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टोल पर नहीं लगेगी लंबी लाइन! NHAI ने फरीदाबाद-बदरपुर को बैरियर फ्री बनाने की तैयारी शुरू की

फरीदाबाद दिल्ली-आगरा हाईवे पर फरीदाबाद बॉर्डर स्थित बदरपुर टोल टैक्स प्लाजा अगले छह महीनों में बैरियर फ्री होने जा रहा है। एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने इसके लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। इस बदलाव के बाद वाहनों को बिना रुके ही टोल टैक्स का भुगतान करना संभव होगा, जिससे ट्रैफिक की गति बढ़ेगी और लंबी लाइनें समाप्त होंगी। कैसे काम करेगा हाईटेक सिस्टम एनएचएआई ने बताया कि बैरियर फ्री व्यवस्था के तहत हाईटेक कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक टोल वसूली सिस्टम लगाए जाएंगे। टोल की वसूली इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो जाएगी वाहन जब टोल प्लाजा से गुजरेंगे, तो उनके रजिस्ट्रेशन नंबर को कैमरे द्वारा स्कैन किया जाएगा और टोल की वसूली इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो जाएगी। इसके लिए वाहन मालिकों को डिजिटल टोल पास या ई-टोल वॉलेट का इस्तेमाल करना होगा। इस तकनीक के लागू होने से प्लाजा पर ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके अलावा, यह प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाने और नकद लेनदेन से होने वाली परेशानियों को भी समाप्त करने में मदद करेगी। एनएचएआई की तैयारी एनएचएआई अधिकारियों ने बताया कि बैरियर फ्री सिस्टम लगाने के लिए पहले से ही आवश्यक सर्वे और तकनीकी तैयारी शुरू कर दी गई है। छह महीनों में पूरा किया जाएगा     उच्च तकनीक कैमरे, सेंसर और डिजिटल टोल प्रणाली की स्थापना का काम क्रमिक रूप से अगले छह महीनों में पूरा किया जाएगा।     अधिकारी यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि नए सिस्टम की टेस्टिंग पूरी तरह से हो और कोई तकनीकी गड़बड़ी न हो।     सड़क सुरक्षा और सुविधा में सुधार विशेषज्ञों का कहना है कि बैरियर फ्री टोल प्लाजा न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि सड़क सुरक्षा में भी मदद करेगा।     टोल प्लाजा पर अक्सर लंबी कतारों और अचानक ब्रेकिंग के कारण दुर्घटनाएं होती रही हैं। यात्रियों को होगा ये लाभ बैरियर फ्री प्रणाली से वाहनों की गति नियंत्रित रूप से बनी रहेगी और यह जोखिम कम होगा। यात्रियों के लिए लाभ ट्रक, बस और निजी वाहन चालक लंबे समय से टोल प्लाजा पर जाम और देरी से परेशान थे। बैरियर फ्री व्यवस्था लागू होने के बाद अब उन्हें बिना रुके ही टोल का भुगतान करने की सुविधा मिलेगी। इससे समय की बचत होगी और लॉन्ग-डिस्टेंस ट्रैवल को आसान बनाया जा सकेगा। भविष्य की योजनाएं एनएचएआई ने संकेत दिया है कि इस तरह के बैरियर फ्री टोल सिस्टम को अन्य हाईवे प्लाजा पर भी लागू करने की योजना है। इसका उद्देश्य पूरे देश में डिजिटल और स्मार्ट टोलिंग सिस्टम को बढ़ावा देना है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात सुगम और सुरक्षित बन सके।  

बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला, चंडीगढ़ में समर कैंप की बाहरी गतिविधियां बंद

चंडीगढ़. गर्मी की छुट्टियों में स्कूलों में आयोजित किए जा रहे समर कैंपों में बाहरी गतिविधियाें पर पाबंदी रहेगी। यह आदेश चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीसीपीसीआर) ने बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए जारी किया है। स्कूलों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। आयोग ने कहा है कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान आयोजित किए जा रहे समर कैंपों में बच्चों को तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाया जाए तथा दोपहर के समय किसी भी प्रकार की बाहरी गतिविधियां न करवाई जाएं। आयोग ने पहले ही हीटवेव की स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की थी। इसके बाद शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन ने भी सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 23 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। हालांकि आयोग के संज्ञान में आया है कि कुछ स्कूल छुट्टियों के दौरान समर कैंप आयोजित कर रहे हैं। आयोग ने माना कि ऐसे कैंप बच्चों की रचनात्मकता और ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने में सहायक होते हैं, लेकिन मौजूदा भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों को खुले में गतिविधियों से बचाना बेहद जरूरी है। सीसीपीसीआर की अध्यक्ष शिप्रा बंसल ने कहा कि अत्यधिक गर्म मौसम में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। स्कूलों और संस्थानों से जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि कोई भी बच्चा गर्मी की तीव्र परिस्थितियों के संपर्क में न आए। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों को पर्याप्त पानी पिलाने और जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।

लुधियाना में बड़ा सुरक्षा अलर्ट, हैंड ग्रेनेड के साथ दो खतरनाक गुर्गे पकड़े गए

लुधियाना. कमिश्नरेट पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी-गैंगस्टर गठजोड़ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और खतरनाक आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के कब्जे से दो जिंदा हैंड ग्रेनेड बरामद किए हैं। पुलिस का दावा है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से पंजाब में एक बड़ी आतंकी वारदात टाल दी गई। पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने बताया कि यह कार्रवाई 17 मई को बेनकाब किए गए आतंकी-गैंगस्टर मॉड्यूल की जांच के दौरान सामने आई अहम जानकारियों के आधार पर की गई। इससे पहले थाना लाडोवाल इलाके में हार्डीज वर्ल्ड के पास टारगेटेड शूटिंग की साजिश को नाकाम करते हुए पुलिस ने अनूराज उर्फ गौरव मसीह और अंकुश को गिरफ्तार किया था। उस दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से तीन पिस्तौल और 11 जिंदा कारतूस बरामद किए थे। विदेश से मिल रहे थे आदेश पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ था कि यह पूरा मॉड्यूल विदेश में बैठे हैंडलरों के इशारे पर काम कर रहा था। जांच में सामने आया कि जर्मनी और दुबई में बैठे संचालकों के निर्देश पर पंजाब में हाई प्रोफाइल हत्याओं और बड़ी वारदातों की साजिश रची जा रही थी। ताजा कार्रवाई में पुलिस ने तरनतारन के गांव खैरदीन निवासी करणदीप सिंह उर्फ करण और अमृतसर निवासी बलजीत सिंह उर्फ संजू को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपित मलेशिया में बैठे हैंडलर आकाशदीप उर्फ गोल्डन के संपर्क में थे और उसके निर्देशों पर काम कर रहे थे। आरोपी के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि करणदीप सिंह के खिलाफ पहले से हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मामले दर्ज हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपितों को हैंड ग्रेनेड और अन्य हथियार कहां से उपलब्ध करवाए गए और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं। हैंड ग्रेनेड बरामद होने के बाद पुलिस ने एफआईआर नंबर 91 में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के साथ बीएनएस की धारा 317(2) भी जोड़ दी है। नेटवर्क तलाश रही पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। स्थानीय संपर्कों, हथियार सप्लाई चेन और विदेशी हैंडलरों के साथ जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। पुलिस का मानना है कि यदि समय रहते आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया जाता तो पंजाब में बड़ी वारदात हो सकती थी।

दर्दनाक हादसा! जालंधर में मकान गिरा, एक मजदूर की जान गई; 3 लोग मलबे से निकाले गए

जालंधर. जालंधर के बस्ती शेख स्थित मोहल्ला चाय आम में शनिवार को दर्दनाक हादसा हो गया। इलाके में स्थित एक पुराने और जर्जर मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय मकान के अंदर कई लोग मौजूद थे। छत गिरते ही इलाके में जोरदार आवाज सुनाई दी और लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में करीब 50 वर्षीय मजदूर रावत की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मकान काफी समय से खस्ता हालत में था। दीवारों और छत में पहले से दरारें दिखाई दे रही थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान की हालत को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी, लेकिन समय रहते इसकी मरम्मत नहीं करवाई गई। शनिवार को अचानक छत गिरने से अंदर मौजूद लोग मलबे के नीचे दब गए। आसपास के लोगो ंने राहत कार्य शुरू किया हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। लोगों ने अपने स्तर पर मलबा हटाकर दबे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची टीमों ने घायलों और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। डाक्टरों ने गंभीर रूप से घायल रावत को मृत घोषित कर दिया। वहीं हादसे में घायल हुए तीन अन्य लोगों का उपचार अस्पताल में किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। पुराने मकानों की जांच की मांग उठी घटना के बाद इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पुराने और जर्जर मकानों की समय-समय पर जांच करवाई जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। लोगों का कहना है कि कई पुराने मकान अब भी गिरने की स्थिति में हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। सूचना मिलने पर थाना पांच की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। प्रशासन की ओर से भी इलाके में पुराने और जर्जर भवनों का सर्वे करवाने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे भवनों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

आवारा कुत्तों के लिए Sonu Sood ने उठाई आवाज, लोगों से की अपनाने की अपील

मोगा/चंडीगढ़. पंजाब में लावारिस कुत्तों को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच अब पंजाबी और बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद भी खुलकर सामने आ गए हैं। अभिनेता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों को मारना समाधान नहीं है। उन्होंने सरकार से इन बेजुबान जानवरों के लिए शेल्टर होम बनाने की मांग की और खुद भी इस दिशा में प्रयास करने की बात कही। सोनू सूद पंजाब के मोगा के रहने वाले हैं। उनकी बहन भी यहीं से कांग्रेस कार्यकर्ता हैं। सोनू सूद ने वीडियो में कहा कि इंसान सिर्फ किताबें लिख सकता है, लेकिन वफादारी अगर किसी से सीखनी हो तो वह कुत्तों से मिलती है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग सड़क के कुत्तों को अपनाते हैं, उनका ध्यान रखते हैं और ऐसे कुत्ते आमतौर पर नुकसान नहीं पहुंचाते। सोनू सूद ने कहा- यह भी माना कि कई मामलों में बच्चों पर हमलों जैसी घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को यह पता होता है कि कौन से कुत्ते खतरनाक हो सकते हैं और उनकी शिकायत भी की जाती है।' सोनू सूद ने आवाज उठाने की कही बात सोनू सूद ने कहा कि किसी आदेश के तहत गली-मोहल्लों से कुत्तों को पकड़कर हटाना और उनके साथ क्या होगा, यह सोचकर भी चिंता होती है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस तरह के आदेशों को रुकवाने के लिए ज्यादा से ज्यादा आवाज उठानी चाहिए। अभिनेता ने कहा कि सरकार को ऐसे स्थान बनाने चाहिए जहां इन बेजुबान जानवरों को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे ज्यादा से ज्यादा स्ट्रे डॉग्स को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यदि लोग उनके गले में पट्टा डाल दें और उनकी देखभाल करें तो यह पता चलेगा कि कोई उनकी जिम्मेदारी ले रहा है। सीएम की पोस्ट के बाद शुरू हुई चर्चा दरअसल, मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से 21 मई की रात लावारिस कुत्तों को लेकर की गई पोस्ट के बाद पंजाब में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई थी। पोस्ट में 22 मई से अभियान शुरू करने की बात कही गई थी। इसके बाद पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री, सामाजिक संगठनों और कई नेताओं ने इसका विरोध जताया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव तजिंदर बग्गा ने भी इस मामले को लेकर देश के मुख्य न्यायाधीश को ईमेल भेजा। वहीं पंजाबी अभिनेत्री सोनम बाजवा, गायिका रुपिंदर हांडा और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कुत्तों को न मारने की अपील की।

सीमा पार ड्रोन और नशा तस्करी पर हाई कोर्ट सख्त, एजेंसियों को दी नियमित निगरानी की हिदायत

चंडीगढ़  पंजाब में लगातार बढ़ रहे नशे के कारोबार, सीमा पार से ड्रोन के जरिए हो रही तस्करी और हथियारों की सप्लाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशकों के साथ-साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को आदेश जारी किए हैं।  आदेशों में साफ कहा है कि वे हर तीन महीने में ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों, बरामदगी, नशे के निस्तारण और नशा मुक्ति अभियानों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की लापरवाही, कमी या गंभीर स्थिति सामने आती है तो मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश उस जनहित याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया, जिसे अदालत ने स्वयं संज्ञान लेते हुए शुरू किया था। हाई कोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान अदालत ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था। खबर में सीमा सुरक्षा बल द्वारा पंजाब में बढ़ती ड्रग तस्करी और सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे नशीले पदार्थों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। समाचार रिपोर्ट में बताया गया था कि बीएसएफ ने पंजाब पुलिस को 75 ऐसे व्यक्तियों की सूची सौंपी थी, जो कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल पाए गए थे। इसके साथ ही यह भी सामने आया था कि वर्ष 2023 के दौरान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से भारत भेजे जा रहे लगभग 755 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद किए गए। इतना ही नहीं, तस्करी के इस नेटवर्क के साथ हथियारों की सप्लाई भी जुड़ी हुई मिली और कई राइफल तथा पिस्तौल भी जब्त की गईं। सरकारों व एनसीबी ने दी थी स्टेटस रिपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब, हरियाणा और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। इन रिपोर्टों में बताया गया कि राज्य सरकारों और एजेंसियों द्वारा नशे की रोकथाम, ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, जब्त मादक पदार्थों के सुरक्षित निस्तारण और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। अदालत ने इन रिपोर्टों का अवलोकन करने के बाद कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी लगातार निगरानी और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। हर तीन महीने में देंगे विस्तृत रिपोर्ट खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के डीजीपी व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक नियमित रूप से यह जानकारी देंगे कि कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद हुए, उनका निस्तारण कैसे किया गया और नशा मुक्ति के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने यह जिम्मेदारी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से तय की है ताकि भविष्य में इन रिपोर्टों की न्यायिक समीक्षा की जा सके।  

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा सवाल, पुलिस थानों में महिलाओं के लिए कब होंगी बुनियादी सुविधाएं?

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुलिस सुधारों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि पुलिस सुधारों पर फैसला कोर्ट नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन को लेना चाहिए। हालांकि हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को इन मुद्दों पर दो महीने में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में दायर याचिका में मांग की गई कि पुलिसकर्मियों से लगातार लंबी ड्यूटी न कराई जाए, थानों में महिलाओं के लिए अलग और साफ शौचालय हों, आरोपितों को मीडिया के सामने परेड न कराया जाए और पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने हालांकि इन मांगों पर सीधे आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया, लेकिन पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को इन मुद्दों पर विचार कर फैसला लेने के निर्देश जरूर दे दिए। सरकार को करना होगा फैसला अदालत ने कहा कि ये विषय नीतिगत और प्रशासनिक प्रकृति के हैं, जिन पर फैसला सरकार और सक्षम अधिकारियों को ही करना है।यह जनहित याचिका मोहाली निवासी निकिल सराफ ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि पुलिसकर्मियों, खासकर कांस्टेबलों के लिए पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं, जिससे पूरे करियर में ठहराव की स्थिति बन जाती है। मांग रखी गई कि प्रत्येक कांस्टेबल को सेवा के दौरान कम से कम तीन प्रमोशन दिए जाएं। साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवास, पर्याप्त अवकाश, मेडिकल जांच और कठिन ड्यूटी के बदले अतिरिक्त वेतन जैसी सुविधाएं देने की भी मांग उठाई गई। महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं याचिका में पुलिस थानों और चौकियों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कहा गया कि कई जगह महिलाओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं हैं। लाकअप की हालत भी मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं है। अदालत से मांग की गई कि थानों में साफ-सुथरे और रोशनी वाले लॉकअप बनाए जाएं तथा पुलिस शिकायत प्राधिकरणों की जानकारी हर थाने में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा पुलिस बल के डिजिटलीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के कारण आम पुलिसिंग प्रभावित होती है। सोशल ऑडिट करवाने की मांग  इस व्यवस्था का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराने की मांग भी रखी गई।सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में लंबित एक अन्य मामले में विचाराधीन हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने केवल उन बिंदुओं पर सुनवाई की जो वहां लंबित नहीं हैं। अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को विस्तृत मांग पत्र देने की छूट देते हुए कहा कि संबंधित सरकार और प्रशासन दो महीने के भीतर उस पर स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निर्णय लें।

पुलिस थानों में महिला शौचालय और तय ड्यूटी टाइम की मांग हाई कोर्ट पहुंची, पंजाब-हरियाणा सरकार को नोटिस

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुलिस सुधारों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि पुलिस सुधारों पर फैसला कोर्ट नहीं, बल्कि सरकार और प्रशासन को लेना चाहिए। हालांकि हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को इन मुद्दों पर दो महीने में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में दायर याचिका में मांग की गई कि पुलिसकर्मियों से लगातार लंबी ड्यूटी न कराई जाए, थानों में महिलाओं के लिए अलग और साफ शौचालय हों, आरोपितों को मीडिया के सामने परेड न कराया जाए और पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने हालांकि इन मांगों पर सीधे आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया, लेकिन पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को इन मुद्दों पर विचार कर फैसला लेने के निर्देश जरूर दे दिए। सरकार को करना होगा फैसला अदालत ने कहा कि ये विषय नीतिगत और प्रशासनिक प्रकृति के हैं, जिन पर फैसला सरकार और सक्षम अधिकारियों को ही करना है।यह जनहित याचिका मोहाली निवासी निकिल सराफ ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि पुलिसकर्मियों, खासकर कांस्टेबलों के लिए पदोन्नति के अवसर बेहद सीमित हैं, जिससे पूरे करियर में ठहराव की स्थिति बन जाती है। मांग रखी गई कि प्रत्येक कांस्टेबल को सेवा के दौरान कम से कम तीन प्रमोशन दिए जाएं। साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवास, पर्याप्त अवकाश, मेडिकल जांच और कठिन ड्यूटी के बदले अतिरिक्त वेतन जैसी सुविधाएं देने की भी मांग उठाई गई। महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं याचिका में पुलिस थानों और चौकियों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। कहा गया कि कई जगह महिलाओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं हैं। लाकअप की हालत भी मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं है। अदालत से मांग की गई कि थानों में साफ-सुथरे और रोशनी वाले लॉकअप बनाए जाएं तथा पुलिस शिकायत प्राधिकरणों की जानकारी हर थाने में प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा पुलिस बल के डिजिटलीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के कारण आम पुलिसिंग प्रभावित होती है। सोशल ऑडिट करवाने की मांग  इस व्यवस्था का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराने की मांग भी रखी गई।सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में लंबित एक अन्य मामले में विचाराधीन हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने केवल उन बिंदुओं पर सुनवाई की जो वहां लंबित नहीं हैं। अंत में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को विस्तृत मांग पत्र देने की छूट देते हुए कहा कि संबंधित सरकार और प्रशासन दो महीने के भीतर उस पर स्पीकिंग ऑर्डर पारित कर निर्णय लें।

इंदर कौर हत्याकांड में पुलिस को मिले अहम सबूत, फरार आरोपी पर शिकंजा तेज

लुधियाना पंजाबी सिंगर इंदर कौर के लुधियाना में हुए मर्डर केस में हत्यारे सुखविंदर सिंह सुक्खा के खिलाफ पुलिस ने LOC जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस के हाथ कई अहम सबूत भी लगे है जिससे सुक्खा को कनाडा से लुधियाना लाया जाएगा। नेपाल से भी पुलिस कई लिंक खंगाल रही है। इस केस में अभी तक और किन लोगों की शमूलियत है इसे लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस इस मामले की गहनता से जांच में जुटी है। उधर, इंदर कौर के शव का पोस्टमॉर्टम होने के बाद ये सामने आया है कि सिंगर के दो गोलियां लगी है। एक गोली उसकी छाती के दाहिनी तरफ आर पार हुई है और दूसरी गोली माथे में फंसी थी। क्या था पूरा मामला पंजाबी सिंगर इंदर कौर उर्फ यशइंदर कौर की उसके NRI बॉयफ्रेंड सुखविंदर सिंह उर्फ सुक्खी बराड़ ने हत्या कर दी। शादी न करने पर उसने इंदर को लुधियाना में समराला के नजदीक नीलो नहर के किनारे कार में गोली मारी। इसके बाद लाश नीलो नहर और उसकी कार रामपुर गांव के पास नहर में फेंक दी। इंदर कौर की लाश समराला पुलिस को बंद पड़े टोल प्लाजा से 50 मीटर दूर नहर में पड़े सूखे पेड़ से फंसी हुई मिली। जहां लाश बरामद हुई है उससे 7 किलोमीटर दूर रामपुर गांव में नहर से थाना जमालपुर की पुलिस को इंदर की फोर्ड फिगो कार बरामद हुई। आरोपियों ने जहां रात के अंधेरे में कार को नहर में फेंका वहां पर दिन में भी जाने से लोग कतराते हैं। जब पुलिस कार को बरामद करने पहुंची तो गांव के लोग भी सहम गए। उनका कहना है कि इस रास्ते कोई अंजान आदमी आ ही नहीं सकता। उनका कहना है कि जो भी रात को यहां कार फेंकने आए हैं निश्चित तौर पर वो पहले भी आए होंगे। हत्या वाली जगह से 1 किलोमीटर दूर मिली लाश जानकारी के मुताबिक 13 मई की रात को करीब 8:30 बजे इंदर कौर अपनी सफेद रंग की फोर्ड फिगो कार से राशन लेने बाजार गई थी। 9 बजे सुखविंदर ने साजिश के तहत इंदर कौर को फोन करके नीलो नहर के पुल पर बुलाया। वहां सुखविंदर, उसका पिता प्रीतम सिंह और उसके दो दोस्त करमजीत सिंह और रविंदर सिंह रवि पहले से मौजूद थे। बंदूक के दम पर इंदर को कार समेत किया था किडनैप इन सबने मिलकर बंदूक के दम पर इंदर को कार समेत किडनैप कर लिया। इसके बाद उन्होंने इंदर की गोलियां मारकर हत्या कर दी और फिर लाश नहर में फेंक दी। 19 मई को इंदर कौर की लाश नीलो पुल से करीब आधा किमी दूर बंद टोल प्लाजा के पास नहर में पड़े सूखे पेड़ के पास फंसी हुई मिली। 6 दिन पानी में पड़े रहने के कारण शव फूला शव 6 दिन से पानी में पड़े रहने के कारण फूल गया था। इसलिए उसके बाहर निकालने में भी पुलिस को परेशानी हुई। पुलिस की टीम ने जब शव को बाहर निकाला तो उसके लिए उन्हें मेडिकल ग्लव्स पहनने पड़े। नहर के किनारे ग्लव्स अब भी पड़े हुए हैं। नहर में जहां से पुलिस को शव बरामद हुआ वहां पर न तो खून के निशान थे और न ही झाड़ियां टूटी हुई मिलीं।  

नशा तस्करी पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, ड्रोन नेटवर्क की निगरानी पर NCB को निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब में लगातार बढ़ रहे नशे के कारोबार, सीमा पार से ड्रोन के जरिए हो रही तस्करी और हथियारों की सप्लाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशकों के साथ-साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को आदेश जारी किए हैं। आदेशों में साफ कहा है कि वे हर तीन महीने में ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों, बरामदगी, नशे के निस्तारण और नशा मुक्ति अभियानों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की लापरवाही, कमी या गंभीर स्थिति सामने आती है तो मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश उस जनहित याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया, जिसे अदालत ने स्वयं संज्ञान लेते हुए शुरू किया था। हाई कोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान अदालत ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था। खबर में सीमा सुरक्षा बल द्वारा पंजाब में बढ़ती ड्रग तस्करी और सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे नशीले पदार्थों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। समाचार रिपोर्ट में बताया गया था कि बीएसएफ ने पंजाब पुलिस को 75 ऐसे व्यक्तियों की सूची सौंपी थी, जो कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल पाए गए थे। इसके साथ ही यह भी सामने आया था कि वर्ष 2023 के दौरान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से भारत भेजे जा रहे लगभग 755 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद किए गए। इतना ही नहीं, तस्करी के इस नेटवर्क के साथ हथियारों की सप्लाई भी जुड़ी हुई मिली और कई राइफल तथा पिस्तौल भी जब्त की गईं। सरकारों व एनसीबी ने दी थी स्टेटस रिपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब, हरियाणा और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। इन रिपोर्टों में बताया गया कि राज्य सरकारों और एजेंसियों द्वारा नशे की रोकथाम, ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, जब्त मादक पदार्थों के सुरक्षित निस्तारण और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। अदालत ने इन रिपोर्टों का अवलोकन करने के बाद कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी लगातार निगरानी और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। हर तीन महीने में देंगे विस्तृत रिपोर्ट खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के डीजीपी व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक नियमित रूप से यह जानकारी देंगे कि कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद हुए, उनका निस्तारण कैसे किया गया और नशा मुक्ति के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने यह जिम्मेदारी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से तय की है ताकि भविष्य में इन रिपोर्टों की न्यायिक समीक्षा की जा सके।