samacharsecretary.com

दिल्ली महापौर चुनाव: भाजपा ने 156 वोटों से दर्ज किया शानदार जीत

नई दिल्ली भाजपा के उम्मीदवार प्रवेश वाही दिल्ली नगर निगम के नए महापौर निर्वाचित हुए हैं। प्रवेश वाही तीन बार से पार्षद रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने महापौर और उपमहापौर पद पर उम्मीदवार नहीं उतारा है जबकि भाजपा ने आनंद विहार से पार्षद मोनिका पंत ने उपमहापौर पद के लिए उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस ने कबीर नगर से पार्षद जरीफ को महापौर पद और मुबारकपुर से पार्षद राजेश कुमार गुप्ता ने उपमहापौर पद उम्मीदवार बनाया है। प्रवेश वाही तीन बार से पार्षद रहे हैं। इसके साथ ही अब उपमहापौर और सदन से स्थायी समिति के सदस्यों का भी चयन होगा। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने महापौर चुनाव के लिए कार्यवाही को लेकर पूर्व महापौर एवं मुखर्जी नगर से पार्षद राजा इकबाल सिंह को पीठासीन अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया। महापौर चुनाव में सभी सांसदों और भाजपा में शामिल राज्य सदस्य स्वाति मालीवाल और भाजपा के 11 मनोनीत विधायक और सभी पार्षदों ने मतदान किए। भाजपा ने आनंद विहार से पार्षद मोनिका पंत ने उपमहापौर पद के लिए उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस ने कबीर नगर से पार्षद जरीफ को महापौर पद और मुबारकपुर से पार्षद राजेश कुमार गुप्ता ने उपमहापौर पद उम्मीदवार बनाया है। ये है बहुमत महापौर चुनाव गुप्त मतदान द्वारा होता है। इसमें पार्षदों पर दल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता है। कुल 249 पार्षद, सात सांसद व तीन राज्य सभा सदस्य व 14 मनोनीत विधायक के तहत कुल 273 वोट हैं। इसके तहत 137 वोटों का बहुमत होता है। ग्रीन पार्क से पार्षद सरिता फोगाट का कुछ महीने पहले कैंसर से मृत्यु हो जाने के कारण यह वार्ड खाली है। इसके तहत कुल 249 पार्षद हैं। AAP के ये है सदस्य आप के पास 100 पार्षद, तीन मनोनीत विधायक और दो राज्य सभा सदस्य संजय सिंह और एन डी गुप्ता हैं। कुल मतदान हुए – महापौर चुनाव के लिए कुल 165 मतदान हुए – महापौर के लिए भाजपा को 156 मतदान मिले – कांग्रेस को 9 मतदान मिले – इनवेलिड वोट शून्य पड़े प्रवेश वाही का सफर – पूर्वी उत्तरी दिल्ली नगर निगम में – तीन बार जोन के चेयरमैन, स्थाई समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, रोहिनी बी वार्ड से अभी पार्षद है। BJP के पक्ष में 142 वोट, बहुमत से पांच ज्यादा भाजपा के 123 पार्षद हैं। जबकि आम आदमी पार्टी के 100 पार्षद हैं। इसके अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के 15 पार्षद, कांग्रेस के नौ पार्षद, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक से एक पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा के सभी 123 पार्षदों, सातों सांसद व 11 विधायकों को मिलाकर स्वाति मालीवाल के हाल ही भाजपा में शामिल होने से कुल 142 वोट हैं। जिसके तहत भाजपा द्वारा बहुमत का आंकड़ा आराम से छुआ जा रहा हैं।

मैजेंटा लाइन पर ट्रेनों में देरी, ऑटोमैटिक गेट नहीं खुल रहे, यात्री फंसे

नई दिल्ली दिल्ली मेट्रो के इलेक्ट्रिक सिग्नल फेल होने की खबर सामने आ रही है। इसके चलते हौज खास से बोटेनिकल गार्डन की ओर जाने वाली ट्रेन आधा घंटे से रुकी हुई है। बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रिक बोर्ड पर अगली मेट्रो के आने का समय 129 मिनट दिखाई दे रहा है। DMRC ने बताया मैजेंटा लाइन पर है समस्या DMRC ने भी अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से इसकी जानकारी दी है। DMRC ने सर्विस अपडेट जारी करते हुए लिखा- “सिग्नलिंग की समस्या के कारण कालकाजी मंदिर और बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशनों के बीच मैजेंटा लाइन पर ट्रेन सर्विस में देरी हुई। बाकी सभी लाइनों पर सर्विस नॉर्मल हैं।” मेट्रो गेट खुल रहे, लेकिन ऑटोमैटिक बैरियर बंद अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, मेट्रो के गेट स्टेशन पर मेट्रो के गेट खुल रहे हैं। लेकिन, गेट के सामने लगे ऑटोमैटिक बैरियर नहीं खुल रहे, इस कारण कोई यात्री न ही मेट्रो से उतर पा रहा है और न ही चढ़ पा रहा है। इसके साथ ही पता चला है कि मेजेंटा लाइन पर करीब 40 मिनट में मेट्रो ने केवल 2 स्टेशन तय किए हैं।      मेट्रो कोच के स्क्रीन बोर्ड में दिखा- स्टेशन होल्ड दानिश रहमान नामक एक्स यूजर ने DMRC के ट्वीट पर जवाब में एक फोटो शेयर की हैं। फोटो मेट्रो के कोच की है। भीड़-भाड़ के बीच स्क्रीन बोर्ड पर लिखा दिखाई दे रहा है- "डिले" स्टेशन होल्ड। इस यात्रा सेवा में थोड़ा विलंब होगा। इस असुविधा के लिए खेद है। यूजर ने लिखा- कोई ट्रेन नहीं चल रही DMRC के ट्वीट पर मोहन कुमार नामक यूजर ने भी जवाब दिया। उन्होंने कई तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने लिखा- कालिंदी कुंज मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो सर्विस में देरी हो रही है। कोई ट्रेन नहीं चल रही है। यात्री प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहे हैं। DMRC इस समस्या को ठीक करने के लिए काम कर रहा है।  

BJP की धाक दिल्ली नगर निगम में, प्रवेश वाही बने मेयर, मोनिका पंत डिप्टी मेयर

नई दिल्ली दिल्ली नगर निगम की सियासत में बुधवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रवेश वाही को नया मेयर चुना गया. पीठासीन अधिकारी राजा इकबाल सिंह ने प्रवेश वाही के मेयर चुने जाने की आधिकारिक घोषणा की. रोहिणी ईस्ट से पार्षद प्रवेश वाही ने कुल 156 वोट हासिल किए, जिनमें इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 14 पार्षदों का भी समर्थन शामिल रहा. वहीं कांग्रेस उम्मीदवार हाजी जराफ को महज 9 वोट मिले।  आनंद विहार से बीजेपी पार्षद मोनिका पंत को 156 वोटों के साथ डिप्टी मेयर चुना गया. स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) के लिए बेगमपुर से पार्षद जय भगवान यादव और पहाड़गंज से पार्षद मनीष चड्ढा निर्वाचित हुए, जबकि शालीमार बाग से पार्षद जलज चौधरी भी इस पैनल में चुने गए. मेयर चुने जाने के बाद प्रवेश वाही ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि आने वाले महीनों में दिल्ली को साफ-सुथरा बनाने और विकास कार्यों को गति देने पर जोर दिया जाएगा।  उन्होंने कहा, 'हम दिल्ली को स्वच्छ बनाएंगे और विकास के लिए निरंतर काम करेंगे.' इस बार मेयर चुनाव के लिए कुल 273 वोटों का इलेक्टोरल कॉलेज था, जिसमें 249 पार्षद, दिल्ली विधानसभा द्वारा नामित 14 विधायक, 7 लोकसभा सांसद और 3 राज्यसभा सदस्य शामिल थे. जीत के लिए 137 वोटों की जरूरत थी, जिसे बीजेपी उम्मीदवार ने आसानी से पार कर लिया. दिलचस्प बात यह रही कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस चुनाव से दूरी बनाई और मतदान में हिस्सा नहीं लिया।  आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह फैसला बीजेपी को एमसीडी की जिम्मेदारी संभालने देने और उसके कामकाज को जनता के सामने उजागर करने के लिए लिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के सभी स्तरों पर होने के बावजूद बीजेपी दिल्ली में कोई बड़ा बदलाव नहीं ला सकी है. इससे पहले नवंबर 2024 में आम आदमी पार्टी के महेश कुमार खिंची बेहद करीबी मुकाबले में तीन वोटों से मेयर चुने गए थे. बता दें कि 22 मई 2022 को पूर्वी दिल्ली नगर निगम, उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को एकीकृत कर एक ही संस्था- दिल्ली नगर निगम (MCD) का गठन किया गया था। 

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस के वर्चुअल मीटिंग में पोर्न वीडियो चला, आनन-फानन में रोकनी पड़ी बैठक

नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अदालत में आज (बुधवार, 29 अप्रैल को) कुछ ऐसा हुआ, जिसे देखकर सब दंग रह गए। दरअसल, जब चीफ जस्टिस देवेंद्र उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने नियमित मामलों की सुनवाई शुरू की तो वर्चुअली यानी ऑनलाइन तरीके से जुड़े एक अनजान यूजर ने अपनी स्क्रीन पर पोर्न वीडियो चलाना शुरू कर दिया और उसे शेयर कर दिया। इसे देख कोर्ट रूम में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में वर्चुअल मीटिंग (VC) को बंद करना पड़ा। जब कुछ देर बाद दोबारा ऑनलाइन कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई तो फिर से उस शख्स ने पोर्न वीडियो चलाना शुरू कर दिया। ऐसा होता देख कोर्ट के अधिकारियों ने VC को बंद कर दिया गया और फिर उसे ऑन नहीं किया गया। जानकारी के मुताबिक, ये पोर्न वीडियो वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग (VC) सिस्टम के जरिए अमेरिका से ब्रॉडकास्ट किए गए थे। ये कंटेंट श्रीधर सरनोबत और शीतजीत सिंह नाम के यूजर के अकाउंट से चलाए गए। हालांकि, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि होनी बाकी है। पीछे से आवाज भी आ रही थी बार एंड बेंच के मुताबिक, पोर्न वीडियो के साथ ही पीछे से आवाज भी आ रही थी, "यह यूनाइटेड स्टेट्स से किया गया एक हैक है। मीटिंग को अभी तुरंत बंद कर दो। इसे दोबारा कभी चालू मत करना। तुम हैक हो चुके हो।" दिल्ली हाई कोर्ट में इस तरह की यह पहली घटना है। ये वाकया दोपहर करीब 12:56 बजे हुई। बता दें कि चीफ जस्टिस की अदालत में बुधवार का दिन जनहित याचिकाओं (PIL) की सुनवाई के लिए तय होता है, और आज बेंच के सामने सुनवाई के लिए लगभग 100 मामले हैं। मामले की जांच जारी है इस घटना के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) इंटरफेस पर संभावित साइबर अटैक की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि पोर्न वीडियो दो बार चलने से कोर्ट रूम में मौजूद जज, वकील, कोर्ट अफसर और अन्य लोग हैरान रह गए। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और जिम्मेदारी तय किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

पाकिस्तान-बांग्लादेश-नेपाल कनेक्शन वाले नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई

नई दिल्ली सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। एजेंसियां पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से जुड़े एक संदिग्ध सीमा-पार गिरोह की जांच कर रही हैं। कुल 9 गुर्गे गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से 18 आधुनिक हथियार बरामद किए हैं। यह गैंग पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के संपर्कों के जरिए मुंगेर के रास्ते कई राज्यों में हथियार पहुंचाने की फिराक में था। इस मामले में एनआईए के वांछित आरोपी शाहबाज अंसारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सनद रहे हाल ही में नोएडा से भी दो गैंगस्टरों को पकड़ा गया है जो सीधे तौर पर आईएसआई के इशारे पर काम कर रहे थे। ये लोग सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को भड़काने, स्लीपर सेल बनाने और महत्वपूर्ण जगहों की रेकी करने में शामिल थे। इनका मुख्य उद्देश्य भारत की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना और टारगेट किलिंग को अंजाम देना था। सूत्रों ने बताया कि आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय राजधानी को दहलाने की एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया है। इस मामले में पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से जुड़े एक संदिग्ध सीमा पार गिरोह की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने नौ कथित गुर्गों से 18 आधुनिक हथियार बरामद किए हैं। ये लोग मुंगेर के रास्ते इन हथियारों को कई राज्यों में पहुंचाने की योजना बना रहे थे। सूत्रों ने बताया कि मामले में शाहबाज अंसारी की भूमिका भी जांच की जा रही है। शाहबाज अंसारी सिद्धू मूसेवाला हथियार सप्लाई मामले में NIA का वॉन्टेंड आरोपी है। वह यूपी के खुर्जा का रहने वाला है। यह घटनाक्रम पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी के बाद सामने आया है। 22 अप्रैल, 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 25 भारतीयों और एक नेपाली नागरिक की जान चली गई थी। बीते 24 अप्रैल को यूपी एटीएस ने नोएडा से 2 ऐसे गैंगस्टरों को अरेस्ट किया जो पाकिस्तान में बैठे आकाओं और ISI के इशारे पर काम कर रहे थे। संदिग्धों की पहचान तुषार चौहान (उर्फ हिज्बुल्लाह अली खान, 20 वर्ष) और समीर खान के रूप में हुई है। इन संदिग्धों को एक पिस्टल, जिंदा कारतूस और एक चाकू के साथ पकड़ा गया था। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई थी। सूत्रों के अनुसार, ये गैंगस्टर ISI के निर्देशों पर भारत की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में थे। ATS की मानें तो ये आतंकी संगठनों और गैंगस्टरों के साथ मिलकर इंस्टाग्राम और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को बरगलाने में लगे थे। ये दोनों आतंकी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के साथ मिलकर काम करते थे। ये 'स्लीपर सेल' बनाकर टार्गेट किलिंग को अंजाम देने और संवेदनशील जगहों की रेकी करने की फिराक में थे।  

मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता का किया बहिष्कार, केजरीवाल की तरह खत लिखकर किया ऐलान

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया भी अरविंद केजरीवाल की राह पर चल पड़े हैं. दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता का अब मनीष सिसोदिया ने भी बहिष्कार कर दिया है. मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखकर कहा है कि अब वह उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे. न ही उनकी तरफ से कोई वकील पेश होगा. इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिख बताया था कि वह अब कभी उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे।  मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखी और उसमें कहा, ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा. आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथों में है. मुझे न्याय की उम्मीद नहीं है. अब मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.’ यहां ध्यान देने वाली बात है कि अरविंद केजरीवाल ने भी अपनी चिट्ठी में कहा था कि उन्हें अब न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही है. उन्होंने कहा कि उन्हें अब जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही, इसलिए वे न तो खुद अदालत में पेश होंगे और न ही अपने वकील को भेजेंगे।  अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में क्या कहा था? अपने पत्र में अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है. उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का हवाला देते हुए कहा कि अब वे कानूनी लड़ाई के बजाय नैतिक और वैचारिक विरोध का रास्ता अपनाएंगे. अरविंद केजरीवाल ने यह भी संकेत दिया कि उनका यह कदम न्याय व्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों के समर्थन में है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यदि जस्टिस स्वर्णकांता कोई फैसला सुनाती हैं, तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार वे अपने पास सुरक्षित रखेंगे।  जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में क्या हुआ था गौरतलब है कि इससे पहले 20 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई से न्यायमूर्ति को खुद को अलग करने की मांग की थी. अपना निर्णय सुनाते हुए जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि याचिका पर विचार किए बिना सुनवाई से पीछे हट जाना एक आसान विकल्प होता, किंतु उन्होंने संस्थागत शुचिता और गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना उचित समझा।  जस्टिस स्वर्णकांता ने क्या कहा था? जस्टिस स्वर्णकांता ने उल्लेख किया कि जब उन्होंने अपना फैसला पढ़ना शुरू किया, तो न्यायालय कक्ष में पूर्ण निस्तब्धता (सन्नाटा) छा गई थी. न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि उनके समक्ष यह केवल एक कानूनी प्रश्न नहीं था, बल्कि एक ऐसी चुनौती थी जिसने न्यायाधीश और न्यायिक संस्था, दोनों को ‘परीक्षण’ की कसौटी पर खड़ा कर दिया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात को दोहराते हुए कहा था कि जब तक ठोस सबूतों से खंडन न हो जाए, न्यायाधीश की निष्पक्षता को मान लिया जाता है और किसी वादी की महज आशंका या व्यक्तिगत धारणा के आधार पर न्यायाधीश को मामले से अलग नहीं किया जा सकता है।  न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि किसी वादी को ऐसी स्थिति उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे न्यायिक प्रक्रिया का स्तर गिरे. झूठ, चाहे अदालत में या सोशल मीडिया पर, हजार बार दोहराया जाए, सच नहीं बनता. अरविं केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि पक्षपात के दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है, जिनमें अधिवक्ता परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी या उनके परिवार के सदस्यों की पेशेवर व्यस्तता से संबंधित आरोप भी शामिल हैं।   

दोपहर 1 से 4 बजे तक काम बंद, दिल्ली में हीटवेव से बचाव के सख्त कदम

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में आग बरसना शुरू हो गई है। इस भीषण गर्मी से मजदूरों को बचाने के लिए रेखा सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। रेखा सरकार ने छांव, पानी का खास इंतजाम करते हुए कहा है कि दोपहर 1 बजे से 4 बजे के बीच में मजदूर काम नहीं करेंगे। इस दौरान उनकी दिहाड़ी भी नहीं कटेगी। बस शेल्टर्स पर होगी पानी की व्यवस्था रेखा सरकार की तरफ से बताया गया है कि बस शेल्टर्स पर पानी की व्यवस्था होगी। बस में कोल्ड बॉक्स की सुविधा होगी। गर्मी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल तैयार किया जा रहा है। इस काम को अमलीजामा पहनाने के लिए फायर, पावर और जल विभाग पूरी तरह तैयारी में जुटा हुआ है। हीट वेव से लड़कों को दौड़ेंगी 330 एंबुलेंस दिल्ली सीएमओ के एक्स हेंडल पर किए गए ट्वीट की वीडियो में बताया गया है- बाहर निकलने पर हर जगह पानी की सुविधा होगी। हेल्थ सेंटर में ओआरएस उपलब्ध होगा। अस्पताल में बेड होंगे। 330 एंबुलेंस को आपातकालीन समय में हीट वेव ट्रीटमेंट के लिए तैयार किया जाएगा। पूरी दिल्ली में 19000 वाटर कूलर, वाटर एटीएम और वाटर टैंकर की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। जानिए दिल्ली सीएमओ ने क्या कहा इस ट्वीट में लिखा है- भीषण गर्मी और हीटवेव की चुनौती के समय दिल्लीवासियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर स्तर पर व्यापक तैयारी की गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार पूरी संवेदनशीलता, सजगता और मुस्तैदी के साथ कार्य कर रही है।

गौतम बुद्ध नगर में स्कूल सुबह 7:30 से 12:30 तक, डीएम का आदेश लागू

नई दिल्ली नोएडा और आसपास के इलाकों में बढ़ती गर्मी ने अब स्कूलों की दिनचर्या तक बदल दी है। गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने हालात को देखते हुए सभी स्कूलों के समय में बदलाव का आदेश जारी कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब तापमान लगातार ऊपर जा रहा है और ‘लू’ चलने का खतरा भी बढ़ गया है। छोटे बच्चों पर इसका असर जल्दी पड़ता है, इसलिए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है। नई टाइमिंग क्या है और कब से लागू होगी जारी आदेश के मुताबिक, अब जिले के सभी स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक ही चलेंगे। यह नया शेड्यूल 27 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है और अगली सूचना तक जारी रहेगा। इसका मकसद साफ है कि बच्चों को दोपहर की तेज धूप और खतरनाक गर्मी से दूर रखा जा सके। सुबह के समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है, जिससे बच्चों के लिए स्कूल जाना सुरक्षित रहेगा। किन-किन स्कूलों पर लागू होगा आदेश यह आदेश सिर्फ सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। जिले में चल रहे सभी स्कूलों पर यह नियम लागू होगा, चाहे वे निजी हों या किसी भी बोर्ड से जुड़े हों। इसमें सीबीएसई, आईसीएसई, आईबी और यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त सभी संस्थान शामिल हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस आदेश का पालन करना हर स्कूल के लिए जरूरी है। लू और हीटवेव का बढ़ता खतरा उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान ‘लू’ यानी गर्म और सूखी हवाएं चलना आम बात है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग लगातार चेतावनी दे रहा है कि दोपहर के समय बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में स्कूल जैसे जगह, जहां बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ मौजूद होते हैं, खासतौर पर संवेदनशील माने जाते हैं। इसी वजह से प्रशासन ने समय बदलकर जोखिम कम करने की कोशिश की है। दिल्ली स्कूलों में भी सख्त कदम गर्मी से निपटने के लिए दिल्ली के स्कूलों में भी कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। वहां ‘वॉटर बेल’ सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें हर 45 से 60 मिनट के बीच बच्चों को पानी पीने की याद दिलाई जाती है। इसके अलावा, खुले मैदान में होने वाली असेंबली और आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। स्कूलों को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया है, जो इन नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। बच्चों के लिए जरूरी सावधानियां गर्मी के इस मौसम में सिर्फ टाइमिंग बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि बच्चों को खुद भी कुछ सावधानियां अपनानी होंगी। जैसे कि ज्यादा पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और धूप में ज्यादा देर तक न रहना। स्कूलों में भी इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि बच्चे डिहाइड्रेशन से बचें और किसी भी तरह की तबीयत खराब होने पर तुरंत जानकारी दें। आगे क्या हो सकता है फैसला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर गर्मी और बढ़ती है तो आगे और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं अगर मौसम में राहत मिलती है, तो स्कूलों के समय को फिर से सामान्य किया जा सकता है। फिलहाल प्राथमिकता बच्चों की सेहत और सुरक्षा को दी जा रही है।

केजरीवाल का बड़ा कदम: जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में नहीं होंगे पेश, सत्याग्रह शुरू

 नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में निचली अदालत ने बरी कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. अब अरविंद केजरीवाल ने यह ऐलान किया है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे।  उन्होंने इसे लेकर जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र भी लिखा है. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है।  दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बेंच बदलने की अपील की थी. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से यह केस सुनना बंद करने की अपील करते हुए दलील दी थी कि उनके मन में पहले से ही अरविंद केजरीवाल के मन में राय बन चुकी है।  अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का हवाला देते हुए कहा था कि जज अगर उस विचारधारा की समर्थक है और मैं विरोधी, तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा?  जस्टिस शर्मा के बहिष्कार को बताया सत्याग्रह आखिरकार सत्य की जीत हुई। अदालत ने मुझे निर्दोष बता दिया। अदालत ने कहा कि केजरीवाल निर्दोष है, केजरीवाल ने कोई भ्रष्टाचार किया। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा कर दिया। जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जी के सामने लगा। तब मेरे मन में बहुत बड़ा सवाल उठा कि क्या मुझे इनके सामने न्याय मिलेगा। इसके कई कारण हैं, लेकिन दो कारण मुख्य हैं, पहला कारण यह है कि आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल में डाला, जज साहिबा ने माना कि उससे जुड़े संगठन के मंचों पर वह जाती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं,ऐसे में क्या मुझे अन्या मिल सकता है। दूसरा कारण हैं हितों का टकराव। कोर्ट में मेरे खिलाफ सीबीआई है, और जस्टिस के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं। हमारे सामने दूसरी तरफ से वकील हैं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वह उनके दोनों बच्चों को केस देते हैं। कितने और कौन से केस मिलेंगे यह तय करते हैं। पैनल में 700 वकील हैं लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे सबसे ज्यादा केस हासिल करने वाले वकीलों में हैं। उनको करोड़ों रुपये फीस में मिले। उनके बच्चों का भविष्य और कमाई तुषार मेहता पर निर्भर है। किसी के मन में स्वभाविक है कि यदि जज साहब के बच्चों का भविष्य वकील तय कर रहा है तो क्या वह उस वकील के खिलाफ फैसला कर पाएंगी। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, बहुत सम्मान करता हूं। जब मेरे खिलाफ गलत साजिश हुई तो न्यायपालिका ने ही न्याय दिया। इसी ने बेल दी। दोषमुक्त करार किया। जब जब देश पर आंच आई न्यायापालिका ने ही बचाया। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता का भी बहुत सम्मान करता हूं। मुझे उनसे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। लेकिन न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है कि ना सिर्फ न्याय हो बल्कि न्याय होता दिखे। इसलिए मैंने उनसे अपील की थी कि वबह खुद को इस केस से अलग कर लें। लेकिन उन्होंने मेरी दलीलें खारिज कर दीं और कहा कि वह खुद सुनेंगी। मेरे सामने आसान रास्ता है कि मैं उनका आदेश मान लूं और एक बड़ा वकील खड़ा करके अपना केस लड़ूं। लेकिन यह मुद्दा सिर्फ मेरे केस का नहीं आम लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे का है। दिविधा के मौके पर बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिया था। अन्याय का सामना करो तो पहला कदम विरोध नहीं बातचीत हो। पूरी विनम्रता से बात रखनी चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी न्याय ना मिले तो अंतरात्मा की बात सूनो। शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए, फिर उसके जो भी परिणाम हो। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले के प्रति गुस्सा, नफरत नहीं होना चाहिए। मैंने भी अपनी बात जस्टिस के सामने रखी, उनसे आग्रह किया कि किसी और जज के द्वारा सुन लिया जाए। उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दीं। उन्होंने कहा कि वह खुद को अलग नहीं करेंगी। उनके इस फैसले से मैं असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और गहरी हो गई है कि क्या मुझे न्याय मिलेगा। बापू के रास्ते पर चलते हुए मैंने फैसला लिया है कि मैं इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता जी के सामने पेश हूंगा और ना ही कोई वकील जाएगा। वह जो भी फैसला सुनाएंगी, मैं सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हूं। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। यदि उनके सामने कोई केस लगता है जिसके विरोध में बीजेपी, केंद्र सरकार या तुषार मेहता नहीं हैं तो मैं उनके सामने पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि मैं उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा हूं। मैं तैयारी कर रहा हूं। कानून और न्यायपालिका के सम्मान को ध्यान में रखकर एक एक कदम उठाना है। मैं यह कदम अहंकार और विद्रोह में नहीं उठा रहा हूं। कानून को चुनौती देना नहीं है। इसी केस में मैंने हर अदालत में सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। देश के न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को बढ़ाना।

जीनोमिक्स क्रांत,AIIMS में भविष्य की चिकित्सा पर चर्चा

 नई दिल्ली बीमारियों का उपचार अब सबके लिए एक जैसा नहीं रहेगा, बल्कि अब यह हर मरीज के जीन (DNA) के आधार पर तय किया जाएगा। इसे प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है, जिसमें उपचार अधिक सटीक, प्रभावी और व्यक्तिगत होता है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं और ज्यादा उन्नत तथा प्रभावी हो जाएंगी। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में ‘डीएनए डे 2026’ पर आयोजित संगोष्ठी में सामने आई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीनोमिक्स (डीएनए आधारित विज्ञान) के उपयोग से भविष्य में उपचार का तरीका बदलने वाला है। चिकित्सक मरीज की जेनेटिक जानकारी के आधार पर बीमारी का बेहतर निदान और सही उपचार कर सकेंगे। जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर संगोष्ठी में जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर दिया गया। संगोष्ठी का आयोजन डीएनए सोसायटी आफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट्स (एसवाईएस-एम्स) ने संयुक्त रूप से कराया। संगोष्ठी में 1953 में डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज और 2003 में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट की पूर्णता को भी रेखांकित किया गया। उद्घाटन सत्र डीएनए सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. अशोक शर्मा ने प्रिसिजन मेडिसिन में जीनोमिक्स की भूमिका पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि, सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आईजीआईबी) के मुख्य वैज्ञानिक प्रो. अभय शर्मा ने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान पर न‌ई जानकारी साझा की। उन्होंने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान के उभरते आयामों को समझाया। कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत मुख्य व्याख्यान में शिव नादर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस के प्रो. संजीव गलांडे ने 'कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत किया। डीएसआइ के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य प्रो. श्रीकांत कुकरेती ने जीनोमिक्स अनुसंधान और क्लिनिकल उपयोग के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता बताई। प्रीमास लाइफ साइंसेज के डा. भास्कर मैती ने स्पैटियल बायोलॉजी और मल्टीओमिक्स तकनीकों के उपयोग को समझाया। 300 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति वाले इस आयोजन में विशेषज्ञों ने ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी पहलों को देश में किफायती और सुलभ जीनोमिक चिकित्सा के लिए अहम बताया।