंततः समाधान किया जा रहा है। गुप्ता ने कहा कि ‘विकसित दिल्ली, विकसित पर्यटन' की परिकल्पना दिल्ली को ऐसी विश्व स्तरीय राजधानी के रूप में स्थापित करने की सरकार की नयी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो पर्यटकों में भरोसा पैदा करती हो। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से स्वीकृतियों की बहुलता जैसी पुरानी समस्याओं ने दिल्ली की आर्थिक और पर्यटन क्षमता को धीमा कर दिया था, लेकिन शासन में बेहतर तालमेल के कारण अब ये बाधाएं दूर हो रही हैं। गुप्ता ने यहां एक शिखर सम्मेलन में मीडिया से कहा, ‘‘आज हम इन समस्याओं का समाधान कर सकते हैं क्योंकि भाजपा तीनों स्तरों पर सरकार में है। इस मुकाम तक पहुंचने में हमें 27 साल लग गए। हमारे पास लंबे समय से चली आ रही कठिनाइयों को दूर करने का अंतत: अब अवसर है।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘‘लोगों और व्यवस्था की समस्याओं को पूरी तरह समझते हैं।'' गुप्ता ने हाल में हुए प्रशासनिक सुधारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार ने प्रतिष्ठानों के लिए पुलिस लाइसेंस समाप्त कर दिए हैं और वह अब तृतीय-पक्ष ऑडिट के माध्यम से अग्नि सुरक्षा लाइसेंस जारी करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य एकाधिकार को समाप्त करना और देरी को कम करना है। उन्होंने कहा, ‘‘हम व्यवस्था को सरल बनाने के लिए काम कर रहे हैं ताकि व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र अनावश्यक बाधाओं के बिना विकसित हो सकें।''   

वीर सावरकर अवॉर्ड पर शशि थरूर का खुलासा—क्या कांग्रेस सांसद होंगे सम्मानित?

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को एक ट्वीट के जरिए यह खुलासा किया है कि उन्हें दिल्ली में आज दिए जाने वाले “वीर सावरकर अवॉर्ड” के बारे में न तो कोई आधिकारिक सूचना मिली है और न ही उन्होंने इसे स्वीकार किया है। थरूर ने लिखा कि उन्हें केवल मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि उनका नाम पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में शामिल किया गया है। थरूर ने बताया कि वे स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान के लिए केरल गए थे, जहां उन्हें पहली बार इस अवॉर्ड के बारे में मीडिया से पता चला। उन्होंने कहा, “मैं न इस अवॉर्ड से अवगत था, न ही इसे स्वीकार किया है। आयोजकों द्वारा मेरी सहमति के बिना मेरा नाम घोषित करना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है।” उन्होंने कहा, “अवॉर्ड की प्रकृति, आयोजकों या किसी भी संदर्भ के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में कार्यक्रम में भाग लेने या अवॉर्ड स्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं उठता।” आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए आयोजित राजकीय भोज में “गर्मजोशी भरा और आत्मीय” माहौल था तथा कई लोगों से बातचीत करना आनंददायक था। थरूर की यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पुतिन के सम्मान में दिए गए भोज के एक दिन बाद आई थी। थरूर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "शुक्रवार रात राष्ट्रपति पुतिन के लिए राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज में शामिल हुआ। माहौल बेहद गर्मजोशी भरा और आत्मीय था। वहां उपस्थित कई लोगों से बातचीत करने का आनंद लिया, खासतौर पर रूसी प्रतिनिधिमंडल से आए साथी बेहद अच्छे थे।’’  

लोकसभा में सुले के तीखे सवाल: महाराष्ट्र के चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने मंगलवार को लोकसभा में चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अब तटस्थ नहीं रह गया है, भ्रष्टाचार और हिंसा को रोकने में नाकाम रहा है, और सिस्टम में मौजूद खामियों को नजरअंदाज कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा के दौरान सुले ने कहा कि आम जनता का चुनाव आयोग से भरोसा कम हो गया है। लोग मानने लगे हैं कि आयोग अब निष्पक्ष नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग नफरत फैलाने वाले भाषणों को रोकने में असफल रहा और डिजिटल दुनिया में फैल रही झूठी खबरें, डीपफेक और लक्षित प्रचार को रोक नहीं पा रहा। सुले ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भी राजनीतिक झुकाव वाली होती जा रही है, जिससे संस्था की विश्वसनीयता कमजोर हो रही है। उनका कहना है कि राजनीतिक पार्टियां रोजाना खर्च की सीमा को तोड़ती हैं और आयोग इससे आंखें मूंद लेता है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि चुनावी गलतियां खासकर शहरी गरीबों, प्रवासियों और हाशिए पर रहने वाले समूहों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने वीवीपीएटी सत्यापन प्रक्रिया की भी आलोचना की और कहा कि यह बहुत सीमित और अपारदर्शी है। अधिकारियों के तबादले भी अक्सर राजनीतिक लगाव वाले लगते हैं। सुले ने तंज कसते हुए कहा, "क्या चुनाव आयोग लोकतंत्र की रक्षा करेगा, या लोकतंत्र को खुद अपनी रक्षा करनी पड़ेगी?" सुले ने महाराष्ट्र की हालिया पंचायत चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि स्थिति बहुत ही गंभीर थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में खुलेआम कैश बांटा गया। उ उन्होंने यह भी कहा कि नामांकन और नाम वापसी में गड़बड़ी की गई, हिंसा रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई, वाहनों को तोड़ा गया, बंदूकें दिखाई गईं, और ईवीएम के लॉक तक तोड़े गए। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में कोई चुनाव आयोग नहीं है।" सुले ने साफ किया कि चुनाव आयोग को लोकतंत्र का तटस्थ रक्षक बनना चाहिए, न कि सरकार का सहायक।

किसकी मेहंदी में पहुंचीं थीं जया किशोरी?, मेहंदी लगाए नजर आईं, तेजी से तस्वीर हो रही वायरल

नई दिल्ली  जया किशोरी एक प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और कथावाचक हैं, जो अपने वीडियोस के जरिए सोशल मीडिया पर भी खूब लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया पर हाल ही में जया किशोरी की एक तस्वीर तेजी से वायरल हुई, जिसमें वह मेहंदी लगवाती नजर आ रही हैं। फोटो देखते ही कई लोगों ने यह मान लिया कि शायद जया किशोरी की शादी हो रही है। हालांकि यह अनुमान बिल्कुल गलत साबित हुआ। यह मेहंदी समारोह जरूर था, लेकिन किसी और का और जया किशोरी सिर्फ गेस्ट के तौर पर शामिल हुई थीं। किसकी मेहंदी में पहुंचीं थीं जया किशोरी? यह तस्वीर कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय की मेहंदी सेरेमनी की है। वे प्रसिद्ध कथावाचक कृष्णचंद शास्त्री ठाकुर के बेटे हैं। इस समारोह में कई अतिथि पहुंचे थे, जिनमें जया किशोरी भी शामिल थीं। उन्होंने भी मेहंदी लगवाई, जिसकी तस्वीर अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। जया किशोरी की मेहंदी डिजाइन क्यों बनी चर्चा का विषय? फोटो में देखा जा सकता है कि मेहंदी आर्टिस्ट जया किशोरी की हथेली के मध्य में एक खूबसूरत गोल फूल जैसा डिजाइन बना रही हैं। यह डिजाइन मंडला पैटर्न पर आधारित है, जिसमें बीच में छोटा सा सर्कल और उसके चारों ओर पंखुड़ियों जैसी बारीक आकृतियां बनाई गई हैं। हल्की अरबीक स्टाइल की रेखाएं और छोटे-छोटे डॉट्स इस मेहंदी को बेहद सरल, सुघड़ और आकर्षक बनाते हैं।

राउज एवेन्यू कोर्ट का सोनिया गांधी को नोटिस, 1980 वोटर लिस्ट में बिना नागरिकता नाम जोड़ने का सवाल

नई दिल्ली दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया है। यह मामला 1980 की मतदाता सूची में उनके नाम के कथित अनधिकृत रूप से जुड़ा होने को लेकर है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह र्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और जालसाजी का मामला हो सकता है। अदालत 6 जनवरी 2026 को मामले पर अगली सुनावाई करेगी। यह विवाद 1980 के मतदाता पंजीकरण से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में प्राप्त की थी। उनका यह भी कहना है कि 1982 में उनका नाम हटाया गया और 1983 में नागरिकता के बाद फिर जोड़ा गया, जोकि संदिग्ध है। कोर्ट ने सोनिया गांधी को भेजा नोटिस यह विवाद दशकों पुराना है लेकिन हाल ही में फिर से सुर्खियों में आया है। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज की थी, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग की गई थी। मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने 11 सितंबर को इस शिकायत को खारिज कर दिया था। लेकिन इसके बाद विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दाखिल की। इसपर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी। ये है मामला याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी के अनुसार, सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की 1980 की मतदाता सूची में शामिल किया गया था। लेकिन उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। इस याचिका में सवाल किया गया है कि जब नागरिकता तीन साल बाद मिली तो 1980 में उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हुआ। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी का कहना है कि किसी गैर-नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना अपराध है और इस मामले की जांच की जाए कि क्या इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया था। इस मामले में उन्होंने जालसाजी की आशंका भी जताई है।