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बिजली कटौती पर सरकार सख्त, मंत्री Arora ने गिनाए संकट के कारण और दिया राहत का भरोसा

चंडीगढ़. पंजाब में अचानक बढ़ी गर्मी ने बिजली व्यवस्था पर सीधा असर डाला है। भीषण लू और तापमान में लगातार बढ़ोतरी के कारण बिजली की मांग में तेजी से उछाल दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार इस तरह की मांग पहले कभी अप्रैल महीने में देखने को नहीं मिली, जिससे पूरे तंत्र पर दबाव बढ़ गया है।  बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि पहले से तय कार्यक्रम के तहत मरम्मत कार्य चल रहे थे। इसी वजह से कई स्थानों पर नियोजित बिजली कट लगाए गए, जिससे उपभोक्ताओं को कटौती अधिक महसूस हुई। 17 अप्रैल के बाद पैदा हुई स्थिति का यही सबसे बड़ा कारण है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ऐसे नियोजित कट चार घंटे से ज्यादा नहीं होंगे और व्यवस्था को सामान्य रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। खेती के मौसम ने भी बिजली की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समय फसलों की कटाई के साथ-साथ आलू और टमाटर जैसी फसलों की खेती के लिए लगातार बिजली की जरूरत रहती है। किसानों को तय समय पर बिजली उपलब्ध कराना जरूरी होने के कारण ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। हालात पर विभाग रख रहा नजर विभाग के अनुसार राज्य में करीब छह हजार करोड़ रुपये की लागत से प्रसारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने का काम चल रहा है। लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण इस काम की गति भी प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद अधिकारियों का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत के तौर पर उद्योगों को रात के समय खुले प्रावधान के तहत सीधे बिजली खरीदने की अनुमति दी गई है, ताकि दिन के समय ग्रिड पर लोड कम किया जा सके और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। अनावश्यक बिजली उपकरणों के इस्तेमाल से बचें विभाग का दावा है कि राज्य में जरूरत के अनुसार बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और प्रदेश अभी भी बिजली के मामले में आत्मनिर्भर स्थिति में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी तैयारियां पहले से थीं, लेकिन अप्रैल में इतनी अधिक मांग अप्रत्याशित रही। उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे अधिक खपत वाले समय में अनावश्यक बिजली उपकरणों का इस्तेमाल न करें, ताकि सभी को सुचारु रूप से बिजली मिल सके। बिजली की अधिकतम मांग में 12% की बढ़ोतरी अप्रैल की शुरुआत में: बिजली का इस्तेमाल पिछले साल के मुकाबले 7% से 21% तक कम था। पिछले 10 दिनों में: भारी गर्मी की वजह से बिजली के इस्तेमाल और इसकी डिमांड में जबरदस्त उछाल आया है। बड़ी छलांग: अधिकतम मांग 15 अप्रैल को लगभग 7900 MW थी, जो 25 अप्रैल तक बढ़कर 12000 MW के पार पहुंच गई है। स्थिति को सुधारने के लिए उठाए गए कदम बिजली कटौती का समय तय: लोगों को परेशानी न हो, इसलिए बिजली कटौती को ज्यादा से ज्यादा 4 घंटे तक ही सीमित रखा गया है। दूसरे राज्यों से बिजली का लेनदेन: दूसरे राज्यों के साथ 1500-2000 MW बिजली के लिए बातचीत आखिरी दौर में है; ये समझौते जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे। हाइड्रो पावर प्लांट फिर से शुरू: 2025 की बाढ़ में सरकारी हाइड्रो यूनिट्स को नुकसान पहुँचा था। मरम्मत का काम 10 मई तक पूरा हो जाएगा, जिससे ग्रिड में 300 MW बिजली और जुड़ जाएगी। अतिरिक्त बिजली की खरीदारी: ग्रिड के लिए लगभग 1500 MW एक्स्ट्रा बिजली अलग-अलग राज्यों और प्राइवेट कंपनियों से खरीदी जा रही है। केंद्र सरकार से मदद: गर्मियों के पीक महीनों में राहत देने के लिए पंजाब केंद्र सरकार के कोटे से लगभग 2000 MW बिजली लेने की तैयारी कर रहा है। शॉर्ट-टर्म टेंडर: बाजार में कम समय वाले टेंडर निकाले गए हैं ताकि बिना किसी देरी के तुरंत फालतू बिजली खरीदी जा सके। चार्ज में छूट: अगले 2 महीनों के लिए शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक 'व्हीलिंग चार्ज' और 'क्रॉस सब्सिडी' में छूट दी गई है।

मलावी में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा का अनावरण, सिख समुदाय ने किया जोरदार स्वागत

चंडीगढ़ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) ने मलावी, अफ्रीका में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा की स्थापना की। महाराजा रणजीत सिंह, जिन्हें शेर-ए-पंजाब के नाम से जाना जाता है, एक महान भारतीय योद्धा और दूरदर्शी नेता थे। इस प्रतिमा का औपचारिक अनावरण 19 अप्रैल को बैसाखी समारोह के अवसर पर भारत के उच्चायुक्त श्री अमराराम गुजर और ब्लैंटायर सिटी के काउंसलर आइजैक जोमो उस्मान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। समारोह में सिख समुदाय के 400 से अधिक सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारत सरकार द्वारा उपहार स्वरूप प्रदान की गई यह प्रतिमा महाराजा रणजीत सिंह के जीवन और विरासत को समर्पित है। उनके साहस, कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता आज भी विश्वभर में पीढ़ियों को प्रेरित करती है। इस अवसर पर आइसीसीआर की महानिदेशक के. नंदनी संगला ने कहा कि यह स्थापना प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर सिख समाज, के लिए अपनी समृद्ध विरासत से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। उच्चायुक्त श्री अमराराम ने इस ऐतिहासिक संबंध को महाराजा रणजीत सिंह के वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बताया।

‘AAP में घुटन महसूस हो रही थी’, राघव चड्ढा ने बताए अलग होने के कारण

चंडीगढ़. सांसद राघव चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं एक सीए था, मेरे सामने एक बेहतर करियर था, उसे छोड़कर मैं राजनीति में आया। अपना करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए। अपने खून-पसीने और बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा, लेकिन आज ये पार्टी पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है, पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है और ये पार्टी आज चंद भ्रष्ट लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है, जो अब देश के लिए नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम कर रही है। पिछले कुछ सालों से मैं यह महसूस कर रहा था कि शायद मैं एक गलत पार्टी में एक सही आदमी हूं। इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन विकल्प थे; पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं। दूसरा विकल्प कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं, जो कि हुआ नहीं। राघव ने गिनाए तीन विकल्प तीसरा विकल्प कि मैं अपनी ऊर्जा और अनुभव लेकर किसी और पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं। इसलिए अकेले मैंने ही नहीं, मेरे साथ छह और सांसदों ने यह फैसला लिया कि हम इस पार्टी से रिश्ता तोड़ देंगे। एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। वे अनगिनत शिक्षित लोग जो इस पार्टी के साथ जुड़े थे, क्या वे सारे लोग गलत थे? आप ऐसे समझिए, आप में से जितने ऑफिस जाने वाले लोग हैं, अगर आपका वर्कप्लेस टॉक्सिक बन जाए तो आप कितना काम कर पाएंगे? क्या आप वहां काम कर पाएंगे? आपको वहां काम करने से रोका जाए, आपकी मेहनत को दबाया जाए, आपको चुप कराया जाए, तो आप क्या करेंगे? उस स्थिति में सही फैसला यही है कि आप उस जगह को छोड़ दें। शायद हमने भी वही किया। आप में से कई लोगों ने पूछा कि क्या मैं आम लोगों के मुद्दे वैसे ही उठाता रहूंगा? तो मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आपकी समस्याओं को लगातार और जोश के साथ उठाऊंगा, और अच्छी बात यह है कि अब हम उन दिक्कतों के हल भी ढूंढ पाएंगे। कुछ दिन पहले बीजेपी में हुए थे शामिल कुछ दिन पहले राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने साथ-साथ छह और सासंदों के आप छोड़क बीजेपी में शामिल होने की बात कही थी। आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी झटका था। राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालिवाल, हर भजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता आदि बीजेपी में शामिल हो गए थे।  

पंजाब में गर्मी का तांडव, तापमान 40°C पार; मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया

लुधियाना  रविवार को पंजाब के विभिन्न जिलों में मौसम ने गर्मी का कहर बरपाया। लू के चलते तापमान लगातार तीसरे दिन 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा। बठिंडा में सुबह 1.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, लेकिन इसके बाद तेज धूप ने तापमान को 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया। लुधियाना और पटियाला में तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि फरीदकोट में 42.8 डिग्री सेल्सियस, रूपनगर में 41.4 डिग्री सेल्सियस, चंडीगढ़ में 40.8 डिग्री सेल्सियस, एसबीएस नगर में 40.5 डिग्री सेल्सियस, अमृतसर में 39.3 डिग्री सेल्सियस, फिरोजपुर में 39.0 डिग्री सेल्सियस और होशियारपुर में 38.0 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। अन्य जिलों में तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को पंजाब के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना है, जबकि अन्य जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं चल सकती हैं। 28 से 30 अप्रैल तक धूल भरी हवाओं और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई गई है। एक मई को मौसम साफ रहेगा, जबकि दो मई को फिर से धूल भरी हवा और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। पंजाब और हरियाणा में लू के थपेड़े पंजाब और हरियाणा के ज्यादातर जिलों में दोपहर 12 बजे से देर शाम तक गर्म हवाएं चल रही हैं। हरियाणा के रोहतक, पानीपत और फरीदाबाद जैसे जिलों में गर्मी ने लोगों का बुरा हाल कर दिया है। राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है और मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। यहां न केवल गर्मी, बल्कि खराब वायु गुणवत्ता (AQI 222) ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूपी और राजस्थान में पारा 46 के पार उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 46.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा। वहीं, राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर में भी तापमान 46 डिग्री दर्ज किया गया है। ओडिशा के झारसुगुड़ा में भी तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि तटीय इलाकों में लोग उमस से परेशान हैं। कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग (IMD) ने भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर भी दी है। 28 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और हल्की बारिश हो सकती है। यह मौसम 2 मई तक बना रह सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना अधिक जताई गई है।  

पंजाब सरकार का ऐतिहासिक कदम, 201 गांवों में किसानों को धान की अग्रिम बिजाई करने की मिली अनुमति

 कलानौर  पंजाब सरकार ने सेमग्रस्त घोषित किए राज्य के 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। इनमें गुरदासपुर जिले के तीन गांव शामिल हैं, जिनके करीब 200 एकड़ जमीन सेमग्रस्त है। पंजाब सरकार ने यह छूट दो साल के लिए दी है। गौर हो कि पंजाब में किसान दस मई से पहले धान की पनीरी की बिजाई नहीं कर सकते हैं। इसका उद्देश्य राज्य में घटते भू-जल स्तर को रोकना है। निकटवर्ती निज्जरपुर गांव के सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि ब्लाक डेरा बाबा नानक से संबंधित सरपंचों की मांग पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब भर में सेमग्रस्त घोषित किए 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। अब इन खेतों के किसान साल भर में कभी भी धान की बिजाई कर सकते हैं। इस फैसले से डेरा बाबा नानक ब्लाक के सेमग्रस्त गांवों के सरपंचों व किसानों में खुशी की लहर है। इस संबंध में गांव निज्जरपुर के सरपंच रणदीप सिंह, प्रकाश सिंह, कुलविंदर सिंह, कर्मजीत सिंह, जगजीत सिंह आदि ने बताया कि पिछले साल अगस्त में सक्की किरण नाले और रावी दरिया के पानी से आई बाढ़ में उनकी धान की फसल तबाह हो गई थी। इसके बाद विभिन्न संगठनों के सहयोग से उन्होंने गेहूं की बिजाई की, लेकिन गेहूं वाले खेतों में सेम आ जाने के कारण उनकी गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई थी। सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव अठवाल, कोटली सूरत मल्ली, अर्लीभन्न के रकबे में सेम पड़ जाने और गेहूं की फसल नष्ट होने पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन सेम प्रभावित खेतों में अग्रिम धान लगाने की मांग की थी। इस मांग के मद्देनजर पंजाब सरकार ने कृषि विभाग और विभिन्न टीमों को सेमग्रस्त खेतों की जांच के लिए भेजा था। टीमों ने जांच के बाद पाया कि इन खेतों में डेढ़ से दो फुट मिट्टी खोदने के बाद सेम का पानी आ जाता है। पंजाब सरकार ने किसानों की मांग स्वीकार करते हुए जिला गुरदासपुर के गांव भुल्लर, अठवाल, कोटली सूरत मल्ली के अलावा पूरे पंजाब के विभिन्न जिलों के कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया है। इनमें श्री मुक्तसर साहिब के 95, फरीदकोट के 19, फाजिल्का के 81, बठिंडा के दो और मानसा के एक गांव शामिल हैं। सरकार ने इन गांवों के क्षेत्र को धारा 3(3)(सी) के तहत 'पंजाब प्रिजर्वेशन ऑफ सब-सायल वाटर एक्ट, 2009' के दायरे से अगले दो सालों की अवधि के लिए छूट दे दी है। इस छूट के बाद अब ये किसान निर्धारित तिथि से पहले अग्रिम धान की बिजाई कर सकेंगे। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उनकी आर्थिक को काफी राहत मिलेगी। सरपंच रणदीप सिंह ने सेमग्रस्त जमीनों के मालिक किसानों से अपील की कि वे धान की बिजाई के लिए नर्सरियों की तैयारी करें ताकि सेमग्रस्त खेतों में धान की बिजाई की जा सके। सरपंच रणजीत सिंह और प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल अगस्त महीने में बाढ़ के पानी से जहां उनकी धान की फसल पूरी तरह तबाह हो गई थी, वहीं देर से खेतों में किसानों द्वारा बिजाई की गई गेहूं की फसल भी खेतों में सेम की मार पड़ जाने के कारण नष्ट हो गई है। उन्होंने बताया कि कई किसानों के खेतों में से डेढ़ से तीन क्विंटल प्रति एकड़ गेहूं की पैदावार ही निकली है, जो सामान्य से काफी कम है। किसानों ने कहा कि पंजाब सरकार को सेमग्रस्त जमीनों पर खराब हुई गेहूं की फसल का भी किसानों को तुरंत मुआवजा देना चाहिए ताकि समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे किसानों की आर्थिक सहायता हो सके। जिला गुरदासपुर के कृषि अधिकारी डा. ठाकुर रणधीर सिंह से बातचीत में उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा जिला गुरदासपुर के तीन गांवों आदि सहित कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया गया है। इसके तहत इन सेमग्रस्त गांवों के किसानों को अग्रिम धान बिजाई की छूट मिली है, जबकि दूसरी जमीनों में धान की पनीरी की बिजाई और धान की रोपाई पंजाब सरकार के खेतीबाड़ी विभाग के आदेशों पर होगी।

नीना मित्तल का बड़ा बयान: भाजपा के पंजाब में सत्ता में आने की उम्मीदें पूरी नहीं होंगी

लुधियाना  आम आदमी पार्टी की हलका विधायक नीना मित्तल की अगुवाई में  यहां पार्टी के सात पूर्व राज्यसभा सांसदों के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। टाहली वाला चौक में हुए इस प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के अनेक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों के पुतले फूंके गए और नारेबाजी कर अपना रोष व्यक्त किया गया। इस मौके पर विधायक नीना मित्तल ने कहा कि जिन लोगों ने पार्टी के साथ विश्वासघात किया है, उन्हें पंजाब के लोग कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल निजी लाभ के लिए उठाया गया है, जिससे जनता के भरोसे को ठेस पहुंची है। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार की सोच पंजाब विरोधी है और उसके मंसूबे कभी भी पंजाब की सत्ता पर काबिज होने के पूरे नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियों ने पहले ही पंजाब की किसानी और युवाओं को नुकसान पहुंचाया है, जिसे लोग भली-भांति समझते हैं। विधायक नीना मित्तल ने कहा कि पार्टी अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में राज्य को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा रही है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, जिनका सीधा लाभ जनता को मिल रहा है। विधायक नीना मित्तल ने जनता से अपील की कि सच और विकास की राजनीति का साथ दें और विरोधियों की गुमराह करने वाली नीतियों से सतर्क रहे।

पंजाब में 33 हफ्ते में जन्मी नवजात को ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ से मिली जिंदगी, जीती मौत की जंग

चंडीगढ़  नवजात की पहली किलकारी राहत लेकर आनी चाहिए, लेकिन कई बार यह सन्नाटा भी लेकर आती है. बठिंडा जिले के रामपुरा फूल स्थित अग्रवाल अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, लेकिन उसके जीवन की जंग अभी शुरू ही हुई थी।  सिर्फ 33 सप्ताह में जन्मी रेशम सिंह और गुरमेल कौर की बेटी समय से पहले बेहद नाजुक हालत में इस दुनिया में आई. उसका वजन केवल 1.926 किलोग्राम था, जो सामान्य पूर्णकालिक जन्म वजन (लगभग 2.5 से 4 किलोग्राम) से काफी कम है. जन्म के पहले ही पल से उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही थी. बिना चिकित्सकीय सहायता के सांस लेना संभव नहीं था. ऐसे हालात में समय गंवाने की कोई गुंजाइश नहीं थी।  डॉ. सुरिंदर अग्रवाल (एमडी पीडियाट्रिक्स), जिनके पास 24 वर्षों का अनुभव है, ने अपनी टीम के साथ तुरंत उपचार शुरू किया. बच्ची को एनआईसीयू में भर्ती किया गया, जहां मशीनें वह काम कर रही थीं, जो उसके अविकसित फेफड़े नहीं कर पा रहे थे. मॉनिटर पर हर धड़कन और हर सांस पर नजर रखी जा रही थी. हर पल अनिश्चितता और हर पल महत्वपूर्ण था।  इसके बाद 17 दिनों तक लगातार देखभाल और सही उपचार जारी रहा. नवजात को 10 दिनों तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सहायता दी गई, इसके बाद 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया. इस दौरान बच्ची को पीलिया हो गया, जिसका इलाज फोटोथेरेपी से किया गया. सीमित कंगारू मदर केयर के जरिए सावधानीपूर्वक पोषण दिया गया, ताकि उसकी नाजुक स्थिति प्रभावित हुए बिना उसे गर्माहट और स्थिरता मिल सके।  डॉ. अग्रवाल ने कहा, “एनआईसीयू में सुधार अचानक नहीं आता, यह धीरे-धीरे स्थिर संकेतों के साथ आता है.” धीरे-धीरे सुधार दिखना शुरू हुआ। सांस सामान्य होने लगी. प्रतिक्रियाएं बेहतर हुईं. जो नाजुक शरीर पहले संघर्ष कर रहा था, वह दिन-ब-दिन मजबूत होने लगा. डॉ. अग्रवाल ने कहा, “कई बार बच्चे को बचाना सिर्फ इलाज पर नहीं, बल्कि सही समय पर निर्भर करता है. थोड़ी-सी देरी भी सब कुछ बदल सकती है।  इस मामले में कोई देरी नहीं हुई. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत परिवार को कैशलेस इलाज मिला, जिससे डॉक्टर बिना किसी आर्थिक चिंता के पूरी तरह उपचार पर ध्यान केंद्रित कर सके।  17 दिनों के इलाज के बाद बच्ची को स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई. अब उसका वजन 2.106 किलोग्राम है. हालांकि वह अभी भी नाजुक है, लेकिन पहले से काफी स्वस्थ है. नवजात अपने माता-पिता की गोद में जीवित, स्थिर और स्वस्थ हालत में अस्पताल से बाहर आई।  एक अन्य मामले में, होशियारपुर के मनिंदर सिंह ने अपना अनुभव साझा किया. उनकी बेटी गुरकीरत कौर, जिसका जन्म इसी वर्ष 14 अप्रैल को हुआ था, को भी जन्म के बाद नवजात देखभाल की जरूरत पड़ी. उन्होंने कहा, “अस्पताल में उसका अच्छा इलाज हुआ और पूरा खर्च मुख्यमंत्री स्वास्थ्य कार्ड के तहत कवर हो गया।  रजिस्ट्रेशन उसी दिन पूरा हो गया और अब परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।  मनिंदर सिंह ने धन्यवाद देते हुए कहा, “इसलिए ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ बहुत महत्वपूर्ण है. जो व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करता है, वह भी अपने बच्चे के लिए बेहतर इलाज ले सकता है. यह बहुत बड़ी बात है।  पंजाब के एनआईसीयू में अभी भी खामोशी होती है, लेकिन अब वह डर नहीं, बल्कि उम्मीद से भरी होती है।  यह उम्मीद बिल्कुल शांत और स्थिर होती है, जिसमें मॉनिटर हर दिन और मजबूत होती किसी नन्हे दिल की धड़कन दिखाता है, और कई बार यही खामोशी और स्थिरता सब कुछ बदलने के लिए काफी होती है। 

अमृतसर सीमा पर बीएसएफ ने की बड़ी गिरफ्तारी, ड्रोन से हेरोइन तस्करी की कोशिश को किया विफल

अमृतसर  देर रात भारत-पाकिस्तान सीमा के पास बीओपी कलाम डोगर इलाके में ड्रोन के जरिए हेरोइन की खेप भेजने की कोशिश की गई। सीमा पर तैनात जवानों ने संदिग्ध ड्रोन की दिशा में फायरिंग भी की, ताकि उसे निष्क्रिय किया जा सके और किसी भी तरह की घुसपैठ को रोका जा सके। कुछ देर बाद बीएसएफ और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया। तलाशी के दौरान खेतों और आसपास के इलाके से एक ड्रोन बरामद किया गया। इसके साथ ही हेरोइन का एक पैकेट भी मिला, जिसका वजन करीब 535 ग्राम बताया जा रहा है। मामले की गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ड्रोन किस स्थान से उड़ाया गया और इसके छे कौन सा नेटवर्क सक्रिय है।

पंजाब में NDPS मामलों में 40% बढ़ोतरी, मान सरकार ने तस्करों के खिलाफ लिया बड़ा एक्शन

चंडीगढ़  पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के प्रभावी, तेज और ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं. ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि नशों के खिलाफ कार्रवाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, नशा तस्करी नेटवर्क को बड़े स्तर पर कमजोर किया गया है और दोषियों के खिलाफ सजा दर में भी महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है।  आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 से 2026 (अब तक) के दौरान 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए हैं, जो 2017–2021 के 52,255 मामलों की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्शाते हैं. गिरफ्तारियों की संख्या भी 68,064 से बढ़कर 98,596 हो गई है, जो राज्यभर में नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ लगातार और व्यापक कार्रवाई को दर्शाती है।  जब्तियों के आंकड़े इस अभियान की सफलता को और साफ करते हैं. हेरोइन की बरामदगी में 148 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है—2022 से अब तक 5,979 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई, जबकि 2017–21 के दौरान यह मात्रा 2,412 किलोग्राम थी. अफीम की जब्ती में भी 43 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होकर यह 3,583 किलोग्राम तक पहुंच गई है, जो जमीनी स्तर पर तेज कार्रवाई को दर्शाती है। सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में विशेष रूप से उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है. ‘आइस’ (क्रिस्टल मेथामफेटामाइन) की जब्ती 17 किलोग्राम से बढ़कर 93 किलोग्राम हो गई है, जो 447 प्रतिशत की वृद्धि है. कोकीन की जब्ती 6,064 किलोग्राम रही, जो पहले के 6,852 किलोग्राम के लगभग बराबर है।  इस अभियान की पहुंच अब दवाइयों के दुरुपयोग तक भी बढ़ चुकी है. 2022–26 के दौरान 8.7 करोड़ गोलियां और कैप्सूल जब्त किए गए हैं, जो खासकर युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सप्लाई चेन पर बड़े प्रहार का संकेत है।  इस कार्रवाई के सकारात्मक परिणाम न्याय प्रणाली में भी दिखाई दे रहे हैं. दोषियों के लिए सजा दर बढ़कर 89 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो मजबूत जांच, साक्ष्य संग्रह और प्रभावी अभियोजन को दर्शाती है।  डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने कहा, 'यह केवल कार्रवाई में वृद्धि नहीं, बल्कि नशे के खतरे से निपटने के तरीके में एक मूलभूत बदलाव है. मामलों और जब्तियों में वृद्धि इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई को दर्शाती है, जबकि बढ़ती सजा दर यह दिखाती है कि मामलों को उनके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा रहा है. सप्लायर से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर तक पूरी श्रृंखला पर लगातार दबाव बनाया गया है।  उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई की व्यापकता और निरंतरता मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की साफ रणनीतिक सोच का परिणाम है, जिसके तहत ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान राज्यभर में सक्रिय और निर्णायक कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा बन चुका है।  हालांकि जब्तियों में वृद्धि जमीनी स्तर पर तेज कार्रवाई को दर्शाती है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि मुख्य उद्देश्य नशा नेटवर्क को तोड़ना और नशों की उपलब्धता को कम करना है, ताकि इस अभियान का स्थायी और दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।   

7 करोड़ कैश मिलने के बाद ED का एक्शन तेज, भुल्लर के 11 ठिकानों पर रेड

चंडीगढ़ रिश्वतखोरी के केस में गिरफ्तार पंजाब के पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर के 11 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) तलाशी अभियान चला रही है. यह कार्रवाई सोमवार सुबह शुरू हुई. भुल्लर के चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर में स्थित 11 ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है. ये जगहें आरोपी भुल्लर और उसके साथियों और संदिग्ध बेनामीदारों से जुड़ी हैं. मालूम हो कि डीआईजी भुल्लर को पिछले साल 8 लाख रुपए के रिश्वत से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद उनके ठिकानों पर हुई छापेमारी में 7 करोड़ से ज्यादा रुपए कैश मिले थे।  आज भुल्लर के ठिकानों पर चल रही ईडी की रेड CBI, ACB द्वारा दर्ज किए गए मूल अपराधों से जुड़ी है। इन अपराधों में एक बिचौलिए के ज़रिए किसी आपराधिक मामले को निपटाने के लिए अवैध रिश्वत मांगने के आरोप शामिल हैं, साथ ही आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज़्यादा संपत्ति का पता भी चला है।  चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा, जालंधन में चल रही तलाशी मिली जानकारी के अनुसार भुल्लर और उसके करीबियों के चंडीगढ़ में स्थित दो, लुधियाना में स्थित 5, पटियाला में स्थित दो के साथ-साथ नाभा और जालंधर में स्थित एक-एक ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है. इन तलाशी अभियानों का मकसद अपराध से हासिल हुई और संपत्ति का पता लगाना, बेनामी संपत्तियों की पहचान करना और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत इकट्ठा करना है।  बताते चले कि पिछले साल चंडीगढ़ में भुल्लर के आवास पर तलाशी के दौरान सीबीआई ने 7.36 करोड़ रुपये से अधिक नकदी, 2.32 करोड़ रुपये से अधिक के आभूषण, 26 ब्रांडेड घड़ियां और परिवार के सदस्यों के नाम अचल संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए थे।  इन 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी ईडी की टीमें पीएमएलए की धारा 17 के तहत कुल 11 जगहों पर तलाशी अभियान चला रही हैं. ये अभियान 5 शहरों में चल रहे हैं।      चंडीगढ़ – 2 ठिकाने     लुधियाना जिला – 5 ठिकाने     पटियाला – 2 ठिकाने     नाभा – 1 ठिकाना     जालंधर – 1 ठिकाना जानकारी के अनुसार ये छापे आरोपी, उसके सहयोगियों और संदिग्ध बेनामी संपत्तियों से जुड़े लोगों के ठिकानों पर मारे जा रहे हैं. इस दौरान मनी ट्रेल और बेनामी संपत्तियों की जांच की जा रही है।  ईडी की कार्रवाई का ये है उद्देश्य     . अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) का पता लगाना     . भुल्लर से संबंधित बेनामी संपत्तियों की पहचान करना     . मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत जुटाना फिलहाल ईडी की तलाशी की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे की जांच की जा रही है।  सीबीआई ने क्‍यों क‍िया था गि‍रफ्तार  पंजाब पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक यानी DIG हरचरण सिंह भुल्लर को रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई ने पिछले साल गिरफ्तार किया था और वे तभी से जेल में बंद हैं. भुल्लर के साथ बिचौलिए कृष्ण शारदा को भी 8 लाख रुपये की रिश्वत के मामले में पकड़ा था. हाल ही में भुल्लर ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी।