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झारखंड विधानसभा में ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति पर घमासान

रांची. डुमरी विधायक जयराम महतो ने गुरुवार को झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ओबीसी छात्रों को अब तक छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने का गंभीर मामला सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति में हो रही देरी से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। जयराम महतो ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि आखिर कब तक छात्रों को उनकी छात्रवृत्ति की राशि मिलेगी? उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय विषय नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। मंत्री का जवाब: केंद्र से राशि नहीं मिली जवाब में कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि केंद्र सरकार से केंद्रांश की राशि प्राप्त नहीं होने के कारण राज्यांश की राशि भी जारी नहीं की जा सकी है। उन्होंने बताया कि वित्त विभाग के एक संकल्प के अनुसार जब तक केंद्रांश की राशि प्राप्त नहीं होती, तब तक राज्यांश की निकासी संभव नहीं है। मंत्री ने स्वीकार किया कि इसी प्रक्रिया संबंधी बाध्यता के कारण छात्रवृत्ति भुगतान में विलंब हुआ है। राज्य सरकार कर रही वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार मंत्री चमरा लिंडा ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है। वित्त विभाग के उस संकल्प को शिथिल करने पर मंथन चल रहा है, जिसमें केंद्रांश की राशि मिलने से पहले राज्यांश जारी करने पर रोक है। यदि इस संकल्प में ढील दी जाती है, तो राज्यांश की राशि जारी कर छात्रों को जल्द राहत दी जा सकेगी। ब्याज रहित ऋण का सुझाव, मंत्री ने किया असंभव बहस के दौरान जयराम महतो ने सुझाव दिया कि जब तक छात्रवृत्ति की राशि जारी नहीं होती, तब तक छात्रों को ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जाए या विधायक निधि से अस्थायी सहायता दी जाए, ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो। इस पर मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने दोहराया कि व्यावहारिक समाधान वित्त विभाग के संकल्प में शिथिलता लाने में ही है। छात्रों की निगाह सरकार के फैसले पर ओबीसी छात्रवृत्ति का मामला राज्यभर के हजारों विद्यार्थियों से जुड़ा है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि सरकार वित्तीय नियमों में कब और कैसे बदलाव करती है, ताकि लंबित छात्रवृत्ति राशि का भुगतान सुनिश्चित हो सके।

राष्ट्रपति ने जमशेदपुर में जगन्नाथ आध्यात्मिक केंद्र की रखी नींव

रांची. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को झारखंड के जमशेदपुर स्थित कदमा इलाके में 'श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चैरिटेबल सेंटर' की नींव रखी। राष्ट्रपति ने पुजारियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि भूमि पूजन किया और इसकी आधारशिला रखी। दिग्गज हस्तियां भी रहीं मौजूद इस मौके पर राष्ट्रपति के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे। इनके अलावा टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। इससे पहले, रांची एयरपोर्ट पहुंचने पर मुख्यमंत्री सोरेन और राज्यपाल गंगवार ने राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया। क्या है परियोजना की खासियत? श्री जगन्नाथ स्पिरिचुअल एंड कल्चरल चैरिटेबल सेंटर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी और उद्योगपति एस.के. बेहरा ने बताया कि यह प्रस्तावित केंद्र ओडिशा के पुरी में स्थित 12वीं सदी के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर की हूबहू नकल (कॉपी) होगा। इसे खरखाई नदी के किनारे लगभग 2.5 एकड़ जमीन पर बनाया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपये है। युवाओं के विकास पर जोर इस केंद्र के निर्माण से झारखंड में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य इस केंद्र को युवाओं के चरित्र निर्माण और नैतिक विकास के एक बड़े हब के रूप में विकसित करना है। एस.के. बेहरा के अनुसार, यह केंद्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं के समग्र व्यक्तित्व विकास (होलिस्टिक पर्सनैलिटी डेवलपमेंट) को बढ़ावा देने का काम करेगा। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए है। इस आध्यात्मिक केंद्र के बनने से जमशेदपुर की सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।

बिहार में काशी-अयोध्या की तर्ज पर बनेगा शिव सर्किट

मुजफ्फरपुर. बिहार की धरती अब सिर्फ ज्ञान, अध्यात्म और विरासत की पहचान भर नहीं रहेगी, बल्कि भगवान शिव के भक्तों के लिए एक भव्य आस्था गलियारे के रूप में भी विकसित होने जा रही है. राज्य सरकार ने बिहार में ‘बुद्ध सर्किट’ और ‘रामायण सर्किट’ के बाद अब ‘शिव सर्किट’ विकसित करने का मास्टरप्लान तैयार कर लिया है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. विधानसभा में पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते हुए बताया कि राज्य के प्रमुख शिव मंदिरों को बेहतर सड़क और सुविधाओं से जोड़ा जाएगा. इस योजना के तहत बाबा गरीबनाथ मंदिर से लेकर अजगैबीनाथ मंदिर तक की दूरी न सिर्फ आसान होगी, बल्कि श्रद्धालुओं की यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और सुविधाजनक बन जाएगी. विधायकों से मांगी जाएगी मंदिरों की सूची राज्य सरकार इस योजना को पूरी तरह समावेशी और व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रही है. पथ निर्माण मंत्री ने विधायकों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के उन मंदिरों की जानकारी उपलब्ध कराएं, जहां सावन समेत पूरे वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. इन सुझावों के आधार पर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे बजट और सहयोग के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. सरकार की मंशा ‘शिव सर्किट’ को पहले से विकसित धार्मिक पर्यटन मार्गों की तर्ज पर मजबूत आधार देना है. यदि यह पहल सफल होती है तो राज्य के प्रमुख शिव धामों तक श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा और धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना है. कई प्रसिद्ध शिव धाम हो सकते हैं शामिल विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान विधायकों ने कई प्रमुख शिव मंदिरों को प्रस्तावित सर्किट में शामिल करने की मांग उठाई. इनमें मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर, मधुबनी का उगना महादेव मंदिर, सोनपुर का हरिहरनाथ मंदिर, गुरुआ का बैजूधाम सहित कई प्रसिद्ध शिवालयों का नाम सामने आया. इसके साथ ही पूर्वी चंपारण का सोमेश्वरनाथ मंदिर, लखीसराय का अशोक धाम और मधेपुरा स्थित सिंघेश्वर महादेव मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को भी इस योजना में जोड़ने की बात कही गई. चर्चा के दौरान कांवर यात्रा मार्गों को बेहतर बनाने और नए कांवर पथ विकसित करने की मांग भी उठी, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बन सके. पर्यटन विभाग का मानना है कि यदि सर्किट आकार लेता है तो बिहार में सालभर धार्मिक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और परिवहन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा. बेहतर सड़क संपर्क, आधुनिक सुविधाएं और सुनियोजित प्रचार-प्रसार के जरिए राज्य के प्राचीन शिव धाम राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित हो सकते हैं.

मुजफ्फरपुर में अपराध रोकने कई थानों के थानाध्यक्ष बदले

मुजफ्फरपुर. अपराध नियंत्रण व विधि व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने थानाध्यक्ष समेत 11 पुलिस पदाधिकारियों का तबादला किया है। इसके तहत मनियारी, औराई, गायघाट समेत छह थानों में नए थानाध्यक्षों की तैनाती की गई है। पूर्व से जमे कई थानाध्यक्षों को क्राइम कंट्रोल में विफलता के लिए हटाया गया है। एसएसपी कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञिप्ति में बताया गया कि कार्यकुशलता, लोकहित एवं रिक्ति के आधार पर इन पुलिस पदाधिकारियों को पुलिस उपमहानिरीक्षक तिरहुत क्षेत्र के अनुमोदन उपरांत पदस्थापित किया गया है। जारी सूची के अनुसार अहियापुर के अपर थानाध्यक्ष दारोगा जितेंद्र महतो को मनियारी थानाध्यक्ष बनाया गया है। औराई थानाध्यक्ष राजा सिंह को गायघाट थानाध्यक्ष। औराई थाना में अनुसंधान इकाई में तैनात दारोगा हेमलता कुमारी को औराई थानाध्यक्ष। काजीमोहम्मदपुर थाना के अनुसंधान इकाई से दारोगा शिवचन्द्र यादव को बरियारपुर थानाध्यक्ष, अनुसंधान इकाई कांटी थाना से दारोगा यशवंत कुमार मिश्रा को बोचहां थानाध्यक्ष, अनुसंधान इकाई मोतीपुर थाना से दारोगा अमिता सिंह को महिला थानाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा मनियारी थानाध्यक्ष जय प्रकाश गुप्ता को वहां से बदलकर अनुसंधान इकाई साइबर थाना में तैनात किया गया है। बोचहां थानाध्यक्ष श्रीकांत चौरसिया को अनुसंधान इकाई सदर थाना में तैनात किया गया है। बरियारपुर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार को अनुसंधान इकाई अहियापुर थाना, महिला थानाध्यक्ष सबिता कुमारी को प्रभारी एएचटीयू कोषांग एसएसपी कार्यालय और गायघाट थानाध्यक्ष सरूण कुमार मंडल को अनुसंधान इकाई अहियापुर थाना में तबादला किया गया हैं। 

बैलगाड़ी से निकली बारात ने देसी थीम वाली शादी की ताजा की यादें

समस्तीपुर. शहर की सड़कों पर बुधवार की शाम कुछ अलग ही था। न डीजे की कानफोड़ू आवाज, न रोशनी की चकाचौंध, न लग्जरी गाड़ियों की कतार। अगर कुछ था तो बैलों की सधी हुई चाल, लकड़ी की बैलगाड़ियों की मद्धिम चरमराहट और लोकगीतों की कोमल तान। यह नजारा देख हर राहगीर ठिठक गया, मोबाइल कैमरे निकल आए और एक ही सवाल गूंजने लगा, अब भला बैलगाड़ी से भी कोई बरात जाता है?  आलोक की अनूठी शादी यह अनोखी और पूरी तरह देसी थीम वाली बरात शहर के जाने-माने कारोबारी प्रदीप सेठ के पुत्र आलोक की शादी की थी। गोला रोड स्थित होटल से जब शाम ढलते ही बरात निकली, तो मानो समय कुछ पल के लिए पीछे लौट गया। दूल्हा रथ पर सवार था। सिर पर सेहरा, चेहरे पर सादगी भरी मुस्कान और मन में परंपरा को जीने का संकल्प। उसके पीछे-पीछे 22 सजी-धजी बैलगाड़ियों का कारवां धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।  बैलगाड़ी की शाही सवारी  इन बैलगाड़ियों पर बैठे बाराती किसी शाही सवारी का आनंद ले रहे थे। कहीं सोफा सेट लगे थे, तो कहीं गद्दों पर बैठकर लोग लोकधुनों के साथ झूम रहे थे। करीब दो किलोमीटर का यह सफर तय कर जब बरात मथुरापुर स्थित गजराज पैलेस पहुंची, तब तक यह केवल एक विवाह जुलूस नहीं रह गई थी, बल्कि चर्चा का विषय बन चुकी थी। इस बारात की खास बात यह थी कि यह पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त थी। न धुएं का गुबार, न शोर-शराबा। सिर्फ उल्लास, अपनापन और प्रकृति के साथ सामंजस्य। बैलगाड़ी के पहियों की आवाज, फूलों की खुशबू और लोकगीतों की तान ने ऐसा दृश्य रचा, जैसे गांव की आत्मा खुद इस विवाह की साक्षी बन गई हो। पर्यावरण संरक्षण का संदेश कार्यक्रम संयोजक और पशुप्रेमी महेंद्र प्रधान बताते हैं कि इस देसी और पर्यावरण-संवेदनशील आयोजन के लिए आसपास के गांवों से 35 जोड़ी बैलगाड़ियों को बुलाया गया था। सभी को पारंपरिक अंदाज में सजाया गया। कुछ खास मेहमानों के लिए बैलगाड़ियों पर सोफा लगाए गए, जबकि बाकी में गद्दों की व्यवस्था की गई थी। जब यह अनोखी बरात सड़क पर निकली, तो देखने वालों के चेहरे पर हैरानी और मुस्कान एक साथ थी। किसी ने कहा,“यह तो असली शादी है”, तो किसी ने इसे परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर मेल बताया। शोर और दिखावे के इस दौर में यह देसी थीम वाली शादी यह संदेश दे गई कि सादगी, संस्कृति और पर्यावरण के साथ भी उत्सव उतना ही भव्य हो सकता है। वहीं दूल्हा आलोक ने कहा कि कुछ अलग करने की चाहत थी, लेकिन उसका यह स्वरूप होगा, सोचा नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन को दी राहत, ED की खिंचाई, CJI ने दी अहम नसीहत

रांची  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज शिकायत वाद पर रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा लिए गए संज्ञान को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने रांची की MP-MLA कोर्ट की विशेष अदालत में चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही ED को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद फिलहाल निचली अदालत में आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी, जिससे मुख्यमंत्री को अस्थायी राहत मिल गई है। सीजेआई की अगुवाई वाली खंडपीठ में हुई सुनवाई मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई, जिसमें जस्टिस जॉयमंगल बागची भी शामिल थे। मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम द्वारा संज्ञान लिये जाने और उसके बाद MP-MLA कोर्ट में कार्यवाही शुरू होने की प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं है। बहस के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप करते हुए विशेष अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने ED को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने MP-MLA कोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत को मुख्यमंत्री के लिए बड़ी कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है। ED के जवाब के बाद ही मामले में अगली सुनवाई की दिशा तय होगी। फिलहाल, MP-MLA कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर रोक से राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।  

प्रशांत किशोर का समस्तीपुर दौरा: नव निर्माण के संकल्प के साथ कार्य की शुरुआत

समस्तीपुर समस्तीपुर में जन सुराज के संस्थापक और रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहुंचे। वे बिहार नवनिर्माण अभियान के तहत जिले के रोसड़ा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठनात्मक मजबूती और आने वाली रणनीति पर चर्चा की। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जन सुराज का यह अभियान केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सही मायनों में जनता की आवाज बनना है। उन्होंने कहा कि वे साथियों से संवाद करने, उनकी राय सुनने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए यहां आए हैं। शराबबंदी कानून पर किया तंज प्रशांत किशोर ने शराबबंदी कानून पर तंज कसते हुए कहा कि यदि शराबबंदी कानून से महिलाओं को इतना ही फायदा हो रहा है, तो इसे पूरे देश में लागू क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ बिहार के लोगों को ही इसका तथाकथित फायदा क्यों मिल रहा है। एनडीए सरकार को बिहार के साथ ही पूरे देश में इसे लागू करना चाहिए, ताकि सभी लोगों को इसका लाभ मिल सके। जन सुराज के साथियों ने गांधी आश्रम, चंपारण से जो बिहार को बदलने का संकल्प लिया था, चुनाव परिणाम आने के बाद भी जन सुराज के साथी पीछे हटने वाले नहीं हैं। वे एक बार पुनः बिहार के नव निर्माण को लेकर कार्य शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले जन सुराज के साथियों को फिर से संगठित किया जाए और उन्हें पुनः प्रेरित किया जाए। इसके लिए प्रत्येक जिले में जाकर लोगों से मुलाकात की जा रही है। उनसे यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि किन कारणों से वे पिछड़ गए और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है। जन सुराज किन मुद्दों को लेकर आगे बढ़े, इस पर भी विचार किया जा रहा है। मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार मुन्ना, जेपी सिंह, ललन यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय सिंह, विश्वनाथ चौधरी, सुरेंद्र गुप्ता, इंदु गुप्ता, रोहित पासवान, अभिषेक आनंद सहित अन्य मौजूद थे।

गुजराती सहकारी मॉडल से बिहार में होगी जैविक खेती और ग्रामीण विकास

पटना. सहकारिता विभाग द्वारा गुजरात में सफल सहकारी समितियों के माडल को लागू कराने की तैयारी हो रही है। इसके लिए विभागीय स्तर से सहकारी समितियों के 50-50 लोगों की टीम गुजरात के दौरे पर भेजी जाएगी। ये टीमें गुजरात में कार्यरत सहकारी समितियों के कार्यों का अवलोकन और अध्ययन करेंगी। बिहार में 28 हजार सहकारी समितियां हैं जिनके अध्यक्षों व सचिवों के अलावा सदस्यों की अलग-अलग टीम बनाकर गुजरात भेजी जाएगी। वहां से लौटने के बाद संबंधित सहकारी समितियों को गुजरात में कार्यरत समितियों की तरह कार्य करने हेतु प्रेरित किया जाएगा। हाल में गुजरात में कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर लौटे सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि गुजरात में सामूहिक जैविक खेती जैसे नवाचार सफल माडल साबित हुआ है। गुजरात में सहकारी समितियां किसानों को सीधे जोड़कर, उन्हें जैविक खेती का प्रशिक्षण, प्रमाणित जैविक इनपुट (बीज, खाद) और उत्पाद की अच्छी मार्केटिंग सुनिश्चित करके जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं। भारत ऑर्गेनिक जैसी संस्थाएं और डेयरी, गोबर से खाद बनाकर और फसलों की जैविक खरीद-बिक्री के लिए जीयूजेको और अमूल जैसे नेटवर्क का उपयोग करती हैं। जब गुजरात से ऐसी सहकारी समितियों का कार्यानुभव लेकर टीम लौटेगी तब जैविक खेती में गुजरात मॉडल का सफल प्रयोग सहकारी समितियों के सहयोग से किया जाएगा। जैविक खेती में नवाचार दिखाने वाले किसानों की ब्रांडिंग से लेकर मार्केटिंग की व्यवस्था की जाएगी। जैविक उत्पादों की खरीद और बेहतर मूल्य से लेकर बाजार उपलब्ध कराने की कार्य योजना बनायी जाएगी। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को जैविक खेती में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। ऐसे उत्पादों को पंजीकरण कराने से लेकर प्रमाणन की व्यवस्था भी होगी। गुजरात के भरूच जैसे क्षेत्रों में केले के तने से रेशा और वर्मी कम्पोस्ट जैसे जैविक उत्पाद बनाकर आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस तरह के कार्य उत्तर बिहार के केला उत्पादन वाले इलाकों में बखूबी संभव है। इसी तरह गुजरात में अमूल जैसी सफल सहकारी संस्थाओं की कार्यशैली ने वहां ग्रामीण आजीविका को नई ताकत दी है। यह कार्य बिहार में भी सहकारी समितियों से होगा। स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार के अवसर सहकारिता विभाग ग्रामीण इलाकों में इको टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय युवकों को रोजगार के अवसर देने पर भी काम कर रहा है। इसके लिए टैक्सी सर्विस स्कीम भी लॉन्च करने की योजना बन रही है। इससे स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार प्रदान करने की मदद मिलेगी। गुजरात में महिलाओं द्वारा संचालित दुग्ध समितियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यही प्रयोग बिहार के सभी गांवों में महिलाओं द्वारा दुग्ध समितियों के संचालन में होगा।हर गांव में दुग्ध सहकारी समिति गठित की जा रही है। प्रोटीन कंसन्ट्रेट पाउडर प्लांट जैसी नई इकाईयां लगायी जाएंगी। जाहिर है, इससे डेयरी क्षेत्र में रोजगार बढ़ेंगे। तकनीक और पारदर्शिता पर जोर डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाने से भी सहकारी समितियों को ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता लाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि सहकारी समितियों के सदस्य किसानों का भरोसा और मजबूत हो। सरकार का लक्ष्य है कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी की जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और नई योजनाओं को लागू करने पर फोकस किया जा रहा है।

अवैध कब्जों पर हाईकोर्ट की फटकार- ‘कमेटी नहीं, कार्रवाई बताइए’

रांची. झारखंड में जमीन पर अवैध कब्जा और फर्जी खरीद-बिक्री के मामलों पर अदालत का रुख और कड़ा हो गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से साफ शब्दों में कहा कि “कमेटी पर कमेटी बनाने का कोई औचित्य नहीं, जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखनी चाहिए।” अदालत ने मुख्य सचिव से स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी। सीएनटी लागू होने के बाद भी भूमाफिया पर कार्रवाई नहीं होने से कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। SOP बनी नहीं, समीक्षा किस बात की? चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की पीठ ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब अवैध कब्जे रोकने के लिए एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) अभी तक बनी ही नहीं, तो उसकी समीक्षा के लिए नई कमेटी बनाने का क्या मतलब है? पूर्व में गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने नए कानून की जरूरत से इनकार करते हुए कहा था कि राज्य में पहले से ही सीएनटी और एसपीटी एक्ट लागू हैं। जरूरत सख्त अमल और स्पष्ट एसओपी की है। बावजूद इसके सरकार की ओर से एक और कमेटी गठित करने की बात अदालत को रास नहीं आई। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की जमीन पर कब्जे की कोशिश मामला तब और गंभीर हो गया जब सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस इकबाल की जमीन पर कब्जे की कोशिश सामने आई। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सरकार से जवाब तलब किया। न्याय मित्र अतनु बनर्जी ने अदालत में पक्ष रखा और राज्य में दखल-दिहानी, फर्जी रजिस्ट्री व अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई। RIMS जमीन बिक्री कांड: ACB के नोटिस से मची खलबली इधर, रांची में बहुचर्चित RIMS जमीन बिक्री मामले में जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़गाईं अंचल के वर्तमान व तत्कालीन सीओ, अंचल कर्मियों, स्थानीय अमीन, राजस्व कर्मचारियों और कथित जमीन दलालों को नोटिस भेजा है। सभी से पूछताछ की तैयारी है। जांच में प्रारंभिक तौर पर सामने आया है कि वर्ष 1993 के बाद से अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जे और गलत रजिस्ट्री के प्रमाण मिले हैं। रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद दाखिल-खारिज और निबंधन किए जाने में लापरवाही व संभावित मिलीभगत की बात जांच में उभरकर आई है। गौरतलब है कि यह जांच हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी। क्या होगा आगे? मुख्य सचिव से कोर्ट में विस्तृत जवाब एसओपी पर स्पष्ट टाइमलाइन ACB की पूछताछ के बाद संभावित एफआईआर/चार्जशीट अवैध रजिस्ट्री रद्द करने और कब्जा हटाने की कार्रवाई झारखंड में जमीन से जुड़े घोटालों और अवैध कब्जों पर अब कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। अदालत के सख्त तेवर और एसीबी की सक्रियता से आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे संभव हैं।

तिब्बत को लेकर नितिन नवीन का गंभीर आरोप, नेहरू पर लगाए ऐतिहासिक चूक के आरोप

पटना भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेहरू-गांधी परिवार पर हमला बोला है। बुधवार सुबह उन्होंने उन्होंने इसे ‘समझौता मिशन’ की राजनीति बताते हुए आरोप लगाया कि परिवार के हितों को देशहित से ऊपर रखा गया। नवीन ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में बिना किसी प्रतिफल के तिब्बत में भारत के अधिकार चीन को सौंप दिए। उन्होंने कहा कि नेहरू ने कभी 45 करोड़ भारतीयों को अपनी ‘जिम्मेदारी’ बताया था, लेकिन उनके फैसलों ने राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाया। राजीव गांधी के कार्यकाल पर सवाल भाजपा अध्यक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय रक्षा सौदों का इस्तेमाल निजी हितों के लिए किया गया। उन्होंने दावा किया कि रक्षा सेवाओं के माध्यम से निजी बैंक खातों को भरने का काम हुआ। राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप नवीन ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को ‘विदेशी शक्तियों की कठपुतली’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस का चुनावी इतिहास कथित तौर पर सीआईए फंडिंग से प्रभावित रहा है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने 247 से अधिक विदेशी यात्राएं कीं, जिनमें कई बार सुरक्षा एजेंसियों को सूचना नहीं दी गई। उन्होंने विदेशी नेताओं, जैसे इल्हान ओमर और निवेशक जॉर्ज सोरोस से मुलाकातों पर भी सवाल उठाए। सोनिया गांधी को लेकर क्या कहा? नवीन ने आरोप लगाया कि 2004 से 2014 के बीच राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) के जरिये सोनिया गांधी ने ‘सुपर प्रधानमंत्री’ की तरह काम किया और समानांतर सरकार चलाई। उन्होंने दावा किया कि इसी दौरान राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी सरकार और जॉर्ज सोरोस के नेटवर्क से फंडिंग मिली। युवा और राष्ट्रहित पर जोर भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश का युवा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहता है। यदि उसे गुमराह करने की कोशिश की जाती है तो यह समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जनता अब तथाकथित ‘समझौता मिशन’ को समझ चुकी है और भविष्य में वही नेतृत्व स्वीकार करेगी जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे। उन्होंने कहा कि देश की जनता राष्ट्रहित के मुद्दों पर सजग है और आने वाले समय में वही नेतृत्व चुनेगी जो देश के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।