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रेडियोलॉजी कोर्स में फर्जीवाड़ा पड़ा भारी, MGM को छात्र के ₹39.94 लाख लौटाने का आदेश

रांची झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने कहा है कि कोई मेडिकल कॉलेज किसी छात्र से ऐसे पीजी कोर्स का बांड नहीं भरवा सकता, जिसकी मान्यता ही नहीं है। अदालत ने कहा कि जब दाखिला ही गलत और भ्रामक आधार पर दिया गया हो, तो उससे जुड़ा बांड भी कानूनन प्रभावी नहीं रह जाता। अदालत ने महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमजीएम), जमशेदपुर को चिकित्सक से बांड और स्टाइपेंड के रूप में जमा 39,94,645 रुपये लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक परेशानी और करियर के महत्वपूर्ण दो वर्ष खराब होने के एवज में प्रार्थी छात्र को सात लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। एमजीएम ने बिना मान्यता तथा आवश्यक उपकरण के नामांकन ले लिया था। मामला वर्ष 2019-21 सत्र में डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियो डायग्नोसिस (डीएमआरडी-रेडियोलाजी) में दाखिले से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज , इलाहाबाद से एमबीबीएस किया था। उसने वर्ष 2019 में नीट-पीजी की परीक्षा पास की। काउंसिलिंग के बाद उसे एमजीएम मेडिकल कॉलेज , जमशेदपुर में डीएमआरडी-रेडियोलाजी की सीट मिली। उसने यह सीट स्वीकार कर ली और पहले से मिली सीट छोड़कर एमजीएम में दाखिला ले लिया। दाखिले के समय कॉलेज ने उससे एक बांड भरवाया था। इसके तहत पढ़ाई बीच में छोड़ने पर 30 लाख रुपये देने के साथ स्टाइपेंड की राशि लौटाने की शर्त थी। कॉलेज ने उसके मूल प्रमाणपत्र भी अपने पास रख लिया था। न कोर्स मान्य था, न रेडियोलाजी में पर्याप्त व्यवस्था याचिकाकर्ता के अनुसार, कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उसे पता चला कि रेडियोलाजी विभाग में पर्याप्त शिक्षक और मार्गदर्शन की व्यवस्था नहीं है। बाद में उसे यह भी जानकारी मिली कि जिस डीएमआरडी-रेडियोलाजी पाठ्यक्रम में उसका दाखिला हुआ है, उसे तत्कालीन मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ) की मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बाद उसने आइएनआइ-सीईटी परीक्षा दी और चयन होने पर एमजीएम कॉलेज से अपने मूल प्रमाणपत्र वापस मांगे, लेकिन कॉलेज ने दस्तावेज नहीं लौटाए। इस कारण वह चयन के बाद भी वहां दाखिला नहीं ले सका। बाद में उसने नीट-पीजी 2021 में फिर परीक्षा दी और आल इंडिया रैंक 270 हासिल कर संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ में दाखिला लिया। MRI तक नहीं था, सीटी स्कैन भी खराब अदालत ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि रेडियोलाजी में पीजी डिप्लोमा कोर्स चलाने वाले कॉलेज के पास MRI मशीन तक नहीं थी। वहीं, उपलब्ध सीटी स्कैन मशीन भी काम नहीं कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि पीजी कोर्स के लिए जरूरी उपकरणों और सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना दाखिला लेने वाले छात्रों के साथ धोखे के समान है। एमसीआइ की भूमिका पर भी उठाए सवाल हाई कोर्ट ने तत्कालीन मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में एमसीआइ ने कॉलेज के खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नियामक संस्था ने भविष्य के चिकित्सकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से आंखें मूंद लीं और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। अदालत ने काउंसिलिंग कराने वाली संस्था को भी जिम्मेदार माना। कोर्ट ने सवाल किया कि जब पाठ्यक्रम मान्यता प्राप्त नहीं था तो काउंसिलिंग में उस कॉलेज और पाठ्यक्रम की अनुशंसा कैसे की गई?

रांची में झमाझम बारिश से मौसम सुहाना, कई इलाकों में गरज-चमक का अलर्ट

 रांची झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को मौसम का मिजाज अचानक बदला नजर आया। दिनभर आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच कई इलाकों में बारिश हुई। रांची मौसम केंद्र की ओर से जारी दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार पिछले 24 घंटे में राजधानी में 60.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राज्य के प्रमुख शहरों में रांची में सबसे अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। बारिश के बावजूद राजधानी का तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। रांची में सोमवार को अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.3 डिग्री अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक है। पिछले 24 घंटे की तुलना में अधिकतम तापमान में 0.5 डिग्री की गिरावट हुई, जबकि न्यूनतम तापमान में 1.6 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 13 तक बारिश के आसार मौसम विभाग ने राज्य में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। Jharkhand Weather Forecast के अनुसार 13 सितंबर तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। इससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम खराब होने पर खुले स्थानों, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचना सुरक्षित रहेगा। बारिश ने राजधानी के मौसम को किया सुहाना रांची में हुई अच्छी बारिश के बाद मौसम में ठंडक महसूस की गई। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और बीच-बीच में बारिश होती रही। कई इलाकों में बारिश का असर सामान्य जनजीवन पर भी देखने को मिला। हालांकि बारिश के बाद तापमान में बड़ी गिरावट नहीं हुई और अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर ही रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले 24 घंटे में रांची में हुई बारिश राज्य के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे राजधानी में मानसून की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जमशेदपुर में 33.4 डिग्री तापमान राज्य के अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो जमशेदपुर में अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री रहा। यहां पिछले 24 घंटे में 1.4 मिलीमीटर बारिश हुई। डालटनगंज में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री, जबकि न्यूनतम 25.9 डिग्री सेल्सियस रहा। यहां 2.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बोकारो में अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री और न्यूनतम 25.1 डिग्री रहा। बोकारो में 10.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। चाईबासा का पोटो सबसे गर्म, तापमान 35.8 डिग्री राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान चाईबासा-पोटो में 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 5.4 डिग्री अधिक रहा। यहां न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि बारिश नहीं हुई। इससे स्पष्ट है कि एक ओर रांची में भारी बारिश हुई, वहीं पश्चिमी सिंहभूम के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर बना रहा। कई जिलों में हुई हल्की बारिश स्वचालित मौसम केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, बहारागोड़ा में 7 मिलीमीटर और सिमडेगा के बानो में एक मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं बोकारो, देवघर, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, पाकुड़, सरायकेला, दुमका और पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर में बारिश दर्ज नहीं हुई। राजधानी पर मौसम विभाग की नजर रांची में 60.6 मिलीमीटर बारिश और तापमान सामान्य से ऊपर रहने से राजधानी के मौसम में बदलाव साफ दिखाई दिया। आने वाले दिनों में भी बादल और बारिश का दौर बना रहने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए राजधानीवासियों को गरज-चमक के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषकर तेज बारिश और वज्रपात की स्थिति में खुले स्थानों पर जाने से बचना सुरक्षित रहेगा।

13 जिलों में सैलाब का तांडव, 29 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में; तस्वीरों में देखिए बिहार का हाल

 पटना बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार फैलता जा रहा है. राज्य के 13 जिलों में करीब 29 लाख 13 हजार से ज्यादा आबादी सैलाब के बीच घिरी हुई है. पानी ने कहीं गांवों का संपर्क पूरी तरह काट दिया है, तो कहीं सड़कें डूबने से आवाजाही ठप हो चुकी है. कई इलाकों में लोगों के घरों और आंगनों तक दरिया बह रहा है. प्रशासन एक तरफ सुरक्षित ठिकानों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ बीमार लोगों तक इलाज पहुंचाने की मशक्कत चल रही है।  यह विकराल संकट पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल तक फैला हुआ है. इन जिलों के 77 प्रखंडों (ब्लॉक) की 438 ग्राम पंचायतों में जिंदगी ठहर सी गई है. हालांकि प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा के धीमे पड़ने से कुछ इलाकों में जलस्तर घटने की हल्की उम्मीद भी जगी है।  पटना में गंगा का पानी घटा, कई नदियां अब भी उफान पर पटना में गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 50.40 मीटर पर आ गया है. इलाहाबाद से वाराणसी तक गंगा के जलस्तर में आई गिरावट से पटना में भी आगे राहत की उम्मीद है. हालांकि पुनपुन नदी अभी खतरे के निशान से 2.93 मीटर ऊपर बह रही है।  कटिहार में गंगा और कोसी के संगम पर बना दबाव 35 पंचायतों के करीब साढ़े तीन लाख लोगों को घेरे हुए है. खगड़िया के चौथम प्रखंड समेत दियारा इलाकों में बागमती का पानी नई मुसीबतें खड़ी कर रहा है. उधर गोपालगंज में गंडक बैराज से सवा लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में निगरानी कड़ी कर दी गई है।  भागलपुर में ढाई फीट पानी, मुंगेर में घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी भागलपुर में नेशनल हाईवे-80 पर करीब ढाई फीट पानी बह रहा है, जिसके चलते गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं. अकेले इस जिले में सवा दो लाख से ज्यादा लोग सैलाब से घिरे हैं. यही हाल मुंगेर के बरियारपुर का भी है, जहां गंगा खतरे के निशान से सवा मीटर ऊपर बहने से सैकड़ों घरों में दरिया समा चुका है. वहीं, सीवान के दरौली में भी सरयू नदी लाल निशान से आधा मीटर ऊपर बहकर निचले इलाकों को डुबो रही है।  पानी का यह दबाव भोजपुर के आरा तक पहुंच चुका है. बड़हरा इलाके में गंगा का फैलाव बढ़ते ही हालात बेकाबू हो गए, जहां धमार गांव में डूबने से 32 साल के एक युवक की जान चली गई. इसके अलावा, सारण में माही नदी का जमींदारी बांध टूटने से आफत और बढ़ गई है. तेज बहाव के साथ पानी सीधा रिहायशी बस्तियों की ओर रुख कर रहा है।  दूसरी तरफ शेखपुरा में भी सैलाब का असर साफ दिखने लगा है. यहां हरोहर नदी का पानी पांच पंचायतों में फैलने से घरों के अलावा स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र डूब चुके हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह बेपटरी हो गई है।  बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्कूल-पंचायत भवनों में इलाज पानी से घिरे लोगों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी व्यवस्था शुरू की है. प्रभावित इलाकों में स्कूलों और पंचायत भवनों में इलाज की सुविधा दी जा रही है. यहां डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती के साथ जरूरी दवाइयों का इंतजाम किया गया है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को मौके पर ही इलाज देने की कोशिश की जा रही है. इस दौरान प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है।  बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. ऐसे में प्रशासन की नजर जलस्तर पर बनी हुई है. लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है। 

बाढ़ प्रभावितों को मिलेगी राहत, फसल क्षति का होगा आकलन; मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख

पटना  बिहार में कई जिलों में बाढ़ से काफी तबाही हुई है। इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित लोगों को हर तरह की सहूलियत मुहैया कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, इलाज, पढ़ाई एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। आगे स्थिति सामान्य होने के बाद एक-एक घर की जांच कर बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा। साथ ही प्रभावित लोगों को हरसंभव राहत प्रदान की जाएगी। बाढ़ के कारण हुई फसल क्षति का आकलन कर प्रभावित किसानों को समुचित मुआवजा भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सोमवार को वैशाली एवं सारण जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। साथ ही हाजीपुर तथा सोनपुर में संचालित राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई का निरीक्षण भी किया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोगों को आपदा से निजात दिलाने की व्यवस्था और बाढ़ प्रभावित लोगों को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। शिविर में रह रहे लोगों से बात की मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों से बातचीत की और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। राहत शिविर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत की। वहीं, शैक्षणिक शिविर में भी बच्चों से उनकी पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों और खान-पान के बारे में जानकारी ली। स्वास्थ्य शिविर के निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि बीमार होने की स्थिति में बाढ़ पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पशुओं के लिए पर्याप्त दवा उपलब्ध रखने के भी निर्देश दिये। बाढ़ के पानी में डूबने से हुए मृत्यु के मामलों में मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए। लोगों ने व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान सामुदायिक रसोई की व्यवस्था देखी। हाजीपुर में बाढ़ पीड़ितों को अपने हाथों से भोजन परोसा। वहीं, सोनपुर में शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत कर भोजन एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। साथ ही बाढ़ पीड़ितों के साथ उन्होंने भोजन भी किया। लोगों ने शिविर में की गई व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया और कहा कि यहां खाने-पीने से लेकर रहने तक की बहुत अच्छी व्यवस्था की गई है। निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, विधायक जनक सिंह, संजय सिंह, सिद्धार्थ पटेल के अलावा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार आदि उपस्थित थे। अगले दो-तीन दिनों में बाढ़ से राहत मिलेगी मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के जलस्तर में लगभग 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। फरक्का बराज से अभी लगभग 15 लाख क्यूसेक पानी का लगातार डिस्चार्ज हो रहा है। अगले दो-तीन दिनों में स्थिति में और राहत मिलने की संभावना है। गंगा नदी के स्ट्रेच को एक सीमा में बांधने के संबंध में केंद्रीय जल आयोग से भी बातचीत की गई है, ताकि प्रत्येक वर्ष बाढ़ से उत्पन्न होने वाली समस्या से लोगों को स्थायी रूप से निजात दिलाई जा सके। मुख्यमंत्री ने अफसरों को कई निर्देश दिए ● बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर सहूलियत मुहैया कराई जाए ● फसल क्षति का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा ● बीमार होने की स्थिति में बाढ़ पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं ● मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए

रसोई गैस उपभोक्ताओं को बड़ी राहत! अब 25 दिन में बुक होगा दूसरा LPG सिलेंडर, खत्म हुआ 45 दिन का नियम

 पटना  गांव में रसोई गैस जल्दी खत्म हो जाए तो अगला सिलेंडर बुक कराने के लिए 45 दिन का इंतजार… यह परेशानी अब दूर होगी।ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी रिफिल बुकिंग का अंतर अब एक समान 25 दिन कर दिया गया है। यानी पिछली रिफिल की डिलीवरी के 25 दिन बाद ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता भी अगला सिलेंडर बुक करा सकेंगे। अब तक ग्रामीण वितरकों से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग का अंतर 45 दिन था। ऐसे में चार-पांच सदस्यों वाले परिवार में गैस जल्दी खत्म होने पर उपभोक्ताओं को बुकिंग की निर्धारित अवधि पूरी होने तक इंतजार करना पड़ता था। कई उपभोक्ताओं को इस दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था से ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। गांव में भी शहर जैसी सुविधा एलपीजी उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बुकिंग अंतर को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 25 दिन बाद रिफिल बुक कराने की सुविधा थी, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को 45 दिन इंतजार करना पड़ता था। अब दोनों के लिए 25 दिन का समान अंतराल होने से यह अंतर समाप्त हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की खपत परिवार के आकार और खाना पकाने की जरूरत पर निर्भर करती है, क्षेत्र पर नहीं। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी समान बुकिंग व्यवस्था होने से उन्हें समय पर रिफिल मिल सकेगा। पटना में घरेलू सिलेंडर 1031.50 रुपये पटना में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1031.50 रुपये है। सितंबर में घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 3034.50 रुपये बताई गई है। उपभोक्ताओं के लिए बदलाव एक नजर में व्यवस्था पहले अब ग्रामीण क्षेत्र में रिफिल बुकिंग 45 दिन 25 दिन शहरी क्षेत्र में रिफिल बुकिंग 25 दिन 25 दिन पटना में घरेलू सिलेंडर 14.2 किलो 1031.50 कमर्शियल सिलेंडर 19 किलो 3034.50

टाटा पिगमेंट्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सितंबर से बढ़ी सैलरी और नवंबर में मिलेगा 28 महीने का एरियर

जमशेदपुर  टाटा स्टील की अनुषंगी इकाई, 'टाटा पिगमेंट्स' में प्रबंधन और यूनियन नेतृत्व के बीच सात वर्षों (1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2031) के नए वेतन समझौते पर अंतिम मुहर लग गई है। कंपनी परिसर स्थित इंद्रधनुष भवन में आयोजित बैठक के दौरान 28 महीनों से लंबित चल रहे वेतन संशोधन पर निर्णायक सहमति बनी। इस नए समझौते का सीधा लाभ कंपनी के 95 कर्मचारियों को मिलेगा, जिससे उनके मासिक वेतन में न्यूनतम ₹8,600 से लेकर अधिकतम ₹15,000 तक का इजाफा होगा। सितंबर से मिलेगा बढ़ा बेसिक, नवंबर में एरियर कर्मचारियों को नए बेसिक का मौद्रिक लाभ सितंबर माह के वेतन से ही मिलना शुरू हो जाएगा, जबकि पिछले 28 महीनों (अप्रैल 2024 से अगस्त 2026) के लंबित एरियर का भुगतान प्रबंधन द्वारा नवंबर माह में सीधे उनके बैंक खातों में कर दिया जाएगा। पिगमेंट्स यूनियन नेतृत्व के अनुसार, कंपनी के इतिहास में पहली बार औसत रेट ऑफ इंक्रीमेंट (ग्रेड स्ट्रक्चर) में रिकॉर्ड 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। PLR स्कीम लॉन्च और NPS कैश भत्ता की सौगात   समझौते के तहत कर्मचारियों के प्रदर्शन, उत्पाद की गुणवत्ता और सेफ्टी रिकॉर्ड को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से परफॉर्मेंस लिंक्ड रिवार्ड (PLR) स्कीम लॉन्च की गई है। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को ₹550 का लाभ मिलेगा, जिसकी राशि में अप्रैल 2027 में और वृद्धि की जाएगी। इसके अलावा, कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा देने हेतु नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत ₹500 का कैश भत्ता भी प्रदान किया जाएगा। समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले प्रतिनिधि प्रबंधन पक्ष: प्रबंध निदेशक सरोज कुमार बनर्जी, मुख्य कारखाना प्रबंधक मानित कुमार, प्लांट हेड केएम महाराज, सीएफओ दिनेश अग्रवाल, सीएचआरओ अंकिता केविन नटाल, हेड एचआर अतुल कुमार शर्मा, चीफ ऑफ मार्केटिंग एंड सेल्स विजेन पटनायक, हरेंद्र कुमार राय व एचआर ऑफिसर विवेक कुमार।   यूनियन पक्ष: अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, उपाध्यक्ष कुलबीर सिंह व सत्यनारायण राव, सह सचिव कमलेश कुमार शर्मा व अनिल प्रसाद, कोषाध्यक्ष भुनेश्वर राम तथा पायो।

रसोई गैस को लेकर बड़ी राहत, ग्रामीण-शहरी उपभोक्ताओं के लिए LPG रिफिल बुकिंग अंतर हुआ समान

 पटना  गांव में रसोई गैस जल्दी खत्म हो जाए तो अगला सिलेंडर बुक कराने के लिए 45 दिन का इंतजार… यह परेशानी अब दूर होगी। ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी रिफिल बुकिंग का अंतर अब एक समान 25 दिन कर दिया गया है। यानी पिछली रिफिल की डिलीवरी के 25 दिन बाद ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता भी अगला सिलेंडर बुक करा सकेंगे। अब तक ग्रामीण वितरकों से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग का अंतर 45 दिन था। ऐसे में चार-पांच सदस्यों वाले परिवार में गैस जल्दी खत्म होने पर उपभोक्ताओं को बुकिंग की निर्धारित अवधि पूरी होने तक इंतजार करना पड़ता था। कई उपभोक्ताओं को इस दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था से ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है गांव में भी शहर जैसी सुविधा एलपीजी उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बुकिंग अंतर को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 25 दिन बाद रिफिल बुक कराने की सुविधा थी, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को 45 दिन इंतजार करना पड़ता था। अब दोनों के लिए 25 दिन का समान अंतराल होने से यह अंतर समाप्त हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की खपत परिवार के आकार और खाना पकाने की जरूरत पर निर्भर करती है, क्षेत्र पर नहीं। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी समान बुकिंग व्यवस्था होने से उन्हें समय पर रिफिल मिल सकेगा। पटना में घरेलू सिलेंडर 1031.50 रुपये पटना में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1031.50 रुपये है। सितंबर में घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 3034.50 रुपये बताई गई है। उपभोक्ताओं के लिए बदलाव एक नजर में व्यवस्था पहले अब ग्रामीण क्षेत्र में रिफिल बुकिंग 45 दिन 25 दिन शहरी क्षेत्र में रिफिल बुकिंग 25 दिन 25 दिन पटना में घरेलू सिलेंडर 14.2 किलो 1031.50 कमर्शियल सिलेंडर 19 किलो 3034.50

झरिया विस्थापितों को बड़ी राहत, बेलगड़िया में कमांड सेंटर से तुरंत सुलझेंगी समस्याएं

 धनबाद झरिया के अग्नि प्रभावित विस्थापितों के लिए बसाई गई झरिया विहार बेलगड़िया टाउनशिप की पूरी व्यवस्था अब एक जगह से मानिटर की जा सकेगी। झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार (जेआरडीए) की ओर से बेलगड़िया में इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर विकसित किया जा रहा है। इस सेंटर के माध्यम से टाउनशिप के अलग-अलग फेज में रहने वाले विस्थापित परिवारों से जुड़ी सुविधाओं और समस्याओं की निगरानी की जाएगी। प्रशासन और जेआरडीए की कोशिश है कि विस्थापितों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए झरिया या धनबाद के दूसरे कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े। इसको ध्यान में रखते हुए ही जेआरडीए के नए प्रशासनिक भवन के साथ-साथ यहां नया पुलिस आउटपोस्ट (टीओपी) भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि शिकायतों का तुरंत निपटारा हो सके। जिला प्रशासन के निर्देश पर जेआरडीए का पूरा कार्यालय इसी महीने के अंत तक बेलगड़िया में शिफ्ट हो जाएगा। इसके लिए बेलगड़िया में तीन प्रशासनिक ब्लाक तैयार किए गए हैं। करीब 50 प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी तथा कार्यालय पहले ही यहां शिफ्ट हो चुके हैं। शेष कार्यालयों को भी महीने के अंत तक स्थानांतरित करने की तैयारी है। अभी कार्यालय हीरापुर में चल रहा है। एक कमांड सेंटर से कई सुविधाओं पर नजर उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर बेलगड़िया टाउनशिप के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां से टाउनशिप के अलग-अलग फेज में पानी, बिजली, सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। किसी इलाके में समस्या सामने आने पर संबंधित विभाग को तत्काल इसकी जानकारी देकर समाधान की प्रक्रिया शुरू कराई जा सकेगी। कमांड सेंटर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विस्थापितों की समस्याओं को अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के साथ देखा जा सकेगा। शिकायतों की निगरानी, उनके निष्पादन की स्थिति और लंबित मामलों पर भी नजर रखी जा सकेगी। इससे अधिकारियों को टाउनशिप की वास्तविक स्थिति की जानकारी एक ही स्थान से मिल सकेगी और शिकायतों के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है। बीसीसीएल समेत तीन संस्थानों को मिलेगा कार्यालय बेलगड़िया के प्रशासनिक ब्लाक में जेआरडीए के अलावा बीसीसीएल, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) और वस्त्र मंत्रालय को भी कार्यालय के लिए जगह उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विस्थापितों को पुनर्वास से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों तक स्थानीय स्तर पर पहुंच मिल सकेगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि पुनर्वास क्षेत्र में ही आवश्यक सरकारी सेवाओं को उपलब्ध कराया जाए। शिकायत निवारण केंद्र भी सक्रिय बेलगड़िया में विस्थापितों के लिए शिकायत निवारण केंद्र भी चालू है। यहां लोग सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक कार्य अवधि में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आफलाइन के साथ आनलाइन शिकायत की सुविधा भी उपलब्ध है। विस्थापित और पीड़ित परिजन jrdadhanbad.in के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराने के साथ उसकी स्थिति भी मॉनिटर कर सकते हैं। आनलाइन शिकायत की सुविधा पिछले वर्ष 25 नवंबर से शुरू की गई थी। अब तक 3500 परिवार पहुंचे बेलगड़िया बेलगड़िया में अब तक करीब 3500 परिवारों को शिफ्ट किया जा चुका है। वर्ष 2008 से 2025 तक करीब 2800 परिवार यहां पुनर्वासित किए गए, जबकि संशोधित झरिया मास्टर प्लान आने के बाद जिला प्रशासन की पहल पर करीब 800 परिवारों को बेलगड़िया में शिफ्ट कराया गया है। जेआरडीए के अनुसार अभी कुल 13,872 परिवारों को यहां पुनर्वासित किया जाना है। इसके लिए प्रक्रिया जारी है। प्रशासन की कोशिश है कि पुनर्वास के साथ-साथ विस्थापितों को उनके नए आवासीय क्षेत्र में ही बेहतर नागरिक सुविधाएं और त्वरित शिकायत निवारण की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर बनने से विस्थापितों को अपने काम के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। – आदित्य रंजन, उपायुक्त, धनबाद।

पटना के 3 इलाकों का होगा कायाकल्प, हरियाली के साथ वेंडिंग जोन और बेहतर पब्लिक स्पेस की तैयारी

पटना राजधानी में खाली और कम उपयोग हो रहे स्थानों को अब हरित और मनोरंजक सार्वजनिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए तीन प्रमुख स्थानों पर अर्बन ग्रीन एंड रिक्रिएशनल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का प्रस्ताव नगर निगम की ओर से तैयार किया गया है। इसमें पटेल गोलंबर से एयरपोर्ट होते हुए शेखपुरा मोड़ तक का मार्ग, गांधी मैदान व उसकी बाहरी परिधि और मीठापुर से करबिगहिया के बीच फ्लाईओवर के नीचे का क्षेत्र शामिल है। प्रस्तावित योजना में हरियाली बढ़ाने के साथ पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए सुविधाएं विकसित करने तथा छोटे दुकानदारों के लिए व्यवस्थित वेंडिंग जोन बनाने की परिकल्पना की गई है। अर्बन ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होने से तीनों क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के साथ पैदल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। साइकिल ट्रैक से साइकिल चलाने वालों को सुरक्षित जगह मिल सकेगी। वहीं, व्यवस्थित वेंडिंग जोन बनने से छोटे दुकानदारों को तय स्थान मिलेगा और सड़क किनारे अव्यवस्थित दुकानें लगाने की समस्या कम हो सकती है पौधारोपण, लैंडस्केपिंग, बैठने की जगह और बेहतर रोशनी से इन क्षेत्रों की सुंदरता बढ़ने के साथ लोगों को अधिक सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक वातावरण उपलब्ध होगा। नगर निगम जल्द ही इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारने की दिशा में काम कर रहा है। पटेल गोलंबर-शेखपुरा मोड़ मार्ग होगा हरित पहले स्थल के रूप में पटेल गोलंबर से एयरपोर्ट होते हुए शेखपुरा मोड़ तक के मार्ग को विकसित करने का प्रस्ताव है। सड़क के किनारे व्यवस्थित फुटपाथ और साइकिल ट्रैक बनाए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही सड़क के आसपास और डिवाइडर क्षेत्र में पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाई जाएगी। पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए फुटपाथ पर टैक्टाइल पथ प्रस्तावित है। इससे दृष्टिबाधित लोगों को भी आवाजाही में सुविधा होगी। सड़क किनारे आकर्षक लाइटें, पौधों की कतार और गमलों से क्षेत्र को बेहतर रूप देने की योजना है। इसके अलावा दीवारों पर बिहार की कला और संस्कृति से जुड़े चित्रों के माध्यम से इस मार्ग को आकर्षक बनाया जाएगा। एयरपोर्ट से शहर में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्ग को हरित और व्यवस्थित स्वरूप दिया जाएगा। गांधी मैदान के चारों ओर विकसित होगा सार्वजनिक क्षेत्र दूसरे स्थल के रूप में गांधी मैदान की बाहरी परिधि को विकसित करने की योजना है। इसके गेट क्षेत्र समेत मैदान के आसपास के हिस्से को बेहतर सार्वजनिक स्थान के रूप में तैयार किया जागा। यहां चौड़े फुटपाथ, हरियाली, बैठने की जगह, स्ट्रीट लाइट और व्यवस्थित वेंडिंग कियोस्क प्रस्तावित हैं। चाय-नाश्ता, फल और अन्य सामान बेचने वाली दुकानों के लिए एक समान डिजाइन वाले कियोस्क लगाए जाएंगे। इससे दुकानदारों को निर्धारित स्थान मिलेगा और सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से दुकानें लगाने की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। गांधी मैदान के गेट क्षेत्र में ऑटो के लिए व्यवस्थित स्थान का भी प्रस्ताव है। कूड़ा प्रबंधन के लिए अलग-अलग डस्टबिन लगाए जाएंगे। लोगों के बैठने के लिए बेंच, पौधों से सजे लैंडस्केप क्षेत्र और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था से मैदान के आसपास का क्षेत्र अधिक सुविधाजनक बनेगा। गांधी मैदान की आंतरिक परिधि में भी बढ़ेगी हरियाली गांधी मैदान की आंतरिक परिधि को बेहतर बनाने के लिए भी योजना बनाई है। इसमें पैदल पथ को व्यवस्थित करने, हरियाली बढ़ाने और लोगों के बैठने के लिए स्थान विकसित करने की तैयारी है। कुछ हिस्सों में अलग साइकिल ट्रैक भी प्रस्तावित है। मैदान के किनारे खुले स्थानों को केवल आने-जाने के रास्ते के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें टहलने, बैठने और साइकिल चलाने के अनुकूल बनाया जाएगा। इससे गांधी मैदान के आसपास का क्षेत्र अधिक उपयोगी और सुविधाजनक सार्वजनिक स्थान बन सकेगा। मीठापुर-करबिगहिया फ्लाईओवर के नीचे बदलेगा नजारा तीसरे स्थल के रूप में मीठापुर से करबिगहिया के बीच फ्लाईओवर के नीचे की जगह को विकसित करने का प्रस्ताव है। फ्लाईओवर के पिलरों के बीच उपलब्ध स्थान में हरियाली, पैदल पथ और बैठने की सुविधा विकसित करने की तैयारी है। इसके साथ आकर्षक प्रकाश व्यवस्था भी प्रस्तावित है। यहां पौधों से सजे छोटे लैंडस्केप क्षेत्र बनाने की योजना है। पैदल यात्रियों के लिए टैक्टाइल पथ और कचरा डालने के लिए अलग-अलग डस्टबिन भी प्रस्तावित स्वरूप में शामिल हैं। इससे फ्लाईओवर के नीचे के स्थान को अधिक साफ-सुथरा और उपयोगी सार्वजनिक क्षेत्र बनाया जाएगा। ये जगह होंगे विकसित     पटेल गोलंबर से एयरपोर्ट-शेखपुरा मोड़     गांधी मैदान व उसकी बाहरी परिधि     मीठापुर-करबिगहिया फ्लाईओवर के नीचे  

रांची की हवा सुधारने की कोशिशों को झटका, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 27वीं रैंक

रांची  National Clean Air Survey-2026 केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में झारखंड की राजधानी रांची 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में 27वें स्थान पर रही। रांची का स्कोर 162.5 रहा। वहीं रांची से बहुत बेहतर प्रदर्शन धनबाद का रहा। धनबाद 17वें स्थान पर रहकर 174.5 अंक के साथ रांची से आगे रहा। झारखंड की औद्योगिक नगरी जमशेदपुर को 37वां स्थान मिला, जिसका स्कोर 147.3 रहा। सर्वेक्षण में शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के प्रयास, उनकी प्रभावशीलता और परिणामों का आकलन किया गया। रांची नगर निगम के वार्ड 26, 29 और 15 को सबसे स्वच्छ वार्डों में शामिल किया गया। सर्वेक्षण में सीपीसीबी की भी भूमिका रही। 48 शहरों की श्रेणी में 27वीं रैंक इस बार 10 लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों को एक श्रेणी में शामिल किया गया है। रैंकिंग तय करने में तालिका में दिए गए क्रमांक के बजाय अलग से दर्ज ‘रैंक’ को आधार बनाया गया है। इसी आधार पर रांची की रैंक 27 है। उसका अंतिम प्राप्तांक 162.5 दर्ज किया गया है। रांची से आगे रहने वाले पटना को 178 अंक मिले हैं और वह 16वें स्थान पर है। धनबाद को 174.5 अंक मिले और वह 18वें स्थान पर रहा। दोनों शहरों के प्राप्तांक रांची के मुकाबले अधिक हैं। लखनऊ शीर्ष पर, मदुरै 39वें स्थान पर सर्वेक्षण की सूची में लखनऊ 198 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा। इंदौर 197 अंक के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भोपाल और आगरा दोनों को 192-192 अंक मिले और दोनों चौथे स्थान पर रहे। सूची के निचले हिस्से में मदुरै 39वें स्थान पर है। उसका अंतिम प्राप्तांक 132.1 रहा। हालांकि सूची में 48 शहर शामिल हैं, उपलब्ध तालिका के ‘रैंक’ खाने में मदुरै के लिए 39 दर्ज है। इसलिए उसे 48वें स्थान पर बताना सही नहीं होगा। उपलब्ध रैंक और प्राप्तांक के आधार पर मदुरै की स्थिति 39वें स्थान की ही मानी गई है। शहर की रैंकिंग के बीच वार्डों से राहत पूरे शहर की रैंकिंग में रांची भले ही पीछे रही हो, लेकिन वार्ड स्तर पर शहर के दो हिस्सों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग में 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी में रांची नगर निगम का वार्ड-29 शामिल हुआ है। वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में वार्ड-26 ने जगह बनाई है। वार्ड स्तर पर इन दोनों की मौजूदगी रांची के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे यह भी पता चलता है कि शहर के कुछ हिस्सों में स्वच्छ वायु और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है। हालांकि पूरे शहर की रैंकिंग 27वें स्थान पर रहना यह सवाल भी खड़ा करता है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले वार्डों में अपनाए जा रहे उपायों को नगर निगम के दूसरे क्षेत्रों में कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।