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NSA केस में अमृतपाल सिंह की याचिका खारिज: हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत

चंडीगढ़. एनएसए के तहत तीसरे निरोधक आदेश को चुनौती देने वाली अमृतपाल सिंह की याचिका हाई कोर्ट ने खारिज की। खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह द्वारा दायर याचिका, जिसमें अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट की ओर से पारित तीसरे निरोधक आदेश को चुनौती दी गई थी। यह मामला अमृतपाल सिंह द्वारा दायर उस याचिका के चलते हाईकोर्ट के समक्ष लंबित था , जिसमें उसने एनएसए के तहत जारी अपनी तीसरी लगातार हिरासत को चुनौती दी थी। अमृतपाल अप्रैल 2023 से असम की डिब्रूगढ़ जेल में निवारक हिरासत में बंद है। उसके विरुद्ध पहला हिरासत आदेश 18 मार्च 2023 को पारित हुआ था। याचिका में उसने 17 अप्रैल 2025 को जारी तीसरे नए हिरासत आदेश को चुनौती दी है, जिसे राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को मंज़ूरी दी और बाद में 24 जून 2025 को इसकी पुष्टि की थी। इसके अलावा हाई कोर्ट आज पंजाब सरकार की उस याचिका पर भी सुनवाई करेगा जिसके तहत अमृतपाल सिंह को असम जेल में रखने की मांग की गई है। पंजाब सरकार का कहना है कि अमृतपाल सिंह की गतिविधियों को लेकर पहले भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो चुकी है, ऐसे में उसे पंजाब लाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी कारण उसे असम में ही सुरक्षित स्थान पर रखकर जांच और सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

Chandigarh School Threat: पांच स्कूलों को बम की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, सर्च ऑपरेशन तेज

चंडीगढ़. शहर में उस समय हड़कंप मच गया जब अलग-अलग सेक्टरों में स्थित पांच नामी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल मिले। सेक्टर-49 स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर-45 के सेंट स्टीफन स्कूल, सेक्टर-41 के अजित करम सिंह स्कूल, सेक्टर-32 के सॉंपिन्स स्कूल और सेक्टर-26 के सेंट जॉन स्कूल को धमकी मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। सूचना मिलते ही सभी स्कूलों में एहतियात के तौर पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीमें मौके पर पहुंचकर स्कूल परिसरों की गहन जांच कर रही हैं। छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रबंधन ने आवश्यक कदम उठाए और कई जगहों पर बच्चों को समय से पहले छुट्टी दे दी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धमकी भरे ईमेल मिलने के बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्कूलों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल किसी भी स्कूल से संदिग्ध वस्तु मिलने की सूचना नहीं है। साइबर सेल की टीम ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई है। शुरुआती जांच में शरारती तत्वों की साजिश की आशंका जताई जा रही है, हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

Punjab Civic Polls 2026: 9 नगर निगम और 104 नगर परिषद चुनाव आज से, सत्ता की बड़ी परीक्षा

चंडीगढ़. गर्मियों शुरू होते ही पंजाब का राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। अगले माह मई में यह पारा चर्म पर होगा। क्योंकि 16 या 17 मई को 9 नगर निगम व 104 नगर काउंसिल व नगर पंचायत के चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग ने इस प्रकार के संकेत दिए हैं कि मई के मध्य में ही वह चुनाव संपन्न कर सकता है। इन चुनावों को लेकर 5 मई को अंतिम मतदाता सूची जारी हो जाएगी। जिसके तुरंत बाद राज्य चुनाव आयोग इसकी घोषणा कर सकता है। नगर निगम अबोहर की अवधि आठ अप्रैल, मोहाली, होशियारपुर और बठिंडा की 11 अप्रैल, बरनाला की 14 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। जहां पर स्थानीय सरकार ने प्रशासक लगा दिए हैं। जबकि बटाला की 18 अप्रैल, पठानकोट की 28 अप्रैल, मोगा की 12 मई और कोटकपूरा की अवधि 6 जून को पूरी हो रही है। सात नगर निगम के कार्यकाल की अवधि होगी पूरी मोगा और कोटकपूरा नगर निगम अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद या पहले भंग कर दिया जाएगा। जबकि बाकी के 7 नगर निगम के कार्यकाल की अवधि स्वत: ही पूरी हो जाएगी। कमोवेश यही स्थिति 104 नगर काउंसिल व नगर पंचायत में भी देखने को मिलेगी। 5 मई के बाद जिसका कार्यकाल पूरा होगा उसे भंग किया जाएगा। ताकि सभी के चुनाव एक साथ करवाए जा सकें। राजनीतिक रूप से इन चुनावों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि इस साल के अंत या 2027 के शुरूआत में विधान सभा चुनाव होने हैं। बता दें कि 16 मार्च 2022 को भगवंत मान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। चूंकि अगले वर्ष जनगणना व परिसीमन की प्रक्रिया शुरू हो रही है। जिसकी वजह से अनुमान लगाया जा रहा हैं कि इस साल के अंत तक विधान सभा चुनाव की घोषणा हो सकती है। ताकि जनगणना से पहले चुनावी प्रक्रिया को पूरा किया जा सके। चूंकि यह चुनाव शहरी व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में होने हैं। अत: इस चुनाव से पंजाब के शहरी मतदाताओं को रुझान भी सामने आ सकता है। आम आदमी पार्टी को क्या मिल पाएगा स्पष्ट बहुमत आम तौर पर नगर निगम व नगर काउंसिल चुनाव में हमेशा ही सत्तापक्ष का हाथ ऊपर रहता हैं लेकिन यह चुनाव उस समय होने जा रहे हैं जब सरकार का कार्यकाल मात्र छह से सात माह का ही रह जाएगा। सत्ता पक्ष के लिए यह चुनाव इसलिए भी चुनौती पूर्ण हैं क्योंकि नवंबर 2023 में जब जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, फगवाड़ा व पटियाला नगर निगम के चुनाव हुए तो पटियाला को छोड़ कर किसी भी नगर निगम में आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया था। हालांकि आम आदमी पार्टी ने सभी नगर निगमों में अपना मेयर बना लिया था। विधान सभा चुनाव से पहले होने वाला यह ‘महा चुनाव’ करीब 55 से अधिक विधान सभा सीटों के रुझान को भी दर्शाएगा।  

हैरान करने वाली घटना: ASI ने पोती के हाथ-पैर बांधे, धूप में लिटाया; निलंबन के बाद जांच शुरू

फरीदकोट. पंजाब के फरीदकोट से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पंजाब पुलिस की एक लेडी ASI पर अपनी ही 5 वर्षीय पोती के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। बता दें कि लेडी ASI बच्ची की दादी है जिस पर आरोप है कि उसने बच्ची हाथ-पैर बांधकर घर के बाहर गेट से बांध दिया। बच्ची घंटों तेज धूप में तड़पती रही और चिल्लाती रही, 'मुझे मम्मी के पास जाना है।' इस पूरी घटना का मंजर लोगों ने वीडियो में कैद कर लिया और वीडियो वायरल कर दी। वीडियो वायरल होने के बाद डॉ. प्रज्ञा जैन ने हरकत में आते हुए लेडी ए.एस.आई. दादी सरबीत कौर को सस्पैंड कर दिया है। यह मामला आगे की कार्रवाई के लिए बाल कल्याण समिति को भेज दिया गया है। वीडियो में दिखा दर्दनाक मंजर वायरल वीडियो में बच्ची गेट से बंधी जमीन पर रोती-चिल्लाती नजर आती है। उसके हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए हैं और वह बार-बार “मम्मी के पास जाना है” कहते हुए रो रही है।  बच्ची की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे और किसी तरह उसे रस्सियों से मुक्त कराया। स्थानीय लोगों ने घर का दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। बाद में महिला उसे उठाकर अंदर ले गई। इस पूरे मंजर को देखकर लोगों में रोष फैल गया। वहीं, शुरूआती जांच में पता चला है कि बच्ची के माता-पिता पुर्तगाल में सेट हो गए हैं और बच्ची की देखबाल दादी करती है। बच्ची बाहर खेलने की जिद्द कर रही थी जिसके चलते उक्त ए.एस.आई. दादी ने इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया। ए.एस.आई. सरबजीत कौर जो बच्ची की दादी है ने सफाई देते हुए कहा कि वह उसके पति की तबीयत खराब होने के कारण वह तनाव में थी।  ऊपर से बच्ची बाहर खेलने की जिद कर रही तो उसने बच्ची को डराने के इरादे से यह कदम उठाया। लेकिन उसे अब अपनी गलती का अहसास है। वहीं, पुलिस और बाल कल्याण समिति द्वारा मामले की गहराई से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने साफ किया है कि बच्चे के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

कैब ड्राइवरों का सरकार से आग्रह: एग्रीगेटर पॉलिसी 2025 और फेयर नोटिफिकेशन जल्द लागू हो

चंडीगढ़. चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के हजारों कैब और ऑटो ड्राइवरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ट्राइसिटी ड्राइवर यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि 25 अप्रैल तक एग्रीगेटर पॉलिसी रूल्स-2025 और किराया नोटिफिकेशन को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो वे चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के बाहर बड़ा आंदोलन करेंगे। यूनियन के प्रधान अमनदीप सिंह ने बताया कि ड्राइवर पिछले कई महीनों से 7 जुलाई 2025 को जारी किराया दरों के नोटिफिकेशन को लागू करवाने के लिए प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन ओला, उबर, रैपिडो और इनड्राइवर जैसी कंपनियां नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से काम कर रही हैं। यूनियन ने चंडीगढ़ के प्रशासक से की अपील ड्राइवरों का आरोप है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण इन कंपनियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे उनमें भारी रोष और निराशा है। उनका कहना है कि लगातार आर्थिक शोषण के कारण परिवार का पालन-पोषण, रोजमर्रा के खर्च और बच्चों की फीस भरना भी मुश्किल हो गया है। यूनियन ने चंडीगढ़ के प्रशासक से अपील की है कि वह तुरंत ड्राइवरों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस समस्या का समाधान करें, ताकि उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर न होना पड़े। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो हजारों ड्राइवर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

अजनाला केस में बड़ा अपडेट: अमृतपाल सिंह की NSA हटते ही गिरफ्तारी, डिब्रूगढ़ से शिफ्ट नहीं होंगे

चंडीगढ़. खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के मामले में पंजाब सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट रणनीति तय कर ली है। सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल को समाप्त हो रही राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को आगे बढ़ाने की संभावना नहीं है, लेकिन इसके साथ ही अमृतपाल की रिहाई भी नहीं होगी। राज्य पुलिस अजनाला थाना हमले के मामले में उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार करेगी, जिसके बाद वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में ही बंद रहेगा। पंजाब गृह विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर साफ किया है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से अमृतपाल को एनएसए समाप्त होने के बाद भी डिब्रूगढ़ जेल में ही रखा जाए। राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के संयुक्त आकलन के बाद यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, अधिकारियों ने अंतिम समय में किसी भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया है। फरवरी 2023 में अमृतसर के अजनाला थाने पर हुए हमले के मामले में अमृतपाल सिंह को मुख्य आरोपित बनाते हुए कुल 41 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई गंभीर धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। इनमें धारा 307 (हत्या का प्रयास), 353 (लोक सेवक पर हमला), 186 (सरकारी कार्य में बाधा), 506 (आपराधिक धमकी), 332 और 333 (लोक सेवक को चोट व गंभीर चोट पहुंचाना), 120बी (आपराधिक साजिश), 427 (नुकसान), 148 (दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा) और 201 (साक्ष्य मिटाना) शामिल हैं। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25 भी लगाई गई है। जांच के अनुसार, अमृतपाल अपने समर्थकों के साथ हथियारों से लैस होकर अजनाला थाने पहुंचा था। आरोप है कि भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़े, थाने में घुसकर पुलिसकर्मियों से टकराव किया और एक साथी को जबरन छुड़ाने की कोशिश की। इस घटना के बाद राज्यभर में व्यापक सुरक्षा अभियान चलाया गया था। मामले की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हो सकी है, क्योंकि अमृतपाल एनएसए के तहत निरुद्ध था। अब आरोप तय होने के बाद ट्रायल प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। पुलिस ने डिब्रूगढ़ जेल जाकर गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए टीम तैयार कर ली है। इसी मामले में सरकार पहले ही अमृतपाल के नौ करीबी सहयोगियों की एनएसए हिरासत समाप्त कर उन्हें पंजाब ला चुकी है। इनमें पापलप्रीत सिंह (मीडिया सलाहकार), कुलवंत सिंह राउके, हरजीत सिंह चाचा, गुरिंदर पाल सिंह उर्फ गुरी, गुरमीत सिंह बुक्कनवाला, भगवंत सिंह, दलजीत सिंह कालसी, बसंत सिंह और वरिंदर सिंह उर्फ फौजी शामिल हैं। सभी आरोपित वर्तमान में पंजाब की विभिन्न जेलों में बंद हैं और पुलिस कस्टडी में हैं। अमृतपाल सिंह को अप्रैल 2023 में मोगा के रोड़े गांव से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से वह डिब्रूगढ़ जेल में निरुद्ध है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उसने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 1.9 लाख मतों से जीत दर्ज की थी। उसने 5 जुलाई 2024 को शपथ ली, लेकिन इसके बाद किसी संसदीय कार्यवाही में भाग नहीं ले सका। संसद सत्र में शामिल होने के लिए दायर उसकी पैरोल याचिकाएं भी अदालत ने कानून-व्यवस्था के आधार पर खारिज कर दी थीं। 22 अप्रैल के बाद की कार्रवाई इस पूरे मामले में निर्णायक होगी। मौजूदा संकेत यही हैं कि एनएसए हटेगा, लेकिन अमृतपाल की हिरासत समाप्त नहीं होगी और अजनाला कांड में गिरफ्तारी के साथ कानूनी शिकंजा ढीला नहीं पड़ेगा और अजनाला कांड में गिरफ्तारी के साथ मामला अगले चरण में प्रवेश करेगा।

AAP का चौंकाने वाला कदम: राघव चड्ढा की सुरक्षा हटाई, पंजाब में सियासी हलचल तेज

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी (आप) और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया और अब पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली है। इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई वाली पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा को दी गई पंजाब पुलिस की सुरक्षा हटा दी है। गौरतलब है कि चड्ढा को पंजाब के सह-प्रभारी और राज्यसभा सांसद होने के नाते यह सुरक्षा मिली हुई थी। सुरक्षा वापसी को पार्टी के अंदर बढ़ती दूरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले 2 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को भी सूचित कर दिया कि अब चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद से ही चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी। राघव चड्ढा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि उन्हें “खामोश” करने की कोशिश की गई है, लेकिन वे हार मानने वालों में नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उनकी खामोशी को कमजोरी न समझा जाए। इसके जवाब में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज, आतिशी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान खुलकर सामने आए और चड्ढा पर पार्टी लाइन से हटने के आरोप लगाए। इसी बीच दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया कि केंद्र सरकार राघव चड्ढा को जेड प्लस सुरक्षा देने की तैयारी में है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्र सरकार चड्ढा पर इतनी मेहरबान क्यों दिख रही है। हालांकि, चड्ढा के करीबी सूत्रों का कहना है कि अभी उन्हें केंद्र से कोई सुरक्षा नहीं मिली है, लेकिन जल्द ऐसी संभावना बन सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपनेता पद से हटाने और सुरक्षा वापस लेने जैसे फैसले पार्टी के भीतर गहराते मतभेदों की ओर इशारा करते हैं। वहीं, केंद्र से संभावित सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने इस पूरे विवाद को और पेचीदा बना दिया है। फिलहाल, राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती दूरी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज हो सकता है।

लुधियाना में अमरनाथ यात्रा मेडिकल के दौरान उमड़ी भीड़, सिविल अस्पताल में बुलानी पड़ी पुलिस

लुधियाना. लुधियाना सिविल अस्पताल में श्री अमरनाथ यात्रा जाने वाले श्रद्धालुओं के मेडिकल बुधवार से शुरू हो गए। पहले ही दिन एक हजार से अधिक शिव भक्त मेडिकल के लिए पहुंचे। बम बम भोले के जयघोष के बीच श्रद्धालु टोकन लेकर मेडिकल के लिए लाइनों में लगे हुए हैं। भारी भीड़ के चलते अस्पताल प्रबंधन को पुलिस तक मौके पर बुलानी पड़ीं। मेडिकल के दौरान बहुत से श्रद्धालूओ के बीच नोकझोक भी हो गई सुबह साढ़े 11 बजे तक 370 लोग मेडिकल टीम तक पहुँच चुके थे, जबकि भक्तो की लंबी कतार लगी हुई है। जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है, जिसमें मेडिकल स्पेशलिस्ट, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, इंटर्न और अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार, स्वास्थ्य जांच में विशेष रूप से हृदय, फेफड़ों और ब्लड प्रेशर से संबंधित परीक्षण किए जा रहे हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके। मेडिकल जांच को चार चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें सबसे पहले टोकन काउंटर पर पंजीकरण के लिए नंबर दिया जाएगा। इसके बाद रजिस्ट्रेशन काउंटर पर दस्तावेजों की जांच होगी। तीसरे चरण में इसीजी जांच की जाएगी और आखिर में डाक्टर द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कर अंतिम सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

कुष्ठ रोग पर अलर्ट: पंजाब में 352 सक्रिय मामले, विकलांगता के संकेतों से स्वास्थ्य विभाग सतर्क

चंडीगढ़. राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक राज्य में कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के संक्रमण को पूरी तरह रोकने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब तक केवल 23 में से 8 जिले ही इंटरप्शन आफ ट्रांसमिशन का दर्जा हासिल कर पाए हैं। यह स्थिति जहां एक ओर प्रगति को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर अभी लंबा रास्ता तय किए जाने की जरूरत भी बताती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में इस समय कुल 352 कुष्ठ रोगी हैं। इनमें 341 मल्टीबैसिलरी और 11 पासीबैसिलरी केस शामिल हैं। इसके अलावा 4 ग्रेड- 2 विकलांगता के मामले सामने आए हैं और 5 बच्चे भी मल्टीबैसिलरी श्रेणी में पाए गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि राज्य के कुछ इलाकों में संक्रमण अभी भी जारी है और समय पर पहचान नहीं हो पा रही। जिन 8 जिलों ने संक्रमण की कड़ी तोड़ने में सफलता हासिल की है, उनमें फाजिल्का, फिरोजपुर, कपूरथला, मानसा, मुक्तसर, पठानकोट, रूपनगर (रोपड़) और संगरूर शामिल हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कुष्ठ रोग उन्मूलन केवल मामलों की संख्या घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना, विकलांगता को रोकना और समाज में फैले कलंक को खत्म करना भी उतना ही जरूरी है। ग्रेड-2 विकलांगता और बच्चों में पाए गए मामलों को देर से पहचान और जागरूकता की कमी का संकेत माना जा रहा है। हाल ही में आयोजित सिविल सर्जनों की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि 2027 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए साल में दो बार चलने वाले केस डिटेक्शन अभियानों को और तेज किया जाए। साथ ही संवेदनशील जिलों के लिए अलग रणनीति बनाई जाए, ग्रेड-2 मामलों का अनिवार्य आडिट किया जाए और संदिग्ध मरीजों की जांच को स्वास्थ्य केंद्रों पर मजबूत किया जाए। राज्य को यह भी सलाह दी गई है कि कुष्ठ रोग को नोटिफाएबल डिजीज घोषित किया जाए ताकि हर केस की रिपोर्टिंग अनिवार्य हो सके। निजी डाक्टरों को भी निर्देश दिए जाएंगे कि वे सभी मामलों की जानकारी जिला कुष्ठ रोग अधिकारियों को दें। आशा वर्करों की ट्रेनिंग मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है ताकि वे शुरुआती लक्षण जैसे अंगों में कमजोरी या चलने-फिरने में दिक्कत को पहचान सकें। स्वास्थ्य विभाग ने लुधियाना, मोहाली, जालंधर और अमृतसर जैसे हाई-प्रायोरिटी जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। यहां संक्रमण की पहचान कर उसकी श्रृंखला तोड़ने पर फोकस रहेगा। पंजाब में हर साल फरवरी और अक्टूबर में लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन चलाया जाता है, जिसमें 14 दिन तक घर-घर जाकर मरीजों की पहचान की जाती है। इसके अलावा स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान भी हर साल 30 अक्टूबर से शुरू किया जाता है, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े और बीमारी को समय रहते रोका जा सके।

राघव चड्ढा को मिली Z कैटेगरी सुरक्षा, पंजाब ने छीनी, केंद्र ने दी

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पंजाब सरकार द्वारा दी गई जेड प्लस (Z+) कैटेगरी की सुरक्षा वापस ले ली गई। इस खबर के सामने आने के कुछ ही देर बाद केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें सुरक्षा मुहैया करा दी गई। मौजूदा खतरे की आशंका के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा उन्हें जेड (Z) श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। यह सुरक्षा दिल्ली और पंजाब, दोनों जगहों पर उपलब्ध होगी। उनकी सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जब तक औपचारिकता पूरी नहीं कर ली जाती है, तब तक दिल्ली पुलिस को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। आपको बता दें कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने पिछले सप्ताह ही राघव चड्ढा का सुरक्षा घेरा हटा लिया था। पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद उन्हें राज्य सरकार की ओर से सबसे उच्च स्तर की Z+ सुरक्षा प्रदान की गई थी। राघव चड्ढा और 'आप' नेतृत्व के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया। इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने कहा था कि उन्हें "खामोश किया गया है, पराजित नहीं किया गया।" ‘आवाज उठाई, कीमत चुकाई’ आपको बता दें कि हाल ही में राघव चड्ढा ने इंस्टाग्राम पर ''आवाज उठाई, कीमत चुकाई'' शीर्षक वाला एक वीडियो शेयर किया था। यह वीडियो संसद में उनके द्वारा विभिन्न मुद्दे उठाते हुए दिखाने वाली कई 'क्लिप' का संकलन है। चड्ढा ने पोस्ट में कहा, ''पूरे सम्मान के साथ, मैं मेरे संसदीय प्रदर्शन पर सवाल उठाने वालों से यही कहूंगा कि मेरा काम ही बोलेगा।'' आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से दो अप्रैल को हटा दिया था। पार्टी ने उन पर आरोप लगाया है कि वह संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र के खिलाफ मुखर होकर बोलने से बचते रहे और इसके बजाय अपने प्रचार-प्रसार में लगे रहे। चड्ढा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पार्टी के आरोपों को 'झूठ करार दिया और कहा कि वह संसद में लोगों के मुद्दे उठाने गए थे, हंगामा करने नहीं। राज्यसभा में 'आप' के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद से चड्ढा सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट साझा कर चुके हैं। इससे यह साफ संकेत गया है कि वह उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे।