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हर्षवर्धन कपूर का बड़ा खुलासा: एक्टिंग नहीं छोड़ी, नई फिल्म पर कर रहे हैं काम

मशहूर एक्टर अनिल कपूर के बेटे हर्षवर्धन कपूर अक्सर लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं. वे आखिरी बार फिल्म ‘थार’ में नजर आए थे. इसके बाद लंबे समय तक उनकी कोई नई फिल्म सामने नहीं आई, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ने लगी कि उन्होंने एक्टिंग छोड़ दी है. अब हर्षवर्धन ने खुद सामने आकर इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया है और अपने फैंस को एक बहुत बड़ी खुशखबरी दी है. क्या एक्टिंग छोड़ रहे हैं हर्षवर्धन? खुद दिया जवाब हर्षवर्धन कपूर ने इन अफवाहों का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा. उन्होंने साफ किया, “मैंने एक्टिंग से बिल्कुल भी दूरी नहीं बनाई है, जब से ‘थार’ फिल्म रिलीज हुई थी, मैं उसी दिन से एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हू. ‘थार’ को बनने में 5 साल का समय लगा था. इसी तरह विक्रम को ‘भावेश जोशी’ फिल्म बनाने में कई साल लग गए थे.     हर्षवर्धन ने अपनी अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में बताया अपने आने वाले काम के बारे में बात करते हुए हर्षवर्धन ने बताया कि वे पिछले 2-3 सालों से अपनी अगली फिल्म पर लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा ठीक वैसे ही, मुझे भी इस नई फिल्म को पूरा करने में अब जाकर 2-3 साल लगे हैं, जिसकी शूटिंग आने वाली 30 जून को खत्म होने जा रही है. मैं खुद इस फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रहा हूं. मुझे लगता है कि लोगों को हर साल कलाकारों की कई फिल्में देखने की आदत हो गई है. लेकिन अगर आप ‘भावेश जोशी’, ‘थार’, ‘एके वर्सेस एके’ और ‘रे’ जैसी अलग तरह की फिल्में देखना चाहते हैं, तो यह साल में एक या दो बार मुमकिन नहीं है, यही असल सच्चाई है. खैर, आप सभी का धन्यवाद, और मेरी यह नई फिल्म अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म है, 100 प्रतिशत यह बेहद अनोखी और बिल्कुल अलग है.” कैसा रहा है हर्षवर्धन का फिल्मी सफर? हर्षवर्धन कपूर ने सीधे एक्टिंग से नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे से अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने रणबीर कपूर की फिल्म ‘बॉम्बे वेलवेट’ में एक असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम सीखा था. इसके बाद साल 2016 में उन्होंने ‘मिर्ज्या’ फिल्म से बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा. इसके दो साल बाद वे ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ में नजर आए. इसके बाद उन्होंने नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘एके वर्सेस एके’ और फिर ‘थार’ में अपने एक्टिंग का जलवा दिखाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था.

फायर विभाग की कमी दूर करेंगे अग्निवीर? दिल्ली सरकार कर रही विचार

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार राजधानी में अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए पूर्व अग्निवीरों को दिल्ली फायर सर्विस में परिचालन के पदों पर नियुक्त करने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव सोमवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में सामने आया। इस बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल टीएस संधू ने की। इस बैठक में हाल ही में दक्षिण दिल्ली में लगी भीषण आग में 22 लोगों की मौत के बाद फायर सर्विस की तैयारियों और संसाधनों की समीक्षा की गई। सोमवार को हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह मंत्री आशीष सूद, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा समेत पुलिस और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उपराज्यपाल ने फायर विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए पूर्व अग्निवीरों की सेवाएं लेने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। उपराज्यपाल ने दिया प्रस्ताव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर तरनजीत संधू ने कहा, 'अग्निशमन विभाग के कार्यबल को मजबूत करने के लिए मौजूदा रिक्तियों को भरने की खातिर पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति पर विचार करने का सुझाव दिया।' अधिकारियों ने बताया कि बैठक में अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने, नागरिकों की निगरानी बढ़ाने और रिक्त पदों को भरने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। पूर्व अग्निवीर बनेंगे फायर फाइटर! एक अधिकारी ने बताया, सरकार अब पूर्व अग्निवीरों को फायर फाइटर के रूप में नियुक्त करने की प्रक्रिया, आवश्यक प्रशिक्षण और सेवा शर्तों का खाका तैयार करेगी। अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की चार वर्ष के लिए सशस्त्र बलों में भर्ती की जाती है। 1,030 पद हैं खाली दिल्ली फायर सर्विस लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। विभाग में स्वीकृत 3,633 पदों में से 1,030 पद खाली हैं, जबकि 412 पद संविदा कर्मियों के माध्यम से भरे गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण फायर ऑपरेटर श्रेणी में 2,367 स्वीकृत पदों में से 552 पद रिक्त हैं। विभाग में वर्तमान में 312 संविदा फायर ऑपरेटर कार्यरत हैं। नियमित भर्ती प्रक्रिया आखिरी बार वर्ष 2011-12 में हुई थी। फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा बैठक में राजधानी में फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। वर्तमान में दिल्ली में 71 फायर स्टेशन हैं, जिनमें 67 नियमित और 4 डे-टाइम स्टेशन शामिल हैं। वर्ष 2011 में गृह मंत्रालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन में दिल्ली के लिए 99 फायर स्टेशनों की आवश्यकता बताई गई थी। गृह मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली फायर सर्विस अधिनियम, 2007 की धारा 32 को सख्ती से लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत राजधानी की सभी बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा और अग्नि रोकथाम उपायों को अनिवार्य बनाने की बात कही गई। वर्तमान नियमों के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी आवश्यक है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से अधिक इमारतें अग्नि सुरक्षा के दायरे में आएंगी और लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी।  

दिल्ली-NCR में यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी, Ola-Uber सेवाओं पर 9 दिन का संकट

नई दिल्ली दिल्ली के पड़ोसी राज्य पंजाब के कुछ शहरों के लोगों को 9 से 16 जून तक आवाजाही में दिक्कत झेलनी पड़ सकती है. दरअसल चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में ओला, उबर समेत एप बेस्ड कैब ड्राइवर हड़ताल पर हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैब ड्राइवर्स का ये अंदोलन सुबह 10 बजे से शाम 4 बज तक चलेगा. इस दौरान ये सवारियां लाने-लेजाने का काम नहीं करेंगे. ओला-उबर और इनड्राइव की इस हड़ताल का असर करीब 50 हजार यात्रियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. कैब हड़ताल के बीच लोगों को तेज और जलती धूप के बीच पब्लिक ट्रांसपोर्ट या फिर ऑटो में सफर करना पड़ेगा।  कैब ड्राइवर क्यों कर रहे हड़ताल? पंजाब की राजधानी चंडीगढ़, मोहलाी और पंचकूला के कैब ड्राइवर्स के आंदोलन की वजह किराए की कीमतों में बढ़ोतरी न किए जाना है. ये लोग लगातार किराये में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. कैब ड्राइवर्स के मुताबिक, साल 2025 में चंडीगढ़ प्रशासन ने उनके लिए किराया 25 किमी. प्रति किमी. तय किया था. इसके बाद से कई बार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी महंगा हो चुका है. लेकिन कैब के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया. 1 साल से किराया नहीं बढ़ने से ये लोग नाराज हैं।  किराया 25 रुपये से35 रुपये प्रति किमी. करने की मांग कैब ड्राइवर्स कह रहे हैं कि सीएनजी 9 रुपये महंगी हो चुकी है. पेट्रोल-डीजल भी लगातार महंगा हो रहा है. ऐसे में ये लोग किराया 25 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रति किमी. बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं. ड्राइवर एसोसिएशन का कहना है कि किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर वे लोग कई बार अधिकारियों से मिले लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. इसी वजह से उनको अब हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा है।  दिल्ली-NCR में भी हुई थी ऑटो और टैक्सी भी हड़ताल बता दें कि 21 से 23 मई तक दिल्ली-एनसीआर में भी ऑटो और टैक्सी वालों ने हड़ताल की थी. इसका खामियाजा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के लाखों लोगों को भुगतना पड़ा था. ये हड़ताल इन लोगों ने कमर्शियल वाहनों पर ईसीसी बढ़ाए जाने और BS-4 या उससे पुराने वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर की गई थी. हालांकि ओला, उबर और रैपिड जैसी एप बेस्ड सर्विसेज ने इस समर्थन का सपोर्ट नहीं किया था।  

दिल्ली बर्ड एटलस लॉन्च: 195 लोगों की टीम ने किया 2 साल का सर्वे

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली केवल राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं, बल्कि पक्षियों की असाधारण विविधता का भी महत्वपूर्ण ठिकाना है. दुनिया की राजधानियों में पक्षी प्रजातियों की समृद्धि के मामले में दिल्ली दूसरे स्थान पर मानी जाती है. इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी कि शहर के किस हिस्से में कौन-सी पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं. इस कमी को दूर करते हुए दिल्ली का पहला बर्ड एटलस तैयार किया गया है, जो राजधानी की जैव विविधता का विस्तृत और वैज्ञानिक दस्तावेज माना जा रहा है. दो वर्षों में तैयार हुआ दिल्ली का पहला पक्षी मानचित्र दिल्ली सरकार के वन विभाग और बर्ड काउंट इंडिया के संयुक्त प्रयास से तैयार किए गए इस एटलस का उद्देश्य शहर में पक्षियों के वितरण, उनकी संख्या और उनके आवास से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित रूप से संकलित करना था. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इसका औपचारिक लोकार्पण किया. वैज्ञानिक तरीके से हुआ सर्वे पक्षी सर्वेक्षण को अधिक सटीक बनाने के लिए पूरे दिल्ली क्षेत्र को 6.6 वर्ग किलोमीटर के ग्रिड में विभाजित किया गया. प्रत्येक ग्रिड को आगे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया और उनमें से चयनित क्षेत्रों में विस्तृत अध्ययन किया गया. कुल 145 उपक्षेत्रों में सर्वेक्षण किया गया, जो राजधानी के लगभग 11 प्रतिशत भूभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं. अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया पक्षी विविधता की संतुलित और वैज्ञानिक तस्वीर सामने लाने के लिए अपनाई गई. 195 प्रतिभागियों ने संभाली जिम्मेदारी सर्वेक्षण कार्य में पक्षी विशेषज्ञों, प्रकृति प्रेमियों और बर्डवॉचरों की टीमों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. दो से पांच सदस्यों वाली टीमों ने विभिन्न मौसमों में क्षेत्रीय निरीक्षण किए. सर्दियों और गर्मियों के दौरान कुल चार चरणों में अध्ययन किया गया, जिससे स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रकार के पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की जा सके. इस पूरी प्रक्रिया में 195 प्रतिभागियों ने योगदान दिया. रिकॉर्ड में दर्ज हुईं 221 प्रजातियां एटलस के पहले वर्ष में 221 पक्षी प्रजातियों की पहचान और रिकॉर्डिंग की गई. इनमें सबसे बड़ी संख्या कीटभक्षी पक्षियों की रही, जिनकी 108 प्रजातियां दर्ज की गईं. इसके अलावा 37 प्रजातियां बीज और वनस्पतियों पर निर्भर पाई गईं, जबकि 34 प्रजातियां सर्वाहारी श्रेणी में शामिल रहीं. छोटे जीवों और मृत पशुओं पर निर्भर 33 प्रजातियां भी दर्ज की गईं. फल और फूलों के रस पर निर्भर पक्षियों की संख्या सबसे कम रही और ऐसी केवल 9 प्रजातियां सामने आईं. संकटग्रस्त और दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता और उम्मीद सर्वेक्षण के दौरान कई ऐसी प्रजातियां भी दर्ज की गईं, जिन्हें संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. इनमें ब्लैक-बेलीड टर्न जैसी संकटग्रस्त प्रजाति के अलावा ओरिएंटल डार्टर, एशियाई वूली-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-हेडेड आइबिस और पेंटेड स्टॉर्क जैसे निकट संकटग्रस्त पक्षी भी शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रजातियों की मौजूदगी दिल्ली के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की अहमियत को दर्शाती है. यमुना के बाढ़ क्षेत्र और अरावली बने पक्षी विविधता के बड़े केंद्र विशेषज्ञों के अनुसार अरावली क्षेत्र, यमुना का बाढ़ मैदान, साहिबी नदी के आसपास के इलाके और सेंट्रल एशियन फ्लाइवे जैसे प्राकृतिक कारक दिल्ली को पक्षियों के लिए अनुकूल आवास प्रदान करते हैं. यही वजह है कि राजधानी में बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षी सालभर दिखाई देते हैं. नीति निर्माण से लेकर संरक्षण तक, कई क्षेत्रों में होगा एटलस का उपयोग दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एटलस को केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि भविष्य की योजना निर्माण का महत्वपूर्ण उपकरण बताया है. उनके अनुसार पक्षियों के वितरण और मौसमी गतिविधियों का यह दस्तावेज आवास पुनर्स्थापन, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ शहरी विकास की योजनाओं को दिशा देने में मदद करेगा. अन्य जीव-जंतुओं पर भी ऐसे अध्ययन की जरूरत बर्ड काउंट इंडिया के क्षेत्रीय समन्वयक पंकज गुप्ता का कहना है कि दिल्ली सरकार द्वारा राज्य स्तर पर पक्षियों के वितरण का इस तरह का डेटा पहली बार तैयार किया गया है. उनका मानना है कि इसी तरह के व्यापक सर्वेक्षण अन्य वन्यजीवों, पौधों और कीटों के लिए भी किए जाने चाहिए, ताकि राजधानी की संपूर्ण जैव विविधता का वैज्ञानिक डेटाबेस विकसित किया जा सके.  

डीटीसी बेड़े में बढ़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर सरकार का फोकस

नई दिल्ली  दिल्ली में रोजाना बसों में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए डीटीसी के बेड़े में 2800 नई एसी लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने जा रही है। इस साल के अंत तक सभी बसें आ जाएंगी सर, अलग अलग लॉट में। सरकार का कहना है कि इससे बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और शहर के दूर-दराज के इलाकों तक बस सेवा का विस्तार होगा। सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच और बेहतर होगी परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार की पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत नौ-मीटर वाली 1400 और 12-मीटर लंबाई वाली 1400 इलेक्ट्रिक बसों को डीटीसी के बेड़े में शामिल किया जाएगा। इनके आने से दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच और बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल मुख्य मार्गों पर बसें बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन इलाकों तक भी सार्वजनिक परिवहन पहुंचाने पर है जहां अभी सुविधाएं अपेक्षाकृत कम हैं। इसी उद्देश्य से 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' को मजबूत करने की योजना बनाई गई है, ताकि लोगों को घर या कॉलोनी के नजदीक से बस सुविधा मिल सके और मेट्रो व अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों तक पहुंच आसान हो सके।     12 मीटर लंबाई वाली 1400 बसें होंगी     9 मीटर वाली 1400 बसें होंगी     इस साल के अंत तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 7500 करने का है लक्ष्य 9-मीटर वाली इलेक्ट्रिक बसों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा परिवहन विभाग के अनुसार, दिल्ली में पहले से चल रहीं 9-मीटर वाली इलेक्ट्रिक बसों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। खासकर लोकल और फीडर रूट्स पर इनसे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल रही है। इसी अनुभव के आधार पर नए बेड़े को तैयार किया जा रहा है, जिससे व्यस्त रूटों और फीडर सेवाओं दोनों की जरूरतों को पूरा किया जा सके। 14,000 बसों का लक्ष्य दिल्ली सरकार ने वर्ष 2028-29 तक राजधानी में सार्वजनिक परिवहन बसों की कुल संख्या बढ़ाकर करीब 14,000 करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल दिल्ली में करीब 4300 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, जिससे राजधानी देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस बेड़ों में शामिल है। सरकार इस साल के अंत तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर करीब 7500 करने की दिशा में काम कर रही है। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पीएम ई-ड्राइव फेज-II के तहत 3330 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इनमें 7-मीटर लंबाई वाली 500 इलेक्ट्रिक बसें होंगी, जो फीडर सेवाओं और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को और मजबूत करेंगी। इससे रिहायशी, ग्रामीण और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में भी सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बेहतर होगी।

दिल्ली में सख्त नीति लागू, अवैध निर्माण पर जेल और जुर्माने का प्रावधान

नई दिल्ली  मालवीय नगर अग्निकांड जैसी घटनाएं रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण और सुरक्षा उल्लंघनों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में साफ किया गया कि अब केवल अवैध निर्माण करने वालों पर ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ऐसा तंत्र विकसित करने की तैयारी की है, जिसमें जिम्मेदारी तय होने पर जेल, भारी जुर्माना और संपत्ति से वसूली तक की कार्रवाई की जा सकेगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि यह सुधार का अंतिम मौका है। जिम्मेदारी तय होने पर जेल, भारी जुर्माना और संपत्ति से वसूली तक होगी जिला स्तर पर संयुक्त जांच समितियां बनेंगी। ये अलग-अलग जगह निरीक्षण करेंगी 1. अब अफसर भी होंगे सीधे जिम्मेदार अब अवैध निर्माण पर केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही कार्रवाई नहीं होगी। अगर किसी अधिकारी की लापरवाही मिली तो उस पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत दो साल तक की सजा और जुर्माने जैसी कार्रवाई होगी। 2. ड्रोन और सैटेलाइट रखेंगे नजर ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल मैपिंग से हर तीन महीने में कंस्ट्रक्शन का रिकॉर्ड तैयार होगा। कहीं नया निर्माण शुरू होते ही संबंधित अफसर को खुद सूचना मिलने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। 3. ऊंची इमारतों की विशेष निगरानी 17.5 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। जहां भी नियमों के विरुद्ध निर्माण काम चल रहा हो, वहां तत्काल निर्माण रोकने, प्राथमिकी दर्ज करने और मालिक पर कार्रवाई की जाए। 4. होटल और ऊंची इमारतें रडार पर जिला स्तर पर संयुक्त जांच समितियां बनेंगी। इनमें पुलिस, फायर सर्विस और नगर निगम के अधिकारी शामिल होंगे। ये टीमें गेस्ट हाउस, होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल और अन्य कमर्शियल सेंटर्स का निरीक्षण करेंगी। 5. बिजली-पानी कनेक्शन पर सख्ती जिन भवनों के पास वैध कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें नए बिजली-पानी कनेक्शन और NOC नहीं दिए जाएंगे। अवैध गेस्ट हाउसों और बड़े परिसरों की बिजली-पानी आपूर्ति बंद करने तक का फैसला लिया जा सकता है। 6. डीएम की शक्तियों में बढ़ोतरी संबंधित प्रशासनिक जिलों में काम करने वाले किसी भी विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, कर्तव्यों में विफल रहने वाले अफसरों के खिलाफ तत्काल एक्शन लेने की व्यापक शक्तियां डीएम के पास जल्द ही होंगी। 7. खानपुर और सैनिक फार्म इलाके में अवैध निर्माणों के खिलाफ ऐक्शन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर रविवार को भी संबंधित एजेंसियों ने साउथ दिल्ली के खानपुर और सैनिक फार्म क्षेत्र में अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी। 'सरकार लोगों की सुरक्षा के अपने संकल्प को पूरी गंभीरता के साथ लागू कर रही' रविवार को खानपुर और सैनिक फार्म इलाकों में चलाए गए अभियान के दौरान संबंधित अधिकारियों ने ऐसे निर्माणों का निरीक्षण किया जो निर्धारित मानकों और स्वीकृत योजनाओं के खिलाफ पाए गए। मालवीय नगर के विधायक और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि सरकार लोगों की सुरक्षा के अपने संकल्प को पूरी गंभीरता के साथ लागू कर रही है। 1 जून से अब तक 128 प्रॉपर्टी सील, 97 पर चला बुलडोजर एक जून से लेकर अब तक एमसीडी 128 प्रॉपर्टी को सील कर चुकी है, वहीं 97 प्रॉपर्टीज पर बुलडोजर ऐक्शन किया। एमसीडी ने रविवार को साउथ जोन के तहत आने वाले बेगमपुर, खानपुर और सैनिक फार्म इलाके में अवैध रूप से बनी छह प्रॉपर्टीज पर कार्रवाई की। इनमें से तीन पर बुलडोजर चला, जबकि अन्य तीन को सील किया गया। नजफगढ़ जोन में बेड एंड ब्रेकफास्ट का लाइसेंस लेकर चल रही 11 प्रॉपर्टीज को सील किया गया। पटेल नगर में 4 होटल सील रविवार को पटेल नगर में अभियान चलाकर 4 होटल सील किए गए। यह कार्रवाई पटेल नगर के एसडीएम डॉ. नितिन शाक्य के नेतृत्व में की गई।  

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में आग, कुछ दस्तावेज जलने की आशंका

नई दिल्ली  दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में गेट नंबर 4 के पास रविवार सुबह एक 'स्कैनिंग रूम' में आग लग गई। दमकल विभाग की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फिलहाल, किसी के हताहत होने या घायल होने की कोई खबर नहीं है। जानकारी के अनुसार, कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में गेट नंबर 4 के पास दूसरी मंजिल पर बने 'स्कैनिंग रूम' में आग लगी थी। आग को लेकर दमकल विभाग ने क्या कहा दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें आग लगने की सूचना सुबह करीब 5:22 बजे मिली, जिसके बाद दमकल की आठ गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। सुबह 6:05 बजे डिविजनल ऑफिसर मुकेश वर्मा ने 'स्टॉप मैसेज' जारी कर पुष्टि की कि आग पर काबू पा लिया गया है। हालांकि, पता चला है कि इस आग की घटना में कुछ दस्तावेज जलकर खाक हो गए हैं। ये दस्तावेज किस तरह के थे, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई। मालवीय नगर अग्निकांड में 21 लोगों की गई थी जान दिल्ली के मालवीय नगर में भी बीते दिनों एक रेस्टोरेंट में आग लगी थी। इस घटना में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई। मरने वालों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। 15 से अधिक लोग घटना में घायल हुए थे, जिनमें से कई का अस्पताल में अभी इलाज जारी है। शॉर्ट सर्किट से लगी थी आग: पुलिस सूत्र दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रेस्टोरेंट में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी, हालांकि जांच टीम को घटना के दौरान किसी भी एलपीजी सिलेंडर में धमाका होने का कोई सबूत नहीं मिला। दूसरी ओर इस अग्निकांड की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने शनिवार को रेस्टोरेंट के कुक को गिरफ्तार किया। मालवीय नगर अग्निकांड में जांच तेज दिल्ली पुलिस के अनुसार, शनिवार को गिरफ्तार आरोपी की पहचान कुक केशव नेगी के रूप में हुई है, जो दिलशाद गार्डन का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि आग लगने में कुक की लापरवाही थी। जांच के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघन और इमारत के फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी गंभीर कमियां मिली थीं।  

पेपर लीक पर जवाबदेही तय हो: सोनम वांगचुक, जंतर-मंतर प्रदर्शन में सरकार पर निशाना

नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को तब और बल मिला जब शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंच पर पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से विरोध-प्रदर्शन पसंद नहीं है, लेकिन जब न्याय की मांगों को अनसुना किया जाता है तो लोगों को आवाज उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता है और छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। सोनम वांगचुक ने कहा कि बार-बार परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं। ऐसे में जवाबदेही तो तय करनी पड़ेगी। राजनीति में आएंगे सोनम वांगचुक? वांगचुक ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि नेताओं मंत्रियों और नौकरशाहों के बच्चों को सरकारी स्कूलों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ना चाहिए। उनका कहना था कि जो लोग व्यवस्था चला रहे हैं, उन्हें उसी व्यवस्था का अनुभव भी करना चाहिए। मंच के सामने मौजूद छात्रों ने कई बार उन्हें शिक्षा मंत्री बनने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने किसी भी राजनीतिक भूमिका में आने की संभावना को खारिज कर दिया। अभीजीत दीपके ने क्या कहा? इससे पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की मांगों पर ध्यान देने के बजाय सोशल मीडिया गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है। दीपके ने कहा कि पिछले एक महीने से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने मंच से कहा कि समाज के कुछ वर्ग दबाव में समझौता कर सकते हैं, लेकिन देश के छात्र और युवा अभी भी अपने अधिकारों और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दोपहर करीब तीन बजे गर्मी से दीपके की बिगड़ गई। हालांकि, अंत में प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। 'अगले शनिवार फिर जंतर मंतर लौटेंगे' दीपके ने कहा कि आज का प्रदर्शन समाप्त हो रहा है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। हम अगले शनिवार फिर जंतर मंतर लौटेंगे। अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते है तो यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। हम पूरे देश में प्रदर्शन करेंगे और स्टूडेंट्स की आवाज को हर राज्य और हर शहर तक पहुंचाएंगे। विभिन्न छात्र और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन देखने को मिला। जेएनयू के वर्तमान और पूर्व छात्र नेताओं ने भाग लिया। सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी जंतर-मंतर पहुंचे। 'परिवार को धमकियां, छोड़ना पड़ा घर' प्रदर्शन समाप्त होने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक मेसेज साझा किया। उन्होंने लिखा कि वह अपने माता-पिता से मिलने घर लौट रहे हैं, जिनसे उनकी मुलाकात एक साल से अधिक समय से नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 15 दिन के दौरान उनके परिवार को धमकियों का सामना करना पड़ा और उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। दीपके ने कहा कि अब वह अपने माता-पिता को वापस घर ले जाएंगे। अपने मेसेज में उन्होंने समर्थकों का आभार जताते हुए लिखा कि आज का प्रदर्शन सिर्फ एक ट्रेलर था।  

दिल्ली फायर हादसा केस में बड़ी कार्रवाई: एक और आरोपी गिरफ्तार, 21 की मौत की जांच तेज

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने मालवीय नगर अग्निकांड में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, पुलिस ने कुछ अन्य लोगों को अपनी हिरासत में लिया है। फिलहाल, पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शनिवार को गिरफ्तार आरोपी की पहचान कुक केशव नेगी के रूप में हुई है, जो दिलशाद गार्डन का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि आग लगने में कुक की लापरवाही थी। जांच के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघन और इमारत के फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में भी गंभीर कमियां मिली थीं। तीन आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार इस मामले में पुलिस होटल के मालिक लवकेश बजाज के अलावा अन्य आरोपी स्वीटी सरकार और पुष्पो सरकार को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। मालिक बजाज बाद में चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। अग्निकांड में 21 लोगों की मौत बता दें कि इस घटना में कई विदेशी नागरिकों समेत कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई थी। इन 21 लोगों में से 9 भारतीय थे, जबकि 12 विदेशी नागरिक थे, जो बांग्लादेश, लाइबेरिया, नाइजीरिया और मोजाम्बिक के रहने वाले थे। इमारत से 47 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल के बयान के मुताबिक, दक्षिण दिल्ली के इस अस्पताल में अभी कुल 15 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 13 विदेशी हैं। वेंटिलेटर पर मौजूद सभी मरीज स्थिर हैं और उनमें सुधार के संकेत दिख रहे हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार, आग की लपटों ने इमारत के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपर की 5 मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे गर्मी और धुएं के कारण काफी नकसान हुआ। दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रेस्टोरेंट में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। जांच टीम को घटना के दौरान किसी भी एलपीजी सिलेंडर में धमाका होने का कोई सबूत नहीं मिला। सूत्रों ने दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच के आधार पर बताया कि आग इतनी तब फैलती है, जब इंटरनल वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ हो। सूत्रों के अनुसार, होटल के बेसमेंट और टॉप फ्लोर पर 2 किचन बने हुए थे। दोनों किचन के अंदर एलपीजी सिलेंडर रखे हुए थे। इन सिलेंडरों में कोई ब्लास्ट नहीं हुआ।

कक्षा 12 सेवाओं वाले CBSE पोर्टल को बनाया गया निशाना, जांच में जुटी IFSO इकाई

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने सीबीएसई के परिणाम घोषित होने के बाद की सेवाओं से संबंधित (पोस्ट रिजल्ट सर्विसेज) पोर्टल को निशाना बनाकर किए गए साइबर हमलों को लेकर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस पोर्टल को कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन जैसी सेवाओं के लिए दो जून को शुरू किया गया था। पुलिस के अनुसार, सीबीएसई की ओर से ‘इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस’ (आईएफएसओ) इकाई में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 और 43(एफ) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले बोर्ड ने एक बयान में कहा कि उसके ‘पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल’ को निशाना बनाकर किए गए ‘समन्वित और परिष्कृत साइबर हमलों की शृंखला’ के संबंध में दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ इकाई के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। बोर्ड ने कहा कि पिछले तीन दिनों से परिणाम घोषित होने के बाद की सेवाओं से संबंधित उसके पोर्टल पर लगातार साइबर हमले किए जा रहे थे। इन हमलों में बड़ी मात्रा में संदिग्ध और नुकसान पहुंचाने वाले ‘इंटरनेट ट्रैफिक’ इस्तेमाल किया गया, जो देश के भीतर और विदेश में मौजूद कई अलग-अलग आईपी एड्रेस से आ रहा था। सीबीएसई ने कहा, ‘चूंकि यह पोर्टल देश भर के लाखों छात्रों को परिणाम के बाद की सेवाएं प्रदान करता है, इसलिए इसके कामकाज में किसी भी प्रकार की बाधा से बड़ी संख्या में हितधारकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने, जनता को काफी असुविधा होने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने और बोर्ड के खिलाफ छात्रों में असंतोष पैदा होने की आशंका है।’ बोर्ड ने आरोप लगाया कि हमलों का स्पष्ट उद्देश्य मंच को बाधित करना, वैध उपयोगकर्ताओं की पहुंच को रोकना और राष्ट्रीय विरोधी तत्वों द्वारा अनधिकृत रूप से जानकारी निकालने का प्रयास करना था। सीबीएसई ने दावा किया कि सभी हमलों को सफलतापूर्वक ‍विफल कर दिया गया और उसके प्रणाली से किसी भी प्रकार की डेटा चोरी या उस तक अनधिकृत पहुंच का पता नहीं चला। सीबीएसई ने कहा कि आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी), सीईआरटी-इन और अन्य केंद्रीय सरकारी एजेंसियों की साइबर सुरक्षा टीम के सहयोग से निरंतर 24 घंटे निगरानी और प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया गया। कैसे सामने आया यह विवाद? यह घटनाक्रम कक्षा 12 के कुछ छात्रों की शिकायतों को लेकर उठे विवाद के बीच सामने आया है। छात्रों का आरोप है कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं। कैबिनेट सचिवालय ने मंगलवार को सीबीएसई द्वारा ओएसएम प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।