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मुख्य ग्रंथी के पद से विदाई के बाद पंथक राजनीति गरमाई, SGPC फैसले पर विवाद

अमृतसर (पंजाब) शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुवार को श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी और श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को अनुशासनहीनता और प्रबंधन को चुनौती देने के आरोप में पद से हटाकर जबरन रिटायर कर दिया।  लंबे समय से चल रही तनातनी के बीच हुए इस फैसले ने पंजाब की पंथक राजनीति में हलचल मचा दी है। फिलहाल उनके स्थान पर नए मुख्य ग्रंथी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने निर्णय को उचित ठहराते हुए कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह ने नियमों के विरुद्ध सार्वजनिक बयानबाजी की और मर्यादा के अनुरूप ड्यूटी नहीं निभाई। हालांकि पंथक हलकों में इसे महज प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह कदम शिरोमणि अकाली दल (बादल) और एसजीपीसी के उस गठजोड़ की प्रतिक्रिया है, जो पंथक संस्थाओं पर अपनी पकड़ कमजोर पड़ने से असहज है। क्यों गिरी गाज? हुक्मनामा बना टकराव की जड़ विवाद की जड़ 2 दिसंबर 2024 का वह हुक्मनामा माना जा रहा है, जो ज्ञानी रघबीर सिंह ने अकाल तख्त के जत्थेदार रहते हुए जारी किया था। इसमें शिरोमणि अकाली दल की तत्कालीन नेतृत्व को तनखैया घोषित करते हुए पार्टी के पुनर्गठन के आदेश दिए गए थे। साथ ही प्रकाश सिंह बादल को दिया गया फख्र-ए-कौम खिताब भी वापस लिया गया था। इस फैसले को पंथक राजनीति में ऐतिहासिक और विवादास्पद माना गया। इसके बाद ज्ञानी रघबीर सिंह ने एसजीपीसी में लंगर घोटाले, संपत्तियों की अवैध बिक्री और गोलक के धन में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। पहले उन्हें मार्च 2025 में अकाल तख्त के जत्थेदार पद से हटाया गया और अब 26 फरवरी 2026 को मुख्य ग्रंथी पद से भी सेवामुक्त कर दिया गया। पंथक राजनीति पर असर, संस्थागत साख दांव पर विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय पंजाब में नए पंथक ध्रुवीकरण को जन्म दे सकता है। यदि सिख संगत इस कार्रवाई को आवाज दबाने के रूप में देखती है तो इसका उल्टा असर अकाली दल (बादल) पर पड़ सकता है। वहीं समर्थक इसे संगठनात्मक अनुशासन की बहाली बता रहे हैं। एसजीपीसी पर एक परिवार के प्रभाव के आरोप भी तेज हो सकते हैं और कमेटी चुनाव की मांग जोर पकड़ सकती है। अमृतसर व ग्रामीण पंजाब में ज्ञानी रघबीर सिंह की छवि बेबाक और मर्यादा के रक्षक की रही है। उन्होंने जाते-जाते कहा है कि वे भ्रष्टाचार के सबूत संगत के सामने रखेंगे। स्पष्ट है कि यह फैसला केवल एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि पंजाब की पंथक राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत है। आने वाले समय में इसका असर एसजीपीसी की विश्वसनीयता और अकाली दल की सियासी स्थिति पर गहरा पड़ सकता है। सच की आवाज दबाई गई, वडाला का एसजीपीसी पर हमला श्री हरिमंदिर साहिब के पूर्व हजूरी रागी और सिख सद्भावना दल के मुखी भाई बलदेव सिंह वडाला ने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह को पद से हटाकर एसजीपीसी ने साबित कर दिया है कि सच बोलने वालों की आवाज दबाई जाती है। उन्होंने कहा कि जब 2 दिसंबर 2024 को अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार रहते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह ने अकाली दल बादल नेतृत्व के खिलाफ हुक्मनामा जारी किया था, तभी तय हो गया था कि उन्हें किसी न किसी बहाने पद से हटाया जाएगा। पहले उन्हें जत्थेदार पद से हटाया गया और अब मुख्य ग्रंथी पद से भी हटा दिया गया। वडाला ने आरोप लगाया कि एसजीपीसी और अकाली नेतृत्व पंथक मर्यादा से समझौता कर रहे हैं, जिसका जवाब पंथ जरूर मांगेगा।   सरबत खालसा बुलाने की उठी मांग, पंथक संगठनों की चुप्पी पर सवाल इंटरनेशनल पंथक दल के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा ज्ञानी रघबीर सिंह को सेवा मुक्त किए जाने के फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि देश–विदेश की पंथक जत्थेबंदियों और सिख संप्रदायों की चुप्पी ने बादल दल नेताओं को पुनः मनमानी करने का अवसर दिया है। अब समय आ गया है कि श्री अकाल तख्त साहिब पर ‘सरबत खालसा’ बुलाया जाए।  

ड्रोन के जरिए हथियार सप्लाई का खुलासा, सरहदी स्कूल बना तस्करों का निशाना

तरनतारन भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास गांव डल के एक प्राइवेट स्कूल में ड्रोन से गिराए गए पैकेट में पिस्टल और गोलियां मिलने से बच्चों और लोगों में डर का माहौल देखने को मिल रहा है। थाना खालड़ा के ASI गुरनाम सिंह ने बताया कि गांव डल के एक प्राइवेट स्कूल में ड्रोन से पैकेट गिराए जाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई और जब पैकेट की तलाशी ली गई तो उसमें से एक चीन की बनी पिस्टल, एक मैगजीन और तीन जिंदा राउंड बरामद हुए। इस संबंध में एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

लाडोवाल टोल प्लाजा हुआ फ्री, किसानों के प्रदर्शन से वाहनों को मिली राहत

लुधियाना अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान दिलाने के लिए किसानों ने पंजाब के सबसे महंगे टोल प्लाजा को फ्री करवा दिया। इस दौरान मौके पर किसानों और चालकों ने टोल कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण आज उन्होंने लाडोवाल टोल प्लाजा को मुफ्त करवाया। किसानों ने मांग की कि बेअदबी की घटनाओं में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। वहीं एक ड्राइवर ने आरोप लगाया कि देर रात सब्जियों से भरी किसानों की गाड़ियों को निकालने के दौरान टोल कर्मचारी उन्हें परेशान करते हैं। ड्राइवर का कहना है कि कई बार टोल कर्मियों द्वारा लोगों के साथ गलत और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल भी किया जाता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

पानी पर सख्ती: पंजाब के 111 ब्लॉक ‘अत्यधिक दोहन’ क्षेत्र, ट्यूबवेल के लिए NOC बंद

चंडीगढ़ जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वार्षिक जल पुनर्भरण 18.60 अरब घन मीटर है, जबकि भूजल निष्कर्षण 26.27 अरब घन मीटर तक पहुंच गया है। यानी पुनर्भरण से 7.67 अरब घन मीटर अधिक दोहन हो रहा है। पंजाब में भूजल दोहन खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। जल स्रोत विभाग ने 23 जिलों के 111 ब्लॉकों को अत्यधिक दोहन (ओवरएक्सप्लॉइटेड) श्रेणी में अधिसूचित कर दिया है, जबकि 10 ब्लॉकों को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद इन क्षेत्रों में नए ट्यूबवेल के लिए एनओसी नहीं दी जाएगी। भूजल का अत्यधिक उपयोग करने वाली फैक्टरियों पर भी सख्ती की जाएगी। अधिसूचना के अनुसार 15 ब्लॉक अर्द्ध-गंभीर और केवल 17 ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में हैं। यह सूची कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के सहयोग से तैयार भूजल आकलन रिपोर्ट के आधार पर बनाई गई है। अमृतसर, बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मालेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, मोहाली, एसबीएस नगर, संगरूर, तरनतारन और रूपनगर में हालात अधिक चिंताजनक हैं। रिचार्ज से 7.67 अरब घन मीटर अधिक दोहन जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वार्षिक जल पुनर्भरण 18.60 अरब घन मीटर है, जबकि भूजल निष्कर्षण 26.27 अरब घन मीटर तक पहुंच गया है। यानी पुनर्भरण से 7.67 अरब घन मीटर अधिक दोहन हो रहा है। सरकार का कहना है कि अब भूजल संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। नहरी पानी और फसल विविधीकरण पर फोकस भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए नहरी पानी की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। सरहिंद फीडर नहर की रिलाइनिंग परियोजना पूरी की जा चुकी है। देवीगढ़ डिवीजन में नौ नई नहरों का निर्माण हुआ है, जबकि मालवा नहर परियोजना पर काम जारी है। राज्य में 545 किलोमीटर लंबी 79 नहरों को दोबारा शुरू किया गया है और नहरों व खालों के बुनियादी ढांचे पर 4557 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। साथ ही धान के रकबे को घटाने के लिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का कदम सराहनीय है, लेकिन भूजल संकट से निपटने के लिए सख्त प्रतिबंध जरूरी हैं। जिन क्षेत्रों में नहरी पानी उपलब्ध है, वहां किसानों को इसके उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। – हर्ष नैयर, प्रोफेसर, पंजाब विश्वविद्यालय पंजाब को रेगिस्तान बनने से बचाना है इसलिए 111 ब्लॉकों में नए ट्यूबवेल की एनओसी नहीं दी जाएगी। चरणबद्ध तरीके से सख्ती लागू होगी और जहां नहरी पानी उपलब्ध है, वहां पहले प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। – बरिंदर गोयल, जल संसाधन मंत्री, पंजाब सरकार

सेहत सुधार के लिए बेंगलुरु पहुंचे भगवंत मान, नैचुरोपैथी से होगा इलाज

पंजाब पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान इस समय बेंगलुरु चले गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे नैचुरल तरीके से इलाज करवाने गए हैं। वे बेंगलुरु के एक प्राइवेट नेचर केयर सेंटर गए हैं। बताया जा रहा है कि वे यहां एक हफ़्ते तक नैचुरल तरीके से इलाज करवाएंगे। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान महाशिवरात्रि के दिन संगरूर पहुंचे थे। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। यहां से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने मोगा में एक रैली में हिस्सा लिया था, लेकिन एक बार फिर तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने कई इवेंट्स में हिस्सा लिया। कल भी उन्होंने जालंधर और फिरोजपुर में कुछ इवेंट्स में हिस्सा लिया था। इसके बाद वे बेंगलुरु के लिए निकल गए।

बेअदबी के गुनहगारों को कानून की बात करने का हक नहीं: बलतेज पन्नू

चंडीगढ़ आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रदेश मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के उस बयान पर तीखा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार आने पर पहली मीटिंग में ड्रग तस्करों और गैंगस्टरों को 'आतंकवादी' घोषित किया जाएगा। बुधवार को पार्टी दफ्तर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पन्नू ने कहा कि सुखबीर बादल शायद इस गलतफहमी में हैं कि पंजाब के लोग 2007 से 2017 के काले दौर को भूल चुके हैं।  सच्चाई यह है कि पंजाब की धरती पर ड्रग्स (चिट्टा) और गैंगस्टरवाद के बीज अकाली-भाजपा सरकार के दौरान ही बोए गए और उनके संरक्षण में ही यह फला-फूला। बलतेज पन्नू ने पुरानी घटनाओं को याद दिलाते हुए कहा कि 2007 से पहले पंजाब ने कभी 'गैंगस्टर' शब्द नही सुना था। सुखबीर बादल के राज में ही अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिला। अमृतसर में अपनी बेटी की इज्जत बचाते हुए जब एक एएसआई की हत्या की गई, तो अकाली दल से जुड़े लोगों ने सरेआम भांगड़ा डाला था। पन्नू ने सवाल किया कि नाभा जेल ब्रेक कांड किसके समय हुआ? फरीदकोट में सरेआम नाबालिग लड़की का अपहरण किसने किया? यह सब अकाली दल के गुंडाराज की निशानियां हैं जो अपराधी उस समय महंगी गाड़ियों पर हूटर और स्पीकर लगाकर बेखौफ घूमते थे, वही आगे चलकर गैंगस्टर बने। पन्नू ने कहा कि 2007 से 2012 के बीच पंजाब में नशे की दुकानें खुलीं और 2012 में सरकार रिपीट होने के बाद चिट्टा अपने शिखर पर पहुंच गया। पंजाब की एक पूरी पीढ़ी को नशे की गर्त में धकेलने का पाप सुखबीर बादल के सिर है। जब पुलिस चिट्टा तस्करों को पकड़ती थी, तो आधे घंटे के भीतर ही अकाली नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें सामने आ जाती थीं और उन्हें छुड़ाने के लिए मंत्रियों की सिफारिशें पहुंच जाती थीं। आज वही सुखबीर बादल पहली मीटिंग में कार्रवाई की बात कर रहे हैं, जो पूरी तरह हास्यास्पद है। बलतेज पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार आज ईमानदारी से नशे और गैंगस्टरों के खिलाफ युद्ध लड़ रही है। हमने गांव स्तर तक समितियों का गठन किया है और पुलिस पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। आज जब मान सरकार इन बुराइयों को जड़ से खत्म कर रही है, तो सुखबीर बादल को फिर से सत्ता की भूख सता रही है ताकि वे दोबारा वही पुराना नशे का साम्राज्य खड़ा कर सकें। सुखबीर बादल पर कड़ा प्रहार करते हुए पन्नू ने कहा कि पंजाब के लोग कभी नहीं भूल सकते कि आपके राज में बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी हुई। जब लोग शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, तो उन पर गोलियां किसने चलवाईं? कोटकपुरा गोलीकांड में आज सुखबीर बादल खुद जमानत पर बाहर हैं। इतना ही नहीं, सिख पंथ की महान हस्तियां और खुद श्री दरबार साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह जी अकाली परिवार पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सुखबीर बादल ने इस पर गहरी चुप्पी साधी हुई है। बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखबीर बादल अगली रैली में पंजाब के लोगों को यह बताएं कि 10 साल के राज में उन्होंने क्या किया? 2007 से 17 के बीच चिट्टा कैसे आया और स्कूटर ठीक करने वाले लोग अरबों के मालिक कैसे बन गए? पंजाब की जनता का याददाश्त इतनी कमजोर नहीं है कि वे अपनों के खून और बर्बाद हुए युवाओं को भूल जाएं। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल को मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि पंजाब अब आपकी असलियत पहचान चुका है।

पंजाब में कानून व्यवस्था पर मजीठिया का वार—जवान मारे जा रहे, प्री-वेडिंग में तैनात पुलिस

चंडीगढ़ शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब की कानून व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं और सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। मजीठिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि एक ओर पंजाब के गुरदासपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई, लेकिन पंजाब पुलिस अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि इस वारदात को किसने अंजाम दिया और घटना किन परिस्थितियों में हुई। सीमा क्षेत्र में तैनात जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन इस मामले में गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। बता दें कि गुरदासपुर के बॉर्डर इलाके में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से सिर्फ डेढ़ किलोमीटर दूर, दोरांगला पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले आदियां पुलिस चेक पोस्ट पर दो पुलिसवालों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मरने वालों में होमगार्ड जवान अशोक कुमार (अखलासपुर के रहने वाले) और एएसआई गुरनाम सिंह (गादड़ियां के रहने वाले) शामिल हैं।  दूसरी ओर, उन्होंने आरोप लगाया कि बटाला मार्केट कमेटी के नवनियुक्त चेयरमैन इंजीनियर मानिक मेहता के प्री-वेडिंग शूट में कथित तौर पर पंजाब पुलिस के मौजूदा जवानों को तैनात किया गया। मजीठिया ने सवाल उठाया कि क्या राज्य में सुरक्षा व्यवस्था की यही स्थिति रह गई है कि पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था संभालने के बजाय निजी समारोहों में लगाया जा रहा है? उन्होंने पुलिस के अधिकारियों से जवाब मांगते हुए कहा कि क्या साथी जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय पुलिस बल को प्री-वेडिंग शूट के लिए तैनात करना उचित है। साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेताओं पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि क्या उनके प्री-वेडिंग समारोह पुलिसकर्मियों की सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण हैं। मजीठिया ने कहा कि राज्य में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है, जब पुलिस के जवानों का कथित तौर पर प्री-वेडिंग शूट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने मार्केट कमेटी के चेयरमैन मानिक मेहता और वीडियो शूट में शामिल पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की मांग की।

स्कूल में रेनोवेशन कार्य देखने पहुंचे शिक्षा मंत्री हरजोत ने बच्चों से मांगी माफ़ी

मानसा/अमृतसर. पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने मानसा स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस का दौरा कर चल रहे रेनोवेशन कार्य और शैक्षणिक व्यवस्था का जायजा लिया। मंत्री एक अन्य कार्यक्रम में जा रहे थे, तभी रास्ते में स्कूल दिखाई देने पर उन्होंने स्थानीय विधायक डॉ. विजय सिंगला के साथ स्कूल का निरीक्षण करने का निर्णय लिया। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने प्राइमरी विंग में जाकर विद्यार्थियों से बातचीत की और पंजाबी विषय से जुड़े कुछ प्रश्न पूछे। बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिए। मंत्री ने अध्यापकों द्वारा दी जा रही शिक्षा की सराहना की। स्कूल में इन दिनों करीब दो करोड़ रुपये की लागत से पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा रेनोवेशन का काम चल रहा है। निर्माण कार्य के कारण कुछ कक्षाएं अस्थायी रूप से टीन शेड के नीचे लगाई जा रही हैं। इस पर मंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि यह व्यवस्था अस्थायी है और 31 मार्च तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से असुविधा के लिए खेद भी व्यक्त किया। रेनोवेशन के काम की रिपोर्ट ली मंत्री ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की और स्कूल प्रिंसिपल विजय मिढ्ढा से कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी ली। स्कूल में प्रतिदिन लगभग 250 विद्यार्थी पढ़ाई करने आते हैं। निर्माण कार्य के चलते इस बार स्कूल को बोर्ड परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है। दौरे के दौरान मंत्री ने स्कूल परिसर और आसपास की साफ-सफाई का भी निरीक्षण किया। बच्चों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध करवाने के आदेश उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूल के आसपास स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर माहौल मिल सके। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्कूलों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि रेनोवेशन पूरा होने के बाद यह स्कूल क्षेत्र के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों में शामिल होगा।

मार्च में टेट परीक्षा करवाएगी पंजाब सरकार

चंडीगढ़. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश भर में 2011 टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टैट) ज़रूरी होने से पहले भर्ती हुए टीचरों को अब अपनी नौकरी बचाने टैट की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। कई राज्यों ने परीक्षा ले भी ली है। वहीं, पंजाब इसके लिए कानूनी विकल्प की तलाश कर रहा है। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस का कहना हैं, सरकार टीचरों के साथ खड़ी है। इसके लिए कानूनी विकल्प ढूंढे जा रहे हैं। क्योंकि इस फैसले के कारण पंजाब के 50 फीसदी स्कूलों में प्रिंसिपलों को नहीं लगाया जा सकता है। क्योंकि शिक्षकों की तरक्की प्रभावित हुई है। वहीं सीधी भर्ती पर भी प्रभाव पड़ा है।  पंजाब भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरजोत बैंस ने कहा कि सरकार टैट परीक्षा करवाने के लिए तैयार है। इसे मार्च माह में करवाया जा सकता है। साथ की सरकार रिव्यू पिटीशन डालने के कानूनी प्रावधानों की भी तलाश कर रही है। 40 हजार के करीब टीचर प्रभावित बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राज्य के 19,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में काम कर रहे एक लाख से अधिक टीचरों में से करीब 40,000 टीचर प्रभावित होंगे। रिटायरमेंट से पहले जिनकी सर्विस पांच साल से कम बची है, उन्हें इससे छूट दी गई है। यह आदेश उन लोगों के प्रमोशन पर भी रोक लगाता है जो टेस्ट पास नहीं कर पाते हैं। सरकार कानूनी विकलप ढूंढ रही मंत्री ने कहा कि वह नहीं चाहते कि 20-25 साल से पढ़ाने वाले शिक्षकों की नौकरी जाए। इसलिए सरकार कानूनी विकल्प ढूंढ रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले पंजाब सरकार ने भी फरवरी माह में टैट की परीक्षा करवाने की तैयारी की थी लेकिन अब इसे मार्च माह में करवाया जा सकता है। बता दें कि कई राज्यों में टैट परीक्षा की प्रक्रिया या तो पूर्ण हो गई है या अंतिम चरण में हैं। बता दें कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक 2011 से पहले भर्ती हुए टीचरों को 31 अगस्त, 2027 तक यह टेस्ट पास करना होगा। अन्यथा उन्हें सेवा मुक्त कर दिया जाएगा।

शिरोमणि कमेटी के दफ्तरों में अब पजामा-कुरता में ड्यूटी करेंगे कर्मचारी

अमृतसर. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने अपने सभी दफ्तरों में कर्मचारियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया है। जारी आदेश के अनुसार अब कोई भी कर्मचारी पैंट-शर्ट पहनकर ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होगा। सभी मुलाजिमों के लिए पारंपरिक सिख पहनावा पजामा-कुरता पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। यह निर्देश एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की ओर से जारी किए गए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सिख मर्यादा और परंपराओं की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। कमेटी का मानना है कि उसके दफ्तरों और धार्मिक संस्थानों में सिख रीति-रिवाजों और पारंपरिक पहचान की झलक साफ दिखाई देनी चाहिए। हिदायकों का सख्ती से पालन करने का आदेश श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर राजिंदर सिंह रूबी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ये आदेश प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी द्वारा जारी किए गए हैं। आदेश में हिदायतों की सख्ती से पालना करवाने की बात कही गई है। इन आदेशों को सख्ती से पालन भी करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है और कार्यालयों में पारंपरिक पहनावा अपनाने की व्यवस्था की जा रही है। पारंपरिक वेशभूषा सिख संस्कृति का अहम हिस्सा शिरोमणि कमेटी के अनुसार यह निर्णय संस्था की गरिमा, अनुशासन और सिख पहचान को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। एसजीपीसी का मानना है कि पारंपरिक वेशभूषा सिख संस्कृति का अहम हिस्सा है और इसे दैनिक कार्यप्रणाली में शामिल करना आवश्यक है। आदेश लागू होने के बाद से अब सभी कर्मचारी निर्धारित ड्रेस कोड में ही एसजीपीसी कार्यालयों में उपस्थित होंगे। शिरोमणि कमेटी ने उम्मीद जताई है कि कर्मचारी इस फैसले का सम्मान करते हुए पूरी जिम्मेदारी से इसका पालन करेंगे। ताकि, सिख मर्यादा और परंपराओं की निरंतरता बनी रहे।