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लाइव कैमरे में खुलासा: Ludhiana में पार्षद ने महिला को ड्रग्स के साथ रंगे हाथों पकड़ा

लुधियाना. संजय गांधी कालोनी में शुक्रवार देर रात पार्षद और स्थानीय लोगों ने इंटरनेट मीडिया पर लाइव होकर एक महिला को नशीले पदार्थ के साथ पकड़ा। अकाली दल के पार्षद छतरवीर सिंह ने आरोप लगाया कि महिला लंबे समय से इलाके में नशे का कारोबार कर रही थी। कई बार समझाने के बावजूद वह अपनी गतिविधियों से बाज नहीं आई। इसी के चलते शुक्रवार रात मोहल्ला निवासियों के सहयोग से उसे रंगे हाथ पकड़ा गया। पार्षद और लोगों का दावा है कि महिला के पास से एक प्लास्टिक डिब्बी में 5 से 7 संदिग्ध पैकेट बरामद हुए और पुलिस को बुलाकर हवाले कर दिया गया। घटना के दौरान मौजूद लोगों ने महिला को पकड़कर उससे पूछताछ भी की। वीडियो में महिला खुद को ताजपुर रोड क्षेत्र की निवासी बता रही है। हालांकि, पुलिस की प्राथमिक जांच में अलग तथ्य सामने आए। थाना डिवीजन नंबर सात की पुलिस के अनुसार, महिला नशा तस्कर नहीं बल्कि नशे की आदी है। महिला की स्वास्थ्य स्थिति भी ठीक नहीं है और उसे इलाज की जरूरत है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि महिला को जल्द नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

पंजाब में नशे पर बड़ा वार: Amritsar से 71 किलो हेरोइन के साथ 2 आरोपी गिरफ्तार, ड्रोन भी जब्त

अमृतसर. पंजाब में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से भेजी गई हेरोइन की बड़ी खेप के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। स्टेट स्पेशल आपरेशन सेल और बीएसएफ ने दो मामलों में कुल 71 किलो से अधिक हेरोइन, एक मारुति और एक ड्रोन बरामद किया है। आरोपितों ने माना कि यह खेप कुछ दिन पहले पाकिस्तानी तस्करों ने ड्रोन के जरिये भेजी थी। वे इसे आगे सप्लाई करने की योजना बना रहे थे। पहले मामले में पुलिस ने नाकाबंदी कर गांव माहल के पास दो तस्करों गांव अवान वसाउ के स्वर्ण सिंह और दयाल नगर निवासी शमशेर सिंह को 64 किलो हेरोइन सहित गिरफ्तार कर एक मारुति कार बरामद की। आरोपितों को शनिवार शाम न्यायाधीश गरिमा गुप्ता की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। एआईजी सुखमिंदर सिंह मान ने बताया कि यह खेप पुर्तगाल में बैठे हैंडलर ने पाकिस्तानी तस्कर मूसा के जरिये भिजवाई थी। 2019 में भारत पाकिस्तान सीमा पर कस्टम विभाग द्वारा पकड़ी गई 532 किलो हेरोइन के मामले में भी मूसा का नाम सामने आया था। दूसरे मामले में बीएसएफ ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित बीओपी पुल मोरां के पास एक बड़ा ड्रोन और सात किलो हेरोइन बरामद की। पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया है। बरामद किए गए ड्रोन को जांच के लिए भेजा गया है। बता दें पहली जनवरी से लेकर अब तक सीमा पर कुल 48 ड्रोन बरामद हो चुके हैं।

स्मार्ट शिक्षा की ओर बढ़ते कदम: होशियारपुर में स्कूल के नए कमरों का शिलान्यास, बच्चों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

होशियारपुर. होशियारपुर क्षेत्र में विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्कूल की नई इमारत के निर्माण का कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इस परियोजना की नींव रखी गई। इस नई इमारत का निर्माण होने से न केवल स्कूल में कमरों की कमी दूर होगी, बल्कि छात्रों को बैठने के लिए एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान भी उपलब्ध होगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया भवन स्कूल के इस नए बुनियादी ढांचे को आधुनिक मानकों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इसमें हवादार कमरों के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल और शौचालय की समुचित व्यवस्था की जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूल की अच्छी इमारत बच्चों के सीखने के स्तर को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इस परियोजना के तहत स्कूल परिसर के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि बच्चे एक खुशनुमा माहौल में अपनी शिक्षा ग्रहण कर सकें। गुणवत्ता और समय सीमा पर जोर निर्माण कार्य का जायजा लेते हुए अधिकारियों ने संबंधित ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। इस भवन को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि अगले शैक्षणिक सत्र तक छात्र नए कमरों का लाभ उठा सकें। निर्माण कार्य की नियमित निगरानी के लिए एक विशेष टीम भी गठित की गई है जो समय-समय पर प्रगति की जांच करेगी। क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर इस स्कूल भवन का निर्माण स्थानीय समुदाय के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से इस क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता थी। सरकारी स्कूलों के कायाकल्प से अब गरीब परिवारों के बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में मदद मिलेगी।

अब बेअदबी पर उम्रकैद: पंजाब में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026’ पास, राज्यपाल की मुहर

चंडीगढ़. जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब बिल 2026 को राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया ने मंजूरी दे दी है। अब बेअदबी करने वाले को उम्र कैद की सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर पोस्ट डाल कर दी जानकारी दी है। पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है। मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने यह विधेयक सदन में पेश किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है और इसमें पहले से कहीं अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं। बेअदबी गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया इस विधेयक में बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। संशोधन के तहत कानून की भाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां “बीड़” शब्द का उपयोग होता था, उसे बदलकर “स्वरूप” किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शब्दावली का इस्तेमाल किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या उसके अधिकृत संस्थानों द्वारा ही किया जाएगा। संरक्षक करेंगे स्वरूप की सुरक्षा मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून में “संरक्षक” की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जिसमें उन व्यक्तियों या संस्थाओं को शामिल किया गया है जो सरूप की देखभाल और मर्यादा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की क्षति या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। बेअदबी की परिभाषा को भी इस कानून में विस्तारित किया गया है। इसमें न केवल भौतिक नुकसान जैसे जलाना, फाड़ना या चोरी करना शामिल है, बल्कि किसी भी प्रकार के मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक या डिजिटल माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को भी इसमें शामिल किया गया है।

महाराजा रणजीत सिंह की निशानी खतरे में: दीनानगर बारादरी के अस्तित्व पर संकट, दिल्ली कमेटी ने बुलाई बैठक

दीनानगर.  दीनानगर में शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की ऐतिहासिक शाही बारादरी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में कुछ शरारती तत्वों द्वारा इस प्राचीन इमारत की छत और अन्य हिस्सों में तोड़फोड़ की गई, जिससे सिख समाज और विरासत प्रेमियों में भारी रोष है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के धर्म प्रचार कमेटी (पंजाब) के चेयरमैन मनजीत सिंह भोमा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। भू-माफिया और राजनीतिक गठजोड़ का आरोप चेयरमैन भोमा ने बारादरी का दौरा करने के बाद प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग द्वारा संरक्षित घोषित की गई इस इमारत को नुकसान पहुँचाने के पीछे भू-माफिया और बड़े राजनीतिक चेहरों का हाथ हो सकता है। उन्होंने बताया कि जहाँ लोग धार्मिक स्थलों पर सोना चढ़ाते हैं, वहीं माफिया महाराजा रणजीत सिंह की इस ऐतिहासिक निशानी की ईंटें तक उखाड़ कर ले जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस विनाशकारी कार्य को तुरंत रोका जाए। विरासत को बचाने के लिए पंथक बैठक का आह्वान शाही बारादरी के गिरते अस्तित्व को बचाने के लिए अब सिख समुदाय ने संगठित होने का फैसला किया है। इसके तहत आगामी 25 अप्रैल को सुबह 11 बजे शाही बारादरी परिसर में ही पंथक हितैषियों की एक विशेष बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण और इसके पुनर्निर्माण के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। भोमा ने कहा कि यह इमारत पहले से ही प्रशासनिक अनदेखी के कारण खंडहर बन चुकी थी, और अब इस पर किए गए हमले असहनीय हैं। इतिहास की गर्मियों वाली राजधानी का महत्व दीनानगर की शाही बारादरी का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है। महाराजा रणजीत सिंह अक्सर गर्मियों के महीनों में यहाँ अपना दरबार लगाते थे, जिस कारण इसे 'सरकार खालसा' की गर्मियों वाली राजधानी भी कहा जाता था। यहाँ कई ऐतिहासिक संधियाँ हुईं और सैन्य योजनाएं बनाई गईं। साल 2010 में सरकार ने इसे संरक्षित इमारत का दर्जा दिया था और इसके जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों का टेंडर भी जारी हुआ था, लेकिन धरातल पर अब तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय निवासियों और विरासत मंच के सदस्यों ने सरकार से इस ऐतिहासिक गौरव को संरक्षित करने की अपील की है।

ड्रग्स के खिलाफ महासंग्राम: राज्यपाल का आह्वान—अब एकजुट होकर लड़ना होगा पंजाब को

चंडीगढ़. पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने राज्य की सबसे बड़ी चुनौती यानी नशे की समस्या पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाना केवल सरकार या पुलिस बल का कार्य नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की एक सामूहिक और साझा जिम्मेदारी है। राज्यपाल के अनुसार, जब तक समाज का हर व्यक्ति इस बुराई के खिलाफ अपनी भूमिका नहीं समझेगा, तब तक इस समस्या को जड़ से मिटाना संभव नहीं होगा। उन्होंने जन-जन से इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है। युवा पीढ़ी के संरक्षण पर विशेष ध्यान राज्यपाल ने युवाओं को नशे की गर्त से बाहर निकालने के लिए एक ठोस रणनीति अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवा राज्य की असली शक्ति हैं और उन्हें सुरक्षित रखना ही प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जहाँ नशे के लिए कोई स्थान न हो। कटारिया ने स्पष्ट किया कि युवाओं को खेल और रचनात्मक कार्यों की ओर प्रेरित करना इस लड़ाई का एक अहम हिस्सा है ताकि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या गलत रास्ते पर न भटकें। पंचायतों और ग्राम सभाओं की महत्वपूर्ण भूमिका ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के प्रभाव को कम करने के लिए राज्यपाल ने पंचायतों को आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम पंचायतों को अपने गांवों को नशामुक्त करने के लिए संकल्प लेना चाहिए। स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करके नशे के सौदागरों की पहचान करना और उनके खिलाफ सामूहिक आवाज उठाना बेहद जरूरी है। राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि प्रशासन ऐसे साहसी प्रयासों को पूरा सहयोग प्रदान करेगा और सूचना देने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। नशा मुक्ति और पुनर्वास का संकल्प नशे की चपेट में आ चुके व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्यपाल ने उनके पुनर्वास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को अपराधी की तरह नहीं, बल्कि एक मरीज की तरह देखा जाना चाहिए जिन्हें सही इलाज और सामाजिक समर्थन की जरूरत है। सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति केंद्रों की गुणवत्ता में सुधार और उनके विस्तार की योजना पर भी चर्चा की गई। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि सामूहिक इच्छाशक्ति और एकजुटता के साथ पंजाब जल्द ही अपनी खोई हुई खुशहाली और गौरव वापस प्राप्त करेगा।

शहीद परिवारों का सम्मान सर्वोपरि: रक्षा सेवा कल्याण विभाग के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

चंडीगढ़ पंजाब के रक्षा सेवा कल्याण मंत्री मोहिंदर भगत ने पंजाब सचिवालय में विभाग के कामकाज का जायजा लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर विभाग के प्रमुख सचिव सुमेर सिंह गुर्जर और निदेशक भूपिंदर सिंह ढिल्लों विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों, युद्ध विधवाओं और उनके आश्रितों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करना और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना था। मुआवजा वितरण और लंबित मामलों पर चर्चा अधिकारियों ने कैबिनेट मंत्री को सूचित किया कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से संबंधित विभिन्न मामलों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विभिन्न युद्धों के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अधिकांश शहीदों के परिवारों को पंजाब सरकार द्वारा पहले ही आर्थिक मुआवजा दिया जा चुका है। बैठक के दौरान उन शेष मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई जो अभी प्रक्रिया में हैं। मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि फाइलों के निपटारे में होने वाली देरी को कम किया जाए ताकि लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल सके। रिक्त पदों को भरने और बजट पर ध्यान विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया है। मंत्री ने कहा कि मानव संसाधन की कमी को दूर करना आवश्यक है ताकि सेवा वितरण सुचारू रूप से चलता रहे। इसके साथ ही, विभागीय बजट के सही उपयोग और नई परियोजनाओं के लिए धन के आवंटन पर भी मंथन किया गया। सरकार का लक्ष्य रक्षा सेवाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है ताकि सेवानिवृत्त सैनिकों को एक ही छत के नीचे सभी जरूरी सुविधाएं मिल सकें। शहीदों के प्रति सम्मान और सरकारी प्रतिबद्धता बैठक को संबोधित करते हुए मोहिंदर भगत ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर जवानों के प्रति पंजाब सरकार पूरी श्रद्धा और सम्मान रखती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों से जुड़ी हर समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। सरकार शहीदों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगी और उनके आश्रितों की हर संभव सहायता के लिए निरंतर प्रयास जारी रखेगी। यह बैठक सैनिकों के कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

पंजाब शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए शेड्यूल जारी: शिक्षा विभाग ने दी 26 अप्रैल की हरी झंडी

चंडीगढ़. पंजाब राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने पंजाब शिक्षक पात्रता परीक्षा (P-TET) के आयोजन के लिए 26 अप्रैल की तारीख तय की है। लंबे समय से इस परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अब अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने का समय आ गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा का आयोजन राज्य भर के विभिन्न केंद्रों पर पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा। प्रवेश पत्र और परीक्षा केंद्र का विवरण परीक्षा के सफल संचालन के लिए विभाग द्वारा सभी जरूरी प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने रोल नंबर और परीक्षा केंद्र की स्थिति देख सकते हैं। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अभ्यर्थी परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक घंटा पहले निर्धारित केंद्र पर पहुँचें। प्रवेश पत्र के बिना किसी भी स्थिति में परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही, पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड या अन्य वैध दस्तावेज ले जाना अनिवार्य है। परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता शिक्षा विभाग ने नकल रहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहेगी और जैमर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू करने और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि में संलिप्त पाए जाने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है। भविष्य के शिक्षकों के लिए बड़ी उम्मीद P-TET परीक्षा पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक अहम कदम है। इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी राज्य के विभिन्न सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र हो जाएंगे। पिछले कुछ समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं के बाद, इस परीक्षा के आयोजन से युवाओं में रोजगार की नई उम्मीद जगी है। शिक्षा विशेषज्ञों ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय में पुनरावृत्ति पर ध्यान दें और परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन का विशेष ख्याल रखें।  

PSEB का बड़ा विजन: ‘क्रिएटर्स, नॉट कंज्यूमर्स’ मंत्र के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय नेशनल AI सम्मेलन

चंडीगढ़.  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) ने चंडीगढ़ स्थित सीआईआई उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का समापन गूगल और इंटेल द्वारा आयोजित व्यावहारिक कार्यशालाओं के साथ हुआ, जिसने पंजाब की शिक्षा प्रणाली में एआई को गहराई से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया। इस सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, शिक्षकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर कक्षाओं में एआई के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया। छात्रों के लिए 'निर्माता' बनने का विजन PSEB के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने एआई के नैतिक उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों की समस्या समाधान कौशल को विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे तकनीक के केवल उपभोक्ता बनकर न रहें, बल्कि इसके निर्माता बनें। डिजिटल युग में एआई उपकरणों को सही मित्र की तरह चुनने की सलाह देते हुए उन्होंने स्पष्ट कानूनी और नैतिक ढांचे के भीतर सीखने की प्रक्रियाओं को मजबूत करने का आह्वान किया। गूगल और इंटेल की विशेष कार्यशालाएं सम्मेलन के दौरान गूगल के सत्रों ने शिक्षा में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका और जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके साथ ही, इंटेल द्वारा 'कार्यस्थल पर एआई' विषय पर आयोजित कार्यशाला में 112 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस सत्र में डेटा गोपनीयता और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सरकारी ढांचे के भीतर एआई उपकरणों को प्रभावी ढंग से तैनात करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। नेतृत्व और अकादमिक अखंडता पर चर्चा स्कूल प्रमुखों के लिए आईकेजी पीटीयू द्वारा आयोजित 'स्कूल लीडर्स के लिए एआई' कार्यशाला में एआई उपकरणों को संस्थागत प्रबंधन में शामिल करने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसमें एआई-जनित सामग्री की पहचान करने और एआई-सक्षम वातावरण में अकादमिक अखंडता बनाए रखने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। नीव एआई (Neeev AI) द्वारा संचालित छात्र-केंद्रित कार्यशाला ने युवाओं को एआई अनुप्रयोगों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया और उन्हें भविष्य के करियर विकल्पों के लिए प्रेरित किया। भविष्य की डिजिटल चुनौतियों की तैयारी चेयरमैन ने उल्लेख किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से छात्रों को एआई तकनीक के निर्माण की जटिल प्रक्रियाओं और इसके पीछे आवश्यक कौशल सेट के बारे में गहराई से बताया गया। पंजाब के छात्रों ने इस उभरती तकनीक के प्रति जबरदस्त जिज्ञासा और अनुकूलन क्षमता दिखाई है। यह पहल न केवल छात्रों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ एक सुरक्षित और नवाचार-आधारित डिजिटल भविष्य का निर्माण करने में भी सक्षम बनाएगी।

कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का किया रिव्यू

चंडीगढ़. पंजाब के डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर मिनिस्टर श्री मोहिंदर भगत ने शुक्रवार शाम पंजाब सेक्रेटेरिएट में डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू करने के लिए टॉप अधिकारियों के साथ एक खास मीटिंग की। इस मौके पर डिफेंस सर्विसेज वेलफेयर डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुमेर सिंह गुर्जर, डायरेक्टर भूपिंदर सिंह ढिल्लों (रिटायर्ड) खास तौर पर मौजूद थे। मीटिंग के दौरान, अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों से जुड़े मामलों में काफी प्रोग्रेस हुई है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग युद्धों के दौरान शहीद हुए ज़्यादातर सैनिकों के परिवारों को पंजाब सरकार ने पहले ही मुआवजा दे दिया है। इसके अलावा, बाकी मामलों और उनकी मौजूदा स्थिति पर भी डिटेल में चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि खाली पोस्ट भरने के लिए भी तेज़ी से कार्रवाई की जा रही है। इस मौके पर डिपार्टमेंट के बजट और दूसरे ज़रूरी मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज़ वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू किया, पंजाब सरकार एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों की भलाई के लिए कमिटेड है कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने डिफेंस सर्विसेज़ वेलफेयर डिपार्टमेंट के कामों की प्रोग्रेस का रिव्यू किया, मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए, मंत्री श्री भगत ने अधिकारियों को एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों से जुड़े सभी मामलों को प्रायोरिटी के आधार पर लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार देश की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान करने वाले बहादुर सैनिकों का पूरा सम्मान और सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार एक्स-सर्विसमैन और उनके परिवारों की भलाई के लिए पूरी तरह से कमिटेड है और उन्हें हर मुमकिन मदद देने की लगातार कोशिश की जा रही है।