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सरकार का बड़ा फैसला: अब राशन कार्ड वालों को मिलेगा 3 महीने का स्टॉक एक साथ

चंडीगढ़. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत देश के 82 करोड़ जरूरतमंद लोगों को मिलने वाले मुफ्त गेहूं और चावल की योजना में बड़ा फैसला लिया है। अब अप्रैल 2026 से जून 2026 (3 महीने) तक का राशन एक साथ देने के लिए पत्र जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आमतौर पर हर महीने राशन दिया जाता है, लेकिन पंजाब में पहले से ही 3 महीने का राशन एकमुश्त दिया जाता है। पंजाब के करीब 18 हजार डिपो होल्डर साल में 4 बार राशन वितरित करते हैं। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आगामी खरीद सीजन को ध्यान में रखते हुए तीन महीने का कोटा तुरंत उठाने और वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मुफ्त राशन प्रति सदस्य 5 किलो के हिसाब से दिया जाता है, जिसकी सप्लाई देशभर में करीब 6 लाख डिपो होल्डर बायोमेट्रिक मशीनों के जरिए करते हैं। लोगों में खुशी की लहर तीन महीने का मुफ्त कोटा जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय वाइस प्रेसिडेंट गुरजिंदर सिंह सिद्धू और पंजाब अध्यक्ष करमजीत सिंह अड़ेचा ने कहा कि इस फैसले से देश के 82 करोड़ लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा और लोगों को गेहूं व चावल आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। 

जल विवाद गरमाया: पंजाब का राजस्थान पर 1.44 लाख करोड़ का दावा, पानी बंद करने की चेतावनी

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान को दो बड़ी नहरों इंदिरा कनाल व सरहिंद कनाल से 66 वर्षों से दिए जा रहे नहरी पानी की कीमत वसूल करने के लिए 1.44 लाख करोड़ रुपये देने के लिए पत्र लिखा है। यहां बुधवार को मीडिया कर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में बीकानेर रियासत और बहावलपुर के बीच हुए समझौते के तहत पानी की आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय पानी के बदले प्रति एकड़ शुल्क तय किया गया था और 1960 तक इसका भुगतान भी होता रहा लेकिन 1960 में सिंधु जल समझौते के बाद नदियों के पानी का बंटवारा कर दिया गया पर इसके बदले में रिपेरियन स्टेट पंजाब को भुगतान करने का पैसा तय नहीं किया गया। कहा गया कि यह अगली मीटिंग में तय होगा।न तो राजस्थान ने भुगतान किया और न ही पंजाब ने इसकी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार साल 1920 के समझौते की समीक्षा की मांग करती है ताकि पंजाब अपने जायज बकाए की वसूली कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार ने पुराने रिकार्ड के आधार पर 1960 से 2026 तक का हिसाब जोड़ा तो यह राशि करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये बनती है। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकारों ने 1960 में नई व्यवस्था में शामिल होते समय भुगतान का जिक्र नहीं किया लेकिन उन्होंने 1920 के समझौते को भी कभी रद नहीं किया। अन्यथा या तो समझौते को समाप्त किया जाए या फिर पानी की आपूर्ति पर पुनर्विचार किया जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि राज्य अपने अधिकारों को लेकर अब पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हमने यह मुद्दा केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार, दोनों के समक्ष उठाया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने राजस्थान सरकार को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बैठक की मांग करने के लिए एक पत्र भी लिखा है। मुख्यमंत्री मान बोले-राजस्थान पानी तो साल 1920 के समझौते के मुताबिक ले रहा, लेकिन बकाया मांगने पर 1960 के समझौते का सहारा ले लेता है। यदि राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी ले रहा है तो उसे उसी आधार पर भुगतान भी करना चाहिए। वर्तमान में लगभग 18 हजार क्यूसेक पानी राजस्थान फीडर के माध्यम से जा रहा है, जबकि इसके बदले कोई आर्थिक प्रतिफल नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले भुगतान होता था तो अब क्यों नहीं हो रहा।

हिरासत में मौत का मामला गरमाया, अदालत ने 5 पुलिसकर्मियों पर हत्या का ट्रायल चलाने के दिए आदेश

चंडीगढ़ बठिंडा में पुलिस हिरासत मौत मामले में बड़ा मोड़, इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिसकर्मियों पर हत्या का ट्रायल चलेगा। कोर्ट ने सबूतों के आधार पर केस सत्र अदालत को भेजा। मामला क्या है पंजाब के बठिंडा में करीब डेढ़ साल पहले हुई एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। अदालत ने इस केस में आरोपी बनाए गए पंजाब पुलिस के पांच कर्मचारियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में ट्रायल चलाने का आदेश दिया है। स्थानीय अदालत ने मामले को सत्र अदालत में भेज दिया है, जिससे अब केस की सुनवाई उच्च स्तर पर होगी। कोर्ट का अहम फैसला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इसी आधार पर केस को सत्र अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है। आरोपियों में उस समय के सीआईए-1 यूनिट के प्रभारी इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और तीन कांस्टेबल शामिल हैं, जो घटना के समय बठिंडा में तैनात थे। हिरासत में मौत और टॉर्चर के आरोप यह मामला गांव लख्खी जंगल के रहने वाले भिंदर सिंह की मौत से जुड़ा है, जिनकी पुलिस हिरासत के दौरान जान चली गई थी। न्यायिक जांच में सामने आया कि भिंदर सिंह के साथ कथित तौर पर गंभीर यातनाएं दी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें “वॉटरबोर्डिंग” जैसी तकनीक से प्रताड़ित किया गया, जिसमें व्यक्ति को डूबने जैसी स्थिति में लाकर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया जाता है। जांच में यह भी कहा गया कि उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था। पुलिस के दावे पर सवाल जांच एजेंसियों ने डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर पुलिस के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भिंदर सिंह की मौत झील में डूबने से हुई थी। जांच में सामने आया कि पुलिस ने घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। वहीं, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि मृतक और एक आरोपी इंस्पेक्टर के फोन एक ही समय पर एक ही स्थान पर सक्रिय थे, जिससे संदेह और गहरा गया। परिवार के आरोप और विरोध मृतक के भाई, जो उस समय जेल में बंद थे, ने अदालत को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उनके भाई को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिवार ने भी इस मामले को कस्टोडियल डेथ बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। पोस्टमॉर्टम में देरी पर भी उठे सवाल जांच में पोस्टमॉर्टम में दो दिन की देरी को भी संदिग्ध माना गया। यह आशंका जताई गई कि देरी का उद्देश्य परिवार पर दबाव बनाना हो सकता है। इस पहलू ने मामले को और गंभीर बना दिया। आगे क्या: अब यह मामला सत्र अदालत में चलेगा, जहां सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर सुनवाई होगी। इस केस को पंजाब में कस्टोडियल डेथ के मामलों में एक अहम उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

पानी पर नया संग्राम: पंजाब ने उठाया ऐतिहासिक समझौते का मुद्दा, राजस्थान से भारी रकम की मांग

चंडीगढ़ पंजाब ने राजस्थान को दिए जा रहे पानी पर ₹1.44 लाख करोड़ के संभावित भुगतान का मुद्दा उठाया है। 1920 के समझौते, सिंचाई सुधार और बढ़ते जल विवाद ने सियासी माहौल गरमा दिया है। ऐतिहासिक समझौते से उठा नया विवाद चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े आंकड़े पेश करते हुए राजस्थान को दिए जा रहे पानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि पानी की आपूर्ति की शुरुआत 1920 में बीकानेर रियासत और बहावलपुर के बीच हुए समझौते से हुई थी, जो बाद में राजस्थान तक विस्तारित हुई। उस दौर में प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान तय था और यह व्यवस्था 1960 तक जारी रही। 1960 के बाद खत्म हुआ भुगतान सिस्टम मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 1960 के बाद यह भुगतान प्रणाली समाप्त हो गई और नए तंत्र के लागू होने के बाद दोनों राज्यों ने इस विषय पर कोई मांग नहीं उठाई। अब पुराने रिकॉर्ड के आधार पर किए गए आकलन के अनुसार, 1960 से 2026 तक की अवधि में यह बकाया राशि करीब ₹1.44 लाख करोड़ तक पहुंचती है। समझौते के आधार पर भुगतान की मांग सरकार का कहना है कि यदि राजस्थान अब भी उसी ऐतिहासिक समझौते के तहत पानी ले रहा है, तो उसे भुगतान भी करना चाहिए। अन्यथा समझौते को समाप्त करने या पानी की आपूर्ति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। इस मुद्दे को अब उच्च स्तर पर उठाने के संकेत दिए गए हैं। बिना भुगतान के पानी सप्लाई पर सवाल मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में राजस्थान फीडर से लगभग 18,000 क्यूसेक पानी बह रहा है, जबकि इसके बदले कोई आर्थिक मुआवजा नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले भुगतान क्यों किया जाता था और अब यह प्रक्रिया क्यों बंद हो गई। सिंचाई क्षेत्र में बड़े बदलाव का दावा राज्य सरकार ने सिंचाई क्षेत्र में बड़े सुधारों का दावा किया है। 2022 में सरकार बनने के समय जहां नहरों के पानी का उपयोग केवल 26.5 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे करीब 5.8 मिलियन एकड़ भूमि को लाभ मिला है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर हजारों करोड़ का निवेश सरकार ने बताया कि लगभग ₹6,700 करोड़ खर्च कर चार वर्षों में सिंचाई बजट तीन गुना बढ़ाया गया। इस दौरान 13,938 किलोमीटर नई नहरें बनाई गईं और 18,000 किलोमीटर से अधिक पुराने ढांचे का पुनर्निर्माण किया गया। गांवों तक पहली बार पहुंचा नहरी पानी पंजाब के 1,454 गांव ऐसे थे जहां आजादी के बाद भी नहरी पानी नहीं पहुंचा था। अब पहली बार इन गांवों तक पानी पहुंचाया गया है। कंडी क्षेत्र में 1,500 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन बहाल कर 24,000 एकड़ जमीन को सिंचाई से जोड़ा गया। “गायब” नहरों का पुनर्जीवन सरकार ने उन नहरों को भी खोजकर चालू किया जो कागजों में मौजूद थीं लेकिन जमीन पर नहीं थीं। तरनतारन की सरहाली नहर का उदाहरण देते हुए बताया गया कि खुदाई में दबे ढांचे मिले और लगभग 22 किलोमीटर नहर को फिर से चालू किया गया। भूजल स्तर में सुधार और परियोजनाओं की सफलता नहरी पानी बढ़ने से भूजल पर दबाव कम हुआ है। गुरदासपुर के कई इलाकों में जल दोहन की दर आधे से ज्यादा घट गई है और 57 प्रतिशत से अधिक कुओं में जल स्तर 0 से 4 मीटर तक बढ़ा है। 25 साल से लंबित शाहपुर कंडी डैम परियोजना ₹3,394.49 करोड़ की लागत से पूरी हो चुकी है, जिससे सिंचाई के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा 26 नए पर्यटन स्थलों का विकास किया गया है। जल विवाद के सियासी संकेत मुख्यमंत्री के बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि पंजाब और राजस्थान के बीच पानी और भुगतान को लेकर विवाद फिर से उभर सकता है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को केंद्र स्तर पर उठाया जाएगा।

Admission Rules Update: PSEB का बड़ा फैसला, अब UGC प्रमाण पत्र से होगा दाखिला

चंडीगढ़. विद्यार्थियों के लिए अहम खबर सामने आई है। दरअसल, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने विदेश से पढ़ाई कर पंजाब में आगे दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने फैसला लिया है कि अब ‘समकक्षता प्रमाण पत्र’ (Equivalence Certificate) जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह नया नियम अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसके बाद छात्रों को दोहरी जांच और लंबी कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। अब वे केवल यूजीसी (UGC) द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर सीधे एडमिशन ले सकेंगे। पहले विद्यार्थियों को केंद्र स्तर से मान्यता मिलने के बाद राज्य स्तर पर भी अलग से समकक्षता प्रमाण पत्र लेना पड़ता था, जिससे समय और मेहनत दोनों अधिक लगते थे। नए फैसले से यह पूरी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बन जाएगी। बोर्ड (PSEB) के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि यह निर्णय फरवरी 2026 में हुई बैठक में लिया गया था, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत देना है। "पहले विद्यार्थियों को एक ही काम के लिए लंबे प्रोसेस से गुजरना पड़ता था। डबल वेरिफिकेशन प्रोसेस खत्म होने से स्टूडेंट्स का समय बचेगा और एडमिशन प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी आएगी।" 

Bar Council Elections: पंजाब-हरियाणा में वोटिंग जारी, करनजीत vs सैनी मुकाबला बना रोचक

लुधियाना. महानगर के पॉश इलाकों में शुमार बाड़ेवाल रोड पर स्थित एक कीमती प्लॉट को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शातिर जालसाजों ने एक महिला की संपत्ति पर नजर गड़ाते हुए न केवल उसके जाली कागजात तैयार किए, बल्कि किसी तीसरी पार्टी को बेचकर उस पर अवैध कब्जा करने का भी प्रयास किया। फिलहाल थाना सराभा नगर की पुलिस ने आरोपी कारण अरोड़ा और उमेश शर्मा के खिलाफ जाली दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पीड़िता रेनू रानी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि बाड़ेवाल इलाके की 'शर्मन जी वाटिका' (महावीर एन्क्लेव के नजदीक) में उसका प्लॉट नंबर 37 स्थित है। करीब 400 वर्ग गज के इस कीमती प्लॉट पर भू-माफियाओं की नजर थी। आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत इस प्लॉट के फर्जी और जाली मलकीयती दस्तावेज तैयार करवा लिए। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने इन जाली कागजातों के आधार पर प्लॉट को आगे किसी दूसरी पार्टी को बेच दिया और मौके पर जाकर अवैध कब्जा करने की कोशिश की। जब पीड़िता को इस धोखाधड़ी की भनक लगी, तो उन्होंने तुरंत पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में यह साफ हो गया है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी की नीयत से सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की थी।  पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिनके जरिए इन फर्जी कागजातों को असली बताकर पेश किया गया था। आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। 

Income Tax Raid: पंजाब के मशहूर ज्वेलर पर छापा, लगातार दूसरे दिन भी जांच में जुटा विभाग

बटाला/चंडीगढ़. कल बटाला शहर के मेन मार्केट नेहरू गेट पर एक बड़े गोल्ड (ज्वेलर) बिजनेसमैन के शोरूम में इनकम टैक्स की रेड पड़ी और कहा जा रहा है कि आधी रात तक शोरूम में रिकॉर्ड खंगाले जाते रहे और आज दूसरे दिन भी चेकिंग जारी है। कल ही, करीब 5 अलग-अलग गाड़ियों में आए बड़ी संख्या में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने नेहरू गेट पर मशहूर सुनार के तीन अलग-अलग शोरूम में घुसकर अपनी जांच शुरू की। देर रात तक वहां चेकिंग जारी रही और अब आज सुबह से उनमें से एक स्टोर में चेकिंग जारी है और एक बड़े शोरूम के शटर बंद हैं। जिस स्टोर में अधिकारी मौजूद हैं, वहां किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं है और बाहर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के स्टिकर और प्लेट लगी गाड़ियां खड़ी हैं। इस बीच, इस कार्रवाई के बारे में कोई ऑफिशियल मीडिया सामने नहीं आ रहा है और न ही स्टोर मालिक कुछ कह रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की इस कार्रवाई की दो दिन से चल रही चर्चा से दूसरे बड़े गोल्ड ट्रेडर्स भी घबराए हुए हैं। 

Punjab vs Rajasthan Water Dispute: भगवंत मान का बड़ा बयान, 1.44 लाख करोड़ के दावे से बढ़ी हलचल

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े आंकड़े पेश करते हुए राजस्थान को दिए जा रहे पानी पर बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में बीकानेर रियासत और बहावलपुर के बीच हुए समझौते के तहत पानी की आपूर्ति शुरू हुई थी, जो बाद में राजस्थान तक पहुंची। उस समय पानी के बदले प्रति एकड़ शुल्क तय किया गया था और 1960 तक इसका भुगतान भी होता रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि 1960 के बाद नई व्यवस्था लागू होने पर यह भुगतान व्यवस्था जारी नहीं रही। न तो राजस्थान ने भुगतान किया और न ही पंजाब ने इसकी मांग उठाई। अब सरकार ने पुराने रिकॉर्ड के आधार पर आकलन किया है कि 1960 से 2026 तक का हिसाब जोड़ने पर यह राशि करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये बनती है। उन्होंने कहा कि यदि राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी ले रहा है तो उसे उसी आधार पर भुगतान भी करना चाहिए। अन्यथा या तो समझौते को समाप्त किया जाए या फिर पानी की आपूर्ति पर पुनर्विचार किया जाए। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि यह मुद्दा अब उच्च स्तर पर उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान में लगभग 18 हजार क्यूसेक पानी राजस्थान फीडर के माध्यम से जा रहा है, जबकि इसके बदले कोई आर्थिक प्रतिफल नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले भुगतान होता था तो अब क्यों नहीं हो रहा। सिंचाई में बड़े बदलाव का दावा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने राज्य में सिंचाई के क्षेत्र में हुए कार्यों का भी विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि 2022 में सरकार बनने के समय केवल 26.5 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग हो रहा था, जो अब बढ़कर लगभग 58 लाख एकड़ क्षेत्र तक पहुंच गया है। यह करीब 78 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने बताया कि चार वर्षों में सिंचाई बजट को तीन गुना बढ़ाते हुए लगभग 6700 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 13,938 किलोमीटर नए वाटर कोर्स (खाल) बनाए गए और 18,000 किलोमीटर से अधिक पुराने ढांचों को बहाल किया गया। ‘गुम’ नहरें खोजकर फिर से चलाईं मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के 1454 गांव ऐसे थे जहां आजादी के बाद भी नहरी पानी नहीं पहुंचा था। अब पहली बार इन गांवों तक पानी पहुंचाया गया है। कंडी क्षेत्र में 1500 किलोमीटर अंडरग्राउंड पाइपलाइन बहाल कर 24 हजार एकड़ क्षेत्र को सिंचाई से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि कई नहरें कागजों में मौजूद थीं लेकिन जमीन पर उनका अस्तित्व खत्म हो चुका था। सरकार ने ऐसी नहरों को खोजकर दोबारा चालू किया। तरनतारन की सरहाली नहर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि खुदाई के दौरान नीचे दबे हुए ढांचे मिले और करीब 22 किलोमीटर लंबी नहर को पुनर्जीवित किया गया। शाहपुर कंडी परियोजना पूरी मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नहरी पानी बढ़ने से भूजल दोहन में कमी आई है। गुरदासपुर के कई ब्लॉकों में एक्सट्रैक्शन रेट आधे से भी कम हो गया है और 57 प्रतिशत से अधिक कुओं में जलस्तर 0 से 4 मीटर तक ऊपर आया है। उन्होंने बताया कि 25 साल से लंबित शाहपुर कंडी डैम परियोजना को 3394.49 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है। इससे सिंचाई के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और 26 नए पर्यटन स्थल विकसित किए गए हैं। आपदा प्रबंधन और ड्रेनेज पर काम राज्य सरकार ने स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड के तहत 470 करोड़ रुपये खर्च कर 195 कार्य पूरे किए हैं। 3700 किलोमीटर ड्रेनों की सफाई की गई और नई मशीनरी लगाई गई ताकि बाढ़ और जलभराव की समस्या कम हो सके। मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस बयान से साफ है कि आने वाले समय में राजस्थान-पंजाब के बीच पानी और भुगतान का मुद्दा फिर से गर्मा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य अपने अधिकारों को लेकर अब पीछे नहीं हटेगा और जरूरत पड़ी तो यह मामला केंद्र स्तर तक उठाया जाएगा।

Punjab-Haryana Water Crisis: हाईकोर्ट की चेतावनी—मुफ्त बिजली और अत्यधिक दोहन ने बढ़ाई परेशानी

चंडीगढ़. राज्य में कृषि ट्यूबवेलों को 24 घंटे मुफ्त बिजली देने और इसके कारण भूजल के अत्यधिक दोहन के मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड को चार हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। एक याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि जब भूजल की उपलब्धता से अधिक उसका दोहन हो रहा है, तो यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत खतरनाक है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि राज्य की नीति के अनुसार किसानों को केवल धान के सीजन में सीमित समय के लिए मुफ्त बिजली दी जानी चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर 24 घंटे मुफ्त बिजली का उपयोग किया जा रहा है। अदालत को बताया गया कि तरनतारन जिले के पट्टी क्षेत्र में लगभग 300 ऐसे कृषि कनेक्शन हैं, जहां 24 घंटे मुफ्त बिजली का उपयोग हो रहा है। यह बिजली का उपयोग केवल ट्यूबवेल तक सीमित नहीं है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस अनियंत्रित मुफ्त बिजली के कारण दोहरा नुकसान हो रहा है। एक तरफ बिजली की खपत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में पंजाब में कुल भूजल रिचार्ज 18.84 बीसीएम था, जबकि दोहन 27.8 बीसीएम तक पहुंच गया, जो स्पष्ट रूप से अधिक है। राज्य की ओर से जवाब देते हुए बताया गया कि लंबे समय से नए कृषि ट्यूबवेल कनेक्शन जारी नहीं किए गए हैं।

Sports Scholarship Update: आवेदन की डेडलाइन बढ़ी, चंडीगढ़ खिलाड़ियों को पुराने नियमों का फायदा

चंडीगढ़. खेल विभाग से स्काल्रशिप पाने वाले शहर के सैंकड़ों खिलाड़ियों के लिए अच्छी खबर है। स्कूल,कालेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर स्टेट लेवल पर मेडल विजेताओं को इस बार पुराने नियमों के तहत ही स्कालरशिप देने को लेकर खेल विभाग तैयार हो गया है। इस संबंध में जल्द ही खेल विभाग की ओर से नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। विभाग ने स्कालरशिप के लिए आवेदन की तिथि भी मंगलवार को 31 मार्च तक बढ़ा दी है। इस फैसले से इंटर स्कूल और कालेज स्तर पर खेलने वाली महिला खिलाड़ियों को सबसे अधिक फायदा होगा। फरवरी में चंडीगढ़ खेल विभाग की ओर से 2023-24 सत्र में विभिन्न राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पहले तीन स्थान हासिल करने वाले खिलाड़ियों से स्पोर्ट्स टैलेंट स्कॉलरशिप (कैश अवार्ड) के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। लेकिन खेल विभाग के एक फैसले ने सैंकड़ो खिलाड़ियों की स्कालरशिप के रास्ते को बंद कर दिया । खेल विभाग ने नोटिस जारी किया कि केवल उन्हीं खिलाड़ियों को कैश अवार्ड मिलेगा, जिन्होंने कम से कम सात टीमों के हिस्सा लेने वाले टूर्नामेंट में मेडल हासिल किया है। इस फैसले से अधिकतर महिला खिलाड़ी स्कालरशिप स्कीम से बाहर हो गई। मामले में बहुत से खिलाड़ियों और अभिभावकों ने खेल विभाग के अधिकारियों से लेकर चीफ सेक्रेटरी और यहां तक प्रशासक के पास फैसले के खिलाफ गुहार लगाई। मामले में खेल सचिव प्रेरणा पुरी ,डायरेक्टर स्पोर्ट्स सौरभ अरोड़ा और ज्वाइंट जायरेक्टर डा.महेंद्र सिंह ने खिलाड़ियों की अर्जी को स्वीकार करते हुए पुराने नियमों के तहत ही इस बार स्कालरशिप देने के लिए फाइल मंजूरी को प्रशासक के पास भेज दी है। मामले में खिलाड़ियों को राहत मिलने की पूरी उम्मीद है। खेल विभाग करीब 40 खेलों में कैश अवार्ड की स्कालरशिप देता है। मार्च -अप्रैल में खेल विभाग की ओर से स्कालरशिप जारी करने को लेकर बड़े आयोजन की तैयारी है। यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हो सकते हैं। चंडीगढ़ खेल विभाग ने खिलाड़ियों के साथ ही कोच को भी नई स्पोर्ट्स पॉलिसी में कैश अवार्ड देने का फैसला लिया है। खेल विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी की ओर से 2020 से 31 मार्च 2025 तक जिन कोच की देखरेख में नेशनल और इंटनरेशनल स्तर पर खिलाड़ियों ने मेडल हासिल किए हैं उन्हें कैश अवार्ड से नवाजा जाएगा। जानकारी अनुसार 2020 से 29 अगस्त 2023 तक पुरानी खेल नीति और 28 अगस्त 2023 से 31 मार्च 2025 तक नई स्पोर्ट्स पालिसी के तहत कैश अवार्ड दिए जाएंगे। कैश अवार्ड के योग्य कोच 16 अप्रैल तक खेल विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चंडीगढ़ स्पोर्ट्स काउंसिल की बैठक में स्कालरशिप के लिए नए नियमों से महिला खिलाड़ियों को सबसे अधिक नुकसान होगा। बहुत से खेलों में इंटर स्कूल स्टेट लेवल पर महिला इवेंट में सात टीमें नहीं होती। जबकि लड़कों की टीमें कई गुणा अधिक होती हैं। अभिभावकों के आवेदन पर अब खेल विभाग स्काल्रसिप नियमों को लेकर रिव्यू करेगा। जल्द ही इस संबध में खेल सचिव की ओर से कमेटी गठित की जाएगी जोकि अपनी रिपोर्ट देगी। कमेटी में पिछले सालों में विभिन्न खेलों में हिस्सा लेने वाली टीमों की संख्या और शिक्षा विभाग के कोच और अन्य एक्सपर्ट को भी शामिल किया जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन की खेल सचिव प्रेरणा पुरी ने कहा कि खेल विभाग ने खिलाड़ियों की मांग को देखते हुए स्पोर्ट्स टैलेंट स्कालरशिप के आवेदन की तिथि 31 मार्च तक बढ़ा दी है। नवंबर में चंडीगढ़ स्पोर्ट्स काउंसिल की बैठक में स्कालरशिप नियमों में बदलाव का फैसला लिया गया था। जिसके कारण बहुत से मेडल विजेता खिलाड़ी स्कालरशिप से वंचित रह जाते। खिलाड़ियों की रिप्रेजेंटेशन को देखते हुए 2023-24 सत्र में खिलाड़ियों को पुरान नियमों के तहत ही स्कालरशिप देने का प्रपोजल मंजूरी के लिए भेजा गया है, जल्द ही इसकी नोटिफिकेशन जारी कर दी जाएगी।