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सेवा से सियासत तक: पंजाब में रिटायर्ड अफसरों की बढ़ती दखल, राजनीति में हलचल

चंडीगढ़. पंजाब में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में लंबे समय तक काम करने वाले अधिकारी अब तेजी से सक्रिय राजनीति का रुख कर रहे हैं। कभी सरकारी नीतियों को लागू करने वाले ये नौकरशाह अब विभिन्न राजनीतिक दलों के मंच से उन्हीं नीतियों को बनाने और दिशा देने में भूमिका निभा रहे हैं। इससे राज्य की राजनीति में अनुभव का नया आयाम जुड़ा है, वहीं निष्पक्षता और नीति निर्माण पर प्रभाव को लेकर बहस भी गहराती जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन अधिकारियों के पास जमीनी अनुभव, प्रशासनिक समझ और सिस्टम की गहरी जानकारी होती है, जिसका लाभ राजनीतिक दल उठाना चाहते हैं। यही कारण है कि लगभग हर प्रमुख दल—चाहे वह आम आदमी पार्टी हो, कांग्रेस, भाजपा या शिअद—पूर्व अधिकारियों को अपने साथ जोड़ रहा है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे सेवा के दौरान लिए गए निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। पूर्व आईपीएस जो राजनीतिक पार्टियों में शामिल हुए – कुंवर विजय प्रताप सिंह : आम आदमी पार्टी मोहम्मद मुस्तफा : कांग्रेस पीएस गिल : भाजपा एसएस विर्क : भाजपा गुरविंदर सिंह ढिल्लों : कांग्रेस पूर्व आईएएस जो राजनीति में गए – एसएस चन्नी : भाजपा परमपाल कौर : भाजपा डीएस गुरू : अकाली दल सोम प्रकाश : भाजपा आरएस कलेर : शिअद तेजिंदर पाल सिद्धू : शिअद जगमोहन राजू : भाजपा डा. अमर सिंह : कांग्रेस कुलदीप वैद्य : कांग्रेस बलविंदर सिंह : कांग्रेस आईएफएस तरणजीत संधू : भाजपा पीसीएस बलकार सिंह : आम आदमी पार्टी सेवानिवृत जज जस्टिस निर्मल सिंह : शिअद राजनीति को प्रशासनिक अनुभव की जरूरत राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रुझान आने वाले समय में और तेज हो सकता है, क्योंकि दलों को ऐसे चेहरों की जरूरत है जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ जनता के मुद्दों की समझ भी रखते हों। फिलहाल, यह साफ है कि सेवा से सियासत तक का यह सफर पंजाब की राजनीति को नई दिशा दे रहा है।

श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी: नवरात्र में कई रूटों पर स्पेशल ट्रेनें, सफर होगा आसान

जालंधर. त्योहारों व यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने कई स्पेशल ट्रेनों के संचालन का फैसला लिया है। इन विशेष ट्रेनों का उद्देश्य श्रद्धालुओं और आम यात्रियों को सुगम, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुविधा उपलब्ध करवाना है, ताकि त्योहारों के दौरान होने वाली अतिरिक्त भीड़ को आसानी से नियंत्रित किया जा सके। इसी क्रम में अमृतसर से जयनगर के बीच गाड़ी संख्या 04652 का संचालन 19 मार्च से 29 मार्च तक किया जाएगा, जबकि वापसी में जयनगर से अमृतसर के लिए गाड़ी संख्या 04651 का संचालन 19 मार्च से 31 मार्च तक होगा। इसी प्रकार अमृतसर से न्यू जलपाईगुड़ी के बीच गाड़ी संख्या 04654 (19 से 25 मार्च) और वापसी में न्यू जलपाईगुड़ी से अमृतसर के लिए गाड़ी संख्या 04653 (21 से 27 मार्च) चलाई जाएगी। इन ट्रेनों में वातानुकूलित और शयनयान श्रेणी की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को विशेष राहत मिलेगी। इसके अलावा, नवरात्रों में धार्मिक यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा से बड़गाम के बीच गाड़ी संख्या 04687 तथा बड़गाम से बनिहाल के बीच गाड़ी संख्या 04688 का संचालन 19 मार्च से 4 अप्रैल तक किया जाएगा। ये ट्रेनें मुख्य रूप से साधारण श्रेणी की होंगी, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु कम खर्च में यात्रा कर सकेंगे। वहीं, नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा के बीच गाड़ी संख्या 04081 (19 से 30 मार्च) और वापसी में 04082 (19 से 31 मार्च) का संचालन किया जाएगा, जिनमें एसी और स्लीपर कोच की सुविधा उपलब्ध रहेगी। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी स्पेशल ट्रेनों के संचालन से त्योहारों के दौरान ट्रेनों में होने वाली भीड़भाड़ को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। साथ ही यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी, जिससे उन्हें असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। जालंधर सहित पंजाब के विभिन्न इलाकों के यात्रियों को इन ट्रेनों का सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि अमृतसर और कटड़ा रूट की ट्रेनों में इस क्षेत्र के यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। माल ढुलाई में मंडल ने दर्ज की 53 प्रतिशत वृद्धि मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार के मार्गदर्शन में फिरोजपुर मंडल की बिजनेस डिवेल्पमेंट यूनिट (बी.डी.यू.) ने माल ढुलाई के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। फरवरी 2026 के दौरान मंडल में 29 रैक ट्रैक्टर लोडिंग की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 19 रैक के मुकाबले करीब 53 प्रतिशत अधिक है। यह उपलब्धि विभिन्न हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय और नियमित बैठकों का परिणाम है। माल ढुलाई में इस बढ़ोतरी से न केवल मंडल के फ्रेंट ट्रैफिक में सुधार हुआ है, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी इजाफा हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि रेलवे द्वारा किफायती, समयबद्ध और ‘डोर-टू-डोर’ सेवा उपलब्ध करवाने से व्यापारियों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है, जिसके चलते माल परिवहन के लिए रेल को प्राथमिकता दी जा रही है।

गैस किल्लत पर सख्ती: पठानकोट में मंत्री ने मारी रेड, एजेंसी पर गिरी गाज

पठानकोट. पंजाब के पठानकोट में रसोई गैस की किल्लत ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि सुबह होते ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद वीरवार को कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने खुद मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और सख्त रुख अपनाया। मंत्री सुबह करीब नौ बजे कस्बा तंगोशाह स्थित गैस एजेंसी पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि सैकड़ों लोग लाइन में खड़े हैं। कई लोग सुबह चार बजे से ही अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, जबकि कुछ लोगों ने बताया कि वे पिछले दो से तीन दिन से लगातार आ रहे हैं, लेकिन उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा। लोगों की यह हालत देखकर मंत्री ने तुरंत एजेंसी के कर्मचारियों को फटकार लगाई। उन्होंने मौके पर ही जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक राज ऋषि मेहरा को फोन कर स्थिति से अवगत कराया और संबंधित एजेंसी मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एजेंसी में दिखी कर्मचारियों की कमी निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि एजेंसी पर कर्मचारियों की कमी थी और केवल एक भंडार प्रभारी मौजूद था। गोदाम का ताला भी बंद मिला, जिसे खुलवाकर मंत्री ने स्वयं जांच की। उन्होंने कहा कि लोगों को इस तरह परेशान करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक ने मंत्री को आश्वासन दिया कि जिन एजेंसियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया है और गैस किल्लत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम लोगों को किसी भी हालत में परेशानी नहीं होने दी जाएगी। कड़ी कार्रवाई की चेतावनी उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी गैस एजेंसी ने नियमों के विपरीत काम किया या जानबूझकर लोगों को परेशान किया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही आने वाले दिनों में अन्य गैस एजेंसियों पर भी औचक जांच की जाएगी। शहर में गैस किल्लत को लेकर लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है, और प्रशासन के इस कदम से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

सरकार का बड़ा फैसला: अब राशन कार्ड वालों को मिलेगा 3 महीने का स्टॉक एक साथ

चंडीगढ़. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत देश के 82 करोड़ जरूरतमंद लोगों को मिलने वाले मुफ्त गेहूं और चावल की योजना में बड़ा फैसला लिया है। अब अप्रैल 2026 से जून 2026 (3 महीने) तक का राशन एक साथ देने के लिए पत्र जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आमतौर पर हर महीने राशन दिया जाता है, लेकिन पंजाब में पहले से ही 3 महीने का राशन एकमुश्त दिया जाता है। पंजाब के करीब 18 हजार डिपो होल्डर साल में 4 बार राशन वितरित करते हैं। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आगामी खरीद सीजन को ध्यान में रखते हुए तीन महीने का कोटा तुरंत उठाने और वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मुफ्त राशन प्रति सदस्य 5 किलो के हिसाब से दिया जाता है, जिसकी सप्लाई देशभर में करीब 6 लाख डिपो होल्डर बायोमेट्रिक मशीनों के जरिए करते हैं। लोगों में खुशी की लहर तीन महीने का मुफ्त कोटा जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय वाइस प्रेसिडेंट गुरजिंदर सिंह सिद्धू और पंजाब अध्यक्ष करमजीत सिंह अड़ेचा ने कहा कि इस फैसले से देश के 82 करोड़ लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे महंगाई पर भी नियंत्रण रहेगा और लोगों को गेहूं व चावल आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। 

जल विवाद गरमाया: पंजाब का राजस्थान पर 1.44 लाख करोड़ का दावा, पानी बंद करने की चेतावनी

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान को दो बड़ी नहरों इंदिरा कनाल व सरहिंद कनाल से 66 वर्षों से दिए जा रहे नहरी पानी की कीमत वसूल करने के लिए 1.44 लाख करोड़ रुपये देने के लिए पत्र लिखा है। यहां बुधवार को मीडिया कर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1920 में बीकानेर रियासत और बहावलपुर के बीच हुए समझौते के तहत पानी की आपूर्ति शुरू हुई थी। उस समय पानी के बदले प्रति एकड़ शुल्क तय किया गया था और 1960 तक इसका भुगतान भी होता रहा लेकिन 1960 में सिंधु जल समझौते के बाद नदियों के पानी का बंटवारा कर दिया गया पर इसके बदले में रिपेरियन स्टेट पंजाब को भुगतान करने का पैसा तय नहीं किया गया। कहा गया कि यह अगली मीटिंग में तय होगा।न तो राजस्थान ने भुगतान किया और न ही पंजाब ने इसकी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार साल 1920 के समझौते की समीक्षा की मांग करती है ताकि पंजाब अपने जायज बकाए की वसूली कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार ने पुराने रिकार्ड के आधार पर 1960 से 2026 तक का हिसाब जोड़ा तो यह राशि करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये बनती है। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकारों ने 1960 में नई व्यवस्था में शामिल होते समय भुगतान का जिक्र नहीं किया लेकिन उन्होंने 1920 के समझौते को भी कभी रद नहीं किया। अन्यथा या तो समझौते को समाप्त किया जाए या फिर पानी की आपूर्ति पर पुनर्विचार किया जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि राज्य अपने अधिकारों को लेकर अब पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हमने यह मुद्दा केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार, दोनों के समक्ष उठाया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने राजस्थान सरकार को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बैठक की मांग करने के लिए एक पत्र भी लिखा है। मुख्यमंत्री मान बोले-राजस्थान पानी तो साल 1920 के समझौते के मुताबिक ले रहा, लेकिन बकाया मांगने पर 1960 के समझौते का सहारा ले लेता है। यदि राजस्थान 1920 के समझौते के तहत पानी ले रहा है तो उसे उसी आधार पर भुगतान भी करना चाहिए। वर्तमान में लगभग 18 हजार क्यूसेक पानी राजस्थान फीडर के माध्यम से जा रहा है, जबकि इसके बदले कोई आर्थिक प्रतिफल नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले भुगतान होता था तो अब क्यों नहीं हो रहा।

हिरासत में मौत का मामला गरमाया, अदालत ने 5 पुलिसकर्मियों पर हत्या का ट्रायल चलाने के दिए आदेश

चंडीगढ़ बठिंडा में पुलिस हिरासत मौत मामले में बड़ा मोड़, इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिसकर्मियों पर हत्या का ट्रायल चलेगा। कोर्ट ने सबूतों के आधार पर केस सत्र अदालत को भेजा। मामला क्या है पंजाब के बठिंडा में करीब डेढ़ साल पहले हुई एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। अदालत ने इस केस में आरोपी बनाए गए पंजाब पुलिस के पांच कर्मचारियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में ट्रायल चलाने का आदेश दिया है। स्थानीय अदालत ने मामले को सत्र अदालत में भेज दिया है, जिससे अब केस की सुनवाई उच्च स्तर पर होगी। कोर्ट का अहम फैसला ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इसी आधार पर केस को सत्र अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है। आरोपियों में उस समय के सीआईए-1 यूनिट के प्रभारी इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और तीन कांस्टेबल शामिल हैं, जो घटना के समय बठिंडा में तैनात थे। हिरासत में मौत और टॉर्चर के आरोप यह मामला गांव लख्खी जंगल के रहने वाले भिंदर सिंह की मौत से जुड़ा है, जिनकी पुलिस हिरासत के दौरान जान चली गई थी। न्यायिक जांच में सामने आया कि भिंदर सिंह के साथ कथित तौर पर गंभीर यातनाएं दी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें “वॉटरबोर्डिंग” जैसी तकनीक से प्रताड़ित किया गया, जिसमें व्यक्ति को डूबने जैसी स्थिति में लाकर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया जाता है। जांच में यह भी कहा गया कि उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था। पुलिस के दावे पर सवाल जांच एजेंसियों ने डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर पुलिस के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भिंदर सिंह की मौत झील में डूबने से हुई थी। जांच में सामने आया कि पुलिस ने घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। वहीं, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि मृतक और एक आरोपी इंस्पेक्टर के फोन एक ही समय पर एक ही स्थान पर सक्रिय थे, जिससे संदेह और गहरा गया। परिवार के आरोप और विरोध मृतक के भाई, जो उस समय जेल में बंद थे, ने अदालत को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उनके भाई को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिवार ने भी इस मामले को कस्टोडियल डेथ बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। पोस्टमॉर्टम में देरी पर भी उठे सवाल जांच में पोस्टमॉर्टम में दो दिन की देरी को भी संदिग्ध माना गया। यह आशंका जताई गई कि देरी का उद्देश्य परिवार पर दबाव बनाना हो सकता है। इस पहलू ने मामले को और गंभीर बना दिया। आगे क्या: अब यह मामला सत्र अदालत में चलेगा, जहां सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर सुनवाई होगी। इस केस को पंजाब में कस्टोडियल डेथ के मामलों में एक अहम उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

पानी पर नया संग्राम: पंजाब ने उठाया ऐतिहासिक समझौते का मुद्दा, राजस्थान से भारी रकम की मांग

चंडीगढ़ पंजाब ने राजस्थान को दिए जा रहे पानी पर ₹1.44 लाख करोड़ के संभावित भुगतान का मुद्दा उठाया है। 1920 के समझौते, सिंचाई सुधार और बढ़ते जल विवाद ने सियासी माहौल गरमा दिया है। ऐतिहासिक समझौते से उठा नया विवाद चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े आंकड़े पेश करते हुए राजस्थान को दिए जा रहे पानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि पानी की आपूर्ति की शुरुआत 1920 में बीकानेर रियासत और बहावलपुर के बीच हुए समझौते से हुई थी, जो बाद में राजस्थान तक विस्तारित हुई। उस दौर में प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान तय था और यह व्यवस्था 1960 तक जारी रही। 1960 के बाद खत्म हुआ भुगतान सिस्टम मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 1960 के बाद यह भुगतान प्रणाली समाप्त हो गई और नए तंत्र के लागू होने के बाद दोनों राज्यों ने इस विषय पर कोई मांग नहीं उठाई। अब पुराने रिकॉर्ड के आधार पर किए गए आकलन के अनुसार, 1960 से 2026 तक की अवधि में यह बकाया राशि करीब ₹1.44 लाख करोड़ तक पहुंचती है। समझौते के आधार पर भुगतान की मांग सरकार का कहना है कि यदि राजस्थान अब भी उसी ऐतिहासिक समझौते के तहत पानी ले रहा है, तो उसे भुगतान भी करना चाहिए। अन्यथा समझौते को समाप्त करने या पानी की आपूर्ति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है। इस मुद्दे को अब उच्च स्तर पर उठाने के संकेत दिए गए हैं। बिना भुगतान के पानी सप्लाई पर सवाल मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में राजस्थान फीडर से लगभग 18,000 क्यूसेक पानी बह रहा है, जबकि इसके बदले कोई आर्थिक मुआवजा नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले भुगतान क्यों किया जाता था और अब यह प्रक्रिया क्यों बंद हो गई। सिंचाई क्षेत्र में बड़े बदलाव का दावा राज्य सरकार ने सिंचाई क्षेत्र में बड़े सुधारों का दावा किया है। 2022 में सरकार बनने के समय जहां नहरों के पानी का उपयोग केवल 26.5 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे करीब 5.8 मिलियन एकड़ भूमि को लाभ मिला है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर हजारों करोड़ का निवेश सरकार ने बताया कि लगभग ₹6,700 करोड़ खर्च कर चार वर्षों में सिंचाई बजट तीन गुना बढ़ाया गया। इस दौरान 13,938 किलोमीटर नई नहरें बनाई गईं और 18,000 किलोमीटर से अधिक पुराने ढांचे का पुनर्निर्माण किया गया। गांवों तक पहली बार पहुंचा नहरी पानी पंजाब के 1,454 गांव ऐसे थे जहां आजादी के बाद भी नहरी पानी नहीं पहुंचा था। अब पहली बार इन गांवों तक पानी पहुंचाया गया है। कंडी क्षेत्र में 1,500 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन बहाल कर 24,000 एकड़ जमीन को सिंचाई से जोड़ा गया। “गायब” नहरों का पुनर्जीवन सरकार ने उन नहरों को भी खोजकर चालू किया जो कागजों में मौजूद थीं लेकिन जमीन पर नहीं थीं। तरनतारन की सरहाली नहर का उदाहरण देते हुए बताया गया कि खुदाई में दबे ढांचे मिले और लगभग 22 किलोमीटर नहर को फिर से चालू किया गया। भूजल स्तर में सुधार और परियोजनाओं की सफलता नहरी पानी बढ़ने से भूजल पर दबाव कम हुआ है। गुरदासपुर के कई इलाकों में जल दोहन की दर आधे से ज्यादा घट गई है और 57 प्रतिशत से अधिक कुओं में जल स्तर 0 से 4 मीटर तक बढ़ा है। 25 साल से लंबित शाहपुर कंडी डैम परियोजना ₹3,394.49 करोड़ की लागत से पूरी हो चुकी है, जिससे सिंचाई के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा 26 नए पर्यटन स्थलों का विकास किया गया है। जल विवाद के सियासी संकेत मुख्यमंत्री के बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि पंजाब और राजस्थान के बीच पानी और भुगतान को लेकर विवाद फिर से उभर सकता है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को केंद्र स्तर पर उठाया जाएगा।

Admission Rules Update: PSEB का बड़ा फैसला, अब UGC प्रमाण पत्र से होगा दाखिला

चंडीगढ़. विद्यार्थियों के लिए अहम खबर सामने आई है। दरअसल, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने विदेश से पढ़ाई कर पंजाब में आगे दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने फैसला लिया है कि अब ‘समकक्षता प्रमाण पत्र’ (Equivalence Certificate) जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह नया नियम अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसके बाद छात्रों को दोहरी जांच और लंबी कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। अब वे केवल यूजीसी (UGC) द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर सीधे एडमिशन ले सकेंगे। पहले विद्यार्थियों को केंद्र स्तर से मान्यता मिलने के बाद राज्य स्तर पर भी अलग से समकक्षता प्रमाण पत्र लेना पड़ता था, जिससे समय और मेहनत दोनों अधिक लगते थे। नए फैसले से यह पूरी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बन जाएगी। बोर्ड (PSEB) के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि यह निर्णय फरवरी 2026 में हुई बैठक में लिया गया था, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत देना है। "पहले विद्यार्थियों को एक ही काम के लिए लंबे प्रोसेस से गुजरना पड़ता था। डबल वेरिफिकेशन प्रोसेस खत्म होने से स्टूडेंट्स का समय बचेगा और एडमिशन प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी आएगी।" 

Bar Council Elections: पंजाब-हरियाणा में वोटिंग जारी, करनजीत vs सैनी मुकाबला बना रोचक

लुधियाना. महानगर के पॉश इलाकों में शुमार बाड़ेवाल रोड पर स्थित एक कीमती प्लॉट को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शातिर जालसाजों ने एक महिला की संपत्ति पर नजर गड़ाते हुए न केवल उसके जाली कागजात तैयार किए, बल्कि किसी तीसरी पार्टी को बेचकर उस पर अवैध कब्जा करने का भी प्रयास किया। फिलहाल थाना सराभा नगर की पुलिस ने आरोपी कारण अरोड़ा और उमेश शर्मा के खिलाफ जाली दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पीड़िता रेनू रानी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि बाड़ेवाल इलाके की 'शर्मन जी वाटिका' (महावीर एन्क्लेव के नजदीक) में उसका प्लॉट नंबर 37 स्थित है। करीब 400 वर्ग गज के इस कीमती प्लॉट पर भू-माफियाओं की नजर थी। आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत इस प्लॉट के फर्जी और जाली मलकीयती दस्तावेज तैयार करवा लिए। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने इन जाली कागजातों के आधार पर प्लॉट को आगे किसी दूसरी पार्टी को बेच दिया और मौके पर जाकर अवैध कब्जा करने की कोशिश की। जब पीड़िता को इस धोखाधड़ी की भनक लगी, तो उन्होंने तुरंत पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में यह साफ हो गया है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी की नीयत से सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की थी।  पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिनके जरिए इन फर्जी कागजातों को असली बताकर पेश किया गया था। आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। 

Income Tax Raid: पंजाब के मशहूर ज्वेलर पर छापा, लगातार दूसरे दिन भी जांच में जुटा विभाग

बटाला/चंडीगढ़. कल बटाला शहर के मेन मार्केट नेहरू गेट पर एक बड़े गोल्ड (ज्वेलर) बिजनेसमैन के शोरूम में इनकम टैक्स की रेड पड़ी और कहा जा रहा है कि आधी रात तक शोरूम में रिकॉर्ड खंगाले जाते रहे और आज दूसरे दिन भी चेकिंग जारी है। कल ही, करीब 5 अलग-अलग गाड़ियों में आए बड़ी संख्या में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने नेहरू गेट पर मशहूर सुनार के तीन अलग-अलग शोरूम में घुसकर अपनी जांच शुरू की। देर रात तक वहां चेकिंग जारी रही और अब आज सुबह से उनमें से एक स्टोर में चेकिंग जारी है और एक बड़े शोरूम के शटर बंद हैं। जिस स्टोर में अधिकारी मौजूद हैं, वहां किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं है और बाहर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के स्टिकर और प्लेट लगी गाड़ियां खड़ी हैं। इस बीच, इस कार्रवाई के बारे में कोई ऑफिशियल मीडिया सामने नहीं आ रहा है और न ही स्टोर मालिक कुछ कह रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की इस कार्रवाई की दो दिन से चल रही चर्चा से दूसरे बड़े गोल्ड ट्रेडर्स भी घबराए हुए हैं।