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शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब का बड़ा कमाल, स्कूल रैंकिंग में केरल को पछाड़कर बना देश का नंबर-1 राज्य

 नई दिल्ली एक समय था जब पंजाब के सरकारी स्कूलों का नाम आते ही अभिभावकों के मन में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता घर कर जाती है. जर्जर इमारतें, संसाधनों की कमी और गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता के बीच लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना देखते थे. हालात ऐसे थे कि शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की रैंकिंग लगातार नीचे खिसकती जा रही थी और राज्य देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाने लगा था. लेकिन कुछ ही सालों में पंजाब के स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।  आज वही पंजाब सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के दम पर देश में नंबर-1 बनकर उभरा है. यह सिर्फ रैंकिंग में सुधार की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की मेहनत और उम्मीदों की जीत की कहानी है, जिन्होंने बदलाव पर भरोसा किया।    2016-17 में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 22वें स्थान पर रहा, वहीं, 2018-19 में 26वें और 2020 में 27वें स्थान तक फिसल गया था. लेकिन साल 2022 में पंजाब की जनता ने बदलाव का फैसला किया और आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदारी सौंपी. आज सिर्फ चार सालों के अंदर पंजाब ने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी. नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है।  ऐसे बना नंबर वन यह सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है. यह लाखों पंजाबी परिवारों के सपनों की जीत है. यह उन माता-पिता की जीत है जो चाहते थे कि उनका बच्चा गरीब हो या अमीर, उसे भी विश्वस्तरीय शिक्षा मिले. यह उन शिक्षकों की मेहनत की जीत है जिन्हें नई सोच और नए संसाधनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला. नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा. गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर रहा. नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब का प्रदर्शन 52 प्रतिशत रहा, जबकि केरल केवल 45 प्रतिशत तक पहुंच पाया. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।  99.9 प्रतिशत रहा परिणाम  आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली उपलब्ध है. 99 प्रतिशत स्कूलों में चालू कंप्यूटर मौजूद हैं. 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं. स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में पंजाब 80.1 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 50.3 प्रतिशत पर है. इंटरनेट सुविधा के मामले में पंजाब 88.9 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 78.9 प्रतिशत पर है. यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं बल्कि सोच और प्राथमिकताओं का अंतर है।  गुरुग्राम का स्तर रहा सबसे खराब  सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि हरियाणा के सबसे समृद्ध और साइबर सिटी शहर गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी पंजाब के सबसे निचले पायदान वाले जिलों से बहुत पीछे है. यह उस मॉडल की ताकत दिखाता है जिसने सरकारी स्कूलों को राजनीति का विषय नहीं बल्कि भविष्य निर्माण का मिशन बनाया. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब ने शिक्षा को सरकारी फाइलों से निकालकर जन आंदोलन बनाया है. शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया ताकि पंजाब के बच्चे भी दुनिया के बेस्ट एजुकेशन मॉडल का लाभ उठा सकें. यही कारण है कि सरकारी स्कूलों के 786 छात्रों ने जेईई मेन और 1284 छात्रों ने नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की है. यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा सिर्फ निजी स्कूलों की संपत्ति नहीं होती, अवसर मिलने पर सरकारी स्कूलों के बच्चे भी देश का भविष्य बन सकते हैं।  भर्त‍ियों का ग्राफ भी बढ़ा  राज्य सरकार 13 हजार से अधिक नए शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती कर चुकी है. 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया जा रहा है ताकि पंजाब का बच्चा दुनिया के किसी भी मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा हो सके. राज्य में 118 अत्याधुनिक स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं जो आने वाले वर्षों में पंजाब की नई पहचान बनने जा रहे हैं. आज पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चे सिर्फ किताबें नहीं पढ़ रहे, बल्कि आधुनिक लैब, डिजिटल तकनीक, स्मार्ट क्लासरूम और वैश्विक स्तर की शिक्षा का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं. यह वही सपना है जो विकसित देशों जैसे अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और जापान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाता है. पंजाब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।  इन जगहों पर अब भी हो रहा है बदलाव का इंतजार दूसरी तरफ कई ऐसे राज्य हैं जहां वर्षों से एक ही सरकारें चल रही हैं, लेकिन सरकारी शिक्षा व्यवस्था अब भी अपेक्षित बदलाव का इंतजार कर रही है. हरियाणा में पिछले 12 वर्षों से बीजेपी सरकार है, लेकिन शिक्षा के कई मानकों पर पंजाब उससे काफी आगे निकल चुका है. पंजाब के गांवों में अब माता-पिता गर्व से कहते हैं कि उनका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है. यह बदलाव किसी विज्ञापन या नारे से नहीं आया. यह बदलाव स्कूलों की नई इमारतों, स्मार्ट क्लासरूम, प्रशिक्षित शिक्षकों, बेहतर परिणामों और बच्चों के उज्जवल भविष्य के रूप में दिखाई दे रहा है. पंजाब ने साबित कर दिया है कि जब सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होती है तो कुछ ही वर्षों में इतिहास बदला जा सकता है. जो राज्य कभी देश में 27वें स्थान पर था, वही आज देश में नंबर-1 बनकर खड़ा है. यह सिर्फ शिक्षा की कहानी नहीं, बल्कि नए पंजाब की कहानी है। 

पंजाब में नशे के खिलाफ सख्ती, बठिंडा में तस्कर की अवैध संपत्ति ध्वस्त

बठिंडा. पंजाब सरकार के युद्ध नशों के विरुद्ध अभियान के तहत जिला प्रशासन और बठिंडा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नशा तस्करी के मामलों में नामजद आरोपित की अवैध रूप से निर्मित इमारत को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कच्चा धोबियाना निवासी गुरमन सिंह ने अवैध तरीके से इमारत का निर्माण किया था। संबंधित व्यक्ति को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन निर्धारित समय में कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी के आदेशों पर कार्रवाई करते हुए इमारत को ढहा दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपित के खिलाफ पहले से दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। पंजाब सरकार के निर्देशों के अनुसार नशा तस्करों और संगीन अपराधों में शामिल आरोपितों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने दावा किया कि बठिंडा पुलिस के सहयोग से अब तक जिले में 14 अवैध इमारतों को ध्वस्त किया जा चुका है। वहीं, एक मार्च 2025 से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 2564 मामले दर्ज कर 3628 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 96 बड़े नशा तस्कर भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक 87 आरोपियों की करीब 14.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति फ्रीज करवाई जा चुकी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नशा तस्करी की सूचना पुलिस या एंटी ड्रग हेल्पलाइन पर दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

पंजाब इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के पूर्व CMD ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा, FIR रद्द करने की मांग

चंडीगढ़. पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड और पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक केडी चौधरी ने अपने खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है। 76 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी ने याचिका दाखिल कर विजिलेंस ब्यूरो की ओर से दर्ज एफआईआर को रद्द करने और मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। हालांकि उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली और हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई आठ जुलाई तक स्थगित कर दी है। यह मामला वर्ष 2013 में लुधियाना के बसंत एवेन्यू क्षेत्र में 66 केवी ग्रिड सब-स्टेशन की स्थापना के लिए दी गई प्रशासनिक मंजूरी से जुड़ा है। विजिलेंस ब्यूरो का आरोप है कि ग्रिड निर्माण के दौरान विभागीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया। आरोपों के अनुसार ग्रिड के लिए निर्धारित न्यूनतम एक एकड़ भूमि और दो ग्रिड सब-स्टेशनों के बीच कम से कम पांच किलोमीटर की दूरी बनाए रखने की शर्तों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर पूर्व सीएमडी समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। केडी ने आरोपों को निराधार बताया याचिका में केडी चौधरी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि बसंत एवेन्यू, दुगरी और आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ रहे बिजली लोड, ओवरलोड ट्रांसफार्मरों और बार-बार बाधित हो रही बिजली आपूर्ति को देखते हुए क्षेत्रीय इंजीनियरों और फील्ड अधिकारियों ने वर्ष 2008 से ही नए ग्रिड सब-स्टेशन की आवश्यकता जताई थी। यह प्रस्ताव विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक स्तरों पर जांच के बाद अंतिम स्वीकृति के लिए उनके पास पहुंचा था। याचिका में कहा गया है कि जिन दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है, वे कोई वैधानिक नियम नहीं बल्कि पुराने विभागीय दिशा-निर्देश हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भूमि की उपलब्धता की कमी को देखते हुए कई मामलों में ऐसे मानकों में छूट दी जाती रही है। चौधरी ने दावा किया कि उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी कम भूमि और कम दूरी वाले कई ग्रिड सब-स्टेशनों को मंजूरी दी गई। दावा- एफआईआर में रिश्वत का जिक्र नहीं पूर्व सीएमडी ने अदालत को यह भी बताया कि एफआईआर में कहीं भी यह आरोप नहीं लगाया गया कि उन्होंने रिश्वत ली, व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया या सरकारी खजाने को किसी प्रकार का वित्तीय नुकसान पहुंचाया। उनका तर्क है कि एक प्रशासनिक और तकनीकी निर्णय को आपराधिक रंग देकर कार्रवाई की गई है। याचिका में 13 वर्ष बाद एफआईआर दर्ज किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। चौधरी ने कहा कि इसी शिकायत की वर्ष 2018 और 2021 में जांच की जा चुकी है और दोनों बार मामले को बंद कर दिया गया था। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित भजन लाल बनाम हरियाणा राज्य मामले का हवाला देते हुए एफआईआर को दुर्भावनापूर्ण और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया है। 8 जुलाई को होगी अगली सुनवाई मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने तत्काल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए सुनवाई आठ जुलाई तक स्थगित कर दी। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से रखी जाएंगी। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक निर्णयों और आपराधिक जवाबदेही के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी बहस का विषय बन गया है।

‘पवित्र नगरी’ फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, मांस व्यापारियों की याचिका पर सरकार को नोटिस

चंडीगढ़. अमृतसर की वाल्ड सिटी को ‘पवित्र नगरी’ घोषित किए जाने और उसके बाद मछली, मांस एवं कच्चे मांस उत्पादों की बिक्री, भंडारण, उपयोग और प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंधों का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है। नगर निगम अमृतसर से वैध लाइसेंस प्राप्त कुलदीप फिश कंपनी ने पंजाब सरकार की 15 दिसंबर 2025 की अधिसूचना और उसके आधार पर जारी विभिन्न आदेशों को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। कंपनी ने वकील विकास चतरथ ने कोर्ट को बताया कि कंपनी कई वर्षों से नगर निगम अमृतसर की ओर से जारी वैध लाइसेंस के तहत मछली और मांस का कारोबार कर रही है। इसके लिए वह नियमित रूप से लाइसेंस शुल्क और अन्य सभी वैधानिक शुल्क जमा करती रही है। इसके बावजूद सरकार की अधिसूचना लागू होने के बाद उसके व्यावसायिक प्रतिष्ठान को सील कर दिया गया और उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह कार्रवाई किसी वैधानिक आदेश या स्पष्ट कानूनी अधिकार के बिना की गई। आजीविका पर असर का दिया हवाला याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि विवादित अधिसूचना और उसके बाद जारी आदेशों के कारण वाल्ड सिटी क्षेत्र में मछली और मांस के कारोबार पर प्रभावी रूप से पूर्ण प्रतिबंध लग गया है। यह प्रतिबंध बिना किसी पुनर्वास नीति, वैकल्पिक स्थानांतरण व्यवस्था या कारोबारियों को पर्याप्त समय दिए लागू किया गया, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है। याचिका में संविधान के महत्वपूर्ण प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ग) के तहत व्यापार और व्यवसाय करने की स्वतंत्रता, अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आजीविका के अधिकार तथा अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है। दावा- पवित्र नगरी विनियम में परिभाषित नहीं याचिकाकर्ता का तर्क है कि मौलिक अधिकारों पर कोई भी प्रतिबंध तभी लगाया जा सकता है जब उसके पीछे स्पष्ट वैधानिक आधार हो और वह तर्कसंगत तथा आनुपातिक हो। याचिका में यह भी कहा गया है कि “पवित्र नगरी” और “वाल्ड सिटी” जैसे शब्द किसी कानून, नियम या विनियम में परिभाषित नहीं हैं। केवल कार्यकारी अधिसूचना के माध्यम से वैध व्यापारिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि विवादित कदम केवल वाल्ड सिटी क्षेत्र में कारोबार करने वाले व्यापारियों को प्रभावित करता है, जबकि इसके लिए कोई तार्किक और वैधानिक आधार नहीं है। 22 जून के लिए नोटिस हुआ जारी याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि उसे और अन्य प्रभावित कारोबारियों को अपना वैध व्यवसाय जारी रखने की अनुमति दी जाए। वैकल्पिक रूप से सरकार को निर्देश दिया जाए कि किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई से पहले निष्पक्ष, तर्कसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण पुनर्वास अथवा स्थानांतरण नीति तैयार कर लागू की जाए। मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में पंजाब सरकार को 22 जून के लिए नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न कोर्ट सरकार की इस अधिसूचना पर रोक लगा दे।

पंजाब के जालंधर में कोर्ट को बम धमकी से हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की जांच

जालंधर. जालंधर के अदालत परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। धमकी की सूचना सामने आने के बाद अदालत परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था अचानक बढ़ा दी गई है। पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं, जबकि डॉग स्क्वायड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की टीमें भी मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं। जानकारी के अनुसार अदालत परिसर में सामान्य दिनों की तरह कामकाज चल रहा था। इसी बीच बम धमकी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सख्त कर दिया गया। हालांकि अदालत में मौजूद अधिकांश वकीलों, कर्मचारियों और अन्य लोगों को प्रारंभिक तौर पर इस धमकी की जानकारी नहीं थी, लेकिन परिसर में अचानक बढ़ी पुलिस गतिविधियों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कोर्ट में हर व्यक्ति की ली जा रही तलाशी पुलिस ने अदालत परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जांच शुरू कर दी है। परिसर में आने-जाने वाले वाहनों की भी गहन तलाशी ली जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर संदिग्ध वस्तुओं और गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। डॉग स्क्वायड की टीमें परिसर के विभिन्न हिस्सों में जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके। धमकी किस माध्यम से दी गई और इसके पीछे कौन लोग हैं, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस और जांच एजेंसियां धमकी के स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। पुलिस ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि अदालत परिसर और आसपास के क्षेत्र की पूरी तरह जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक भवनों और संवेदनशील परिसरों को धमकी मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में अदालत परिसर को मिली यह धमकी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान करने के प्रयास में जुटी हुई है।

पंजाब के लुधियाना में फैक्ट्री हादसा, गैस लीक से तीन मजदूरों की मौत, इलाके में हड़कंप

लुधियाना. पंजाब के लुधियाना में सोमवार तड़के हुए एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। पाना-चाबी बनाने वाली एक फैक्ट्री में अचानक जहरीली गैस का रिसाव होने से वहां काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में पिता और पुत्र सहित तीन की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूरों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद फैक्ट्री परिसर और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया। मृतकों की पहचान मान सिंह और उनके पुत्र अमित के रूप में हुई है, जबकि तीसरे मृतक का नाम श्रीराम है। तीनों फैक्ट्री में कार्यरत थे और रोज की तरह सोमवार सुबह भी अपनी ड्यूटी पर पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह कामकाज सामान्य रूप से चल रहा था। इसी दौरान अचानक किसी पाइपलाइन अथवा गैस सिलेंडर से जहरीली गैस का रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते गैस पूरे परिसर में फैल गई और वहां मौजूद कर्मचारियों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन तथा घुटन महसूस होने लगी।  मजदूर मौके पर ही हुए बेहोश कुछ मजदूरों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन गैस का प्रभाव इतना तेज था कि कई कर्मचारी मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े। घटना की जानकारी मिलते ही फैक्ट्री प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंच गए। बचाव कर्मियों ने सुरक्षा उपकरणों की मदद से फैक्ट्री के भीतर फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालना शुरू किया। गंभीर रूप से प्रभावित मान सिंह और उनके पुत्र अमित को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अन्य प्रभावित मजदूरों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ कर्मचारियों की हालत अभी भी निगरानी में रखी गई है। मृतकों का शव पोसटमार्टम के लिए भेजा दोनों मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए कैंसर अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही संबंधित विभागों की टीमें भी गैस रिसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी, सुरक्षा मानकों में लापरवाही या किसी अन्य वजह से हुआ। हादसे के बाद फैक्ट्री क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की मांग उठाई है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन ने भी जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।

पंजाब में शिक्षा क्रांति का दावा, CM मान ने करवाई PTM; सरकारी स्कूलों ने हासिल किया पहला स्थान

 चंडीगढ़ राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में पंजाब द्वारा शीर्ष स्थान हासिल करने की उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने आज राज्य के 19,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में मेगा अभिभावक-शिक्षक मिलन (पीटीएम) आयोजित किया। इस दौरान पूरे प्रदेश में सहभागी शिक्षा का उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला।  ‘शिक्षा का महा उत्सव’ के बारे में जानकारी साझा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह विशेष आयोजन नीति आयोग की स्कूल शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 में पंजाब को प्रथम स्थान मिलने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस रिपोर्ट में पंजाब ने बुनियादी शिक्षा के प्रमुख मानकों पर केरल को पीछे छोड़ दिया, जिसे लंबे समय से देश में स्कूली शिक्षा का स्वर्ण मानक माना जाता रहा है। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि इस सामूहिक उपलब्धि के सम्मान में आज शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों को उनके अथक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा बोर्ड परीक्षाओं के टॉपरों, इंग्लिश एज कार्यक्रम के उपलब्धि हासिल करने वाले विद्यार्थियों तथा जेईई क्वालिफायर छात्रों सहित उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष सम्मान और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस उपलब्धि को बनाए रखने में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि मेगा पीटीएम और अभिभावक कार्यशालाओं में 20 लाख से अधिक अभिभावकों ने भाग लिया। यह व्यापक कार्यक्रम ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों की सीखने की निरंतरता बनाए रखने, अवकाश गृहकार्य के प्रभावी प्रबंधन तथा सकारात्मक दिनचर्या विकसित करने पर केंद्रित था। इस व्यापक कार्यक्रम के सफल और गुणवत्तापूर्ण संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को लाइव यूट्यूब सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित सहयोगी स्टाफ और सक्रिय स्कूल प्रबंधन समितियों ने अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने, समन्वय स्थापित करने तथा गतिविधियों के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंत्री बैंस ने इस उपलब्धि को ‘पंजाब शिक्षा क्रांति’ का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हुए कहा, “यह नंबर-1 रैंक केवल सरकार की उपलब्धि नहीं है, बल्कि हर उस अभिभावक की है जिसने सरकारी स्कूलों पर विश्वास जताया, हर उस विद्यार्थी की है जिसने मेहनत की और हर उस शिक्षक की है जिसने पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर शिक्षा प्रदान की। हमने सरकारी स्कूलों को अंतिम विकल्प से पहली पसंद में बदल दिया है। दशकों तक यह माना जाता रहा कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है, लेकिन पंजाब ने इस धारणा को गलत साबित कर दिखाया है। यह रैंक हमारे कक्षाओं से उत्पन्न हुई शिक्षा क्रांति का प्रमाण है।” 

बोर्ड परीक्षाओं की रैंकिंग में बड़ा बदलाव, बराबर नंबर पर उम्र नहीं करेगी फैसला : सीएम मान

चंडीगढ़  पंजाब में बोर्ड परीक्षाओं के टॉपर्स की रैंकिंग तय करने के लिए आयु में अंतर (एज डिफरेंस) का नियम अब खत्म होगा। भविष्य में यदि एक से अधिक विद्यार्थियों के समान अंक आते हैं तो सभी को एक ही रैंक दी जाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में व्यवस्था में बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।  चंडीगढ़ में आयोजित सितारे जमीन पर कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पंजाब के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों के अनुभव सुने और अपने अनुभव भी साझा किए। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया भी मौजूद रहे। छात्रा ने उठाया मुद्दा कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा ने मुख्यमंत्री के समक्ष रैंकिंग व्यवस्था का मुद्दा उठाया। छात्रा ने बताया कि अमृतसर जिले में उसके सहित तीन छात्राओं ने समान अंक प्राप्त किए थे लेकिन आयु प्रमाण पत्र के आधार पर उन्हें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान दिया गया। इस कारण वह प्रथम स्थान हासिल नहीं कर सकी। छात्रा की बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को नियमों में बदलाव करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समान अंक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी टॉपर हैं और उनमें कोई अंतर नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए भविष्य में समान अंक पाने वाले सभी विद्यार्थियों को समान स्थान और सम्मान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पहले तीन टॉपर के हैं समान अंक मनीष सिसोदिया ने भी छात्रा के आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को अपनी बात रखने और व्यवस्था में सुधार की मांग करने का साहस देना है। हाल ही में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा के परिणामों में भी ऐसा मामला सामने आया था। मानसा की सुपनीत कौर, लुधियाना की सुहानी चौहान और दिव्यांशी ने 500 में से 500 अंक हासिल किए थे। हालांकि तीनों के अंक समान थे लेकिन आयु के आधार पर उन्हें क्रमशः पहला, दूसरा और तीसरा स्थान दिया गया था। अब अगले सत्र से इस व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा।   

गर्मी से राहत जारी! पंजाब में बारिश और आंधी का अलर्ट, पारा सामान्य से नीचे

पटियाला पंजाब में भीषण गर्मी से राहत का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने सोमवार से चार दिनों के लिए पंजाब में यलो अलर्ट जारी कर दिया है। इसके तहत पंजाब में 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और बारिश होगी।   रविवार को मौसम मुख्यता शुष्क रहने के चलते पंजाब के तापमान में 4.8 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। फिलहाल यह सामान्य से 7.8 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। पंजाब में सबसे अधिक 38 डिग्री का पारा बठिंडा का दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में भी गर्मी से बचाव रहेगा।  विभाग के मुताबिक सोमवार को चार जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर व तरनतारन में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। वहीं, इन चार जिलों समेत कुल 10 जिलों में तेज हवाएं चलेंगी।  इन चार जिलों के अलावा फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा व मानसा जिले शामिल हैं। मंगलवार को तकरीबन पूरे पंजाब में ही मौसम खराब रहेगा और 40 से 50 किलोमीटर की गति से तेज हवाएं चलने के साथ बारिश होगी। पंजाब के न्यूनतम तापमान में 1.1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इससे अब यह सामान्य से 4.4 डिग्री नीचे पहुंच गया है। पंजाब में सबसे कम 18 डिग्री का न्यूनतम पारा बठिंडा का दर्ज किया गया। अमृतसर का अधिकतम पारा 33.5 डिग्री, लुधियाना का 31.8 डिग्री, पटियाला का 32.0 डिग्री, पठानकोट का 34.4 डिग्री, फाजिल्का का 33.7 डिग्री, फिरोजपुर का 33.3 डिग्री, होशियारपुर का 31.2 डिग्री, रूपनगर का 33.3 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 21.3 डिग्री, लुधियाना का 20.6 डिग्री, पटियाला का 21.2 डिग्री, पठानकोट का 22.2 डिग्री, फाजिल्का का 20.5 डिग्री, फिरोजपुर का 20.6 डिग्री, होशियारपुर का 20.8 डिग्री, रूपनगर का 23.1 डिग्री दर्ज किया गया।

पंजाब की राजनीति में हलचल तेज, बिक्रम मजीठिया पर केस के बाद घर पहुंची पुलिस

अमृतसर  थाना मजीठा से अकाली कार्यकर्ता को छुड़ाकर ले जाने के आरोप में वरिष्ठ अकाली नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर केस दर्ज कर लिया गया है। इसके बाद सोमवार को पंजाब पुलिस की टीम मजीठिया के अमृतसर स्थित आवास पर पहुंची। पुलिस की ओर से  विभिन्न स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई, जिसके लिए कई टीमों का गठन किया गया था। इन्हीं में से एक टीम मजीठिया के घर भी पहुंची। पुलिस टीम के पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अकाली कार्यकर्ता मौके पर एकत्रित हो गए। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस भी हुई। हालांकि पुलिस ने अपनी कार्रवाई जारी रखी और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। गौरतलब है कि मजीठा में उस समय विवाद खड़ा हो गया था जब अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एक पार्टी कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को हिरासत में लेने के बाद थाने में नहीं रखा, बल्कि उसे थाना प्रभारी के सरकारी आवास पर कमरे में बंद कर रखा गया है। सूचना मिलने पर बिक्रम सिंह मजीठिया अपने समर्थकों के साथ थाना मजीठा पहुंचे थे। वहां पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई। अकाली नेताओं का आरोप था कि संबंधित कार्यकर्ता को थाने में पेश नहीं किया गया। इसके बाद मजीठिया और उनके समर्थक उस सरकारी आवास पर पहुंचे जहां कार्यकर्ता को रखा गया था। वहां भी पुलिस और अकाली कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बाद में कार्यकर्ता के वहां से बाहर आने के बाद उसे समर्थक अपने साथ ले गए। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप करने और हिरासत में लिए गए व्यक्ति को छुड़ाकर ले जाने सहित विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज किया। मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया को भी नामजद किया गया है। इसी प्रकरण के सिलसिले में सोमवार को पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर दबिश दी और मजीठिया के आवास पर भी टीम पहुंची। दूसरी ओर, अकाली दल ने पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए इसका विरोध किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।